Nasha Shayari नशा  शायरी

Nasha Shayari in hindi

नशा  शायरी

Nasha Shayari :  नशा शायरी,  दोस्तों इस पेज पर हम आपके लिए नशा  शायरी पेश कर रहे हैं, यहाँ मशहूर शायरों के नशा के बारे में शेर दिए गए हैं, इन्टरनेट पर यह नशा शायरी का एक सबसे बड़ा संग्रह है, नशा के बारे में मशहूर शायरों ने क्या क्या कहा है, नशा पर सारे शेर एक पेज पर पढ़कर आपको काफी अच्छा लगेगा, यहाँ नशा शायरी पर 100 से भी ज्यादा शेर संकलित जमा किये गए है. 

हमने यहाँ महान शायरों की Nasha shayari 2 lines देवनागरी font में दी है, यह नशा शायरी hindi (Nasha shayari in hindi ) और उर्दू भाषा में हैं, Nasha shayari in hindi को आप आसानी से कॉपी कर अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं, Nasha par shayari का यह संकलन आपको केसा लगा, कमेंट्स में ज़रूर लिखे.

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Nasha shayari in hindi

 

हज़ार दर्द शब-ए-आरज़ू की राह में है

कोई ठिकाना बताओ कि क़ाफ़िला उतरे

क़रीब और भी आओ कि शौक़-ए-दीद मिटे

शराब और पिलाओ कि कुछ नशा उतरे

~Faiz Ahmad Faiz

 ‏  

दिल ओ निगाह पे क्यु छा रहा है ऐ साकी

तेरी आँख का नशा शराब से पहले…

   

ये कैसा नशा  है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ

तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ

~Munir Niazi ~

   

किसी की आँख में मस्ती तो आज भी है वही

मगर कभी जो हमें था ख़ुमार, जाता रहा

~जावेद अख़्तर

  

गले में डाल दो बाँहों का हार होली में

उतारो एक बरस का ख़ुमार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में

– Nazeer Banarasi ~HappyHoli

   

बड़ी लज़्ज़तें हैं गुनाह में जो न कीजिए

जो न पीजिए तो अजब नशा है शराब में

~सय्यद_मुबारक_शाह

 मय को मेरे सुरूर से हासिल सुरूर था

मैं था नशे में चूर नशा मुझ में चूर था

~नातिक़_गलावाठी

     

भरे मकाँ का भी अपना नशा है क्या जाने

शराब-ख़ाने में रातें गुज़ारने वाला

~WasimBarelvi

shayari on nasha

     

निगाहों में ख़ुमार आता हुआ महसूस होता है

तसव्वुर जाम छलकाता हुआ महसूस होता है

~क़तील_शिफ़ाई

 

नशा पिला के गिराना तो सब को आता है

मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी

~अल्लामा_इक़बाल

 

ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल

~AarifJalali

 

अभी गुनाह का मौसम है आ शबाब में आ

नशा उतरने से पहले मेरी शराब में आ

~Abdullah Kamal

           

ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो

नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें

~Faraz

 

अंगड़ाइयों के साथ कहीं दम निकल न जाए

आसाँ नहीं है रंज उठाना ख़ुमार का

~यगाना_चंगेज़ी

  

nasha shayari 2 lines

 

नशे की रात ढल चुकी….अब ख़ुमार ना रहा

‘जिंदगी हमे तेरा ऐतबार ना रहा’..

-शैलेंद्र

   

शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब

उस में फिर मिलाई जाये थोड़ीसी शराब

होगा यूँ नशा जो तैय्यार वो प्यार हैं

-नीरज

 

वो बस हमीं थे हमीं ने मचाई थी धूमें

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल ~

 

अक़्ल ओ दिल अपनी अपनी कहें जब ‘ख़ुमार’

अक़्ल की सुनिए दिल का कहा कीजिए

   

शायर को मस्त करती है तारीफ़-ए-शेर ‘अमीर’

सौ बोतलों का नशा है इस “वाह” “वाह” में  ~Ameer Minai

pyar ka nasha shayari

   

हैरत है तुम को देख के मस्जिद में ऐ ‘ख़ुमार’

क्या बात हो गई जो ख़ुदा याद आ गया ~Khumar

     

न कोई ख़्वाब न कोई ख़लिश न कोई ख़ुमार

ये आदमी तो अधूरा दिखाई पड़ता है ~Nisar

 

Nasha shayari image

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Nasha Shayari in hindi

 

Nasha Shayari in hindi

 

Nasha Shayari in hindi

 

Nasha Shayari image

 

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Neend Shayari नींद पर शायरी

Neend Shayari in hindi

नींद पर शायरी

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Neend shayari 2 lines

 

किसी हमदम का सर-ए-शाम ख़याल आ जाना

नींद जलती हुई आँखों की उड़ा देता है

~नक़्श लायलपुरी

 

आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा

आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई

~इक़बाल अशहर

 

सुकून दे न सकीं राहतें ज़माने की

जो नींद आई तेरे ग़म की छाँव में आई

~पयाम फ़तेहपुरी

 

थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब

वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब

-Momin Khan Momin

 

तारों का गो शुमार में आना मुहाल है

लेकिन किसी को नींद न आए तो क्या करे

~अफ़सर मेरठी

 

हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे

अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ

~क़तील शिफ़ाई

 

तेरी आँखों की कशिश कैसे तुझे समझाऊँ

इन चराग़ों ने मेरी नींद उड़ा रक्खी है

~इक़बाल_अशहर

 

सितारे ये ख़बर लाए कि अब वो भी परेशाँ हैं

सुना है उनको नींद आती नहीं, मैं कैसे सो जाऊँ

~अनवर_मिर्ज़ापुरी

 

अगर ऐसा भी हो सकता

तुम्हारी नींद में,सब ख़्वाब अपने मुंतकिल करके,

तुम्हें वो सब दिखा सकता,जो मैं ख्वाबो में

अक्सर देखा करता हूँ..!

-गुलज़ार

 

मुकदमा चला कर मेरी नींद पे

तूने मेरे सारे ख्वाब अपने नाम कर लिए

 

दब गई थी नींद कहीं करवटों के बीच

दर पर खड़े रहे कुछ ख्वाब रात भर

 

नींद में भी गिरते है मेरे आँख से आँसू …!

जब तुम ख़्वाबों में मेरा हाथ छोड़ देते हो !!

 

Shayari on neend

 

नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बाद

रोटियाँ भी न मयस्सर हों जिसे काम के बाद

 

सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर

मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाते

~मुनव्वर राना

 

ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ

हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते

~उम्मीद फ़ाज़ली

 

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए

कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए

~इरफ़ान सिद्दीक़ी –

 

वो क्या गए कि नींद भी आँखों से ले गए

यानी कि ख़्वाब में भी न आए तमाम रात

 

 

हमारे ख़्वाब चोरी हो गए हैं

हमें रातों को नींद आती नहीं है

~बख़्श लाइलपूरी

आई होगी किसी को हिज्र में मौत

मुझ को तो नींद भी नहीं आती

~अकबर इलाहाबादी

 

सहर न आई कई बार नींद से जागे

थी रात रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले

~गुलज़ार

 

आँखों को सब की नींद भी दी ख़्वाब भी दिए

हम को शुमार करती रही दुश्मनों में रात

~शहरयार

 

नींद आती है न वो आते हैं

रात गुज़री ही चली जाती है

ज़िंदगी आप के दीवाने की

किसी सूरत से कटी जाती है

~बिस्मिल_अज़ीमाबादी

 

Neend shayari hindi

 

मुद्दतों बाद मयस्सर हुआ माँ का आँचल

मुद्दतों ब’अद हमें नींद सुहानी आई

~इक़बाल अशहर

 

आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा

आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई

पा कर भी तो नींद उड़ गई थी

खो कर भी तो रत-जगे मिले हैं

जब तेरा जमाल ढूँडते थे

अब तेरा ख़याल ढूँडते हैं

~अहमद_नदीम_क़ासमी

 

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए

कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए

~IrfanSiddiqi ~

 

बरसों के रत-जगों की थकन खा गई मुझे

सूरज निकल रहा था कि नींद आ गई मुझे

~क़ैसर_उल_जाफ़री

Neend shayari romantic

 

मौत का एक दिन मुअय्यन है

नींद क्यूँ रात भर नहीं आती

~MirzaGhalib ~maut

 

कितना आसान था बचपन में सुलाना हम को

नींद आ जाती थी परियों की कहानी सुन कर

~भारत_भूषण_पन्त

 

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई

हम न सोए रात थक कर सो गई

~राही_मासूम_रज़ा

 

 नींद से आँख खुली है अभी देखा क्या है

देख लेना अभी कुछ देर में दुनिया क्या है

~ShahidKabeer

  

ज़रा सी रात ढल जाए तो शायद नींद आ जाए

ज़रा सा दिल बहल जाए तो शायद नींद आ जाए

~FrahIqbal

 

तुम्हें भी नींद सी आने लगी है थक गए हम भी

चलो हम आज ये क़िस्सा अधूरा छोड़ देते हैं

~मुनव्वर_राना

    

मैं ने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है

हाथ रख दे मिरी आँखों पे कि नींद आ जाए

~वसीम_बरेलवी

 

छत टपकती थी अगरचे फिर भी आ जाती थी नींद

मैं नए घर में बहुत रोया पुराने के लिए

 – ज़फ़र गोरखपुरी

 

जो भी कुछ अच्छा बुरा होना है जल्दी हो जाए

शहर जागे या मेरी नींद ही गहरी हो जाए

~रउफ़_रज़ा

 

जगा रहा है ज़माना मगर नहीं खुलतीं

कहाँ की नींद इन आँखों में आ के बैठ गई

 

Neend shayari in hindi

 

किसी हमदम का सर-ए-शाम ख़याल आ जाना

नींद जलती हुई आँखों की उड़ा देता है

~NaqshLayalpuri

  

मैं रोना चाहता हूँ, ख़ूब रोना चाहता हूँ मैं

फिर उसके बाद गहरी नींद सोना चाहता हूँ मैं

~FarhatEhsas

 

बात करने से धुआ उठता है जो दिल का नहीं,

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं

रात भी आई थी और चाँद भी था,

हाँ मगर नींद नहीं…नींद नहीं..!!

-गुलज़ार

 

मेरे सरहाने जलाओ सपनें

मुझे जरासी तो नींद आये..

-गुलज़ार

 

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गयी,

पाँव तलक उठे न थे कि जिंदगी फिसल गयी…

-नीरज

 

नींद आती है अगर जलती हुई आँखों में

कोई दीवाने की ज़ंजीर हिला देता है

~ShahzadAhmad

 

यों लगता है सोते जागते औरों का मोहताज हूँ मैं

आँखें मेरी अपनी हैं पर उनमें नींद पराई है ..

-कतील शिफ़ाई

  

रात भी नींद भी कहानी भी

हाए क्या चीज़ है जवानी भी

~Firaq

 

कल जो मुझको नींद ना आये पास बुला लेना,

गोद में अपनी सर रख लेना, लोरी सुना देना…

-गुलज़ार

  

neend shayari urdu

वो हवा दे रहे हैं दामन की

हाए किस वक़्त नींद आई है ~ShakilBadayuni

 

दुआएँ लोरियाँ माओं के पास छोड़ आए

बस एक नींद बची है ख़रीद लाएँगे ~Aashufta Changezi

  

नींद आँख में भरी है कहाँ रात भर रहे

किस के नसीब तुम ने जगाए किधर रहे

~MadhavRam Jauhar

  

 

“उस गरीब माँ ने अपने बेटे को

यह कर सुलाया की,

नींद में फ़रिश्ते आते है रोटिया लेकर..।”

  

रात ख़ूब-सूरत है

नींद क्यूँ नहीं आती

~AliSardarJafri

 

हाइल थी बीच में जो रज़ाई तमाम शब

इस ग़म से हम को नींद न आई तमाम शब ~hasrat mohani

   

चैन की नींद मिल जाए मुझे

बस शिद्दत से यही चाहत है

अब मेरे कमरे की सीढियों में

जाने क्यों एक लड़खड़ाहट है

लगता है आज फिर से उसी

खामोशी के साये की आहट है..

