150 Shayari on Wafa

Shayari on Wafa वफ़ा शायरी – वफ़ा पर शायरी

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Shayari on Wafa

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

हर बात में लज़्ज़त है अगर दिल में मज़ा हो

~अमीर मीनाई

 

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई

दिल न माने तो क्या करे कोई

~यगाना चंगेज़ी

 

ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती

ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें

~अहमद फ़राज़

 

क्यूँ पशेमाँ हो अगर वादा वफ़ा हो न सका

कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं

~इबरत मछलीशहरी

 

इस ज़िंदगी ने साथ किसी का नहीं दिया

किस बेवफ़ा से तुझ को तमन्ना वफ़ा की है

~मख़फ़ी बदायूनी

    

वफ़ा तुम से करेंगे, दुख सहेंगे, नाज़ उठाएँगे

जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है

~आरज़ू लखनवी

Shayari on Wafa

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ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक

न लो इंतिक़ाम मुझ से मेरे साथ साथ चल के

~ख़ुमार बाराबंकवी

  

उन्हों ने क्या न किया और क्या नहीं करते

हज़ार कुछ हो मगर इक वफ़ा नहीं करते

~मुज़्तर_ख़ैराबादी

    

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद

जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

~मिर्ज़ा ग़ालिब

 

सज़ा ये दी है कि आँखों से छीन लीं नींदें

क़ुसूर ये था कि जीने के ख़्वाब देखे थे

किसी ने रेत के तूफ़ाँ में ला के छोड़ दिया

ये जुर्म था कि वफ़ा के सराब देखे थे ”

~आमिर उस्मानी

   

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~Shaheed Bhagat Singh

Shayari on Wafa

  

मुझे वफ़ा की तलब है मगर हर इक से नहीं

कोई मिले मगर उस यार-ए-बेवफ़ा की तरह

~अहमद फ़राज़

  

इश्क़ पाबंद-ए-वफ़ा है न कि पाबंद-ए-रुसूम

सर झुकाने को नहीं कहते हैं, सज्दा करना

 

वफ़ा का अहद था, दिल को सँभालने के लिए

वो हँस पड़े, मुझे मुश्किल में डालने के लिए

~एहसान_दानिश

 

ज़िंदगी तू ने तो सच है कि वफ़ा हम से न की

हम मगर ख़ुद तुझे ठुकराएँ ज़रूरी तो नहीं

~ज़ाहिदा ज़ैदी

 

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

हर बात में लज़्ज़त है, अगर दिल में मज़ा हो

~अमीर मीनाई

       

चुप-चाप सुलगता है दिया, तुम भी तो देखो

किस दर्द को कहते हैं वफ़ा, तुम भी तो देखो

~बशर नवाज़      

  

वो कहते हैं हर चोट पर मुस्कुराओ

वफ़ा याद रक्खो सितम भूल जाओ

-Kaleem Aajiz

 

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ

मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

~HasratMohani     

           

वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे

जिसे आता है दिल देना, उसे हर काम आता है

~आरज़ू_लखनवी

 

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

~JigarMoradabadi

 

वफ़ा का ज़िक्र छिड़ा था कि रात बीत गई

अभी तो रंग जमा था कि रात बीत गई

~तैमूर_हसन

 Shayari on Wafa

   

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

याद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

~अमीर मीनाई

 

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~LalChandFalak     

  

वफ़ा जिस से की बेवफ़ा हो गया

जिसे बुत बनाया ख़ुदा हो गया

    

हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे

वो यार बा-वफ़ा न सही बेवफ़ा तो है

~जमील_मलिक

  

ज़िंदगी तू ने तो सच है कि वफ़ा हम से न की

हम मगर ख़ुद तुझे ठुकराएँ, ज़रूरी तो नहीं

~ज़ाहिदा_ज़ैदी

 

यक़ीं मुझे भी है वो आएँगे ज़रूर मगर

वफ़ा करेगी कहाँ तक कि ज़िंदगी ही तो है

~फ़ारूक़_बाँसपारी

Shayari on Wafa

बला से जाँ का जियाँ हो इस एतिमाद की खैर,

वफ़ा करे न करे फिर भी यार अपना है !! /

    

