Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी - Net In Hindi.com

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

Samandar Shayari in Hindi

Samandar Shayari in Hindi

Samandar Shayari in Hindi

समन्दर पर शायरी

दोस्तों समन्दर पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “समन्दर” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “समन्दर” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

 

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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इलाही कश्ती-ए-दिल बह रही है किस समंदर में

निकल आती हैं मौजें हम जिसे साहिल समझते हैं

~असर सहबाई

 

जर्फ पैदा कर समंदर की तरह

वसअतै खामोशियां गहराईयां।

 

हूरों की तलब और मय ओ सागर से नफ़रत

जाहिद तेरे इरफान से कुछ भूल हुई है

 

कितने ही लोग प्यास की शिद्दत से मर चुके,

मैं सोचता रहा के समंदर कहाँ गये !! – राहत इंदौरी

 

मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर में

मगर यहाँ भी समन्दर निकलने लगते हैं

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

 

पहाड़ों की ढलानों पर,दरख्तो भरी वादियाँ के साए में,झील के किनारे,घर के ख़्वाब में- सब दिख रहा है- समंदर,बर्क,नसीम और…वो तिल.

 

आओ सजदा करें आलमे मदहोशी में

लोग कहते हैं कि सागर को खुदा याद नहीं।

 

मैं दरिया भी किसी गैर के हाथों से न लूं

एक कतरा भी समन्दर है अगर तू देदे!

 

सब हवाएं ले गया मेरे समंदर की कोई

और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया

 

 

ग़मों के नूर में लफ़्जों को ढालने निकले

गुहरशनास समंदर खंगालने निकले

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,

कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा !! ~BashirBadr

 

तेरी अज़मत है तू चाहे तो समंदर दे दे,

माँगने वाले का कासा नहीं जाता

 

समंदर ने कहा मुझको बचा लो डूबने से,

मैं किनारे पे समन्दर लगा के आया हूँ

 

तू समन्दर है तो क्यूँ आँख दिखाता है मुझे,

औस से प्यास बुझाना अभी आता है मुझे

 

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

जिसको देखूँ तेरे दर का पता पूछता है,

क़तरा क़तरे से समंदर का पता पूछता है

 

ज़िक्र करते हैं तेरा नाम नहीं लेते हैं

हम समंदर को जज़ीरा नहीं होने देते

 

क़दम दर क़दम ज़िन्दगी,दौरे इम्तिहान है

कहीं सहरा कहीं समन्दर,कहीं गर्दिशे अय्याम है

 

वो बहने के लिये कितना तड़पता रहता है लेकिन

समंदर का रुका पानी कभी दरिया नहीं बनता

 

रख हौंसला के वो मंज़र भी आएगा,

प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा !!

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

जब चल पड़े सफ़र को तो फिर हौंसला रखो,

सहरा कहीं, कहीं पे समंदर भी आएंगे।

 

कह देना समन्दर से हम ओस के मोती हैं

दरिया की तरह तुम से मिलने नहीं आएंगे!

 

उन आँसुओं का समंदर है मेरी आँखों में

जिन आँसुओं में है ठहराव भी, रवानी भी

 

तेरी अज़मत है तू चाहे तो समंदर दे दे

माँगने वाले का कासा नहीं देखा जाता

 

कितने तूफ़ान दिल में समेटे खड़ा हूँ मैं,

डर हैं लेहरों में उतरा तो समन्दर ना दहल जाए।

 

बे-इरादा टकरा गए थे लेहरों से हम,

समन्दर ने कसम खा ली हमे डुबोने की

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

किसी की मस्त निगाहों में डूब जा गालिब

बहुत ही हंसी समन्दर है खुदकुशी के लिए!

 

उसके रुखसार पे इक अश्क की आवारागर्दी

हमने याकूत के सीने पे समन्दर देखा!

 

आग में डाल या समन्दर मे

आग तेरी हैं बेङियां तेरी!

 

बहते दरिया में बे सूद है गौहर की तलाश

अब सदफ दिल के समंदर में उतारे जायें!

 

प्यार इक बहता दरिया है

झील नहीं कि जिसको किनारे बाँधके बैठे रहते हैं

सागर भी नहीं कि जिसका किनारा नहीं होता

बस दरिया है,बह जाता है..

गुलज़ार

 

कोई अपनी ही नजर से तो हमें देखेगा,

एक कतरे को समन्दर नजर आयें कैसे.!!

 

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

प्यार छिपा है ख़त में इतना

जितने सागर में मोती

चूम ही लेता हाथ तुम्हारा

पास जो मेरे तुम होती

-इंदीवर

 

मैंने समय से रोक के

तेरा पता पुछा है

नीली नदी से कह के

सागर तले ढूंढा है…(1/1)

-गुलज़ार

 

मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

इसी सियाह समंदर से नूर निकलेगा

 

ऐ ख़ुदा रेत के सहरा को समंदर कर दे

या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे

 

एक दिल है कि जो प्यासा है समंदर की तरह

दो निगाहें जो घटाओं के सिवा कुछ भी नहीं.!!

 

एक समंदर जो मेरे काबू में है

और इक कतरा है जो संभलता नही,

एक जिंदगी है जो तुम्हारे बगैर बितानी है

और इक लमहा है जो गुजरता नहीं ।

 

 

Samandar Shayari in Hindi समन्दर पर शायरी

ऐ ख़ुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे

या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे

 

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

मै हि कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा

 

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3 Responses

  1. Amir chaudhary says:

    I like it

  2. Amir chaudhary says:

    Supar hit

  3. जिस प्रकार खिंची हुही लकीर को सुमंदर अपने पानी के बहाव से मिटाकर चला जाता हे,
    उसी प्रकार अपने प्यार को सुमंदर के पास लाओ गे तो प्यार में पड़ी हर दरार को वो अपने लहरो के सात ले जाये गा
    प्यार करने वालो को सुमंदर कहा जाता हे
    क्योंकी प्यार का सुमंदर बहुत गहरा हो ता है……..!!!

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