Humsafar Shayari हमसफर शायरी

Humsafar Shayari हमसफर शायरी

बेस्ट हमसफर शायरी Humsafar Shayari

हमसफ़र मतलब सफ़र में साथ चलने वाला, अब ये सफ़र कोई भी हो सकता है .जीवन का सफ़र भी …जीवन के सफ़र में साथ चलने वाले को जीवनसाथी हमसफर कहते हैं, इस पेज पर हम आपके लिए बेहतरीन हमसफर शायरी पेश कर रहें हैं, अपने साथी अपने हमसफर तक अपनी मन की बात और जज्बात पहुँचाने के लिए इन हमसफर शायरी का इस्तेमाल कीजिये .. अपने हमसफ़र को ये हमसफ़र शायरी sms, व्हाट्स अप्प मेसेज और हमसफर व्हाट्स अप्प स्टेटस के ज़रिये पहुँचिये
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Hindi Shayari हिंदी शायरी

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ज़िन्दगी से मेरी आदत नहीं मिलती
मुझे जीने की सूरत नहीं मिलती
कोई मेरा भी कभी हमसफ़र होता
मुझे ही क्यूँ मुहब्बत नहीं मिलती ।

जिंदगी देने वाले मरता छोड़ गये
अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये
जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की
वो जो साथ चलने वाले रास्ता मोड़ गये।
तू हमसफ़र तू हमडगर तू हमराज नज़र आता है……
मेरी अधूरी सी जिंदगी का ख्वाब नज़र आता है…..
कैसी उदास है जिंदगी… बिन तेरे… हर लम्हा,
मेरे हर लम्हे में…. तेरी मौजूदगी का अहसास नज़र आता है।

‏मेरे बाद किसी और को हमसफ़र बनाकर देख लेना ..
तेरी ही धड़कन कहेगी कि उसकी वफ़ा में
कुछ और ही बात थी।

शाम आई तो बिछुड़े हुए हमसफ़र
आंसुओं से इन आंखों में आने लगे।
आंखें मंज़र हुई, काम नग़्मा हुए
घर के अन्दाज़ ही घर से जाते रहे।
शाम आयी , तो बिछड़े हुए हमसफ़र
आंसुओं से इन आंखों में आके रहे।
हर मुसाफिर है तन्हा-तन्हा क्यों
एक-एक हमसफ़र से पूछते हैं

राह-ए-वफ़ा में कोई हमसफ़र ज़रूरी है
ये रास्ता कहीं तनहा कटे तो मुश्किल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है
#NidaFazli

‏हमसफर शायरी

 

आप जैसा हँसी हमसफ़र हो अगर,
जा रहे हैं कहाँ सोचता कौन है ?

एक ही मंजिल है उनकी‚ एक ही है रास्ता
क्या सबब फिर हमसफ़र से हमसफ़र लड़ने लगे

जो ब-जाहिर हमसे सदियों की मुसाफ़त-बर रहे,
हम उन्हें हर शाम अपना हमसफ़र देखा किये

फिरते हैं कब से दरबदर अब इस नगर अब उस नगर
एक दूसरे के हमसफ़र, मैं और मेरी आवारगी …

बिना हमसफर के कब तलक कोई मसाफ़तों में लगा रहे,
जहाँ कोई किसी से जुदा न हो मुझे उस राह की तलाश है !!

