bachpan shayari in hindi

Bachpan Shayari shayari on Bachpan

बचपन शायरी

बचपन शायरी :- हेल्लो दोस्तों, इस पेज पर हम आपके लिए पेश कर रहे हैं कुछ बेहतरीन बचपन शायरी, हम सभी को अपना बचपन का वक्त बहुत प्यारा होता है, बचपन हमारे जीवन का सबसे अच्छा हिस्सा होता है, यह बचपन की शायरी पढ़कर आप भावुक और जज्बाती हो जायेंगे, आपको अपने बचपन की यादें ताज़ा हो जाएँगी, हमने यहाँ महान शायरों की बचपन शायरी, 2 Lines shayari on Bachpan देवनागरी font में दी है, यह बचपन शायरी hindi और उर्दू भाषा में हैं,

बचपन शायरी इमेजेस :- इस पेज के अंत में हमने कुछ शानदार खूबसूरत बचपन शायरी इमेजेस दी हैं, आप इन बचपन शायरी इमेजेस को आसानी से डाउनलोड और शेयर कर सकते हैं.

Bachpan Shayri :- Hi Friends, in this post we are presenting you some excellent shayari on Bachpan, we all love our childhood times, it was the best part of our life, these childhood Shayari can make you emotional, when you read these Bachpan shayari in hindi, you will remember your sweet moments of your childhood and friends. These shayari on Bachpan ke din in hindi is excellent to read when you are feeling low in life, these memories of childhood can give freshness. We have collected here Bachpan par sahayri of some great poets. These 2 Lines shayari on Bachpan is in Urdu and in Hindi language, but for your easiness we are giving this Bachpan shayari in Devnagari font. 

You can use it as Bachpan quotes and Bachpan status in your social media account.

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Bachpan Shayari Images and photos – in the last of this page we have given some excellent beautiful Bachpan Shayari Images for you, Download Bachpan Shayari images and share with your friends. you can use it on these on children’s day as children’s day shayari and children’s day images

All Hindi Shayari Topics

Bachpan ki shayari

असीर-ए-पंजा-ए-अहद-ए-शबाब कर के मुझे

कहाँ गया मेरा बचपन ख़राब कर के मुझे

 

इक खिलौना जोगी से खो गया था बचपन में

ढूँडता फिरा उस को वो नगर नगर तन्हा

~जावेद अख़्तर

 

कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से

कहीं भी जाऊँ मेरे साथ साथ चलते हैं

~बशीर_बद्र

 

कुछ नहीं चाहिए तुझ से ऐ मेरी उम्र-ए-रवाँ

मेरा बचपन मेरे जुगनू मेरी गुड़िया ला दे

-नोशी गिलानी

 

दादाजी ने सौ पतंगे लूटीं

टाँके लगे, हड्डियाँ उनकी टूटी,

छत से गिरे, न बताया किसी को,

शैतानी करके सताया सभी को,

बचपन के किस्से सुनो जी बड़ों के।

~रमेश तैलंग

 

यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया,

 सौ बार शुक्रिया अरे सौ बार शुक्रिया

बचपन तुम्हारे साथ गुज़ारा है दोस्तो

ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तो

 

Bachpan shayari in hindi

 

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

~बशीर बद्र

 

देखकर रेल के डिब्बे बुहारता बचपन

लोग कह देते हैं– “ पाँवों पे खड़ा है तो सही”

 

मुमकिन है हमें गाँव भी पहचान न पाए

बचपन में ही हम घर से कमाने निकल आए

~मुनव्वर राना

 

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

 Bachpan shayari in two lines

 

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो

भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

 

shayari on Bachpan

 

काग़ज़ की नाव भी है, खिलौने भी हैं बहुत

बचपन से फिर भी हाथ मिलाना मुहाल है

~ज़हीर ग़ाज़ीपुरी

 

~बचपन में शौक़ से जो घरौंदे बनाए थे

इक हूक सी उठी उन्हें मिस्मार देख कर

~शिफ़ा

मिरी मैली हथेली पर तो बचपन से

ग़रीबी का खरा सोना चमकता है

~फ़राग़रोहवी

फिर मुझे याद आएगा ~बचपन

इक ज़माना गुमाँ से गुज़रेगा

~गोविन्दगुलशन

 

मैं ने बचपन की ख़ुशबू-ए-नाज़ुक

एक तितली के संग उड़ाई थी

 

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

~BashirBadr

 

मैं ने बचपन में अधूरा ख़्वाब देखा था कोई

आज तक मसरूफ़ हूँ उस ख़्वाब की तकमील में

~आलम_ख़ुर्शीद

 

shayari on Bachpan ke din in hindi

 

”घर का बोझ उठाने वाले ब्च्चे की तक़दीर न पूछ

 बचपन घर से बाहर निकला और खिलौना टूट गया”

~मुनव्वर_राणा

 

 मुझको यक़ीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं

जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद में परियाँ रहती थीं

 

सुकून की बात मत कर ए ग़ालिब

बचपन वाला इतवार अब नही आता !

