Love letter shayari in hindi ख़त पर शायरी

Love letter shayari in hindi

Love letter shayari in hindi ख़त पर शायरी

ख़त पर  शायरी

Love letter shayari in hindi :- Here we are presenting a Collection of Hindi Shayari on Khat (The letter)

ख़त पर हिंदी और उर्दू शायरी का संग्रह हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहें हैं, जब भी आप किसी को ख़त लिखें तो अपने ख़त की शुरुवात इन्ही शेरों से करें.

List of all hindi Shayayri

Love letter shayari in hindi
Love Letter Khat Shayari

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जैसे हो उम्र भर का असासा ग़रीब का

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कुछ इस तरह से मैंने सँभाले तुम्हारे ख़त

~वसी_शाह

हमपे जो गुज़री बताया न बताएंगे कभी

कितने ख़त अब भी तेरे नाम लिखे रखे हैं

ख़त नहीं हूँ जिस पे तुम राहों की तफ़सील लिखो

उसके घर जाऊंगा मैं जिसका पता कोई नहीं

 

ख़त पढ़ के कहीं और बिगड़ बैठे न यारब ~

याद आई है अबरू दम-ए-तहरीर किसी की!

 

फिर एक बे-नाम ख़त आया है मेरे नाम,

फिर कागज़ में उसकी तस्वीर उभर आई है। ~पाकीज़ा

 

मैं मुहब्बत से महकता हुआ ख़त हूँ मुझको

ज़िंदगी अपनी किताबों में छुपा कर ले जाये

-बशीर बद्र

 

हो चुका ऐश का जलसा तो मुझे ख़त पहुँचा,

आपकी तरह से मेहमान बुलाए कोई!

~दाग़_देहलवी

 

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था

न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था!

~दाग़

 

क्या–क्या फ़रेब दिल को दिए इज़्तिराब में,

उनकी तरफ़ से आप लिखे ख़त जवाब में!

~दाग़ (Love letter shayari in hindi)

 

हो लिये क्यूँ  नामावर के  साथ-साथ ~

या-रब! अपने ख़त को हम पहुँचाएँ क्या!

~ग़ालिब

 

~नामावर तू ही बता तूने तो देखे होंगे

कैसे होते हैं वो ख़त जिनके जवाब आते हैं!

~क़मर_बदायुनी

 

क़ासिद के आते आते ख़त एक और लिख रखूं

मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में ~ग़ालिब

Love letter shayari in hindi
Love letter Khat

हाए कैसी कशमकश है  यास भी है आस भी ~

दम निकल जाने को है ख़त का जवाब आने को है!

 

ग़ैर को ख़त लिखा उस पे पता मेरा रखा

हंस के आईने से कहा ’आतिश’ ज़िंदा है अभी

 

दिल-ए-नादाँ न धड़क, ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क

कोई  ख़त  ले  के  पड़ौसी  के  घर आया होगा

 

हमारे ख़त के  तो पुर्जे किए  पढ़ा भी नहीं ~

सुना जो तुमने बा-दिल वो पयाम किसका था!

(Love letter shayari in hindi)

मिरा ख़त उसने पढ़ा, पढ़ के नामावर से कहा,

यही जवाब है-  इसका कोई जवाब नहीं!

 

कोई तोहफ़ा, न कोई ख़त, न किसी की तस्वीर,

और मेरे घर से तिरे ग़म के सिवा क्या निकला!

 

ख़त लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो

हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के

 

मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए

हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर कलम निकले

~मिर्ज़ा_ग़ालिब

 

हम तो  इक हर्फ़ के  नहीं ममनून,

कैसा  ख़त–ओ–पयाम  होता है!

~Meer

Love letter shayari in hindi
Love letter shayari Khat par Shayari

“दे के ख़त मुंह देखता है नामावर

कुछ तो पैगामे ज़बानी और है” ~ग़ालिब

 

वो एक ख़त जो उसने कभी लिखा ही नहीं,

मैं रोज़ बैठ कर उस का जवाब लिखता हूँ !!

 

ग़ुस्से में, बरहमी में,  ग़ज़ब में, इताब में…

ख़ुद आ गए हैं वो मेरे ख़त के जवाब में!

 

कितने ख़त आये गए शाख़ पे फूलों की तरह

आज दरिया में चराग़ों के सफ़र याद आये

 

ज़हन में जब भी तेरे ख़त की इबारत चमकी

एक ख़ुशबू सी निकलने लगी अलमारी से

Love letter shayari in hindi
Love letter shayari Khat par shayari

लिखा वही था की जो था नसीब का लिखा

बला से, ख़त का जवाब उसने कुछ दिया तो सही

 

किसी को भेज के ख़त हाय ये कैसा आज़ाब आया

कि हर एक पूछता है नामावर आया? जवाब आया?

~एहसान मरहरवी ( Love letter shayari in hindi)

 

हर-दम यही दुआ है ख़ुदा की जनाब में,

आ जाए यार ख़ुद मेरे ख़त के जवाब में !!

 

उनके ख़त की आरज़ू है उनकी आमद का ख़याल

किस क़दर फैला हुआ है कारोबार ए इंतज़ार

 

वो अनपढ़ था फिर भी उसने पढ़े लिखे लोगों से कहा

एक तस्वीर कई ख़त भी हैं साहब आप की रद्दी में

बशीर बद्र

 

मैंने गीतों में बहुत प्यार किया है तुमको

जो कोई गीत सुनाये तो मुझे ख़त लिखना

 

आज सीवन को उधेड़ो तो ज़रा देखेंगे….

आज संदूक से वो ख़त तो निकालो यारो!

 

वो ख़त पागल हवा के आंचलों पर,

किसे तुमने लिखा था याद होगा।।

 

एक मुद्दत से न क़ासिद है, न ख़त है न पयाम,

अपने वादे को कर तू याद, मुझे याद न कर!

 

जवाब-ए-ख़त का न क़ासिद से माजरा पूछो,

है साफ़ चेहरे से ज़ाहिर कि शर्मसार आया!

 

उसने अपने ख़त में मुझको कितने दर्द से लिखा है,

अब तो गाँव आया करना अब तो सड़केँ पक्की है!

 

मेरे ख़त यूँ सरेआम जलाया ना करो,

राख से भी आती हैँ ख़ुशबू मेरी मोहब्बत की!

 

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में,

एक पुराना ख़त खोला अनजाने में!

( Love letter shayari in hindi)

 

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते

ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँ नहीं देते!

 

कैसे मानें कि उन्हें भूल गया तु ऐ ‘कैफ़’

उन के ख़त आज हमें तेरे सिरहाने से मिले

 

अंधेरा है कैसे तिरा ख़त पढूँ

लिफ़ाफ़े में कुछ रौशनी भेज दे

 

वो एक ख़त जो तूने कभी लिखा ही नहीं,

में रोज बैठ कर उसका जवाब लिखता हूँ।।

 

वो ख़त तेरे, अभी भी सलामत हैं मेरे पास

खोजती हूँ उनमें, अब भी वही एहसास

 

क्या लिखूँ दिल की हकीकत आरज़ू बेहोश है,

ख़त पर हैं आँसू गिरे और कलम खामोश है!

 

किस ख़त में लिख कर भेजूं अपने इंतज़ार को तुम्हें;

बेजुबां हैं इश्क़ मेरा और ढूंढता है ख़ामोशी से तुझे।

 

जिधर देखो उधर मिल जाएंगे अख़बार नफरत के…!!

बहुत दिनों से मोहब्बत का न देखा एक ख़त यारों…!!

 

इक ख़त लिखा था बादलों को

भीगा भीगा जवाब आया अभी

( Love letter shayari in hindi)

 

वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना…

उस को ख़त लिखना तो मेरा भी हवाला देना.. ~ अज़हर इनायती

 

रात खोले थे कुछ पुराने ख़त

फिर मुहब्बत दराज़ में रख दी ।।

 

वो भी शायद रो पड़े वीरान काग़ज़ देख कर

मेने उस को आख़री ख़त में लिखा कुछ नहीं था

 

मुद्दत के बाद ख़त आया जो इज़हार-ए-मोह्हबत का,,

बैरन अँखियों ने बिन पढ़े भिगो हर लफ़्ज मिटा दिये।।

 

ख़त हो, किताब हो, या दिल का ज़ख़्म हो,

जो भी है मेरे पास, निशानी उसी की है ••!

 

वो रोई तो जरूर होगी खाली कागज़ देखकर..

ज़िन्दगी कैसी बीत रही है पूछा था उसने ख़त में…

 

मेरे सनम की दिल्लगी न पूछो यारो, गैर का ख़त.

लिफाफे में रख कर उसपर मेरा ही पता लिख दिया. है

 

प्यार छिपा है ख़त में इतना. जितने सागर में मोती.

चूम ही लेता हाथ तुम्हारा. पास जो मेरे तुम होती. -इंदीवर.