अकेला छोड़ने वालों को ये बताए कोई
कि हम तो राह को भी हमसफ़र समझते हैं -सऊद उस्मानी

हमसफ़र मेरे हमसफ़र पंख तुम परवाज़ हम
ज़िंदगी का साज़ हो तुम साज़ की आवाज़ हम

ना तो कारवाँ की तलाश है, ना तो हमसफ़र की तलाश है
मेरे शौक़-ए-खाना खराब को, तेरी रहगुज़र की तलाश है
साहिर

‏मुद्दतों के बाद कोई हमसफर अच्छा लगा ….
गुफ़्तगु अच्छी लगी ज़ौक़-ए-नज़र अच्छा लगा …

रात तनहाईयों की दुश्मन है
हर सफ़र हमसफ़र से रोशन है,
मौज के पास जो किनारा है
वो किनारा हसीन लगता है
-निदा फ़ाजली

किसी राह में, किसी मोड़ पर
चल न देना मुझको तू छोड़कर
मेरे हमसफर, मेरे हमसफर,
मेरे हमसफर, मेरे हमसफर

हम नादां थे जो उन्हें हमसफ़र समझ बैठे,
वो चलते थे मेरे साथ पर किसी और की तलाश में
..
तेरी बेवफाई पर इतना ही कहूँगी ……..
ऐ हमसफ़र………
मैं खुद को इस क़ाबिल बनाऊँगी के……
.. तेरी आँखें मेरे दीदार को तरसें।।

सुन मेरे हमसफ़र
क्या तुझे इतनी सी भी खबर
की तेरी साँसे चलती जिधर
रहूँगा बस वही उम्र भर
रहूँगा बस वही उम्र भर हाय

चलते चलते मुझसे पूछा मेरे पांव के छालों ने।
बस्ती कितनी दूर बसा ली दिल मे बसने वालो ने।।

“रुस्वाई ज़िंदगी का मुकद्दर हो गयी,
मेरे दिल भी पत्थर हो गया,
जिसे रात दिन पाने के ख्वाब देखे,
वो बेवफा किसी और की हमसफर हो गई”

राह भी तुम हो राहत भी तुम ही हो
मेरे सुख और दुख को बांटने वाली हमसफर भी तुम ही हो

मेरे हर दर्द का मरहम ,बाहो का सुकून भी तुम ही हो
इस क़दर मसरूफ़ रहता हूँ तुम्हारी यादो में
फुरसतों को भी फुर्सत नही मिलती अब तो
क्योंकि अब वहा भी तुम ही हो

 

हमसफर शायरी 

हमसफर बन गए ,
हमनवा बन तुम मेरे आसमां … मेरी जमीन बन गए

तू हमसफ़र, तू हम डगर, तू हमराज, नजर आता है,
मेरी अधूरी सी जिंदगी का.. ख्वाब नजर आता है,
कैसी उदास है जिंदगी तेरे बिन हर लम्हा,
मेरे हर लम्हे में तेरा अहसास नजर आता है!

मेरे हमसफर मेरे हमनवां,बस सिर्फ दो कदम मेरे साथ चल
ये इल्तिज़ा तो तू मेरी मान ही ले,ऐसा न हो मैं हो जाऊं कल
हमनवां-मित्र इल्तिज़ा-अनुरोध

मेरे साथ रिशता निभाओगे क्या ?
कहो ना ,मेरे साथ आओगे क्या ?
हमें आरज़ू है तुम्हारे साथ की
मुझे हमसफ़र तुम बनाओगे क्या ?
मेरा कोई घर या ठिकाना नहीं
मेरे साथ घर बसाओगे क्या ?
सुना है तुम्हें सिर्फ झूठे ही मिले
मुझे एक दफ़ा आजमाओगे क्या ?

आज तुझसे नही शायद खुद से ही मेरी रुसवाई है
तुझसे करके प्यार मैने जिंदगी में पाई सिर्फ तन्हाई है
दामन छुड़ा के प्यार का मेरे तूने अपनी दुनियां बसाई है
मैने समझा तुझे हमसफर अपना तू निकला हरजाई है

ये लकीरें, ये नसीब, ये किस्मत
सब फ़रेब के आईनें हैं…
हाथों में तेरा हाथ होने से ही
मुकम्मल ज़िंदगी के मायने हैं…

फिर नींद से उठकर इधर उधर देखते है तुम्हे
क्यों ख्वाबों में मेरे इतने करीब चले आते हो तुम
‏बातें मंज़िलों की तू न कर मुझसे,
है हमसफ़र… तो मेरे साथ आ !!

