Raaz Shayari in Hindi राज़ पर शायरी - Net In Hindi.com

Raaz Shayari in Hindi राज़ पर शायरी

Raaz Shayari in Hindi  राज़ पर शायरी

Raaz Shayari in Hindi राज़ पर शायरी

Raaz Shayari in Hindi

राज़ पर शायरी

दोस्तों राज़ पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “राज़” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “राज़” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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इशारे खूब समझता है,

जो अपना राज़ खोलता नहीं !!

 

राज़-ए-तख़लीक-ए-ग़ज़ल हम को है मालूम ‘नसीम’

जाम हो मय हो सनम हो तो ग़ज़ल होती है

~नसीम शाहजहाँपुरी

 

जिसको ख़बर नहीं, उसे जोशो-ख़रोश है

जो पा गया है राज़, वो गुम है, ख़मोश है

~दत्तात्रिय क़ैफी

 

हर अपनी दास्ताँ को कहा दास्तान-ए-ग़ैर,

यूँ भी किसी का राज़ छुपाते चले गए !!

 

पुकारती है ख़ामोशी मेरी फ़ुगां की तरह

निगाहें कहती हैं सब राज़-ए-दिल ज़ुबां की तरह

~दाग़

 

Raaz Shayari in Hindi

शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो

बेख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो

 

कोई समझेगा क्या राज़-ए-गुलशन

जब तक उलझे न काँटों से दामन..

 

खुलता नहीं है राज़ हमारे बयान से,

लेते हैं दिल का काम हम अपनी ज़बान से !!

 

क्यूँकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे क्या कहें,

वो राज़-ए-दिल जो कह न सके राज़-दाँ से हम !!

 

ख़मोशी की गिरह खोले सर-ए-आवाज़ तक आए,

इशारा कोई तो समझे कोई तो राज़ तक आए !! -मुज़फ़्फ़र अबदाली

 

Raaz Shayari in Hindi

जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक,

वो मिरे दिल का राज़ क्या जानें !! -दाग़ देहलवी

 

जो राज़ है वो खुल के भी इक राज़ ही रह जाए,

इज़हार को मैं ऐसी ज़बाँ ढूँड रहा था !!

 

कोई किस तरह राज़-ए-उल्फ़त छुपाए,

निगाहें मिलीं और क़दम डगमगाए !!

 

यइ राह कहाँ से है, ये राह कहाँ तक है

ये राज़ कोई राही समझा है ना जाना है।

 

इशारे काम करते हैं मोहब्बत में निगाहों के

निगाहों से ही बाहम इन्किशाफ़-ए-राज़ होता है

 

Raaz Shayari in Hindi

मुख़्तसर क़िस्सा-ए-ग़म यह है कि दिल रखता हूं,

राज़-ए-कौनैन ख़ुलासा है इस अफ़साने का !!-फ़ानी बदायूनी

 

दफ़न कर सकता हूँ सीने में तुम्हारे राज़ को,

और तुम चाहो तो अफ़साना बना सकता हूँ मैं।

~मजाज़

 

ख़ामोशियों का राज़-ए-मोहब्बत वो पा गए

गो हम से अर्ज़-ए-हाल की ज़ुर्रत न हो सकी !!

 

चाहता है दिल किसी से राज़ की बातें करे,

फूल आधी रात का आँगन में है महका हुआ !!

 

Raaz Shayari in Hindi

राज़ खुलने का तुम पहले ज़रा अंजाम सोच लो

इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो

 

कहीं कहीं तो ज़मीं आसमाँ से ऊँची है

ये राज़ मुझ पे खुला सीढ़ियाँ उतरते हुए

 

राज़ महफूज़ है इस दर्ज़ा कि मेरे दिल में,

खुद तमाशा है वो और खुद ही तमाशाई है !!- ~रहबर

 

राज़ खोल देते हैं नाज़ुक से इशारे अक्सर,

कितनी खामोश मोहब्बत की जुबां होती है

 

Raaz Shayari in Hindi

तालिब-ए-मसर्रत को,राज़ ये बताता हूँ

हौसला निखरता है,रंज-ओ-ग़म उठाने से.!!

 

लब पे आहें भी नहीं आँख में आँसू भी नहीं

दिल ने हर राज़ मोहब्बत का छुपा रक्खा है.!!

 

हर एक राज़ कह दिया,बस एक जवाब ने

हमको सिखाया वक़्त ने,तुमको क़िताब ने.!!

 

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