Saba Shayari in Hindi सबा पर शायरी - Net In Hindi.com

Saba Shayari in Hindi सबा पर शायरी

Saba Shayari in Hindi सबा पर शायरी

Saba Shayari in Hindi सबा पर शायरी

Saba Shayari in Hindi

सबा पर शायरी

Hindi Shayari on Breeze

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कोई झंकार है, नग़मा है, सदा है क्या है ?

तू किरन है, के कली है, के सबा है, क्या है ?

~नक़्श लायलपुरी

 

ज़रूर तेरी गली से गुज़र हुआ होगा,

कि आज बाद-ए-सबा बेक़रार आई है !!

गुलों को छू के शमीम ए दुआ नहीं आई

खुला हुआ था दरीचा सबा नहीं आई।

 

छूने से कभी बाद-ए-सबा के मेरे तन में

एक बर्क़ सी लहराए तो लगता है कि तुम हो

~मसऊदा हयात

 

ये हम जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं

कभी सबा को, कभी नामावर को देखते हैं

~ग़ालिब

 

Saba Shayari in Hindi

ज़ुल्फ़ बरहम है दिल आशुफ़्ता सबा आवारा,

ख़्वाब-ए-हस्ती सा नहीं ख़्वाब परेशाँ कोई !!- चराग़ हसन हसरत

 

चमन पे गारत-ए-गुल-चीं से जाने क्या गुज़री,

क़फ़स से आज सबा बे-करार गुज़री है।

 

~फैज़

फिर तेरा ज़िक्र किया बाद-ए-सबा ने मुझ से,

फिर मेरे दिल को धड़कने के बहाने आए !!-इक़बाल अशहर

 

ज़माना याद करे या सबा करे ख़ामोश,

हम इक चराग़-ए-मोहब्बत जलाए जाते हैं !! ~शुभदीपावली

 

क्या उठायेगी सबा ख़ाक मेरी उस दर से,

ये क़यामत तो ख़ुद उनसे भी उठाई न गई !!

 

Saba Shayari in Hindi

जो आ के रुके दामन पे ‘सबा‘, वो अश्क नहीं है पानी है,

जो अश्क न छलके आंखों से, उस अश्क की कीमत होती है!! – सबा अफगानी

 

ज़ुल्फ़-ए-शब निक़हत-ए-गुल मौज-ए-सबा गेसू-ए-यार

सब परेशाँ हैं किस-किस को सँवारा जाए.!!

 

तक़दीर से मैं बरसरे-पैक़ार सहीं

तदबीर मेरी माना कि बेकार सहीं

पाला है मुझे भी तो सबा ने आख़िर

मैं गुलशने-हस्ती में फक़त ख़ार सहीं.!!

 

जो आ के रुके दामन पे सबा

वो अश्क़ नहीं है पानी है

।।

जो अश्क़ न छलके आँखों से

उस अश्क़ की क़ीमत होती है

 

सबा के हाथ में नरमी है उनके हाथों की

ठहर ठहर के यह होता है आज दिल को गुमां

 

आंधियां जोर दिखाएं भी तो क्या होता है

गुल खिलाने का हुनर बादे सबा जानती है।

 

Saba Shayari in Hindi

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे,

साथ चल मौज़-ए-सबा हो जैसे ।

 

ख़ुश्क पत्तों को कोई रौंद रहा है

शायद बाल बिखराये हुए बाद-ए-सबा आती है ~बशीर_बद्र

 

दाम-ए-ख़ुश-बू में गिरफ़्तार सबा है

कब से लफ़्ज़ इज़हार की उलझन में पड़ा है कब से

 

मैं आँधियों के पास तलाश-ए-सबा में हूँ

तुम मुझ से पूछते हो मिरा हौसला है क्या ~अदा_जाफ़री

 

रंग बाद ए सबा में भरता है …

मेरा इक ज़ख़्म शाम करता है …

 

Saba Shayari in Hindi

 

किसी ख्याल की ख़ुशबू किसी बदन की महक

दर-ए-कफ़स पे खड़ी है सबा पयाम लिए-मख़दूम

 

तुझे छुकर चली आ रही है सबा..

खिल रहे हैं फूल ..महक रही है फिजा … ~sahiba

 

चाँदनी था, या ग़ज़ल था, सबा था, क्या था;

मैंने एक बार तेरा नाम सुना था, क्या था ~क़ैसर

 

मौसम, ख़ुशबू, बाद-ए-सबा, चाँद, शफ़क़ और तारों में ||

कौन तुम्हारे जैसा है, वक़्त मिला तो सोचेंगे !!!!

 

कलियों को कौन सहने-चमन में जगाएगा

खुद सो गई सबा तेरी ज़ुल्फों की छांव में

 

Saba Shayari in Hindi

तुम्हारे बिना सब अधूरे हैं जानाँ

सबा फूल ख़ुश-बू चमन रौशनी रंग

 

अजीब रंग में अबके खिले हैं दिल के गुलाब

सबा के पैरहन ओ ख़ुशबू को हम कलाम करूँ ~सुख़नवर

 

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे साथ चल मौज़-ए-सबा हो जैसे

लोग यूँ देख कर हँस देते हैं तू मुझे भूल गया हो जैसे ~Danish

 

मुसकुराती है कली, फूल हँसे पड़ते हैं

मेरे महबूब का पैग़ाम सबा लाती है।

 

हर शय में कोई निशानी ना ढूंढ,

हर इत्तफाक में कोई कहानी ना ढूंढ,

दिल की बात कहने आई थी सबा,

अब इसमें सुबह सुहानी ना ढूंढ…..

 

ये इत्र बे-ज़ियाँ नहीं नसीम-ए-नौ-बहार की उड़ा के लाई है

सबा शमीम ज़ुल्फ़-ए-यार की ~इक़बाल_सुहैल

 

Saba Shayari in Hindi

सबा ने जागती आँखों को चूम चूम लिया

न जाने आख़िर-ए-शब इंतिज़ार किस का है ~Akhtar

 

बे-समर पेड़ों को चूमेंगे सबा के सब्ज़ लब

देख लेना ये ख़िज़ाँ बे-दस्त-ओ-पा रह जाएगी

ये सोच कर, आज उसकी गली से हम गुज़रे,

थोड़ी सबा चुरा लायें, साँस लेने की खातिर..!!

 

कह दो कोई सबा से आज उनकी गली जाये,

हम कैसे जी रहे हैं कुछ उनको बता आये

 

जो आके रुके दामन पे सबा वो अश्क़ नहीं हैं पानी है

जो आंसू न छलके आँखों से उस अश्क की क़ीमत होती है

 

Saba Shayari in Hindi

फूल,खुशबु,चमन,चाँद,तारे,सबा

सारे साथी वो हमसे खफा कर गया

सब दरख्तों पर कुछ कुछ लिखा रह गया

नाम ऐसे मेरा वो मिटा के गया

 

फिर तेरा ज़िक्र किया बाद-ए-सबा ने मुझ से,

फिर मेरे दिल को धड़कने के बहाने आए !!

 

तिजारत खुशबूओं की तर्क़ कर दी हमने

जब से सबा नक़ली इत्र की क़दरदान हुई

 

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