दिल को मैं और मुझे दिल महव-ए-वफ़ा रखता है,

किस क़दर ज़ौक़-ए-गिरफ़्तारी-ए-हम है हमको !! -ग़ालिब

  

मुतमइन हैं बहुत ही दुनिया से

फिर भी कितने उदास हैं कुछ लोग

~अज़ीज़_बानो_************_वफ़ा

    

मोहब्बत अदावत वफ़ा बे-रुख़ी

किराए के घर थे बदलते रहे

~बशीर_बद्र

    

 क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई

ख़ुद बुरे हों तो क्या करे कोई

~ज़हीर_देहलवी

 

वफ़ा का ज़िक्र छिड़ा था कि रात बीत गई

अभी तो रंग जमा था कि रात बीत गई

~तैमूर_हसन

  

उम्र भर कुछ ख़्वाब दिल पर दस्तकें देते रहे

हम कि मजबूर-ए-वफ़ा थे आहटें सुनते रहे

~बक़ा_बलूच    

 

शहरे वफा में धूप का साथी नहीं कोई

सूरज सरों पर आया तो साये भी घट गए

  

चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो

किस दर्द को कहते हैं वफ़ा तुम भी तो देखो

~बशर_नवाज़

    

मैं तो इस सादगी-ए-हुस्न पे सदक़े,

न जफ़ा आती है जिसको न वफ़ा आती है !! /

           

‏हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद

जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

~मिर्ज़ा ग़ालिब

    

जब तेरा दर्द मेरे साथ वफ़ा करता है,

एक समंदर मेरी आँखों से बहा करता है !! /

  

दौलत से वफ़ा ना-मुम्किन है दौलत पे ज़ियादा नाज़ न कर,

सब ठाट पड़ा रह जाएगा जब लाद चलेगा बंजारा !! -पॉपुलर मेरठी

Shayari on Wafa

  

दुनिया से वफ़ा कर के सिला ढूँढ रहे हैं

हम लोग भी नादाँ हैं ये क्या ढूँढ रहे हैं

~सुदर्शन_फ़ाकिर

    

सोचा तुझे देखा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे

मेरी वफ़ा मेरी ख़ता, तेरी ख़ता कुछ भी नहीं

~बशीर_बद्र

    

चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ

राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए

 

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~लाल_चन्द_फ़लक

 

मैं ने जिन के लिए राहों में बिछाया था लहू

हम से कहते हैं वही अहद-ए-वफ़ा याद नहीं

~SagharSiddiqui

 

तुझ से वफ़ा न की तो किसी से वफ़ा न की

किस तरह इंतिक़ाम लिया अपने आप से

~HiatAliShayar     

 

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

~जिगर_मुरादाबादी

 

मैं ने दिल दे कर उसे की थी वफ़ा की इब्तिदा

उस ने धोका दे के ये क़िस्सा मुकम्मल कर दिया

~RahatIndori

 

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

याद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

~अमीर_मीनाई

  

वफ़ा की कौन सी मंज़िल पे उस ने छोड़ा था

कि वो तो याद हमें भूल कर भी आता है

~मोहसिन_नक़वी 

    

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था

~DaghDehlvi

    

उदास हो किसी की बेवफ़ाई पर

वफ़ा कहीं तो कर गए हो ख़ुश रहो

~फ़ाज़िल_जमीली

    

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

~Lal Chand Falak

            

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

~JigarMoradabadi

 

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ

मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

~हसरत_मोहानी

 

क्या मैं तिरे इस लुत्फ़ के क़ाबिल भी नहीं हूँ

ऐ जान-ए-वफ़ा दिल ही दुखाने के लिए आ

~रम्ज़_आफ़ाक़ी

Shayari on Wafa

  

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

याद आएगी बहुत मेरी वफ़ा मेरे बाद

~AmeerMinai

  

अब के ठहराई है हम ने भी यही शर्त-ए-वफ़ा

जो भी इस शहर में आए वो सितम-गर हो जाए

~महताब_हैदर_नक़वी

  

ये वफ़ा की सख़्त राहें, ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक

न लो इंतिक़ाम मुझसे मेरे साथ-साथ चल के

~Khumaar

  

