एंटी रेडिएशन पेंट क्या होता है इसका उपयोग क्या है?

एंटी रेडिएशन पेंट और एंटी रेडिएशन यंत्र

Anti radiation paint and anti radiation devices?

विकिरण अवरोधी रंग (Vikiran avrodhi rang)

आजकल बाजार में हमें एंटी रेडिएशन डिवाइसेज यंत्र तथा एंटी रेडिएशन पेंट्स दिखाई देते हैं, कई लोगों के मन में यह जिज्ञासा उठती है कि यह एंटी रेडिएशन डिवाइस से और पेंट क्या है तथा इनका उपयोग क्या है, एंटी रेडिएशन का मतलब विकिरण विरोधी होता है. यह चीजें विद्युत चुंबकीय विकिरण को रोकती हैं, एंटी रेडिएशन को समझने के लिए हमें सबसे पहले रेडिएशन क्या होता है इसे समझना होगा.

विद्युत चुंबकीय विकिरण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन क्या होता है?

What is electromagnetic radiation in hindi

हम हमेशा विद्युत चुंबकीय तरंगों से घिरे रहते हैं,  लेकिन डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि प्रकाश भी एक विद्युत चुंबकीय तरंग ही है, इस विद्युत् चुम्बकीय तरंग की वेवलेंथ तरंग दैर्ध्य बदलने से अलग अलग तरह कि विद्युत चुंबकीय तरंगें उत्पन्न होती है, सबसे कम तरंग धैर्य की विद्युत चुंबकीय तरंग गामा रे हैं, उसके बाद एक्सरे, अल्ट्रावॉयलेट, दृश्य प्रकाश , उष्मीय किरण तथा माइक्रोवेव तथा रेडियो तरंगे आती है, रेडियो वेव की तरंगधैर्य सबसे अधिक होती है.

इस चार्ट के द्वारा आप विद्युत चुंबकीय विकिरण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन को बहुत अच्छी तरह से समझ सकते हैं

Anti radiation paint hindi electromagnetic radiation

ज्यादा तरंग दैर्ध्य वाली विद्युत चुंबकीय तरंग दीवारों और मकानों के आर पार भी जा सकती हैं, मोबाइल और इंटरनेट संचार माध्यम में इसीलिए माइक्रोवेव और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है. ( मोबाईल रेडिएशन की सम्पूर्ण जानकारी)

मोबाईल रेडिएशन से बचने के लिए अनोखा यंत्र

एंटी रेडिएशन डिवाइसेज तथा एंटी रेडिएशन पेंट्स

विद्युत चुंबकीय तरंगों को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के यंत्र उपलब्ध हैं, अत्यधिक उच्च  विद्युत चुंबकीय तरंगें मनुष्य के शरीर को हानि पहुंचा सकती हैं, इसलिए कई लोग जो कि अपने स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक सतर्क रहते हैं वह अपने मकान के आसपास विद्युत चुंबकीय विकिरण को रोकने के यंत्र तथा पेंट्स लगा लेते हैं, हालांकि है बात गौर करने लायक है कि अभी तक मोबाइल या मोबाइल टावर रेडिएशन से कोई विशेष नुकसान का पता नहीं चल पाया है. केवल अधिक तीव्रता की विद्युत् चुम्बकीय तरंगे ही हमारे शरीर को नुकसान पहुंचती हैं.

विद्युत चुंबकीय विकिरण को रोकने के लिए कई तरह के यंत्र, धातु की जालियां, चुंबकीय पदार्थ, उपयोग में लिए जाते हैं, इस प्रक्रिया को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक शिल्डिंग या  विद्युत चुंबकीय परिरक्षण कहते हैं अंग्रेजी में इसके कई नाम है जैसे कि एमआई ब्लॉकिंग, ईएमएफ ब्लॉकिंग इत्यादि, रेडियो तरंगों को रोकने के लिए RF फील्डिंग रेडियो तरंग परिरक्षण प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है.

विद्युत चुंबकीय परिरक्षण एंटी रेडिएशन पेंट क्या है?

What is anti radiation paint?

विद्युत चुंबकीय परिरक्षण एंटी रेडिएशन पेंट क्या है?

वर्तमान समय में बाजार में कंपनियों द्वारा एंटी रेडिएशन पेंट्स उपलब्ध करवाए जा रहे हैं तथा यह दावा किया जा रहा है कि यह पेंट्स दीवारों पर लगाने पर विद्युत चुंबकीय विकिरण को सोख लेते हैं.

यह एंटी रेडिएशन पेंट घर की आंतरिक और बाहरी दीवारों पर लगाए जाते हैं, यह जल में पूरी तरह घुलनशील होते हैं,  तथा यह माइक्रोवेव और रेडियो तरंगों को रोक देते हैं, एंटी रेडिएशन पेंट एक्रेलिक तत्वों के बने होते हैं, इन्हें सभी तरह की सतहों और दीवारों पर लगाया जा सकता है यह बहुत जल्द सूख जाते हैं, तथा इन्हें आसानी से पानी से साफ किया जा सकता है.

इन एंटी रेडिएशन पेंट्स की सतह विद्युत की सुचालक होती है, इससे यह विद्युत चुंबकीय विकिरण को सोख कर क्षीण  या दुर्बल कर देतें है, घर की आंतरिक दीवारों पर लगाए जाने पर यह विभिन्न यंत्रों द्वारा छोड़े गए विद्युत चुंबकीय विकिरण को परावर्तित नहीं करते हैं बल्कि सोख लेते हैं इससे विद्युत चुंबकीय रेडिएशन कम होता है घर की बाहर की दीवारों पर लगाए जाने पर यह एंटी रेडिएशन पेंट्स विकिरणों को घर के अंदर नहीं आने देते हैं.

अगर आपके घर के पास कोई मोबाइल टावर या बिजली की हाईटेंशन लाइन गुजरती है तो आप एंटी रेडिएशन पेंट के इस्तेमाल से विद्युत चुंबकीय विकिरण से बच सकते हैं,

एंटी रेडिएशन पेंट को प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें – एंटी रेडिएशन पेंट


एंटी रेडिएशन पेंट का इस्तेमाल केसे करें

How to use anti radiation paint

कोई भी एंटी रेडिएशन पेंट खरीदने से पहले उसकी पड़ताल अवश्य कर लें, क्योंकि बाजार में कई भ्रमित करने वाले तथा अनुपयोगी उत्पाद भी मौजूद है इसलिए आप किसी एक्सपर्ट की सलाह लेने के बाद ही अपने घर में एंटी रेडिएशन पेंट लगवाएं.

आपको यह बात भी ध्यान में रखनी होगी कि एंटी रेडिएशन पेंट लगाने से घर के अंदर मोबाइल के सिग्नल कमजोर पड़ जाएंगे इसलिए घर के एक हिस्से में मोबाइल कम्युनिकेशन को चालू रखने के लिए एंटी रेडिएशन पेंट का इस्तेमाल ना करें तथा शेष कमरों में एंटी रेडिएशन पेंट का इस्तेमाल करें.

जब भी आपको मोबाइल का इस्तेमाल करना हो तो घर के उस हिस्से में जहां एंटी रेडिएशन पेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है वहां जाकर आप आराम से मोबाइल कम्युनिकेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं.

एंटी रेडिएशन डिवाइसेस प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – Anti Radiation devices

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अल्ट्रा वायलेट रेडिएशन क्या होता है इसके क्या नुकसान हैं?

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अल्ट्रा वायलेट विकिरण क्या होता है?

What is Ultraviolet Radiation hindi

अल्ट्रावॉयलेट विकिरण विद्युत चुंबकीय किरणों का ही एक रूप है, इन किरणों की तरंगधैर्य बैगनी प्रकाश से कम होती है इसलिए इन्हें पराबैगनी प्रकाश कहते हैं. सूर्य से आने वाले प्रकाश के स्पेक्ट्रम में यह दृश्य प्रकाश के बैगनी रंग के पास होती हैं, अल्ट्रावायलेट किरणें विद्युत चुंबकीय तरंगों का ही एक रूप है, इनकी तरंगधैर्य (वेवलेंथ) 10 nm से लेकर 400 nm तक होती है. पराबैंगनी प्रकाश की किरणें एक्स-रे और दृश्य प्रकाश के बीच स्थित होती है.

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सूर्य से आने वाले प्रकाश का 10% हिस्सा पराबैगनी अल्ट्रावॉयलेट तरंगों का होता है,  कुछ खास तरह की लाइटें, मर्करी वेपर लैंप, इलेक्ट्रिक आर्क, आदि से भी उत्पन्न की जा सकती है, अल्ट्रावॉयलेट किरने कई प्रकार के रासायनिक परिवर्तन उत्पन्न कर सकतीं हैं तथा यह कई पदार्थों में चमक पैदा कर देती हैं. पराबैगनी किरणों के प्रभाव की वजह से कई प्रदार्थ और जीव चमकने लगते हैं.

सूर्य से आने वाली हानिकारक अल्ट्रा वायलेट किरणों  के 90 % भाग को ओजोन परत के द्वारा रोक लिया जाता है. ओजोन परत की सम्पूर्ण जानकारी 

दृश्य प्रकाश की तुलना में यह पेड़ पौधों और जीव को ज्यादा प्रभावित करती है, दृश्य प्रकाश पेड़ पौधों और जीवो को केवल गर्म करता है जबकि  अल्ट्रावॉयलेट विकिरण पेड़ पौधों और जीवो में कई तरह के रासायनिक परिवर्तन कर उत्पन्न सकते हैं.

सनबर्न  सूर्य के प्रकाश में अधिक समय तक रहने से झुलस  जाने की बीमारी सबसे प्रमुख है, यह अल्ट्रावॉयलेट किरणों के दुष्प्रभाव की वजह से ही होती है.

मनुष्य पर अल्ट्रावायलेट किरणों का दुष्प्रभाव

Effects of ultraviolet on Humans hindi

मनुष्य के स्वास्थ्य पर अल्ट्रावायलेट किरणों का दुष्प्रभाव पड़ता है, हालांकि अल्ट्रावायलेट किरणें हमारे शरीर में विटामिन डी बनाने में सहायता प्रदान करती है, विटामिन डी हमारे शरीर के लिए अत्यावश्यक विटामिन है. वैज्ञानिक बताते हैं कि 5 से 15 मिनट तक सप्ताह में दो बार हल्की धूप में बैठने से हमारा शरीर पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी बना लेता है, लेकिन अगर हम ज्यादा समय धूप में बिताते हैं तो इससे हमारे शरीर को नुकसान पहुंचता है.

ज्यादा समय तक धूप में बैठने से सबसे पहले नुकसान हमारी आंखों के रेटीना को होता है, इसके बाद हमारी त्वचा और प्रतिरक्षा तंत्र अल्ट्रावॉयलेट किरणों से प्रभावित होते हैं. अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा झुलस जाती है तथा इससे त्वचा के कैंसर का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है, यह विकिरण हमारी कोशिकाओं के डीएनए को सीधा नुकसान पहुंचा सकते हैं अल्ट्रावायलेट किरणें पहले से हो रहे त्वचा रोगों में वृद्धि भी कर सकती हैं.

