गुनाहों से डरने की फ़ज़ीलत

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

 यह बात अच्छी तरह जेह्न नशीन कर लीजिये कि गुनाहों से मुतनब्बेह करने वाली बातों में खौफ़े इलाही, उस के इन्तिकाम का अन्देशा, उस की हैबत और शानो शौकत, उस के अज़ाब का डर और उस की गिरफ़्त बहुत नुमायां हैसिय्यत रखती हैं, फ़रमाने इलाही है कि

“जो लोग अल्लाह तआला के अहकामात की मुखालफ़त करते हैं वो इस अम्र से डरें कि उन्हें फ़ितना या दर्दनाक अज़ाब पहुंचे।”

मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम एक जवान के पास तशरीफ़ लाए जो नज्अ के आलम में था, आप ने फ़रमाया : अपने आप को किस आलम में पाते हो ? अर्ज किया : या रसूलल्लाह ! सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम मैं अल्लाह की रहमत का उम्मीद वार हूं और अपने गुनाहों से खौफ़ज़दा हूं। हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने येह सुन कर फ़रमाया कि किसी बन्दे के दिल में ऐसी दो बातें जम्अ नहीं होती मगर अल्लाह तआला उस बन्दे की उम्मीद पूरी कर देता है और गुनाहों के खौफ से उसे बे नियाज़ कर देता है ।

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वहब बिन वर्द से मरवी है : हज़रते ईसा . फ़रमाया करते थे कि जन्नत की महब्बत और जहन्नम का ख़ौफ़ मुसीबत के वक्त सब्र देता है और येह दो चीजें दुन्यावी लज्जतों, ख्वाहिशात और ना फ़रमानियों से दूर कर देती हैं।

हज़रते हसन रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है : ब खुदा तुम से पहले ऐसे लोग हो गुज़रे हैं जो गुनाहों को इतना अजीम समझते थे कि वो बेहद व बे हिसाब सोने चांदी की बख्शिशों को भी अपने एक गुनाह से नजात का ज़रीआ नहीं समझते थे।

फ़रमाने नबवी है कि जो कुछ मैं सुनता हूं, क्या तुम सुनते हो ? आसमान चर चराता है और उस का हक़ है कि वोह चर चराए, रब्बे जुल जलाल की क़सम ! आस मान में चार उंगल जगह नहीं है जिस में फ़रिश्ते बारगाहे इलाही में सजदा रेज़, कियाम करने वाला या रुकूअ करने वाला न हो, जो कुछ मैं जानता हूं अगर तुम जानते तो कम हंसते और ज़ियादा रोते और निकल जाते या पहाड़ों पर चढ़ जाते और अल्लाह तआला के शदीद इन्तिकाम और हैबतो जलाल के खौफ़ से अल्लाह तआला की पनाह ढूंडते ।

एक रिवायत में हज़रते बक्र बिन अब्दुल्लाह अल मज़नी रहमतुल्लाह अलैह का कौल है : जो लोग हंसते हुवे गुनाह करते हैं वो रोते हुवे जहन्नम में जाएंगे।

हदीस शरीफ़ में है : कि अगर मोमिन अल्लाह तआला के तय्यार कर्दा तमाम अज़ाबों को जानता तो कभी भी जहन्नम से बे खौफ़ न होता ।

सहीहैन में है, जब येह आयत नाज़िल हुई :

“और अपने करीबी रिश्तेदारों को डरा”।

तो आप सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम खड़े हो गए और फ़रमाया : ऐ गिरौह ए  कुरैश ! अल्लाह तआला से अपने नफ्सों को खरीद लो, मैं तुम्हें अल्लाह तआला के मुआमलात में किसी चीज़ से बे परवा नहीं करूंगा, ऐ बनी अब्दे मनाफ़ ! (हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के रिश्तेदार) मैं तुम्हें अहकामे खुदावन्दी में किसी चीज़ से बे परवा नहीं करूंगा, ऐ अब्बास ! (रसूले खुदा सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के चचा) मैं आप को अल्लाह तआला के अज़ाब से किसी चीज़ से बे परवा नहीं करूंगा, ऐ सफ़िय्या ! (रसूले खुदा सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की फूफी) मैं तुम को अल्लाह के सामने किसी चीज़ से बे परवा नहीं करूंगा, ऐ फ़ातिमा ! (हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की बेटी) मेरे माल से जो चाहे मांग लो मगर मैं अल्लाह के सामने तुम्हें किसी चीज़ से बे परवा नहीं करूंगा।

हज़रते आइशा सिद्दीका रज़ीअल्लाहो अन्हा  ने येह आयत पढ़ी : “और जो लोग अल्लाह की अताकर्दा चीजों से देते हैं और उन के दिल इस बात से डरते हैं कि वोह अल्लाह तआला की तरफ़ लौटने वाले हैं”।

