लोमड़ी और बंदर की मज़ेदार कहानी

लोमड़ी और बंदर की कहानी जो केले खाना चाहते थे

 एक जंगल में एक लोमड़ी और बंदर रहते थे दोनों मित्र थे उस जंगल से एक रास्ता गुजरता था जिस पर कई गांव वाले अपने पीठ पर सामान लादकर गुजरते हैं एक दिन बंदर ने देखा कि कुछ आदमी अपनी पीठ पर  केले के गुच्छे लादकर अपने गांव की तरफ जा रहे हैं वह तुरंत दौड़ा दौड़ा लोमड़ी के पास आया और उससे कहा कि सुनो लोमड़ी क्यों ना हम उन गांव वालों को डराएं और जब वह डर कर भाग जाए तो हम उनका सामान और केले उठा कर खा सकते हैं क्या तुम इस काम में मेरा साथ  दोगी?

  लोमड़ी ने कहा यह बात तो ठीक है लेकिन हम उन्हें   डराकर भगाएंगे किस तरह भगाएंगे? बंदर ने कहा यह तो बहुत आसान है हम दोनों रास्ते के आसपास छुप कर बैठ जाएंगे जैसे ही गांव वाले हमारे पास से गुजरेंगे मैं जोर से खु वा  खु वा  चिल्लाऊंगा और तुम जोर से हु वा हु वा  चिल्लाना हमारा इस तरह चिल्लाना सुनकर वह गांव वाले सोचेंगे कि कोई शेर या भालू आया है और वह दर कर अपना सारा सामान छोड़कर भाग जाएंगे

 लोमडी ने कहा चलो ठीक है लेकिन आधे केले में लूंगी और आधे तुम लेना, बोलो मंजूर है? बंदर ने कुछ देर सोचा और फिर मुस्कुराते हुए कहा ठीक है? लेकिन पहले चलो तो सही.

 लोमड़ी और बंदर दोनों रास्ते के दोनों ओर छुप कर बैठ गए जैसे ही गांव वाले उनके पास से गुजरे तो दोनों ने  खु वा हु वा  चिल्लाना शुरु कर दिया उनकी आवाज सुनकर गांव वाले डर गए और केले के गुच्छे वही छोड़कर भाग गए यह देखकर बंदर और लोमड़ी दोनों बहुत खुश हुए और दोनों उन केले के गुच्छे को खींचते हुए जंगल के भीतर ले आए

 तभी बंदर ने चालाकी की लोमड़ी से कहा कि अगर हम इतने सारे केले यहाँ रखेंगे तो कोई भी जानवर से चुरा लेगा या यह भी हो सकता है की वह गांव वाले वापस आ जाएं और इनहे  ले जाएँ तो क्यों ना हमे एसा करें इनको पेड़ के ऊपर छुपा दें और थोड़ा थोड़ा लेकर खाते रहे.

लोमड़ी  उसकी बातों में आ गई,  उसने बिना सोचे समझे उस पर भरोसा कर लिया.

 बंदर ने कहा तुम केले के गुच्छे उठा-उठाकर मुझे दो मैं उन्हें छुपा दूंगा लोमड़ी ने ऐसा ही किया जब सारे केले के गुच्छे पेड़ों पर पहुंच गए तो बंदर भी कूद कर पेड़ पर पहुंच गया और वहां बैठकर खाने लगा जब लोमड़ी ने आवाज दी मेरा हिस्सा भी नीचे फेंको तब बंदर ने केला खाया और छिलका नीचे फेंक दिया और हंसते हुए बोलने लगा यह लो तुम्हारा हिस्सा

लोमड़ी बेचारी ने झल्लाते हुए वहां से चली गई और वह कर भी क्या सकती थी क्योंकि उसने बिना सोचे समझे बंदर पर भरोसा कर लिया था और अपना सारा सामान उसे सौंप दिया था

 लोमड़ी और बंदर की इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कभी किसी पर भी बिना सोचे समझे भरोसा नहीं करना चाहिए.

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