150 Shayari on Wafa

Shayari on Wafa वफ़ा शायरी – वफ़ा पर शायरी

Shayari on wafa :- Here you can get the best collection of Hindi Shayari on Wafa, You can use it as your hindi whatsapp status or can send this Wafa Hindi Shayari to your facebook friends. These Hindi sher on Wafa is excellent in expressing your emotions and love. For other subject list of all Hindi Shayari is here Hindi Shayari .

वफ़ा पर हिंदी शायरी का सबसे अच्छा संग्रह यहाँ उपलब्ध है, आप इस वफ़ा हिंदी शायरी को अपने हिंदी वाहट्सएप्प स्टेटस के रूप में उपयोग कर सकतें है या आप इस बेहतरीन हिंदी शायरी को अपने दोस्तों को फेसबुक पर भी भेज सकतें हैं। वफ़ा लफ्ज़ पर हिंदी के यह शेर, आपकी भावनाओं को व्यक्त करने में आपकी मदद कर सकतें हैं। वफ़ा पर शायरी का यहाँ सबसे अच्छा कलेक्शन है.

सभी हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ हैं। Hindi Shayari

******

Loading...

Shayari on Wafa

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

हर बात में लज़्ज़त है अगर दिल में मज़ा हो

~अमीर मीनाई

 

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई

दिल न माने तो क्या करे कोई

~यगाना चंगेज़ी

 

ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती

ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें

~अहमद फ़राज़

 

क्यूँ पशेमाँ हो अगर वादा वफ़ा हो न सका

कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं

~इबरत मछलीशहरी

 

इस ज़िंदगी ने साथ किसी का नहीं दिया

किस बेवफ़ा से तुझ को तमन्ना वफ़ा की है

~मख़फ़ी बदायूनी

    

वफ़ा तुम से करेंगे, दुख सहेंगे, नाज़ उठाएँगे

जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है

~आरज़ू लखनवी

Shayari on Wafa

 

ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक

न लो इंतिक़ाम मुझ से मेरे साथ साथ चल के

~ख़ुमार बाराबंकवी

  

उन्हों ने क्या न किया और क्या नहीं करते

हज़ार कुछ हो मगर इक वफ़ा नहीं करते

~मुज़्तर_ख़ैराबादी

    

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद

जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

~मिर्ज़ा ग़ालिब

 

सज़ा ये दी है कि आँखों से छीन लीं नींदें

क़ुसूर ये था कि जीने के ख़्वाब देखे थे

किसी ने रेत के तूफ़ाँ में ला के छोड़ दिया

ये जुर्म था कि वफ़ा के सराब देखे थे ”

~आमिर उस्मानी

   

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~Shaheed Bhagat Singh

Shayari on Wafa

  

मुझे वफ़ा की तलब है मगर हर इक से नहीं

कोई मिले मगर उस यार-ए-बेवफ़ा की तरह

~अहमद फ़राज़

  

इश्क़ पाबंद-ए-वफ़ा है न कि पाबंद-ए-रुसूम

सर झुकाने को नहीं कहते हैं, सज्दा करना

 

वफ़ा का अहद था, दिल को सँभालने के लिए

वो हँस पड़े, मुझे मुश्किल में डालने के लिए

~एहसान_दानिश

 

ज़िंदगी तू ने तो सच है कि वफ़ा हम से न की

हम मगर ख़ुद तुझे ठुकराएँ ज़रूरी तो नहीं

~ज़ाहिदा ज़ैदी

 

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

हर बात में लज़्ज़त है, अगर दिल में मज़ा हो

~अमीर मीनाई

       

चुप-चाप सुलगता है दिया, तुम भी तो देखो

किस दर्द को कहते हैं वफ़ा, तुम भी तो देखो

~बशर नवाज़      

  

वो कहते हैं हर चोट पर मुस्कुराओ

वफ़ा याद रक्खो सितम भूल जाओ

-Kaleem Aajiz

 

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ

मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

~HasratMohani     

           

वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे

जिसे आता है दिल देना, उसे हर काम आता है

~आरज़ू_लखनवी

 

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

~JigarMoradabadi

 

वफ़ा का ज़िक्र छिड़ा था कि रात बीत गई

अभी तो रंग जमा था कि रात बीत गई

~तैमूर_हसन

 Shayari on Wafa

   

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

याद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

~अमीर मीनाई

 

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~LalChandFalak     

  

वफ़ा जिस से की बेवफ़ा हो गया

जिसे बुत बनाया ख़ुदा हो गया

    

हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे

वो यार बा-वफ़ा न सही बेवफ़ा तो है

~जमील_मलिक

  

ज़िंदगी तू ने तो सच है कि वफ़ा हम से न की

हम मगर ख़ुद तुझे ठुकराएँ, ज़रूरी तो नहीं

~ज़ाहिदा_ज़ैदी

 

यक़ीं मुझे भी है वो आएँगे ज़रूर मगर

वफ़ा करेगी कहाँ तक कि ज़िंदगी ही तो है

~फ़ारूक़_बाँसपारी

Shayari on Wafa

बला से जाँ का जियाँ हो इस एतिमाद की खैर,

वफ़ा करे न करे फिर भी यार अपना है !! /

    

दिल को मैं और मुझे दिल महव-ए-वफ़ा रखता है,

किस क़दर ज़ौक़-ए-गिरफ़्तारी-ए-हम है हमको !! -ग़ालिब

  

मुतमइन हैं बहुत ही दुनिया से

फिर भी कितने उदास हैं कुछ लोग

~अज़ीज़_बानो_************_वफ़ा

    

मोहब्बत अदावत वफ़ा बे-रुख़ी

किराए के घर थे बदलते रहे

~बशीर_बद्र

    

 क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई

ख़ुद बुरे हों तो क्या करे कोई

~ज़हीर_देहलवी

 

वफ़ा का ज़िक्र छिड़ा था कि रात बीत गई

अभी तो रंग जमा था कि रात बीत गई

~तैमूर_हसन

  

उम्र भर कुछ ख़्वाब दिल पर दस्तकें देते रहे

हम कि मजबूर-ए-वफ़ा थे आहटें सुनते रहे

~बक़ा_बलूच    

 

शहरे वफा में धूप का साथी नहीं कोई

सूरज सरों पर आया तो साये भी घट गए

  

चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो

किस दर्द को कहते हैं वफ़ा तुम भी तो देखो

~बशर_नवाज़

    

मैं तो इस सादगी-ए-हुस्न पे सदक़े,

न जफ़ा आती है जिसको न वफ़ा आती है !! /

           

‏हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद

जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

~मिर्ज़ा ग़ालिब

    

जब तेरा दर्द मेरे साथ वफ़ा करता है,

एक समंदर मेरी आँखों से बहा करता है !! /

  

दौलत से वफ़ा ना-मुम्किन है दौलत पे ज़ियादा नाज़ न कर,

सब ठाट पड़ा रह जाएगा जब लाद चलेगा बंजारा !! -पॉपुलर मेरठी

Shayari on Wafa

  

दुनिया से वफ़ा कर के सिला ढूँढ रहे हैं

हम लोग भी नादाँ हैं ये क्या ढूँढ रहे हैं

~सुदर्शन_फ़ाकिर

    

सोचा तुझे देखा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे

मेरी वफ़ा मेरी ख़ता, तेरी ख़ता कुछ भी नहीं

~बशीर_बद्र

    

चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ

राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए

 

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~लाल_चन्द_फ़लक

 

मैं ने जिन के लिए राहों में बिछाया था लहू

हम से कहते हैं वही अहद-ए-वफ़ा याद नहीं

~SagharSiddiqui

 

तुझ से वफ़ा न की तो किसी से वफ़ा न की

किस तरह इंतिक़ाम लिया अपने आप से

~HiatAliShayar     

 