और पूछा : या रसूलल्लाह ! सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम क्या येह वोह शख्स है जो ज़िना करता है, चोरी करता है, शराब पीता है मगर खौफे खुदा भी रखता है ? आप ने फ़रमाया : ऐ अबू बक्र की बेटी ! ऐसा नहीं है बल्कि इस से मुराद वोह शख्स है जो नमाज़ पढ़ता है, रोज़ा रखता है, सदक़ा देता है मगर इस बात से डरता है कि कहीं वोह ना मक्बूल न हों। इसे अहमद ने रिवायत किया है।

हज़रते हसन बसरी रज़ीअल्लाहो अन्हो से कहा गया : ऐ अबू सईद ! तुम्हारी क्या राए है ? हम ऐसे लोगों की मजलिस में बैठते हैं जो हमें रहमते खुदावन्दी से उम्मीदें वाबस्ता रखने की ऐसी बातें सुनाते हैं कि हमारे दिल खुशी से उड़ने लगते हैं, आप ने फ़रमाया : ब खुदा ! तुम अगर ऐसी कौम में बैठते जो तुम्हें खौफे खुदा की बातें सुनाते और तुम को अज़ाबे इलाही से डराते यहां तक कि तुम अम्न पा लो, वोह तुम्हारे लिये बेहतर है उस चीज़ से कि तुम ऐसे लोगों में बैठो जो तुम को बे खौफ़ी और उम्मीद में रखें यहां तक कि तुम को खौफ़ आ घेरे ।

फारूके आ‘जम और अल्लाह का खौफ

हज़रत फ़ारूके आज़म, उमर बिन ख़त्ताब सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम को जब नेजे से ज़ख़्मी कर दिया गया और उन की वफ़ात का वक्त करीब आया तो उन्हों ने अपने बेटे से कहा : बेटे ! मेरा चेहरा ज़मीन पर रख दो, अफ्सोस ! और शदीद अफसोस ! अगर अल्लाह ने मुझ पर रहम न फ़रमाया । हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो ने कहा : अमीरुल मोमिनीन ! आप को किस चीज़ का खौफ़ है? अल्लाह तआला ने आप के हाथ से फुतूहात कराई, शहर आबाद कराए। उन्हों ने कहा : मैं इस बात को पसन्द करता हूं कि मुझे बराबर ही में छोड़ दिया जाए या’नी न नुक्सान और न नफ्अ दिया जाए।

हज़रते जैनुल आबिदीन अली बिन हुसैन रज़ीअल्लाहो अन्हो जब वुजू से फ़ारिग होते तो कांपने लग जाते, लोगों ने सबब पूछा : तो आप ने फ़रमाया : तुम पर अफ्सोस है ! तुम्हें पता नहीं मैं किस की बारगाह में जा रहा हूं और किस से मुनाजात का इरादा कर रहा हूं।

हज़रते अहमद बिन हम्बल रज़ीअल्लाहो अन्हो ने फ़रमाया : खौफे खुदा ने मुझे खाने पीने से रोक दिया, अब मुझे खाने पीने की ख्वाहिशात नहीं होतीं।

सहीहैन की रिवायत है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने उन सात आदमियों का जिक्र किया कि जिस दिन कोई साया नहीं होगा तो अल्लाह तआला उन्हें अपने अर्श के साए में जगह देगा, उन में से एक वोह आदमी है जिस ने तन्हाई में अल्लाह तआला के अज़ाब और वईद को याद किया और अपने कुसूर याद कर के खौफ़े इलाही से उस की आंखों से आंसू बह निकले और ख़ौफ़े इलाही की वज्ह से वोह नाफरमानी और गुनाहों से किनारा कश हो गया।

अजाबे जहन्नम से महफूज दो आंखें

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : दो आंखें ऐसी हैं जिन्हें आग नहीं छूएगी, एक वोह आंख जो आधी रात में अल्लाह के ख़ौफ़ से रोई और दूसरी वोह आंख जिस ने राहे खुदा में निगहबानी करते हुवे रात गुज़ारी ।

हज़रते अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : क़ियामत के दिन हर आंख रोएगी मगर जो आंख अल्लाह की हराम कर्दा चीज़ों से रुक गई, जो आंख राहे खुदा में बेदार रही और जिस आंख से ख़ौफ़े इलाही की वजह से मख्खी के सर के बराबर आंसू निकला वोह रोने से महफूज़ रहेगी।

 खौफ़े इलाही से रोने वाला जहन्नम से आजाद है।

तिर्मिज़ी ने हसन और सहीह कह कर हज़रते अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहो अन्हो से रिवायत की है कि रसूले खुदा सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : वोह शख्स जहन्नम में हरगिज़ दाखिल नहीं होगा जो अल्लाह के ख़ौफ़ से रोया यहां तक कि दूध दोबारा थन में लौट आए और राहे खुदा का गुबार और जहन्नम का धुवां यक्जा नहीं होंगे।

