हमारे सौरमंडल के रहस्यमय ड्वार्फ प्लेनेट बौने ग्रह!

बौने ग्रहों की रोचक जानकारी

बौने ग्रह क्या होते हैं? What is Dwarf Planet?

हमारे सौरमंडल में 8 ग्रहों और उनके उपग्रहों के अलावा कई और प्रकार के द्रव्यमान पिंड पाए जाते हैं, जैसे कि धूमकेतु (comet) क्षुद्र ग्रह-एस्ट्रॉयड (asteroid), बौने ग्रह (Dwarf planet) इत्यादि. अब आप पूछेंगे बौने ग्रह क्या होते हैं? बौना शब्द सुनते ही हमारे मन में परीकथाओं के नटखट चालाक बौनों का चित्र सामने आता है, जो कि बहुत छोटे छोटे इन्सान होते हैं.

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वास्तव में बौने ग्रह ऐसे छोटे ग्रह है जो कि सूर्य का चक्कर लगाते हैं, इनका आकार ग्रहों के उपग्रह  से भी कम है, ऐसे छोटे पिंड जिनके गुरुत्वाकर्षण ने उनका आकार गोलाकार कर दिया है और जो सूर्य का चक्कर लगाते हैं उन्हें बौने ग्रह कहा जाता है क्योंकि उनका आकार छोटा है इसीलिए उन्हें बौना ग्रह (Dwarf planet) नाम दिया गया है. इस लेख में आपको बौने ग्रहों की समस्त रोचक जानकारी मिल जाएगी.

बौने ग्रह सूर्य मंडल के कई क्षेत्रों में पाए जाते हैं, सबसे बड़ा बौना ग्रह सेरेस एस्टेरॉइड बेल्ट शुद्र ग्रह की पट्टी (Asteroid Belt) में पाया जाता है, जबकि प्लूटो जो कि पहले ग्रह था लेकिन अब उसे  एक बौना ग्रह मान लिया गया है, की कक्षा नेपच्यून के पास तथा कुछ बौने ग्रह नेपच्यून ग्रह की कक्षा के काफी आगे कुइपर बेल्ट में पाए जाते हैं. इन्हें ट्रांस नेप्चूनियन ऑब्जेक्ट कहतें है.

नासा का डॉन और  न्यू होराइजंस नाम के दो अंतरिक्ष यान बौने ग्रह सेरेस और प्लूटो के पास सन 2015 में गए थे, डॉन अंतरिक्ष यान ने सन 2011 में वेस्ता नाम के बौने ग्रह का चक्कर लगाया था.

बौने ग्रहों को बौना क्यों घोषित किया गया है?

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वास्तव में बौने ग्रहों के कम द्रव्यमान और छोटे आकार की वजह से ही उन्हें एक अलग श्रेणी “बौने गृह” में रखा गया है, ना तो इन छोटे ग्रहों पर वायुमंडल है न ही कोई अधिक गुरुत्वाकर्षण जैसे की ग्रहों में होता है, सिर्फ सूर्य का चक्कर लगाने की वजह से इन्हें ग्रह ना समझ लिया जाये, एसी स्थिति में यह आवश्यक है की इनके लिए एक अलग श्रेणी बनायीं जाये.

बौने ग्रह की परिभाषा क्या है? dwarf planets definition hindi

यह कैसे तय किया जाता है कि कोई ग्रह बोना ग्रह है या नहीं इसकी परिभाषा क्या है?

24 अगस्त सन 2006 को इंटरनेशनल एस्टॉनोमिकल यूनियन ने एक परिभाषा घोषित की जिस से यह तय किया जा सकता है कि सौर मंडल में कोई पिंड बौना ग्रह है या नहीं.

बौना ग्रह द्रव्यमान का वह पिंड है जो कि सूर्य का चक्कर लगा रहा है, तथा उसका आकर और द्रव्यमान इतना बढ़ा है जिसके कारण उस पिंड के गुरुत्वाकर्षण ने उसे गोलाकार रूप दे दिया है, परंतु उसने अपनी कक्षा के इर्द-गिर्द पाए जाने वाले छोटे पिंडो को अपने में समाहित नहीं किया है.

Definition of Dwarf planet

A Dwarf planet is a body orbiting the sun that is big enough to round itself by its own gravity, but has not cleared its orbital path of other rival bodies.

बौना ग्रह होने के लिए शर्ते criteria for dwarf planet hindi

सौरमंडल में पाए जाने वाले किसी भी एस्ट्रॉयड धूमकेतु यह किसी भी द्रव्यमान पिंड को बोना ग्रह बनने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी आवश्यक है, यह शर्तें इस प्रकार है.