आप छेड़ें न वफ़ा का क़िस्सा

बात में बात निकल आती है

~DardAsadi

 

चलो हम भी वफ़ा से बाज़ आए

मोहब्बत कोई मजबूरी नहीं है

~मज़हर_इमाम

    

मोहब्बत, अदावत, वफ़ा, बे-रुख़ी

किराए के घर थे बदलते रहे

~बशीर_बद्र

Shayari on Wafa

   

फिर इस दुनिया से उम्मीद-ए-वफ़ा है

तुझे ऐ ज़िंदगी क्या हो गया है

~नरेश_कुमार_शाद

  

बेवफ़ाई पे तेरी जी है फ़िदा

क़हर होता जो बा-वफ़ा होता

~मीर

 

वफ़ा कैसी कहाँ का इश्क़ जब सर फोड़ना ठहरा

तो फिर ऐ संग-दिल तेरा ही संग-ए-आस्ताँ क्यूँ हो ~Ghalib

 

ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक

न लो इंतिक़ाम मुझ से मेरे साथ साथ चल के

~ख़ुमार_बाराबंकवी

  

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद

जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

~ग़ालिब

    

उस के यूँ तर्क-ए-मोहब्बत का सबब होगा कोई

जी नहीं ये मानता वो बे-वफ़ा पहले से था ~परवीन_शाकिर

  

हज़ार राहें मुड़ के देखी

कहीं से कोई सदा ना आई

बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने

हमारी थोड़ी सी बेवफ़ाई

-गुलज़ार

 

दुनिया ने किस का राह-ए-वफ़ा में दिया है साथ

तुम भी चले-चलो यूँही जब तक चली चले

~Zauq

 

शामिल है मेरा ख़ून-ए-जिगर तेरी हिना में

ये कम हो तो अब ख़ून-ए-वफ़ा साथ लिए जा ~Sahir

 

ये भी तो सज़ा है कि गिरफ़्तार-ए-वफ़ा हूँ

क्यूँ लोग मोहब्बत की सज़ा ढूँढ रहे हैं

-सुदर्शन फ़ाकिर

 

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

तुम्हे भी याद है कुछ ये कलाम किसका था

-दाग दहेलवी

           

हम बेवफा हरगीज न थे

पर हम वफ़ा कर न सके

हमको मिली उसकी सजा

हम जो खता कर ना सके..

-आनंद बक्षी

  

बिछाये शोख़ के सजदे वफ़ा की राहों में

खड़े हैं दीद की हसरत लिए निगाहों में

कबूल दिल की इबादत हो और तू आये..!

-साहीर

 

मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ’नी

ये तेरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को ~QatilShifai

  

इस हुस्र-ए-इत्तिफ़ाक पे लुटकर भी शाद हु

तेरी रजा जो थी वो तकाज़ा वफ़ा का था..!

-अहमद नदीम कासमी

  

हाँ जो जफ़ा भी आप ने की,कायदे से की,

हाँ हम ही काराबंद-ए-उसूल-ए-वफ़ा ना थे।

-फ़ैज अहमद फ़ैज

  

जो भूले से बचपन में पकड़ी थी तितली

सुरूर-ए-वफ़ा में भी उतरा वही रंग ~इन्दिरावर्मा

~shair ~

  

ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक

न लो इंतिक़ाम मुझ से मेरे साथ साथ चल के ~KhuBarabankvi

 

वफ़ा के नाम पे तुम क्यूँ सँभल के बैठ गए

तुम्हारी बात नहीं बात है ज़माने की

          

‏Shayari on Wafa

  

ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं

वफ़ा-दारी का दावा क्यूँ करें हम ~JaunEliya

  

मुझे मालूम है अहल-ए-वफ़ा पर क्या गुज़रती है

समझ कर सोच कर तुझ से मोहब्बत कर रहा हूँ मैं ~AhmadMushtaq

  

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझको नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद ~Jigar

 

यूँ तो हैं बे-शुमार वफ़ा की निशानियाँ

लेकिन हर एक शय से निराले तुम्हारे ख़त ~WasiShah

  