हज़रते अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ीअल्लाहो अन्हो का क़ौल है कि हज़ार दीनार राहे खुदा में खर्च करने से मुझे खौफे खुदा से एक आंसू बहा लेना ज़ियादा पसन्द है।

हज़रते औन बिन अब्दुल्लाह रज़ीअल्लाहो अन्हो कहते हैं : मुझे येह रिवायत मिली है कि इन्सान के ख़ौफ़ खुदा से बहने वाले आंसू उस के जिस्म के जिस हिस्से पर लगते हैं, उस हिस्से को अल्लाह तआला जहन्नम पर हराम कर देता है और हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का सीनए अन्वर रोने की वज्ह से ऐसे जोश मारता था जैसे हांडी उबलती और जोश मारती है  (या’नी जैसे भड़कती आग पर हांडी जोश मारती है)

कन्दी का कौल है कि खौफे खुदा से रोने वाले का एक आंसू समन्दरों जैसी तवीलो अरीज़ आग को बुझा देता है।

इब्ने सम्माक की अपने नफ्स को सर जनिश

हज़रते इब्ने सम्माक रहमतुल्लाह अलैह अपने नफ्स को सर-ज़निश करते और फ़रमाते कि कहने को तो ज़ाहिदों जैसी बातें करते हो और अमल मुनाफ़िकों जैसा करते हो और इस कजरवी के बा वुजूद जन्नत में जाने का सुवाल करते हो ? दूर हो ! दूर हो ! जन्नत के लिये दूसरे लोग हैं जिन के आ’माल हमारे आ’माल से कतई मुख़्तलिफ़ हैं।

हजरत जा‘फ़र सादिक रज़ीअल्लाहो अन्हो की नसीहतें

हज़रते सुफ़यान सौरी रज़ीअल्लाहो अन्हो कहते हैं कि हज़रते जा’फ़रे सादिक़ रज़ीअल्लाहो अन्हो की खिदमत में, मैं हाज़िर हुवा और अर्ज़ की : ऐ रसूले खुदा सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के लख्ते जिगर ! मुझे वसिय्यत कीजिये ! आप ने फ़रमाया : “सुफ्यान ! झूटे में मुरुव्वत नहीं होती, हासिद में खुशी नहीं होती, गमगीन में भाईचारा नहीं होता और बद खुल्क के लिये सरदारी नहीं होती।” मैं ने कहा : ऐ रसूले खुदा के फ़रज़न्द ! कुछ और नसीहत फ़रमाइये ! आप ने फ़रमाया : ऐ सुफियान  ! अल्लाह तआला की मन्अ कर्दा चीज़ों से रुक जा तू आबिद होगा, अल्लाह की तक्सीम पर राज़ी हो तू मुसलमान होगा, जैसी तुम लोगों से दोस्ती चाहते हो तुम भी उन के साथ वैसी दोस्ती रखो, तब तुम मोमिन होगे, बुरों से दोस्ती न रख वरना तू भी बुरे अमल करने लगेगा, चुनान्चे हदीस में है कि आदमी अपने दोस्त के तरीके पर होता है, तुम येह देखो कि तुम्हारी दोस्ती किस से है ? और अपने कामों में उन लोगों से मश्वरा लो जो खौफे खुदा रखते हों, मैं ने अर्ज़ किया : ऐ रसूले खुदा के फ़रज़न्द ! कुछ और नसीहत कीजिये ! आप ने फ़रमाया : जो बिगैर कबीले के इज्जत और बिगैर हुकूमत के हैबत चाहे उसे चाहिये कि खुदा की नाफरमानी की ज़िल्लत से निकल कर अल्लाह की फ़रमां बरदारी में आ जाए, मैं ने कहा : ऐ रसूले खुदा के फ़रज़न्द ! कुछ और नसीहत फ़रमाइये ! आप ने फ़रमाया : मुझे मेरे वालिद ने तीन बेहतरीन अदब की बातें सिखलाई और फ़रमाया : ऐ बेटे ! जो बूरों की सोहबत इख़्तियार करता है, सलामत नहीं रहता, जो बुरी जगह जाता है मुत्तहम होता है और जो अपनी ज़बान की हिफ़ाज़त नहीं करता शर्मिन्दगी उठाता है।

 

इब्ने मुबारक रज़ीअल्लाहो अन्हो का कहना है कि मैं ने वुहैब बिन वर्द रज़ीअल्लाहो अन्हो से पूछा कि जो शख्स अल्लाह की ना फ़रमानी करता है, क्या वोह इबादत का मज़ा पाता है? उन्हों ने कहा : नहीं और मा’सिय्यत का इरादा करने वाला भी नहीं।