 

बेवफाई उसकी मिटा के आया हूँ; ख़त उसके पानी में बहा के आया हूँ;

कोई पढ़ न ले उस बेवफा की यादों को;  पानी में भी आग लगा के आया हूँ

 

तेरे ख़त में इश्क की गवाही आज भी है,

हर्फ़ धुंधले हो गए पर स्याही आज भी है।।

 

तेरे ख़त की इबारत की मैं स्याही बन गया होता

तो चाहत की डगर का मैं भी राही बन गया होता

 

कुछ ख़्वाबों के ख़त इनमें

कुछ चाँदके आईने सूरज की शुजाएँ हैं

नज़मों के लिफाफ़ोंमें कुछ मेरे तजुर्बे हैं

कुछ मेरी दुआएँ हैं

गुलज़ार

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Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

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बहाने पर शायरी

दोस्तों बहाने पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “बहाने” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “बहाने” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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बहाना कोई तो ए जिन्दगी दे

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कि जीने के लिए मजबूर हो जाऊं।

 

तेरी मानूस निगाहों का ये मोहतात पयाम

दिल के ख़ूं का एक और बहाना ही न हो

~साहिर

 

चुरा के मुट्ठी में दिल को छुपाए बैठे हैं,

बहाना ये है कि मेहंदी लगाए बैठे हैं !! -क़ैसर देहलवी

 

अहल-ए-हिम्मत ने हर दौर मैं कोह काटे हैं तकदीर के,

हर तरफ रास्ते बंद हैं, ये बहाना बदल दीजिये !! -मंजर भोपाली

 

हँसी तो बस बहाना है तुम्हे गुमराह करने का

वगरना तुम मेरी आँखों के सब आज़ार पढ़ लोगे

जीना है तुझे पीने के लिए, ए दोस्त किसी उनवान से पी,

जीने का बहाना एक सही, पीने के बहाने और भी हैं !!

 

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

उसने आब-ओ-हवा का बहाना बना दिया,

बीमार-ए-यार का दिल कुछ और दुःखा दिया।

 

हम को पहले भी न मिलने की शिकायत कब थी

अब जो है तर्क-ए-मरासिम का बहाना हम से

 

हम बने थे तबाह होने को,

आपका इश्क़ तो बहाना था !!

 

चुपके-चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है !!

 

ये बहाना तेरे दीदार की ख़्वाहिश का है,

हम जो आते हैं इधर रोज़ टहलने के लिए !!

 

रास्ते के जिस दिये को समझते थे हम हक़ीर,

वो दिया घर तक पहुँचने का बहाना बन गया।

~Faraz

 

भूल तो जाऊँ उसे मगर,

फिर ज़िन्दगी का कोई बहाना ना रहेगा।

 

हर रात वही बहाना है मेरे दिल का,

मैं सोता हूँ तो तेरा ख़्वाब आ जाता है।

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढ़े,

पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यूँ है !!

 

तन्हाई की ये कौन सी मंज़िल है रफ़ीक़ो

ता हद्द-ए-नज़र एक बयाबान सा क्यूँ है

 

बहाना कोई ना बनाओ तुम मुझसे खफा होने का,

तुम्हें चाहने के अलावा कोई गुनाह नहीं है मेरा..

 

कभी तफसीली गुफ्तगू करने का बहाना कर लो

मुझको बुला लो या मेरे पास आना जाना कर लो

 

उस शख़्श से रिश्ता कोई पुराना लगता है

मिलना यकायक यूँ तो इक बहाना लगता है

 

मुद्दत से तमन्ना हुई अफसाना न मिला

हम खोजते रहे मगर ठिकाना न मिला

लो आज फिर चली गई जिंदगी नजरो के सामने से

और उसे कोई रुकने का बहाना न मिला

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

या कोई दर्द या ख़ुशियों का ख़ज़ाना ढूँढो

दिल के बहलाने को कोई तो बहाना ढूँढो

 

काश तुम भी हो जाओ तुम्हारी यादों की तरह..

ना वक़्त देखो, ना बहाना, बस चले आओ

 

करुं ना याद मग़र,, क़िस तरह भुलाऊँ उसे

ग़ज़ल बहाना करुं औऱ गुनगुनाऊँ उसे!!

 

ख्याल, ख्वाब,ख्वाहिशे है तुझसे सब

हर वक्त तुझे याद करने का बहाना सब

 

मेरी ज़िंदगी तो गुज़री तेरे हिज़्र के सहारे,

मेरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना

 

हर शाम कोई बहाना ढूँढती हूँ…

जिंदगी तेरा ठिकाना ढूँढती हूँ…!

 

मैं और कोई बहाना तलाश कर लूँगा तू

अपने सर न ले इल्ज़ाम दिल दुखाने का ~शाज़_तमकनत

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

हम बने ही थे तबाह होने के लिए……

तेरा मिलना तो एक बहाना था…!!

अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो;

मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो;

मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना;

मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।

 

मुझको ढूंढ लेती है रोज किसी बहानें से,

दर्द भी वाकिफ हो गया है मेरे हर ठिकानें से…

 

मेरी जिंदगी में खुशियाँ तेरे बहानें से है,

आधी तुझे सताने में आधी तुझे मनाने में ।

 

ये प्यार,मोहब्बत,इश्क की बातें, हैं ये सारी बेक़ार की बातें,

किस्से हैं, अफ़सानें है, ज़ह्मत औ तबाही के बहानें हैं।

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

कभी चिरागों कें बहानें मिल जाया करती थी हसरतों को मंजिलें

आज रौंशनी हैं गजब मगर साया ही नजर नही आता कोई

 

हर-वक्त ज़िंदा मुझमें तू है किसी बहानें ये समझानें को आ

कुछ और करीब आनें को आ मेरे सीनें में अब समानें को आ

 

नाकाम हसरत-ओ-फ़साना तमाम लिखे जा रहा हूँ,

चलो इसी बहानें, दोस्तों का दिल तो बहला रहा हूँ।

 

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Bahane par Shayari in Hindi

बहाने पर शायरी

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Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

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Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

Ada Shayari in Hindi

अदा पर शायरी

दोस्तों अदा पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “अदा” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “अदा” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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अपनी ही तेग़-ए-अदा से आप घायल हो गया,

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चाँद ने पानी में देखा और पागल हो गया !!

 

जिनकी अदा अदा में हैं रानाइयाँ ‘शकील’,

अशआर बन के वो मिरे दीवाँ में आ गए !!

 

वो अदा-ए-दिलबरी हो कि नवा-ए-आशिक़ाना

जो दिलों को फ़तह कर ले वही फ़ातेह-ए-ज़माना

 

होश में ला के मेरे होश उड़ाने वाले

ये तेरा नाज़ है, शोख़ी है, अदा है, क्या है

~नक़्श लायलपुरी

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

मेरी समझ में ये क़ातिल न आज तक आया,

कि क़त्ल करती है तलवार या अदा तेरी !! -जलील मानिकपुरी

 

मैं सर ब कफ सर ए मकतल कुछ इस अदा से गया

कि मेरा दुश्मने ने जां आन बान भूल गया।

 

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में,

वो दिल में आ के अदा तेरे मुस्कुराने की !!

 

फ़िज़ा रंगीन, अदा रंगीन, ये इठलाना, ये शरमाना

ये अंगड़ाई, ये तनहाई, ये तरसा कर चले जाना

बना देगा नहीं किसको, जवां जादू ये दीवाना .. ~नीरज

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

मैं ज़ख़्म-ए-आरज़ू हूँ, सरापा हूँ आफ़ताब

मेरी अदाअदा में शुआयें हज़ार हैं

 

नाज़..अदा..तेवर..शर्म..सरीखे तुमने

क़ैद में जाने कितने ही ग़ुलाम रक्खे हैं

 

अदा-ए-मत्लब-ए-दिल हमसे सीख जाए कोई

उन्हें सुना ही दिया हाल दास्तां की तरह

~दाग़

 

कई अहले नजर इसको भी डिस्को की अदा समझे

बेचारा कपकपाया जब कोई फनकार सर्दी में

 

बंदगी यह कि जज़्बात-ओ-ख़यालात हों पाक

फ़र्ज़ इताअत का मोहब्बत से अदा होता है

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

इक अदा मस्ताना सर से पाँव तक छाई हुई,

उफ़ तिरी काफ़िर जवानी जोश पर आई हुई !! – दाग़ देहलवी

 

मैं यूँ चढ़ रहा हूँ निगाहों में उसकी,

कि गोया कोई हक़ अदा हो रहा है !!

 

मेहंदी लगाए बैठे हैं कुछ इस अदा से वो,

मुट्ठी में उन की दे दे कोई दिल निकाल के !! -रियाज़ ख़ैराबादी

 

अब के अदा-ए-ख़ास से कर इम्तिहान-ए-दिल,

जो बर्क़ तूर पर न गिरी हो गिरा के देख !!

 

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में,

वो दिल में आ के अदा तेरे मुस्कुराने की !!

 

तहरीर से वर्ना मेरी क्या हो नहीं सकता,

इक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता !!

