डायनासोरों का रंग कैसा था? डायनासोर कैसे दिखाई देते थे?

डायनासोरों का रंग  कैसा था? जब किसी ने डायनासोरों को देखा ही नहीं तो  उनके रंग का निर्धारण कैसे किया गया?

वैज्ञानिकों को जब भी कोई नए डायनासोर का जीवाश्म प्राप्त होता है तो उनका सबसे पहला काम यह होता है सभी हड्डियों को ठीक प्रकार से जोड़कर डायनासोर का पूरा ढांचा बनाना, कई बार (लगभग हर बार) डायनासोर की सभी हड्डियां प्राप्त नहीं होती है जीवाश्म में केवल कुछ ही हड्डियां प्राप्त होती है वैज्ञानिक इन्ही हड्डियों से शुरू कर डायनासोर का ढांचा बनाना शुरू करते हैं, बाकी बची हुई हड्डियाँ  जो नहीं मिलीती है उनका कंप्यूटर सिमुलेशन बनाकर पतिरूप बनाया जाता है, जिसे कंप्यूटर में जोड़कर डायनासोर का एक संपूर्ण ढांचा प्राप्त होता है.

वैज्ञानिकों का दूसरा काम यह होता है कि इस ढांचे के ऊपर  त्वचा की एक परत लगाना, अब प्रश्न यह उठता है कि डायनासोर तो करोड़ों साल पहले लुप्त हो चुके हैं जब  किसी ने उन्हें देखा ही नहीं तो उनकी त्वचा का रंग किस प्रकार निर्धारित किया जा सकता है? वैज्ञानिक डायनासोर का रंग निर्धारण करने के लिए कई प्रकार के सिद्धांतों का उपयोग करते हैं.

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हाथी की तरह मटमैला था डायनासोर की त्वचा का रंग

डायनासोर के जीवाश्म में हमें सिर्फ हड्डियों के जीवाश्म मिलते हैं डायनासोर की त्वचा नष्ट हो चुकी होती है, लेकिन त्वचा की छाप जिसे इंप्रेशन कहते हैं वह जीवाश्मों में प्राप्त हो जाती है, कई वैज्ञानिकों का मानना है कि डायनासोर की त्वचा का रंग मटमैला गहरा सिलेटी और भूरा था जैसा कि वर्तमान समय में पाए जाने वाले हाथियों और गैंडे का होता है इसके लिए वे तर्क देते हैं कि डायनासोर को अपने वातावरण में छिपने के लिए मटमैले रंग की आवश्यकता पढ़ती थी जिससे कि वह शिकारियों से बच सकें, शिकारियों को भी ऐसी ही त्वचा चाहिए होती थी जिससे कि वे अपने शिकार को नजर ना आए इससे वह भी अपने आसपास के वातावरण में छिप सकने वाली त्वचा के रंग वाले होते थे, यह रंग गहरे भूरे, मटमैले, गहरे हरे होते थे जो कि पेड़ों के तने,सूखी पत्तियों और जमीन के रंग में घुल मिल जाया करते थे.

क्या पक्षियों की तरह था डायनासोर की त्वचा का रंग 

वैज्ञानिको का दूसरा वर्ग मानता है कि डायनासोर रंग बिरंगे थे, उनकी त्वचा का रंग गुलाबी पीला, लाल यहां तक की नीला भी होता था, इस वर्ग  के वैज्ञानिक यह तर्क देते हैं की प्रजनन काल के समय साथी को आकर्षित करने के लिए चमकीले रंगों का इस्तेमाल डायनासोर करते थे, इसलिए उनकी त्वचा का रंग चमकीले होते थे, वर्तमान समय में पाए जाने वाले पक्षी इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, पक्षी वास्तव में डायनासोरों की एक प्रजाति है, वर्तमान समय  पाए जाने वाले पक्षियों के पंख विविध रंगो के होते हैं, इन्हें देख कर ही इस वर्ग के वैज्ञानिक तर्क देते हैं कि डायनोसोर रंग-बिरंगे होते थे.

आपने कई बार सुना होगा कि पक्षी डायनासोर से संबंधित है, पर वास्तव में ऐसा नहीं है पक्षी डायनासोरों से संबंधित नहीं है बल्कि पक्षी डायनासोर ही हैं!  आज से 6 करोड़ 50 लाख साल पहले पृथ्वी पर एक महाविनाश हुआ था जिसमें कि सारे डायनासोर मारे गए परंतु डायनासोरों की उड़ने वाली प्रजातियों में से कुछ प्रजातियां बाच गई इन्हीं प्रजातियों से आगे चलकर पक्षियों का विकास हुआ. पृथ्वी पर  तरह-तरह के डायनासोर पाए जाते थे आज से  23 करोड़ साल पहले डायनासोरों का उदय हुआ करोड़ों सालों तक डायनासोर पृथ्वी के प्रमुख जीव बने रहे है लेकिन एक उल्का पिंड के पृथ्वी से आकर टकराने की वजह से सारे डायनासोर नष्ट हो गए.

सन 2008 में येल यूनिवर्सिटी के कुछ वैज्ञानिकों को एक पंख के जीवाश्म से melanosomes के अणु मिले हैं,  यह किसी कोशिका में melanin बनाने का काम करते थे melanin के द्वारा ही त्वचा के रंगों का निर्धारण होता है अलग-अलग प्रकार के melanosomes होते थे जो की विभिन्न  रंग का निर्माण करते थे, भविष्य में वैज्ञानिक इस खोज को आधार बनाकर डायनासोर की त्वचा के रंगों का सटीक निर्धारण करने की कोशिश कर रहें हैं.

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Taj Mohammed Sheikh

हेलो दोस्तों, में एक Freelance Blogger हूँ , नेट इन हिंदी .com वेबसाईट बनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा में मनोरंजक और उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करना है, यहाँ आपको विज्ञान, सेहत, शायरी, प्रेरक कहानिया, सुविचार और अन्य विषयों पर अच्छे लेख पढ़ने को मिलते रहेंगे. धन्यवाद!

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