वफ़ा तुझ से ऐ बे-वफ़ा चाहता हूँ

मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ ~Hasart

~shair

  

ज़िद की है और बात मगर ख़ू बुरी नहीं

भूले से उस ने सैकड़ों वाद़े वफ़ा किए ~Ghalib

   

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था ~Daag

 

उन्हें रंज अब क्यूँ हुआ हम तो ख़ुश हैं

कि मर कर शहीद-ए-वफ़ा हो गए हम ~hasrat

 

कुछ तो ले काम तग़ाफ़ुल से वफ़ा के पैकर

ये तिरा प्यार कहीं मार न डाले मुझ को ~wafa

  

नाम ले जब भी वफ़ा का कोई

जाने क्यूँ आँख मिरी भर आए @wafa

  

कब तक निभाइए बुत-ए-ना-आश्ना के साथ

कीजे वफ़ा कहाँ तलक उस बेवफ़ा के साथ ~wafa

  

उड़ गई यूँ वफ़ा ज़माने से

कभी गोया किसी में थी ही नहीं ~wafa

  

तू जफ़ाओं से जो बदनाम किए जाता है

याद आएगी तुझे मेरी वफ़ा मेरे बाद

 

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

  

अब तुम आए हो तो मैं कौन सी शै नज़्र करो

कि मिरे पास ब-जुज़ मेहर ओ वफ़ा कुछ भी नहीं

 

दोनों ही बराबर हैं रह-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा में

जब तुम ने वफ़ा की है तो हम ने भी वफ़ा की ~

  

पाँव छलनी तो वफ़ा घाइल थी

जाने उस मोड़ पे क्या याद आया

  

करते रहेंगे तुम से मोहब्बत भी वफ़ा भी

गो तुम को मोहब्बत न वफ़ा याद रहेगी

  

कोई पुरसाँ नहीं पीर-ए-मुग़ाँ का

फ़क़त मेरी वफ़ा है और मैं हूँ

‏   

की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं

होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं

    

ये अदा-ए-बे-नियाज़ी तुझे बे-वफ़ा मुबारक

मगर ऐसी बे-रुख़ी क्या के सलाम तक न पहुँचे

Shakeel Badayuni 

  

किसी बे-वफ़ा की ख़ातिर ये जुनूँ  ‘फ़राज़’ कब तक

जो तुम्हें भुला चुका है उसे तुम भी भूल जाओ

ahmad ‘faraz’  

 

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Wafa Shayari in Hindi Roman

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wafa shayari in hindi

 

ulfat mein barabar hai wafa ho ki jafa ho

har bat mein lazzat hai agar dil mein maza ho

~amir minai

 

kyoon kisi se wafa kare koi

dil na mane to kya kare koi

~yagana changezi

 

dhoondh ujade hue logon mein wafa ke moti

ye khazane tujhe mumakin hai kharabon mein milen

~ahamad faraz

 

kyoon pasheman ho agar vada wafa ho na saka

kahin vade bhi nibhane ke lie hote hain

~ibarat machhalishahari

 

is zindagi ne sath kisi ka nahin diya

kis bewafa se tujh ko tamanna wafa ki hai

~makhafi badayooni

    

wafa tum se karenge, dukh sahenge, naz uthaenge

jise ata hai dil dena use har kam ata hai

~arazoo lakhanavi

 

wafa shayari in hindi

 

ye wafa ki sakht rahen ye tumhare panv nazuk

na lo intiqam mujh se mere sath sath chal ke

~khumar barabankavi

  

unhon ne kya na kiya aur kya nahin karate

hazar kuchh ho magar ik wafa nahin karate

~muztar_khairabadi

    

ham ko un se wafa ki hai ummid

jo nahin janate wafa kya hai

~mirza galib

 

 

saza ye di hai ki ankhon se chhin lin ninden

qusoor ye tha ki jine ke khvab dekhe the

kisi ne ret ke toofan mein la ke chhod diya

ye jurm tha ki wafa ke sarab dekhe the ”

~amir usmani

 