 

बड़ी चीज़ है तुझे क्या पता तेरी इक अदा तेरी इक सदा,

जो तड़प रहे थे बहल गए जो गिरे थे गिरके सम्भल गए !!

 

तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई लेके हँस दो

आ जाएगा पलट कर गुज़रा हुआ ज़माना -शकीलबदायुनी

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

 

अदा-ए-ख़ास से ग़ालिब हुआ है नुक्ता-सारा,

सला-ए-आम है यारान-ए-नुक्ता-दाँ के लिए।

 

मैं इक फकीर के होंठों की मुस्कुराहट हूँ

किसी से भी मेरी कीमत अदा नहीं होती – मुनव्वर राना

 

मैं ज़ख़्म-ए-आरज़ू हूँ, सरापा हूँ आफ़ताब,

मेरी अदाअदा में शुआयें हज़ार हैं

 

सीख ली जिसने अदा गम में मुस्कुराने की,

उसे क्या मिटायेंगी गर्दिशे जमाने की !!

 

बेजुबाँ जानवर भी हक़ अदा कर देते हैं नमक का,

एक नजाने इंसान ही क्यों इतना खुदगर्ज़ निकला।

 

तन्हा वो आएँ जाएँ ये है शान के ख़िलाफ़,

आना हया के साथ है, जाना अदा के साथ !!

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

तर्क-ए-वफ़ा के बाद ये उस की अदा ‘क़तील’,

मुझको सताए कोई तो उस का बुरा लगे !!

 

कुछ इस अदा से आज वह पहलूनशीं रहे

जब तक हमारे पास रहे, हम नहीं रहे !!

 

किसी की जान गयी

उनकी इक अदा ठहरी!!!

 

रूठना भी है हसीनों की अदा में शामिल

आप का काम मनाना है मनाते रहिये.!!

 

अब जी रहा हूँ ग़र्दिशे-दौराँ के सांथ-सांथ

ये नाग़वार फर्ज़ अदा कर रहा हूँ मैं.!!

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

 

मेरी आँखों में आँसू की तरह,एक बार आ जाओ

तक़ल्लुफ़ से बनावट से अदा से चोट लगती है.!!

वो बड़ा रहीमो-क़रीम है,मुझे ये सिफ़अत भी अदा करे

तुझे भूलने की दुआ करूँ,तो दुआ में मेरी असर न हो..

 

हुस्न दुनिया की हर इक शय में बहुत है लेकिन।।

कोई ऐसा नहीं जो तेरी अदा तक पहुँचे..!!

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Ada Shayari in Hindi

अदा पर शायरी

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Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

Ummeed Shayari in Hindi  उम्मीद पर शायरी
Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

Ummeed Shayari in Hindi

उम्मीद पर शायरी

दोस्तों, इन्सान की ज़िन्दगी में उम्मीद की बहुत अहमियत होती है, आप अपने जीवन की किसी भी अवस्था में हों बिना दिल में उम्मीद के खुश नहीं रह सकते और न ही अपने लक्ष्य हांसिल कर सकतें है, आज हम आपके लिए पेश करने जा रहे हैं “उम्मीद” पर कुछ बेहतरीन शेर ओ शायरी, इन अशआर को पढ़कर अपने मन को तरोताजा कीजिये, अगर आपके मन में भी कुछ उम्मीद पर शायरी हो तो उसे कमेंट् बॉक्स में लिखना न भूलें.

“होंसले” पर शायरी आप यहाँ पढ़ सकते हैं.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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दीवानगी हो अक़्ल हो उम्मीद हो कि आस

अपना वही है वक़्त पे जो काम आ गया !! -जिगर

 

उम्मीद ऐसी न थी महफिल के अर्बाब-ए-बसीरत से

गुनाह-ए-शम्मा को भी जुर्म-ए-परवाना बना देंगे

~क़लीम आजिज़

 

मैं वो ग़म-दोस्त हूँ जब कोई ताज़ा ग़म हुआ पैदा,

न निकला एक भी मेरे सिवा उम्मीद-वारों में !! -हैदर अली आतिश

 

एक रात आप ने उम्मीद पे क्या रक्खा है

आज तक हम ने चराग़ों को जला रक्खा है

 

नज़र में शोखि़याँ लब पर मुहब्बत का तराना है

मेरी उम्मीद की जद में अभी सारा जमाना है

 

तेरे जहान में ऐसा नहीं कि प्यार न हो,

जहाँ उम्मीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता !!

~NidaFazli

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

ख़्वाब-ओ-उम्मीद का हक़, आह का फ़रियाद का हक़,

तुझ पे वार आए हैं ये तेरे दिवाने क्या क्या !!

 

इतना भी ना-उम्मीद दिल-ए-कम-नज़र न हो

मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो

 

सरमाया-ए-उम्मीद है क्या पास हमारे

इक आह है सीने में सो न-उम्मीद असर से

 

कहने को लफ्ज दो हैं उम्मीद और हसरत,

लेकिन निहाँ इसी में दुनिया की दास्ताँ है

 

दरवेश इस उम्मीद में था,के कोई आँखें पढ़ लेगा,

भूल बैठा के अब ये ज़बान समझाता कौन है

 

दिल-ए-वीराँ में अरमानो की बस्ती तो बसाता हूँ,

मुझे उम्मीद है हर आरज़ू ग़म साथ लाएगी !! -जलील मानिकपुरी

 

मुतमइन हैं वो मुझे दे के उम्मीदों के चिराग़,

तिफ़्ल-ए-मक़तब हूँ, खिलौनों से बहल जाउँगा

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

 उम्मीद तो बाँध जाती तस्कीन तो हो जाती

वादा ना वफ़ा करते वादा तो किया होता

 

कुछ कह दो झूट ही कि तवक़्क़ो बंधी रहे

तोड़ो न आसरा दिल-ए-उम्मीद-वार का

 

नहीं है ना-उम्मीद इक़बाल अपनी किश्त-ए-वीरां से

ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बहुत ज़रखेज़ है साक़ी

 

उनकी आँखों से रखे क्या कोई उम्मीद-ए-करम

प्यास मिट जाये तो गर्दिश में वो जाम आते हैं

 

अब्र-ए-आवारा से मुझको है वफ़ा की उम्मीद

बर्क-ए-बेताब से शिकवा है के पाइंदा नहीं

 

अब के उम्मीद के शोले से भी आँखें न जलीं,

जाने किस मोड़ पे ले आई मोहब्बत हमको

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

 उम्मीद ऐसी तो ना थी महफ़िल के अर्बाब-ए-बसीरत से

गुनाह-ए-शम्मा को भी जुर्म-ए-परवाना बना देंगे

 

उम्मीद से कम चश्म-ए-खरीदार में आए

हम लोग ज़रा देर से बाजार में आए

 

खाक़-ए-उम्मीद में उंगलियाँ फिराते कोई चिंगारी ढूंढता हूँ

फिर कोई “ख्वाब” जलाना है कि रात रोशनी मांगती है

 

उठता हूँ उसकी बज़्म से जब होके ना उम्मीद

फिर फिर के देखता हूँ कोई अब पुकार ले।

 

उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थी

ग़म भी वो शायद बराए-मेहरबानी दे गया

 

तेरी उम्मीद तिरा इन्तज़ार कब से है,

ना शब् को दिन से शिकायत ना दिन को शब् से है।

~फैज़

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

उन की उल्फ़त का यकीं हो उन के आने की उम्मीद

हों ये दोनों सूरतें तब है बहार-ए-इंतज़ार

 

कभी बादल,कभी बारिश,कभी उम्मीद के झरने

तेरे अहसास ने छू कर मुझे क्या-क्या बना डाला

 

दश्त-ए-इम्कां में कभी शक़्ल-ए-चमन बन ही गयी,

इस उम्मीद-ए-ख़ाम पर हूँ आशियाँ-बर-दोश मैं !!

 

तुम भुला दो मुझे ये तुम्हारी अपनी हिम्मत है,

पर मुझसे तुम ये उम्मीद जिन्दगी भर मत रखना

 

उम्मीद वक्त का सबसे बड़ा सहारा है,

गर हौसला है तो हर मौज में किनारा है !!

 

दिल गवारा नहीं करता शिकस्ते-उम्मीद,

हर तगाफुल पै नवाजिश का गुमाँ होता है !!

