खगोल विज्ञान के आश्चर्यजनक तथ्य Amazing Astronomy facts in hindi

खगोल विज्ञान के कुछ आश्चर्यजनक तथ्य

एस्ट्रोनॉमी खगोल विज्ञान एक बहुत ही रोचक विषय है, विज्ञान की इस शाखा के अंतर्गत ब्रह्मांड को समझने का प्रयत्न किया जाता है, हमारा ब्रह्मांड अकल्पनीय रूप से अनंत है, ब्रह्मांड में कई अनोखी चीजें पाई जाती है,  वैज्ञानिक जब भी ब्रह्मांड का कोई एक रहस्य सुलझाते हैं तो उनके सामने कई और नए रहस्य प्रकट हो जाते हैं, ब्रह्मांड अनोखी चीजों से भरा हुआ है, मनुष्य की यह प्रकृति है कि वह अपने आसपास की दुनिया को समझने का भरपूर प्रयत्न करता है, वैज्ञानिक खगोल विज्ञान के अंतर्गत टेलिस्कोप, स्पेस शटल, कंप्यूटर और विभिन्न आधुनिक यंत्रों का उपयोग कर ब्रहम्मांड  को समझने का प्रयत्न कर रहे, यहां हम एस्ट्रोनॉमी के कुछ अनोखे तथ्य प्रस्तुत कर रहे, इन तथ्यों को पढ़कर आप वास्तव में आश्चर्यचकित हो जाएंगे.

Columbia space shuttle in hindi, columbia kese, kalpana chawla disaster, essay on columbia disaster in hindi, columbia disaster in hindi

खगोल विज्ञान के तथ्य Astronomy facts in hindi

हमें सूर्य और चंद्रमा एक ही आकार के दिखाई देते हैं, परंतु वास्तव में सूर्य, चंद्रमा से 400 गुना बड़ा है, चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी से सूर्य 400 गुना अधिक दूरी पर है यही कारण है कि दोनों का बराबर दिखाई देते हैं, सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेता है.

*शुक्र ग्रह का एक दिन पृथ्वी के 1 वर्ष से बड़ा होता है,  उससे भी अजीब बात यह है कि शुक्र ग्रह पर एक दिन, एक वर्ष से ज्यादा लंबा होता है,  शुक्र ग्रह का 1 वर्ष शुक्र ग्रह के 1 दिन से छोटा होता है.

अगर आप चंद्रमा पर कदम रखेंगे तो आपके कदमों के निशान वहां लाखों सालों तक सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि वहां पर वायुमंडल और जल नहीं है और ना ही वहां किसी प्रकार के जीव है जो इन निशानों को मिटाएं.

सूर्य के द्वारा उत्पन्न में की गई ऊर्जा का केवल एक खरबवें  हिस्से का आधा भाग ही पृथ्वी तक पहुंचता है.

अंतरिक्ष  मैं रहने वाले  एस्ट्रोनॉट्स के पैरों के तलवों की पूरी चमड़ी निकलने लगती है, इसका कारण यह है कि अंतरिक्ष  मैं एस्ट्रोनॉट चलते नहीं है, क्योंकि वहां पर गुरुत्वाकर्षण नहीं है इसीलिए पैरों पर कोई भार नहीं पड़ता.

सूर्य के अंदर  10 लाख प्रथ्वियाँ समा सकती हैं

स्पेस में जाने पर एस्ट्रोनॉट्स की लंबाई बढ़ जाती है.

अंतरिक्ष बहुत दूर नहीं है, अगर आप अपनी कार को सीधे ऊपर की तरफ चला सके तो आप केवल 1 घंटे में ही अंतरिक्ष में पहुंच जाएंगे.

अंतरिक्ष  में अगर आप रोए तो आपकी आंखों के आंसू नीचे नहीं गिरते हैं

पृथ्वी के आसपास 10 लाख कबाड़ के टुकड़े पृथ्वी का चक्कर लगा रहे हैं, यह टुकड़े रॉकेट और सैटेलाइटो के अवशेष हैं.

प्लूटो का आकार संयुक्त राज्य अमेरिका से भी आधा है

हमारे सूर्य सौरमंडल को मिल्की वे गैलेक्सी का एक चक्कर लगाने में 230 मिलीयन साल का समय लगता है, आज हमारा सौरमंडल जीस स्थान पर है 230 मिलीयन साल पहले वह इसी स्थान पर था, तब पृथ्वी पर पहले डायनासोर उत्पन्न हो रहे थे.

पृथ्वी धीमे होती जा रही है, डायनासोरों के वक्त दिन 23 घंटे का होता था परंतु अब  24 घंटे का होता है

चंद्रमा एक दिन अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पानी का प्रमुख स्रोत बन जाएगा क्योंकि यहां पर अत्यधिक मात्रा में पानी मौजूद है.

तारों और गेलेक्सियों को देखना अतीत में देखना है, क्योंकि तारे और गैलेक्सी हमसे इतनी अधिक दूरी पर स्थित होते हैं इनके प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में कई वर्षों का समय लगता है, इसलिए हम उनका अतीत देख रहे होते हैं,  हम तारों और गेलेक्सियों का वर्तमान कभी भी नहीं देख सकते.

अंतरिक्ष में पूरी तरह शांति होती है, क्योंकि वहां किसी भी प्रकार की ध्वनि नहीं होती है.

बृहस्पति, शनि, यूरेनस, और नेपच्यून ग्रहों पर चला नहीं जा सकता क्योंकि इन ग्रहों कि कोई भी ठोस पता नहीं है.

सौरमंडल का सबसे ऊंचा पर्वत ओलंपस है जो की मंगल ग्रह पर मौजूद है.

अगर किसी एरोप्लेन में प्लूटो तक उड़कर जाया जा सके तो इस यात्रा में 800 वर्ष का समय लगेगा.

कार के आकार का एक उल्कापिंड औसतन एक वर्ष में पृथ्वी से टकराता है यह वायुमंडल में ही जलकर  खत्म हो जाता है

मंगल ग्रह पर सूर्यास्त  नीले रंग का दिखाई देता है

यूरेनस ग्रह अपने अक्ष पर पूरी तरह झुका हुआ है.

Astronomy facts in hindi, khagol vigyan ke tathy, amazing astronomy facts in hindi, solar system facts in hindi, universe facts in hindi, planet facts in hindi,

Taj Mohammed Sheikh

हेलो दोस्तों, में एक Freelance Blogger हूँ , नेट इन हिंदी .com वेबसाईट बनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा में मनोरंजक और उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करना है, यहाँ आपको विज्ञान, सेहत, शायरी, प्रेरक कहानिया, सुविचार और अन्य विषयों पर अच्छे लेख पढ़ने को मिलते रहेंगे. धन्यवाद!

You may also like...

Leave a Reply