 

dil se nikalegi na mar kar bhi vatan ki ulfat

meri mitti se bhi khushaboo-e-wafa aegi

~shahaiaid bhagat singh

wafa shayari in hindi

 

mujhe wafa ki talab hai magar har ik se nahin

koi mile magar us yar-e-bewafa ki tarah

~ahamad faraz

  

ishq paband-e-wafa hai na ki paband-e-rusoom

sar jhukane ko nahin kahate hain, sajda karana

 

wafa ka ahad tha, dil ko sanbhalane ke lie

vo hans pade, mujhe mushkil mein dalane ke lie

~ehasan_danish

    

 

zindagi too ne to sach hai ki wafa ham se na ki

ham magar khud tujhe thukaraen zaroori to nahin

~zahida zaidi

 

ulfat mein barabar hai wafa ho ki jafa ho

har bat mein lazzat hai, agar dil mein maza ho

~amir minai

 

chup-chap sulagata hai diya, tum bhi to dekho

kis dard ko kahate hain wafa, tum bhi to dekho

~bashar navaz     

  

vo kahate hain har chot par muskurao

wafa yad rakkho sitam bhool jao

-kalaiaim ajiz

 

wafa tujh se ai bewafa chahata hoon

meri sadagi dekh kya chahata hoon

~hasratmohani     

wafa tum se karenge dukh sahenge naz uthaenge

jise ata hai dil dena, use har kam ata hai

~arazoo_lakhanavi

 

duniya ke sitam yad na apani hi wafa yad

ab mujh ko nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yad

~jigarmoradabadi

 

wafa ka zikr chhida tha ki rat bit gai

abhi to rang jama tha ki rat bit gai

~taimoor_hasan

 wafa shayari in hindi

‏  

kaun uthaega tumhari ye jafa mere bad

yad aegi bahut meri wafa mere bad

~amir minai

 

dil se nikalegi na mar kar bhi vatan ki ulfat

meri mitti se bhi khushaboo-e-wafa aegi

~lalchhandfalak     

 

wafa jis se ki bewafa ho gaya

jise but banaya khuda ho gaya

    

ham se koi talluq-e-khatir to hai use

vo yar ba-wafa na sahi bewafa to hai

~jamil_malik

 

zindagi too ne to sach hai ki wafa ham se na ki

ham magar khud tujhe thukaraen, zaroori to nahin

~zahida_zaidi

 

yaqin mujhe bhi hai vo aenge zaroor magar

wafa karegi kahan tak ki zindagi hi to hai

~farooq_bansapari

wafa shayari in hindi

bala se jan ka jiyan ho is etimad ki khair,

wafa kare na kare fir bhi yar apana hai !! /

    

dil ko main aur mujhe dil mahav-e-wafa rakhata hai,

kis qadar zauq-e-giraftari-e-ham hai hamako !! -galib

  

mohabbat adavat wafa be-rukhi

kirae ke ghar the badalate rahe

~bashir_badr

    

 kyoon kisi se wafa kare koi

khud bure hon to kya kare koi

~zahir_dehalavi

 

wafa ka zikr chhida tha ki rat bit gai

abhi to rang jama tha ki rat bit gai

~taimoor_hasan

  

umr bhar kuchh khvab dil par dastaken dete rahe

ham ki majaboor-e-wafa the ahaten sunate rahe

~baqa_balooch

 

shahare vafa mein dhoop ka sathi nahin koi

sooraj saron par aya to saye bhi ghat gae

  

chup-chap sulagata hai diya tum bhi to dekho

kis dard ko kahate hain wafa tum bhi to dekho

~bashar_navaz

    

main to is sadagi-e-husn pe sadaqe,

na jafa ati hai jisako na wafa ati hai !! /

           

‏ham ko un se wafa ki hai ummid

jo nahin janate wafa kya hai

~mirza galib

 

jab tera dard mere sath wafa karata hai,

ek samandar meri ankhon se baha karata hai !! /

  

daulat se wafa na-mumkin hai daulat pe ziyada naz na kar,

sab that pada rah jaega jab lad chalega banjara !! -popular merathi

 

wafa shayari in hindi

  

duniya se wafa kar ke sila dhoondh rahe hain

ham log bhi nadan hain ye kya dhoondh rahe hain

~sudarshan_fakir

    