इमाम अबुल फ़रज इब्ने जौज़ी रहमतुल्लाह अलैह का क़ौल है कि ख़ौफ़ ख्वाहिशाते नफ़्सानी को जलाने वाली आग है, जिस क़दर येह आग शहवात को जलाएगी और गुनाहों से रोकेगी, उस क़दर येह बेहतरीन होगी इसी तरह जिस क़दर येह खौफ़ इबादत पर बर अंगेख्ता करेगा उसी कदर येह बेहतरीन होगा और ख़ौफ़ साहिबे इज्जत कैसे नहीं होगा, इसी से ही तो पाक दामनी, तक्वा, परहेज़गारी, मुजाहदात और ऐसे उम्दा आ’माल का जुहूर होता है जिन से अल्लाह तआला का कुर्ब हासिल होता है जैसा कि आयात व अहादीस से साबित होता है चुनान्चे, इरशादे इलाही है :

“उन लोगों के लिये हिदायत और रहमत है जो

अपने रब से डरते हैं। और फ़रमाने इलाही है :

अल्लाह उन से राजी हुवा और वोह अल्लाह से राजी हुवे येह उस के लिये है जो अपने रब से डरा।

नीज़ फ़रमाने इलाही है:

और मुझ से डरो अगर तुम ईमानदार हो।

मजीद इरशाद हुवा :

और जो शख्स अपने परवरदिगार के आगे खड़े

होने से डरता है उस के लिये दो जन्नतें हैं।

और इरशाद फ़रमाया:

अलबत्ता नसीहत हासिल करेगा जो शख्स डरता है। फ़रमाने इलाही है : सिवाए उस के नहीं कि अल्लाह के बन्दों में से आलिम डरते हैं। और हर वोह आयत या हृदीस जो इल्म की फ़ज़ीलत पर दलालत करती है वोह खौफ़ की फ़ज़ीलत पर भी दलालत करती है क्यूंकि खौफ़ इल्म ही का फल है।

इब्ने अबिदुन्या की रिवायत है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया जब ख़ौफ़ ए खुदा से बन्दे का जिस्म कांपता है और उस के रोंगटे खड़े हो जाते हैं उस के गुनाह ऐसे झड़ते हैं जैसे सूखे दरख्त से पत्ते झड़ते हैं।हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : अल्लाह तआला फ़रमाता है : मुझे अपनी इज्जतो जलाल की कसम ! मैं अपने बन्दे पर दो ख़ौफ़ और दो अम्न जम्अ नहीं करता, अगर वोह दुन्या में मुझ से अम्न में (बे ख़ौफ़) होता है तो मैं कियामत के दिन ख़ौफ़ज़दा करूंगा और अगर दुन्या में वोह मुझ से डरता है तो मैं उसे कियामत के दिन बे खौफ़ कर दूंगा।

अबू सुलैमान अद्दारानी रहमतुल्लाह अलैह का कौल है कि हर वोह दिल जिस में ख़ौफ़ खुदा नहीं है वीराना है, और फ़रमाने इलाही है :  पस खुदा की तदबीर से बे खौफ़ नहीं होते मगर ख़सारा पाने वाली कौम ही बे खौफ़ होती है।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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खौफ़ ए इलाही (Taqwa and Fear of Allah in Hindi-2)

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

Color Codes –  कुरआन मजीदहदीसे पाककौल (Quotes).

 

जनाब अल्लामा अबुल्लैस रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं की सातवें आसमान पर अल्लाह के ऐसे फ़रिश्ते हैं की उन्हें अल्लाह ताआला  ने जब से पैदा किया है तभी से सजदे में हैं और अल्लाह ताआला  के खौफ़ से बहुत ज्यादा खौफज़दा हैं क़यामत के दिन जब वह सजदे से सर उठाएंगे तो कहेंगे “ए अल्लाह तू पाक है, हम तेरी कमा हक्क़हू इबादत नही कर सके.”

अल्लाह ताआला  का फरमान है

“वह फ़रिश्ते अपने रब से डरते हैं और जिस चीज़ का उन्हें हुक्म दिया गया है वही कहते हैं और एक पल भी मेरी नाफ़रमानी में नहीं गुजारतें हैं.”