 

हम को आँखों में न आँजो लेकिन

ख़ुद को ख़ुद पर तो सजा लो तुम भी

 

जिस्म की नींद में सोने वालों

रूह में ख़्वाब तो पालो तुम भी

 

सुलझ सी गई पहेली जिंदगी की

जब से ख्वाबों ने नींद का पर्दा दिया है

 

कहीं तो बचा रहे प्रेम

कहीं तो हो स्वार्थ से पड़े बातें

बस पूरा दिन इसी खोज बिन में निकल जाता है

और रात चुपके से

नींद की चादर ओढ़ा देती है

की थोड़ी देर तो सुकून मिले..✍️

 

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई,

पांव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई।।

पात-पात झर गए कि शाख-शाख जल गयी

चाह तो सकी निकल न पर उमर निकल गयी

गीत अश्क़ बन गए

छंद हो हवन गए…

उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे

कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे’

 

Neend Shayari Images

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Mehndi Shayari in hindi with images

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मेहंदी की शायरी

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mehndi shayari in hindi,

 

उजली-उजली धूप की रंगत भी फ़ीकी पड़ जाती है

आसमान के हाथों जब शाम की मेहंदी रच जाती है

 

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

ज़रा से लफ्ज़ में कितना पैगाम लिखा है

 

वो मेहंदी के हाथों में क्या तराशेंगे नाम हमारा,

जब नाम ही छुपा लिखा है उनके हाथों में।

 

“पूरी मेहंदी भी लगानी नहीं आती अब तक

क्यूँ कर आया तुझे ग़ैरों से लगाना दिल का“

– दाग़ देहलवी

 

अल्लाह-रे नाज़ुकी कि जवाब-ए-सलाम में

हाथ उस का उठ के रह गया मेहंदी के बोझ से

~रियाज़ ख़ैराबादी

 

वो जो सर झुकाए बैठे हैं,  हमारा दिल चुराए बैठे हैं…

 हमने कहा हमारा दिल लौटा दो,  वो बोली-  हम तो हाथो में मेहँदी लगाये बैठे हैं…

 

खुदा ही जाने क्यूँ तुम हाथो पे मेहँदी लगाती हो..!

बड़ी नासमझ हो फूलों पर पत्तों के रंग चढ़ाती हो..!!

 

गोरी सी हथेली पर, सांवली सी मेहंदी..

 

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खुशबू और प्यार का रंग.. तेरा साथ हो, तेरा संग…!!

मेरा मुस्कुराना, पलके गिराना, और शरमाना,

सूरज की रोशनी, पर लाली- सी ओढनी…

शाम में जैसे, रात की ठंडक,

तेरा साथ हो, तेरा संग….!!!!

 

करतूतें तो देखियें मेहंदी की

तेरा नाम क्या लिखी शर्म से लाल हो गई

 

मैं न लगाऊँगी मेहंदी तेरे नाम की

कम्बख्त रंग चढ़ कर उतरता ही नही

 

मेहंदी रचाई थी मैने इन हाँथों में

जाने कब वो मेरी लकीर बन गई

 

पीपल के पत्तों जैसा मत बनो

जो वक्त आने पर

 सूख कर गिर जाते है

 बनना है तो मेहँदी के पत्तों जैसा बनो

 

mehndi shayari in hindi font

 

जो पिसकर भी  दूसरों की जिंदगी में

 रँग भर देते है।

 

उसे शक है हमारी मुहब्बत पर लेकिन

गौर नहीं करती मेहँदी का रंग कितना गहरा निखरा हैं

 

माना कि सब कुछ पा लुँगा मैं अपनी जिन्दगी में,

मगर वो तेरे मेहँदी लगे हाथ मेरे ना हो सकेंगे..

 

कुछ रिश्तें मेहँदी के रंग की तरह होते है

शुरुवात में चटख,बाद में फीके पड़ जाते है

 

सुर्ख़-रू होता है इंसाँ ठोकरें खाने के बाद

रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बाद

 

मेरे सुर्ख़ लहू से चमकी कितने हाथों में मेहंदी

शहर में जिस दिन क़त्ल हुआ मैं ईद मनाई लोगों ने

 ~Zafar ~

 

mehndi ki shayari,

रातभर बेचारी मेहंदी पिसती हैं पैरों तले

क्या करू, कैसे कहूँ रात कब कैसे ढले…

 ~गुलजा़र

 

क्यूँ न तुझ को हिना से हो रग़बत

यूँ कोई और पाएमाल तो हो

 

इक सुब्ह थी जो शाम में तब्दील हो गई

इक रंग है जो रंग-ए-हिना हो नहीं रहा

~काशिफ़_हुसैन

 

दोनों का मिलना मुश्किल है दोनों हैं मजबूर बहुत

उस के पाँव में मेहंदी लगी है मेरे पाँव में छाले हैं ~AmeeqHanafi

 

मेहंदी लगाए बैठे हैं कुछ इस अदा से वो

मुट्ठी में उनकी दे दे कोई दिल निकाल के ~RiyazKhairabadi

 

ये भी नया सितम है हिना तो लगाए ग़ैर

और दाद उस की चाहें वो मुझ को दिखा के हाथ ~निज़ाम_रामपुरी

 

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शामिल है मेरा ख़ून-ए-जिगर तेरी हिना में

ये कम हो तो अब ख़ून-ए-वफ़ा साथ लिए जा ~Sahir

~kavya

 

काँच के पार तिरे हाथ नज़र आते हैं

काश ख़ुशबू की तरह रंग हिना का होता ~गुलज़ार

 

पूछे जो कोई मेरी निशानी,रंग हिना लिखना,

आऊं तो सुबह,जाऊ तो मेरा नाम सबा लिखना

बर्फ पड़े तो बर्फ पे मेरा नाम दुआ लिखना !!

 गुलज़ार

 

मैं वो साग़र नहीं आए कभी लब तक जो ‘रियाज़’

किस को मिलता है तिरे रंग-ए-हिना का बोसा ~Riyaz

 

Mehndi Shayari Images

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Mehndi Shayari – Shayari on Mehndi

 

Mehndi Shayari – Shayari on Mehndi

 

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Shayari on Mehndi

 

Shayari on Mehndi

 

Shayari on Mehndi

 

 

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मस्ती शायरी 

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Masti shayari in hindi,

 

इक सिर्फ़ हम ही मय को आँखों से पिलाते हैं

कहने को तो दुनिया में मयखाने हज़ारों हैं

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं

 

मैं मुहब्बत करूँ तुमसे मेरी हस्ती क्या है,

मस्तियाँ अर्श की हैं ख़ाक की मस्ती क्या है !!

~JM Sinha Rahbar

 

यहाँ चौडी छाती वीरो की,

यहाँ भोली शकले हीरो की

यहाँ गाते है रांझे मस्ती मे,

मचती है धूमे बसती में..!

~साहीर_लुधीयानवी

 

ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल

~आरिफ़ जलाली

 

किसी की आँख में मस्ती तो आज भी है वही

मगर कभी जो हमें था ख़ुमार, जाता रहा

~जावेद अख़्तर

 

आँख तुम्हारी मस्त भी है और मस्ती का पैमाना भी

एक छलकते साग़र में मय भी है मय-ख़ाना भी

~साग़र_निज़ामी

 

Masti wali shayari

 

क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ

रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन

~मिर्ज़ा_ग़ालिब

 

‘मीर’ उन नीम-बाज़ आँखों में

सारी मस्ती शराब की सी है

          

उनकी आंखो से छलकती है मय की मस्ती

लोग समझते हैं की हम मैखाने से आए हैं

 

जाहिद उन आंखों की टपकती हुई मस्ती,

पत्थर में गढ्ढा डाल के पैमाना बना दें !! -आरज़ू लखनवी

 

मिट्टी का तन मस्ती का मन

क्षण भर जीवन-मेरा परिचय

 

है और ही कारोबार-ए-मस्ती

जी लेना तो ज़िंदगी नहीं है

~अली_सरदार_जाफ़री

 

friends masti shayari

 

नज़्ज़ारे ने भी काम किया वाँ नक़ाब का

मस्ती से हर निगह तेरे रुख़ पर बिखर गई

~ग़ालिब

 

कभी झगडा तो कभी मस्ती,

कभी आंसू तो कभी हंसी,

छोटा सा पल और छोटी छोटी ख़ुशी,

एक प्यार की कश्ती और ढेर सारी मस्ती,

 

बस खुद्दारी ही है मेरी दौलत,  जो मेरी हस्ती में रहती है !

बाक़ी ज़िंदगी तो फ़कीरी है, जो अपनी मस्ती में रहती है !!

 

समंदर न हो तो कश्ती किस काम की

मजाक न हो तो मस्ती किस काम की

दोस्तों के लिए कुर्बान है ये ज़िन्दगी

Besties न हो तो ये ज़िन्दगी किस काम की

 

कोई पत्थर तुम्हें मारे तो आसमां हो जा।

फूल कदमों में गर डाले तो फ़ना हो जा।।

क्या अहमियत है किसी के भी नुक्ताचीनी का ?

तू जहाँ है अपनी मस्ती में शहंशा हो  जा।।

 

आते हैं खाब मे अब जो, बेगानो की तरह!

कहानी सिमट कर हो गई अफसानों की तरह!!

गुलजार है, अजीज शक्स वो मस्ती मे भूल कर!

कभी बदले गये थे हम भी मकानों की तरह!!

 

जिसकी मस्ती जिंदा है,*

*उसकी हस्ती जिंदा है*।

*वरना यूँ समझ लें*,

*हम  यूँ ही जिंदा हैं।*

 

हस्ती की बद-मस्ती क्या, हस्ती ख़ुद इक मस्ती है

मौत उसी दिन आएगी, होश में जिस दिन आएँगे

– साग़र निज़ामी

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प्यार एक शब्द नहीं है,

है एक प्यारा सा एहसास,

चाहे वो परिवार का प्यार हो,

चाहे दोस्त या प्रेमी का प्यार हो,

सब में अलग होता है एहसास,

परिवार के प्यार में होती है

जीवन जीने की कला,

दोस्तों के प्यार में होता है

मौज मस्ती की धुन,

सच्चे प्रेमी के प्यार में होता है समर्पण।

 

रात को फूल को भी नही मालूम की

उसे सुबह मंदिर पर जाना है

या कब्र पर जाना है,

इसलिये जिंदगी जितनी जीओ मस्ती से जीओ।।

 

सारी सृष्टि है मस्ती में,

बस एक मनुज है दुखी यहाँ।

थोड़ा-सा बोध जगाओ तो,

हो सकते हो चिर सुखी यहाँ।

अब  मस्त  जरा  रहना  सीखो,

बस थोड़ा-सा बहना  सीखो।

 

जिंदगी को गमले के पौधे

 की तरह मत बनाओ जो

 जो थोड़ी सी धूप लगने पर

 मुरझा जाये….

जिंदगी को जंगल के पेड़ की

 तरह बनाओ जो हर परिस्तिथि में

मस्ती से झूमता रहे

 

जो रहता अपनी मस्ती में,

जिंदगी बोध की गीता है।

निष्काम और निरहंकार,

जो धन्यवाद में जीता है।

वह बोधिसत्व है, वन्दित है,

उसका बुद्धत्व सुनिश्चित है।

सोचा ना था कभी

ऐसी दोस्ती होगी,

 

साथ मेरे आप लोगों जैसी

हस्ती होगी, जन्नत की गलियों के

ख्वाब क्यूँ देखूं,

अगर हम सारे दोस्त

साथ होंगे तो नरक में भी

मस्ती होगी….

 

जंगल में रहो या बस्ती में..

लहरों में रहो या कश्ती में..