वही है डगर, वही है सफ़र
है नही साथ मेरे मगर, अब मेरा हमसफ़र
इधर उधर ढूंढें नजर, वही है डगर
कहाँ गयी शामें मदभरी, वो मेरे मेरे वो दिन गए किधर


राह के हमसफ़र ऐ मेरे साथिया,
ख्वाब में तुम सदा आते जाते रहें!
जिंदगी जंग है,कण्टकाकीर्ण पथ,
शूल या फूल तुम मुस्कुराते रहे ! !

हुमज़ुबां मेरे थे इनके दिल मगर अच्छे न थे
मंज़िलें अच्छी थीं मेरे हमसफ़र अच्छे न थे
वो आती है रोज मेरे कब्र पर
अपने हमसफर के साथ
कौन कहता है
की दफनाने के बाद जलाया नही जाता

अब इस के बाद घने जंगलो की मंजिल है
ये वक़्त है के पलट जाएँ हमसफ़र मेरे

तलाश कर मेरी मोहब्बत को अपने दिल में,
ए मेरे हमसफ़र दर्द हो तो समझ लेना की मोहब्बत अब भी बाकि है..!!
तुम बन के उजाला यकीन का
साथ साथ चलना मेरे सतगुरु हमसफ़र
अँधेरा है…यूँ ही सिमट जायेगा

‏ये सितम की रात हैं ढलने को है
अन्धेरा गम का पिघलने को है
ज़रा देर इस में लगे अगर ना उदास हो मेरे हमसफ़र…

तेरी बेवफाई पर
इतना ही कहूँगा हमसफर….
मैं खुद को इस काबिल
बनाऊंगा की तेरी आँखे मेरे दीदार
को तरसेगी

हमसफर शायरी

बहुत नजदीक से गुजरे वो बेखबर बनकर |
कल तलक साथ थे जो मेरे हमसफर बनकर ||

humsafar shayari हमसफर शायरी
humsafar shayari

हमसफ़र साथ-साथ चलते हैं
रास्ते तो बेवफ़ा बदलते हैं
आपका चेहरा है जब से मेरे दिल में
जाने क्यों लोग मेरे दिल से जलते हैं
जो अपने हमसफ़र थे दुबारा नहीं मिले,

पीछे जो रह गये थे, मेरे हम-क़दम हुए…
कुछ इस तरह से साथ मेरे हमसफ़र चले,
साये से जैसे जिस्म कोई बेख़बर चले l

मेरे मरने पर किसी को ज्यादा फर्क नहीं होगा,
बस तन्हाई रोएगी कि मेरा हमसफ़र चला गया !

उन्हीं रास्तों ने जिन पर कभी तुम थे साथ मेरे..
मुझे रोक रोक पूछा तेरा हमसफर कहाँ है

जो उड़ाते थे मेरे सफर का मजाक
रफ्ता रफ्ता मेरे हमसफर हो गए

इतनी अकेली क्यों है ये ज़िंदगी
कोई हमसफ़र क्यों नहीं साथ मेरे
तुम भी दो क़दम साथ चल
छोड़ गए बीच मँझधार
अब कटेगी ये ज़िंदगी किसकेसहारे

पहले कुछ दूर तक साथ चलके परख
फिर मेरे हमसफ़र मुझे हमसफ़र बोलना

मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तेरा क्या भरोसा ए हमसफ़र…
तेरी यु प्यार करने की अदा, कहीं मेरा दर्द और न बढ़ा दे…


‏खुबसूरत बात ये, चार पल का साथ ये
सारी उम्र मुझको को रहेगा याद
मैं अकेला था मगर, बन गयी वो हमसफ़र, वो मेरे साथ हो गयी..