रसूल ए अकरम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया

“जब कोई बंदा अल्लाह के खौफ से कांपता है तो उस के गुनाह उस के बदन से ऐसे झड जाते हैं जैसे दरख़्त को हिलाने से उस के पत्ते झड जाते हैं”

 

गुनाह से रुक जाने वाले नौजवान का किस्सा 

एक नौजवान एक औरत की मोहब्बत में गिरफ्तार हो गया, वह औरत किसी काफिले के साथ बाहर सफ़र पर निकल गयी. जवान को जब मालूम पड़ा तो वह भी उसी काफिले के साथ चल पड़ा, जब काफिला जंगल में पहुंचा तो रात हो गयी रात को उन्होंने वहीँ पड़ाव किया, जब सब सो गए तो वह नौजवान चुपके से उस औरत के पास पहुंचा और कहने लगा मैं तुझ से बहुत मोहब्बत करता हूँ और इसीलिए में इस काफिले के साथ आ रहा हूँ, औरत बोली जाकर देखो कोई जाग तो नहीं रहा है, जवान ने जाकर सारे काफिले को देखा और वापस आकर कहा की सब लोग बे खबर सो रहे हैं, औरत ने पुछा, अल्लाह ताआला  के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है? क्या वह भी सो रहा है ? जवान बोला की अल्लाह ताआला  तो न कभी सोता है ना कभी उसे ऊँघ आती है. तब वह औरत बोली लोग सो गए तो क्या हुआ , अल्लाह तो जाग रहा है, हमें देख रहा है, उस से डरना हम पर फ़र्ज़ है, जवान ने जैसे ही यह बात सुनी, खुदा के डर से कांपने लगा और बुरे इरादे से तौबा करके घर वापस चला गया, कहते हैं की जब वह जवान मरा तो किसी ने उसे ख्वाब में देखा और पुछा? सुनाओ तुम पर क्या गुज़री ? जवान ने जवाब दिया मैं ने अल्लाह ताआला  के खौफ से एक गुनाह छोड़ा था, अल्लाह ताआला  ने उसी वजह से मेरे तमाम गुनाहों को बख्श दिया.

 

बनी इस्राईल के एक ताजिर का किस्सा 

किताब मजम उल लताइफ  में है की बनी इस्राईल में एक कसीरुल औलाद वाला आबिद इन्सान था,उसे तंगदस्ती ने आ घेरा, जब बहुत परेशान हुआ तो अपनी औरत से कहा जाओ, किसी से कुछ मांग कर लाओ, औरत ने एक ताजिर (व्यापारी) के यहाँ जाकर खाने का सवाल किया, ताजिर ने कहा अगर तुम मेरी इच्छा पूरी कर दो तो जो चाहे ले सकती हो, औरत बेचारी चुपचाप खाली हाथ घर लौट आई, बच्चों ने जब माँ को खाली हाथ आते देखा तो भूक से चिल्लाने लगे और कहने लगे अम्मी हम भूक से मर रहें हैं हमें कुछ खाने को दो! औरत दोबारा उसी ताजिर के यहाँ लौट गई और खाने का सवाल किया, ताजिर ने फिर वही बात की जो पहले कह चुका था.

औरत रजामंद हो गयी मगर जब दोनों तन्हाई में पहुंचे तो औरत खौफ से कांपने लगी. ताजिर ने पुछा किस से डरती हो? उस ने कहा में उस रब्बे लम यज़ल के खौफ से कांपती हूँ जिस ने हमें पैदा किया. तब ताजिर बोला जब तुम इतनी तंगदस्ती और गरीबी में भी खुदा का खौफ रखती हो तो मुझे भी अल्लाह के आजाब से डरना चाहिए, यह कहा और औरत को बहुत सा माल और सामान देकर इज्ज़त के साथ रवाना किया.

अल्लाह ताआला  ने उस वक्त के पैगम्बर मूसा अलैहिस्सलाम पर वह्यी भेजी की उस बन्दे के पास जाओ और सलाम कह दो और कहना की मैंने उस के तमाम गुनाहों को माफ़ कर दिया है, मूसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के हुक्म के मुताबिक उस ताजिर के पास आये और पुछा क्या तुमने कोई अज़ीम नेकी का काम किया हैं, जिस की वजह से अल्लाह ताआला  ने तुम्हारे तमाम गुनाहों को माफ़ कर दिया? जवाब ने ताजिर ने ऊपर बयां किया हुआ सारा किस्सा कह सुनाया.

हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम फरमाते हैं की अल्लाह का फरमान है

“मैं अपने किसी बन्दे पर दो खौफ और दो अमन जमा नहीं करता, जो शख्श  दुनिया में मेरे अजाब से डरता है मैं उसे आखिरत में बे खौफ कर दूंगा लेकिन जो दुनिया में मेरे अजाब से बे खौफ रहता है मै उसे आखिरत में खौफ जदा करूँगा”

अल्लाह ताआला  का इरशाद है

“तुम लोगो से नहीं मुझ से डरो”

और यह भी फ़रमाया की

“अगर तुम मोमिन हो तो लोगो से नहीं, मुझ से डरो.”