    

socha tujhe dekha tujhe chaha tujhe pooja tujhe

meri wafa meri khata, teri khata kuchh bhi nahin

~bashir_badr

    

charon taraf bikhar gain sanson ki khushabuen

rah-e-wafa mein ap jahan bhi jidhar gae

 

dil se nikalegi na mar kar bhi vatan ki ulfat

meri mitti se bhi khushaboo-e-wafa aegi

~lal_chand_falak

 

main ne jin ke lie rahon mein bichhaya tha lahoo

ham se kahate hain vahi ahad-e-wafa yad nahin

~sagharsiddiqui

 

tujh se wafa na ki to kisi se wafa na ki

kis tarah intiqam liya apane ap se

~hi

**************

duniya ke sitam yad na apani hi wafa yad

ab mujh ko nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yad

~jigar_muradabadi

 

main ne dil de kar use ki thi wafa ki ibtida

us ne dhoka de ke ye qissa mukammal kar diya

~rahatindori

 

kaun uthaega tumhari ye jafa mere bad

yad aegi bahut meri wafa mere bad

~amir_minai

 

wafa ki kaun si manzil pe us ne chhoda tha

ki vo to yad hamen bhool kar bhi ata hai

~mohasin_naqavi 

  

wafa karenge nibahenge bat manenge

tumhen bhi yad hai kuchh ye kalam kis ka tha

~daghdaihlvi

    

udas ho kisi ki bewafai par

wafa kahin to kar gae ho khush raho

~fazil_jamili

    

dil se nikalegi na mar kar bhi vatan ki ulfat

meri mitti se bhi khushaboo-e-wafa aegi

~lal chhand falak

             

duniya ke sitam yad na apani hi wafa yad

ab mujh ko nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yad

~jigarmoradabadi

    

 

wafa tujh se ai bewafa chahata hoon

miri sadagi dekh kya chahata hoon

~hasarat_mohani

 

kya main tire is lutf ke qabil bhi nahin hoon

ai jan-e-wafa dil hi dukhane ke lie a

~ramz_afaqi

shayari on waf

  

kaun uthaega tumhari ye jafa mere bad

yad aegi bahut meri wafa mere bad

~amaiairminai

  

ab ke thaharai hai ham ne bhi yahi shart-e-wafa

jo bhi is shahar mein ae vo sitam-gar ho jae

~mahatab_haidar_naqavi

  

ye wafa ki sakht rahen, ye tumhare panv nazuk

na lo intiqam mujhase mere sath-sath chal ke

~khumar

  

ap chheden na wafa ka qissa

bat mein bat nikal ati hai

~dardasadi

 

chalo ham bhi wafa se baz ae

mohabbat koi majaboori nahin hai

~mazahar_imam

    

mohabbat, adavat, wafa, be-rukhi

kirae ke ghar the badalate rahe

~bashir_badr

shayari on waf

  

fir is duniya se ummid-e-wafa hai

tujhe ai zindagi kya ho gaya hai

~naresh_kumar_shad

  

bewafai pe teri ji hai fida

qahar hota jo ba-wafa hota

~mir

 

wafa kaisi kahan ka ishq jab sar fodana thahara

to fir ai sang-dil tera hi sang-e-astan kyoon ho ~ghalib

 

ye wafa ki sakht rahen ye tumhare panv nazuk

na lo intiqam mujh se mere sath sath chal ke

~khumar_barabankavi

        

ham ko un se wafa ki hai ummid

jo nahin janate wafa kya hai

~galib

    

us ke yoon tark-e-mohabbat ka sabab hoga koi

ji nahin ye manata vo be-wafa pahale se tha ~paravin_shakir

           

  

hazar rahen mud ke dekhi

kahin se koi sada na ai

badi wafa se nibhai tumane

hamari thodi si bewafai

-gulazar

    

 

duniya ne kis ka rah-e-wafa mein diya hai sath

tum bhi chale-chalo yoonhi jab tak chali chale

~zauq

 

shamil hai mera khoon-e-jigar teri hina mein

ye kam ho to ab khoon-e-wafa sath lie ja ~sahir

 

ye bhi to saza hai ki giraftar-e-wafa hoon

kyoon log mohabbat ki saza dhoondh rahe hain

-sudarshan fakir

          

wafa karenge nibahenge bat manenge

tumhe bhi yad hai kuchh ye kalam kisaka tha

-dag dahelavi

           

ham bevafa haragij na the

par ham wafa kar na sake

hamako mili usaki saja

ham jo khata kar na sake..