 

रही ना ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी,

तो किस उम्मीद पे कहिये की आरज़ू क्या है।

~ग़ालिब

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

 उम्मीद-वार-ए-वादा-ए-दीदार मर चले,

आते ही आते यारों क़यामत को क्या हुआ।

~मीर

 

अबके गुज़रो उस गली से तो जरा ठहर जाना,

उस पीपल के साये में मेरी उम्मीद अब भी बैठी है।

 

दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है,

लंबी है गम की शाम मगर शाम ही तो है।

~फैज़

 

दिल सा दिल से दिल के पास रहे तू,

बस यही उम्मीद है के खास रहे तू।

 

यूँ ही तो कोई किसी से जुदा नहीं होता,

वफ़ा की उम्मीद ना हो तो कोई बेवफ़ा नहीं होता।

 

उम्मीद में बैठे हैं मंज़िल की राह में,

तू पुकारे तो हौंसलों को इलहाम मिले।

 

रही ना ताक़त-ए-गुफ्तार और अगर हो भी,

तो किस उम्मीद पे कहिए के आरज़ू क्या है !! –

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है

किसी का भी हो सर क़दमों में अच्छा नहीं लगता

 

चंद किरनें ले आया हूँ तेरे लिए,

है उम्मीद के तेरा दिन रोशन रहेगा।

 

उम्मीद का दामन बड़ा पैना है,

सुर्ख़ रंग हो गए हाथ मेरे।

 

उम्मीद का लिबास तार तार ही सही पर सी लेना चाहिए,

कौन जाने कब किस्मत माँग ले इसको सर छुपाने के लिए

 

जा लगेगी कश्ती-ए-दिल साहिल-ए-उम्मीद पर,

दीदा-ए-तर से अगर दरिया रवाँ हो जाएगा !! -मिर्ज़ा अंजुम

 

वो उम्मीद ना कर मुझसे जिसके मैं काबिल नहीं,

खुशियाँ मेरे नसीब में नहीं और यूँ बस दिल रखने के लिए मुस्कुरान भी वाज़िब नहीं

 

अभी उसके लौट आने की उम्मीद बाकी है,

किस तरह से मैं अपनी आँखें मूँद लूँ।

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

कहते हैं कि उम्मीद पे जीता है ज़माना

वो क्या करे जिसे कोई उम्मीद ही नहीं ..

 

बरखा की स्याह रात में उम्मीद की तरह

निर्भीक जुगनुओं का चमकना भी देखिये.!!

 

अपने सीने से लगाए हुए उम्मीद की लाश

मुद्दतों जीसत को नाशाद किया है मैंने!

 

अभी कुछ वक्त बाकी है अभी उम्मीद कायम है

कहीं से लौट आओ तुम मुह्ब्बत सासं लेती है

 

मुदतों से यही आलम है न तवकको न उम्मीद

दिल पुकारे ही चला जाता है जाना जाने!

 

उम्मीद की किरण के सिवा कुछ नहीं यहाँ

इस घर में रौशनी का बस यही इंतज़ाम है.!!

 

तपती रेत पे दौड़ रहा है दरिया की उम्मीद लिए

सदियों से इन्सान का अपने आपको छलना जारी है

 

न मंज़िल है न मंज़िल की है कोई दूर तक उम्मीद

ये किस रस्ते पे मुझको मेरा रहबर लेके आया है

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

और दोस्ती जो चाहो,चले ता-उम्र

तो दोस्तों से कोई भी,उम्मीद ना रखें.!!

 

यहाँ रोटी नही “उम्मीद” सबको जिंदा रखती है

जो सड़कों पर भी सोते हैं ,सिरहाने ख्वाब रखते हैं

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Ummeed Shayari in Hindi

उम्मीद पर शायरी

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abake guzaro us gali se to jara thahar jaana,us pipal ke saaye mein meri ummid ab bhi baithi hai.dil na-ummid to nahin naakaam hi to hai,lambi hai gam ki shaam magar shaam hi to hai.~phaizadil sa dil se dil ke paas rahe too,bas yahi ummid hai ke khaas rahe too.yoon hi to koi kisi se juda nahin hota,vafa ki ummid na ho to koi bevafa nahin hota.ummid mein baithe hain manzil ki raah mein,too pukaare to haunsalon ko ilahaam mile.rahi na taaqat-e-guphtaar aur agar ho bhi,to kis ummid pe kahie ke aarazoo kya hai !!

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Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

Mahtaab Shayari in Hindi  माहताब पर शायरी
Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

Mahtaab Shayari in Hindi

माहताब पर शायरी

दोस्तों माहताब पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “माहताब” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “माहताब” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

 

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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ग़ालिब छुटी शराब पर अब भी कभी कभी

पीता हूँ रोज़-ए-अब्र-ओ-शब-ए-माहताब में

~ग़ालिब

 

आ गया था उनके होठों पर तबस्सुम ख्वाब में,

वर्ना इतनी दिलकशी कब थी शबे-माहताब में !!

 

बामे-मीना से माहताब उतरे,

दस्ते-साक़ी में आफ़्ताब आए

हर रगे-ख़ूँ में फिर चिराग़ाँ हो,

सामने फिर वो बेनक़ाब आए !! -फ़ैज़

 

झुका-झुका-सा है माहताब आरज़ूओं का

धुआँ-धुआँ हैं मुरादों की कहकशाँ यारों.!!

 

सफ़र ए माहताब हुआ तमाम अब तो

अश्क़ ए इन्तज़ार की रवानी बंद करो

 

भरे शहर में एक ही चेहरा था जिसे आज भी गलियां ढूँढती हैं

किसी सुबह उस की धूप हुई

किसी शाम वो ही माहताब हुआ ~मोहसिन_नक़वी

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

शब्-ए मिराज़ में उदास, माहताब क्यूँ है!

शमा बुझी-बुझी सी है ,जिगर में इन्कलाब क्यूँ है ..

 

चिराग-ऐ-बज़म ये फासला कीजिए….

बहकती गज़ल कोई कहिए….माहताब ये मेहरबां रौशन है..

 

फिर वही माँगे हुए लम्हे, फिर वही जाम-ए-शराब

फिर वही तारीक रातों में ख़याल-ए-माहताब ….

 

मेरी निगाहों ने ये कैसा ख्वाब देखा है

ज़मीं पे चलता हुआ माहताब देखा है

 

तेरा ख़याल दिलनशीं माहताब सा,

कहने को ज़िन्दगी ये आफ़ताब थी।

 

छा रही उफ़क़ पे सुर्खी की लकीरें..

हो रहे हैं रुख्सत,माहताब और सितारे

 

उसे पता था, कि तन्हा न रह सकूँगी मै

वो गुफ़्तगू के लिए, माहताब छोड़ गया

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

हम ख्वाहिश ए दीदार ए माहताब रखते हैं…..

आप हैं के रूख पे नकाब रखते हैं

 

इश्क़ के आग़ोश में बस इक दिले खाना खराब

हुस्न के पहलू में रुकता आफ़ताब-ओ-माहताब

 

तू माहताब सही अपने आसमान का

मैं भी सितारा हूं किसीके अरमान का

 

तू आफ़ताब सही तेरी राह का ए हमदम..

में छोटा सही मगर चिराग हु किसी की उम्मीदों का

 

अब क्या मिसाल दूँ, मैं तुम्हारे शबाब की ।

इन्सान बन गई है किरण माहताब की ।।

 

तुझे आफताब लिखूंगा,तुझे माहताब लिखूंगा

जो लिख सकूँगा,वो तेरी हर बात लिखूंगा

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

गुल हो, माहताब हो, आईना हो, खुर्शीद हो

अपना महबूब वही है जो अदा रखता हो

 

ज़मीन तेरी कशिश खींचती रही हमको

गए ज़रूर थे कुछ दूर माहताब के साथ ~शहरयार

 

आसमां को निहारते रातें बीत जाती हैं

भुखे को नजर आती रोटी माहताब मे

 

फिर वही माँगे हुए लम्हे, फिर वही जाम-ए-शराब

फिर वही तारीक रातों में ख़याल-ए-माहताब.. – अली सरदार जाफरी

 

मैं आफताब हूँ … अपनी ही आग से निखरता हूँ …….

तू माहताब है .. तुझे मेरी ज़रूरत है

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

वो आज भी मेरे तसव्वुर के माहताब हैं।

नादाँ बादल हूँ, उनपे छा नहीं पाता।।

 

साक़ी नज़र न आये तो गर्दन झुका के देख,

शीशे में माहताब है सच बोलता हूँ मैं।

 

मतला-ए-हस्ती की साज़िश देखते हम भी ‘शकील’।।

हम को जब नींद आ गई फिर माहताब आया तो क्या।। ~शकील बदायूँनी

 

उनका चेहरा कभी आफ़ताब लगा तो कभी माहताब

हम सितारा-ए-मायूस बने सफ़र करते रहे

 

खुशबू के ज़ज़िरों से तारों कि हद तक……

लब-ए लविश माहताब रहेने दो…

 

हिला-ए-ईद का मुँह चूमो इस के आने से

ज़मीं पे देखे कई माहताब ईद के दिन

 

बहार-ए-रंग-ओ-शबाब ही क्या सितारा ओ माहताब भी

तमाम हस्ती झुकी हुई है, जिधर वो नज़रें झुका रहे हैं

 

चाँदनी में न यूँ नकाब हटा, न खफ़ा माहताब हो जाए !

तेरी नज़रों का सुरूर ऐसे बढ़े, एक दिन बेहिसाब हो जाए !

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

शाम के नोक से हौले हौले रिस रही है रात..

माहताब के दीदार से आफ़ताब ठिठक गया..