 

हज़रत उमर रज़िअल्लाहो अन्हो और अल्लाह का खौफ

हज़रत उमर रज़िअल्लाहो अन्हो जब कुरआन मजीद की कोई आयत सुनते तो खौफ से बेहोश हो जाते. एक दिन एक तिनका हाथ में लेकर कहा काश में एक तिनका होता, कोई काबिले ज़िक्र चीज़ ना होता, काश मुझे मेरी माँ पैदा ना करती, और खुदा के डर से आप इतना रोया करते थे की आप के चेहरे पर आंसुओ के बहने की वजह से दो काले निशान पड़ गए थे.

हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया

“जो शख्स अल्लाह के खौफ से रोता है वह जहन्नम में हरगिज़ दाखिल नहीं होगा, उसी तरह  जैसे की दूध दुबारा अपने थनों में नहीं जाता.”

दकाइकुल अख़बार  में है की क़यामत के दिन एक ऐसे इन्सान को लाया जायेगा जब उसके आमाल तोले जायेंगे तो बुराइयों का पलड़ा भारी हो जायेगा चुनाचे उसे जहन्नम में डालने का हुक्म मिलेगा, उस वक़्त उसकी पलकों का एक बाल अल्लाह की बारगाह में अर्ज़ करेगा की ए रब्बे ज़ुल जलाल तेरे रसूल सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया था जो अल्लाह के डर से रोता है, अल्लाह ताआला  उस पर जहन्नम की आग हराम कर देता है और में तेरे खौफ से रोया था, अल्लाह ताआला  का दरियाए रहमत जोश में आएगा और उस शख्स को एक रोने वाले बाल के बदले जहन्नम से बचा लिया जायेगा, उस वक़्त जिब्रील अलेहिस्सलाम पुकारेंगे “फलां बिन फलां एक बाल के बदले नजात पा गया”

 

खौफे खुदा से रोने वाले आप के गुनाहगार उम्मतियों के आंसू

हिदायतुल हिदाया में है की क़यामत के दिन जब जहन्नम को लाया जायेगा तो उस से हैबतनाक आवाजें निकलेंगी जिस की वजह से लोग उस पर से गुजरने में घबराएंगे.

जब लोग जहन्नम के करीब आयेंगे तो उस से सख्त गर्मी और खौफनाक आवाजें सुनेगे जो पांच सो साल के सफ़र की दूरी से सुनाई देती होंगी, जब हर नबी नफ्सी नफ्सी और हुज़ूर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम उम्मती उम्मती कह रहे होंगे उस वक़्त जहन्नुम से एक बहुत बुलंद आग निकलेगी और हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की उम्मत की तरफ बढ़ेगी, आपकी उम्मत उस से बचने के लिए कहेगी “ए आग तुझे नमाज़ियों, सदक़ा देने वालों, रोज़ादारों और खौफ ए खुदा रखने वालों का वास्ता वापस चली जा” मगर आग बराबर बढती चली जाएगी तब हज़रत जिब्रील अलेहिस्सलाम यह कहते हुए की आग आपकी उम्मत की तरफ बढ़ रही है, आपकी खिदमत में पानी का एक प्याला पेश करेंगे और अर्ज़ करेंगे, ए अल्लाह के नबी, इस से आग पर छींटे मारिये, आप आग पर पानी के छींटे मारेंगे तो आग फ़ौरन बुझ जाएगी उस वक़्त आप सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम जिब्रील अलेहिस्सलाम से उस पानी की बारे में पूछेंगे, जिब्रील कहेंगे हुज़ूर, यह खौफे खुदा से रोने वाले आप के गुनाहगार उम्मतियों के आंसू थे, मुझे हुक्म दिया गया की मै यह पानी आपकी खिदमत में पेश करूँ और आप उस से जहन्नम की आग को बुझा दें.

 

हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम दुआ माँगा करते थे की

“ए अल्लाह मुझे एसी आँखें अता फरमा जो तेरे खौफ से रोने वाली हों”

“ ए मेरी दोनों आँखों मेरे गुनाहों पर क्यों नहीं रोती हो? मेरी उम्र बर्बाद हो गयी और मुझे मालूम भी नहीं हुआ” (– इमाम गजाली र.अ. मुकाशफतुल कुलूब)

हदीस शरीफ में है “कोई एसा बंदा ए मोमिन नहीं जिसकी आँखों से खौफे खुदा से मक्खी के पर के बराबर आंसू बहे और उस की गर्मी उस के चेहरे पर पहुंचे और उसे कभी जहन्नुम की आग छुए”

जनाब मोहम्मद बिन अल मुन्ज़र र.अ. जब अल्लाह के खौफ से रोते तो अपनी दाढ़ी और चेहरे पर आंसू मला करते और कहते “मेने सुना है की वजूद के जिस हिस्से पर आंसू लग जायेंगे उसे जहन्नम की आग नहीं छुएगी”.

हर मोमिन के लिए ज़रूरी है की वह अल्लाह से डरता रहे और अपने आप को नफ्स की ख्वाइशों से रोकता रहे.