अल्ट्रावायलेट किरणों के जीवो पर प्रभाव

Effects of Ultraviolet radiation on animals

कई प्रकार के जीव जैसे कि पक्षी, रेप्टाइल्स, कीड़े, तथा मधुमक्खियां पराबैगनी प्रकाश को देख सकते हैं, मनुष्य की आंखें पराबैंगनी प्रकाश को नहीं देख पाती, कीट पतंगे, अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश को देख कर अपने मार्ग का निर्धारण करते हैं, कई जीवों का मूत्र अल्ट्रावायलेट प्रकाश पर देखने पर चमकने लगता है जिससे शिकारी पक्षी अपने शिकार को आसानी से ढूंढ लेते हैं, अल्ट्रा वायलेट प्रकाश के इसी गुण का उपयोग करके पेस्ट कंट्रोल करने वाले इसका इस्तेमाल करतें हैं. इस प्रकाश से कीट पतंगों को पिंजरों की तरफ आकर्षित किया जा सकता है.

अल्ट्रावायलेट किरणों का पौधों पर प्रभाव

Effects of Ultraviolet radiation on plants

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बहुत कम मात्रा में अल्ट्रावॉयलेट विकिरण पौधों में फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया में सहायता प्रदान करती है किंतु अधिक मात्रा में अल्ट्रावायलेट किरणें पौधों के लिए नुकसानदायक होती है इससे पौधों के आकार में कमी होती है तथा कई फसलें बर्बाद हो सकती हैं कुछ पौधे ऐसे हैं जिन्हें अधिक अल्ट्रावायलेट किरणें नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे कि उनमें फल और फूल का उत्पादन कम हो जाता है तथा कुछ पौधों की प्रजातियां ऐसी हैं जोकि अल्ट्रावॉयलेट किरणों के प्रभाव में आकर बीमारी से ग्रसित हो जाती हैं,  अल्ट्रावॉयलेट किरणें पौधों की कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन कर सकती हैं इसलिए अधिक मात्रा में अल्ट्रावायलेट किरणें पेड़ पौधों और फसलों के लिए नुकसानदायक है.

वे कौन से जीव हैं जो अल्ट्रा वायलेट प्रकाश देख सकतें हैं 

मधु मक्खियाँ, तितली, रेन डियर, बिच्छु, सायमन मछली, तथा पक्षियों की कुछ प्रजातीयां अल्ट्रा वायलेट प्रकाश देख सकती है. बिच्छु अल्ट्रा वोइलेट प्रकाश में चमकते हैं पर वैज्ञानिक नहीं जानते की एसा क्यों होता है?

ultraviolet light

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मोबाईल रेडिएशन और उसके नुकसान की सम्पूर्ण जानकारी 

mobile radiation in hindi

मोबाईल टावर रेडिएशन Mobile Tower Radiation

वर्तमान समय में हम मोबाइल संचार प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर हो गए हैं शहरों में लगभग हर व्यक्ति के पास एक मोबाइल है, तथा थोड़ी थोड़ी दूर पर आपको मोबाइल के बड़े-बड़े टॉवर्स देखने को मिल जाएंगे. मोबाइल संचार प्रणाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स का उपयोग करती है, इस संचार प्रणाली में  माइक्रोवेव्स का उपयोग होता है जिनकी फ्रिकवेंसी आवृति 450 मेगाहर्ट्ज से 3800 मेगाहर्ट्ज तक होती है, फिफ्थ जेनरेशन मोबाइल संचार प्रणाली या 5g में 24 गीगाहर्टज से लेकर 80 गीगाहर्टज की फ्रीक्वेंसी का उपयोग किया जाएगा किया जा रहा है.

आज हम अपने पूर्वजों की तुलना में लाखों गुना ज्यादा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का सामना कर रहे हैं,  क्योंकि आज से मात्र 20- 25 साल तक पहले मोबाइल टॉवर्स नहीं थे, तथा केवल अंतरिक्ष से आने वाला बहुत हल्का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन ही था.  लेकिन अब मोबाइल के साथ साथ इंटरनेट का भी संचार माइक्रोवेव्स के द्वारा किया जा रहा है जिससे भी रेडिएशन बढ़ता जा रहा है.

विद्युत चुंबकीय रेडिएशन क्या है?

What is electromagnetic radiation hindi

विद्युत चुंबकीय रेडिएशन क्या है? What is electromagnetic radiation hindi

हम हमेशा विद्युत चुंबकीय तरंगों से घिरे रहते हैं, प्रकाश भी एक विद्युत चुंबकीय तरंग है,  इस तरंग की वेवलेंथ तरंग दैर्ध्य बदलने से अलग अलग तरह कि विद्युत चुंबकीय तरंगें उत्पन्न होती है, सबसे कम तरंग धैर्य की विद्युत चुंबकीय तरंग गामा रे हैं, उसके बाद एक्सरे, अल्ट्रावॉयलेट, दृश्य प्रकाश , उष्मीय किरण तथा माइक्रोवेव तथा रेडियो तरंगे आती है, रेडियो वेव की तरंगधैर्य सबसे अधिक होती है.

ज्यादा तरंग दैर्ध्य वाली विद्युत चुंबकीय तरंग दीवारों और मकानों के आर पार भी जा सकती हैं, मोबाइल और इंटरनेट संचार माध्यम में इसीलिए माइक्रोवेव और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है.

मोबाइल रेडिएशन का मापन तथा निर्धारण

How to check mobile radiation hindi

मोबाइल रेडिएशन को सार Specific absorption rate (SAR) वैल्यू में नापा जाता है, SAR रेडिएशन नापने की इकाई है जिससे उतकों द्वारा सौंपी गई ऊर्जा को नापा जाता है,  प्रत्येक देश की सरकारें यह निर्धारित करती है कि मोबाइल बनाने वाली कंपनियां कितने रेडिएशन छोड़ने वाला मोबाइल बना सकती है जैसे कि ऑस्ट्रेलिया में यह दर 2 वाट पर किलोग्राम है जबकि भारत में यह 1.6 व्हाट पर केजी रखा गया है इसे परमीसिबल सार वैल्यू कहते हैं.

आप किसी भी मोबाइल का सार वैल्यू  तथा तथा रेडिएशन लेवल आसानी से चेक कर सकते हैं इसके लिए दो तरीके हैं.  मोबाइल का रेडिएशन लेवल चेक करने के लिए आपको केवल एक छोटा सा कोड डायल करना होता है यह कोड *#07#  है अपने मोबाइल में यह कोड डायल करें को डायल करते ही आपको मोबाइल की सार वैल्यू पता चल जाएगी तथा आपके देश में मानक सार वैल्यू की जानकारी भी स्क्रीन पर आ जाएगी.

अगर आप इस तरीके से मोबाइल का रेडिएशन लेवल चेक ना कर पाए तो मोबाइल की बॉडी या मोबाइल के बॉक्स पर सार वैल्यू लिखी होती है यह प्रत्येक कंपनी के लिए लिखना आवश्यक है इस वैल्यू को पढ़कर भी आप मोबाइल का रेडिएशन लेवल जान सकते हैं.

मोबाईल रेडिएशन से नुकसान

Harmful effects of mobile radiation hindi

मोबाईल रेडिएशन से नुकसान Harmful effects of mobile radiation hindi

ऐसे में प्रश्न उठता है कि मोबाइल टावर रेडिएशन क्या हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है तथा इससे क्या-क्या नुकसान संभव है?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन कहती है कि”  पिछले दो दशकों में किए गए कई अध्ययनों से पता चलता है कि मोबाइल के उपयोग से कोई भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक प्रभाव उत्पन्न नहीं हो रहे हैं”  सन 2018 में एफडीए फूड एंड ड्रग एसोसिएशन ने अपने एक बयान में कहा कि वर्तमान समय में उपयोग किए जा रहे मोबाइल के सिग्नल हानि पहुंचा सकने वाले रेडियो फ्रिकवेंसी से 50 गुना कम है”

मोबाइल रेडिएशन का उतकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Mobile radiation Effects on cells hindi

अभी तक ज्ञात अध्ययनों से पता चला है कि मोबाइल रेडिएशन का हमारे शरीर के ऊतकों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता एक अध्ययन से पता चला है कि मोबाइल फोन का उपयोग करते समय आपके मस्तिष्क कोर्टेक्स की कोशिकाओं का तापमान 0.1 डिग्री बढ़ जाता है, इतने कम उतार-चढ़ाव का कोशिकाओं पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता इसे कहीं ज्यादा तापमान में बदलाव शरीर में होता रहता है.

मोबाइल रेडिएशन का मस्तिष्क की क्रियाविधि पर प्रभाव

Effect of Mobile Radiation on Mind

हमारा मस्तिष्क बहुत ही नाजुक अंग है इसमें कई न्यूरॉन्स कोशिकाएं होती है जिनमें विद्युत का संचार होता रहता है ऐसे में समाज में यह चिंता उत्पन्न होने लगी है कि क्या मोबाइल की रेडिएशन इन न्यूरॉन्स के काम में कुछ प्रभाव उत्पन्न करती है? वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि मोबाइल फोन के उपयोग से  मस्तिष्क में अल्फ़ा वेव एक्टिविटी में 5% का इजाफा होता है, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई विशेष बात नहीं है क्योंकि जब हम आंखें बंद करते हैं तो हमारी अल्फा वे एक्टिविटी दुगनी बढ़ जाती है मतलब इसमें सौ प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है, ऐसी स्थिति में अभी तक मोबाइल रेडिएशन का मस्तिष्क पर कोई बुरा असर देखने को नहीं मिला है.

क्या मोबाइल रेडिएशन से कैंसर हो सकता है?

Can mobile radiation cause cancer hindi

अभी तक किसी भी अध्ययन में यह तथ्य नहीं मिला है कि मोबाइल रेडिएशन से कैंसर हो सकता है ऑस्ट्रेलिया में किए गए एक अध्ययन से यह पता चला है कि मोबाइल फोन का जब से उपयोग शुरू हुआ है तब से लेकर कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी नहीं हुई है, मोबाइल आने से पहले जितने कैंसर के मरीज थे उतने ही वर्तमान समय में भी होते हैं. क्योंकि आस्ट्रेलिया एक विकसित देश है तथा वहां प्रत्येक कैंसर के मामले को दर्ज किया जाता है इसलिए इन आंकड़ों पर भरोसा किया जा सकता है.

भारत जैसे देश जहां पर प्रत्येक कैंसर का मामला  पिछले सालों में दर्ज नहीं हुआ है और ना ही वर्तमान समय में सभी केसेस दर्ज होते हैं अतः भारत में इस प्रकार किया कोई भी अध्ययन संभव नहीं है.

क्या 5G मोबाइल रेडिएशन से नुकसान संभव है?

Is 5g Radiation is harmful hindi

2G, 3G, 4G और 5G मोबाइल सेवा में केवल तरंगदैर्ध्य का अंतर है 4G अधिक तरंग दैर्ध्य  वाले रंगो का इस्तेमाल करता है तथा 5G, 4G से भी ज्यादा तरंगदैर्ध्य  वाली विद्युत चुंबकीय तरंगों का इस्तेमाल करता है,  अधिक तरंगदैर्ध्य वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें शरीर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती, 5G की तरंगे केवल आपकी त्वचा पर ही केन्द्रित होगी तथा मस्तिष्क की कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाएंगी, 5G की नई तकनीक  स्वास्थ्य के लिए और ज्यादा अच्छी हैं तथा इनके किसी भी प्रकार के नुकसान का पता वैज्ञानिकों को अभी तक नहीं चला है.

