Chirag Shayari in Hindi चिरागों पर शायरी

Chirag Shayari in Hindi चिरागों पर शायरी

Chirag Shayari in Hindi चिरागों पर शायरी
Chirag Shayari in Hindi चिरागों पर शायरी

Chirag Shayari in Hindi

चिरागों पर शायरी

दोस्तों, आपके लिए यहाँ प्रस्तुत है जलते हुए दीयों, रोशन चिरागों पर कुछ शेर ओ शायरी का संकलन, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा. list of all topics

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इश्क के सफर में रोशनी की कमी न होने दी,

हुआ जब भी अंधेरा तेरी यादों का दीया जला दिया मैने

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मैं न जुगनु हूँ दीया हूँ न कोई तारा हूँ

रौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यूँ हैं ~rahat indauri

***

दुआ करो के सलामत रहे मेरी हिम्मत

ये एक चिराग कई आँधियों पे भारी है

***

ज़िन्दगी में तेरी यादों को भुला दूं कैसे

रात बाकि है चिरागों को बुझा दूं कैसे

***

जिन चिरागों को हवाओं का कोई खौफ नहीं

उन चरागों को हवाओं से बचाया जाए ~निदा फ़ाज़ली

*** Chirag Shayari in Hindi

 

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे

ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया ~वसीम बरेलवी

***

वो साज़िश थी हवाओं की लगी तोहमत चिरागों पर

सियासत है,सियासत है,सियासत है,सियासत है

***

दिलगीर तो बेशक हूँ पर नाउम्मीद नहीं हूँ,

रौशन है दिल-ए-शब में दिया नूर-ए-सहर का !!

***

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख भी बदल गए

तेरा हाथ हाथ में आ गया कि चिराग राह में जल गए !!

*** Chirag Shayari in Hindi

 

सितारों तुमसे अंधेरे कहाँ संभलते हैं

उन्ही के नक्शे कदम से चिराग जलते हैं

***

आपकी नज़रों में आफताब की है जितनी अज़्मत

हम चिरागों का भी उतना ही अदब करते हैं

***

शब-ए-इंतज़ार की कशमकश न पूछ कैसे सहर हुई

कभी इक चिराग़ जला दिया, कभी इक चिराग़ बुझा दिया !! -मजरूह सुल्तानपुरी

***

शब ए इंतज़ार आख़िर कभी होगी मुख़्तसर भी

ये चिराग़ बुझ रहे हैं मेरे साथ जलते जलते ~कैफ़ी आज़मी

***

तू ने जो दिल के अँधेरों में जलाया था

कभी वो दिया आज भी सीने में जला रक्खा है.!!

*** Chirag Shayari in Hindi

 

दोस्ती ज़ाहिरी अखलाक़ में क्या ढूँढता है ।।

दिल में रौशन है दिया , ताक़ में क्या ढूँढता है ~मेराज

***

जब जरुरत हो तभी जलाओ अपने आप को

उजालो में चिरागों की अहमियत नही होती है दोस्त

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नींद आए या ना आए, चिराग बुझा दिया करो,

यूँ रात भर किसी का जलना, हमसे देखा नहीं जाता….

***

वो चुप रहे तो दिल जलता है चिराग बनके

वो बात करे तो बुझते चिराग जलते है

***

उनकी रोशनी से बहुत शिकायत थी हमें !

याद आते हैं वो चिराग अब बुझ जाने के बाद !!

***

कहाँ तो तय था चिरागां हर घर के लिए,

कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए।

*** Chirag Shayari in Hindi

 

तेरी यादों के चिराग अब भी इस दिल में जलते हैं,

सुनो किसी को अकेला कर देने से कोई तनहा नहीं होता..

***

जलाये जो चिराग तो अँधेरे बुरा मान बैठे….!!

छोटी सी जिंदगी है साहब किस-किस को मनाएँगे हम….!!!