अल्लाह का फरमान है

“पस जिस किसी ने नाफ़रमानी की और दुनिया की ज़िन्दगी को सब कुछ जाना उस का ठिकाना जहन्नम है और जो अपने रब के सामने खड़े रहने के मकाम से डरा और अपने नफ्स को ख्वाईशात से रोक दिया तो उस की पनाहगाह जन्नत है.

 

जन्नत में मोमिनों को अल्लाह का दीदार 

जो इन्सान अल्लाह के अजाब से बचना चाहे और सवाब और रहमत का उम्मीदवार हो, उसे चाहिए की दुनिया की मुसीबतों पर सब्र करे. अल्लाह की इबादत करता रहे और गुनाहों से बचता रहे.

ज़हरुर रियाज़  में एक हदीस है की जब जन्नती जन्नत में दाखिल होंगे तो फ़रिश्ते उनके सामने तरह तरह की नेमतें पेश करेंगे उनके लिए फर्श बिछायेंगे, मिम्बर रखे जायेंगे,और उन्हें मुख्तलिफ किस्म के खाने और फल पेश किये जायेंगे, उस वक़्त जन्नती हैरान बैठे होंगे, अल्लाह ताआला  फरमाएगा ए मेरे बन्दों हैरान क्यों हो? यह जन्नत ताज्जुब की जगह नहीं है, उस वक़्त मोमिन अर्ज़ करेंगे या अल्लाह तूने एक वादा किया था जिस का वक़्त आ पहुंचा है, तब फरिश्तों को हुक्मे इलाही होगा की इनके चेहरों से पर्दा उठा लो! फ़रिश्ते अर्ज़ करेंगे की यह तेरा दीदार केसे करेंगे हालाँकि यह गुनाहगार थे? उस वक़्त फरमाने इलाही होगा की तुम हिजाब उठा दो, यह ज़िक्र करने वाले, सजदा करने वाले और मेरे खौफ से रोने वाले थे,और मेरे दीदार के उमीदवार थे. उस वक़्त परदे उठा लिए जायेंगे और जन्नती अल्लाह का दीदार होते ही सजदे में गिर जायेंगे, अल्लाह फरमाएगा सर उठा लो! यह जन्नत दारे-अमल नहीं दारे जज़ा है और वह अपने रब को बे कैफ देखेंगे,

अल्लाह ताआला  फरमाएगा “मेरे बन्दों तुम पर सलामती हो, मैं तुम से राज़ी हूँ, क्या तुम मुझ से राज़ी हो? जन्नती अर्ज़ करेंगे ए हमारे रब ! हम केसे राज़ी नहीं होंगे हालाँकि तूने हमें वह नेमते दी जिनको ना किसी आंख ने देखा, ना किसी कान ने सुना और ना ही किसी दिल में उसका तसव्वुर गुज़रा और यही उस फरमाने इलाही का मक़सूद है की अल्लाह उन से राज़ी हुआ और वह अल्लाह से राज़ी हुए.

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

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अल्लाह ताआला का खौफ और खशियत (Taqwa and Fear of Allah in Hindi)

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

Color Codes –  कुरआन मजीद, हदीसे पाक, कौल (Quotes). 

 

दुरुद शरीफ पढने से मगफिरत

आकाए नामदार सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया की

“अल्लाह ताआला ने एक फ़रिश्ता पैदा किया जिसके दोनों बाजुओं का दरमियानी फासला पूरब और पश्चिम को घेरे हुए है, सर उसका अर्श के नीचे है और दोनों पाँव तहतुस्सरा में हैं, रुए ज़मीन पर आबाद मखलूक के बराबर उसके पैर हैं. मेरी उम्मत में से जब कोई मर्द या औरत मुझ पर दरूद भेजता है तो उस फ़रिश्ते को अल्लाह ताआला का हुक्म होता है की वह अर्श के निचे नूर के समुन्दर में गोता जन हो  (डुबकी लगाये) तो वह गोता लगाता है जब बाहर निकल कर अपने पर झाड़ता है तो उसके परों से कतरे टपकते हैं अल्लाह ताआला हर कतरे से एक फ़रिश्ता पैदा करता है जो क़यामत तक उस के लिए दुआ ए मगफिरत करता है.”

 

दुरुद शरीफ पढने से ईमान की सलामती

एक दाना का कौल है की “जिस्म की सलामती कम खाने में है और रूह की बक़ा कम गुनाहों में है और ईमान की सलामती हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम पर दुरुद और सलाम पढने में है.

 

ए ईमान वालों अल्लाह से डरो

अल्लाह ताआला का इरशाद है

“ए ईमान वालों अल्लाह से डरो!”

यानि दिल में खौफे खुदा पैदा करो और उस की इताअत और फरमा बरदारी करो.

