Welcome Shayari Swagat Shayari New 2019

Welcome Shayari Swagat Shayari New 2019

Welcome Shayari स्वागत शायरी

Welcome Shayari Swagat Shayari :- दोस्तों शायरी के इस खास पेज पर हम आपके लिए आज स्वागत शायरी, वेलकम शायरी पेश कर रहे हैं, आप अक्सर अपने घर पर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बुलाते होंगे…मेहमान नवाजी करते होंगे ….या आप अपने बर्थडे या और किसी मौके पर अपने दोस्तों को बुलाने के लिए निमंत्रण भेजते होंगे ऐसे ही मौके पर आप अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए इन स्वागत शायरी welcome शायरी का इस्तेमाल कर सकते हैं..आप इन्हें आमद शायरी, खुश आमदीद शायरी, आपके आने से शायरी, आप आये शायरी या मेहमान शायरी कुछ भी नाम दे सकते हैं.

अपने मेहमानों को बुलाने के लिए आप इन स्वागत शायरी और वेलकम शायरी सन्देश भेज सकते हैं.

ये दो लाइनों की स्वागत शायरी और वेलकम शायरी इंतनी खुबसूरत है की इसमें सभी भावनाओं का संगम हैं, आपके इस स्वागत सन्देश शायरी या वेलकम शायरी को पढ़कर ही आपके मेहमान खुश हो जायेंगे.

अगर आप को यह वेलकम शायरी अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर अवश्य करें …

 

सभी hindi शायरी की लिस्ट यहाँ हैं Hindi Shayari

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मतलब तिरी आमद से है दरमाँ से नहीं है

‘हसरत’ की क़सम दिल ही दुखाने के लिए आ

~HasratJaipuri

 

मुबारक शाम की आमद मुबारक

यह किसी की याद ले कर आ रही है

~ज़िया_ज़मीर

 

ये किस बहिश्त-शमाइल की आमद आमद है

कि ग़ैर-ए-जल्वा-ए-गुल रहगुज़र में ख़ाक नहीं

 

आमद है किसी की कि गया कोई इधर से,

क्यूँ सब तरफ़-ए-राहगुज़र देख रहे हैं !

 

आमद से पहले तेरी सजाते कहाँ से फूल,

मौसम बहार का तो तेरे साथ आया है !!

 

उनकी वो आमद-आमद अपना यहाँ ये आलम,

इक रंग जा रहा है, इक रंग आ रहा है !!

 

आप आये तो ख़याल-ए-दिल-ए-नाशाद आया

कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया

 

कभी दिल कभी धड़कन कभी नज़रें कभी लब

हर चीज मुस्कुराने लग जाती है आपके आने की खबर से…

 

इंतज़ार  है हमे  आपके  आने  का

वो नज़रे  मिला  के नज़रे  चुराने  का

मत  पूछ  ए_सनम  दिल का आलम क्या  है

इंतज़ार  है  बस तुझमे  ~सिमट  जाने  का

 

यू तो बंजर सा था मेरा आशियाँ

महफ़िल आपके आने से सजी

Welcome Shayari Swagat Shayari for Friends

दिल को था आपका बेसबरी से इंतजार!

पलके भी थी आपकी एक झलक को बेकरार!

आपके आने से आयी है कुछ ऐसी बहार!

कि दिल बस मांगे आपके लिये खुशियाँ बेशुमार!

 

हर वक्त आपके आने की आस रहती है

 हर पल आपसे मिलने की प्यास रहती है

 सब कुछ है। बस यहाँ आप नही

 इसलिए शायद ये जिंदगी उदास रहती है)

 

वफाओं में मेरी इतना असर आये

जिन्हें ढूंढती है नजरें

वह नजर आये

हम आ जायेंगे पलक झुकने से पहले

आपने याद किया ये खबर आये

 

हसरतों से आपकी राह सजा देंगे

कोई फूल नहीं आज मेरे दामन में

लेकिन आपके आने पर पलकें बिछा देंगे

 

 

दिलको है बेसबरी से इंतजार

निगाहे भी है

आपकी झलक को बेकरार

आपके आने‍से आयेगी ऐसी बहार

कि छायेगी सबके

दिलोमे खुशिया बेशुमार

 

हर कोशिश जारी मेरी तुम्हें मनाने की

रक्खी तैयारी लूट जाने की

अब देर है बस आपके आने की….