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

~जिगर_मुरादाबादी

 

मैं ने दिल दे कर उसे की थी वफ़ा की इब्तिदा

उस ने धोका दे के ये क़िस्सा मुकम्मल कर दिया

~RahatIndori

 

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

याद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

~अमीर_मीनाई

  

वफ़ा की कौन सी मंज़िल पे उस ने छोड़ा था

कि वो तो याद हमें भूल कर भी आता है

~मोहसिन_नक़वी 

    

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था

~DaghDehlvi

    

उदास हो किसी की बेवफ़ाई पर

वफ़ा कहीं तो कर गए हो ख़ुश रहो

~फ़ाज़िल_जमीली

    

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~Lal Chand Falak

            

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

~JigarMoradabadi

 

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ

मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

~हसरत_मोहानी

 

क्या मैं तिरे इस लुत्फ़ के क़ाबिल भी नहीं हूँ

ऐ जान-ए-वफ़ा दिल ही दुखाने के लिए आ

~रम्ज़_आफ़ाक़ी

Shayari on Wafa

  

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

याद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

~AmeerMinai

  

अब के ठहराई है हम ने भी यही शर्त-ए-वफ़ा

जो भी इस शहर में आए वो सितम-गर हो जाए

~महताब_हैदर_नक़वी

  

ये वफ़ा की सख़्त राहें, ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक

न लो इंतिक़ाम मुझसे मेरे साथ-साथ चल के

~Khumaar

  

आप छेड़ें न वफ़ा का क़िस्सा

बात में बात निकल आती है

~DardAsadi

 

चलो हम भी वफ़ा से बाज़ आए

मोहब्बत कोई मजबूरी नहीं है

~मज़हर_इमाम

    

मोहब्बत, अदावत, वफ़ा, बे-रुख़ी

किराए के घर थे बदलते रहे

~बशीर_बद्र

Shayari on Wafa

   

फिर इस दुनिया से उम्मीद-ए-वफ़ा है

तुझे ऐ ज़िंदगी क्या हो गया है

~नरेश_कुमार_शाद

  

बेवफ़ाई पे तेरी जी है फ़िदा

क़हर होता जो बा-वफ़ा होता

~मीर

 

वफ़ा कैसी कहाँ का इश्क़ जब सर फोड़ना ठहरा

तो फिर ऐ संग-दिल तेरा ही संग-ए-आस्ताँ क्यूँ हो ~Ghalib

 

ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक

न लो इंतिक़ाम मुझ से मेरे साथ साथ चल के

~ख़ुमार_बाराबंकवी

  

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद

जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

~ग़ालिब

    

उस के यूँ तर्क-ए-मोहब्बत का सबब होगा कोई

जी नहीं ये मानता वो बे-वफ़ा पहले से था ~परवीन_शाकिर

  

हज़ार राहें मुड़ के देखी

कहीं से कोई सदा ना आई

बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने

हमारी थोड़ी सी बेवफ़ाई

-गुलज़ार

 

दुनिया ने किस का राह-ए-वफ़ा में दिया है साथ

तुम भी चले-चलो यूँही जब तक चली चले

~Zauq

 

शामिल है मेरा ख़ून-ए-जिगर तेरी हिना में

ये कम हो तो अब ख़ून-ए-वफ़ा साथ लिए जा ~Sahir

 

ये भी तो सज़ा है कि गिरफ़्तार-ए-वफ़ा हूँ

क्यूँ लोग मोहब्बत की सज़ा ढूँढ रहे हैं

-सुदर्शन फ़ाकिर

 

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

तुम्हे भी याद है कुछ ये कलाम किसका था

-दाग दहेलवी

           

हम बेवफा हरगीज न थे

पर हम वफ़ा कर न सके

हमको मिली उसकी सजा

हम जो खता कर ना सके..

-आनंद बक्षी

  

बिछाये शोख़ के सजदे वफ़ा की राहों में

खड़े हैं दीद की हसरत लिए निगाहों में

कबूल दिल की इबादत हो और तू आये..!