-हरिवंशराय बच्चन

बचपन में आकाश को छूता सा लगता था

इस पीपल की शाख़ें अब कितनी नीची हैं ~MuzaffarHanfi

 

 शहज़ादा सो गया है कहानी सुने बग़ैर

बचपन के ताक़ में रखी गुड़िया उदास है ~सिदरा_सहर_इमरान

 

जो भूले से बचपन में पकड़ी थी तितली

सुरूर-ए-वफ़ा में भी उतरा वही रंग ~इन्दिरावर्मा

 

कैसे भूलू बचपन की यादों को मैं,

कहाँ उठा कर रखूं किसको दिखलाऊँ?

संजो रखी है कब से कहीं बिखर ना जाए,

अतीत की गठरी कहीं ठिठर ना जाये.!

 

mera Bachpan shayari

         

चाँदके माथेपर बचपन की चोट के दाग़ नज़र आते हैं

रोड़े,पत्थर और गुल्लोंसे दिनभर खेला करता था

बहुत कहा आवारा उल्काओं की संगत ठीक नहीं!

गुलज़ार

 

फ़िक्र से आजाद थे और, खुशियाँ इकट्ठी होती थीं..

वो भी क्या दिन थे,  जब अपनी भी,

 गर्मियों की छुट्टियां होती थीं.

 

Bachpan ki dosti shayari

 

कैमरे जरा कम थे मेरे गांव में,

जब बचपन देखना होता है,

तो मां की आंखों में झांक लेता हूं।

 

जो सोचता था बोल देता था,

बचपन की आदतें कुछ ठीक ही थी

 

कुछ अठन्नी और चार आनों  में,

कुछ मुफ़्त मूमफली के दानों में,

कुछ बंद हो चुकी दुकानों में,

कुछ असभ्यता के मुहानों में,

कुछ ग़ज़लों में कुछ गानों में,

कुछ मशीन से दूर इंसानों में,

कुछ बड़े होने के अरमानों में,!!

 

उम्र ने तलाशी ली, तो जेब से लम्हे बरामद हुए…

कुछ ग़म के थे, कुछ नम थे, कुछ टूटे…

बस कुछ ही सही सलामत मिले,

जो बचपन के थे…

 

जो गुज़र गया नादानियों मे

वो वक़्त कमाल था ……..

 

Bachpan ki shayari hindi

 

आज बचपन का टूटा हुआ खिलौना मिला…

उसने मुझे तब भी रुलाया था,

उसने मुझे आज भी रुलाया है

 

बचपना अब भी वही है हममें ….

बस ज़रूरतें बड़ी हो गयीं हैं …।

 

इन्हें तल्खियों से क्या मतलब, नफरतें भी कहां जानते हैं…

खुशी चेहरे की पढ़ लेते हैं, बच्चे इतना सा मजहब जानते हैं

 

“उम्र की सिढ़ी चढ़ थकने लगे है…

कदम जो कई छतें लाँघ जाते थे!!”

 

उम्र-ऐ-जवानी फिर कभी ना मुस्करायी बचपन की तरह;

मैंने साइकिल भी खरीदी, खिलौने भी लेके देख लिए।

 

2 lines shayari on Bachpan

 

बचपन में जब

धागों के बीच डब्बे फसाकर

फोन-फोन खेलते थे

नहीं तो मालूम नहीं था

एक दिन इस फोन में

जिन्दगी सिमटती चली जायेगी

 

ज़िन्दगी छोड़ आया हूँ कहीं उन गलियों मे

जहाँ कभी दौड़ जाना ही ज़िन्दगी हुआ करती थी

 

हम तो बचपन में भी अकेले थे

सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे

 

बचपन में भरी दोपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला…

 

जब से डिग्रियां समझ में आयी पांव जलने लगे…

 

बचपन इसलिए भी प्यारा होता है

क्योंकि….. कंधे और दिल दोनों

ख़ाली होते हैं,

 

Bachpan par shayari

 

उम्र ने तलाशी ली, तो कुछ लम्हे

बरामद हुए…… कुछ ग़म के थे,

कुछ नम के थे, कुछ टूटे ।

बस कुछ ही सही सलामत मिले ,

जो बचपन के थे ।

 

बचपन भगवान की दी हुई सबसे खूबसूरत कृति है।

कागज़ के जहाज बरसात के पानी मे चलाकर, गली में सबसे अमीर हुआ करते थे।

 

छुट गया वो खेलने जाना,

पेडोँ की छाँव मे वक्त बिताना.

 

वो नदियोँ मे नहाने जाना,

शाम ढले घर वापस आना.

 

Bachpan shayari in urdu

 

यादे बचपन कि भूलती नहीं

सच्चाई से हमको मिलाती नहीं

जीना चाहते है हम बचपन फिर से

पर शरारतें बचपन कि अब हमे आती नहीं !

 

तेरी यादें भी मेरे बचपन के खिलौने जैसी हैं,

तन्हा होती हूँ तो इन्हें लेकर बैठ जाती हूँ…।

 

ले चल मुझे  बचपन की,

उन्हीं वादियों में ए जिन्दगी…

जहाँ न कोई जरुरत थी,

और न कोई जरुरी था.!!

 

बचपन की खेल…..

भी गजब की न्यारी थी,,

कभी भट से चिढ़ जाना,,

तो फिर एक पल में भी मान जाना,,

न कोई रंजिश न कोई गम था,,

केवल मस्ती भरी दिन थे,,

और खुशीयों का साया था

 

बहुत ही संगीन ज़ुर्म को,

हम अंज़ाम देकर आए हैं!

बढ़ती उम्र के साए से,

कल बचपन चुरा लाए हैं!

 

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