महंगी में रहो या सस्ती में…

पर रहो  मस्ती में…

 

मस्ती में झूमता जहाँ है

खुशियों में झूमता समाँ है

आये हो बीच हमारे तुम

कैसे करें तेरा अभिनंदन

 

यह होश है कि उसकी मस्ती पे गुफ़्तुगू थी

बाद उसके होश हम को फिर रात भर न आया

जॉन एलिया

 

इस महफ़िल-ए-कैफ़-ओ-मस्ती में इस अंजुमन-ए-इरफ़ानी में

सब जाम-ब-कफ़ बैठे ही रहे हम पी भी गए छलका भी गए …….

 

जीवन  हो  ऐसी  मधुशाला,

हो  प्यास  मगर  संतोष  रहे।

जब  होश  रहे  तब  पीता  जा,

जब  पीता  जा  तब  होश  रहे।

मस्ती  का  ऐसा  आलम  हो,

पीने  से  होश  नहीं  कम  हो।

 

जाता सूरज कल फिर लौट आएगा

बिता बचपन फिर कैसे लौट पाएगा

वो मस्ती वो बेफिक्री का आलम

याद बन कर ही जब-तब सताएगा

 

ये नज़रों का लड़ाना कुछ छेड़ कुछ हंगामा,

चढ़ता है होली में मस्ती पे धमाल का रंग !!

 

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कुछ शानदार खूबसूरत मस्ती शायरी इमेजेस दी हैं, आप इन मस्ती शायरी इमेजेस को आसानी से डाउनलोड और शेयर कर सकते हैं.

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Majburi Shayari – Shayari on Majburi

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Majburi Shayari – मजबूरी शायरी 

Majburi Shayari :  ज़िन्दगी में कभी कभी ऐसे पल आते हैं जब इन्सान मजबूर हो जाता है, वह चाहकर भी अपने मन की नहीं कर सकता, ऐसे ही पलों के ज़ज्बात ज़ाहिर करने के लिए,  दोस्तों इस पेज पर हम आपके लिए मज़बूरी पर शायरी पेश कर रहे हैं, यहाँ मशहूर शायरों के मज़बूरी के बारे में शेर दिए गए हैं, इन्टरनेट पर यह मज़बूरी शायरी का एक सबसे बड़ा संग्रह है, मज़बूरी के बारे में मशहूर शायरों ने क्या क्या कहा है, मज़बूरी पर सारे शेर एक पेज पर पढ़कर आपको काफी अच्छा लगेगा, यहाँ मज़बूरी शायरी पर 150 से भी ज्यादा शेर संकलित जमा किये गए है. 

हमने यहाँ महान शायरों की Majburi shayari 2 lines देवनागरी font में दी है, यह मज़बूरी शायरी hindi (Majburi shayari in hindi ) और उर्दू भाषा में हैं, Majburi shayari in hindi को आप आसानी से कॉपी कर अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं, Majburi par shayari का यह संकलन आपको केसा लगा, कमेंट्स में ज़रूर लिखे.

मज़बूरी शायरी इमेजेस :- इस पेज के अंत में हमने कुछ  मज़बूरी शायरी इमेजेस दी हैं, आप इन मज़बूरी शायरी इमेजेस को आसानी से डाउनलोड और शेयर कर सकते हैं.

सभी hindi शायरी की लिस्ट यहाँ दी गयी है  All Topics Hindi Shayari

 

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majburi shayari hindi

 

बोझ उठाना शौक़ कहाँ है मजबूरी का सौदा है

रहते रहते स्टेशन पर लोग क़ुली हो जाते हैं

~मुनव्वर राना

 

थके लोगों को मजबूरी में चलते देख लेता हूँ

मैं बस की खिड़कियों से ये तमाशे देख लेता हूँ

~मुनीर नियाज़ी

 

मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का

मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है

~बशीर बद्र

 

उन के सितम भी कह नहीं सकते किसी से हम

घुट घुट के मर रहे हैं अजब बेबसी से हम

~आले रज़ा रज़ा

 

हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है

वज्ह कोई मजबूरी भी हो सकती है

~बेदिल हैदरी

 

एक मजबूर का तन बिकता है मन बिकता है

इन दुकानों में शराफ़त का चलन बिकता है

~मुज़फ़्फ़र वारसी ~

 

pyar me majburi shayari

 

गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से

पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम

~साहिर_लुधियानवी

 

जितनी हिरनी की दूरी है ख़ुद अपनी कस्तूरी से,

उतनी ही दूरी देखी है इच्छा की मजबूरी से,

 

ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी

मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी

~कलीम_आजिज़

 

कह तो सकता हूँ मगर मजबूर कर सकता नहीं

इख़्तियार अपनी जगह है बेबसी अपनी जगह

~अनवर_शऊर

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आदत से लाचार है आदत नई अजीब

जिस दिन खाया पेट भर सोया नहीं ग़रीब

~अख़्तर_नज़्मी

 

बहाना कोई तो ऐ ज़िंदगी दे

कि जीने के लिए मजबूर हो जाऊँ

~RajeshReddy

 

ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना

ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते

~AkhtarSheerani

 

नाकाम हैं असर से दुआएँ दुआ से हम

मजबूर हैं कि लड़ नहीं सकते ख़ुदा से हम

~Ehsanvi 

 

दोनों का मिलना मुश्किल है दोनों हैं मजबूर बहुत

उस के पाँव में मेहंदी लगी है मेरे पाँव में छाले हैं ~Ameeq Hanafi

 

shayari on majburi

 

चलो हम भी वफ़ा से बाज़ आए

मोहब्बत कोई मजबूरी नहीं है

~मज़हर_इमाम

 

हमारी बेबसी शहरों की दीवारों पे चिपकी है

हमें ढूँडेगी कल दुनिया पुराने इश्तिहारों में ~दाराब_बानो_वफ़ा

 

ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना,

ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते !!

 

बहाना कोई तो ऐ ज़िंदगी दे

कि जीने के लिए मजबूर हो जाऊँ

~RajeshReddy

 

majburi shayari in urdu

 

जिस्म-ए-आज़ादी में फूंकी तूने मजबूरी की रूह

ख़ैर जो चाहा किया अब ये बता हम क्या करें ~Fani Badayuni

 

रात के राही थक मत जाना

सुबह की मंजिल दूर नहीं

ढलता दिन मजबूर सही

ढलता सूरज मजबूर नहीं

-साहीर लुधियानवी

 

हर तमन्ना से जुदा मैं

हर खुशी से दूर हूं

जी रहा हूं, क्योंकि

जीने के लिए मजबूर हूं

मुझको मरने भी ना देगा ये तुम्हारा इंतज़ार..

-अंजान

गर ज़िन्दगी में मिल गए फिर इत्तफ़ाक़ से

पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम ..

-साहिर लुधियानवी

 

रोक सको तो पहली बारिश की बूँदों को तुम रोको

कच्ची मिट्टी तो महकेगी है मिट्टी की मजबूरी ~Mohsin Bhopali

 

हमारी बेबसी शहरों की दीवारों पे चिपकी है

हमें ढूँडेगी कल दुनिया पुराने इश्तिहारों में

 

बचपन, यौवन और बुढ़ापा,

कुछ दशकों में ख़त्म कहानी।

फिर-फिर जीना, फिर-फिर मरना,

यह मजबूरी या मनमानी?

-अटलजी

 

किस को ख़बर थी मुख़्तारी में होंगे वो इतने मजबूर

हम अपने से शर्मिंदा हैं उन से अर्ज़-ए-हाल के बाद ~Zafar Gorakhpuri

नाकाम हैं असर से दुआएँ दुआ से हम

मजबूर हैं कि लड़ नहीं सकते ख़ुदा से हम ~Ahsan harvi

 

हम ऐब समझते हैं हर इक अपने हुनर को

क्या कीजिए मजबूर हैं क़िस्मत नहीं अच्छी ~Bekhud Dehlvi

 

हम मौत भी आए तो मसरूर नहीं होते

मजबूर-ए-ग़म इतने भी मजबूर नहीं होते ~Fani Badayuni

 

बेबसी किसे कहते हैं ये पूछो उस परिंदे से.

जिसका पिंजरा रखा भी तो खुले आसमान के तले.!

 

चाहत में क्या दुनिया-दारी इश्क़ में कैसी मजबूरी

लोगों का क्या समझाने दो उन की अपनी मजबूरी ~Mohsin Bhopali

 

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Khushi Shayari – Shayari on Khushi with Images

Khushi Shayari in Hindi

Khushi Shayari

Khushi Shayari :  ख़ुशी शायरी,  दोस्तों इस पेज पर हम आपके लिए ख़ुशी पर शायरी पेश कर रहे हैं, यहाँ मशहूर शायरों के ख़ुशी के बारे में शेर दिए गए हैं, इन्टरनेट पर यह ख़ुशी शायरी का एक सबसे बड़ा संग्रह है, ख़ुशी के बारे में मशहूर शायरों ने क्या क्या कहा है, ख़ुशी पर सारे शेर एक पेज पर पढ़कर आपको काफी अच्छा लगेगा, यहाँ ख़ुशी शायरी पर 150 से भी ज्यादा शेर संकलित जमा किये गए है. 

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Khushi shayari in hindi

 

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तेरे वा‘दे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना

कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए‘तिबार होता … Ghalib Khushi shayari

 

लबों पर यूँही सी हँसी भेज दे

मुझे मेरी पहली ख़ुशी भेज दे

अँधेरा है कैसे तेरा ख़त पढ़ूँ

लिफ़ाफ़े में कुछ रौशनी भेज दे

~मोहम्मद अल्वी

 

वो दिल ले के ख़ुश हैं मुझे ये ख़ुशी है

कि पास उन के रहता हूँ मैं दूर हो कर

~जलील मानिकपूरी

 

इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा

अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है

~अख़्तर शीरानी ~

 

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी

दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी

~Parveen Shakir –

 

अब्र है, गुलज़ार है, मय है, ख़ुशी का दौर है

आज तो डूबे हुए दिल को उछलने दीजिए

~हसन बरेलवी

 

ख़ुशी जीने की क्या मरने का ग़म क्या

हमारी ज़िंदगी क्या और हम क्या

~मिर्ज़ा ग़ालिब

 

दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह

फ़र्ज़ के अंजाम देने की ख़ुशी अपनी जगह

~गणेश बिहारी तर्ज़

 

इतने संजीदा कि जैसे खेल ही हो ज़िंदगी

खेल ही में सारे ग़म हों खेल ही सारी ख़ुशी

 

‏मिल जाए मुझ को ख़ाक जो क़दमों की आप के

दिल क्या है मैं तो जान भी दे दूँ ख़ुशी के साथ

 

मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है

~अहसन मारहरवी ~

 

है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम

मैं ये क्यूँ पूछूँ कब मिलेंगे आप

~निज़ाम रामपुरी

 

तमाम उम्र ख़ुशी की तलाश में गुज़री

तमाम उम्र तरसते रहे ख़ुशी के लिए

 

वो हयात क्या कि जिस में न ख़ुशी के साथ ग़म हो

वो सहर भी क्या सहर है कि जो शाम तक न पहुँचे

~मुहम्मद अय्यूब ज़ौक़ी

 

Shayari on khushi

 

एक वो हैं कि जिन्हें अपनी ख़ुशी ले डूबी

एक हम हैं कि जिन्हें ग़म ने उभरने न दिया

~आज़ाद_गुलाटी

 

खुला ये राज़ कि ये ज़िंदगी भी होती है

बिछड़ के तुझ से हमें अब ख़ुशी भी होती है

~हसीब सोज़      

 

मजबूरियों को अपनी कहें क्या किसी से हम

लाए गए हैं, आए नहीं हैं ख़ुशी से हम

~बिस्मिल अज़ीमाबादी

 

उस से मिलने की ख़ुशी बाद में दुख देती है

जश्न के बाद का सन्नाटा बहुत खलता है

– Moin Shadab

 

कर रहा हूँ तुझे ख़ुशी से बसर

ज़िंदगी तुझ से दाद चाहता हूँ

~अंजुम सलीमी

 

हर एक ग़म को ख़ुशी की तरह बरतना है

ये दौर वो है कि जीना भी इक हुनर सा लगे

~जाँ निसार अख़्तर

 

मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है

~अहसन मारहरवी ~

 

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले

अपनी ख़ुशी न आए न अपनी ख़ुशी चले

~ज़ौक़

 

Khushi shayari two lines

 

ज़िंदगी कितनी मसर्रत से गुज़रती या रब

ऐश की तरह अगर ग़म भी गवारा होता

~अख़्तर_शीरानी

 

लबों पर यूँही सी हँसी भेज दे

मुझे मेरी पहली ख़ुशी भेज दे

अँधेरा है कैसे तेरा ख़त पढ़ूँ

लिफ़ाफ़े में कुछ रौशनी भेज दे

~मोहम्मद_अल्वी

 

वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता

किस घर में ख़ुशी होती है, मातम नहीं होता

~रियाज़_ख़ैराबादी

 

ख़ुशी हुई थी कि अब मैं तन्हा नहीं हूँ लेकिन

ये शख़्स तो मेरे साथ चलता ही जा रहा है

~शारिक़_कैफ़ी

 

दिल में कोई ख़ुशी नहीं लेकिन

आदतन मुस्कुरा रहा हूँ मैं

~रिफ़अत सुलतान

 

अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला

हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला

~NidaFazli

 

इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा

अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है

~अख़्तर_शीरानी

 

तमाम उम्र ख़ुशी की तलाश में गुज़री

तमाम उम्र तरसते रहे ख़ुशी के लिए

~अबुल_मुजाहिद_ज़ाहिद

 

न ख़ुशी अच्छी है ऐ दिल न मलाल अच्छा है

यार जिस हाल में रक्खे वही हाल अच्छा है

~Jaleel Manikpuri

 

सुकूँ ही सुकूँ है ख़ुशी ही ख़ुशी है

तेरा ग़म सलामत मुझे क्या कमी है

~ख़ुमार_बाराबंकवी

 

Khushi wali shayari

 

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी

दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी

~परवीन_शाकिर

 

सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना

क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह

~क़तील_शिफ़ाई

    

ख़ुशी है सब को रोज़-ए-ईद की याँ

हुए हैं मिल के बाहम आश्ना ख़ुश

बाहम – together

आश्ना – acquaintance

 

नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है

हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में

~अहमद_मुश्ताक़

 

ये कह के दिल ने मेरे हौसले बढ़ाए हैं

ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं

~Mahirul Qadri ~    

 

न ख़ुशी अच्छी है ऐ दिल न मलाल अच्छा है

यार जिस हाल में रक्खे वही हाल अच्छा है

~जलील_मानिकपूरी

 

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है

जब तुम मुझे अपना कहते हो अपने पे ग़ुरूर आ जाता है

~साहिर_लुधियानवी

दिल दे तो इस मिज़ाज का परवरदिगार दे

जो रंज की घड़ी भी ख़ुशी से गुज़ार दे

~Dagh Dehlvi ~

 

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं

फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है

~निदा_फ़ाज़ली ~    

इतने संजीदा कि जैसे खेल ही हो ज़िंदगी

खेल ही में सारे ग़म हों खेल ही सारी ख़ुशी

~सलीम_अहमद

 

Khushi shayari hindi

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है

जब तुम मुझे अपना कहते हो अपने पे ग़ुरूर आ जाता है

~साहिर_लुधियानवी

 

खुल के रो लूँ तो ज़रा जी सँभले

मुस्कुराना ही मसर्रत* तो नहीं

 – परवीन फ़ना सय्यद  *Happiness

 

ये चुपके चुपके न थमने वाली हँसी तो देखो

वो साथ है तो ज़रा हमारी ख़ुशी तो देखो

~शारिक़_कैफ़ी

 

  अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे

बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे

~Shakeel Badayuni

 

उससे मिलने की ख़ुशी बाद में दुख देती है

जश्न के बाद का सन्नाटा बहुत खलता है

~MoinShadab

 

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले

अपनी ख़ुशी न आए न अपनी ख़ुशी चले

~Zauq

 

ये कह के दिल ने मेरे हौसले बढ़ाए हैं,

ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं

~Mahirul Qadri

 

नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है

हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में

~Ahmad Mushtaq

 

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं

फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है

~NidaFazli

 

दिल दे तो इस मिज़ाज का परवरदिगार दे

जो रंज की घड़ी भी ख़ुशी से गुज़ार दे

~Dagh Dehlvi

 

Zindagi khushi shayari in hindi

 

बहुत दिनों से है दिल अपना ख़ाली ख़ाली सा

ख़ुशी नहीं तो उदासी से भर गए होते

~BashirBadr

 

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी

दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी ~Parvin Shakir

 

तेरी ख़ुशी से अगर ग़म में भी ख़ुशी न हुई

वो ज़िंदगी तो मोहब्बत की ज़िंदगी न हुई

~Jigar

 

शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों को

ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का ~मोमिन

 

ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं

ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं

~Mahirul Qadri

 

हर तमन्ना से जुदा मैं

हर खुशी से दूर हूं

जी रहा हूं, क्योंकि

जीने के लिए मजबूर हूं

मुझको मरने भी ना देगा ये तुम्हारा इंतज़ार..

-अंजान

 

समझते हैं हम खेल दुनिया के ग़म को

हमारी ख़ुशी है तुम्हारी ख़ुशी से ~हैरतगोंडवी

 

बड़े घरों में रही है बहुत ज़माने तक

ख़ुशी का जी नहीं लगता ग़रीब-ख़ाने में Nomaan Shauq

 

लबों पर यूँही सी हँसी भेज दे

मुझे मेरी पहली ख़ुशी भेज दे ~Alvi

 

हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है

ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू

~Faraz

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आ धमके ऐश ओ तरब क्या क्या जब हुस्न दिखाया होली ने

हर आन ख़ुशी की धूम हुई यूँ लुत्फ़ जताया होली ने ~Nazir

 

अब खुशी है न कोई ग़म रुलानेवाला

हमने अपना लिया हर रंग ज़मानेवाला

हर बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा

जिस तरफ़ देखिए आने को है आनेवाला

-निदा

 

वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता

किस घर में ख़ुशी होती है मातम नहीं होता

~Riyaz Khairabadi

 

अरे ओ आसमाँ वाले, बता इसमें बुरा क्या है

ख़ुशी के चार झोंके, गर इधर से भी गुज़र जाएँ

~Sahir

 

Khushi shayari status

 

ख़ुशी की लहर दौड़ी दुश्मनों में

वो शायद दोस्तों में घिर गया है ~Amir Qazalbash

 

चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ

तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ

 

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती हैं आँखों में सुरूर आ जाता हैं,

जब तुम मुझे अपना कहते हो अपने पे ग़ुरूर आ जाता हैं

-साहिर

 

‘इक ख़्वाब ख़ुशी का देखा नही,

देखा जो कभी तो भुल गये

माँगा हुआ तुम कुछ दे न सके,

जो तुमने दिया वो सहने दो’-कैफ़ी आझमी

 

हँसी ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है

ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू ~Faraz

 

ख़ुशी मिली तो ये आलम था बद-हवासी का

कि ध्यान ही न रहा ग़म की बे-लिबासी का ~Zafar

 

मेरी ज़िंदगी के मालिक मेरे दिल पे हाथ रखना

तेरे आने की ख़ुशी में मेरा दम निकल न जाए ~anwar mirzapuri

 

KHUSHI SHAYARI IMAGES

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Khusi Shayari

 

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Khuda Shayari in Hindi

2 Line Khuda Shayari

150 Khuda Shayari खुदा पर शायरी 

खुदा शायरी,  दोस्तों इस पेज पर हम आपके लिए खुदा पर शायरी पेश कर रहे हैं, यहाँ मशहूर शायरों के खुदा के बारे में शेर दिए गए हैं, इन्टरनेट पर यह खुदा शायरी का एक सबसे बड़ा संग्रह है, खुदा के बारे में मशहूर शायरों ने क्या क्या कहा है, खुदा पर सारे शेर एक पेज पर पढ़कर आपको काफी अच्छा लगेगा, यहाँ खुदा शायरी पर 150 से भी ज्यादा शेर संकलित जमा किये गए है.  

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Khuda Shayari – खुदा शायरी

 

कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं

नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है

~बेदम शाह वारसी

 

ऐ दिल न अक़ीदा है दवा पर न दुआ पर

कम-बख़्त तुझे छोड़ दिया हम ने ख़ुदा पर

~सफ़ी औरंगाबादी

 

सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं

जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं

~सुदर्शन फ़ाख़िर

 

ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे

कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे

~बशीर बद्र

 

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

~AllamaIqbal

 

न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता

डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

~MirzaGhalib

 

न मंदिर में सनम होते न मस्जिद में ख़ुदा होता

हमीं से ये तमाशा है न हम होते तो क्या होता

~नौशाद अली

 

हर शख़्स बन गया है ख़ुदा, तेरे शहर में

किस किस के दर पे माँगीं दुआ तेरे शहर में

~नज़ीर सिद्दीक़ी

 

कोई चारह नहीं दुआ के सिवा

कोई सुनता नहीं ख़ुदा के सिवा

~हफ़ीज़_जालंधरी

    

सर-ए-महशर यही पूछूँगा ख़ुदा से पहले

तूने रोका भी था बंदे को ख़ता से पहले

– आनंद नारायण मुल्ला

 

ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़

डरते हैं ऐ ज़मीन तिरे आदमी से हम

– अज्ञात

 

आसमाँ पे है ख़ुदा और ज़मीं पे हम

आज कल वो इस तरफ़ देखता है कम

Sahir Ludhyanvi

 

ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को

बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख

~निदा फ़ाज़ली

 

कैसी चली है अब के हवा तेरे शहर में

बंदे भी हो गए हैं ख़ुदा तेरे शहर में

~ख़ातिर_ग़ज़नवी

 

 कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं

ना-ख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है

~बेदम शाह वारसी

 

हम ख़ुदा के कभी क़ाइल ही न थे

उन को देखा तो ख़ुदा याद आया

 

ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री ‘ग़ालिब’

हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे

~Ghalib

2 khuda shayari 2 lines

बंदगी हम ने छोड़ दी है ‘फ़राज़’

क्या करें लोग जब ख़ुदा हो जाएँ

~Faraz

 

ज़माना ख़ुदा को ख़ुदा जानता है

यही जानता है तो क्या जानता है

 

अब तो जाते हैं बुत-कदे से ‘मीर’

फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया

~MirTaqiMir

 

उतार इन में कोई अपनी रौशनी या रब

कि लोग थक गए ज़ुल्मत से अब बहलते हुए

~उबैदुल्लाह_अलीम

 

पुकारता रहा किस किस को डूबने वाला

ख़ुदा थे इतने मगर कोई आड़े आ न गया

~यगाना_चंगेज़ी

 

ग़म मुझे, हसरत मुझे, वहशत मुझे, सौदा मुझे,

एक दिल दे कर ख़ुदा ने, दे दिया क्या क्या मुझे

~सीमाब_अकबराबादी

 

बच्चा बोला देख कर मस्जिद आली-शान

अल्लाह तेरे एक को इतना बड़ा मकान

~NidaFazli ~shair

 

दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब

क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो

~AllamaIqbal

 

कैसी चली है अब के हवा तेरे शहर में

बंदे भी हो गए हैं ख़ुदा तेरे शहर में

~ख़ातिर_ग़ज़नवी

 

कहने को ज़िंदगी थी बहुत मुख़्तसर मगर

कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया

~ख़ुमार_बाराबंकवी

 

न मंदिर में सनम होते न मस्जिद में ख़ुदा होता

हमीं से ये तमाशा है न हम होते तो क्या होता

~नौशाद_अली

 

बुत-ख़ाना तोड़ डालिए मस्जिद को ढाइए

दिल को न तोड़िए ये ख़ुदा का मक़ाम है

~हैदर_अली_आतिश

 

ख़ुदा के नाम पे जिस तरह लोग मर रहे हैं

दुआ करो कि अकेला ख़ुदा न रह जाए

~तसनीम_आबिदी

 

फ़लक-नशीं सही मेरा ख़ुदा मगर ‘मोहसिन’

कभी कभी वो ज़मीं पर उतर भी आता है

~मोहसिन_एहसान

 

किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में

मिरे नसीब में तुम भी नहीं ख़ुदा भी नहीं

~अख़्तर_सईद_ख़ान

 

न कर किसी पे भरोसा कि कश्तियाँ डूबें

ख़ुदा के होते हुए नाख़ुदा के होते हुए

~अहमद_फ़राज़

 

अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख

इक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी है

~QatilShifai

 

न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता

डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

~मिर्ज़ा_ग़ालिब

 

रक़ीबों ने रपट लिखवाई है जा जा के थाने में

कि ‘अकबर’ नाम लेता है ख़ुदा का इस ज़माने में

~अकबर_इलाहाबादी

 

हम ख़ुदा के कभी क़ाइल ही न थे

उन को देखा तो ख़ुदा याद आया

~MirTaqiMir

 

नए सिरे से तलाश कीजिए !