* वह पिंड सूर्य का चक्कर लगाता हो

* उसके अंदर इतना द्रव्यमान होना चाहिए जिसकी वजह से इतना गुरुत्वाकर्षण हो जो कि उसे  लगभग गोलाकार रूप दे दे.

* उस पिंड ने अपनी कक्षा के आसपास घूमने वाले छोटी-छोटी चट्टानों एस्ट्रॉयड आदि को अपनी ओर आकर्षित कर अपने में समाहित कर लिया हो

इन तीन शर्तों के अलावा इस पिंड को बौना ग्रह होने के लिए यह भी आवश्यक है कि वह किसी ग्रह का चक्कर नहीं लगा रहा हो! क्योंकि तब वह उस ग्रह का उपग्रह कहलायेगा बोना ग्रह नहीं.

बौने ग्रहों की संख्या कितनी है

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बौने ग्रह की संख्या अनिश्चित है, अभी कई बौने ग्रहों की खोज होना बाकी है, अभी तक केवल दो पिंडों को ही बौने ग्रह का दर्जा दिया गया सेरेस और प्लूटो तथा तीन पिंडो को ग्रह संभावित बौने ग्रह की सूची में रखा गया है इनका नाम है Eris, Makemake, Haumea,. एस्टॉनोमर्स खगोल शास्त्री इस बारे में एकमात नहीं है कुछ खगोल शास्त्री बहुत सारे पिंडो को बोना ग्रह मानते हैं इनके अनुसार सौरमंडल के बाहरी क्षेत्र में करीब एक हजार के लगभग बौने ग्रह मौजूद है लेकिन इंटरनेशनल एस्टॉनोमिकल यूनियन बौने ग्रह की एक सूची बनाकर रखती है, इस यूनियन के अनुसार दो ग्रहों को बौने ग्रह मान लिया गया है, तथा भविष्य में 3 बौने ग्रह को संभावित की सूची में रखा गया है.

आकार के हिसाब से बौने ग्रहों का क्रम इस प्रकार है

Eris > Pluto > Makemake > Haumea > Ceres

बोने ग्रहों की खोज कब और किसने की?

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Ceres की खोज :-  सेरेस की खोज 1 जनवरी 18 को खगोलशास्त्री Guiseppe Piazzi ने की 13 सितंबर 2006 को इसी बोने ग्रह का दर्जा प्राप्त हुआ.

Pluto की खोज :- प्लूटो की खोज 18 फरवरी 1930 को Clyde W. Toumbaugh ने की थी 24 अगस्त 2006 को ब्लूटूथ से ग्रह का दर्जा छीन कर उसे बोने ग्रह का दर्जा दिया गया.

Haumea की खोज :- 28 दिसंबर 2004 को Mike Brown माइक ब्राउन नाम के खगोल शास्त्री और उनकी टीम ने हाउमिया की खोज की 17 सितंबर 2008 को हाउमिया को बौने ग्रह का दर्जा दिया गया.

Makemake की खोज :-  31 मार्च 2015 को Makemake की खोज Mike Brown माइक ब्राउन और उनकी टीम ने की, 11 जुलाई 2008 को इसे बौना ग्रह माना गया

Eris की खोज :- 5 जनवरी 2005 को Mike Brown माइक ब्राउन और उनकी टीम ने इरिस बौने ग्रह की खोज की 13 सितंबर 2006 को इसे बौने ग्रह की लिस्ट में शामिल किया गया.

बौने ग्रह क्या सूर्य मंडल में इधर-उधर घूमते रहते हैं?

where are the dwarf planets going

बौने ग्रह का आकार चंद्रमा से भी कम होता है, जैसे कि चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है तथा दूसरे उपग्रह अपने अपने ग्रहों का चक्कर लगाते हैं पंरतु बौने ग्रह किसी बड़े ग्रह का चक्कर नहीं लगाते बल्कि यह सूर्य की परिक्रमा करते हैं. ग्रहों की तरह इन की कक्षाएं भी निश्चित होती है, कई  संभावित बौने ग्रह सौरमंडल के बाहरी क्षेत्र में रहते हैं तथा इनकी कक्षाएं अंडाकार है यह सूर्य मंडल से काफी दूर चले जाते हैं तथा सैकड़ों सालों में फिर सूर्य की तरफ लौटते हैं.

बौना गृह प्लूटो – प्लूटो को बौना ग्रह क्यों माना गया?

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हम काफी समय से सुनते हैं कि सौरमंडल में नौ ग्रह होते हैं जो कि सूर्य का चक्कर लगाते हैं,  लेकिन 2006 में इंटरनेशनल एस्टॉनोमिकल यूनियन ने नौवे ग्रह प्लूटो को ग्रह ना मानकर उसे बोने ग्रह की लिस्ट में शामिल कर लिया.