क्या वाईफाई रेडिएशन से नुकसान होता है? Wifi tower radiation

Effects of Wifi radiation

वर्तमान समय में घरों में वाई फाई टेक्नोलॉजी का भी उपयोग बढ़ गए हैं वाईफाई हॉटस्पॉट के द्वारा कई मोबाइल  मैं इंटरनेट चलाया जाता है, वाईफाई हॉटस्पॉट, वाईफाई टावर से भी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विद्युत चुंबकीय रेडिएशन निकलते हैं तथा यह मोबाइल के टावर के रेडिएशन से ज्यादा होते हैं. वाईफाई टावर से निकलने वाले रेडिएशन इतने खतरनाक नहीं होते कि मनुष्य के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकें एक अध्ययन के मुताबिक  1 वर्ष तक वाईफाई हॉटस्पॉट से इतना रेडिएशन नहीं निकलता जितना कि एक मोबाइल से 20 मिनट तक बात करने पर निकलता है. इस अध्ययन से यह बात साफ हो जाती है कि वाई फाई रेडिएशन से मनुष्य के स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है.

वास्तव में मोबाइल से नुकसान होता है!

Harmful effects of Mobile misuse hindi

वास्तव में मोबाइल से नुकसान होता है! Harmful effects of Mobile misuse hindi

हालांकि मोबाइल रेडिएशन से कोई विशेष नुकसान अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन स्वयं मोबाइल का उपयोग करने के कई सामाजिक, अध्यात्मिक और मानसिक नुकसान देखने में आए हैं मोबाइल का उपयोग बढ़ने से आज हम असामाजिक होते जा रहे हैं, बहुत कम लोग अपने स्वास्थ्य और अध्यात्म की तरफ ध्यान दे रहे हैं, तथा लाखों लोग ऐसे हैं जो अपने काम पर भी ध्यान नहीं दे पा रहे हैं पढ़ाई करने वाले बच्चे मोबाइल पर अधिक ध्यान देते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई में बहुत नुकसान होता है इस तरह मोबाइल के कई नुकसान है जो हमें हो रहे हैं इन नुकसानों की तरफ हमें ध्यान देना चाहिए और मोबाइल के उपयोग को कम से कम करना चाहिए.

रेडिएशन कम करने वाले झूठे उत्पाद तथा अनुपयोगी उत्पाद

Fake anti radiation products hindi

वर्तमान समय में बाजार में कई ऐसे प्रोडक्ट आ गए हैं जो आपको मोबाइल के रेडिएशन और वाईफाई के रेडिएशन से बचाने का दावा करते हैं इनमें से ज्यादातर प्रोडक्ट भ्रमित करने वाले हैं, अनुपयोगी  तथा केवल पैसे कमाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं क्योंकि इन उत्पादों से रेडिएशन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता.

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बहुत कम विकिरण भी खतरनाक है आपके शरीर की लिए

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नाभिकीय विकिरण का मनुष्य के शरीर पर क्या प्रभाव होता है?

नाभिकीय विकिरण क्या होता है?

किसी अस्थिर परमाणु के नाभिक से निकलने वाले उच्च उर्जा वाले आयन कण और गामा किरणों को नाभिकीय विकिरण कहते हैं.

कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जिनके परमाणु का नाभिक स्थिर नहीं होता तथा कुछ समय के बाद यह परमाणु दो परमाणुओं में विभक्त हो जाता है, इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहते हैं,  इस प्रक्रिया के दौरान आयन के के काण और उच्च ऊर्जा वाली गामा किरणें, परमाणु से निकलती है इन्हें नाभिकीय विकिरण कहा जाता है.

नाभिकीय विकिरण में क्या हौता है?

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नाभिकीय विकिरण में एक अल्फा पार्टिकल होता है जो कि हीलियम का नाभिक होता है इस पर 2 धनात्मक आवेश होता है तथा इसका रैखिक ऊर्जा स्थानान्तरण बहुत उच्च होता है.

नाभिकीय विकिरण से एक बीटा पार्टिकल भी निकलता है जो कि एक इलेक्ट्रॉन होता है इस पर एक ऋणत्मक आवेश होता है इसका भी रैखिक ऊर्जा स्थानान्तरण बहुत उच्च होता है.

नाभिकीय विकिरण से उच्च ऊर्जा वाली गामा रे किरणें भी निकलती हैं जिन पर किसी भी प्रकार का आवेश नहीं होता.

नाभिकीय विकिरण में पाए जाने वाली ये तीनों तत्व मनुष्य के शरीर को बहुत हानि पहुंचाते हैं.

नाभिकीय विकिरण से मनुष्य के शरीर के किन-किन अंगों को नुकसान पहुंचता है

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मनुष्य के शरीर पर नाभिकीय विकिरण का कितना नुकसान होगा यह इस बात पर निर्भर करता है की  शरीर के अंदर कितनी ऊर्जा समाहित हुई है? शरीर की कोशिकाओं में जितनी ऊर्जा गई होगी उतना ही ज्यादा नुकसान होगा, शरीर द्वारा सोखी गई उर्जा को वैज्ञानिक rems रेम्स इकाई में नापते हैं.

नाभिकीय विकिरण से मनुष्य के विभिन्न अंगों पर अलग अलग तरह का नुकसान होता है

 बालों पर  विकिरण का नुकसान

नाभिकीय विकिरण के प्रभाव में आने पर शरीर के बाल झड़ने लगते हैं 200 rems रेम्स या उससे अधिक के विकिरण के संपर्क में आने पर बाल गिरना प्रारंभ हो जाते हैं.

मस्तिष्क पर विकिरण का नुकसान

मस्तिष्क की कोशिकाएं विभाजित नहीं होती इसलिए इन पर नाभिकीय विकिरण का ज्यादा नुकसान नहीं होता, 5000 rems रेम्स या उससे अधिक के विकिरण मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं.

थायराइड ग्रंथि पर नाभिकीय विकिरण का नुकसान

शरीर के कुछ ऐसे हैं अंग हैं जो अलग-अलग प्रकार के रेडिएशन से प्रभावित होते हैं, जैसे कि थायराइड ग्रंथि  को रेडियोएक्टिव आयोडीन से ज्यादा नुकसान होता है आयोडीन थायराइड ग्रंथि को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है, पोटेशियम आयोडाइड का सेवन करने से रेडियोएक्टिव आयोडीन के प्रभाव को कम किया जा सकता है.

रक्त पर  रेडीएशन का दुष्प्रभाव

जब कोई व्यक्ति को 100 rems रेम्स के विकिरण के प्रभाव में आ जाता है तो उसके रक्त के लिंफोसाइट कोशिकाएं कम हो जाती है इससे वह व्यक्ति इनफेक्शन का शिकार हो सकता है इसे रेडिएशन सिकनेस कहते हैं इसके पहले सिम्टम्स सामान्य सर्दी जुकाम और फ्लू की तरह होते हैं, इसका पता तब चलता हे जब कि लिंफोसाइट की संख्या की  ब्लड टेस्ट के दौरान चेकिंग की जाती है.

हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु बम के प्रभाव का निरीक्षण करने पर पता चला है कि, इसके प्रभाव 10 साल बाद तक पाए गए, इस तरह के विकिरण से रक्त में ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसी खतरनाक बीमारी हो जाती है.

दिल पर रेडीएशन  का प्रभाव

1000 rems रेम्स से 5000 rems रेम्स तक के विकिरण ह्रदय को नुकसान पहुंचा सकते हैं, रक्त वाहिनीयां  और तंत्रिकाएं मरने लगती हैं जिससे कि अचानक हार्ट फैलियर और व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है.

आहार तन्त्र पर किरणों का प्रभाव

नाभिकीय विकिरण मनुष्य के आंतों की परत को खराब कर देते हैं जिससे कि उसे खून की उल्टी होना दस्त लगना आदि बीमारियां हो जाती हें, सिर्फ 200 rems रेम्स के विकिरण भी मनुष्य की आंतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं जो कोशिकाएं बहुत तेजी से विभाजित होती हैं रेडिएशन पर उसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है.

प्रजनन अंगों पर रेडीएशन  का नुकसान

प्रजनन अंगों में कोशिकाएं बहुत तेजी से विभाजित होती हैं इसीलिए इन अंगों की कोशिकाएं सिर्फ 200 rems रेम्स के नाभिकीय विकिरण से भी प्रभावित हो जाती हैं और व्यक्ति के प्रजनन अंग काम करना बंद कर देते है और व्यक्ति बाँझ हो जाता है.

इस तरह हम देखते हैं कि जो कोशिकाएं बहुत तेजी से विभाजित होती हैं उनको नाभिकीय विकिरण से सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है,  मनुष्य के हृदय और प्रजनन अंग पर रेडियोएक्टिव विकिरणों का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव होता है केवल 200 rems रेम्स के विकिरण भी मनुष्य के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डाल सकते हैं.

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बैक्टीरिया वायरस और पेरासाईट से होने वाली बिमारियों की रोकथाम

बैक्टीरिया वायरस और पेरासाईट से होने वाले रोगों से बचने के उपाय

Preventive measures of parasitic, bacterial & Viral disease

बैक्टीरिया वायरस और पेरासाईट से होने वाली बिमारियों की जानकारी

Information about  parasitic, bacterial & Viral disease in hindi

इस पृथ्वी पर कई प्रकार के जीव पाए जाते हैं जैसे पेड़ पौधे जानवर मछलियां मनुष्य आदि परंतु कुछ जीव  ऐसे भी हैं जो हमें आंखों से नहीं दिखाई देते हैं इन्हें सूक्ष्मजीव कहते हैं यह मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं विषाणु-वायरस,  बैक्टीरिया-जीवाणु , और पैरासाइट यानी परजीवी.

इन तीनों प्रकार के सूक्ष्मजीव में से कुछ प्रकार के सूक्ष्मजीव हमारे अंदर रोग उत्पन्न कर देते हैं,  कुछ कुछ बीमारियां वायरस की वजह से होती हैं कुछ बीमारियां जीवाणु की वजह से तथा कुछ हमारे शरीर में किसी पैरासाइट के पहुंच जाने से होती है.

आइए जानते हैं कि इन तीनों प्रकार के  सूक्ष्मजीवों से हमारे अंदर कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं,  तथा हम क्या उपाय कर सकते हैं जिससे कि हम इन बीमारियों से बच सकें.  अगर हम पहले ही बैक्टीरिया वायरस और पैरासाइट से होने वाले रोगों की रोकथाम के उपाय  कर ले तो हम बहुत सारी बीमारियों से बच सकते हैं. लेकिन इसके पहले हमें मालूम होना चाहिए कि यह तीनों हमारे अंदर किस तरह की बीमारियां उत्पन्न करते हैं और इन बीमारियों के रोकथाम के उपाय क्या है

बैक्टीरिया(जीवाणु) से होने वाली बीमारियाँ – bacterial disease in hindi

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कुछ बेक्टेरिया मनुष्य में रोग उत्पन्न करते हैं इन्हें पेथोजेंस बैक्टीरिया कहते हैं कुछ प्रमुख रोग उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया और उन से वार होने वाले रोग निम्न है.