ख़ुदा जहाँ था वहाँ नहीं है

~Nida Fazli

 

वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है

कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं

~MirzaGhalib

    

हर एक दौर का मज़हब नया ख़ुदा लाया

करें तो हम भी मगर किस ख़ुदा की बात करें

2 khuda shayari in hindi

 

मैं इक थका हुआ इंसान और क्या करता

तरह तरह के तसव्वुर ख़ुदा से बाँध लिए

 

छोड़ा नहीं ख़ुदी को दौड़े ख़ुदा के पीछे,

आसाँ को छोड़ बंदे मुश्किल को ढूँडते हैं

 ~Adam

 

ख़ुदा तौफ़ीक़* देता है जिन्हें वो ये समझते हैं

कि ख़ुद अपने ही हाथों से बना करती हैं तक़दीरें

 

परस्तिश की याँ तक कि ऐ बुत तुझे

नज़र में सभों की ख़ुदा कर चले

~मीर_तक़ी_मीर

 

जिन से इंसाँ को पहुँचती है हमेशा तकलीफ़

उन का दावा है कि वो अस्ल ख़ुदा वाले हैं

~अब्दुल_हमीद_अदम

 

उस ख़ुदा की तलाश है ‘अंजुम’

जो ख़ुदा हो के आदमी सा लगे

~Anjum Saleemi

 

इश्क़ है मैं हूँ दिल-ए-नाकाम है

इस के आगे बस ख़ुदा का नाम है

~आनंद_नारायण_मुल्ला

 

ख़ुदा का घर भी है दिल में बुतों की चाह भी है

सनम-कदा भी है दिल अपना ख़ानक़ाह भी है

~असमान_जाह_अंजुम*

 

दिल है क़दमों पर किसी के सर झुका हो या न हो

बंदगी तो अपनी फ़ितरत है ख़ुदा हो या न हो ~जिगर_मुरादाबादी

 

ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है

रहे सामने और दिखाई न दे ~BashirBadr

 

आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद

बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता

~DaghDehlvi

 

जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद

फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है

~ग़ालिब

 

पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए

हम चाँद से आज लौट आए

~KaifiAzmi

 

वहाँ भी मुझ को ख़ुदा सर-बुलंद रखता है

जहाँ सरों को झुकाए ज़माना होता है ~असअद_बदायुनी

 

हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से

हर साँस ये कहती है हम हैं तो ख़ुदा भी है ~AkbarAllahabadi

 

ख़ुदा से क्या मोहब्बत कर सकेगा

जिसे नफ़रत है उस के आदमी से ~NareshKu~Shad

 

उसका दरवाजा रात गए तक

हर ज़ात के आदमी के लिए खुला रहता है

ख़ुदा जाने उसके कमरे सी कुशादगी

मस्ज़िद और मंदिर के आँगनों में कब पैदा होगी?

-निदा

 

ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है

रहे सामने और दिखाई न दे ~BashirBadr

 

सब कुछ ख़ुदा से माँग लिया तुझको माँग कर

उठते नहीं हैं हाथ मेरे इस दुआ के बाद

 

‘ज़फ़र’ आदमी उस को न जानिएगा

वो हो कैसा ही साहब-ए-फ़हम-ओ-ज़का/

जिसे ऐश में याद-ए-ख़ुदा न रही

जिसे तैश में ख़ौफ़-ए-ख़ुदा न रहा

Bahadur Shah Zafar

 

 shayari on khuda

 

तुम इतना हुस्न आख़िर क्या करोगे

अरे कुछ तो ख़ुदा के नाम पर दो

-Taaj Bhopali

 

दिल लिया है तो ख़ुदा के लिए कह दो साहब

मुस्कुराते हो तुम्हीं पर मिरा शक जाता है

~हबीब मूसवी

 

तेरे भी दिल में हूक सी उठ्ठे ख़ुदा करे

तू भी हमारी याद में तड़पे ख़ुदा करे

~ओवेस अहमद दौराँ

दे मोहब्बत तो मोहब्बत में असर पैदा कर

जो इधर दिल में है या रब वो उधर पैदा कर

~बेख़ुद देहलवी

 

मेरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए

तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए

~शाज़ तमकनत

 

तुम जिसे याद करो फिर उसे क्या याद रहे

न ख़ुदाई की हो परवा न ख़ुदा याद रहे

~शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

 

उठा सुराही ये शीशा वो जाम ले साक़ी

फिर इस के बाद ख़ुदा का भी नाम ले साक़ी

~कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर

 

न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए

ख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए

 

आप के लब पे और वफ़ा की क़सम

क्या क़सम खाई है ख़ुदा की क़सम

~सबा अकबराबादी

 

कहे कोई किस से सताना तुम्हारा

ख़ुदाई तुम्हारी ज़माना तुम्हारा

~सिद्दीक़ अहमद बेनज़ीर

    

या ख़ुदा दर्द-ए-मोहब्बत में असर है कि नहीं

जिस पे मरता हूँ, उसे मेरी ख़बर है कि नहीं

~जलील_मानिकपूरी

 

 khuda ki shayari

हमारे साथ उठता बैठता था

वो इक बंदा ख़ुदा होने से पहले

~इसहाक़_विरदग

    

ज़मीं को ऐ ख़ुदा वो ज़लज़ला दे

निशाँ तक सरहदों के जो मिटा दे

 

चोरी ख़ुदा से जब नहीं बंदों से किस लिए

छुपने में कुछ मज़ा नहीं सबको दिखा के पी

– Fayyaz Hashmi

 

हद है अपनी तरफ़ नहीं मैं भी

और उन की तरफ़ ख़ुदाई है

~जोश_मलीहाबादी

   

जो ज़माने से छुपानी थी मुझे हर वो बात,

शेर-दर-शेर बयाँ है कि ख़ुदा ख़ैर करे !!

 

ज़माना ख़ुदा को ख़ुदा जानता है

यही जानता है तो क्या जानता है

~यगाना_चंगेज़ी

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इश्क़ में बू है किबरियाई की

आशिक़ी जिस ने की ख़ुदाई की

~बक़ा_उल्लाह_बक़ा

किबरियाई = pride, greatness

 

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब

मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं

~हफ़ीज़_जालंधरी

  ~

ख़ुदा करे कि तिरी उम्र में गिने जाएँ

वो दिन जो हम ने तिरे हिज्र में गुज़ारे थे

~Nadeem

 

महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से

ख़ुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है

~BashirBadr

 

या ख़ुदा अब के ये किस रंग में आई है बहार

ज़र्द ही ज़र्द है पेड़ों पे हरा कुछ भी नहीं

~राजेश_रेड्डी

 

मेरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए

तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए

~शाज़_तमकनत

 

मैंने दिन-रात ख़ुदा से ये दुआ मांगी थी,

कोई आहट न हो दर पर मेरे जब तू आए !!

    

ज़िंदगी को न बना लें वो सज़ा मेरे बाद

हौसला देना उन्हें मेरे ख़ुदा मेरे बाद

~हकीम_नासिर

    

ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैं ने

बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला

~बशीर_बद्र

 

बृन्दाबन के कृष्ण कन्हैय्या अल्लाह हू

बंसी राधा गीता गैय्या अल्लाह हू

~NidaFazli

    

ख़ुदा के वास्ते ग़म को भी तुम न बहलाओ

इसे तो रहने दो मेरा यही तो मेरा है

~MeenaKu~i ~    

 

तू ख़ुदा है न मेरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा

दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें

~AhmadFaraz

 

कश्ती का ज़िम्मेदार फ़क़त ना-ख़ुदा नहीं

कश्ती में बैठने का सलीक़ा भी चाहिए

 

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा

लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं

~मिर्ज़ा_ग़ालिब  

ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को

बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख

~निदा_फ़ाज़ली

 

ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैंने

बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला

~बशीर_बद्र

 

तेरी आँखों में हम ने क्या देखा

कभी क़ातिल कभी ख़ुदा देखा

~सुदर्शन_फ़ाकिर

 

क़फ़स में मौसमों का कोई अंदाज़ा नहीं होता

ख़ुदा जाने बहार आई चमन में या ख़िज़ाँ आई

~मुनव्वर_राना ~qafas ~Shair

     

क्यूँ मिरी शक्ल पहन लेता है छुपने के लिए

एक चेहरा कोई अपना भी ख़ुदा का होता

~Gulzar ~Jashne

 

सिर्फ़ ख़ंजर ही नहीं आँखों में पानी चाहिए

ऐ ख़ुदा दुश्मन भी मुझ को ख़ानदानी चाहिए

~राहत_इंदौरी

~साहिर_लुधियानवी

    

है कहाँ तमन्ना का दूसरा क़दम या रब

हम ने दश्त-ए-इम्काँ को एक नक़्श-ए-पा पाया

~MirzaGhalib

ये मेरे इश्क़ की मजबूरियाँ मआज़-अल्लाह

तुम्हारा राज़ तुम्हीं से छुपा रहा हूँ मैं

 – असरार-उल-हक़ मजाज़

 

जाते हो ख़ुदा-हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है

जब याद हम आ जाएँ, मिलने की दुआ करना

 – जलील मानिकपुरी

 

मेरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो’तबर कर दे

मैं जिस मकान में रहता हूँ उसको घर कर दे

Iftikhar Arif

    

आँखें ख़ुदा ने दी हैं तो देखेंगे हुस्न-ए-यार

कब तक नक़ाब रुख़ से उठाई न जाएगी

~जलील_मानिकपुरी

 

मेरे हबीब मेरी मुस्कुराहटों पे न जा

ख़ुदा-गवाह मुझे आज भी तेरा ग़म है

~AhmadRahi

 

ज़माना दोस्त है किस किस को याद रखोगे

ख़ुदा करे कि तुम्हें मुझसे दुश्मनी हो जाए

~QabilAjmeri

 

अल्लाह रे नाज़ुकी, ये चमेली का एक फूल

सर पर जो रख दिया, तो कमर तक लचक गयी

    

ख़ुदा करे कि तेरी उम्र में गिने जाएँ

वो दिन जो हम ने तेरे हिज्र में गुज़ारे थे ~AhmadNadeemQasmi

 

अब तो जाते हैं बुत-कदे से ‘मीर’

फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया

~मीर

 

हम ख़ुदा के कभी क़ाइल ही न थे

उन को देखा तो ख़ुदा याद आया

~मीर_तक़ी_मीर

    

उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना

ऐ मिरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे

~अहमद_फ़राज़

    

उठा सुराही, ये शीशा, वो जाम ले साक़ी

फिर इसके बाद ख़ुदा का भी नाम ले साक़ी

~MahendraSinghBediSahar

 

बिकता रहता सर-ए-बाज़ार कई क़िस्तों में

शुक्र है मेरे ख़ुदा ने मुझे शोहरत नहीं दी

~AhmadAshfaq

 बड़ा मज़ा हो जो महशर में हम करें शिकवा

वो मिन्नतों से कहें चुप रहो ख़ुदा के लिए

~दाग़

khuda shayari hindi

 