***

शाम से कुछ बुझा बुझा सा रहता है

दिल हुआ है चिराग मुफलिस का

***

वो सरफिरी हवा थी संभालना पड़ा मुझे

मैं आख़िरी चिराग था जलना पड़ा मुझे ~बशीर_बद्र

*** Chirag Shayari in Hindi

 

मैं एक चिराग रौशन कर दूँ तो बुरा क्या है

परवाने अपनी फितरत आज़मा तो सकेंगे

***

हथेलियों पर जगमगाया है मोहब्बत का चिराग

जिसमें शामिल हैं मेरे ख़्वाब और तेरे अहसास

***

 

फ़राज़ ज़ुल्म है इतनी खुद-ऐतमादी भी

रात भी थी अँधेरी और चिराग भी ना लिया

***

मेरा यही अंदाज ज़माने को खलता है. की

मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है!!

***

तेरे इंतज़ार का सिलसिला, के हश्र तक रखें दर खुला…

ये आस है तो बंधी रहे, जो ये चिराग है तो जला रहे

***

खुद का नूर बरसता है तो ऐसे चिराग जलते है

कई जन्मो की दुआओं से ऐसे हमराह मिलते है

***

न जाने कौन सी गलियों में छोड़ आया हूँ

चिराग जलते हुए ख्वाब मुस्कुराते हुए।

*** Chirag Shayari in Hindi

 

वो जब याद आये, बहोत याद आये ग़म-ए-जिन्दगी के,

अँधेरे में हम है चिराग-ए-मोहब्बत जलाए, बुझाए

***

आंखो मे मंजिलें थी, लड़खड़ाये और सम्हलते रहे!

आंधियों मे कहां दम था, मेरे चिराग तो हवा मे भी जलते रहे!!

***

मैं तो चिराग हुँ तेरे आशियाने का, कभी ना कभी तो बुझ जाऊंगा,

आज शिकायत है तुझे मेरे उजाले से, कल अँधेरे में बहुत याद आऊंगा..

***

हवा से कह दो कि खुद को आजमा के दिखाये.

बहुत चिराग बुझाती है, एक जला के दिखाये. .

*** Chirag Shayari in Hindi

 

चिराग दिल का जलाओ बहुत अँधेरा है

कहीं से लौट के आओ बहुत अँधेरा हे ~Majrooh

***

कागज का ये लिबास चिरागों के शहर में

जरा संभल संभल कर चलो तुम नशे में हो.

***

शाम होते ही चिराग को बुझा देती हूँ…..

दिल ही काफी है…. तेरी याद में जलने के लिए….!!

***

इन सूरज के तीखे उजालों में मेरा क्या काम,

मैं तो चिराग हूँ अँधेरी रातों को रोशन करूँगा

***

कोई चिराग जलाता नहीं सलीक़े से…

सभी को शिकायत हवाओं से होती है.

***

धुंधला रहे है शहर के जलते हुए चिराग,

ऐ नींद आ भी जा के बहुत रात हो चुकी !

*** Chirag Shayari in Hindi

 

नम हुई आँखो को पलको का सहारा था तुझ बिन यु जीना एक पल ना गवारा था

तन्हाई भी बनने लगे थे हमदर्द अपने कि तुम लौट आये चिराग बन के

***

हिम्मत ए रौशनी बढ़ जाती है, हम चिरागों की इन हवाओं से,

कोई तो जा के बता दे उस को, चैन बढता है बद्दुआओं से

***

वो कोई और चिराग होते हैं जो हवाओं से बुझ जाते हैं…

हमने तो जलने का हुनर भी तूफ़ानों से सीखा है..!!

***

मैं चिरागों की भला कैसे हिफाज़त करता,

वक़्त सूरज को भी हर रोज़ बुझा देता है!

