ब्लड ग्रुप्स, एंटीबॉडीज और एंटीजेन की उपयोगी जानकारी

कितने प्रकार के रक्त समूह होते हैं?

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हमारे शरीर के रक्त के प्रमुख चार समूह पाए जाते हैं यह चार समूह  बी ए बी और ओ है, किसी व्यक्ति के रक्त समूह का निर्धारण उसके जींस से होता है, उसे अपने माता पिता से जो जींस मिले हैं उन के आधार पर ही किसी व्यक्ति का रक्त समूह बी ए बी होता है.

अगर हम और गहराई से देखें तो इन चारों रक्त समूह में से प्रत्येक आरएसडी पॉजिटिव ओर नेगेटिव हो सकता है इस प्रकार हमें आठ अलग-अलग प्रकार के रक्त समूह प्राप्त होते हैं.

इसीलिए यह कहा जा सकता है कि मनुष्य में आठ प्रकार के अलग-अलग रक्त समूह होते हैं.

एंटीबॉडीज और एंटीजेन  क्या होते हैं?

हमारा रक्त लाल रक्त कोशिकाओं, श्वेत रक्त कोशिकाओं, और प्लेटलेट्स कोशिकाओं से मिलकर बना है यह कोशिकाएं प्लाज्मा नाम के तरल पदार्थ में तैरती रहती हैं, इस तरल पदार्थ में एंटीबॉडीज और एंटीजेन भी पाए जाते हैं, एंटीबॉडीज वह प्रोटीन होते हैं जोकि बैक्टीरिया वायरस से लड़ने में मदद करते हैं, यह प्रोटीन एंटीबॉडीज  बाहरी तत्वों बैक्टीरिया और वायरस की पहचान करके शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को सूचित करते हैं हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र इन बाहरी तत्वों को नष्ट कर देता है.

एंटीजेन भी प्रोटीन होते हैं जो कि लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाए जाते हैं.

एंटीबॉडीज और एंटीजेन से भी रक्त समूह का निर्धारण होता है

रक्त समूह निर्धारण में दो व्यवस्थाएं प्रचलित है एक ABO System तथा दूसरा RhD System

ABO System  ए बी ओ सिस्टम

ABO System के अनुसार रक्त चार प्रकार का होता है.

ब्लड ग्रुप A :-  ब्लड ग्रुप A में A प्रकार का एंटीजेन लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाया जाता है तथा Anti-B एंटीबॉडी प्लाज्मा में पाया जाता है.

ब्लड ग्रुप B :-  ब्लड ग्रुप B में B प्रकार का एंटीजेन लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर जाता है तथा Anti-A एंटीबॉडी plazma में पाया जाता है.

ब्लड ग्रुप O:-  ब्लड ग्रुप O में कोई भी एंटीजेन लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर नहीं पाया जाता तथा Anti-A aur Anti-B दोनों  प्लाज्मा में पाए जाते हैं

ब्लड ग्रुप AB : ब्लड ग्रुप AB में A और B दोनों प्रकार के एंटीजेन लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाए जाते हैं परंतु प्लाजामा  में कोई भी एंटीबॉडी नहीं पाया जाता

ब्लड ग्रुप O  सबसे ज्यादा पाया जाने वाला ब्लड ग्रुप है, गलत समूह का रक्त दिए जाने पर रोगी की मृत्यु तक हो सकती है, उदाहरण के लिए एक रोगी जिसका रक्त समूह B है उसे अगर A  ब्लड ग्रुप दे दिया जाए तो उसके अंदर मौजूद anti a एंटीबॉडीज ग्रुप A की कोशिकाओं पर हमला कर देते हैं यही वजह है कि A रक्त समूह वाले को B और B रक्त समूह वाले रोगी को A समूह का रक्त नहीं दिया जाना चाहिए.

O रक्त समूह में कोई भी एंटीजन नहीं होता है इसलिए इसे किसी भी रक्त समूह वाले रोगी को दिया जा सकता है.

रक्त समूह निर्धारण का Rh सिस्टम

लाल रक्त कोशिकाओं में कभी कभी एक विशेष प्रकार का एंटीजन पाया जाता है जिसे Rhd  एंटीजन कहते हैं अगर यह एंटीजन पाया जाता है तो आपका रक्त समूह RhD पॉजिटिव हो जाता है अगर यह नहीं है तो आपका रक्त समूह RhD नेगेटिव हो जाता है.

इस प्रकार अगर हम देखें तो आठ प्रकार के रक्त समूह बन जाते हैं

A RhD positive (A+)

A RhD negative (A-)

B RhD positive (B+)

B RhD negative (B-)

O RhD positive (O+)

O RhD negative (O-)

AB RhD positive (AB+)

AB RhD negative (AB-)

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ऐसा देखा जाता है कि O RhD Negative ब्लड सामान्यता सुरक्षित रूप से किसी को भी दिया जा सकता है, जब कभी रोगी के रक्त समूह का पता नहीं होता है, और उसे तुरंत रक्त की आवश्यकता होती है तो उसे O RhD negative (O-) समूह का ही रक्त दिया जाता है, यह सबके लिए सुरक्षित इसलिए होता है क्योंकि इसके अंदर A, B और  RhD एंटीजेंस नहीं होते.

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Taj Mohammed Sheikh

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