बेक्टेरिया की सम्पूर्ण रोचक जानकारी आप हमारे इस लेख से प्राप्त कर सकते हैं – बेक्टेरिया की रोचक जानकारी

रोग का नाम  – Pulmonary Tuberculosis बेक्टेरिया  – Mycobacterium tuberculae ईलाज-दवाइयाँ  – Streptomycin, para-amino salicylic acid, rifampicin etc.

रोग का नाम  Diphtheria बेक्टेरिया – Corynebacterium diphtheriae ईलाज-दवाइयाँ – Diphtheria antitoxins, Penicillin, Erythromycin.

रोग का नाम  -. Cholera बेक्टेरिया  – Vibrio cholerae ईलाज-दवाइयाँ – Oral rehydration therapy & tetracycline.

रोग का नाम  -. Leprosy (Hansen’s Disease) बेक्टेरिया  – Mycobacterium leprae ईलाज-दवाइयाँ – Dapsone, rifampicin, Clofazimine.

रोग का नाम  – Pertussis (Whooping Cough): बेक्टेरिया  – Bordetella pertussis ईलाज-दवाइयाँ – Erythromycin.

रोग का नाम  – Tetanus (Lock Jaw) बेक्टेरिया  – Clostridium tetani ईलाज-दवाइयाँ – Tetanus- antitoxins.

रोग का नाम  – Plague बेक्टेरिया  Pasteurella (or Yersinia) pestis ईलाज-दवाइयाँ – Tetracycline, streptomycin, Chloromycetin.

रोग का नाम  – Gonorrhoea बेक्टेरिया  – Neisseria gonorrhoeae ईलाज-दवाइयाँ – Penicillin & Ampicillin

रोग का नाम  -. Syphilis बेक्टेरिया – Treponema pallidum ईलाज-दवाइयाँ – Tetracycline & penicillin

रोग का नाम  -. Salmonellosis बेक्टेरिया  – Salmonella enteridis ईलाज-दवाइयाँ – Antibiotics.

बैक्टीरिया- वायरस और परसाईट  से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के उपाय

बैक्टीरिया से होने वाले रोग कुछ हल्के होते हैं कुछ गंभीर तथा कुछ लोग जीवन के लिए घातक भी हो सकते हैं यह रोग आपकी त्वचा आपके रक्त और शरीर के अंदर दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं अगर आपको लगता है कि अब बैक्टीरिया से होने वाले किसी रोग से ग्रसित हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए लेकिन कुछ आसान  तरकीबें ऐसी है जिससे आप सिर्फ अपनी आदतों को बदल कर बैक्टीरिया वायरस और परसाईट से होने वाले रोगों की रोकथाम कर सकते हैं.

इनफेक्शन (संक्रमण)  से बचने की रणनीतियां

अपने हाथों को हमेशा साफ  रखें, खाना बनाने के पहले और बाद हाथों को धोएं,  किसी बीमार के पास से आने के बाद हाथ धोएं, दैनिक कार्यों को पूरा करने के बाद हाथ धो हैं धोएं,,  धूल कचरे आदि को साफ करने के बाद हाथ धोएं, अपने पालतू जानवर को छूने और खाना खिलाने के बाद भी हाथ धोएं.

सभी के द्वारा उपयोग में आने वाली वस्तुओं को साफ रखना चाहिए,  ऐसी वस्तुएं जिन्हें घर के सभी सदस्य होते हैं उन्हें साफ होना चाहिए जैसे दरवाजे के हैंडल नल टेलीफोन मोबाइल कंप्यूटर कीबोर्ड इत्यादि हफ्ते में एक बार इसे किसी ने नीसंक्रामक  डिसइनफेक्टेड रसायन से अवश्य साफ करें.

बीमार व्यक्ति से दूर रहे,  अपने ऑफिस कार्यस्थल या घर पर अगर कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो दूसरे स्वस्थ व्यक्तियों को उनसे सावधानी से संपर्क करना चाहिए.  बीमार व्यक्ति के टॉवल और उपयोग की वस्तुएं अलग होनी चाहिए तथा उन्हें अच्छी तरह धोना चाहिए. अपने हाथों को अपने होठों और मुंह से दूर रखें.

खाने-पीने की चीजों में आ जाने वाले सूक्ष्म जीवों से बचाव

कई बार खाने पीने की चीजों में बैक्टीरिया वायरस आ  जाते हैं जो कि हमें बीमार कर देते हैं, खाना बनाने से पहले हाथ धोले सब्जियों फलों सभी को अच्छी तरह धो  कर उपयोग में लें.

खाने को अच्छी तरह पकाएं जिससे कि उसके अंदर मौजूद सभी बैक्टीरिया खत्म हो जाए,  कच्चे खाद्य पदार्थों को खाने से बचें, बर्तनों को अच्छी तरह साफ करें तथा उसके बाद ही उनका पुनः उपयोग करें किचन टेबल कटिंग रोड आदि सभी की अच्छी तरह सफाई करें क्योंकि ध्यान रखिए खाने में बहुत जल्दी बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं इसलिए आपको किचन की अधिक से अधिक अच्छी सफाई रखनी चाहिए.  डिब्बाबंद खाना का उपयोग सावधानी से करें, बाहर से मंगाए गए खाने को अच्छी तरह गर्म करने के बाद ही खाएं.

बच्चों के कपडे, खेलने के स्थान फर्श और खिलौनों को हमेशा साफ रखें .

वायरस (विषाणु) से होने वाली बीमारियां viral diseases list in hindi

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कुछ वायरस मनुष्य में खतरनाक बीमारियां उत्पन्न करते हैं,  वायरस से होने वाली मुख्य रोगों की सूची इस प्रकार है

 

वायरस रोग इलाज-दवाई
Herpes simplex virus 1 Gingivostomatitis Acyclovir
Varicellazoster virus Chicken pox Acyclovir
Cytomegalo virus Congenital abnormalities Ganciclovir
Epstein-barr virus Hairy leukoplakia Acyclovir has little activity
Variola virus Small pox Vaccination
Adeno virus pharyngitis No anti viral therapy
Papilloma virus Cancer Alpha interferon, Cidofovir
Parvo virus Erythema infectiosum Pooled immuno globulin
Influenza virus Influenza Amantadine, rimantadine, zanamivir
Measles virus Measles No anti viral therapy
Mumps virus Paratoid gland swalling Vaccination
Respiratory syncytial virus Pneumonia, bronchiolitis Virazole, Ribavirin
Para influenza virus Croup, Pneumonia, bronchiolitis No vaccine available.
Corona virus Typical pneumonia Ribavirin and steroid
Rubella virus Rubella (german measeles) Vaccination
Rabbies virus Rabbies No antiviral therapy.
Human T-cell lymphotropic virus Leukemia Chemotherapy, Danazole.
Picorna virus Hepatitis A Immune globulin
Hepa DNA virus Hepatitis B Pegasys, Peg-introne, Epivir-HBV
Flavivirus Hepatitis C Alpha interferone
Deltavirus Hepatitis D Alpha interferone
Calicivirus Hepatitis E Recombinent vaccine
Polio virus Poliomyelitis Vaccines are present

वायरस से होने वाली बीमारियाँ  की रोकथाम के उपाय

preventive measures of viral diseases in hindi

वायरस से होने वाली बिमारियों की रोकथाम के लिए आप ऊपर बताये गए साफ सफाई के उपाय अपनाकर वाइरल रोगों से बच सकतें हैं.

पेरासाईट (परजीवी)  से होने वाली बीमारियां parasitic diseases in hindi

कुछ सूक्ष्म जीव ऐसे होते हैं जो कि दूसरों जीवो पर निर्भर होते हैं इन्हें पैरासाइट या परजीवी जीव कहते हैं,  यह पर जीव दूसरे जीव के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और उस जीव के रक्त से पोषक तत्व हासिल करते हैं और अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं.  पैरासाइट भी मनुष्य में कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करते हैं इनमें से कुछ मुख्य पैरासाइट से होने वाली बीमारियां और उनका इलाज नीचे दिया गया.

पेरासाईट का नाम रोग इलाज- दवाई
Entamoeba histoloitica Dysentery Metronidazole,Iodoquinole
Giardia lamblia DiarrheaGiardiasis Metronidazole
Cryptosporidium parvum Diarrhea,Cryptosporidiosis Paromomycin
Trichomonas vaginalis Trichomoniasis Metronidazole
Plasmodium malariae Malaria Quinine,Doxycycline
Toxoplysma gondii Toxoplasmosis Sulphadiazine,Pyrimethamine
Pneumocystis jiroveci Pneomonia Pantamidine
Trypanosoma cruzi Chagas disease Benznidazole
Trypanosoma gambiense Sleeping sickness Suramin + melarsoprol
Leishmania donovani Kala-azar Sodium stibogluconate
Diphyllobothrium latum Diphyllobophriasis Praziquantel
Echinococcus granulosus Hydatid cyst Albandazole
Taenia saginata Taeniasis Praziquontel
Taenia solium Cysticercosis Praziquontel
Schistosoma mansoni Schistosomiasis Praziquontel
Clonorchis sinensis Clonorchiasis Praziquontel
Paragonimus westermani Paragonimiasis Praziquontel
Ancylostoma duodenale Hookworm Mebendazole
Ascaris lumbricoides Ascareiasis Mebendazole
Enterobius vermicularis Pin worm infection Mebandazole
Strogyloides stercoralis Strogyloidiasis Thiabendazole
Trichinella spi rallis Trichinosis Thiabendazole
Trichuris trichiura Whip worm Mebendazole
Dracunculus medineinsis Dracunculiasis Metronedazole
Loa loa loiasis Diethylcarbamazine  
Onchocerca volvulus Onchocerciasis Ivermectin ,suramin  
Wuchereria bancrofti Filariasis Diethylcarbamazine  
Toxocara canis Visceral larva migrans Albendazole  
Pediculus humanus Pediculosis Permethrin  
Dermetobia huminis Myiasis Surgical removal of larva  
Sarcoetes scabiei Scabies Permethrin  
Dermacentor Tick paralysis Surgical remover  
Latrodectus mactans Spider bites Antivenome  

पेरासाईट से होने वाली बीमारियों  की रोकथाम के उपाय

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पैरासाइट से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए आपको साफ सफाई के जो उपाय ऊपर बताए गए हैं वे सभी करने हैं यह उपाय आपको पैरासाइट से बचा सकते हैं

पैरासाइट मारने वाले फलों और सब्जियों का सेवन करें

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Parasite killing fruits and vegetables

कुछ फल और सब्जियां ऐसे होते हैं जो कि पैरासाइट को खत्म करते हैं अपने आहार में इन फलों सब्जियों को शामिल करें इन फलों में पाइनएप्पल, ब्लैकबेरी, अनार तथा पपीता प्रमुख हैं आप इन फलों को सीधा खा सकते हैं या इन्हें ज्यूस बनाकर भी उपयोग में ले सकते हैं इन फलों के जूस में शकर ना   मिलाएं

पैरासाइट मारने वाली कुछ सब्जियां भी होती हैं जैसे कि प्याज लहसुन गोभी गाजर चुकंदर इत्यादि,  इन सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें.