 

आपके आने से हुई है ये जिन्दगी रंगीन

पाकर आपका नूरानी दीदार

हर सुबह शाम हो गई है हसीन

 

आपके आने से जिदंगी खूबसूरत है,

हर कदम पर हमको आपकी जरूरत है

 

आपके आने की खुशी कैसे करूं मैं ब्यां,

बस इतना जान लो अब रोशन है मेरा सारा जहां

 

मस्त मस्त मयकदा है, मस्तियों की शाम है,

 आपके आने से हुई खुशियों की बरसात है ।।

 

आपके आने से आई जो खुशिया

कैसे उन्हे हम बताए

हम हर्शाए, हम इतराए

मिलकर सभी गुनगुनाए

Welcome Shayari Swagat Shayari for all

आपके आने की खबर से रात भर घर का दरवाजा खुला रखा,

यादो ने आपकी इतना बेचैन किया,

न नींद आयी, कभी तकिया इधर, कभी उधर रखा

 

मौत का आना तो तय है मौत आएगी मगर,

आपके आने से थोड़ी ज़िन्दगी बढ़ जाएगी !

 

आपके आने से जिंदगी खूबसूरत है,

दिल में बसाई है जो वह आपकी ही सूरत है,

Welcome Shayari Swagat Shayari
Welcome Shayari Swagat Shayari

क्या बतायें कि क्या होता है आपके आने से

बहार भी आ जाती है आपके आने से

फूल भी खिल जाते हैं आपकी आहट से

हर सुबह होती है आपके ही मुस्कुराने से

 

क्या मांगू खुदा से गुरुवर तुम्हे पाने के बाद,

किसका करू इंतजार जिंदगी में  आपके आने के बाद

 

हो कर खफा न प्यारमें,कांटे बिछाइये

पहलू में बैठ प्यार के,नगमे सुनाइये

हम मुन्तजिर हैं आपके आने के आजभी,इस साजेदिल को छेडिये,कुछ गुनगुनाइये

 

आपके आने से आज ये शाम खास हो गयी..

सारे दिन की बोरियत झक्क्कास हो गयी.

 

आपके आने का शुक्रिया ,

कुछ पल साथ बिताने का शुक्रिया….

सपने दिखाने का शुक्रिया,

और उनहे  तोड़ के चले जानेका भी शुक्रिया…

 

आपका आना, बहारों का आना !

आपका जाना, गुलशन का उजड़ जाना !

 

हमने कभी दोस्ती को जाना न होता,

अगर हमारी ज़िन्दगी में आपका आना न होता,

युही अकेले गुज़ार देते ज़िन्दगी को,

अगर आपको अपना दोस्त माना न होता…

 

इंतज़ार मेरी 🗡उम्र से लंबा हो शायद,

आपका आना  इस मर्ज़ की दवा हो शायद।

 

आपका आना…दिल धडकाना …

मेहंदी लगा यूँ शर्माना…

प्यार आ गया रे…

प्यार आ गया..

 

आपसे होती मुनव्वर,मेरी कायनात है

आप हों गर साथ तो, फिर रात भी कब रात है

आपका आना हमारे वास्ते सौगात है 

आज या तो ईद है,या फिर शबे-बारात है

 

दोस्तों के बिना यह शाम अधूरी है ,

इसलिए आपका आना जरूरी है |

Welcome Shayari 

हमसे मिलने का कभी तो तुम इरादा रखो

मुहब्बत से मुहब्बत का मिलन सादा रखो

चले आओ वक्त से वक़्त चुराकर ज़रा सा

तुम आओगे ज़रुर… हमसे ये वादा करो।

 

काश…. हो कुछ एेसा इत्तेफाक….!!

तुम रास्ता भूलो और मुझ तक चले आओ….!!

 

लोग देखेगे हमे ~मोहब्बत करते तो सौ बाते बना देंगे।

तुम  यू मेरे दिल मे चले आओ कि किसी को आहट भी ना हो।

 

चले आओ ना अब, कहाँ गुम हो,,

 

कितनी बार कहूँ ,मेरे दर्द की दवा तुम हो।

 

कब कहा मैंने कि मुझको…….चाँद लाकर दो..

