सौर मंडल के ग्रह कैसे बने हैं How planets are formed in hindi

ग्रह कैसे बने हैं How planets are formed

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क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे सौरमंडल में ग्रह क्यों है, यह ग्रह सूर्य का चक्कर क्यों लगाते हैं, सौरमंडल के ग्रहों और उपग्रहों का निर्माण कैसे हुआ है? आइए इन रोचक प्रश्नों का उत्तर जानने  का प्रयत्न करते हैं कि हमारे सौरमंडल में ग्रह कहां से आए हैं, हमारे सौर मंडल के बहुत दूर स्थित तारों के आसपास बाहरी अंतरिक्ष में भी वैज्ञानिकों ने ग्रहों की खोज की है, ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसी कोई प्रक्रिया है जो कि तारों के आसपास ग्रहों का निर्माण करती है.

बाहरी अंतरिक्ष में भी ग्रह दिखाई दिए हैं

सैकड़ों सालों से खगोल वैज्ञानिक और दार्शनिक  इस प्रश्न का उत्तर खोजते रहे हैं कि हमारे सौरमंडल में ग्रह कहां से आए हैं, जैसे जैसे हमारे टेलीस्कोप और तकनीक विकसित होते गए हमें अपने सौरमंडल के बारे में ज्यादा से ज्यादा ज्ञान और जानकारी प्राप्त होती गई, यह प्रक्रिया अभी भी चल रही है हमें ग्रहों और उपग्रहों के बारे में रोज नई जानकारियां प्राप्त होती हैं,  पंरतु वर्तमान पर्यवेक्षण से हम केवल ग्रहों और उपग्रहों की वर्तमान स्थिति के बारे में जान सकते हैं हम यह नहीं जान सकते की है अतीत में ग्रह कैसे बने थे ? बड़ी पहेली को हल करने में हबल स्पेस टेलीस्कोप वैज्ञानिकों की मदद कर रहा है, इस अंतरिक्ष टेलीस्कोप से वैज्ञानिक बहुत दूर-दूर के तारों को देख सकते हैं, वैज्ञानिकों ने ऐसी कई नेबुला हबल स्पेस टेलीस्कोप से देखि है  जहां पर तारों और ग्रहों का निर्माण हो रहा है

ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया planet formation in hindi

वैज्ञानिकों के अनुसार जब देश का एक बहुत बड़ा बादल अपने ही आकर्षण के प्रभाव से सिकुड़ने लगता है तब  एक तारे और ग्रहों का निर्माण होता है, इस गैस के सिकुड़ते बड़े गोले को नेबुला कहते हैं, गुरुत्वाकर्षण के कारण जब इसके केंद्र में पदार्थ इकट्ठा होने लगता है तो यह बहुत सघन और गर्म हो जाता है,  धीरे-धीरे यह केंद्र बड़ा होकर एक नए तारे का बन जाता है.

गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से जब गैसें केंद्र की और गिरती है तो यह बादल घूमने लगता है, जब यह बादल बहुत घना हो जाता है तो उसके घूमने की गति बहुत तेज हो जाती है जिससे कि यह बादल चपता होकर एक डिस्क का आकार ले लेता है, इस डिस्क को  circumstellar और protoplanetary नाम दिया गया है, यही ग्रहों की जन्म भूमि है.

इस डिस्क में पाया जाने वाला पदार्थ आपस में जुड़कर छोटे छोटे पत्थर और चट्टाने बना लेता है, धीरे-धीरे ये छोटे छोटे पत्थर आपस में जुड़कर बड़े पिंड बना लेते हैं, ये बड़े पिंड अपने आसपास के पदार्थ को आकर्षित करते हुए और बड़े होते जाते हैं इन द्रव्यमान पिंडो को  planetesimals कहा जाता है, इन्ही से ग्रह बनते हैं.

इस डिस्क के आंतरिक हिस्से की गैस को केंद्र में स्थित तारे द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है इस तरह केवल चट्टाने और पत्थर ही बचते हैं, इस डिस्क  के बाहरी हिस्से में गैसें और बर्फ मौजूद होता है क्योंकि यह तारे से बहुत दूरी पर होते हैं इसलिए जय गुरुत्वाकर्षण के कारण तारे में नहीं गिरते है,  यही कारण है कि केंद्र में स्थित तारे के आसपास चट्टानी ग्रह पाए जाते हैं जबकि तारे से दूर गैसीय ग्रह और बर्फीले ग्रह पाए जाते हैं.

केंद्र में स्थित तारे के आसपास से चट्टानी planetesimals  पिंड बनते हैं ये पिंड आपस में टकराते रहते हैं तथा बिखर जाते हैं जब यह बड़े पिंड धीमी गति से एक दूसरे के नजदीक आते हैं तो गुरुत्वाकर्षण के कारण जुड़कर  एक बड़ा पिंड बना लेते हैं यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है इस प्रकार करोड़ों सालों में ग्रहों का निर्माण होता है,

ये ग्रह अपने परिक्रमा पथ से गुजरने वाले छोटे-मोटे पत्थरों और चट्टानों को गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से दूर फेंक देते हैं तथा कई चट्टानें तथा पत्थर ग्रह पर गिरकर उसमें समा जाते हैं.

इस तरह देखते हैं कि ग्रहों का निर्माण किस प्रकार हुआ है,  हमारे सौरमंडल में पाए जाने वाले हैं ग्रह और उपग्रह कहां से आए हैं वास्तव में इनके बनने में अरबों वर्षों का समय लगा है.

बाहरी अंतरिक्ष में ग्रह क्यों पाए जाते हैं why there is planets in outer space?

वैज्ञानिकों ने जब दूसरे तारों का अध्ययन किया तो उन तारों के आसपास भी उन्हें ग्रह और उपग्रह दिखाई दिए हैं, वास्तव में ग्रह बनने की प्रक्रिया हर तारे पर घटित होती है नेबुला के घूमते  हुए बादल से केंद्र में एक तारा बनता है इसके आसपास कई ग्रहों का निर्माण होता है यही कारण है कि वैज्ञानिकों को बाहरी अंतरिक्ष में भी ग्रह दिखाई दिए हैं.

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Taj Mohammed Sheikh

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