जो लोग मौत को ज़ालिम क़रार देते हैं

ख़ुदा मिलाए उन्हें ज़िंदगी के मारों से

~NazirSiddiqui

 

पूछेगा जो ख़ुदा तो ये कह देंगे हश्र में

हाँ हाँ गुनह किया तेरी रहमत के ज़ोर पर

 

शब जो मस्जिद में जा फँसे ‘मोमिन’

रात काटी ख़ुदा ख़ुदा कर के ~Momin

 

वो दिल ही क्या, तेरे मिलने की जो दुआ न करे

मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे

~QateelShifai

 

या रब हमें तो ख़्वाब में भी मत दिखाइयो

ये महशर-ए-ख़याल कि दुनिया कहें जिसे

~Ghalib

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा

लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं ~ग़ालिब

 

या ख़ुदा दर्द-ए-मोहब्बत में असर है कि नहीं

जिस पे मरता हूँ उसे मेरी ख़बर है कि नहीं

~JaleelManikpuri

 

किसी ने चूम के आँखों को ये दुआ दी थी

ज़मीन तेरी ख़ुदा मोतियों से नम कर दे ~बशीर_बद्र

 

मैं ग़ज़ल की शबनमी आँख से ये दुखों के फूल चुना करूँ

मेरी सल्तनत मेरा फ़न रहे मुझे ताज ओ तख़्त ख़ुदा न दे ~बशीर_बद्र

 

ख़ुदा रखे तेरी महफ़िल की रौनक़ें आबाद

नज़ारगी से नज़र में कमी नहीं आती ~ShanulHaqHaqqi

  

वो जल्द आएँगे या देर में ख़ुदा जाने

मैं गुल बिछाऊँ कि कलियाँ बिछाऊँ बिस्तर पर

~ArifLakhnawi

    

ख़ुदा के डर से हम तुम को ख़ुदा तो कह नहीं सकते

मगर लुत्फ़-ए-ख़ुदा क़हर-ए-ख़ुदा शान-ए-ख़ुदा तुम हो ~NoorNarvi

 

वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है

कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं

 

ख़ुदा करे कि तिरी उम्र में गिने जाएँ

वो दिन जो हमने तिरे हिज्र में गुज़ारे थे

~Ahmadnadeemqasmi

    

जानवर आदमी फ़रिश्ता ख़ुदा

आदमी की हैं सैकड़ों क़िस्में ~AltafHusainHali

 आबो-हवा देश की बहुत साफ है

कायदा है, कानून है, इंसाफ है,

अल्लाह मियाँ जाने कोई जिए या मरे,

आदमी को खून-वून सब माफ है

-गुलजार

 

मेरी नज़र की आड़ में उन का ज़ुहूर था

अल्लाह उन के नूर का पर्दा भी नूर था ~FaniBadayuni

 

कुछ खटकता तो है पहलू में मिरे रह रह कर

अब ख़ुदा जाने तिरी याद है या दिल मेरा ~Jigar

 

ख़बर सुन कर मिरे मरने की वो बोले रक़ीबों से

ख़ुदा बख़्शे बहुत सी ख़ूबियाँ थीं मरने वाले में ~Dagh

 

जिस ज़ख़्म की हो सकती हो तदबीर रफ़ू की

लिख दीजियो या रब उसे क़िस्मत में अदू की  ~Ghalib

 

अनोखी वज़ा है सारे ज़माने से निराले हैं

ये आशिक कौन सी बस्ती के या रब रहने वाले हैं ~Allama Iqbal

 

हम ख़ुदा के कभी क़ाइल ही न थे

उन को देखा तो ख़ुदा याद आया…

 

न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता

डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता ~Ghalib

 

ख़ुदा की देन है जिस को नसीब हो जाए

हर एक दिल को ग़म-ए-जावेदाँ नहीं मिलता ~Asar

 

कुछ खटकता तो है पहलू में मेरे रह रह कर

अब ख़ुदा जाने तेरी याद है या दिल मेरा

  ~

हैरत है तुम को देख के मस्जिद में ऐ ‘ख़ुमार’

क्या बात हो गई जो ख़ुदा याद आ गया ~Khu~

 

या रब मुझे महफ़ूज़ रख उस बुत के सितम से

मैं उस की इनायत का तलबगार नहीं हूँ ~Akbar

 

तक़दीर के लिखे से सिवा बन गए हैं हम

बंदा न बन सके तो ख़ुदा बन गए हैं हम ~Bedi

 

नज़र आ रहा है जो वो आसमाँ

ये है मेरे रब का बनाया हुआ ~ShujaaKhawar

 

ख़बर सुन कर मेरे मरने की वो बोले रक़ीबों से

ख़ुदा बख़्शे बहुत सी ख़ूबियाँ थीं मरने वाले में ~Daag

 

फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं

डोर को सुलझा रहा है और सिरा मिलता नहीं ~Akbar

 

तुम्हें चाहूँ मैं तुम रक़ीबों को चाहो

ये ~इंसाफ़ पेश-ए-ख़ुदा चाहता हूँ ~Zahir

khuda par shayari

ऐ आसमान! तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़

डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम

मआज़-अल्लाह उस की वारदात-ए-ग़म मआज़-अल्लाह

चमन जिस का वतन हो और चमन-बे-ज़ार हो जाए ~Jigar

 

उफ़ुक़ के पार जो देखी है रौशनी तुम ने

वो रौशनी है ख़ुदा जाने या अंधेरा है ~meena

    

कोई बोलता नहीं है मैं पुकारता रहा हूँ

कभी बुत-कदे में बुत को कभी काबे में ख़ुदा को ~ASjafri

 

जानवर आदमी फ़रिश्ता ख़ुदा

आदमी की हैं सैकड़ों क़िस्में   ~haali

 

हम ख़ुदा के कभी क़ाइल ही न थे /

 उन को देखा तो ख़ुदा याद आया

meer Taqi’ meer’ 

 

khuda pe shayari

रक़ीबों ने रपट लिखवाई है जा जा के थाने में

 ‘अकबर’ नाम लेता है ख़ुदा का इस ज़माने में

Akbar Allahabadi 

 

तुझी पर कुछ ऐ बुत नहीं मुनहसिर

/ जिसे हम ने पूजा ख़ुदा कर दिया

Miir taqii ‘miir’

 

हवा में फिरते हो क्या हिर्स और हवा के लिए

 ग़ुरूर छोड़ दो ऐ ग़ाफ़िलो ख़ुदा के लिए

Bahadur Shah Zafar  

 

नाराज़ हो ख़ुदा तो करें बंदगी से ख़ुश

/ माशूक़ रूठ जाए तो क्यूँकर मनाएँ हम

daag dehlvi 

ख़ुदा हिमाकत से मेरी ….कोई काफ़िर बदल जाये

 बुत था जो  पत्थर का….अब वो इंसा नज़र आये….!!

Khuda Shayari Images

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Khuda Shayari खुदा शायरी 2 lines

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Father Shayari in hindi with Images

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Father Shayari with Images

Father Shayari :-  फादर, पापा, अब्बू, यानी पिता का किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है, पिता ही व्यक्ति को बनता है, पिता के दिए हुए विचार, व्यहवार, आदतें, संस्कार ही व्यक्ति को बनाते हैं, इसी लिए मशहूर शायर निदा फाजली कहते हैं

“कहीं कुछ भी नहीं बदला,
तुम्हारे हाथ मेरी उंगलियों में सांस लेते हैं,
मैं लिखने के लिये जब भी कागज कलम उठाता हूं,
तुम्हे बैठा हुआ मैं अपनी कुर्सी में पाता हूं |

बदन में मेरे जितना भी लहू है,
वो तुम्हारी लगजिशों नाकामियों के साथ बहता है,
मेरी आवाज में छुपकर तुम्हारा जेहन रहता है,
मेरी बीमारियों में तुम मेरी लाचारियों में तुम |

तुम्हारी कब्र पर जिसने तुम्हारा नाम लिखा है,
वो झूठा है, वो झूठा है, वो झूठा है,
तुम्हारी कब्र में मैं दफन तुम मुझमें जिन्दा हो,
कभी फुरसत मिले तो फातहा पढनें चले आना |”

यूँ तो पिता को सम्मान,प्यार और तोहफे हमेशा देते ही रहना चाहिए, लेकिन पाश्चात्य संस्कृती में पिता के सम्मान का वर्ष में एक दिन ख़ास रहता है जिसे फादर्स डे कहते हैं, इस वर्ष 2019 में फादर्स दे Sunday 16 June को मनाया जायेगा, इस दिन सभी अपने पिता को प्यार भरा सन्देश और तोहफे देतें हैं.

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इस पेज पर हम ख़ास आपके लिए पेश कर रहे हैं पिता के सम्मान में कही गयी कुछ शायरी, यह father shayari मशहूर शायरों ने लिखी है, आप इन शायरी को father day shayari

 के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं, यह shayari on father in hindi हमने देवनागरी font में दी है ताकि आप आसानी से यह मेसेज कॉपी कर अपने पिताजी को भेज सकें.

इस पेज के आखिर में हम खूबसूरत फादर्स डे शायरी इमेज father shayari images भी दे रहे हैं ताकि आप आसानी से डाउनलोड कर सकें.

List of All Topics in Hindi Shayari

Fathers Day shayari in Hindi

 

वो पेड़ जिस की छाँव में कटी थी उम्र गाँव में

मैं चूम चूम थक गया मगर ये दिल भरा नहीं

हम्माद नियाज़ी

 

बच्चे मेरी उँगली थामे धीरे धीरे चलते थे

फिर वो आगे दौड़ गए मैं तन्हा पीछे छूट गया

ख़ालिद महमूद

 

घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में

मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में

 

माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत

है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत

 

अज़ीज़-तर मुझे रखता था वो रग-ए-जाँ से

ये बात सच है मेरा बाप कम न था माँ से

 

उम्मीदें माँ बाप की देखीं

बच्चों का जब बस्ता देखा

 

अब और क्या तेरा बीमार बाप देगा तुझे

बस इक दुआ कि ख़ुदा तुझ को कामयाब करे

#कैफ़ी_आज़मी (shayari on father and daughter in hindi,

)

 

गाँव,बचपन,नदी,महकते खजूर

ख़्वाब की बात मत सुना बाबा

#Sarshar

 

सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है

जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माओं की

#हम्माद_नियाज़ी

 

ज़िंदगी बाप की मानिंद सज़ा देती है

रहम-दिल माँ की तरह मौत बचाने आई

father shayari images

***

तुम्हारी कब्र पर मैं
फ़ातेहा पढ़ने नही आया,

मुझे मालूम था, तुम मर नही सकते
तुम्हारी मौत की सच्ची खबर
जिसने उड़ाई थी, वो झूठा था,
वो तुम कब थे?
कोई सूखा हुआ पत्ता, हवा मे गिर के टूटा था ।

मेरी आँखे
तुम्हारी मंज़रो मे कैद है अब तक
मैं जो भी देखता हूँ, सोचता हूँ
वो, वही है
जो तुम्हारी नेक-नामी और बद-नामी की दुनिया थी ।

कहीं कुछ भी नहीं बदला,
तुम्हारे हाथ मेरी उंगलियों में सांस लेते हैं,
मैं लिखने के लिये जब भी कागज कलम उठाता हूं,
तुम्हे बैठा हुआ मैं अपनी कुर्सी में पाता हूं |

बदन में मेरे जितना भी लहू है,
वो तुम्हारी लगजिशों नाकामियों के साथ बहता है,
मेरी आवाज में छुपकर तुम्हारा जेहन रहता है,
मेरी बीमारियों में तुम मेरी लाचारियों में तुम |

तुम्हारी कब्र पर जिसने तुम्हारा नाम लिखा है,
वो झूठा है, वो झूठा है, वो झूठा है,
तुम्हारी कब्र में मैं दफन तुम मुझमें जिन्दा हो,
कभी फुरसत मिले तो फातहा पढनें चले आना |