तुम ख़ुद चले आओ तो…दीदार-ए-चाँद पूरा हो…

 

दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है

चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है

~नुशूर वाहिदी –

 

संभाले नहीं संभलता है दिल,

मोहब्बत की तपिश से न जलाओ,

इश्क तलबगार है तुम्हारा चले आओ,

अब ज़माने के बहाने न बनाओ।

 

खामोशी ने मेरी पुकारा है तुम्हें…….!!

कोई हसीं शाम बनकर ही चले आओ….!!

 

लोग देखेंगे तो अफसाना बना डालेंगे|

यूँ मेरे दिल में चले आओ के आहट भी न हो।।

 

सावन के झूले पड़े,तुम चले आओ,

तुम चले आओ, तुम चले आओ…

 

बहुत आरजू है… इन आंखो को… तेरा ख्वाब देखने की,

कभी तो… इनका मान रखने… सपनो मे चले आओ…!

 

बहा ले जाती है तुम्हारी

याद मुझे कहाँ से कहाँ तक

कभी तुम भी चले आओ

मेरे ठिकाने तक….

welcome shayari swagat shayari 2
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वो मेहमाँ रहे भी तो कब तक हमारे

हुयी शम्मा गुल और डूबे सितारे,

‘क़मर’ इस क़दर उन को जल्दी थी घर की

वो घर चल दिये चाँदनी ढलते ढलते !! -क़मर जलालवी

 

मुद्दत हुई है यार को मेहमाँ किये हुए,

जोश-ए-क़दह से बज़्म-ए-चिराग़ां किये हुए !!

 

बहुत से लोग थे मेहमान मेरे घर लेकिन

वो जानता था कि है एहतिमाम किस के लिए

~परवीन_शाकिर

 

दिल में फिर वस्ल के अरमान चले आते हैं

मेरे रूठे हुए मेहमान चले आते हैं

~बेख़ुद देहलवी

 

हम बुलाते वो तशरीफ़ लाते रहे

ख़्वाब में ये करामात होती रही

 

कल रात दिखा के ख़्वाब-ए-तरब जो सेज को सूना छोड़ गया

हर सिलवट से फिर आज उसी मेहमान की ख़ुश्बू आती है ।

-कतील शिफ़ाई

 

लाख परायोंसे परिचित है

मेल-मोहब्बत का अभिनय है,

जिनके बिन जग सूना सूना

मन के वे मेहमान कहाँ हैं?

-शैलेंद्र

 

कब वो आएँगे इलाही मिरे मेहमाँ हो कर

कौन दिन कौन बरस कौन महीना होगा

 

मैं किस तरह उसे मेहमान-सा विदा करता

कि मेरे घर तो उसे बार-बार आना था…!

 

काफ़ी नहीं ख़ुतूत किसी बात के लिए

तशरीफ़ लाइएगा मुलाक़ात के लिए

 

इंतेज़ार है आपका आज भी

ज़रा दस्तक तो दीजिए

वजह हो या बेवजह

ज़रा हमारे dm में तशरीफ़ तो लाइये

 

जो कुछ हो सुनाना उसे बेशक़ सुनाइये

तकरीर ही करनी हो कहीं और जाइये

 

याँ महफ़िले-सुखन को सुखनवर की है तलाश

गर शौक आपको भी है तशरीफ़ लाइये।

Swagat Shayari

बहोत कर चुके तस्वीरों में दीदार

हो सके तो अब हुजूर रूबरू तशरीफ़ भी लाइये

 

शोख़ी के रंग शौक़ के अरमाँ लिए हुए,

बाद-ए-ख़िज़ाँ में मुंतज़िर*-ए-बहार गुलमोहर !!

 

साल, पर साल, और फिर इस साल

मुंतज़िर हम थे मुंतज़िर हम हैं

~शमीम अब्बास

 

कहाँ ख़्वाहिशों की ज़मीन पर झुकते हैं रोज़ आसमाँ,

मुंतज़िर* हैं ये हादसे भी गिरते सितारों की चाल के !

