Kashti Shayari in Hindi कश्ती पर शायरी - Net In Hindi.com

Kashti Shayari in Hindi कश्ती पर शायरी

Kashti Shayari in Hindi कश्ती पर शायरी

Kashti Shayari in Hindi कश्ती पर शायरी

Kashti Shayari in Hindi

कश्ती पर शायरी

दोस्तों हाज़िर है आपके लिए कश्ती पर कुछ बेहतरीन शायरी का संग्रह, इन शेरो में जीवन का संघर्ष, इन्सान का होंसला, मोहब्बत, मायूसी सभी तरह के रंग हैं. सभी विषयों पर हिंदी शायरी पढने के लिए यहाँ क्लीक करे. Hindi Shayari List

Hindi Shayari on Kashti (Small Boat). These hindi and urdu poetry on Kashti depicts the color of human struggle, passion of love, Human Spirit, Endeavour, depression etc.

List of all topics of Hindi Shayari is here.

 

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इसे तूफ़ान ही किनारे से लगा सकता है

मेरी कश्ती किसी पतवार की मोहताज नहीं ~rahatindori

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सब हवाएं ले गया मेरे समंदर की कोई

और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया

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डूबे कि रहे कश्ती दरिया-ए-मोहब्बत में,

तूफ़ान ओ तलातुम पर हम ग़ौर नहीं करते !!

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तूफान कर रहा था मेरे अज्म(साहस) का तवाफ,

दुनिया समझ रही थी मेरी कश्ती भंवर में है !!

*** Kashti Shayari in Hindi

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,

कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा !! ~BashirBadr

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कैफ-ए-ख़ुदी ने मौज को कश्ती बना दिया,

होश-ए-ख़ुदा है अब न गम-ए-नाख़ुदा मुझे.!!

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समंदर हो गयी है , मेरी नज़र तेरे लिये,

मेरी कश्ती का तू साहिल नहीं हुयी अब तक.!!

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जा लगेगी कश्ती-ए-दिल साहिल-ए-उम्मीद पर,

दीदा-ए-तर से अगर दरिया रवाँ हो जाएगा !! -मिर्ज़ा अंजुम

*** Kashti Shayari in Hindi

हरेक कश्ती का अपना तज़ुर्बा होता है दरिया में,

सफर में रोज़ ही मंझदार हो ऐसा नहीं होता !!

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हर घड़ी खुद से उलझना है मुकद्दर मेरा

मै हि कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा.!!

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डुबो दे अपनी कश्ती को,किनारा ढूँढने वाले

ये दरिया-ए-मोहब्बत है,यहाँ साहिल नहीं मिलता.!!

 

*** Kashti Shayari in Hindi

हम भी हैं शायद किसी भटकी हुई कश्ती के लोग ।।

चीखने लगते हैं ख़्वाबों में जज़ीरा देख कर..!!

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हमे तो अपनों ने लूटा गैरों में कहाँ दम था

हमारी कश्ती भी वहा डूबी जहाँ पानी कम था

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दरिया के कश्ती थे जो सागर तक जा न सके।

तुमसे मिलना मुक़द्दर था औ’ बिछड़ना क़िस्मत

इसलिए शिक़ायत कभी होंठों तक ला न सके

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कौन सी कश्ती में बैठें तेरे बंदे मौला

अब जो दुनिया कोई सैलाब उठाकर ले आए

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सच की राह चला मुसाफिर मंजिल से कभी दूर नहीं होता,

और झूठ की कश्ती कभी साहिल तक नहीं पहुँचती

*** Kashti Shayari in Hindi

तू बादल अगर है तो बूँद मैं बनूँ चलूँ तुझसे दूर तो तुझमें ही मिलूँ।

है सागर अगर तू नदी मैं ना बनूँ बनूँ वो कश्ती कि डूबूँ तो तुझमें ही रहूँ।

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में अपना फ़साना कह ना सका दिल की तमन्ना दिल में रही।

लो आज किनारे पर आ कर मेरे अरमोनों की कश्ती डूब गयी।।

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कश्ती न बदली दरिया न बदला

डूबने वालों का जज़्बा भी न बदला.

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कश्ती भी बदली दरिया भी न बदला

शौक ऐ सफर है ऐसा एक उमर से हमें,

मंजिल भी न मिली और हमने रास्ता भी नही बदला

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साहिल पे लौट आयी हैं अब ये खाली कश्ती

मुसाफ़िर मंज़िल की तलाश में तह तक़ गया होगा

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तुम्हारी याद का दरिया और तन्हा दिल की कश्ती..

दूर फलक तक बस यादें ही यादें , न कोई जमीन न बस्ती…..!

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डूबने का डर गर मुझे हो तो कैसे हो मै तेरा,

कश्ती तेरी , साहिल तेरा और दरिया तेरा ।।

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मोहब्बत की कश्ती में सोच समझ कर सवार होना मेरे दोस्त,

जब ये चलती है तो किनारा नहीं मिलता,

और जब डूबती है तो सहारा नही मिलता…

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मुझे मौत देकर नयी बात कर दी,

मेरी कश्ती थी कागज की तूने वरसात कर दी।

*** Kashti Shayari in Hindi

यादो की कश्ती के सहारे पार कर लेंगे जिदंगी का समंदर,

शर्त बस इतनी कि उस पार “तुम “मिलो..!!

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आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है

मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए – बहज़ाद लखनवी

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चले मल्लाह कश्ती गीत उम्मीदें कि

जैसे सब को साहिल ने बुलाया था

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चल सफर शुरू करे नए साल की कश्ती भी है होंसला भी है

डर नहीं ज़रा भी तूफ़ान का दोस्त भी है भरोसा भी है !!