-साहीर

 

मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ’नी

ये तेरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को ~QatilShifai

  

इस हुस्र-ए-इत्तिफ़ाक पे लुटकर भी शाद हु

तेरी रजा जो थी वो तकाज़ा वफ़ा का था..!

-अहमद नदीम कासमी

  

हाँ जो जफ़ा भी आप ने की,कायदे से की,

हाँ हम ही काराबंद-ए-उसूल-ए-वफ़ा ना थे।

-फ़ैज अहमद फ़ैज

  

जो भूले से बचपन में पकड़ी थी तितली

सुरूर-ए-वफ़ा में भी उतरा वही रंग ~इन्दिरावर्मा

~shair ~

  

ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक

न लो इंतिक़ाम मुझ से मेरे साथ साथ चल के ~KhuBarabankvi

 

वफ़ा के नाम पे तुम क्यूँ सँभल के बैठ गए

तुम्हारी बात नहीं बात है ज़माने की

          

‏Shayari on Wafa

  

ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं

वफ़ा-दारी का दावा क्यूँ करें हम ~JaunEliya

  

मुझे मालूम है अहल-ए-वफ़ा पर क्या गुज़रती है

समझ कर सोच कर तुझ से मोहब्बत कर रहा हूँ मैं ~AhmadMushtaq

  

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझको नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद ~Jigar

 

यूँ तो हैं बे-शुमार वफ़ा की निशानियाँ

लेकिन हर एक शय से निराले तुम्हारे ख़त ~WasiShah

  

वफ़ा तुझ से ऐ बे-वफ़ा चाहता हूँ

मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ ~Hasart

~shair

  

ज़िद की है और बात मगर ख़ू बुरी नहीं

भूले से उस ने सैकड़ों वाद़े वफ़ा किए ~Ghalib

   

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था ~Daag

 

उन्हें रंज अब क्यूँ हुआ हम तो ख़ुश हैं

कि मर कर शहीद-ए-वफ़ा हो गए हम ~hasrat

 

कुछ तो ले काम तग़ाफ़ुल से वफ़ा के पैकर

ये तिरा प्यार कहीं मार न डाले मुझ को ~wafa

  

नाम ले जब भी वफ़ा का कोई

जाने क्यूँ आँख मिरी भर आए @wafa

  

कब तक निभाइए बुत-ए-ना-आश्ना के साथ

कीजे वफ़ा कहाँ तलक उस बेवफ़ा के साथ ~wafa

  

उड़ गई यूँ वफ़ा ज़माने से

कभी गोया किसी में थी ही नहीं ~wafa

  

तू जफ़ाओं से जो बदनाम किए जाता है

याद आएगी तुझे मेरी वफ़ा मेरे बाद

 

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

  

अब तुम आए हो तो मैं कौन सी शै नज़्र करो

कि मिरे पास ब-जुज़ मेहर ओ वफ़ा कुछ भी नहीं

 

दोनों ही बराबर हैं रह-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा में

जब तुम ने वफ़ा की है तो हम ने भी वफ़ा की ~

  

पाँव छलनी तो वफ़ा घाइल थी

जाने उस मोड़ पे क्या याद आया

  

करते रहेंगे तुम से मोहब्बत भी वफ़ा भी

गो तुम को मोहब्बत न वफ़ा याद रहेगी

  

कोई पुरसाँ नहीं पीर-ए-मुग़ाँ का

फ़क़त मेरी वफ़ा है और मैं हूँ

‏   

की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं

होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं

    

ये अदा-ए-बे-नियाज़ी तुझे बे-वफ़ा मुबारक

मगर ऐसी बे-रुख़ी क्या के सलाम तक न पहुँचे

Shakeel Badayuni 

  

किसी बे-वफ़ा की ख़ातिर ये जुनूँ  ‘फ़राज़’ कब तक

जो तुम्हें भुला चुका है उसे तुम भी भूल जाओ

ahmad ‘faraz’  