-anand bakshi

  

bichhaye shokh ke sajade wafa ki rahon mein

khade hain did ki hasarat lie nigahon mein

kabool dil ki ibadat ho aur too aye..!

-sahir

 

mujh se too poochhane aya hai wafa ke mani

ye teri sada-dili mar na dale mujh ko ~qatilshifai

  

is husr-e-ittifak pe lutakar bhi shad hu

teri raja jo thi vo takaza wafa ka tha..!

-ahamad nadim kasami

  

han jo jafa bhi ap ne ki,kayade se ki,

han ham hi karaband-e-usool-e-wafa na the.

-faij ahamad faij

  

jo bhoole se bachapan mein pakadi thi titali

suroor-e-wafa mein bhi utara vahi rang ~indiravarma

~shair ~

  

ye wafa ki sakht rahen ye tumhare panv nazuk

na lo intiqam mujh se mere sath sath chal ke ~khubarabankvi

 

wafa ke nam pe tum kyoon sanbhal ke baith gae

tumhari bat nahin bat hai zamane ki

          

‏shayari on waf

  

ye kafi hai ki ham dushman nahin hain

wafa-dari ka dava kyoon karen ham ~jaunailiy

  

mujhe maloom hai ahal-e-wafa par kya guzarati hai

samajh kar soch kar tujh se mohabbat kar raha hoon main ~ahmadmushtaq

  

duniya ke sitam yad na apani hi wafa yad

ab mujhako nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yad ~jigar

 

yoon to hain be-shumar wafa ki nishaniyan

lekin har ek shay se nirale tumhare khat ~wasishah

  

wafa tujh se ai be-wafa chahata hoon

meri sadagi dekh kya chahata hoon ~hasart

~shair

  

zid ki hai aur bat magar khoo buri nahin

bhoole se us ne saikadon vade wafa kie ~ghalib

  

wafa karenge nibahenge bat manenge

tumhen bhi yad hai kuchh ye kalam kis ka tha ~dag

 

 

unhen ranj ab kyoon hua ham to khush hain

ki mar kar shahid-e-wafa ho gae ham ~hasrat

 

  

kuchh to le kam tagaful se wafa ke paikar

ye tira pyar kahin mar na dale mujh ko ~waf

  

nam le jab bhi wafa ka koi

jane kyoon ankh miri bhar ae @waf

  

kab tak nibhaie but-e-na-ashna ke sath

kije wafa kahan talak us bewafa ke sath ~waf

  

ud gai yoon wafa zamane se

kabhi goya kisi mein thi hi nahin ~waf

  

too jafaon se jo badanam kie jata hai

yad aegi tujhe meri wafa mere bad

  

duniya ke sitam yad na apani hi wafa yad

ab mujh ko nahin kuchh bhi mohabbat ke siva yad

  

ab tum ae ho to main kaun si shai nazr karo

ki mire pas ba-juz mehar o wafa kuchh bhi nahin

 

donon hi barabar hain rah-e-ishq-o-wafa mein

jab tum ne wafa ki hai to ham ne bhi wafa ki ~

  

panv chhalani to wafa ghail thi

jane us mod pe kya yad aya

  

karate rahenge tum se mohabbat bhi wafa bhi

go tum ko mohabbat na wafa yad rahegi

  

koi purasan nahin pir-e-mugan ka

faqat meri wafa hai aur main hoon

           

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ki wafa ham se to gair is ko jafa kahate hain

hoti ai hai ki achchhon ko bura kahate hain

    

ye ada-e-be-niyazi tujhe be-wafa mubarak

magar aisi be-rukhi kya ke salam tak na pahunche

shakaiail badayuni 

  

kisi be-wafa ki khatir ye junoon  faraz kab tak

jo tumhen bhula chuka hai use tum bhi bhool jao

ahmad faraz

 

 

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