 

अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहाँ

शाम आ गई है लौट के घर जाएँ हम तो क्या

 

दिल-ए-मुंतज़िर के आगे ख़िज़ाँ की बिसात क्या,

हसरत ही से गुलज़ार है वीराना किसी का !

 

सारे मौसम थे ख़फा अब सर पे है अब्र-ए-रवाँ*,

उठ निगाह-ए-मुंतज़िर ये है वक़्त इंतिक़ाम^ का !

 

निगाहें मुंतज़िर हैं किस की दिल को जुस्तुजू क्या है

मुझे ख़ुद भी नहीं मालूम मेरी आरज़ू क्या है

~अख़्तर सईद ख़ान

 

मुंतज़िर जिसके लिए हम हैं कई सदियों से

जाने किस दौर में वो शख़्स हमारा होगा

 

मुंतज़िर कौन है किस का ये उसे क्या मालूम

उस की मंज़िल है वही जो भी जहाँ रह जाए

~प्रेम कुमार नज़र

 

अल्लाह बोलते नहीं तो मुस्कुरा ही दो,

मैं कब से मुंतज़िर हूँ तुम्हारे ~जवाब का !! -अंदलीब शादानी

 

हवाएँ ज़ोर की चलती थीं हंगामा बला का था

मैं सन्नाटे का पैकर मुन्तज़िर तेरी सदा का था

 

बंद सीपियों में हूँ मुंतज़िर हूँ बारिश का

मैं तुम्हारी आँखों के पानियों में ज़िंदा हूँ 

 

Welcome Shayari Swagat Shayari Hinglish

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agar aap ko yah velakam shaayari achchhi lage to ise apane doston ke saath sheyar avashy karen …

 

sabhi hindi shaayari ki list yahaan hain hindi shayari

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matalab tiri aamad se hai daramaan se nahin hai

hasarat ki qasam dil hi dukhaane ke lie aa

~hasratjaipuri

 

mubaarak shaam ki aamad mubaarak

yah kisi ki yaad le kar aa rahi hai

~ziya_zamir

 

ye kis bahisht-shamail ki aamad aamad hai

ki gair-e-jalva-e-gul rahaguzar mein khaak nahin

 

aamad hai kisi ki ki gaya koi idhar se,

kyoon sab taraf-e-raahaguzar dekh rahe hain !

 

aamad se pahale teri sajaate kahaan se phool,

mausam bahaar ka to tere saath aaya hai !!

 

unaki vo aamad-aamad apana yahaan ye aalam,

ik rang ja raha hai, ik rang aa raha hai !!

 

aap aaye to khayaal-e-dil-e-naashaad aaya

kitane bhoole hue zakhmon ka pata yaad aaya

 

kabhi dil kabhi dhadakan kabhi nazaren kabhi lab

har chij muskuraane lag jaati hai aapake aane ki khabar se…

 

intazaar  hai hame  aapake  aane  ka

vo nazare  mila  ke nazare  churaane  ka

mat  poochh  e_sanam  dil ka aalam kya  hai

intazaar  hai  bas tujhame  ~simat  jaane  ka

 

yoo to banjar sa tha mera aashiyaan

mahafil aapake aane se saji

 

dil ko tha aapaka besabari se intajaar!

palake bhi thi aapaki ek jhalak ko bekaraar!

aapake aane se aayi hai kuchh aisi bahaar!

ki dil bas maange aapake liye khushiyaan beshumaar!

 

har vakt aapake aane ki aas rahati hai

 har pal aapase milane ki pyaas rahati hai

 sab kuchh hai. bas yahaan aap nahi

 isalie shaayad ye jindagi udaas rahati hai)

 

vaphaon mein meri itana asar aaye

jinhen dhoondhati hai najaren

vah najar aaye

ham aa jaayenge palak jhukane se pahale

aapane yaad kiya ye khabar aaye

 

hasaraton se aapaki raah saja denge

koi phool nahin aaj mere daaman mein

lekin aapake aane par palaken bichha denge

 

 

dilako hai besabari se intajaar

nigaahe bhi hai

aapaki jhalak ko bekaraar

aapake aanese aayegi aisi bahaar

ki chhaayegi sabake

dilome khushiya beshumaar

 

har koshish jaari meri tumhen manaane ki

rakkhi taiyaari loot jaane ki

ab der hai bas aapake aane ki….