 

हमसफर शायरी

‏‏
मेरे साथ जुगनू है हमसफ़र मगर इस शरर की बिसात क्या,
ये चराग़ कोई चराग़ है न जला हुआ न बुझा हुआ #Badr
मेरे रास्ते मेरी मंजिलें मेरे हमसफ़र मेरे हमनशीं
मुझे लूट कर सभी चल दिए, मेरे पास कुछ भी बचा नहीं.
मेरे हमसफ़र मेरे पास आ, मुझे शोहरतें का कोई काम नहीं||
जो तू मुझे मिल जाये तो ,मुझे किसी बात की हया न हो||||

तुझे क्या ख़बर मेरे हमसफ़र, मेरा मरहला कोई और है।
मुझे मंज़िलों से गुरेज़ है मेरा रास्ता कोई और है।

‏गगन से भी ऊंचा मेरा प्यार है…
तुझी पर मिटूंगा ये इकरार है…
तू इतना समझ ले मेरे हमसफ़र….
तेरे प्यार से मेरा संसार है

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Hinglish font Humsafar Shayari

hamasafar matalab safar mein saath chalane vaala, ab ye safar koi bhi ho sakata hai .jivan ka safar bhi …jivan ke safar mein saath chalane vaale ko jivanasaathi hamasaphar kahate hain, is pej par ham aapake lie behatarin hamasaphar shaayari pesh kar rahen hain, apane saathi apane hamasaphar tak apani man ki baat aur jajbaat pahunchaane ke lie in hamasaphar shaayari ka istemaal kijiye .. apane hamasafar ko ye hamasafar shaayari sms, vhaats app mesej aur hamasaphar vhaats app stetas ke zariye pahunchiye agar aapako yah hamasaphar shaayari achchhi lage to ise apane doston ke saath sheyar zaroor kijiye.

‏ zindagi se meri aadat nahin milati
mujhe jine ki soorat nahin milati
koi mera bhi kabhi hamasafar hota
mujhe hi kyoon muhabbat nahin milati .

jindagi dene vaale marata chhod gaye
apanaapan jataane vaale tanha chhod gaye
jab padi jaroorat hamen apane hamasaphar ki
vo jo saath chalane vaale raasta mod gaye.
too hamasafar too hamadagar too hamaraaj nazar aata hai……
meri adhoori si jindagi ka khvaab nazar aata hai…..
kaisi udaas hai jindagi… bin tere… har lamha,
mere har lamhe mein…. teri maujoodagi ka ahasaas nazar aata hai.

‏mere baad kisi aur ko hamasafar banaakar dekh lena ..
teri hi dhadakan kahegi ki usaki vafa mein
kuchh aur hi baat thi.

shaam aai to bichhude hue hamasafar
aansuon se in aankhon mein aane lage.
aankhen manzar hui, kaam nagma hue
ghar ke andaaz hi ghar se jaate rahe.
shaam aayi , to bichhade hue hamasafar
aansuon se in aankhon mein aake rahe.
har musaaphir hai tanha-tanha kyon
ek-ek hamasafar se poochhate hain

raah-e-vafa mein koi hamasafar zaroori hai
ye raasta kahin tanaha kate to mushkil hai
jahaan bhi jaoon ye lagata hai, teri mahafil hai
#nidafazli

aap jaisa hansi hamasafar ho agar,
ja rahe hain kahaan sochata kaun hai ?

ek hi manjil hai unaki‚ ek hi hai raasta
kya sabab phir hamasafar se hamasafar ladane lage

jo ba-jaahir hamase sadiyon ki musaafat-bar rahe,
ham unhen har shaam apana hamasafar dekha kiye

phirate hain kab se darabadar ab is nagar ab us nagar
ek doosare ke hamasafar, main aur meri aavaaragi …