प्लूटो को अब ग्रह क्यों नहीं माना जाता, इसके पीछे क्या कारण है, एस्टॉनोमर्स ने भविष्यवाणी की थी कि नेपच्यून के आगे भी कोई बड़ा ग्रह हो सकता है प्लूटो कि जब खोज की गई तो इसे तुरंत नवा ग्रह मान लिया गया, लेकिन बाद के वर्षों में खगोल शास्त्रियों ने नेपच्यून के आगे कई छोटे-छोटे पिंडो की खोज की, अब यह समस्या उत्पन्न हुई की किसे ग्रह कहा जाये और किसे नहीं  इसलिए इस बात की आवश्यकता पैदा हुई कि ग्रह होने के लिए कुछ शर्तें रखी जाएं!

इंटरनेशनल एस्टॉनोमिकल यूनियन ने किसी पिंड के ग्रह होने की यह शर्ते रखी कि उस पिंड का आकार गोलाकार होना चाहिए तथा वह सूर्य का चक्कर लगाता हो तथा उसने अपनी कक्षा के सभी दूसरे पिंडो को अपनी और आकर्षित कर अपने में समाहित कर लिया हो

प्लूटो सूर्य का चक्कर तो लगाता है तथा गोलाकार भी है इसके तीन चंद्रमा भी है, लेकिन यह तीसरी शर्त पूरी नहीं करता है प्लूटो  की कक्षा में कई छोटे छोटे पिंड मौजूद है, इसके अलावा प्लूटो की कक्षा भी एकदम अजीब है, दूसरे ग्रहों की तुलना में यह 17 डिग्री झुकी हुई है, इससे प्लूटो कभी तो नेपच्यून से काफी दूर चला जाता है तथा कभी नेपच्यून की कक्षा के काफी अंदर तक जाता है, इन सब तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्लूटो का निर्माण उस तरह नहीं हुआ जिस तरह बाकी ग्रहों का हुआ है, ऐसा प्रतीत होता है कि प्लूटो कुईपर बेल्ट का एक ऑब्जेक्ट है, यही कारण है कि प्लूटो को अब ग्रह नहीं माना जाता है बल्कि अब उसे एक बौने ग्रह का नाम किया गया है. इस बात से दुनिया भर में अंतरिक्ष विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले लोग खुश नहीं हैं और वे चाहते हैं की प्लूटो को एक ग्रह ही माना जाये.

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सबसे छोटा बौना ग्रह कौन सा है which is the smallest among dwarf planets

सौर मंडल में अभी तक ज्ञात बौने ग्रहों में सेरेस सबसे छोटा है, यह शुद्ध ग्रह की पट्टी एस्ट्रॉयड बेल्ट में पाया जाता है, यह सबसे बड़ा एस्ट्रॉयड है पंरतु बौने ग्रह की लिस्ट में यह सबसे छोटा है. सेरेस की पूरी जानकारी Smallest dwarf planet ceres (link)

सबसे बड़ा बौना ग्रह इरिस eris dwarf planet hindi

सबसे बड़े बौने गृह का नाम इरिस है इसकी खोज सन २००५ में की गयी.इसका व्यास 3000 किलोमीटर है यह प्लूटो से 700 किलोमीटर बड़ा है. इरिस सूर्य से काफी दुरी पर है यह प्लूटो की तुलना में सूर्य से तीन गुना ज्यादा दूर है, eris का एक चंद्रमा भी है जिसका नाम Dysnomia रखा गया है.eris सूर्य का एक चक्कर लगाने में 558 वर्ष का समय लेता है.

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बौने गृह किस पदार्थ के बने हैं?

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बौने ग्रह अलग अलग तत्वों से मिलकर बने हैं,  शुद्र ग्रह की पट्टी में पाए जाने वाला सेरेस ठोंस चट्टानों का बना है, जबकि बाहरी सौरमंडल में पाए जाने वाले बौने ग्रह जैसे कि प्लूटो आदि में बर्फ और अमोनिया की मात्रा अधिक है.

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Taj Mohammed Sheikh

हेलो दोस्तों, में एक Freelance Blogger हूँ , नेट इन हिंदी .com वेबसाईट बनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा में मनोरंजक और उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करना है, यहाँ आपको विज्ञान, सेहत, शायरी, प्रेरक कहानिया, सुविचार और अन्य विषयों पर अच्छे लेख पढ़ने को मिलते रहेंगे. धन्यवाद!

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