 

————–

Hinglish Font me Shayari on Wafa

 

wafa par hindi shaayari ka sabase achchha sangrah yahaan upalabdh hai, aap is wafa hindi shaayari ko apane hindi vaahatsepp stetas ke roop mein upayog kar sakaten hai ya aap is behatarin hindi shaayari ko apane doston ko phesabuk par bhi bhej sakaten hain. wafa laphz par hindi ke yah sher, aapaki bhaavanaon ko vyakt karane mein aapaki madad kar sakaten hain. wafa par shaayari ka yahaan sabase achchha kalekshan hai.

sabhi hindi shaayari ki list yahaan hain. hindi shayari

******

 

shayari on wafa

 

ulfat mein baraabar hai wafa ho ki jafa ho

har baat mein lazzat hai agar dil mein maza ho

~amir minai

 

kyoon kisi se wafa kare koi

dil na maane to kya kare koi

~yagaana changezi

 

dhoondh ujade hue logon mein wafa ke moti

ye khazaane tujhe mumakin hai kharaabon mein milen

~ahamad faraaz

 

kyoon pashemaan ho agar vaada wafa ho na saka

kahin vaade bhi nibhaane ke lie hote hain

~ibarat machhalishahari

 

is zindagi ne saath kisi ka nahin diya

kis bewafa se tujh ko tamanna wafa ki hai

~makhafi badaayooni

    

wafa tum se karenge, dukh sahenge, naaz uthaenge

jise aata hai dil dena use har kaam aata hai

~aarazoo lakhanavi

 

shayari on wafa

 

ye wafa ki sakht raahen ye tumhaare paanv naazuk

na lo intiqaam mujh se mere saath saath chal ke

~khumaar baaraabankavi

  

unhon ne kya na kiya aur kya nahin karate

hazaar kuchh ho magar ik wafa nahin karate

~muztar_khairaabaadi

    

ham ko un se wafa ki hai ummid

jo nahin jaanate wafa kya hai

~mirza gaalib

 

 

saza ye di hai ki aankhon se chhin lin ninden

qusoor ye tha ki jine ke khvaab dekhe the

kisi ne ret ke toofaan mein la ke chhod diya

ye jurm tha ki wafa ke saraab dekhe the ”

~aamir usmaani

 

 

dil se nikalegi na mar kar bhi vatan ki ulfat

meri mitti se bhi khushaboo-e-wafa aaegi

~shahaiaid bhagat singh

shayari on wafa

 

mujhe wafa ki talab hai magar har ik se nahin

koi mile magar us yaar-e-bewafa ki tarah

~ahamad faraaz

  

ishq paaband-e-wafa hai na ki paaband-e-rusoom

sar jhukaane ko nahin kahate hain, sajda karana

 

wafa ka ahad tha, dil ko sanbhaalane ke lie

vo hans pade, mujhe mushkil mein daalane ke lie

~ehasaan_daanish

    

 

zindagi too ne to sach hai ki wafa ham se na ki

ham magar khud tujhe thukaraen zaroori to nahin

~zaahida zaidi

 

ulfat mein baraabar hai wafa ho ki jafa ho

har baat mein lazzat hai, agar dil mein maza ho

~amir minai

 

chup-chaap sulagata hai diya, tum bhi to dekho

kis dard ko kahate hain wafa, tum bhi to dekho

~bashar navaaz     

  

vo kahate hain har chot par muskurao

wafa yaad rakkho sitam bhool jao

-kalaiaim aajiz

 

wafa tujh se ai bewafa chaahata hoon

meri saadagi dekh kya chaahata hoon

~hasratmohani     

wafa tum se karenge dukh sahenge naaz uthaenge

jise aata hai dil dena, use har kaam aata hai

~aarazoo_lakhanavi

 

duniya ke sitam yaad na apani hi wafa yaad

ab mujh ko nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yaad

~jigarmoradabadi

 