 

गुल हुई जाती है अफ़सुर्दा सुलगती हुई शाम

धुल के निकलेगी अभी चश्म-ए-माहताब से रात

 

तेरी होंठों की पंखुडिया गुलाब लगती है

तेरी मोहक आँखे शराब लगती है

जिक्र करूँ क्या तेरी रूह की मुस्कान का

तेरी हर अदा माहताब लगती है

 

किस बला के हसीन नज़र आते हो मानिन्द-ए-माहताब नज़र आते हो,

है तूफ़ान शायद आने वाला तुम जो ख़ामोश नज़र आते हो।

 

हंसती हो तो बिखरती है शफ़्फ़ाक चांदनी

तुम चौदहवीं का खिलता हुआ माहताब हो

 

आज फिर माहताब को दिलकशी से मुस्कुराते देखा..

पड़ी जब किरणें आफताब की उनके रुखसार पर

 

शिददत से पलटना ज़िन्दगी के पन्ने इस किताब में अज़ाब और माहताब बहुत हैं।

यु ही नही कोई कहता इसे जिंदगी,इस के किस्से लाजवाब बहुत हैं

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

“चुन्नी में लिपटा छत पर माहताब आने को हैं!

हसरतों की गली में कोई ख्वाब आने को हैं!!”

 

करवटों के दाग़ लिए फ़ना ज़िस्म पर रूबरू हुए तो क्या,

कांधों का काफ़िया चल पड़ा है अब याद ओ माहताब में…

 

जहाँ ही जाने दिन कब होता है,रात कैसे होती है….

जब नज़रें उठीं उनकी आफताब जल उठे,जब पलकें झुकी माहताब चमक जाए

 

मौसम भी है, उम्र भी, शराब भी है; पहलू में वो रश्के-माहताब भी है;

दुनिया में अब और चाहिए क्या मुझको; साक़ी भी है, साज़ भी है, शराब भी है।

 

“उसके चेहरे में मिलता था माहताब मुझे,

मैंने देखा ही नहीं इसलिए आसमां कभी!!”

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

हर एक पुरा ख़्वाब नहीं होता

हर रात पुरा माहताब नहीं होता..

 

न इतना ज़ुल्म कर ऐ चाँदनी बहर-ए-ख़ुदा छुप जा

तुझे देखे से याद आता है मुझ को माहताब अपना ~नज़ीर अकबराबादी

 

हर एक रात को माहताब देखने के लिए

मैं जागता हूँ तेरे ख़्वाब देखने के लिए।

 

न आफताब सा बनना न माहताब मुझे

मैं एक लम्हा हूँ जुगनू सा चमक जाता हूँ

 

“मैंने माहताब की किरणों से बचाया था जिसे,

धूप ओढ़े हुए फिरता है वो बाज़ारों में!!”

 

“इन जागती आँखों में है ख्वाब क्या क्या,

बारिश, भीगे बदन, माहताब क्या क्या!!”

 

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Mahtaab Shayari in Hindi

माहताब पर शायरी

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Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

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Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

Aaftab Suraj Shayari

आफ़ताब-सूरज पर शायरी

दोस्तों आफ़ताब-सूरज पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “आफ़ताब-सूरज” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “आफ़ताब-सूरज” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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न जाने कितने चिरागों को मिल गई शोहरत

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इक आफताब के बे वक्त डूब जाने से।

 

माथे की तपिश जवाँ, बुलंद शोला-ए-आह,

आतिश-ए-आफ़ताब को हमने टकटकी से देखा है।

 

तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चिराग़

लोग क्या सादा हैं सूरज को दिखाते हैं चिराग़

~Faraz

 

इन अँधेरों से ही सूरज कभी निकलेगा “नज़ीर”

रात के साए ज़रा और निखर जाने दे

~नज़ीर बनारसी

 

मैं भटकती हूँ क्यूँ अंधेरे में

वो अगर आफताब जैसा है

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

तीरगी चाँद को ईनाम-ए-वफ़ा देती है,

रात-भर डूबते सूरज को सदा देती है !! -शमीम हनफ़ी

 

अब आ भी जा कि सुबह से पहले ही बुझ न जाऊं

ऐ मेरे आफताब बहोत तेज है हवा

 

तारीकियों में और चमकती है दिल की धूप,

सूरज तमाम रात यहां डूबता नहीं !! -बशीर बद्र

 

पसीने बाटंता फिरता है हर तरफ सूरज

कहीं जो हाथ लगा तो निचोड़ दूगां उसे।

 

चाँद सूरज मिरी चौखट पे कई सदियों से

रोज़ लिक्खे हुए चेहरे पे सवाल आते हैं

~rahatindori

 

हमें चराग समझ कर बुझा न पाओगे

हम अपने घर में कई आफ़ताब रखते हैं

~rahatindori

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए

तेरी सहर हो मेरा आफ़ताब हो जाए

~दुष्यंत कुमार

 

मैं ज़ख़्म-ए-आरज़ू हूँ, सरापा हूँ आफ़ताब

मेरी अदा-अदा में शुआयें हज़ार हैं

~shair

 

गिरती हुइ दीवार का हमदर्द हूँ लेकिन

चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता

~मुज़फ्फर वारसी

 

अपनी ताबीर के चक्कर में मेरा जागता हुआ ख्वाब

रोज सूरज की तरह धर से निकल पड़ता है।

 

फनकार है तो हाथ पे सूरज सजा के ला

बुछता हुआ दिया न मुकाबिल हवा के ला।

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

आये कुछ अब्र कुछ शराब आये,

उसके बाद आये तो अज़ाब आये,

बाम-इ-मिन्हा से महताब उतरे,

दस्त-ए-साक़ी में आफ़ताब आये।

काश होता मेरे हाथों में सूरज का निजाम

तेरे रस्ते में कभी धूप न आने देता।

 

मैं सूरज हूँ कोई मंज़र निराला छोड़ जाऊँगा,

उफ़क़ पर जाते जाते भी उजाला छोड़ जाऊंगा

 

घबराएँ हवादिस से क्या हम जीने के सहारे निकलेंगे

डूबेगा अगर ये सूरज भी तो चाँद सितारे निकलेंगे !!

 

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

मंद रौशनी है धुंधला सा आफ़ताब है,

ए सुबह। तू भी आज गम-ज़दा है क्या।

 

हर ज़र्रा आफ़ताब है, हर शय है बा-कमाल

निस्बत नही कमाल को शरहे कमाल से !! –

 

तेरे चेहरे के नूर से आफ़ताब भी चमकता है,

ए ज़िन्दगी। तू नहीं तो कुछ भी नहीं।

 

किसी दिन,तय है सूरज का ठिकाना ढ़ूँढ़ ही लेंगे,

उजालों की हमारे पास एक पुख्ता निशानी है

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

चलता रहा तू साथ मेरे,

कभी आफ़ताब बनके,

कभी महताब बन के।

 

आपकी नज़रों में आफताब की है जितनी अज़्मत

हम चिरागों का भी उतना ही अदब करते हैं

 

चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज,

हो जायेंगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं !!

 

तेरे जलवों में घिर गया आखिर,ज़र्रे को आफताब होना था

कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी,कुछ मुझे भी खराब होना था

 

चौदवी का चाँद हो, या आफताब हो,

जो भी हो तुम, खुदा की क़सम, लाजवाब हो!!

 

चमन में शब को जो शोख़ बेनक़ाब आया,

यक़ीन हो गया शबनम को आफ़ताब आया !!

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

तू है सूरज तुझे मालूम कहां रात का दुख

तू किसी रोज उतर घर में मेरे शाम के बाद!

 

कल भी सूरज निकलेगा

कल भी पंछी गायेंगे

सब तुझको दिखाई देंगे

पर हम ना नज़र आएंगे

आँचलमें संजो लेना हमको

सपनोंमें बुला लेना हमको

~नरेंद्र_शर्मा

 

उजाले के पुजारी मुज़्महिल क्यूँ हैं अँधेरे से,

के ये तारे निगलते हैं तो सूरज भी उगलते हैं.!!

 

वो डूबते हुए सूरज को देखता है फराज़

काश मैं भी किसी शाम का मंजर होता

 

कभी चाँद चमका ग़लत वक़्त पर

कभी घर में सूरज उगा देर से

-निदा फ़ाजली

 

रात के राही थक मत जाना

सुबह की मंजिल दूर नहीं

ढलता दिन मजबूर सही

ढलता सूरज मजबूर नहीं

-साहीर लुधियानवी

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

रौशनी की भी हिफाज़त है इबादत की तरह

बुझते सूरज से चरागों की जलाया जाए

 

सूरज कही भी जाये

तुम पर ना धूप आये

तुम को पुकारते हैं

इन गेसूओं के साये

आ जाओ मैं बना दू

पलकों का शामियाना

-कमाल अमरोही

 

थका-थका सूरज जब नदी से होकर निकलेगा..

हरी-हरी काई पे पांव पड़ा तो फिसेलगा..

-गुलज़ार

 

गज़ल का हुस्न हो तुम नज़्म का शबाब हो तुम

सदा ये साज़ हो तुम नगमा ये रबाब हो तुम

जो दिल में सुबह जगाये वो आफ़ताब हो तुम..