 

aapake aane se hui hai ye jindagi rangin

paakar aapaka nooraani didaar

har subah shaam ho gai hai hasin

 

aapake aane se jidangi khoobasoorat hai,

har kadam par hamako aapaki jaroorat hai

 

aapake aane ki khushi kaise karoon main byaan,

bas itana jaan lo ab roshan hai mera saara jahaan

 

mast mast mayakada hai, mastiyon ki shaam hai,

 aapake aane se hui khushiyon ki barasaat hai ..

 

aapake aane se aai jo khushiya

kaise unhe ham batae

ham harshae, ham itarae

milakar sabhi gunagunae

 

aapake aane ki khabar se raat bhar ghar ka daravaaja khula rakha,

yaado ne aapaki itana bechain kiya,

na nind aayi, kabhi takiya idhar, kabhi udhar rakha

 

maut ka aana to tay hai maut aaegi magar,

aapake aane se thodi zindagi badh jaegi !

 

aapake aane se jindagi khoobasoorat hai,

dil mein basai hai jo vah aapaki hi soorat hai,

 

kya bataayen ki kya hota hai aapake aane se

bahaar bhi aa jaati hai aapake aane se

phool bhi khil jaate hain aapaki aahat se

har subah hoti hai aapake hi muskuraane se

 

kya maangoo khuda se guruvar tumhe paane ke baad,

kisaka karoo intajaar jindagi mein  aapake aane ke baad

 

ho kar khapha na pyaaramen,kaante bichhaiye

pahaloo mein baith pyaar ke,nagame sunaiye

ham muntajir hain aapake aane ke aajabhi,is saajedil ko chhediye,kuchh gunagunaiye

 

aapake aane se aaj ye shaam khaas ho gayi..

saare din ki boriyat jhakkkaas ho gayi.

 

aapake aane ka shukriya ,

kuchh pal saath bitaane ka shukriya….

sapane dikhaane ka shukriya,

aur unahe  tod ke chale jaaneka bhi shukriya…

 

aapaka aana, bahaaron ka aana !

aapaka jaana, gulashan ka ujad jaana !

 

hamane kabhi dosti ko jaana na hota,

agar hamaari zindagi mein aapaka aana na hota,

yuhi akele guzaar dete zindagi ko,

agar aapako apana dost maana na hota…

 

intazaar meri 🗡umr se lamba ho shaayad,

aapaka aana  is marz ki dava ho shaayad.

 

aapaka aana…dil dhadakaana …

mehandi laga yoon sharmaana…

pyaar aa gaya re…

pyaar aa gaya..

 

aapase hoti munavvar,meri kaayanaat hai

aap hon gar saath to, phir raat bhi kab raat hai

aapaka aana hamaare vaaste saugaat hai 

aaj ya to id hai,ya phir shabe-baaraat hai

 

doston ke bina yah shaam adhoori hai ,

isalie aapaka aana jaroori hai |

 

hamase milane ka kabhi to tum iraada rakho

muhabbat se muhabbat ka milan saada rakho

chale aao vakt se vaqt churaakar zara sa

tum aaoge zarur… hamase ye vaada karo.

 

kaash…. ho kuchh isa ittephaak….!!

tum raasta bhoolo aur mujh tak chale aao….!!

 

log dekhege hame ~mohabbat karate to sau baate bana denge.

tum  yoo mere dil me chale aao ki kisi ko aahat bhi na ho.

 

chale aao na ab, kahaan gum ho,,

 

kitani baar kahoon ,mere dard ki dava tum ho.

 

kab kaha mainne ki mujhako…….chaand laakar do..

tum khud chale aao to…didaar-e-chaand poora ho…

 

diya khaamosh hai lekin kisi ka dil to jalata hai

chale aao jahaan tak raushani maaloom hoti hai

~nushoor vaahidi –

 

sambhaale nahin sambhalata hai dil,

mohabbat ki tapish se na jalao,

ishk talabagaar hai tumhaara chale aao,

ab zamaane ke bahaane na banao.

 

khaamoshi ne meri pukaara hai tumhen…….!!

koi hasin shaam banakar hi chale aao

 

log dekhenge to aphasaana bana daalenge|

yoon mere dil mein chale aao ke aahat bhi na ho..

 

saavan ke jhoole pade,tum chale aao,

tum chale aao, tum chale aao…

 

bahut aarajoo hai… in aankho ko… tera khvaab dekhane ki,

kabhi to… inaka maan rakhane… sapano me chale aao…!

 

baha le jaati hai tumhaari

yaad mujhe kahaan se kahaan tak

kabhi tum bhi chale aao

mere thikaane tak….

 

vo mehamaan rahe bhi to kab tak hamaare

huyi shamma gul aur doobe sitaare,

‘qamar’ is qadar un ko jaldi thi ghar ki

vo ghar chal diye chaandani dhalate dhalate !! -qamar jalaalavi

 

muddat hui hai yaar ko mehamaan kiye hue,

josh-e-qadah se bazm-e-chiraagaan kiye hue !!

 

bahut se log the mehamaan mere ghar lekin

vo jaanata tha ki hai ehatimaam kis ke lie

~paravin_shaakir

 

dil mein phir vasl ke aramaan chale aate hain

mere roothe hue mehamaan chale aate hain

~bekhud dehalavi

 

ham bulaate vo tasharif laate rahe

khvaab mein ye karaamaat hoti rahi

 

kal raat dikha ke khvaab-e-tarab jo sej ko soona chhod gaya

har silavat se phir aaj usi mehamaan ki khushboo aati hai .

-katil shifai

 

laakh paraayonse parichit hai

mel-mohabbat ka abhinay hai,

jinake bin jag soona soona

man ke ve mehamaan kahaan hain?

-shailendr

 

kab vo aaenge ilaahi mire mehamaan ho kar

kaun din kaun baras kaun mahina hoga

 

main kis tarah use mehamaan-sa vida karata

ki mere ghar to use baar-baar aana tha…!

 

kaafi nahin khutoot kisi baat ke lie

tasharif laiega mulaaqaat ke lie

 

intezaar hai aapaka aaj bhi

zara dastak to dijie

vajah ho ya bevajah

zara hamaare dm mein tasharif to laiye

 

jo kuchh ho sunaana use beshaq sunaiye

takarir hi karani ho kahin aur jaiye

 

yaan mahafile-sukhan ko sukhanavar ki hai talaash

gar shauk aapako bhi hai tasharif laiye.

 

bahot kar chuke tasviron mein didaar

ho sake to ab hujoor roobaroo tasharif bhi laiye

 

shokhi ke rang shauq ke aramaan lie hue,

baad-e-khizaan mein muntazir*-e-bahaar gulamohar !!

 

saal, par saal, aur phir is saal

muntazir ham the muntazir ham hain

~shamim abbaas

 

kahaan khvaahishon ki zamin par jhukate hain roz aasamaan,

muntazir* hain ye haadase bhi girate sitaaron ki chaal ke !

 

ab kaun muntazir hai hamaare lie vahaan

shaam aa gai hai laut ke ghar jaen ham to kya

 

dil-e-muntazir ke aage khizaan ki bisaat kya,

hasarat hi se gulazaar hai viraana kisi ka !

 

saare mausam the khapha ab sar pe hai abr-e-ravaan*,

uth nigaah-e-muntazir ye hai vaqt intiqaam^ ka !

 

nigaahen muntazir hain kis ki dil ko justujoo kya hai

mujhe khud bhi nahin maaloom meri aarazoo kya hai

~akhtar said khaan

 

muntazir jisake lie ham hain kai sadiyon se

jaane kis daur mein vo shakhs hamaara hoga

 

muntazir kaun hai kis ka ye use kya maaloom

us ki manzil hai vahi jo bhi jahaan rah jae

~prem kumaar nazar

 

allaah bolate nahin to muskura hi do,

main kab se muntazir hoon tumhaare ~javaab ka !! -andalib shaadaani

 

havaen zor ki chalati thin hangaama bala ka tha

main sannaate ka paikar muntazir teri sada ka tha

 

band sipiyon mein hoon muntazir hoon baarish ka

main tumhaari aankhon ke paaniyon mein zinda hoon

 

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