शनी के चन्द्रमा टाइटन के समुद्र में जीवन पनप सकता है!

टाइटन के एलियन जीव को छूते ही वह भाँप बन जायेगा.  

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सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा चंद्रमा है टाइटन

शनि ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा का नाम टाइटन है, यह एक बर्फीली दुनिया है, जोकि घने बादलों से घिरी हुई है, आकार की दृष्टि से टाइटन हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है, केवल बृहस्पति ग्रह का गेनिमिड उपग्रह ही इससे बड़ा है,  गेनिमिड, टाइटन से सिर्फ 2% ही बड़ा है, टाइटन पृथ्वी के चंद्रमा से बड़ा है यहां तक की यह सबसे छोटे ग्रह बुध से भी बड़ा है.

पृथ्वी के आलावा केवल टाइटन पर ही द्रव्य मौजूद है!

सौरमंडल में केवल इसी चंद्रमा पर वायुमंडल विद्यमान है, तथा पृथ्वी के अलावा केवल टाइटन पर ही समुद्र, झीलें और नदियां हैं, यह बात टाइटन को पूरे सौरमंडल में सबसे अनोखी बनाती है, पृथ्वी की तरह ही टाइटन के वातावरण में भी नाइट्रोजन प्रमुख तत्व है तथा कुछ मात्रा में मीथेन गैस भी विद्यमान है.

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जिस प्रकार पृथ्वी पर जल चक्र है, पानी वाष्पीकृत हो कर आसमान में चला जाता है तथा फिर बारिश के रूप में  जमीन पर बरसता है, जिससे झीलें, तालाब, नदियां बनती है तथा यह पानी बहकर पुनः समुद्र में चला जाता है, इस तरह जल चक्र चलता रहता है, हमारे सौरमंडल में केवल टाइटन पर ही इस प्रकार का एक द्रव चक्र मौजूद है, टाइटन पर भी बारिश होती है, और द्रव टाइटन पर झीलें, तालाब और नदियां बनाता है, यह द्रव्य वाष्पीकृत होकर बादलों का रूप धारण कर लेता है.

टाइटन का आकार और सूर्य से दूरी

टाइटन का व्यास 2575 किलोमीटर है तथा  यह पृथ्वी के चंद्रमा से 50% बड़ा है, टाइटन शनि ग्रह से 759000 मील की दूरी पर रह कर इसका चक्कर लगाता है तथा टाइटन सूर्य से 1.41 बिलियन किलोमीटर दूर स्थित है, सूर्य की किरणों को टाइटन तक पहुंचने में 80 मिनट का समय लगता है जबकि पृथ्वी पर यह 8 मिनट में ही पहुंच जाती है,  टाइटन पर सूर्य की किरणें पृथ्वी की तुलना में सौ गुनी कम ऊर्जा प्रदान करती है जिससे वहां भयानक ठंड होती है.

टाइटन पर दिन, वर्ष और मौसम

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टाइटन अपने ग्रह शनि का एक चक्कर लगाने में 15 दिन और 22 घंटे का समय लगता है पृथ्वी के चंद्रमा के समान ही टाइटन का केवल एक हिस्सा ही शनी ग्रह के सामने रहता है जैसा कि पृथ्वी के चंद्रमा एक ही हिस्सा सामने रहता था दूसरा हिस्सा हमेशा पृथ्वी से दूसरी और रहता है और हमें दिखाई नहीं देता, इस घटना को सिंक्रोनस रोटेशन कहते हैं टाइटन पर 1 वर्ष प्रथ्वी के 29 वर्षों के बराबर होता है. टाइटन पर एक मौसम 7 वर्ष तक रहता है उसके बाद दूसरा मौसम प्रारंभ होता है.

टाइटन की  सतह बदलती रहती है

पूरे सौरमंडल में केवल टाइटन की सतह ही पृथ्वी से मिलती जुलती है,  टाइटन पर बहुत ही कम तापमान होता है जो की – 179 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, ऐसे में पानी जमकर बर्फ  की चट्टाने बन जाता है, इसकी सतह पर लिक्विड मीथेन और एथेन गैसे नदियों में बहती हैं और तालाब और झीलों का निर्माण करती हैं, सौर मंडल में किसी और ग्रह  या उपग्रह पर इस तरह की नदिया नहीं पाई जाती.

टाइटन की सतह पर काले रंग के रेत के टीले भी पाए जाते हैं जो कि हाइड्रोकार्बन से बने हुए हैं, टाइटन की सतह पर हमें उल्का पिंडों के टकराने से बने क्रेटर नहीं दिखाई देते हैं, इससे यह साबित होता है कि इसकी सतह पर बदलाव होते रहते हैं तथा यह नया रूप धारण करती रहती है  जैसे कि पृथ्वी पर बनने वाले गड्ढे और क्रेटर हवा और पानी के द्वारा मिट जाते हैं. शनि के गुरुत्वाकर्षण से टाइटन की बर्फीली सतह के नीचे एक समुद्र का निर्माण हो गया है.

टाइटन ग्रह का वातावरण नाइट्रोजन और मीथेन का बना है

हमारे सौरमंडल में कुल 150 चंद्रमा है लेकिन टाइटन उनमें से सबसे अलग है केवल टाइटन पर ही एक मोटा वातावरण है यह इतना घना है कि इसकी सतह पर वायुमंडल का दबाव पृथ्वी की तुलना में 7% ज्यादा है, टाइटन के वातावरण में मुख्यतः नाइट्रोजन गैस 95% नाइट्रोजन गैस तथा 5% मीथेन गैस है तथा कुछ कार्बनिक गेसे भी मौजूद है सूर्य से आने वाली रेडियोएक्टिव किरणें, अल्ट्रावायलेट किरणें मीथेन और नाइट्रोजन से किर्या कर कई प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करती है, इससे एक नारंगी रंग के बादलों का निर्माण होता है.

टाइटन पर जीवन की संभावना प्रबल है

कैसीनी अंतरिक्ष यान द्वारा भेजे गए कई गुरुत्वाकर्षण के आंकड़े हमें यह बताते हैं कि टाइटन की बर्फीली सतह के नीचे एक महासागर मौजूद है इसे अंडरग्राउंड ओशियन कहते हैं, यह महासागर पानी नमक तथा अमोनिया का बना हो सकता है, यूरोपियन स्पेस एजेंसी का अंतरिक्ष प्रोब ह्युजेन्न  जो कि सन 2005 पर टाइटन की सतह पर उतरा था उससे प्राप्त आंकड़ों से भी वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि टाइटन की सतह से 35 किलोमीटर नीचे एक महासागर विद्यमान है, इससे वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि टाइटन पर जीवन की संभावना है, पर यहाँ परिस्थितियाँ जीवन के लिए थोड़ी कठिन है.

हमारे छूने से ही  पिघल जायेंगे टाइटन के एलियन

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टाइटन पर तापमान हमेशा – 170 डिग्री के नीचे ही रहता है, सोचिए अगर कोई टाइटन पर एलियन लाइफ हो तो मनुष्य के छूते ही वह एलियन वाष्पीकृत हो जाएगा क्योंकि हमारे शरीर का तापमान 90 डिग्री सेल्सियस होता है जोकि टाइटन के एलियन के लिए भयानक गर्म तापमान है, क्योंकि वह एलियन मायनस 170 डिग्री पर रहने का आदी है, अगर कोई एलियन सभ्यता टाइटन के महासागर में मौजूद है तब भी वह अपना अंतरिक्ष यान लेकर पृथ्वी की तरफ नहीं आ सकते हैं  क्योंकि पृथ्वी तक आने से पहले ही उनका अंतरिक्ष यान पिघल जाएगा.

नासा का ड्रैगन फ्लाई ड्रोन टाइटन पर उड़ेगा 

नासा निकट भविष्य में एक उड़ने वाला ड्रोन रोवर टाइटन की सतह पर उतरने की योजना पर कार्य कर रहा है, इसे ड्रैगन फ्लाई ड्रोन का नाम दिया गया है, ये ड्रोन जब टाइटन की सतह पर उड़ेगा और उसकी तस्वीरें पृथ्वी पर भेजेगा तब टाइटन के कई रहस्य से पर्दा उठ सकेगा.

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Taj Mohammed Sheikh

हेलो दोस्तों, में एक Freelance Blogger हूँ , नेट इन हिंदी .com वेबसाईट बनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा में मनोरंजक और उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करना है, यहाँ आपको विज्ञान, सेहत, शायरी, प्रेरक कहानिया, सुविचार और अन्य विषयों पर अच्छे लेख पढ़ने को मिलते रहेंगे. धन्यवाद!

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