-साहीर लुधियानवी

 

नज़दीकियों में दूरका मंज़र तलाश कर

जो हाथमें नहीं है वो पत्थर तलाश कर

सूरज के इर्द-गिर्द भटकने से फ़ाएदा

दरिया हुआ है गुम तो समुंदर तलाश कर

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

 सूरज एक नटखट बालक सा

दिन भर शोर मचाए

इधर उधर चिड़ियों को बिखेरे

किरणों को छितराये

कलम,दरांती,बुरुश,हथोड़ा

जगह जगह फैलाये(1/1)

-निदा फ़ाज़ली

 

किरन-किरन अलसाता सूरज

पलक-पलक खुलती नींदें

धीमे-धीमे बिखर रहा है

ज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन ।

-निदा फ़ाजली

 

रात जब गहरी नींद में थी कल

एक ताज़ा सफ़ेद कैनवस पर,

आतिशी सुर्ख रंगों से,

मैंने रौशन किया था इक सूरज

-गुलज़ार

 

काले घर में सूरज रख के,

तुमने शायद सोचा था,मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे,

मैंने एक चिराग़ जला कर,

अपना रस्ता खोल लिया..!

-गुलज़ार

 

रात के पेड़ पे कल ही तो उसे देखा था..

चाँद बस गिरने ही वाला था फ़लक से पक कर

सूरज आया था,ज़रा उसकी तलाशी लेना

-गुलज़ार

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

कुछ ख़्वाबों के ख़त इनमें

कुछ चाँदके आईने सूरज की शुआएँ हैं

नज़मों के लिफाफ़ोंमें कुछ मेरे तजुर्बे हैं

कुछ मेरी दुआएँ हैं

गुलज़ार

 

कोई सूरज से ये पूछे के क्या महसूस होता है

बुलंदी से नशेबों में उतरने से ज़रा पहले

~शाद

 

तरस रहे हैं एक सहर को जाने कितनी सदियों से

वैसे तो हर रोज़ यहाँ सूरज का निकलना जारी है

~राजेश रेड्डी

 

मैं वो शजर भी कहाँ जो उलझ के सूरज से

मुसाफिरों के लिए साएबाँ बनाता है

~शाद

 

सारा दिन बैठा,मै हाथ में लेकर खाली कासा

रात जो गुजरी,चाँद की कौड़ी डाल गई उसमें

सूदखोर सूरज कल मुझसे ये भी ले जायेगा।

-गुलज़ार

 

आप को शब के अँधेरे से मोहब्बत है, रहे

चुन लिया सुबह के सूरज का उजाला मैंने.!!

 

ज़रा सी देर के लिये,जो आ गया मैं अब्र में

इधर ये शोर मच गया,के आफ़ताब ढल गया.!!

न जाने कितने चरागों को मिल गई शोहरत

एक आफ़ताब के बे-वक़्त डूब जाने से..!!

~इक़बाल अशहर

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

हम वो राही हैं लिये फिरते हैं सर पर सूरज।।

हम कभी पेड़ों से साया नहीं माँगा करते..!!

 

चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज।।

हो जाएँगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं..!!

 

अपना सूरज तो तुझे ख़ुद हि उगाना होगा।।

धूप और छाँव के इलहाक़ में क्या ढूँढता है

~मेराज

 

हम वो राही हैं लिये फिरते हैं सर पर सूरज।।

हम कभी पेड़ों से साया नहीं माँगा करते..!!

 

आप को शब के अँधेरे से मोहब्बत है, रहे।।

चुन लिया सुबह के सूरज का उजाला मैंने..!!

 

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Raaz Shayari in Hindi राज़ पर शायरी

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Raaz Shayari in Hindi राज़ पर शायरी

Raaz Shayari in Hindi

राज़ पर शायरी

दोस्तों राज़ पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “राज़” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “राज़” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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इशारे खूब समझता है,

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जो अपना राज़ खोलता नहीं !!

 

राज़-ए-तख़लीक-ए-ग़ज़ल हम को है मालूम ‘नसीम’

जाम हो मय हो सनम हो तो ग़ज़ल होती है

~नसीम शाहजहाँपुरी

 

जिसको ख़बर नहीं, उसे जोशो-ख़रोश है

जो पा गया है राज़, वो गुम है, ख़मोश है

~दत्तात्रिय क़ैफी

 

हर अपनी दास्ताँ को कहा दास्तान-ए-ग़ैर,

यूँ भी किसी का राज़ छुपाते चले गए !!

 

पुकारती है ख़ामोशी मेरी फ़ुगां की तरह

निगाहें कहती हैं सब राज़-ए-दिल ज़ुबां की तरह

~दाग़

 

Raaz Shayari in Hindi

शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो

बेख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो

 

कोई समझेगा क्या राज़-ए-गुलशन

जब तक उलझे न काँटों से दामन..

 

खुलता नहीं है राज़ हमारे बयान से,

लेते हैं दिल का काम हम अपनी ज़बान से !!

 

क्यूँकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे क्या कहें,

वो राज़-ए-दिल जो कह न सके राज़-दाँ से हम !!

 

ख़मोशी की गिरह खोले सर-ए-आवाज़ तक आए,

इशारा कोई तो समझे कोई तो राज़ तक आए !! -मुज़फ़्फ़र अबदाली

 

Raaz Shayari in Hindi

जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक,

वो मिरे दिल का राज़ क्या जानें !! -दाग़ देहलवी

 

जो राज़ है वो खुल के भी इक राज़ ही रह जाए,

इज़हार को मैं ऐसी ज़बाँ ढूँड रहा था !!

 

कोई किस तरह राज़-ए-उल्फ़त छुपाए,

निगाहें मिलीं और क़दम डगमगाए !!

 

यइ राह कहाँ से है, ये राह कहाँ तक है

ये राज़ कोई राही समझा है ना जाना है।

 

इशारे काम करते हैं मोहब्बत में निगाहों के

निगाहों से ही बाहम इन्किशाफ़-ए-राज़ होता है

 

Raaz Shayari in Hindi

मुख़्तसर क़िस्सा-ए-ग़म यह है कि दिल रखता हूं,

राज़-ए-कौनैन ख़ुलासा है इस अफ़साने का !!-फ़ानी बदायूनी

 

दफ़न कर सकता हूँ सीने में तुम्हारे राज़ को,

और तुम चाहो तो अफ़साना बना सकता हूँ मैं।

~मजाज़

 

ख़ामोशियों का राज़-ए-मोहब्बत वो पा गए

गो हम से अर्ज़-ए-हाल की ज़ुर्रत न हो सकी !!

 

चाहता है दिल किसी से राज़ की बातें करे,

फूल आधी रात का आँगन में है महका हुआ !!

 

Raaz Shayari in Hindi

राज़ खुलने का तुम पहले ज़रा अंजाम सोच लो

इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो

 

कहीं कहीं तो ज़मीं आसमाँ से ऊँची है

ये राज़ मुझ पे खुला सीढ़ियाँ उतरते हुए

 

राज़ महफूज़ है इस दर्ज़ा कि मेरे दिल में,

खुद तमाशा है वो और खुद ही तमाशाई है !!- ~रहबर

 

राज़ खोल देते हैं नाज़ुक से इशारे अक्सर,

कितनी खामोश मोहब्बत की जुबां होती है

 

Raaz Shayari in Hindi

तालिब-ए-मसर्रत को,राज़ ये बताता हूँ

हौसला निखरता है,रंज-ओ-ग़म उठाने से.!!

 

लब पे आहें भी नहीं आँख में आँसू भी नहीं

दिल ने हर राज़ मोहब्बत का छुपा रक्खा है.!!

 

हर एक राज़ कह दिया,बस एक जवाब ने

हमको सिखाया वक़्त ने,तुमको क़िताब ने.!!

 

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Raaz Shayari in Hindi

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Doulat Shayari in Hindi धन दौलत और सोने चाँदी पर शायरी

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धन दौलत और सोने चाँदी पर शायरी

दोस्तों धन दौलत और सोने चाँदी पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “धन दौलत और सोने चाँदी” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “धन दौलत और सोने चाँदी” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

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दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती,

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ख़ैरात में इतनी बङी दौलत नहीं मिलती !! -निदा फाजली

 

बाधं के ले गए दिल सोने की हथकड़यों में

मुंसिफाना सही नीलामी पे रोना आया।

 

जड़ दो चाँदी में चाहे सोने में

आईना झूठ बोलता ही नहीं..

 

बेजार यूं हुए कि तेरे अहद में हमें

सब कुछ मिला सकून की दौलत नहीं मिली

 

सुकून-ए-कल्ब की दौलत कहाँ दुनिया-ए-फानी में,

बस इक गफलत-सी आ जाती है और वो भी जवानी में !!

 

Doulat Shayari in Hindi धन दौलत और सोने चाँदी पर शायरी

क्यों ग़रीब समझतें हैं हमें ये जहाँ वाले फ़राज़,

हज़ारो दर्द की दौलत से मालामाल हेँ हम!!