bina hamasaphar ke kab talak koi masaafaton mein laga rahe,
jahaan koi kisi se juda na ho mujhe us raah ki talaash hai !!
akela chhodane vaalon ko ye batae koi
ki ham to raah ko bhi hamasafar samajhate hain -saood usmaani
hamasafar mere hamasafar pankh tum paravaaz ham
zindagi ka saaz ho tum saaz ki aavaaz ham

na to kaaravaan ki talaash hai, na to hamasafar ki talaash hai
mere shauq-e-khaana kharaab ko, teri rahaguzar ki talaash hai
‏muddaton ke baad koi hamasaphar achchha laga ….
guftagu achchhi lagi zauq-e-nazar achchha laga …

raat tanahaiyon ki dushman hai
har safar hamasafar se roshan hai,
mauj ke paas jo kinaara hai
vo kinaara hasin lagata hai
-nida faajali

na to kaaravaan ki talaash hai, na to hamasafar ki talaash hai mere shauq-e-khaana kharaab ko, teri rahaguzar ki talaash hai mere naamuraad junoon ka hai ilaaj koi to maut hai jo dava ke naam pe zahar de usi chaaraagar ki
barasaat ki raat
saahir

kisi raah mein, kisi mod par
chal na dena mujhako too chhodakar
mere hamasaphar, mere hamasaphar,
mere hamasaphar, mere hamasaphar💐💐

ham naadaan the jo unhen hamasafar samajh baithe,
vo chalate the mere saath par kisi aur ki talaash mein
..
teri bevaphai par itana hi kahoongi ……..
ai hamasafar………
main khud ko is qaabil banaoongi ke……
.. teri aankhen mere didaar ko tarasen..

sun mere hamasafar
kya tujhe itani si bhi khabar
ki teri saanse chalati jidhar
rahoonga bas vahi umr bhar
rahoonga bas vahi umr bhar haay

chalate chalate mujhase poochha mere paanv ke chhaalon ne.
basti kitani door basa li dil me basane vaalo ne..
“rusvai zindagi ka mukaddar ho gayi,
mere dil bhi patthar ho gaya,
jise raat din paane ke khvaab dekhe,
vo bevapha kisi aur ki hamasaphar ho gai”
raah bhi tum ho raahat bhi tum hi ho
mere sukh aur dukh ko baantane vaali hamasaphar bhi tum hi ho
mere har dard ka maraham ,baaho ka sukoon bhi tum hi ho
is qadar masaroof rahata hoon tumhaari yaado mein
phurasaton ko bhi phursat nahi milati ab to
kyonki ab vaha bhi tum hi ho
hamasaphar ban gae ,
hamanava ban tum mere aasamaan … meri jamin ban gae

too hamasafar, too ham dagar, too hamaraaj, najar aata hai,
meri adhoori si jindagi ka.. khvaab najar aata hai,
kaisi udaas hai jindagi tere bin har lamha,
mere har lamhe mein tera ahasaas najar aata hai!

mere hamasaphar mere hamanavaan,bas sirph do kadam mere saath chal
ye iltiza to too meri maan hi le,aisa na ho main ho jaoon kal
hamanavaan-mitr iltiza-anurodh

mere saath rishata nibhaoge kya ?
kaho na ,mere saath aaoge kya ?
hamen aarazoo hai tumhaare saath ki
mujhe hamasafar tum banaoge kya ?
mera koi ghar ya thikaana nahin
mere saath ghar basaoge kya ?
suna hai tumhen sirph jhoothe hi mile
mujhe ek dafa aajamaoge kya ?

aaj tujhase nahi shaayad khud se hi meri rusavai hai
tujhase karake pyaar maine jindagi mein pai sirph tanhai hai
daaman chhuda ke pyaar ka mere toone apani duniyaan basai hai
maine samajha tujhe hamasaphar apana too nikala harajai hai

ye lakiren, ye nasib, ye kismat
sab fareb ke aainen hain…
haathon mein tera haath hone se hi
mukammal zindagi ke maayane hain…

phir nind se uthakar idhar udhar dekhate hai tumhe
kyon khvaabon mein mere itane karib chale aate ho tum
‏baaten manzilon ki too na kar mujhase,
hai hamasafar… to mere saath aa !!