अपने पेट को साफ रखें. Clean your intestines

हमारी आँतों में  पैरासाइट पनप सकते हैं इसके लिए हमें अपने आंतों को साफ रखना चाहिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिए, शक्कर की बहुत कम मात्रा लें, क्योंकि शक्कर  से ऊर्जा प्राप्त कर पैरासाइट बहुत तेजी से हमारी आंतों में बढ़ते हैं.

पैरासाइट को खत्म करने के लिए प्रोबायोटिक का इस्तेमाल करें  प्रोबायोटिक्स वह पदार्थ होते हैं जिनमें अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं यह अच्छे बैक्टीरिया पैरासाइट को खत्म कर देते हैं दही का सेवन करें यह एक प्रोबायोटिक है. आप बाजार से प्रोबायोटिक सप्लीमेंट की गोलियां भी ले सकते हैं

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प्रोबिओटिक की गोलियां यहाँ से प्राप्त करें लिंक  Probiotic tablets

अपना इम्यून सिस्टम ठीक रखें-  पर्याप्त नींद, विटामिन सी और जिंक की मात्रा अपने आहार में लें इससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होगा और पैरासाइट आप पर हमला नहीं कर पाएंगे एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 8 घंटे की नींद लेना चाहिए.

सेब का सिरका-  सेब का सिरका भी इनफेक्शन खात्म करने में मदद करता है इसमें विटामिन पाए जाते हैं तथा यह एसिडिक पीएच होने के कारण पेरासाईट  को मार देता है

Neem is a anti parasitic  नीम भी एंटी पैरासाइट है

नीम भी एंटी पैरासाइट है नीम का तेल का सेवन करें यह भी वेबसाइट को मारने वाला होता है आजकल बाजार में नीम के तेल के कैप्सूल भी उपलब्ध है नीम की पत्तियों दातुन निंबोली आदि का भी प्रयोग करें

नीम केप्सूल यहाँ से प्राप्त करें Neem टेबलेट्स  

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बेक्टेरिया-जीवाणु की समस्त उपयोगी जानकारी

दुनिया में इतने बेक्टेरिया क्यों हैं? ये कौन कौन से रोग उत्पन्न करतें हैं?

why there is so much bacteria on earth

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बेक्टेरिया क्या होते हैं? what is bacteria in hindi

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बैक्टीरिया बहुत छोटे जीव होते हैं  यह एक कोशीय सूक्ष्मजीव है इन बैक्टीरिया में न्यूक्लियस नहीं होता जैसा कि अन्य जीवो की कोशिकाओं में पाया जाता है ज्यादातर जीवाणुओं की कोशिका भित्ति नहीं होती है जीवाणुओं में डीएनए पाया जाता है तथा इनकी बायोकेमिस्ट्री दूसरे जीवो के समान ही होती है यह जीवन का सबसे सरलतम और प्राचीनतम रूप है. इस लेख में आपको बेक्टेरिया की सभी जानकारी एक जगह ही मिल जाएगी.

सभी बैक्टीरिया बहुत छोटे आकार के होते हैं जिन्हें आंखों से नहीं देखा जा सकता इन्हें देखने के लिए माइक्रोस्कोप की आवश्यकता पड़ती है बैक्टीरिया सिर्फ एक कोशिका के बने होते हैं यह सबसे सरलतम जीवो में से होते हैं कुछ बैक्टीरिया काफी कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहते हैं जैसे की बिना ऑक्सीजन का वातावरण और अत्यधिक गर्म जगह.

बेक्टेरिया पृथ्वी पर हर जगह क्यों पायें जाते हैं? why bacteria is so abundant on earth?

बैक्टीरिया सारी पृथ्वी पर प्रचुरता से पाए जाते हैं, सुई की एक नोक पर 10 हज़ार तक बेक्टेरिया आराम से रह सकते हें, हमारी त्वचा के 1 वर्ग इंच में 5 लाख की संख्या में बेक्टेरिया मौजूद रहते हैं, ज्यादातर बैक्टीरिया धरती और पानी में पाए जाते हैं कुछ बेक्टेरिया दूसरों जीवो के शरीर के अंदर और उनकी त्वचा पर भी पाए जाते हैं.  मनुष्य की त्वचा और मनुष्य की शरीर पर भी लाखों बैक्टीरिया पाए जाते हैं कुछ बेक्टेरिया हमारे अंदर रोग भी उत्पन्न करते हैं इन्हें पथोजेंस बैक्टीरिया कहते हैं तथा कुछ मनुष्य के लिए फायदेमंद साबित होते हैं, कुछ अच्छे बैक्टीरिया हमारे भोजन को पचाने में सहायता प्रदान करते हैं इन्हें गट बेक्टेरिया कहा जाता है तथा कुछ चीज, पनीर और योगर्ट यानी की दही बनाने के काम में आते हैं.

बैक्टीरिया जीवाणु का जन्म कैसे होता है how bacteria get birth?

बैक्टीरिया अपनी संख्या विभाजित होकर बढ़ाते हैं, एक बैक्टीरिया दो छोटे बैक्टीरिया में विभाजित हो जाता है नए उत्पन्न हुए दोनों छोटे बैक्टीरिया पुरानी बैक्टीरिया के समान होते हैं परंतु इनका आकार छोटा होता है. यह दो छोटे बैक्टीरिया बड़े होकर पुनः विभाजित हो जाते हैं तथा चार बेक्टेरिया  उत्पन्न करते हैं इस प्रकार बैक्टीरिया की संख्या बढ़ती रहती है.

बैक्टीरिया का आकार the size of bacteria

बैक्टीरिया कई प्रकार के आकार और प्रकारों में पाए जाते हैं,  यह वायरस से 10 गुना बड़े होते हैं सामान्यता एक बैक्टीरिया या 1 माइक्रोमीटर के बराबर होता है यदि 1000 बैक्टीरिया को एक लाइन में रखा जाए तो यह एक मिली मीटर लंबे दिखाई देंगे,  पृथ्वी पर बैक्टीरिया की संख्या नोनिलियन यानि की कुल 5 x 10 की घात 30 मानी गई है.

बेक्टेरिया का जीवन काल The lifespan of bacteria

बेक्टेरिया का जीवन काल निश्चित नहीं होता, क्यों की यह बूढ़े नहीं होते, एक बेक्टेरिया दो बैक्टीरिया में विभाजित हो जाता हे, बेक्टेरिया 12 मिनिट से लेकर 24 घंटे में विभाजित हो जाता हे, इसलिए बेक्टेरिया का औसत जीवन काल 12 घंटे हौता है.  

बैक्टीरिया  कितने प्रकार के होते हैं ? How many types of bacteria

बैक्टीरिया की पहचान और वर्गीकरण उनके आकार के आधार पर किया जाता है बेसिल्ली bacilli  बैक्टीरिया छड के आकार के होते हैं, cocci बैक्टीरिया गोलाकार होते हैं, spirilla बैक्टीरिया स्पाइरल आकार के होते हैं,  vibiro बैक्टीरिया अनियमित आकार होते हैं.

 पेथोजेंस – रोग उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया – pathogens kya hote hain? 

कई प्रकार के बैक्टीरिया मनुष्य में रोग उत्पन्न करते हैं यह हवा पानी और खाने के द्वारा शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं एक बार शरीर में प्रवेश होने के बाद यह कोशिकाओं की दीवार से चिपक जाते हैं तथा अपनी संख्या को बढ़ाने लगते हैं,  यह शरीर से ही पोषक तत्व प्राप्त करते हैं और अपनी संख्या को बढ़ाकर हमें भी मार कर देते हैं

एक्सट्रीमोफिल्स बैक्टीरिया Extremophiles Bacteria

कुछ बैक्टीरिया एक्सट्रीमोफील्स होते हैं यह काफी कठिन वातावरण में भी जीवित रह जाते हैं या दूसरे जीव जीवित नहीं रह पाते जैसे कि चट्टानों के 580 मीटर नीचे  पृथ्वी की गहराई में जहां प्रकाश और हवा दोनों नहीं होते हैं ज्वालामुखी विंड्स के पास एक रिसर्च के मुताबिक पृथ्वी परलगभग हर जगह बैक्टीरिया पाए जाते हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि यह हर प्रकार के वातावरण के अनुसार अपने आप को अनुकूलित कर लेते हैं

प्रमुख रोग उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया कौन कौन से हैं? list of disease causing bacteria

कुछ बेक्टेरिया मनुष्य में रोग उत्पन्न करते हैं इन्हें पेथोजेंस बैक्टीरिया कहते हैं कुछ प्रमुख रोग उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया और उन से वार होने वाले रोग निम्न है

रोग का नाम  – Pulmonary Tuberculosis:

बेक्टेरिया  – Mycobacterium tuberculae

ईलाज-दवाइयाँ  – Streptomycin, para-amino salicylic acid, rifampicin etc.

 

रोग का नाम  Diphtheria:

बेक्टेरिया – Corynebacterium diphtheriae

ईलाज-दवाइयाँ – Diphtheria antitoxins, Penicillin, Erythromycin.

 

रोग का नाम  -. Cholera:

बेक्टेरिया  – Vibrio cholerae

ईलाज-दवाइयाँ – Oral rehydration therapy & tetracycline.

 

रोग का नाम  -. Leprosy (Hansen’s Disease):

बेक्टेरिया  – Mycobacterium leprae

ईलाज-दवाइयाँ – Dapsone, rifampicin, Clofazimine.

 

रोग का नाम  – Pertussis (Whooping Cough):

बेक्टेरिया  – Bordetella pertussis

ईलाज-दवाइयाँ – Erythromycin.

 

रोग का नाम  – Tetanus (Lock Jaw):

बेक्टेरिया  – Clostridium tetani

ईलाज-दवाइयाँ – Tetanus- antitoxins.

 

रोग का नाम  – Plague:

बेक्टेरिया  Pasteurella (or Yersinia) pestis

ईलाज-दवाइयाँ – Tetracycline, streptomycin, Chloromycetin.

 

रोग का नाम  – Gonorrhoea:

बेक्टेरिया  – Neisseria gonorrhoeae

ईलाज-दवाइयाँ – Penicillin & Ampicillin.

 

रोग का नाम  -. Syphilis:

बेक्टेरिया – Treponema pallidum

ईलाज-दवाइयाँ – Tetracycline & penicillin.

 

रोग का नाम  -. Salmonellosis:

बेक्टेरिया  – Salmonella enteridis.

ईलाज-दवाइयाँ – Antibiotics.

 

उपयोगी बैक्टीरिया की जानकारी – list of useful bacteria

सभी बैक्टीरिया हार्मफुल नहीं होते कुछ  बैक्टीरिया मनुष्य के लिए उपयोगी भी होते हैं इनमें से कुछ उपयोगी बैक्टीरिया इस प्रकार हैं, इन्हें प्रोबायोटिक भी कहा जाता है, मनुष्य की आंतों  में पाए जाने वाले कुछ बैक्टीरिया दूसरे खतरनाक बेक्टेरिया को मार देते हैं. कुछ बैक्टीरिया विटामिन k तथा मैग्नीशियम को अवशोषित करने में मदद करते हैं, यह जीवाणु भोजन को के पाचन में भी सहायता प्रदान करते हैं भोजन में पाए जाने वाले जटिल तत्वों को यह तोड़कर यह आसान पाचक तत्वों में बदल देते हैं

कुछ बैक्टीरिया खाद्य पदार्थ बनाने की भी काम आते हैं जैसे कि पनीर, दही, सिरका विनेगर.