 

अमीर-ज़ादों से दिल्ली के,मत मिला कर ‘मीर’

कि हम ग़रीब हुए हैं इन्हीं की दौलत से..।

-मीर

 

दौलत और जवानी,इक दिन खो जाती है

सच कहता हूँ सारी दुनिया दुश्मन हो जाती है

उमरभर दोस्त लेकिन साथ चलते है..

-आनंद बक्षी

 

तोड़ के झूठे नाते रिश्ते, आया मैं दिलवालों में

सच कहता हूँ चोर थे ज़्यादा, दौलत के रखवालों में..!

-शैलेंद्र

 

उस देश में तेरे परदेस में,सोने चांदी के बदले में बिकते हैं दिल

इस गाँव में दर्द की छांव में,प्यार के नाम पर ही तड़पते हैं दिल..।

-शैलेंद्र

 

Doulat Shayari in Hindi धन दौलत और सोने चाँदी पर शायरी

मुझ से क्या बात लिखानी है कि अब मेरे लिये

कभी सोने कभी चाँदी के क़लम आते हैं.!!

 

दौलत-ए-इश्‍क़ नहीं बाँध के रखने के लिये

इस ख़जाने को जहाँ तक हो लुटाते रहिये.!!

 

भूख दौलत की हो शौहरत की या अय्यारी की

हद से बढ़ती है तो नज़रों से गिरा देती है.!!

 

“उन बूढी बुजुर्ग उँगलियों में कोई ताकत तो ना थी,

मगर सिर झुका तो कांपते हाथों ने जमाने भर की दौलत दे दी”

 

इख़लास की दौलत को हम अहले-मोहब्बत

तक़सीम तो कर देते हैं बेचा नही करते.!!

 

किसी की उंगलियों के क़ीमती हीरे पे मत जाना

ये दौलत-मंद अंदर से भिखारी हो भी सकते हैं.!!

 

Doulat Shayari in Hindi धन दौलत और सोने चाँदी पर शायरी

मुझ पे भी वाजिब है, आंसुओं की ज़कात

ग़म की दौलत से मालामाल हूँ मै.!!

बहुत हि कम नज़र आया मुझे,इखलास लोगों में

ये दौलत बंट गई शायद,बहुत हि ख़ास लोगों में.!!

 

मरने से पहले इतनी सी दौलत तो कमा हि लेंगे।।

कि कंधो की कमी ना होगी मेरे जनाज़े को..!!

 

शब्द बराबर धन नहीं, जो कोई जाने बोल |

हीरा तो दामो मिले, शब्द मोल न टोल ||

 

ना जाने कौन सी दौलत हैं..! दोस्तों के लफ़्जों में..!

बात करते है तो.! दिल खरीद लेते हैं..!

 

“लम्हों की दौलत से दोनों ही महरूम रहे,

मुझे चुराना न आया, तुम्हें कमाना न आया।”

 

Doulat Shayari in Hindi धन दौलत और सोने चाँदी पर शायरी

दुआएं इकट्ठी करने मे लगा हूं,

सुना है दौलत शौहरत साथ नही जाती…

 

आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें

हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं

दौलत हुस्न जवानी ये सब चलती फिरती छाव है

हम ने भी यही देखा तारीख भी यही बतलाती है

 

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Doulat Shayari in Hindi

धन दौलत और सोने चाँदी पर शायरी

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Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

Dariya Shayari in Hindi  दरिया पर शायरी
Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

Dariya Shayari in Hindi

दरिया पर शायरी

दोस्तों दरिया पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “दरिया” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “दरिया” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

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उठाने हैं अभी दरिया से मुझको प्यास के पहरे

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अभी तो खुश्क पैरों पे मुझे रिमझिम भी लिखनी है

 

मेरे दामन को वुसअत दी है तूने दश्त-ओ-दरिया की

मैं ख़ुश हूँ देने वाले, तू मुझे कतरा के राई दे

~नक़्श लायलपुरी

 

अक्स पानी में मोहब्बत के उतारे होते,

हम जो बैठे हुए दरिया के किनारे होते !! -अदीम हाशमी

 

अंदाज़ कोई डूबने के सीखे तो हम से,

हम डूब के दरिया के किनारे नहीं निकले !!

 

मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में हैं,

जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना !!

 

मिल जाऊँगा दरिया से तो हो जाऊँगा दरिया

सिर्फ़ इस लिए क़तरा हूँ कि दरिया से जुदा हूँ

~नज़ीर

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

 

डूबे कि रहे कश्ती दरिया-ए-मोहब्बत में,

तूफ़ान ओ तलातुम पर हम ग़ौर नहीं करते !!

 

समझ लिया था कभी एक सराब को दरिया,

पर एक सुकून था हमको फ़रेब खाने में !!

 

शिकवा कोई दरिया की रवानी से नहीं है,

रिश्ता ही मेरी प्यास का पानी से नहीं है !!

 

वो जो मुमकिन न हो मुमकिन ये बना देता है,

ख़्वाब दरिया के किनारों को मिला देता है!!

 

इस बार शहरे दिल में बहुत बारिशें हुईं

दरिया ग़म-ए-हयात के सब बेकिनार हैं

 

होता है निहाँ गर्द में सहरा मेरे होते

घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया, मेरे आगे

~ग़ालिब

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

मैं दरिया भी किसी गैर के हाथों से न लूं

एक कतरा भी समन्दर है अगर तू देदे!

 

फ़स्ल-ए-गुल आई फिर इक बार असिरान-ए-वफ़ा

अपने ही ख़ून के दरिया में नहाने निकले

 

आँखों मे अश्क बनके हमेशा रहूँगा मैं,

तश्नालबी के बाद भी दरिया रहूँगा मैं

~ काज़िम जरवली

 

दरिया में यूँ तो होते हैं क़तरे ही क़तरे सब,

क़तरा वही है जिसमें के दरिया दिखाई दे !!

 

आलम तो देखिए ज़रा उनके शबाब का

जैसे हो मोजज़न कोई दरिया शराब का

 

चुल्लू में हो दर्द का दरिया ध्यान में उसके होंठ

यूँ भी खुद को प्यासा रखना कितना मुश्किल है

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

बदन से हो के गुज़रा रूह से रिश्ता बना डाला

किसी की प्यास ने आखि़र मुझे दरिया बना डाला

 

गो देख चुका हूँ पहले भी नज़्ज़ारा दरिया-नोशी का,

एक और सला-ए-आम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है !!

 

अगर वो होश में रहते तो दरिया पार कर लेते,

ज़रा सी बात है लकिन कहाँ गाफिल समझते हैं

 

बढ़ गया था प्यास का एहसास दरिया देख कर

हम पलट आये मगर पानी को प्यासा देख कर

~मेराज

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

जरा दरिया की तह तक तू पहुंच जाने की हिम्मत कर,

तो फिर ऐ डूबने वाले, किनारा ही किनारा है !!

 

हुए मदफून-ए-दरिया ज़ेर-ए-दरिया तैरने वाले,

तमांचे मौज़ के खाते थे जो बन कर गुहर निकले।

~इक़बाल

 

उस तश्ना-लब की नींद न टूटे दुआ करो,

जिस तश्ना-लब को ख़्वाब में दरिया दिखाई दे!!

 

दरिया में यूँ तो होते हैं क़तरे ही क़तरे सब,

क़तरा वही है जिसमें के दरिया दिखाई दे !!

 

वो जो मुमकिन न हो मुमकिन ये बना देता है,

ख़्वाब दरिया के किनारों को मिला देता है !! -तैमूर हसन

 

कह देना समन्दर से हम ओस के मोती हैं

दरिया की तरह तुम से मिलने नहीं आएंगे!

 

हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है

जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा

 

नफरतों के पुल लाँघ आया हूँ मैं,

मुहोब्बत के दरिया में डूब जाने के लिए।

 

इस बार शहर-ए-दिल में बहुत बारिशें हुईं,

दरिया ग़म-ए-हयात के सब बेकिनार हैं

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

इश्क़ के दरिया का आदाब ये बड़ा आम है,

दाम-ए-हर-मौज़ की खता है मगर, किश्तियों पे इलज़ाम है।

 

एक सा बरसता है नूर उसका हर कहीं,

फिर भी कहीं दरिया बना और बना सहरा कहीं।

 

आँखों से नींद खोलो दरिया रुके हुए हैं

और पर्वतोंपे कबसे बादल झुके हुए हैं

ये सुबह सांस लेगी और बादबाँ खुलेगा

पलकें उठाओ जानम ये आसमां खुलेगा

 

मेरा साक़ी है बड़ा दरिया दिल,

फिर भी प्यासा हूँ कि सहरा हूँ मैं !!

 

मुझे ज़िंदगी की दुआ देने वाले

हँसी आ रही है तेरी सादगी पर

 

जा लगेगी कश्ती-ए-दिल साहिल-ए-उम्मीद पर,

दीदा-ए-तर से अगर दरिया रवाँ हो जाएगा !! -मिर्ज़ा अंजुम

 

हरेक कश्ती का अपना तज़ुर्बा होता है दरिया में,

सफर में रोज़ ही मंझदार हो ऐसा नहीं होता !!