wafa ka zikr chhida tha ki raat bit gai

abhi to rang jama tha ki raat bit gai

~taimoor_hasan

 shayari on wafa

‏  

kaun uthaega tumhaari ye jafa mere baad

yaad aaegi bahut meri wafa mere baad

~amir minai

 

dil se nikalegi na mar kar bhi vatan ki ulfat

meri mitti se bhi khushaboo-e-wafa aaegi

~lalchhandfalak     

 

wafa jis se ki bewafa ho gaya

jise but banaaya khuda ho gaya

    

ham se koi taalluq-e-khaatir to hai use

vo yaar ba-wafa na sahi bewafa to hai

~jamil_malik

 

zindagi too ne to sach hai ki wafa ham se na ki

ham magar khud tujhe thukaraen, zaroori to nahin

~zaahida_zaidi

 

yaqin mujhe bhi hai vo aaenge zaroor magar

wafa karegi kahaan tak ki zindagi hi to hai

~faarooq_baansapaari

shayari on wafa

bala se jaan ka jiyaan ho is etimaad ki khair,

wafa kare na kare phir bhi yaar apana hai !! /

    

dil ko main aur mujhe dil mahav-e-wafa rakhata hai,

kis qadar zauq-e-giraftaari-e-ham hai hamako !! -gaalib

  

mohabbat adaavat wafa be-rukhi

kirae ke ghar the badalate rahe

~bashir_badr

    

 kyoon kisi se wafa kare koi

khud bure hon to kya kare koi

~zahir_dehalavi

 

wafa ka zikr chhida tha ki raat bit gai

abhi to rang jama tha ki raat bit gai

~taimoor_hasan

  

umr bhar kuchh khvaab dil par dastaken dete rahe

ham ki majaboor-e-wafa the aahaten sunate rahe

~baqa_balooch

 

shahare vapha mein dhoop ka saathi nahin koi

sooraj saron par aaya to saaye bhi ghat gae

  

chup-chaap sulagata hai diya tum bhi to dekho

kis dard ko kahate hain wafa tum bhi to dekho

~bashar_navaaz

    

main to is saadagi-e-husn pe sadaqe,

na jafa aati hai jisako na wafa aati hai !! /

           

‏ham ko un se wafa ki hai ummid

jo nahin jaanate wafa kya hai

~mirza gaalib

 

jab tera dard mere saath wafa karata hai,

ek samandar meri aankhon se baha karata hai !! /

  

daulat se wafa na-mumkin hai daulat pe ziyaada naaz na kar,

sab thaat pada rah jaega jab laad chalega banjaara !! -popular merathi

 

shayari on wafa

  

duniya se wafa kar ke sila dhoondh rahe hain

ham log bhi naadaan hain ye kya dhoondh rahe hain

~sudarshan_faakir

    

    

socha tujhe dekha tujhe chaaha tujhe pooja tujhe

meri wafa meri khata, teri khata kuchh bhi nahin

~bashir_badr

    

chaaron taraf bikhar gain saanson ki khushabuen

raah-e-wafa mein aap jahaan bhi jidhar gae

 

dil se nikalegi na mar kar bhi vatan ki ulfat

meri mitti se bhi khushaboo-e-wafa aaegi

~laal_chand_falak

 

main ne jin ke lie raahon mein bichhaaya tha lahoo

ham se kahate hain vahi ahad-e-wafa yaad nahin

~sagharsiddiqui

 

tujh se wafa na ki to kisi se wafa na ki

kis tarah intiqaam liya apane aap se

~hi

**************

duniya ke sitam yaad na apani hi wafa yaad

ab mujh ko nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yaad

~jigar_muraadaabaadi

 

main ne dil de kar use ki thi wafa ki ibtida

us ne dhoka de ke ye qissa mukammal kar diya

~rahatindori

 

kaun uthaega tumhaari ye jafa mere baad

yaad aaegi bahut meri wafa mere baad

~amir_minai

 

wafa ki kaun si manzil pe us ne chhoda tha

ki vo to yaad hamen bhool kar bhi aata hai

~mohasin_naqavi 

  