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उस ना-ख़ुदा के ज़ुल्म ओ सितम हाए क्या करूँ

कश्ती मिरी डुबोई है साहिल के आस-पास

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किसी तूफ़ान की साज़िश से मेरा कुछ न बिगड़ेगा,

के अब कश्ती पे नहीं ख़ुद पे भरोसा कर रहा हूँ मैं.

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समंदर क्या सम्हालेगा कागज की कश्ती

उसके अंदर के तूफान उसे चैन से रहने नही देते।

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तूने कहा ना था की मै कश्ती पे बोझ हु

आँखों को अब न ढाप मुझे डूबते भी देख ~शकेब

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कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं..

ना-ख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है…

*** Kashti Shayari in Hindi

तूफ़ानों को कहो अपनी औकात में रहे,

उन्होंने सिर्फ कश्ती देखी है, हौंसले नहीं ।

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कश्ती पर आँच आ जाये तो हाथ कलम करवा देना

लाओ मुझे पतवारें दे दो, मेरी ज़िम्मेदारी है । ~राहत

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जिंदगी की कश्ती को किनारा मिल जाये

जैसे डूबते को तिनक़े का सहारा मिल जाये

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बूंदो से बना हुआ छोटा सा समंदर, लेहरो से भीगती छोटी सी बस्ती,

चलो ढूंढे बारिश में दोस्ती की यादें, हाथ में लेकर एक कागज़ की कश्ती,

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खबर ना थी इश्क की ये कश्ती टूटी है

बस तेरे यकीं पर चल पड़े है

अब तू डुबो दे या…… किनारा लगा दे ……..

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जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है

माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है ~MunnawarRana

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बहल तो जायेगा मेरा दिल उसके वादों से लेकिन…! .

चलेगी पानी में कागज़ की कश्ती कब तक…!!

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नादान तमन्ना रेती में, उम्मीद की कश्ती कहती हैं

इक हाथ से देती हैं दुनियाँ, सौ हाथों से ले लेती हैं

*** Kashti Shayari in Hindi

न बनाओ अपने सफ़र को किसी कश्ती का मोहताज़

चलो इस शान से कि तूफ़ान भी झुक जाए

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डूबे हुओं को, हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो.. ..

और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया..।।

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अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख

इक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम….. ख़ुदा भी है #Qateel

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ऐसा नहीं की राह में रहमत नहीं रही

पैरो को तेरे चलने की आदत नहीं रही

कश्ती है तो किनारा नहीं है दूर

अगर तेरे इरादों में बुलंदी बनी रही ।

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काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था;

खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था;

कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में;

वो नादान बचपन भी कितना प्यारा

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थीं जो कल तक कश्ती-ए-उम्मीद को थामी हुईं,

रूख बदलकर, आज वह मौजें भी तूफां हो गईं।

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वो मायूसी के लम्होँ मेँ ज़रा भी हौँसला देते तो..

हम काग़ज़ की कश्ती पे समंदर मेँ उतर जाते.!!

*** Kashti Shayari in Hindi

शजर कि आंख से कश्ती निकालने वाले,

कहा गए वो समन्दर खंगालने वाले ।

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आँखो मे आँखे डाल पढने की कोशिश की,

यूँ डूबा ले कश्ती कि फ़िर किनारा न मिला.

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क्या खबर है किस किनारे इस सफ़र की शाम हो

कश्ती -ए-उम्र-ए-रवाँ में बादबाँ कोई नहीं #हसन_नईम

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टूटी है कश्ती, तेज है धारा

कभी ना कभी तो मिलेगा किनारा

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डूबते दिल को मुहब्बत का सहारा दे दे।

डगमगाती हुई कश्ती को किनारा दे दे।

साथ जीने का मुझे आज सहारा दे दे।

मेरी जीस्त का हंसी मुझको नज़ारा दे दे।~अशफाक खान

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दरिया को अपनी मौज की तुग़्यानियों से काम

कश्ती किसी की पार हो या दरमियाँ रहे – अल्ताफ़ हुसैन हाली

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अश्को के समन्दर में दिल डूब जाएगा

कश्ती को साहिल तक अब कौन पोहोंचायेगा

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बेबसी का इक समंदर दूर तक फैला हुआ

और कश्ती कागजी पतवार के साये में है ~अदम गोंडवी

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ज़िंदगी मैं भी मुसाफ़िर हूँ तेरी कश्ती का

तू जहाँ मुझसे कहेगी, मैं उतर जाऊँगा….

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सीने में उठके हैं अरमान जैसे दरिया में आते हैं

तूफान जैसे कभी कभी खुद ही माझी कश्ती को डुबोता है…

*** Kashti Shayari in Hindi

 

साहिल पे कश्ती पहुँच जाती है

चलने से हर राह तय हो जाती है

कोशिश जो खुद ही किया करते है

ज़िन्दगी में उनके सुबह आती है

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रहा गर्दिशों में हरदम, मेरे इश्क का सितारा

कभी डगमगाई कश्ती, कभी खो गया किनारा ~शकिल_बदायुनी

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यही अन्दाज़ है मेरा, समन्दर फतह करने का

मेरी काग़ज़ की कश्ती में, कई जुगनू भी होते हैं

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ना साहिल, ना दरिया, ना कश्ती से प्यार हैँ मुझे

वो लहर अभी तक नहीँ आई जिसका इंतजार हैँ मुझे

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