***

तेरी यादों के चिरागों को जलाया हरशाम

तेरी बातों को सीने से लगाया हरशाम

मांगी खुदा से तेरी खुशियों की दुआयें

तनहा बैठ के हाथों को उठाया हरशाम

*** Chirag Shayari in Hindi

 

सितम तो यह कि हमारी सफों में शामिल हैं ।।

चिराग बुझते ही खेमा बदलने वाले लोग ।।

***

अपनी रोशनी की बुलन्दी पर इतना न इतराओ

चिराग सभी बुझते हैं, आँधियाँ किसी की नहीं होती…!!

***

यूँ जलाते हो जैसे सवाब मिलता हो

दिल है मेरा ,चिराग-ए-मस्जिद तो नहीं ,.,.!!

***

रात तो वक़्त की पाबन्द थी ढल गई

देखना ये है चिरागों का सफ़र कितना है

***

चिरागों से अगर अँधेरा दूर होता तो चांदनी की चाहत क्यूँ होती

कट सकती अगर ये ज़िन्दगी अखेले तो दोस्त नाम की चीज़ ही क्यूँ होती

***

चिराग जलाना तो पुरानी रस्में हैं, ‘गालिब’,

अब तो तेरे शहर के लोग, इंसान जला देते हैं,

*** Chirag Shayari in Hindi

 

अपनी रौशनी की बुलंदी पर कभी न इतराना,

चिराग सबके बुझते है,हवा किसी की नही होती !

***

मुझे सहल हो गयी मंजिले की हवा के रुख भी बदल गए

तेरा हाथ, हाथ में आ गया की चिराग राहो में जल गए**

***

एक बार थाम कर तोह देखो मेरा हाथ।

लोग महफ़िलो में चिरागों की तरह जल जायेंगे

***

सिसकिया कराहट लिए इस शहर के अँधेरे कोनो में

कोशिश हैं चिरागों को ले हर कोने में उजाला कर दूँ

***

प्यार का इम्तिहान भी वो, किस तरह लिया करते थे

तेज आंधियो के बीच, चिराग जलाने की बात किया करते थे

***

उतार दी कश्ती तो अब इस दरिया के उफानों से क्या डरना …..

खुले फ़लक तले चिराग जलाने की ठान ली तो तुफानों से क्या डरना..

*** Chirag Shayari in Hindi

 

जिसकी गाढ़ी कमाई से, कभी घर में चिराग रौशन थे,

वो बूढ़ा, मकान के कोने में, पुराने सामान सा बैठा है…

***

वो अंजुमन की आग में लिपटे हुए तारे

आँसू के चिरागों से सुलगते नज़ारे

***

ऐसा लगता है कि बुझने की घड़ी आ पहुँची !

लौ चिरागों की बहुत तेज़ हुई जाती है !!

***

 

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shaam hote hi chiraag ko bujha deti hoon…..dil hi kaaphi hai…. teri yaad mein jalane ke lie….!!**

*in sooraj ke tikhe ujaalon mein mera kya kaam,main to chiraag hoon andheri raaton ko roshan karoonga***

koi chiraag jalaata nahin saliqe se…sabhi ko shikaayat havaon se hoti hai.**

*dhundhala rahe hai shahar ke jalate hue chiraag,ai nind aa bhi ja ke bahut raat ho chuki !**

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*himmat e raushani badh jaati hai, ham chiraagon ki in havaon se,koi to ja ke bata de us ko, chain badhata hai badduaon se**

*vo koi aur chiraag hote hain jo havaon se bujh jaate hain…hamane to jalane ka hunar bhi toofaanon se sikha hai..!!**

*main chiraagon ki bhala kaise hiphaazat karata,vaqt sooraj ko bhi har roz bujha deta hai!***

teri yaadon ke chiraagon ko jalaaya harashaamateri baaton ko sine se lagaaya harashaamamaangi khuda se teri khushiyon ki duaayentanaha baith ke haathon ko uthaaya harashaam**

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*chiraag jalaana to puraani rasmen hain, gaalib,ab to tere shahar ke log, insaan jala dete hain,***

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