wafa karenge nibaahenge baat maanenge

tumhen bhi yaad hai kuchh ye kalaam kis ka tha

~daghdaihlvi

    

udaas ho kisi ki bewafai par

wafa kahin to kar gae ho khush raho

~faazil_jamili

    

dil se nikalegi na mar kar bhi vatan ki ulfat

meri mitti se bhi khushaboo-e-wafa aaegi

~lal chhand falak

             

duniya ke sitam yaad na apani hi wafa yaad

ab mujh ko nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yaad

~jigarmoradabadi

    

 

wafa tujh se ai bewafa chaahata hoon

miri saadagi dekh kya chaahata hoon

~hasarat_mohaani

 

kya main tire is lutf ke qaabil bhi nahin hoon

ai jaan-e-wafa dil hi dukhaane ke lie aa

~ramz_aafaaqi

shayari on waf

  

kaun uthaega tumhaari ye jafa mere baad

yaad aaegi bahut meri wafa mere baad

~amaiairminai

  

ab ke thaharai hai ham ne bhi yahi shart-e-wafa

jo bhi is shahar mein aae vo sitam-gar ho jae

~mahataab_haidar_naqavi

  

ye wafa ki sakht raahen, ye tumhaare paanv naazuk

na lo intiqaam mujhase mere saath-saath chal ke

~khumaar

  

aap chheden na wafa ka qissa

baat mein baat nikal aati hai

~dardasadi

 

chalo ham bhi wafa se baaz aae

mohabbat koi majaboori nahin hai

~mazahar_imaam

    

mohabbat, adaavat, wafa, be-rukhi

kirae ke ghar the badalate rahe

~bashir_badr

shayari on waf

  

phir is duniya se ummid-e-wafa hai

tujhe ai zindagi kya ho gaya hai

~naresh_kumaar_shaad

  

bewafai pe teri ji hai fida

qahar hota jo ba-wafa hota

~mir

 

wafa kaisi kahaan ka ishq jab sar phodana thahara

to phir ai sang-dil tera hi sang-e-aastaan kyoon ho ~ghalib

 

ye wafa ki sakht raahen ye tumhaare paanv naazuk

na lo intiqaam mujh se mere saath saath chal ke

~khumaar_baaraabankavi

        

ham ko un se wafa ki hai ummid

jo nahin jaanate wafa kya hai

~gaalib

    

us ke yoon tark-e-mohabbat ka sabab hoga koi

ji nahin ye maanata vo be-wafa pahale se tha ~paravin_shaakir

           

  

hazaar raahen mud ke dekhi

kahin se koi sada na aai

badi wafa se nibhai tumane

hamaari thodi si bewafai

-gulazaar

    

 

duniya ne kis ka raah-e-wafa mein diya hai saath

tum bhi chale-chalo yoonhi jab tak chali chale

~zauq

 

shaamil hai mera khoon-e-jigar teri hina mein

ye kam ho to ab khoon-e-wafa saath lie ja ~sahir

 

ye bhi to saza hai ki giraftaar-e-wafa hoon

kyoon log mohabbat ki saza dhoondh rahe hain

-sudarshan faakir

          

wafa karenge nibaahenge baat maanenge

tumhe bhi yaad hai kuchh ye kalaam kisaka tha

-daag dahelavi

           

ham bevapha haragij na the

par ham wafa kar na sake

hamako mili usaki saja

ham jo khata kar na sake..

-aanand bakshi

  

bichhaaye shokh ke sajade wafa ki raahon mein

khade hain did ki hasarat lie nigaahon mein

kabool dil ki ibaadat ho aur too aaye..!

-saahir

 

mujh se too poochhane aaya hai wafa ke mani

ye teri saada-dili maar na daale mujh ko ~qatilshifai

  

is husr-e-ittifaak pe lutakar bhi shaad hu

teri raja jo thi vo takaaza wafa ka tha..!

