Hindi Kahani- पैसा नहीं संसाधन महत्वपूर्ण हैं!

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Hindi Kahani- पैसा नहीं संसाधन महत्वपूर्ण हैं!

Hindi Kahani – Money is yours but Resources belongs to Society

हिंदी कहानी – पैसा नहीं संसाधन महत्वपूर्ण हैं!

जर्मनी एक बहुत विकसित और औद्योगिक देश है, लोग सोचते होंगे की ऐसे देश में लोग आरामदेह और विलसिता पूर्ण जीवन जीते होंगे!

यह जेर्मनी के हेम्बर्ग शहर की घटना है! दो अमेरिकी एक रेस्टोरेंट में दोपहर का खाना खाने गए, उन्होंने देखा की ज़्यादातर टेबल्स खाली थी! एक टेबल पर एक प्रेमी युगल खाना खा रहा है, उनकी टेबल पर केवल दो व्यंजन की प्लेट्स और दो पेय की बोतलें ही थी! अमेरिकी यात्रियों को यह अजीब लगा की रोमांटिक डेट्स पर, इतना सादा खाना मंगाया गया है! (Hindi Kahani at netinhindi.com)

पास ही दूसरी टेबल पर कुछ बूढी महिलाएं बैठी थी, जब वेटर आया तो उसने खुद खाना सर्व किया और उन महिलाओं ने अपना प्लेट का पूरा खाना खा लिया और ज़रा सा भी प्लेट में नहीं छोड़ा!

अमेरिकी यात्रियों को कुछ ज्यादा ही भूख लगी थी, इसलिए उन्होंने ने बहुत सारा खाना मंगा लिया! और लगभग एक तिहाई खाना प्लेट्स में बेकार ही छोड़ दिया!

जब अमेरिकी यात्री जाने लगे तो, उन बूढी जर्मन महिलाओं ने उनसे कहा की, उन्होंने इतना सारा खाना क्यों बर्बाद कर दिया?

यह सुनकर अमेरिकी नाराज़ हो गए और कहने लगे “हमने सारे खाने का पैसा चूका दिया है, तुम्हे इससे क्या मतलब है की हमने प्लेट्स में खाना छोड़ा है या नहीं?

यह जवाब सुनकर एक महिला को गुस्सा आया और उसने तुरंत अपने मोबाइल पर किसी से जर्मन में बात की!

थोड़ी ही देर में, युनिफोर्म में एक आदमी आया जो सोशल सिक्यूरिटी से था। सारा मामला जानने के बाद उसने ५० यूरो का जुरमाना अमेरिकी यात्रियों पर लगा दिया और कहा

“केवल उतना ही आर्डर करें जितना आप खा सकें! बेशक पैसा आपका है पर संसाधन पर सारे समाज का हक है! दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जो संसाधनों की कमी से झूझ रहें हैं, इसलिए संसाधनों को इस तरह व्यर्थ में नष्ट नहीं किया जा सकता!!” (Hindi Kahani )

यह घटना हम भारतियों के लिए भी एक सबक होना चाहिए, क्यों की भारत में तो संसाधनों की और ज्यादा कमी हैं! शादी पार्टियों और अन्य समारोहों और घरों में भी बेतहाशा संसाधनों की बर्बादी की जाती है! याद रखिये आपके पास चाहे कितना भी धन क्यों न हो आप देश में किसी भी फसल की पैदावार नहीं बढ़ा सकतें हैं, और एसी स्थिति में उसे दुसरे देशों से आयात करना पड़ता है, जिससे देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर बोझ बड जाता है!

अगर इसे पूरी मानव जाती और प्रथ्वी के परिप्रेक्ष्य में देखें तो कोई भी धनी व्यक्ति पृथ्वी पर एक इंच भी ज़मीन नहीं बढ़ा सकता है, इसलिए जो भी संसाधन हैं, वे सीमित हैं, लेकिन दूसरी और दुनिया की आबादी लगातार बढती जा रही है। इसलिए भी हमें संसाधनों को व्यर्थ नष्ट नहीं करना चाहिए!

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