Mukaddar Shayari in Hindi मुकद्दर पर शायरी - Net In Hindi.com

Mukaddar Shayari in Hindi मुकद्दर पर शायरी

Mukaddar Shayari in Hindi  मुकद्दर पर शायरी

Mukaddar Shayari in Hindi मुकद्दर पर शायरी

Mukaddar Shayari in Hindi

मुकद्दर पर शायरी

 

पेश हे मुकद्दर पर कुछ खूबसूरत शायरी

Hindi Shayari on Fate and Destiny

 

********************************************************

ये मंजिलें तो किसी और का मुक़द्दर हैं

मुझे बस अपने जूनून के सफ़र में रहने दो

~Faraz

 

कोई तो ख़्वाब मेरी रात का मुक़द्दर हो

कोई तो अक्स मेरी चश्म-ए-तर में रहने दो

~Faraz

 

सुना है अब भी मिरी हाथों की लकीरों में,

नाज़ूमियों को मुकद्दर दिखाई देता है।

~अमीर_कज़लबाश

 

जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान-ए-सफ़र,

कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं !! -अहमद फ़राज़

 

हम चिराग़-ए-शब ही जब ठहरे तो फिर क्या सोचना,

रात थी किस का मुक़द्दर और सहर देखेगा कौन !! -फ़राज़

 

Mukaddar Shayari in Hindi

पेशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिले

दस्तार कहाँ मिलगें जहाँ सर नहीं मिले

 

पूछकर अपनी निगाहों से बता दे मुझको

मेरी रातों की मुक़द्दर में सहर है कि नहीं

~साहिर

 

 

हादसे राह-ए-मोहब्बत का मुक़द्दर ठहरे,

जब हमें दिल से भुलाना तो ख़बर कर देना !!

 

वो सफ़र में है तो चलना है मुकद्दर उसका

इश्क़ में पड़ ही गया है तो वफ़ा तक पहुंचे

 

यहां सब के मुक़द्दर में फ़क़त ज़ख़्म-ए-जुदाई है

सभी झूटे फ़साने हैं विसाल-ए-यार के क़िस्से

 

Mukaddar Shayari in Hindi

संगसारी तो मुकद्दर है हमारा लेकिन,

आप के हाथ में पत्थर नहीं देखे जाते

हुनर की चौखटों पे सर लगा के आया हूँ,

दाँव पर अपना मुकद्दर लगा के आया हूँ

 

ढूंढते रहते हैं सब लोग लक़ीरों में जिसे,

वो मुक़द्दर भी सिक़न्दर का पता पूछता है

 

इसमें आवारा मिज़ाजी का कोई दख़्ल नहीं,

दश्तो सहरा में फिराता है मुक़द्दर मुझको !!

 

Mukaddar Shayari in Hindi

ये सर्द रात, ये आवारगी, ये नींद का बोझ

हम अपने शहर मे होते तो घर गए होते

~उम्मीद_फ़ाज़ली

 

जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया,

जो खो गया मैं उस को भुलाता चला गया !! -साहिर लुधियानवी

 

कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन

फिर इस के ब’अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर

~निदा_फ़ाज़ली

 

Mukaddar Shayari in Hindi

चराग़-ए-राह-ए-मोहब्बत ही बन गए होते,

तमाम उम्र का जलना अगर मुक़द्दर था !!

 

होठों पे हैं दुआएं, मगर दिल पे हाथ है

अब किस को क्या मिला, ये मुक़द्दर की बात है !!

 

तश्नगी मेरा मुक़द्दर है इसी से शायद

मैं परिन्दों को भी प्यासा नहीं रहने देता.!!

 

तक़दीर का शिकवा बेमानी, जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं,

आप अपना मुक़द्दर बन ना सके, इतना तो कोई मजबूर नहीं !!

 

Mukaddar Shayari in Hindi

तुम मिलो या ना मिलो ये मेरे मुकद्दर की बात है,

सुकून बहुत मिलता है तुमको अपना सोचकर!!”

 

पेशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिले

दस्तार कहाँ मिलेंगे जहाँ सर नहीं मिले.!!

 

कोई इक तशनगी कोई समुन्दर लेके आया है

जहाँ मे हर कोई अपना मुकद्दर लेके आया है

 

ज़मीन और मुक़द्दर की एक है फ़ितरत

जो भी बोया वो ही हुबहू निकलता है.!!

 

Mukaddar Shayari in Hindi

अब तुम्हें क्या दे सकूँगा चारागरों दोस्तों

जिस्म का सारा लहू मेरा मुक़द्दर पी गया.!!

 

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

मै हि कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा

 

Search Tags

Mukaddar Shayari in Hindi, Mukaddar Hindi Shayari, Mukaddar Shayari, Mukaddar whatsapp status, Mukaddar hindi Status, Hindi Shayari on Mukaddar, Mukaddar whatsapp status in hindi,

 Destiny Shayari, Destiny Hindi Shayari, Destiny Shayari, Destiny whatsapp status, Destiny hindi Status, Hindi Shayari on Destiny, Destiny whatsapp status in hindi,

 मुकद्दर हिंदी शायरी, हिंदी शायरी, मुकद्दर, मुकद्दर स्टेटस, मुकद्दर व्हाट्स अप स्टेटस, मुकद्दर पर शायरी, मुकद्दर शायरी, मुकद्दर पर शेर, मुकद्दर की शायरी

 

 

 

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *