Shabnam Shayari in Hindi शबनम हिंदी शायरी - Net In Hindi.com

Shabnam Shayari in Hindi शबनम हिंदी शायरी

Shabnam Shayari in Hindi  शबनम हिंदी शायरी

Shabnam Shayari in Hindi शबनम हिंदी शायरी

Shabnam Shayari in Hindi

शबनम हिंदी शायरी

 

Hindi shayari collection on Shabnam (dew drops)

शबनम पर हिंदी शायरी

List of all Hindi Font Shayari

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परतवे-ख़ुल्द से है शबनम को फ़ना की तालीम

में भी हूँ एक इनायत की नज़र होने तक

~ग़ालिब

***

उनके रुखसार पर ढलकते हुए आँसू तौबा,

मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा !!

***

तेरी दीद से सिवा है तेरे शौक़ में बहारां

वो चमन जहां गिरी है तेरे गेसुओं की शबनम !!

~Faiz

***

गुलाबो कि तरह दिल अपना शबनम में भिगोते है,

मोहब्बत करने वाले खुबसूरत लोग होते है !! -बशीर बद्र

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

चमन में शब को जो शोख़ बेनक़ाब आया,

यक़ीन हो गया शबनम को आफ़ताब आया !!

***

वो दिल भी जलाते हैं रख़ देते हैं मरहम भी,

क्या तुर्फ़ा तबीअत है शोला भी हैं शबनम भी.!!

***

ज़ुल्मत-ए-शाम से भी नूर-ए-सहर पैदा कर

क़ल्ब शबनम का सितारों की नज़र पैदा कर(१)

~फ़ना निज़ामी

***

कितने पलकों की नमी माँग के लाई होगी

प्यास तब फूलों की शबनम ने बुझाई होगी.!!

***

यही ज़िद है तो फिर हिस्सा सभी अपना उठाते हैं

अगर शबनम तुम्हारी है तो हम शोला उठाते हैं.!!

*** Shabnam Shayari in Hindi

तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ,

अब के किसी बे-नाम से मौसम की तरह आ ।

***

दुनिया क्या है एक वहम है

शबनम में मोती होने का

और जिंदगानी है जैसे

पीतल पर पानी सोने का

**

उलझे हुए हैं पलकों में शबनम के चँद कतरे

बिछङा था कोई रात को,ख्वाबों के सफ़र में

***

शबनम का क़तरा कभी , और कभी शमशीर !…

समझ न पायी आँख भी , आंसू की तासीर !!…

*** Shabnam Shayari in Hindi

बाग़-ए-दुनिया में यूँ ही रो हँस के काटूँ चार दिन

ज़िंदगी है शबनम ओ गुल की तरह फ़ानी मेरी

~महरूम

***

हो जाते हो बरहम भी, बन जाते हो हमदम भी

ऐ साकी-ए-मयखाना, शोला भी हो, शबनम भी

***

कभी आग तो कभी शबनम है…

मेरी कलम भी मुझसे वाकिफ नहीं है …

***

फूल की आँख में शबनम क्यों है

सब हमारी ही खता जैसे

~बशीर_बद्र

हमारी प्यास का सबसे अलग अन्दाज है “राशीद”

कभी दरीया को ठुकराते है कभी शबनम भी पिते है

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

युही जब सर्द मौसम में

तन्हाई सताती है

झुलस जाते है अन्दर तक

छू जाए जो शबनम भी …………..

***

ख्वाब चुभेंगे तो आँखे मेरी रोलेगी

दर्द की स्याही में पलके डुबा लेगी,

काश जरे जरे से शबनम हो जाऊँ

मेरी प्यास पे सहेरा की रेत बोलेगी ।।

***

गाह पानी, गाह शबनम और कभी खूँनाब से

एक ही था दाग सीने में जिसे धोता रहा

~बशीर_बद्र

***

बढ़ी धुंध होने लगी, शबनम की बरसात ।

फसलों को मिलने लगी,कुदरत की सौगात ।।

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

ले के शबनम का मुकद्दर आये थे दुनिया में हम,

गुलशने – हस्ती में रो – रोकर गुजारी जिन्दगी।

***

नजर से जो नजर मिली यूँ नजर मिलकर झुक गई,

तेरी पलकों से गिरके शबनम मेरी पलकों पे रुक गई

***

फूलों को आए जिस दम शबनम वज़ू कराने,

रोना मेरा वज़ू हो , नाला मेरी दुआ हो!

~इक़बाल

चटक रही हैं कलियाँ इलाही कुछ इस अदा से

शबनम के मोतियों का हार गले में डाले

***

शबनम की तरह रोते रहे याद में तेरी,

सहरा की तरह शख्स जो सीने में छुपा था..

***

ख्वाब चुभेंगे तो आँखे मेरी रोलेगी

दर्द की स्याही में पलके डुबालेगी ।।

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

गुलों कि तरह हम ने ज़िंदगी को इस कदर जाना,

शबनम हूँ सुर्ख़ फूल पे बिखरा हुआ हूँ मै ।

~बशीर_बद्र

***

सूरज की रिफाकात में चमक उठता है चेहरा

शबनम की तरह से कोई सादा नहीं होता

***

पलकों पे शबनम लिखते हैं,

जब आँखों का ग़म लिखते हैं,

गीत ग़ज़ल सब झूठी बातें,

ज़ख़्मों पे मरहम लिखते हैं,

***

शबनम हूँ सुर्ख़ फूल पे बिखरा हुआ हूँ मै

दिल मोम और धूप में बैठा हुआ हूँ मै

***

भर जाएँगे आँखों में आँचल से बँधे बादल

याद आएगा जब गुल पर शबनम का बिखर जाना।।।

***

गुलाबो कि तरह दिल अपना शबनम में भिगोते है,

मोहब्बत करने वाले खुबसूरत लोग होते है !!

