Three Interesting and Funny Stories of Albert Einstein In Hindi

Stories of Albert Einstein In Hindi2

Stories of Albert Einstein In Hindi

Three Interesting and Funny Stories of Albert Einstein In Hindi

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के तीन मनोरंजक किस्से!

समय की सापेक्षिता

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से अकसर सापेक्षिता के सामान्य सिद्धांत को समझाने के लिए कहा जाता था, और आइन्स्टीन उसकी व्याख्या इस प्रकार करते थे

“अपना हाथ एक मिनट तक गर्म स्टोव पर रखकर देखिये और आपको यही एक मिनट एक घंटा लगेगा!”

“किसी सुन्दर लड़की के सामने बैठकर एक घंटा बिताइए और यही एक घंटा आप को एक मिनिट के बराबर लगेगा!”

“यही समय की सापेक्षिता है!” ।

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घर का पता

अल्बर्ट आइन्स्टीन जब प्रिंसटन यूनीवरसिटी में कम करते थे, तब एक दिन वापस घर जाते वक़्त वो अपने खुद के घर का पता भूल गए! टेक्सी का ड्रायवर उन्हें नहीं पहचानता था।

आइन्स्टीन ने ड्रायवर से पुछा “ क्या तुम वैज्ञानिक आइन्स्टीन का घर जानते हो?”

ड्रायवर ने कहा “आइन्स्टीन का घर कोन नहीं जानता, प्रिंसटन के बच्चे बच्चे को उनका घर पता है ! क्या आप उनसे मिलने जा रहें हैं”

आइन्स्टीन ने कहा “नहीं! में खुद आइन्स्टीन हूँ!, में अपने घर का पता भूल गया हूँ”

हेरान टेक्सी ड्रायवर ने उन्हें उनके घर पहुंचा दिया और कोई किराया भी नहीं लिया!

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आइन्स्टीन ट्रेन का सफ़र  !

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आइन्स्टीन एक बार ट्रेन से सफ़र कर रहे थे! वे प्रिंसटन शहर से ट्रेन में बैठे थे, जब टिकिट चेकर अन्य यात्रियों के टिकट चेक करता हुआ आइन्स्टीन के पास पहुंचा तो आइन्स्टीन ने अपने शर्ट की जेब में टिकट खोजा पर उन्हें टिकिट नहीं मिला, उन्होंने अपनी पेंट की दोनों जेबों में टिकट खोजा, पर उन्हें वह वहां भी नहीं मिला! फिर उन्होंने उसे अपने ब्रीफकेस में ढूंढा, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला, तब वे बगल की सीट पर टिकिट खोजने लगे!

यह देखकर टिकिट चेकर ने कहा “ डॉ. आइन्स्टीन, में जानता हूँ आप कौन हैं, मुझे पता है आपने टिकिट ख़रीदा होगा! अब उसकी चिंता मत कीजिये!

आइन्स्टीन ने मुस्कुरा कर सर हिला दिया।

टिकिट चेकर आगे बढ़ गया, कुछ देर बाद जब उसने मुड़कर आइन्स्टीन की तरफ देखा तब आइन्स्टीन अपनी सीट के नीचे टिकिट तलाश रहे थे!

टिकिट चेकर उनके पास आया और कहा “डॉ. आइन्स्टीन, चिंता मत कीजिये, में जानता हूँ की आप कोन हैं, कोई समस्या नहीं है” ।

आइन्स्टीन ने उसकी तरफ देखा और कहा “यंग मेन! में भी जानता हूँ की में कौन हूँ, पर में यह नहीं जानता की में कहाँ जा रहा हूँ, इसीलिए में अपना टिकिट खोज रहा हूँ”

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अकसर महान लोग अपने काम में इतना डूब जातें हैं की उन्हें अपनी ज़िन्दगी की सामान्य बातों की भी परवाह नहीं रहती।

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