***

हम दर-ए-अदल पे मिन्नत को गए जितनी बार

अपने माँ बाप की क़ब्रों पे भी इतने न गए #Mahshar Badayuni

 

नंहे बच्चों ने छू भी लिया चाँद को

बूढ़े बाबा कहानी सुनाते रहे #wasim

 

फूल कभी दोबारा नहीं खिलते

जन्म कभी दोबारा नहीं मिलते

मिलते है लोग हजारों

पर हजारों गलतियां माफ़ करने वाले

मां बाप नहीं मिलते

 

पिता ने हारकर बाज़ी हमेशा मुस्कुराया,

शतरंज की उस जीत को मैं अब समझ पाया।

 

तुम्हारी क़ब्र पर

मैं फ़ातिहा पढ़ने नहीं आया

मुझे मालूम था

तुम मर नहीं सकते

#NidaFazli

 

धरती सा धीरज दिया और आसमान सी उंचाई है,

जिन्दगी को तरस के खुदा ने ये तस्वीर बनाई है।

हर दुख वो बच्चों का खुद पे वो सह लेतें है

उस ईश्वर की जीवित प्रतिमा को हम पिता कहते हैं।।

 

शौक तो पिता की कमाई से पूरे होते हैं,

अपनी कमाई से तो बस गुज़ारे होते हैं।

 

जिस व्यक्ति की छत्रछाया में हम बड़े हुए,

जिनके कर्मों से हमने नैतिकता की शिक्षा ली, उस पिता को हम आज नमन करते हैं। 

 

“पिता का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता।

पिता जैसा दुनिया में कोई और हो नहीं सकता।।”

 

मै उन्हें क्या तोहफा दूँ,,

जो खुद मुझे इस दुनियाँ में लाए हैं,,

जिन्होंने पढा लिखाकर मुझे,,इस काबिल बनाया जो मैं आज ये लिख पा रही हूँ,,

कभी मुझपर वो करने का दबाव नही डाला,,

जिसे करने का मेरा मन नही है,,

क्या तोहफा दूँ मै उन्हें????? (shayari on father and daughter in hindi,

)

Shayari on father in hindi

 

जब परेशानियों से घिर जाती हूँ

कभी खुद को तनहा पाती हूँ,

आप कि कहीं बातें बहुत याद करती हूँ

पापा, आपकी दी सिख हमेशा काम आई (shayari on father and daughter in hindi,

)

 

“कुछ क़िस्से हैं जो हमेशा के लिए दिल पे दर्ज हो गए..

मेरी ख़ुशियाँ ख़रीदने में, मेरे बाबूजी ख़र्च हो गए..

 

थके पिता का उदास चेहरा,

उभर रहा है यूँ मेरे दिल में,

कि प्यासे बादल का अक्स जैसे,

किसी सरोवर से झाँकता है.

 

पिता

हमने पहचाना तुमको

अक्सर आहट से

साइकल की घंटियों की

टनटनाहट से

शाम को दरवाजे की लौटी

मुस्कुराहट से

 

फिर पुराने नीम के नीचे खडा हूँ

फिर पिता की याद आई है मुझे

-कुमार विश्वास

 

पिता रोटी है कपड़ा है मकान है

पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है

 

बुरी तरह थका देने वाली अनंत जिम्मेदारियो के बाद भी अगर

कोई व्यक्ति मुस्कुराता रहता है, तो वो निश्चित रूप से हमारे पिता ही है !!

 

पिता यानी..

पल-पल, पग-पग एक नई चुनौती स्वीकार कर किसी भी स्थिति मे

अंत तक अपने दायित्व और जिम्मेदारी को पूरा करने वाली प्रेरणा।

Father day shayari

बाप का रुत्बा भी कुछ कम नहीं होता लेकिन,

जितनी माँए हैं फ़रिश्तों की तरह होती हैं !

 

जिन पर लुटा चूका था मैं दुनियां की दौलतें,

उन वारिसों ने मुझको कफ़न नाप कर दिया।

-डा. नवाज देवबंदी

 

बड़े मज़बूत होते हैं वो कंधे…

जो पूरे परिवार का बोझ उठाके भी “उफ़्फ़” तक नहीं करते

 

“पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है,

पिता  नहीं  तो  बचपन  अनाथ  है।।

 

“पिता रोटी है, कपडा है, मकान है,

पिता छोटे से परिंदे का बडा आसमान है।।

 

जिन्दगी के सफर ने कोशिश खूब की दुनिया दिखाने की,

पर पापा के कंधे से जितनी दिखाई देती है, असल में दुनिया उतनी ही है

 

“पिता जीवन है, संबल है, शक्ति है,

पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति है

 

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Eid Shayari Eid Status in Hindi

Eid Shayari and Eid Status in Hindi

Eid shayari in Hindi

ईद शायरी, दोस्तों इस पेज पर हम आपके लिए कुछ बहुत खूबसूरत ईद शायरी, ईद स्टेटस और ईद मुबारक मेसेज पेश कर रहे हैं, इस वर्ष 2019 में एसा अनुमान है की ईद यानि की ईद उल फ़ित्र का त्यौहार 5 जून 2019 को मनाया जायेगा, यह ईद के चाँद के दिखाई देने पर निर्भर रहेगा, अगर 4 जून को चाँद दिख गया तो ईद 5 जून 2019 और अगर नहीं दिखा तो 6 जून 2019 को मनाई जाएगी.

यहाँ हम ईद चाँद शायरी और ईद मुबारक शायरी संगृहीत की है, इस पेज पर आपको eid shayari for lovers और  eid sad shayari भी मिल जाएगी

Eid Shayari Images: इस पेज के आखिर में हमने कुछ खुबसूरत Eid Shayari Images भी दी हैं जिनमे मशहूर शायरों की ईद शायरी है, आप सभी से गुज़ारिश है की इस ईद शायरी को अपने दोस्तों को शेयर करें, eid ki shayari उन्हें ज़रूर पसंद आएगी.

Eid shayari for lovers,

 

ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन

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इक उदासी भी साथ लाती है

ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के

जाने किस किस की याद आती है (Eid Sad Shayari)

~फ़रहत एहसास

 

eid shayari for lovers

ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद का

ईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का

 

ऐ हवा तू ही उसे ईद-मुबारक कहियो

और कहियो कि कोई याद किया करता है (Eid Sad Shayari)

 

किसी विसाल की आहट, किसी उम्मीद का दिन

फ़िज़ा में घुलते हुए नग़मा ऐ सईद का दिन

अब इस से बढ़ के मुबारक भी वक़्त क्या होगा

तुम्हारी याद का मौसम है और ईद का दिन (Eid Sad Shayari)

 

ईद अब के भी गई यूँही किसी ने न कहा

कि तिरे यार को हम तुझ से मिला देते हैं

 

eid shayari for lovers

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम

रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है

 

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुश्बू से

चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है

दिलों में प्यार जगाने को ईद आई है

हँसो कि हँसने हँसाने को ईद आई है

 

Eid ki shayari,

तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी

ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी (Eid Sad Shayari)

ZafarIqbal

 

मेरे यारों को ईद मुबारक हो

ग़म-गुसारो को ईद मुबारक हो

आशिक व माशूक़, रिंदों पर्सा

आज सबको को ईद मुबारक हो

 

Eid chand shayari

ज़माने भर की रौनक से हमें क्या वास्ता ग़ालिब,

हमारा चाँद दिख जाए हमारी ईद हो जाये !!

 

Eid chand shayari

माह-ए-नौ देखने तुम छत पे न जाना हरगिज़

शहर में ईद की तारीख़ बदल जाएगी

 

eid shayari for lovers

आप इधर आए उधर दीन और ईमान गए

ईद का चाँद नज़र आया तो रमज़ान गए

शुजाख़ावर

 

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ईद है क़त्ल मिरा अहल-ए-तमाशा के लिए

सब गले मिलने लगे जब कि वो जल्लाद आया

Daagh

 

eid shayari for lovers

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में,

वो दिल में आ के अदा तेरे मुस्कुराने की !!

 

ईद मुबारक़

बंदगी यह कि जज़्बात-ओ-ख़यालात हों पाक

फ़र्ज़ इताअत का मोहब्बत से अदा होता है

 

मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी

अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं

 

Eid chand shayari

फिर बाम की जानिब उठे अबरू-ए-हिलाली,

और चाँद ने शर्मा के कहा ईद-मुबारक !!

 

ये अजीब माजरा है कि ब-रोज़-ए-ईद-ए-क़ुर्बां

वही ज़ब्ह भी करे है वही ले सवाब उल्टा

इंशा अल्लाह ख़ान

 

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Eid chand shayari

कहीं है ईद की शादी, कहीं मातम है मक़्तल में

कोई क़ातिल से मिलता है, कोई बिस्मिल से मिलता है

Dagh

 

उठा दो दोस्तो इस दुश्मनी को महफ़िल से

शिकायतों के भुलाने को ईद आई है

असदुल्लाह

 

वादों ही पे हर रोज़ मेरी जान न टालो

है ईद का दिन अब तो गले हमको लगा लो

Mushafi

 

सभी मुराद हों पूरी हर एक सवाली की,

दुआ को हाथ उठाओ कि ईद का दिन है !!

– ईद मुबारक

 

तुझको मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी

ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी (Eid Sad Shayari)

ZafarIqbal

 

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम

रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है

 

Eid mubarak shayari hindi,

मैं कर दूं सारी खुशियां कुर्बान तेरी दीद के बाद

मायूस ना हो इंशा अल्लाह हम निकाह कर लेंगे इस ईद के बाद…..

 

तुम दरवाजे पे कभी दस्तक न देना

कुछ आहटों में उम्मीद होनी चाहिए!

क्यूँ हो ये रिवाज इतने पकवानों का

गरीब केे घर भी तो ईद होनी चाहिए! (Eid Sad Shayari)

 

या खुदा! अपनी रहमतों  से सबके दिलों को नेक कर दे… 

इस  ईद पर मेरे मुल्क के लोगों को फिर से एक कर दे…….

 

ऐ चाँद तू किस मजहब का है

ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा है.

 

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तुम दिख जाओ कभी,,

वो दिन भी मेरा ईद से कम नहीं होता

 

खुशी चारों तरफ फैले, कलुषता द्वेष खो जाए

अमन का चाँद धरती पर, नई उम्मीद बो जाए..

    ईद मुबारक..

 

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उसे मालूम है उसके आने से हो जायेगी ईद मेरी,

चाँद सा वो मेरे आँगन में उतर क्यों नहीं आता।

बस एक झलक उसकी भर देगी खुशियों से मुझे,

वो मोतियों सा मेरे होठों पे बिखर क्यों नहीं जाता

 

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उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना

ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे

 

– दिलावर अली आज़र

 

रात को नया चांद मुबारक ,

चांद को चांदनी मुबारक ,

फलक को सितारें मुबारक ,

सितारों को बुलन्दी मुबारक ,

और आप सबको हमारी तरफ से ,

ईद_मुबारक

 

“ईद लेकर आती है ढेर सारी खुशिया, ईद मिटा देती है इंसान में दुरियां;

ईद है खुदा का एक नायाम तबारोक, इसीलिए कहते हैँ ईद_मुबारक ।।”

 

उठा दो दोस्तों ! इस दुश्मनी को महफिल से

शिकायतों को भुलाने को ईद  आयी है

 

किया था अहेद कि खुशियाँ जहाँ में बाँटेंगे

इसी तल्ब के निभाने को ईद आयी है

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुशबू से

चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है

 

तमन्ना आपकी सब पूरी हो जाए,

हो आपका मुकद्दर इतना रोशन की,

आमीन कहने से पहले ही आपकी हर दुआ कबूल हो जाए..!