vahi hai dagar, vahi hai safar
hai nahi saath mere magar, ab mera hamasafar
idhar udhar dhoondhen najar, vahi hai dagar
kahaan gayi shaamen madabhari, vo mere mere vo din gae kidhar


raah ke hamasafar ai mere saathiya,
khvaab mein tum sada aate jaate rahen!
jindagi jang hai,kantakaakirn path,
shool ya phool tum muskuraate rahe ! !

humazubaan mere the inake dil magar achchhe na the
manzilen achchhi thin mere hamasafar achchhe na the
vo aati hai roj mere kabr par
apane hamasaphar ke saath
kaun kahata hai
ki daphanaane ke baad jalaaya nahi jaata

ab is ke baad ghane jangalo ki manjil hai
ye vaqt hai ke palat jaen hamasafar mere

talaash kar meri mohabbat ko apane dil mein,
e mere hamasafar dard ho to samajh lena ki mohabbat ab bhi baaki hai..!!
tum ban ke ujaala yakin ka
saath saath chalana mere sataguru hamasafar
andhera hai…yoon hi simat jaayega

‏ye sitam ki raat hain dhalane ko hai
andhera gam ka pighalane ko hai
zara der is mein lage agar na udaas ho mere hamasafar…

teri bevaphai par
itana hi kahoonga hamasaphar….
main khud ko is kaabil
banaoonga ki teri aankhe mere didaar
ko tarasegi

bahut najadik se gujare vo bekhabar banakar |
kal talak saath the jo mere hamasaphar banakar ||

hamasafar saath-saath chalate hain
raaste to bevafa badalate hain
aapaka chehara hai jab se mere dil mein
jaane kyon log mere dil se jalate hain
jo apane hamasafar the dubaara nahin mile,
pichhe jo rah gaye the, mere ham-qadam hue…
kuchh is tarah se saath mere hamasafar chale,
saaye se jaise jism koi bekhabar chale l

mere marane par kisi ko jyaada pharkanahin hoga,
bas tanhai roegi ki mera hamasafar chala gaya !
unhin raaston ne jin par kabhi tum the saath mere..
mujhe rok rok poochha tera hamasaphar kahaan hai

jo udaate the mere saphar ka majaak
raphta raphta mere hamasaphar ho gae

itani akeli kyon hai ye zindagi
koi hamasafar kyon nahin saath mere
tum bhi do qadam saath chal
chhod gae bich manjhadhaar
ab kategi ye zindagi kisakesahaare

pahale kuchh door tak saath chalake parakh
phir mere hamasafar mujhe hamasafar bolana

mujhe chhod de mere haal par tera kya bharosa e hamasafar…
teri yu pyaar karane ki ada, kahin mera dard aur na badha de…

‏khubasoorat baat ye, chaar pal ka saath ye
saari umr mujhako ko rahega yaad
main akela tha magar, ban gayi vo hamasafar, vo mere saath ho gayi..

‏‏
mere saath juganoo hai hamasafar magar is sharar ki bisaat kya,
ye charaag koi charaag hai na jala hua na bujha hua #badr
mere raaste meri manjilen mere hamasafar mere hamanashin
mujhe loot kar sabhi chal die, mere paas kuchh bhi bacha nahin.
mere hamasafar mere paas aa, mujhe shoharaten ka koi kaam nahin||
jo too mujhe mil jaaye to ,mujhe kisi baat ki haya na ho||||

tujhe kya khabar mere hamasafar, mera marahala koi aur hai.
mujhe manzilon se gurez hai mera raasta koi aur hai.

‏gagan se bhi ooncha mera pyaar hai…
tujhi par mitoonga ye ikaraar hai…
too itana samajh le mere hamasafar….
tere pyaar se mera sansaar hai
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