Maykhana Shayari मयखाने पर शायरी

Maykhana Shayari मयखाने पर शायरी

Maykhana Shayari मयखाने पर शायरी

Maykhana Shayari

मयखाने पर शायरी

दोस्तों “मयखाने” पर शेर ओ शायरी का एक नशीला संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के मयखाने के बारे में ज़ज्बात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी मयखाने की शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

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वही मैख़ाना-ओ-सहबा वही साग़र वही शीशा

मगर आवाज़-ए-नौशानोश मद्धम होती जाती है

~जिगर

ताआज़्ज़ुब है तेरा चेहरा है के मैख़ाना

नज़र..लब..रुख़सार..पेशानी में जाम रक्खे हैं

 

मैख़ाना सलामत है, तो हम सुर्ख़ी-ए-मै से

तज़ईन-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम करते रहेंगे

~फैज़

 

मस्जिद में बुलाते हैं हमें ज़ाहिद ए नाफ़हम

होता कुछ अगर होश तो मयखाने न जाते

 

अर्श-ओ-समाँ को साग़र-ओ-पैमाना कर दिया

रिन्दों ने कायनात को मैख़ाना कर दिया

 

Maykhana Shayari मयखाने पर शायरी

 

यूं तो मैखाने का साकी भी भला है अपना

तू इबादत में पड़ा है तो खुदा तक पहुंचे

 

तुझको मस्ज़िद है मुझको मयखाना,

वाइज़ा अपनी अपनी किस्मत है।

~मीर

 

नज़र से पिलाया ना करो लड़खड़ा जाते हैं हम,

मयखाने में अब ज़रा कम ही जाते हैं हम

 

आज तू कल कोई और होगा सद्र-ए-बज़्म-ए-मय

साकिया तुझसे नहीं,हम से है मैखाने का नाम

 

दोस्तों उस चश्म-ओ-लब की कुछ कहो जिसके बगैर,

गुलिस्ताँ की बात रंगीन न मैखाने का नाम !!-फ़ैज़

 

तंग पैमाई का शिकवा साक़ी-ए-अज़ली से क्या

हमने समझा ही नही दस्तूर-ए-मैखाना अभी !! –~रहबर

 

Maykhana Shayari मयखाने पर शायरी

 

मय भी है मीना भी है सागर भी है साकी नही

जी मे आता है लगा दें आग मयखाने को ही

 

पाई ना ‘शमीम’ अपने साकी की नज़र यकसाँ

हर लम्हा बदलता है मैखाने का मौसम भी.!!

 

हो जाते हो बरहम भी

बन जाते हो हमदम भी

ऐ साकी-ए-मयखाना

शोला भी हो,शबनम भी

खाली मेरा पैमाना

बस इतनी शिकायत है

-हसरत जयपुरी

 

आये हैं समझाने लोग

हैं कितने दीवाने लोग

दैर-ओ-हरम में चैन जो मिलता

क्यूँ जाते मयखाने लोग…।

-महेंद्र बेदी ‘सहर’

 

कहाँ मयखाने का दरवाज़ा ‘ग़ालिब’ और कहाँ वाइज

पर इतना जानते है कल वो जाता था के हम निकले..

-मिर्जा ग़ालिब

 

Maykhana Shayari मयखाने पर शायरी

 

निकलकर दैरो-काबा से अगर मिलता न मैख़ाना

तो ठुकराए हुए इंसाँ खुदा जाने कहाँ जाते ….

-क़तील शिफ़ाई

 

इक सिर्फ हम ही मय कों आँखों से पिलाते है,

कहने को तो दुनिया में मयखाने हजारे है..!(उमराव-ओ-जान)

-शहरयार

 

सुबू पर जाम पर शीशे पे , पैमाने पे क्या गुज़री।।

ना जाने मैंने तौबा की , तो मैख़ाने पे क्या गुज़री..!!

 

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1 Response

  1. Suno arzz farmaya hai
    Jis maykhane me khana nhi, wo maykhana kis kaam ka!
    Jis maykhane me main nhi , us maykhane me khana hi kis kaam ka

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