Lactobacillus Acudiophilus

यह बैक्टीरिया मनुष्य के लिए फायदेमंद होता है यह ज्यादातर डेयरी उत्पादों में पाया जाता है इसे दही चीज, पनीर  बनाने के काम में उपयोग में लिया जाता है,यह बैक्टीरिया विटामिन k, लेक्टेड और हाइड्रोजन पेरोक्साइड उत्पन्न करते हैं. इनका उपयोग दस्त लगने की बीमारी में भी किया जाता है यह बैक्टीरिया दूसरे बीमारी उत्पन्न करने वाले बेक्टेरिया को खत्म करते हैं.

Tobacillus acidophilus

यह बैक्टीरिया भी दही क्रीम मक्खन आदि में पाया जाता है यह शर्करा और कार्बोहाइड्रेट्स को लेक्टिक  एसिड में बदल देते हैं इसीलिए इन्हें लेक्टिक एसिड बैक्टीरिया भी कहा जाता है यह भी दूसरे खतरनाक बेक्टेरिया को पनपने नहीं देते हैं यह जीवाणु ऐनारोब्स Anaerobes होते हैं अर्थात इन्हें जीने  के लिए ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती है, विनेगर बनाने और चीज बनाने में इनका उपयोग किया जाता है.

Lactobacillus reuteri

यह  बैक्टीरिया ब्रेस्ट मिल्क और आंतों में पाया जाता है.

Acidophilus bifidus

यह बेक्टेरिया भी लैक्टिक एसिड और हाइड्रोजन पेराक्साइड उत्पन्न करते हैं जिसकी वजह से हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनप पाते कुछ लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया कोलेस्ट्रोल कम करने में भी सहायता प्रदान करते हैं.

Escherichia coli

इस प्रकार के बैक्टीरिया मनुष्य की आंतों  में पाए जाते हैं तथा कई बीमारियों को ठीक करने में काम में लिए जाते हैं इनमें से प्रमुख ulcerative colitis, crohn’s disease, chronic constipation, irritable bowel syndrome हैं.

Streptococcus Thermophilus

चीज बनाने में इस बैक्टीरिया की भी आवश्यकता पड़ती है,  कभी-कभी पाश्चराइज्ड दूध बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है.

Streoticiccys Faecium

यह बैक्टीरिया मनुष्य में डायरिया की बीमारी की रोकथाम में काम आता है तथा मनुष्य का पाचन तंत्र सही रखता है.

नाईट्रोजन चक्र में बेक्टेरिया की भूमिका Role of bacteria in Nitrogen cycle

बेक्टेरिया पृथ्वी के नाईट्रोजन चक्र में बहुत महतवपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे की सभी पौधों और जीवों को फायदा होता है.

Nitrosomonas नाइट्रोजन गेस को nitrite (NO2) में बदल देता हैं, इसके बाद nitrobacter बेक्टेरिया इसे नाइट्रेट (NO3) में बदल देता है, पौधे इस नाइट्रेट का अवशोषण कर लेतें हें, यह उनके लिए पोषक हौता है, इसके पश्चात् पौधे इसे नायट्रोजन युक्त कार्बनिक प्रदार्थों में बदल देते हैं, इस प्रकार प्रथ्वी पर नायट्रोजन चक्र चलता रहता है.

nitrogen chakra bacteria in hindi

 

 

 

 

पीने के पानी को शुद्ध और बक्टेरिया मुक्त कैसे करें?

पानी से बेक्टेरिया और हानिकारक तत्व कैसे हटायें?

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पीने के पानी को जीवाणु रहित, बैक्टीरिया फ्री बनाना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि हानिकारक जीवाणुओं से  दूषित पानी से मनुष्य में कई रोग हो जाते हैं, अगर हम स्वस्थ रहना चाहते हैं तो हमें हमेशा साफ जीवाणु रहित और दूसरे हानिकारक तत्वों से मुक्त पानी ही पीना चाहिए.  तो आइए जानते हैं कि हम अपने पीने के पानी को साफ स्वच्छ और बैक्टीरिया मुक्त कैसे बना सकते हैं?

 

कैसे पता करें की पानी में बैक्टीरिया और विषैले तत्व है या नहीं?

बड़े आकार के कणों से पानी को स्वच्छ बनाना how to remove big particles from water?

कई बार पीने के पानी में छोटे कीड़े, मिट्टी, पौधों की जड़ें ,और पत्तियां इस प्रकार के तत्व आ जाते हैं पीने के पानी में इन तत्वों को अलग करना काफी आसान है इसके लिए किसी पतली छन्नी या  किसी कपड़े से इस पानी को छान लें जिससे कि यह बड़े कण धूल मिट्टी पौधों की जड़े पत्तियां पानी से निकल जाये और पानी साफ हो जाये.

पानी छानने का फिल्टर बना ले make a water filter

आप मोटी रेत,बालू रेत, कोयले आदि का इस्तेमाल कर अपने लिए एक पानी का सरल  फ़िल्टर बना सकते हैं यह फिल्टर मटमैले पानी को साफ करता है.

अवसादन की प्रक्रिया से पानी को साफ करना sedimentation process for water cleaning

किसी लम्बे  जार या बर्तन में पानी भर ले तथा इससे कुछ देर रखा रहने दे इससे भारी करण तल  में बैठ जाएंगे और हल्के कण सतह पर आ जाएंगे हल्के कणों को चम्मच से बाहर निकाल कर फेंक दें और  ऊपर का पानी अलग निकाल लें तथा नीचे का पानी फेंक दें इस तरह आप पानी से कुछ बड़े कणों को दूर कर सकते हैं.

पानी को केमिकल्स के द्वारा साफ करना. How to clean water by chemicals

बाजार में पानी को साफ करने की कई गोलियां मिलती है,  इन्हें वॉटर पुरीफिकेशन टेबलेट कहा जाता है मुख्यतः यह  क्लोरीन डाइऑक्साइड या आयोडीन की बनी होती है. पानी को साफ़ करने के लिए मुख्यतः क्लोरिन, क्लोरिन डाइऑक्साइड और आयोडीन प्रदार्थ का उपयोग किया जाता हे.

क्लोरीन डाइऑक्साइड और आयोडीन पानी के अंदर मौजूद जीवाणुओं और वायरसों को मार देता है इनका उपयोग करने के लिए एक जार में पानी भरे और एक गोली इसमें डाल दें इन गोलियों को काम करने में 30 मिनट से 4 घंटे का समय लगता है 1 लीटर वाटर में एक छोटी गोली डाली जाती है, गोली का उपयोग पेकेट पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करें.

यह ध्यान रखें कि यह गोलियां प्रोटजोआ को नहीं मारती है और विषैले केमिकल्स को भी दूर नहीं करती है.  एक तरह से देखा जाए तो इन गोलियों में ही विषैले तत्व मौजूद है.

आयोडीन सामान्यतः गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदायक होता है,  क्लोरीन डाइऑक्साइड और आयोडीन के और भी कई नुकसान देखे गए हैं इनका उपयोग विशेशग्ज्ञ  की सलाह और सोच समझ कर ही करें.

पानी को साफ करने की गोलिया यहाँ से प्राप्त करें – वॉटर पुरीफिकेशन टेबलेट

ब्लीच के द्वारा पानी को साफ करना cleaning water by bleech

बीज का उपयोग वायरस और जवानों को मारने के लिए किया जा सकता है यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि बहुत ही कम मात्रा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और ब्लीच एक्सपायर्ड नहीं होना चाहिए ब्लीच से पानी को साफ करने के लिए एक जग में पानी लेकर 1 लीटर पानी में चार बूंद प्लीज डालिए तथा इसे अच्छी तरह ही लाइए अब तलछट को 30 मिनट के लिए जमने के लिए छोड़ दीजिए. इनका उपयोग विशेशग्ज्ञ  की सलाह और सोच समझ कर ही करें.

आयोडीन से पानी साफ करना cleaning water by iodine

पानी से रोगाणुओं को मारने के लिए आयोडीन का इस्तेमाल किया जा सकता है इससे पानी का टेस्ट बिगड़ जाता है पानी को साफ करने के लिए 2 प्रतिशत सलूशन मिलाइए

कमर्शियल वाटर फिल्टर का उपयोग कीजिए use commercial water filter

वर्तमान समय में कई कंपनियां वाटर फिल्टर का निर्माण कर रही हैं आप  बाजार से इन वाटर फिल्टर को खरीदकर इसके द्वारा पानी को साफ कर सकते हैं यह सबसे आसान तरीका है कई कंपनियां हैं दावा करती हैं कि उनका फिल्टर पानी से ना केवल  जीवाणु वायरस बल्कि हानिकारक तत्व्प्म को भी दूर कर देता है कई तरह के कमर्शियल वाटर फिल्टर बाजार में उपलब्ध है इनका उपयोग आप कर सकते हैं.

अच्छे वाटर फ़िल्टर यहाँ से प्राप्त करें – Water Filter

पानी को प्राकृतिक तरीकों से साफ करना How to clean water by Natural ways in hindi

पानी को कोई प्राकृतिक तरीकों से भी साफ किया जा सकता है इनमें से कुछ प्रमुख नियम है

कई पौधे ऐसे होते हैं जो पानी से बैक्टीरिया को हटा देते हैं देवदार का पेड़ एक ऐसा ही पेड़ है इसे अंग्रेजी में पाइन का पेड़ कहते हैं ,  इसकी एक टहनी को लेकर इसकी छाल निकाल दें तथा इसे पानी के जार में डूबा दे ऐसा करने से पानी के बैक्टीरिया और वायरस मर जाएंगे.

पानी से भारी धातुओं को धनिये की पत्तियों से अलग करें use cilantro leaves for cleaning water

धनिए की पत्तियां पानी से भरी धातुओं  को अलग करने में काफी सहायक सिद्ध हुई है इसके लिए किसी जार  में पानी लेकर उसमें धनिये की पत्तियां डालें तथा उसे अच्छी तरह हिलाएं अब इन पत्तियों  को तली में बैठ जाने दे और ऊपर का पानी इस्तेमाल में लें . कई रिसर्च से पता चला है कि धनिये  की पत्तियां अपने साथ लेड और निकल जैसी धातुओं को पानी के तल में जमा देती है.

मिट्टी के बर्तन से पानी साफ करें. Use clay pot to clean the water

मिट्टी के कुंडे जिससे पानी   धीरे धीरे कर के रिश्ता हो उसका उपयोग करके बहुत आसानी से पानी को बैक्टीरिया और गंदगी से दूर कर सकते हैं क्योंकि इन मिट्टी के बर्तनों से केवल पानी ही रिस  कर बाहर जाता है और बैक्टीरिया और गंदगी बर्तन में ही रह जाते हैं पानी को साफ करने का यह एक अच्छा प्राकृतिक उपाय है.