-ahamad nadim kaasami

  

haan jo jafa bhi aap ne ki,kaayade se ki,

haan ham hi kaaraaband-e-usool-e-wafa na the.

-faij ahamad faij

  

jo bhoole se bachapan mein pakadi thi titali

suroor-e-wafa mein bhi utara vahi rang ~indiraavarma

~shair ~

  

ye wafa ki sakht raahen ye tumhaare paanv naazuk

na lo intiqaam mujh se mere saath saath chal ke ~khubarabankvi

 

wafa ke naam pe tum kyoon sanbhal ke baith gae

tumhaari baat nahin baat hai zamaane ki

          

‏shayari on waf

  

ye kaafi hai ki ham dushman nahin hain

wafa-daari ka daava kyoon karen ham ~jaunailiy

  

mujhe maaloom hai ahal-e-wafa par kya guzarati hai

samajh kar soch kar tujh se mohabbat kar raha hoon main ~ahmadmushtaq

  

duniya ke sitam yaad na apani hi wafa yaad

ab mujhako nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yaad ~jigar

 

yoon to hain be-shumaar wafa ki nishaaniyaan

lekin har ek shay se niraale tumhaare khat ~wasishah

  

wafa tujh se ai be-wafa chaahata hoon

meri saadagi dekh kya chaahata hoon ~hasart

~shair

  

zid ki hai aur baat magar khoo buri nahin

bhoole se us ne saikadon vaade wafa kie ~ghalib

  

wafa karenge nibaahenge baat maanenge

tumhen bhi yaad hai kuchh ye kalaam kis ka tha ~daag

 

 

unhen ranj ab kyoon hua ham to khush hain

ki mar kar shahid-e-wafa ho gae ham ~hasrat

 

  

kuchh to le kaam tagaaful se wafa ke paikar

ye tira pyaar kahin maar na daale mujh ko ~waf

  

naam le jab bhi wafa ka koi

jaane kyoon aankh miri bhar aae @waf

  

kab tak nibhaie but-e-na-aashna ke saath

kije wafa kahaan talak us bewafa ke saath ~waf

  

ud gai yoon wafa zamaane se

kabhi goya kisi mein thi hi nahin ~waf

  

too jafaon se jo badanaam kie jaata hai

yaad aaegi tujhe meri wafa mere baad

  

duniya ke sitam yaad na apani hi wafa yaad

ab mujh ko nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yaad

  

ab tum aae ho to main kaun si shai nazr karo

ki mire paas ba-juz mehar o wafa kuchh bhi nahin

 

donon hi baraabar hain rah-e-ishq-o-wafa mein

jab tum ne wafa ki hai to ham ne bhi wafa ki ~

  

paanv chhalani to wafa ghail thi

jaane us mod pe kya yaad aaya

  

karate rahenge tum se mohabbat bhi wafa bhi

go tum ko mohabbat na wafa yaad rahegi

  

koi purasaan nahin pir-e-mugaan ka

faqat meri wafa hai aur main hoon

           

‏  

ki wafa ham se to gair is ko jafa kahate hain

hoti aai hai ki achchhon ko bura kahate hain

    

ye ada-e-be-niyaazi tujhe be-wafa mubaarak

magar aisi be-rukhi kya ke salaam tak na pahunche

shakaiail badayuni 

  

kisi be-wafa ki khaatir ye junoon  faraaz kab tak

jo tumhen bhula chuka hai use tum bhi bhool jao

ahmad faraz

 

*****

Search Tags

Wafa Shayari, Wafa Hindi Shayari, Wafa Shayari, Wafa whatsapp status, Wafa hindi Status, Hindi Shayari on Wafa, Wafa whatsapp status in hindi,

वफ़ा हिंदी शायरी, हिंदी शायरी, वफ़ा, वफ़ा स्टेटस, वफ़ा व्हाट्स अप स्टेटस, वफ़ा पर शायरी, वफ़ा शायरी, वफ़ा पर शेर, वफ़ा की शायरी,