 

“तेरी दुनिया, तेरी उम्मीद तुझे मिल जाए

 चाँद इस बार तेरी ईद तुझे मिल जाए

 जिसकी यादों में चिराग़ों सा जला है शब-भर

 उस सहर-रुख़ की कोई दीद तुझे मिल जाए…”

– डॉ कुमार विश्वास

 

Eid chand shayari

लगता है,आज वो बेपर्दा निकल आए है बाज़ार में,

 चारों तरफ शोर है… ईद मुबारक, ईद मुबारक…

 

मेरी ख़ुशियों से वो रिश्ता है तुम्हारा अब तक

ईद हो जाए अगर ईद-मुबारक कह दो।

 

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Ehsaas shayari in Hindi

Ehsaas Shayari

Ehsaas Shayari एहसास पर खुबसूरत शायरी

Ehsaas Shayari :- हमारे देश के मशहूर शायरों ने दिल को छू लेने वाली एहसास पर खुबसूरत शायरी  यानी की Ehsaas shayari कही है, इस पेज पर हम कुछ अच्छे एहसास पर शेर प्रस्तुत कर रहे हैं, उम्मीद है आपको यह shayari on Ehsaas पसंद आएगी.

इस  Ehsaas shayari को आप अपने सोशल मिडिया पर शेयर कर अपने एहसासों को अल्फाजों का रूप दे सकते हैं, आप इस shayari on Ehsaas को Ehsaas whatsapp status के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं.

सभी टॉपिक्स पर hindi शायरी की लिस्ट देखें – हिंदी शायरी 

Ehsaas shayari images

इस पेज के आखिर में हम कुछ खुबसूरत एहसास शायरी इमेजेस भी पेश कर रहे हैं,

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एहसास  शायरी 

 

बात सहरा में चली जब हमारी प्यास की,

दूर तक फैली रही फिर चाँदनी एहसास की

 

शबनम हैं या ख़्वाब उतरें हैं गुलों पर,

एहसास-ए-मोहब्बत का अंदाज़ सराबी

 

इन से ज़िंदा है ये एहसास कि ज़िंदा हूँ मैं

शहर में कुछ मेरे दुश्मन हैं बहुत अच्छा है

~अहमद वसी

 

कौन तन्हाई का एहसास दिलाता है मुझे

ये भरा शहर भी तन्हा नज़र आता है मुझे

~नूर जहाँ सरवत

 

अब तो ये भी नहीं रहा एहसास

दर्द होता है या नहीं होता

जिगर मुरादाबादी

 

अब तो एहसास-ए-तमन्ना भी नहीं

क़ाफ़िला दिल का लुटा हो जैसे

~साहिर होशियारपुरी

 

मैं उस के सामने से गुज़रता हूँ इस लिए

तर्क-ए-तअल्लुक़ात का एहसास मर न जाए

-Fana Nizami Kanpuri

 

Shayari on Ehsaas

अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ

ख़ुद से मिलना मिरा इक शख़्स के खोने से हुआ

मुसव्विर_सब्ज़वारी

 

न था ज़ियादा कुछ एहसास जिस के होने का

चला गया है तो उस की कमी बहुत आई

ज़फ़र_इक़बाल

 

तन्हाई के लम्हात का एहसास हुआ है

जब तारों भरी रात का एहसास हुआ है

नसीम_शाहजहाँपुरी

 

अपनी तस्वीर बनाओगे तो होगा एहसास

कितना दुश्वार है ख़ुद को कोई चेहरा देना

अज़हर_इनायती

 

अपनी हालत का कुछ एहसास नहीं है मुझ को

मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं

आसी_उल्दनी

 

मेरे अल्फ़ाज़ में जो रंग है वो उस का है

मेरे एहसास में जो है वो फ़ज़ा उस की है

Javed Akhtar

 

ये मोहब्बत है कि एहसास है महरूमी का

मेरी आँखों में बहुत कुछ है ज़बानी कम है

शहज़ाद_अहमद

 

ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो थी नहीं कुछ कम है

हर घड़ी होता है एहसास कहीं कुछ कम है

शहरयार

 

तू मिला है तो ये एहसास हुआ है मुझको

ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिये थोड़ी है

 

उस को खो देने का एहसास तो कम बाक़ी है

जो हुआ वो न हुआ होता ये ग़म बाक़ी है

Nida Fazli

 

रौशनी दर पे खड़ी मुझ को बुलाती क्यूँ है

मैं अँधेरे में हूँ एहसास दिलाती क्यूँ है

शख़ावत_शमीम

 

तकलीफ़ मिट गई मगर एहसास रह गया

ख़ुश हूँ कि कुछ न कुछ तो मेरे पास रह गया

Adam

Ehsaas ki Shayari

 

वो ज़ुल्म भी अब ज़ुल्म की हद तक नहीं करते

आख़िर उन्हें किस बात का एहसास हुआ है

Naseem Shahjahanpuri

 

कुछ तो एहसास-ए-मोहब्बत से हुईं नम आँखें

कुछ तेरी याद के बादल भी भिगो जाते हैं

Meeta

 

ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है

रहे सामने और दिखाई न दे Bashir Badr

 

सिर्फ एहसास है ये रूह से महसूस करो

प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो..

-गुलज़ार

 

ये अलग बात कि एहसास जुदा हों वर्ना

राहतें एक सी अफ़सुर्दगियाँ एक सी हैं अहमद_फ़राज़

 

सदाए अपने सुरोंसे उठकर चली गयी है

बस एक एहसास की ख़ामोशी है-गूँजती है

बस एक तकमील का अँधेरा है-जल रहा है

गुलज़ार

 

थोड़ी ख़लिश होगी,थोड़ा सा ग़म होगा

तन्हाई तो होगी,एह्सास कम होगा

गहरी ख़्हराशों की गहरी निशानियाँ हैं

 

मेरी लिखी बात को

हर कोई समझ नहीं पाता

में एहसास लिखता हूँ

और लोग अल्फाज़ पढ़ते हैं

 

मामूरा-ए-एहसास  में है हश्र सा बरपा 

इंसान की तज़लील गवारा नहीं होती

Sahir

 

****

Ehsaas Hindi Shayari

 

तू रहना बेख़बर मेरे एहसासों से,

फिर भी सारी उमर शिद्दत से चाहेंगे तुझे…

 

तुम्हें सोच कर जो हम मुस्करातें है  !!

       वो तुम हो

  तुम्हें याद करके  रात भर जागते है !!

    वो तुम हो

 

तुम्हें ख्वाबों में नही एहसासों में समाया है !!

 वो तुम हो

 

आँखों से एहसासों को पढ़ लिया करो,

की ज़ुबाँ कभी कभी दिल का साथ नही देती  

 

*एहसासों के पांव नहीं होते,*

*फिर भी दिल तक पहुंच ही जाते हैं!*

 

क्या लिखूं और  कितना लिखूं , दिल के एहसासों को

जिंदगी भरी पड़ी है सब, अनकहें अल्फाज़ों से

 

तमन्नाएं तो बहुत

अधूरी पड़ी तो है

जहन में

 

फिर भी आख़री दीदार

मयस्सर हो अगर

तुमसे पूछ लूँ

कैसी लगती हूँ अब मैं

 

ये आँखें जो चमकती थी

तेरी मुहब्बत से

आज इनमें तेरे इंतज़ार की

चमक दिखती है क्या

 

ये ऱूखसार सुर्ख़ थे

एहसासों से तेरे

आज इनपर

तेरे नाम का ज़र्द

एहसास है क्या

 

स्याही एहसासों की शब्द प्रेम के

कलम बन गयी धड़कन दिल बन गयी किताब

और लो बन गयी इश्क़ की

इन नई दास्तान….

 

बस एक बार ही होता है असर

 दिल पर….”एहसासों “का…..

ये इश्क़ है ‘साहिब’……..सौ बार  नही होता….!!!!!

 

 

जिंदगी में ऐसे लोग भी मिलते हैं….

 

जो वादे तो नहीं करते लेकिन

निभा बहुत कुछ जाते है.,.अक्सर वही रिश्ते,

          लाजवाब होते हैं..

जो एहसानों से नहीं,

          एहसासों से बने होते हैं..!   

 

उम्र लग जाती है एहसासों को अल्फाज देने में

 फक़्त दिल टूटने से कोई शायर नहीं बनता!!

 

कुछ रंग बिखरे हैं अल्फाजों में ,

कुछ रंग उड़ रहे एहसासों में ‘

         हर रंग आज छू कर तुम्हें…

                  घुल कर समा रहें हैं ,

                             मेरी सांसों में…!

 

“उनके एहसासों की महक ना हो जिसमें ,

या खुदा दूर ही रखना वो हवाएं मुझसे .

 

कुछ एहसासों के साये ,

दिल_को_छू_जाते_हैं..

कुछ मंज़र दिल में ,,

उतर_जाते_हैं…

बेजान गुलशन में भी ,,,

फूल_खिल_जाते_हैं…

जब ज़िन्दगी में आप जैसे ,,,,

दोस्त_मिल_जाते_हैं..

 

 

बसंत की शीतल सी #बयार

जब मुझे छू कर गुजरती है,

तब वो महसूस मुझे

तुम्हारे एहसासों सी होती है..!!

 

मंद-मंद सी #बयार भी मुझमें

सौ ख़्बाव जगाती है,

ना चाहते हुए भी ये धड़कने

तुम्हारे लिए मचलती है..!!  

 

 

मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है,

कभी कबीरा दीवाना था,कभी मीरा दीवानी है।

यहां सब लोग कहते हैं मेरी आंखों में आंसू हैं,

जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है।।

 

जागना भी कबूल है तेरी यादो मे रात भर..

तेरे एहसासों मे जो सुकून है वो नींद मे कहां..

 

न लफ़्ज़ों से

न एहसासों से

मैं लिखती हूँ बस तुम्हारी यादों से

 

एहसासों के धागों में पिरोया था मैंने,

“उसे” जो मेरा कभी हुआ ही नही …!!

 

कभी कभी ये सोचती हूँ…….

तेरे *एहसासों* के बग़ैर तन्हा

  मक़ा सी तो दिखूंगी,

 

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जिसकी दीवारें तो बरकरार हो

   मग़र उजड़ी हुई..!!

 

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में,

रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है।

 

मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है

कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है

 

बस एक कलम हूँ मैं

हर रंग के रिश्ते में डूबकर

खुद को ही रंग रही हूँ मैं

जिंदगी के पन्ने में जिम्मेदारी

संग लिए दौड़ रही हूँ मैं

कभी एहसासों और अल्फाज़ो

में छुप कर बह रही हूँ मैं

वक्त की बंदिश मैं कैद होकर

धीरे-धीरे चल रही हूँ मैं

किसी किताब के कोरे कागज पर

अपनी छाप छोड़ रही हूँ मै

 

सहेज रही हूँ खुद को

अपने ही अल्फाजों से

बदल रही हूँ अपना कल

शब्दों के एहसासों में..

 

कुछ अधूरे एहसासों ने ही थामा है हर पल…

चाँद तो पूरा हो कर भी रात का न हुआ…

 

मुक़द्दर से अब कोई शिक़ायत नहीं रही

जो एहसासों में जी लिया, हक़ीक़त से कम नहीं

 

एहसासों को विराम दो अब

इन रिश्तों को नाम दो अब

लबों की लबों से बुझती नही प्यास

किसी और चीज़ का जाम दो अब

मेरे नाम की मुझको शाम दो अब

 

थक सी गयी हूँ…. खुद से

ए दिल,बस अब कोई ख्वाईश ना कर..

वो मेरा है और हमेशा मेरा रहेगा

बेवज़ह… एहसासों की नुमाइश ना कर

 

शब्द एहसासों को सहारा देते है..

पर कुछ एहसास ख़ामोशी में संवरते है ….

 

महसूस होते हुए एहसासों का मिलना

यूँ तड़प कर के दो प्यासो को मिलना,

अक्सर याद आता है मुझे मेहब्बत में

उसकी साँसों से मेरी साँसों का मिलना,

 

मुश्किल ही लगता था..

उन एहसासों को भूल पाना..

पर ये ज़रूरी तो नही..

की हर मुश्किल सिज़..

नामुमकिन ही हो…

 

एहसासों की दुनियां को

इस कदर साथ मिल जाय

काश वो रूठ के गले लगे

और पूछे क्या हुआ चलो

फिर से मुस्कुराया जाय.

 

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