पानी को उबालकर साफ करें boil the water for killing bacteria and virus

पानी को उबालकर आप सभी प्रकार के जीवाणु और वायरसों को मार  सकते हैं ऐसा करने के लिए पानी को कम से कम 5 मिनट उबालें पानी को उबालने से भारी धातुओं और खतरनाक केमिकल से दूर नहीं  होंगे केवल बैक्टीरिया और वायरस मारे जाएंगे, तथा पानी उबालने के बाद अगर आपको शक है कि इसमें भारी धातु और केमिकल हो सकते हैं तो उसके लिए दूसरी तकनीक से उसे साफ कीजिए.

केवल पानी को उबालकर पीने से ही आप ना जाने कितनी बीमारियों से बच सकते हैं,  जरा सी सावधानी रखकर आप अपने और अपने परिवार का काफी फायदा कर सकते हैं, बीमारी से बचने पर आप परेशानी से भी बचेंगे और  इलाज में आपकी आर्थिक हानि भी नहीं होगी लेकिन कई बार हम लोग आलस्य करते हैं और सावधानी नहीं बरतते हैं. लेकिन अगर आप हमेशा पानी को उबालकर पीने के बर्तन में भरने की आदत बना लें इससे आपका काफी फायदा होगा.

सूर्य की किरणों से पानी को साफ करना clean the water by sun lilght

सूर्य की किरणों से भी पानी को साफ किया जा सकता है,  प्लास्टिक की बोतल में पानी को ले और उसे पूरी तरह बंद कर दें अब इसे  6 घंटे के लिए धूप में रख दे प्लास्टिक की बोतल गर्मी को कैद करके रखती है  तापमान बढ़ने पर और वायरस मारे जाते हैं पानी साफ होता है तथा सूरत से आने वाली भी बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करती हैं

आप बहुत सामान्य उपाय अपनाकर अपने पीने के पानी को साफ कर सकते हैं और स्वस्थ और सुखी रह सकते हैं अगर आपको यह  लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों को जरूर शेयर करें.

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कैसे पता करें की पानी में बैक्टीरिया और विषैले तत्व है या नहीं?

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पानी की शुद्धता की जाँच कैसे करें?

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शुद्ध पानी की पहचान कीजिये check water purity in hindi

इंसान का शरीर 60% पानी से बना हुआ है, साफ पानी जीवन जीने के लिए अत्यंत उपयोगी है यह जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है हमें पीने, नहाने और घर को साफ रखने के लिए शुद्ध पानी की आवश्यकता पड़ती है. पानी में कई प्रकार के जीवाणु, वायरस और विषैले तत्व पाए जा सकते हैं.  यह जीवाणु वायरस और विषैले तत्व मनुष्य में कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करते हैं. ऐसी स्थिति में हम जो पानी पीते हैं और उपयोग में लाते हैं उसका शुद्ध होना बहुत जरूरी है.

बैक्टीरिया से प्रदूषित पानी  कई बीमारियों काप्रमुख कारण है,  अगर हम पहले से यह पता लगाने की पानी में बैक्टीरिया मौजूद है या नहीं तो हम कई बीमारियों से बच सकते हैं,  

अब प्रश्न यह उठता है कि पानी की शुद्धता की जांच कैसे करें? कैसे पता करें कि पानी में बैक्टीरिया नहीं है? कैसे पता करें कि पानी में विषैले तत्व मौजूद नहीं है?

आधुनिक विज्ञान की नई खोजों के द्वारा अब सामान्य व्यक्ति भी घर बैठे  पानी में बैक्टीरिया का पता लगा सकता है, जी हां यह आप खुद कर सकते हैं,

इसका सबसे आसान उपाय बाजार से  होम वाटर टेस्टिंग किट खरीद कर उसे पानी को चेक करना है,  आजकल बाजार में कई छोटी-छोटी पानी की शुद्धता की जांच करने की किट उपलब्ध है. पानी  की शुद्धता को जांचने का एक आसान तरीका अपनी इंद्रियों से यानी पानी को सोंग कर देख कर बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाना है.  इसके अलावा आप पानी के सैंपल को किसी बड़ी लैब में कंपलीट टेस्ट के लिए भी भेज सकते हैं.

होम वाटर टेस्टिंग किट से पानी की शुद्धता का पता लगाना check water purity by water testing kit in hindi

होम वाटर टेस्टिंग किट:  आज कल बाजार में दो प्रकार की होम वॉटर टेस्ट किट उपलब्ध है इनमें से एक केवल बैक्टीरिया का पता लगाती है जबकि दूसरी किसके द्वारा पानी में बैक्टीरिया और विषैले तत्व दोनों का पता लगाया जा सकता है.

शुद्ध पानी में क्या नहीं होना चाहिए – what should not be present in drinking water in hindi?

पानी की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमे बीमारी उत्पन्न करने वाले  बैक्टीरिया, विषैले तत्वों से लीड, कीटनाशक नाइट्रेट्स, क्लोरीन तो नहीं हे इसके साथ ही साथ पानी का पीएच लेवल भी सही होना चाहिए मतलब कि पानी एसिटिक नहीं होना चाहिए और ना ही एल्कलाइन. कई बार पानी में  बैक्टीरिया मारने के लिए क्लोरीन मिलाया जाता है, यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, खेती में उपयोग में लाए गए उर्वरक से नाइट्रेट निकल कर पानी में आ जाता है यह भी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है,  अगर पानी में लीड और कैल्शियम की मात्रा अधिक है तो आपको पथरी की समस्या और दुसरे नुकसान हो सकते हैं.

एक होम वाटर टेस्टिंग किट उपयोग कीजिए use water testing kit

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आजकल बाजार में कई तरह के होम वॉटर टेस्टिंग किट उपयोग के लिए मौजूद है इसमें छोटी-छोटी टेस्ट स्ट्रिप होती है जिन्हें पानी में डुबाया जाता है पानी में डुबाने पर स्ट्रिप्स  के रंगों में परिवर्तन आ जाता है, बैक्टीरिया और विषैले तत्व आदि के अलग-अलग मार्क होते हैं, साथ में एक चार्ट दिया जाता है जिसके साथ आप इस स्ट्रिप को मिलाकर यह पता कर सकते हैं कि पानी में बैक्टीरिया और विषैले तत्व है या नहीं.

 एक स्क्रिप्ट को पानी में डूबाने के बाद चेक करें कि इसके अंदर बैक्टीरिया लेड कीटनाशक नाइट्रेट्स क्लोरीन आदि स्थानों के रंग बदले हैं या नहीं तथा पानी का पीएच लेवल क्या है.

 अब दिए गए चार्ट से इस स्ट्रिप को मिलाइए  तथा यह निष्कर्ष निकालिए कि आपका पानी शुद्ध है या नहीं पूरी तरह सही रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए यह जांच कई बार कीजिए पानी के तीन चार सैंपल  लेकर उनमें अलग-अलग स्ट्रिप डालीये और निष्कर्ष निकालिए. अगर आप के पानी में कोई बैक्टीरिया या विषैले तत्व की मौजूदगी का पता चलता है तो आप अपने शहर के नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क करें तथा स्वयं और दूसरे लोगों को बीमारियों और हानिकारक पदार्थों से होने वाले नुकसान से बचाइए.

वाटर टेस्टिंग किट – पानी की शुद्धता जांचने की किट यहाँ इस लिंक से प्राप्त करें 

Water testing kit

इंद्रियों का इस्तेमाल कर पानी की शुद्धता का पता लगाना

वाटर टेस्टिंग किट उपलब्ध ना होने पर आप केवल अपनी इंद्रियों का इस्तेमाल करके भी पानी की शुद्धता का पता लगा सकते हैं, पानी की शुद्धता की जांच करने वाली विशेषज्ञ भी सबसे पहले अपनी इंद्रियों का इस्तेमाल करते ही अंदाजा लगाते हैं उसके बाद वह टेस्टिंग किट का इस्तेमाल करते हैं.

पानी की शुद्धता का पता सूंघकर कर कैसे लगाएं? smell test of water

पानी से ब्लीच की तरह गंध आना :  ब्लीच की तरह गंध, पानी में क्लोरीन के होने का प्रमाण है,  कई बार पानी को बैक्टीरिया रहित बनाने के लिए लोकल अथॉरिटीज पानी के अंदर क्लोरिन मिला देती है, अगर पानी को खुला छोड़ दिया जाए थोड़ी देर बाद यह गंध दूर हो जाती है.

 पानी से सड़े हुए अंडे की गंध आना :  पानी से सड़े हुए अंडे की तरह गंध आना खतरनाक है यह बैक्टीरिया की निशानी है, यह गंध कुछ-कुछ सल्फ्यूरिक एसिड कैसी होती है ऐसे पानी को फ़िल्टर कर उबल कर पिए और इसकी शिकायत जल विभाग में करें.

पानी से मिट्टी  की गंध आना: इस तरह की गंध  किसी कार्बनिक पदार्थ के सड़ने पर आती है,  ऐसे पानी को भी साफ कर उपयोग में लें.

पानी को  चखकर शुद्धता का पता लगाएं  test the water for purity

पानी की शुद्धता का पता आप चखकर  भी लगा सकते हैं अगर चखने पर पानी कड़वा लगे तो उसे थूक दे,  अगर पानी में धातु जैसा स्वाद आ रहा है तो इसका मतलब इसमें धात्विक अशुद्धियां जैसे  कैलशियम, मैग्निशियम आदि मिली हुई है, अगर पानी में ब्लीच का स्वाद आ रहा है तो इसका मतलब पानी में क्लोरीन मिली हुई है.  कभी-कभी पानी थोड़ा नमकीन लगता है यह सल्फेट की मौजूदगी दर्शाता है. किसी भी प्रकार की गंभीर अशुद्धि होने पर जल विभाग से संपर्क करें.

पानी को देखकर शुद्धता का पता लगाएं 

 एक साफ कांच के गिलास में पानी भरे तथा इसे प्रकाश में देखें शुद्ध पानी साफ होता है जिसके आर पार देखा जा सकता है .  चेक करें कि पानी के अंदर छोटे छोटे लाल भूरे कण तो नहीं है यह पाइप में जंग लगा होने की निशानी है. पानी में सफेद कण कैलशियम कार्बोनेट और मैग्नीशियम के होने का प्रमाण है.

इन दो विधियों से आप पानी की शुद्धता का पता लगा सकते हैं तथा जान सकते हैं कि पानी के अंदर बैक्टीरिया मौजूद है या नहीं तथा पानी में कोई विषैला तत्व उर्वरक कीटनाशक तो नहीं है इन विधियों से आप  पानी में मौजूद लेड मैग्निशियम और कैल्शियम आदि धातु के होने का पता भी लगा सकते हैं.how to check water purity in hindi, how to check bacteria in water, how to check water ph, how to check lead in water in hindi, how to check nitrates in water, how to check chlorine in water in hindi, bacteria, water purity, prevention

केवल शुद्ध पानी का ही उपयोग कीजिये और स्वस्थ रहिये

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बैक्टीरिया डेंजर जोन – गोल्डन जोन क्या होता है? 

bacteria danger zone kya he

बैक्टीरिया डेंजर जोन – गोल्डन जोन क्या होता है? 