***

खिड़की पे चिपकी पानी की बूँदें ,

सरक कर दिल पे गईं जम !

कभी करें आँखों को नम !

कभी ज़ख़्मों को शबनम !

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

क्यूँ पोंछते हो रुखसार से अरक को बार बार ,

शबनम के क़त्रे से गुलों में और निखार आता है !

***

रात में रोना शबनम का बिखर जाना

खैर सुबह होगी आँखों में चमक होगी।

***

निखर गए हैं पसीने में भीग कर आरिज़

गुलों ने और भी शबनम से ताज़गी पाई ❤

***

हम रोने पे आ जाएँ तो दरिया ही बहा दें

शबनम की तरह से हमें रोना नहीं आता

***

“आओ कि शबनम की बूँदें बरसती हैं,

मौसम इशारा है हाँ, अब तो चले आओ…”

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

यूँ किसी की आँखों में सुबह तक अभी थे हम

जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों मे

~बशीर_बद्र

***

हर आरजू फिसल गयी शबनम की मानिन्द

फिर भी उम्मीद जगी है सूरज की तरह।

 

वो याद आया कुछ यूँ

के लौट आये सब सिलसिले

ठंडी हवा…!!!

शबनम..!!!

और दिसंबर की धुंद…!!!

***

वो दिल भी जलाते हैं रख देते हैं मरहम भी

क्या तुर्फ़ा तबीअत है शोला भी हैं शबनम भी

***

एक अजीब ठंडक है, उस के नरम लहजे में..

लफ्ज़ लफ्ज़ शबनम है, बात बात प्यारी है

****

शफ़क़ हो ,फूल हो,शबनम हो, कि आफ़ताब हो तुम,

नही जवाब तुम्हारा कि लाज़वाब हो तुम ,,,,,,

**** Shabnam Shayari in Hindi

 

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

आँखें मेरी भीगी हुईं चेहरा तेरा उतरा हुआ।।

***

रात यूँ ही थम जाएगी, रुत ये हसीन मुसकाएगी

बँधी कली खिल जाएगी, और शबनम शरमाएगी

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“कितने दिनों के प्यासे होंगे, यारों सोचो तो;

शबनम का क़तरा भी जिनको दरिया लगता है!”

***

आई है सुबह कुछ भी अहवाले शब कहती ही नहीं

शबनम ही शबनम हर तरफ मुझको नज़र आती है।

***

फूल शबनम मे डूब जाते है जख्म मरहम मे डूब जाते है

जब कोई सहारा नही मिलता तो हम तेरे गम मे डूब जाते है

 

चमन के गुंचे-गुंचे से ये कहकर उड़ गयी शबनम..

जो हँसता है खुदी पर अपनी,वो बरबाद होता है…||

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

रात हो तो अँधेरे का बस भरम हो

क्या करूँ फिर न कभी शबनम हो

ख्वाब से लम्हे हों और इक नशा हो

आँखों में सुबह हो न कभी नम हो।

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जलने वाले जलते है शोलों में वो आगे नहीं

शबनम में है शोलों की जुम्बिश , उस आग पे ही रोना आया है!!

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रातों के अँधेरे और सभी गर्दिशें

काफी है हर सुबह भुला देने को

मेरी ज़िन्दगी और उसकी उम्मीदें

काफी है शबनम को सुखा देने को।

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कतरा अश्कों का, बेबसी है किसी मजलूम की

लोग इन्हें यूँ ही शबनम कहा करते हैं…

***

सूखे पत्तों पर जलती शबनम के क़तरे,

ठंडा सूरज सहमा-सहमा देख रहा था!

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जो फूलों में ना मिले वोह चेहरा

मिल जाये शबनम की बूँदों में कभी,,

***

मैंने खुश्बू की तरह तुझ को किया है महसूस

दिल ने छेड़ा है तेरी याद को शबनम की तरह

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

तुम्हारी याद में शबनम रात भर

बरसती रही

सर्द ठंडी रात थी

मैं अलाव में जलती रही

सूखा बदन सुलगता रहा

रूह तपती रही   ।।

***

 

तुझे हम दोपहर की धूप में देखेंगे ऐ ग़ुंचे

अभी शबनम के रोने पर हँसी मालूम होती है

~शफ़ीक़_जौनपुरी

***

जुगनू शबनम तारें बनकर मेरे आँसू ढूंढ रहे हैं

आनेवाले तू ही बता दे मेरे हमदम कैसे हैं ,,

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याद-ए-माज़ी की शबनम बरसती रही,

और मैं देर तक भीगता ही रहा…!!!

***

ऐ दौलत-ए-सुकूँ के तलब-गार देखना

शबनम से जल गया है गुलिस्ताँ कभी कभी

~Qabil_Ajmeri

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शबनम की बूंदों की तरह बरसते हो जब इन लबों पर…

कैसे कहूं,कि ये बेमौसम बरसात मुझे अच्छी लगती है…!

***

शबनम ने रो के जी जरा हल्का तो कर लिया

गम उसका पूछिए जो न आंसू बहा सके

~ सलाम संदेलबी

*** Shabnam Shayari in Hindi

 

फूलों से हवा भी कभी घबराई है देखो

गुंचों से भी शबनम कभी कतराई है देखो

 

तेरे फिराक़ में जले तो रूह को ठंडक भी मिली

उफ्फ ये भी क्या आग़ है कोई शबनम की तरह

~आतिशमिज़ाज

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