 

निगाहें थी वो या था दरिया कोई,

एक बार जो डूबा मैं तो फिर उबार ना सका

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में हैं,

जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना

 

तिश्नगी ऐसी कि कौसर से भी तस्कीन ना हो,

पानी पानी ही हुआ देखे जो दरिया हम को !!

 

गहरे पानी में ज़रा आओ उतर कर देखें

हम को दरिया के किनारे नहीं अच्छे लगते

~इन्दिरा वर्मा

 

लहरों से लङा करता हूं मैं दरिया में उतर कर

साहिल पे खङा होके मैं साजिश नहीं कराता!

 

मेरे होठों पे जमा सब्र बता सकता है

मैने दरिया की कोई बात नहीं मानी थी

 

नज़दीकियों में दूरका मंज़र तलाश कर

जो हाथमें नहीं है वो पत्थर तलाश कर

सूरज के इर्द-गिर्द भटकने से फ़ाएदा

दरिया हुआ है गुम तो समुंदर तलाश कर

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

ये इश्क़ नहीं आसाँ बस इतना समझ लीजे,

इक आग का दरिया है और डूब के जाना है

 

कौन सियाही घोल रहा था वक़्त के बहते दरिया में

मैंने आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की..!

-कतील शिफ़ाई

 

कह देना समुन्दर से हम ओस के मोती हैं,

दरिया की तरह तुझ से मिलने नहीं आएँगे!

– बशीर बद्र

 

तेरे शहर तक पहुँच तो जाते

रस्ते में कितने दरिया पड़ते हैं….

पुल सब तूने जला दिए थे..

-गुलज़ार

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

तपती रेत पे दौड़ रहा है दरिया की उम्मीद लिए

सदियों से इन्सान का अपने आपको छलना जारी है

~राजेश रेड्डी

 

दरिया में यूँ तो होते हैं क़तरे-ही-क़तरे सब

क़तरा वही है जिसमें कि दरिया दिखाई दे

~कृष्ण बिहारी नूर

मुद्दतों बाद पशेमाँ हुआ दरिया हमसे

मुद्दतों बाद हमें प्यास छुपानी आई

 

सब को सैराब-ए-वफ़ा ख़ुद को प्यासा रखना

मुझ को ले डूबेगा दिल तेरा दरिया होना.!!

 

हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है

जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा

 

नेकियाँ कर के जो, दरिया में डाल दोगे अभी

वो हि तूफानों में कश्तियाँ बन कर सांथ देंगी कभी

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

बचाता कुछ नहीं सारी कमाई डाल देता है

सुना है रोज़ दरिया में वो नेकी डाल देता है.!!

 

तू ख़ुदा का नाम लेकर घर से निकला है तो फिर

बहते दरिया में उतर जा रास्ता हो जाएगा.!!

 

डुबो दे अपनी कश्ती को,किनारा ढूँढने वाले

ये दरिया-ए-मोहब्बत है,यहाँ साहिल नहीं मिलता.!!

 

बढ़ गया था प्यास का एहसास दरिया देख कर।।

हम पलट आए मगर पानी को प्यासा देख कर..!!

 

“हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है,

जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा।”

 

उन्हें हक़ीक़त-ए-दरिया की क्या ख़बर “अमजद”।।

जो अपनी रूह की मंजधार से नहीं गुज़रे..!!

 

Dariya Shayari in Hindi दरिया पर शायरी

मुद्दतों बाद पशेमाँ हुआ दरिया हमसे।।

मुद्दतों बाद हमें प्यास छुपानी आई..!!

 

नेकियाँ कर के जो, दरिया में डाल दोगे अभी

वो हि तूफानों में कश्तियाँ बन कर सांथ देंगी कभी

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Dariya Shayari in Hindi

दरिया पर शायरी

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Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

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समन्दर पर शायरी

दोस्तों समन्दर पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “समन्दर” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “समन्दर” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

 

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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इलाही कश्ती-ए-दिल बह रही है किस समंदर में

निकल आती हैं मौजें हम जिसे साहिल समझते हैं

~असर सहबाई

 

जर्फ पैदा कर समंदर की तरह

वसअतै खामोशियां गहराईयां।

 

हूरों की तलब और मय ओ सागर से नफ़रत

जाहिद तेरे इरफान से कुछ भूल हुई है

 

कितने ही लोग प्यास की शिद्दत से मर चुके,

मैं सोचता रहा के समंदर कहाँ गये !! – राहत इंदौरी

 

मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर में

मगर यहाँ भी समन्दर निकलने लगते हैं

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

 

पहाड़ों की ढलानों पर,दरख्तो भरी वादियाँ के साए में,झील के किनारे,घर के ख़्वाब में- सब दिख रहा है- समंदर,बर्क,नसीम और…वो तिल.

 

आओ सजदा करें आलमे मदहोशी में

लोग कहते हैं कि सागर को खुदा याद नहीं।

 

मैं दरिया भी किसी गैर के हाथों से न लूं

एक कतरा भी समन्दर है अगर तू देदे!

 

सब हवाएं ले गया मेरे समंदर की कोई

और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया

 

 

ग़मों के नूर में लफ़्जों को ढालने निकले

गुहरशनास समंदर खंगालने निकले

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,

कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा !! ~BashirBadr

 

तेरी अज़मत है तू चाहे तो समंदर दे दे,

माँगने वाले का कासा नहीं जाता

 

समंदर ने कहा मुझको बचा लो डूबने से,

मैं किनारे पे समन्दर लगा के आया हूँ

 

तू समन्दर है तो क्यूँ आँख दिखाता है मुझे,

औस से प्यास बुझाना अभी आता है मुझे

 

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

जिसको देखूँ तेरे दर का पता पूछता है,

क़तरा क़तरे से समंदर का पता पूछता है

 

ज़िक्र करते हैं तेरा नाम नहीं लेते हैं

हम समंदर को जज़ीरा नहीं होने देते

 

क़दम दर क़दम ज़िन्दगी,दौरे इम्तिहान है

कहीं सहरा कहीं समन्दर,कहीं गर्दिशे अय्याम है

 

वो बहने के लिये कितना तड़पता रहता है लेकिन

समंदर का रुका पानी कभी दरिया नहीं बनता

 

रख हौंसला के वो मंज़र भी आएगा,

प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा !!

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

जब चल पड़े सफ़र को तो फिर हौंसला रखो,

सहरा कहीं, कहीं पे समंदर भी आएंगे।

 

कह देना समन्दर से हम ओस के मोती हैं

दरिया की तरह तुम से मिलने नहीं आएंगे!

 

उन आँसुओं का समंदर है मेरी आँखों में

जिन आँसुओं में है ठहराव भी, रवानी भी

 

तेरी अज़मत है तू चाहे तो समंदर दे दे

माँगने वाले का कासा नहीं देखा जाता

 

कितने तूफ़ान दिल में समेटे खड़ा हूँ मैं,

डर हैं लेहरों में उतरा तो समन्दर ना दहल जाए।

 

बे-इरादा टकरा गए थे लेहरों से हम,

समन्दर ने कसम खा ली हमे डुबोने की

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

किसी की मस्त निगाहों में डूब जा गालिब

बहुत ही हंसी समन्दर है खुदकुशी के लिए!

 

उसके रुखसार पे इक अश्क की आवारागर्दी

हमने याकूत के सीने पे समन्दर देखा!

 

आग में डाल या समन्दर मे

आग तेरी हैं बेङियां तेरी!

 

बहते दरिया में बे सूद है गौहर की तलाश

अब सदफ दिल के समंदर में उतारे जायें!

 

प्यार इक बहता दरिया है

झील नहीं कि जिसको किनारे बाँधके बैठे रहते हैं

सागर भी नहीं कि जिसका किनारा नहीं होता

बस दरिया है,बह जाता है..

गुलज़ार

 

कोई अपनी ही नजर से तो हमें देखेगा,

एक कतरे को समन्दर नजर आयें कैसे.!!

 

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

प्यार छिपा है ख़त में इतना

जितने सागर में मोती

चूम ही लेता हाथ तुम्हारा

पास जो मेरे तुम होती

-इंदीवर

 

मैंने समय से रोक के

तेरा पता पुछा है

नीली नदी से कह के

सागर तले ढूंढा है…(1/1)

-गुलज़ार

 

मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

इसी सियाह समंदर से नूर निकलेगा

 

ऐ ख़ुदा रेत के सहरा को समंदर कर दे

या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे

 

एक दिल है कि जो प्यासा है समंदर की तरह

दो निगाहें जो घटाओं के सिवा कुछ भी नहीं.!!

 

एक समंदर जो मेरे काबू में है

और इक कतरा है जो संभलता नही,

एक जिंदगी है जो तुम्हारे बगैर बितानी है

और इक लमहा है जो गुजरता नहीं ।

 

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

ऐ ख़ुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे

या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे

 

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

मै हि कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा

 

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