बैक्टीरिया के पनपने के लिए तापमान की रेंज क्या है? किस तापमान रेंज में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं?  बैक्टीरिया के लिए सबसे अच्छा तापमान कौन सा होता है At what temperature do bacteria grow the fastest ?What is the most favourable temperature range for bacteria to grow.

40 डिग्री फॉरेनहाइट से लेकर 140 डिग्री फॉरेनहाइट की तापमान रेंज बक्टेरिया की ग्रोथ के लिए सबसे अच्छी होती है,  सेल्सियस  पैमाने में यह रेंज 4.4 डिग्री सेल्सियस से  60  डिग्री सेल्सियस  के बीच की होती है इसे बैक्टीरिया का गोल्डन टेंपरेचर रेंज भी कहते हैं इस तापमान रेंज में बैक्टीरिया की संख्या 20 मिनट में दुगनी हो जाती हैं इस तापमान रेंज को बैक्टीरिया के लिए गोल्डन जोन  कहा जाता है क्योंकि यह बैक्टीरिया के लिए सबसे अच्छा है,  लेकिन मनुष्य के लिए यह खतरनाक होता है इसलिए इसे डेंजर जोन भी कहते हैं.

bacteria ka danger zone kya he

बैक्टीरिया के पनपने का  डेंजर जोन

कमरे के तापमान पर खाने को खुला छोड़ने पर उसमें बैक्टीरिया पनपते हैं इनकी संख्या इतनी बढ़ जाती है कि यह बीमारी पैदा कर सकते हैं, सामान्यतः जीवाणु 4.4 डिग्री सेल्सियस  60  डिग्री सेल्सियस  की तापमान रेंज में बड़ी तेजी से बढ़ते हैं तथा 20 मिनट में इनकी संख्या दुगनी हो जाती है क्योंकि है मनुष्य के लिए खतरनाक है इसलिए इसे डेंजर जोन कहते हैं,

खाद्य पदार्थों को डेंजर जोन से बाहर रखें

 खाने को फ्रिज  से बाहर कभी भी 2 घंटे से ज्यादा समय बाहर ना रखें, अगर गर्मी का मौसम है तो खाने को 30 मिनट के लिए भी बाहर ना रखें खाना गर्म करने के बाद उसे तुरंत खा लें बाहर खुला छोड़ने पर उसमें  बैक्टीरिया  पनप सकते हैं.

मांस और मछली को अच्छी तरह पकाएं

 मांस और मछली में बहुत तेजी से बक्टेरिया पनपते हैं इसलिए इनको खाने से पहले अधिक तापमान पर खूब पकाएं और पका हुआ भोजन तुरंत खा ले इससे यह बैक्टीरिया के डेंजर जोन में नहीं आ पाएगा

बचे हुए खाने को गर्म कर खाएं

भले ही खाना पूरी तरह उचित तापमान पर पकाया गया हो परंतु बचे हुए खाने में फिर से जीवाणु पनप सकते हैं अक्सर बचे हुए खाने को संभाल कर रख दिया जाता है उसका पुनः उपयोग करने से पहले उसे खूब अच्छी तरह गर्म करें. बचे हुए खाने को हमेशा फ्रीज में रखना चाहिए .

बाजार से खरीदे गए खाद्य पदार्थों को सीधे खाने के बजाय उन्हें भी गर्म करके ही खाना  चाहिए.

 यह सब सावधानी रखकर आप बैक्टीरिया के डेंजर जोन में आने से बच सकते हैं,  ऐसा करने से आप कई बीमारियों से अपने आप को बचा सकते हैं.

 

एनीमिया रोग क्या है? यह कितने प्रकार का होता है?

anemia se bachne ke upay

एनीमिया रोग और उससे बचने के उपाय 

जब मनुष्य के रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी या हीमोग्लोबिन की कमी या कोशिकाओं की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता में कमी हो जाती है तो इस रोग को एनीमिया कहते हैं.  यह रोग होने पर व्यक्ति बहुत थका थका महसूस करता है कमजोरी महसूस करता है उसे सांस लेने में तकलीफ होती है तथा वह व्यायाम और कुछ भी मेहनत का कार्य नहीं कर पाता है.

एनीमिया जब अचानक होता है तो इसका रोगी कभी कभी बेहोश हो जाता है उसे प्यास का अनुभव होता है एनीमिया के रोगी पीले पड़ जाते हैं इसीलिए डॉक्टर अक्सर आंखों और हथेलियों को देख कर पता लगाते हैं कि व्यक्ति को एनीमिया है कि नहीं!

एनीमिया रोग क्यों होता है?

Iron_deficiency_anemia_ke prakar aur upay

 एनीमिया मुख्य तीन कारणों से होता है अत्यधिक रक्त बहने के कारण, लाल रक्त कणों का निर्माण कम हो जाने की वजह से, तथा लाल रक्त कोशिकाओं के तेजी से मरने की वजह से, परंतु इसका मुख्य कारण व्यक्ति के शरीर में आयरन की कमी होना है आयरन की कमी होने से लाल रक्त कोशिकाएं  पर्याप्त संख्या में नहीं बन पाती हैं और व्यक्ति को एनीमिया हो जाता है, विटामिन B12 की कमी से भी लेकिन हो सकता है.

वर्तमान समय में एनीमिया रोग काफी बड़ी समस्या बन कर उभरा है  पूरी दुनिया में जनसंख्या के लगभग एक तिहाई लोगों को  एनीमिया रोग है.

मनुष्य के रक्त कोशिकाओं में हिमोग्लोबिन नाम का तत्व पाया जाता है आयरन हिमोग्लोबिन का मुख्य हिस्सा है आयरन की कमी होने से व्यक्ति में पर्याप्त मात्रा में ही में  हिमोग्लोबिन को कि नहीं बन पाता और कोशिकाएं ऑक्सीजन का परिवहन का काम नहीं कर पाती यही  एनीमिया रोग का कारण बनता है

एनीमिया का पता लगाने के लिए  कौन सा टेस्ट किया जाता है

एनीमिया का पता लगाने के लिए  डॉक्टर ब्लड टेस्ट करवाते हैं इस ब्लड टेस्ट में लाल रक्त कणों की कोशिकाओं की संख्या, हीमोग्लोबिन लेवल नापा जाता है, तथा इस टेस्ट में लाल रक्त  कोशिकाओं का आकार भी नापा जाता है.

आधुनिक ऑटोमेटिक मशीन द्वारा रोगी के खून में RBC Count, Hemoglobin concentration, MCV Mean cell valume, Red blood cell distribution width. नापा जाता है

एनीमिया रोग के लक्षण Symtoms

एनीमिया रोग के लक्षण इस चार्ट के द्वारा समझे जा सकते हैं.

Symptoms_of_anemia ke lakshan

एनीमिया कितने प्रकार का होता है?

एनीमिया रोग कई प्रकार का होता है इनमें मुख्य प्रकार  निम्न है

Iron Deficiency anemia

यह सबसे ज्यादा पाए जाने वाला एनीमिया का प्रकार है इसमें व्यक्ति  के रक्त में आयरन की कमी हो जाती है हिमोग्लोबिन पदार्थ बनाने के लिए आयरन की आवश्यकता पड़ती है, खाद्य पदार्थों में आयरन कम लिए जाने पर हिमोग्लोबिन नहीं बनता और इस तरह व्यक्ति में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है.

Vitamin deficiency anemia

 लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने के लिए आयरन के अलावा विटामिन B12 और फोलेट की आवश्यकता भी पड़ती है इसलिए खाद्य पदार्थ में विटामिन B12 के पर्याप्त मात्रा होना भी आवश्यक है कई बार व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में विटामिन B12 लेते हैं पर उनका शरीर उसे  अवशोषित नहीं कर पाता इस वजह से व्यक्ति एनीमिया रोग का शिकार हो जाता है.

Anemia of Chronic Disease

गंभीर बीमारी कैंसर, किडनी डिजीज, Crohn’s Diseases आदि लाल रक्त कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं जिससे कि लाल रक्त कोशिकाएं पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाती और एनीमिया हो जाता है

Aplastic Anemia

यह बहुत ही रेयर प्रकार का एनीमिया होता है इसमें भी शरीर लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाता अप्लास्टिक एनीमिया का कारण इनफेक्शन दुआओं का असर ऑटोइम्यून डिजीज या किसी टॉक्सिक केमिकल का असर हो जाना होता है

Bone Marrow Related Anemia

अस्थि मज्जा के रोग हो जाने पर भी पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बन पाती और एनीमिया हो जाता है.

Hemolytic anemias

जब लाल रक्त कोशिकाएं बड़ी तेजी के साथ नष्ट होती हैं तो इस एनीमिया को हिमॉलिटिक एनीमिया कहते हैं

Sickle cell Anemia

इस प्रकार के एनीमिया में हिमोग्लोबिन का आकार बिगड़ जाता है और लाल रक्त कोशिकाएं कम उम्र में ही मर जाती है इससे रक्त में बहुत कम लाल रक्त कोशिकाएं बचती है

एनीमिया के प्रकारों के अलावा और भी कई प्रकार के एनीमिया होते हैं जैसे कि थैलेसीमिया की वजह से होने वाला एनीमिया और मलेरिया की वजह से होने वाला एनीमिया.

एनीमिया को किस प्रकार दूर किया जा सकता है?

एनीमिया को दूर करने के लिए डॉक्टर आयरन युक्त  खाद्यपदार्थ खाने की सलाह देते हैं तथा साथ ही साथ रोगी को आयरन युक्त गोलियां भी दी जाती है, जरूरत पड़ने पर एनीमिया के रोगी को आयरन के इंजेक्शन भी जिए जाते हैं,  अगर एनीमिया रोग गंभीर अवस्था में है तो उसे किसी और  व्यक्ति का खून भी  चढ़ाया जाता है,  एनीमिया को दूर करने के लिए विटामिन B12 सप्लीमेंट्स भी दिए जाते हैं

 एनीमिया होने पर क्या क्या खाना चाहिए?

एनीमिया को रोकने के लिए क्या करना चाहिए?  कई प्रकार के एनीमिया को रोका नहीं जा सकता परंतु आयरन की कमी से होने वाले हैं एनीमिया और विटामिन की कमी से होने वाले एनीमिया को रोका जा सकता है. एनीमिया को होने से रोकने के लिए अपने आहार में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12, विटामिन सी को सम्मिलित करें.

Iron

 अपने आहार में आयरन आयरन युक्त खाद्य पदार्थ का  अधिक इस्तेमाल करें तथा आयरन की गोलियां भी ले.

Folic acid

फोलिक एसिड युक्त पदार्थ खाएं यह फलों के जूस हरी सब्जियों अनाज मूंगफली चावल में पाया जाता है फोलिक एसिड सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है.

Vitamin B12

आहार में विटामिन B12 मात्रा को बढ़ा दे विटामिन B12 मांस दुग्ध उत्पादों और सोया प्रोडक्ट में पाया जाता है

Vitamin C

 विटामिन सी शरीर में आयरन को सूचित करने में सहायता प्रदान करता है इसीलिए एनीमिया को रोकने के लिए विटामिन B12 के साथ-साथ विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ भी अवश्य लें यह फलों के रस टमाटर नींबू स्ट्रॉबेरी शादी में अधिक पाया जाता है विटामिन सी की भी गोलियां ली जा सकती है.