“और इन्सान देखे की आइन्दा के लिए आगे क्या भेजा है”

मतलब यह है की क़यामत के दिन के लिए क्या अमल किया इस का मह्फूम यह है की सदका करो और नेक काम करो ताकि क़यामत के दिन उनका बदला पाओ और अपने रब से डरते रहो, अल्लाह ताआला तुम्हारी हर अच्छी और बुरी बात को जनता है .

 

क़यामत के दिन फ़रिश्ते ज़मीन, आसमान, दिन व् रात गवाही देंगे की आदम के बेटे/बेटी ने यह काम भलाई का किया या बुराई का, फरमाबरदारी की या ना फ़रमानी, यहाँ तक की इन्सान के अपने आज़ा (अंग) भी उसके खिलाफ गवाही देंगे, इमानदार और मुत्तक्की परहेज़गार इन्सान के हक में ज़मीन गवाही देगी चुनाचे ज़मीन यह कहेगी इस इन्सान ने मेरी पीठ पर नमाज़ पढ़ी, रोज़ा रखा, हज किया, जिहाद किया यह सुनकर ज़ाहिद व मुत्तकी इन्सान खुश होगा और काफ़िर और नाफरमान के खिलाफ ज़मीन गवाही देते हुए यह कहेगी की इसने मेरी पीठ पर शिर्क किया, ज़िना किया, शराब पी और हराम खाया,अब इसके लिए हलाक़त और बर्बादी है.

 

किसी बन्दे के दिल में अल्लाह ताआला के खौफ का पता किन बातों से चलता है?

ईमान वाला वह है जो जिस्म के तमाम आज़ा के साथ अल्लाह ताआला से डर रखता हो जैसा की फकीह अबू लैस ने फ़रमाया

“सात बातों में अल्लाह ताआला के खौफ का पता चल जाता है.

1 उस की ज़बान गलत बयानी, गीबत, चुगली, तोहमत और फुजूल बातें बोलने से बची हो और अल्लाह ताआला का ज़िक्र करने, तिलावत ए कुरान ए पाक करने, और दीनी इल्म सिखने में लगी हो.

2 उस के दिल से दुश्मनी, बुह्तान, और हसद निकल जाये, क्यों की हसद नेकियों को चाट जाता है जैसा की हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का फरमान है

“हसद नेकियों को खा जाता है जेसे आग लकड़ी को खा जाती है”

जानना चाहिए की हसद दिल की सब से बुरी बिमारियों में से एक बीमारी है और दिल की बिमारियों का इलाज सिर्फ इल्म और अमल से ही हो सकता है.

3 उस की नज़र हराम खाने पीने से और हराम लिबास से महफूज़ रहे और दुनिया की तरफ लालच की नज़र से ना देखे बल्कि सिर्फ इबरत के लिए उस की तरफ देखे और हराम पर तो कभी उसकी निगाह भी ना पड़े जैसा की हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया है

“जिस ने अपनी आँख हराम से भरी अल्लाह ताआला क़यामत के दिन उसको आग से भर देगा.”

4 उसके पेट में हराम खाना ना जाए, यह गुनाह ए कबीर है.

हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया

“बनी आदम के पेट में जब हराम का लुकमा (निवाला) पड़ा तो ज़मीन और आसमान का हर फ़रिश्ता उस पर लानत करेगा जब तक की वह लुकमा उस के पेट में रहेगा और अगर उसी हालत में मरेगा तो उस का ठिकाना जहन्नम होगा.”

5 हराम के तरफ हाथ ना बढ़ाये बल्कि उसका हाथ अल्लाह की फरमाबरदारी में बढ़े. हज़रात कअब इब्ने अह्बार रज़िअल्लहो अन्हो से रिवायत है की अल्लाह ताआला ने सब्ज़ मोती का महल पैदा फ़रमाया उस में सत्तर हज़ार घर हैं और हर घर में सत्तर हज़ार कमरे हैं उस में वही दाखिल होगा जिस के सामने हराम पेश किया जाये और वह सिर्फ अल्लाह के डर की वजह से उसे छोड़ दे.

6 उसका कदम अल्लाह ताआला की नाफ़रमानी में ना चले बल्कि सिर्फ उसकी इताअत व खूशनूदगी में रहे, आलिमों और नेकों की तरफ हरक़त करे.

7 इबादत और मुजाहिदा, इन्सान को चाहिए की केवल अल्लाह ताआला के लिए इबादत करे, दिखावा रियाकारी और मुनाफकत से बचता रहे, अगर एसा किया तो यह उन लोगो में शामिल हो गया जिन के बारे में अल्लाह ताआला ने फ़रमाया है

“और तेरे रब के नज़दीक आखिरत डरने वालों के लिए है”

दूसरी आयत में यूँ इरशाद है

“बेशक मुत्तकी अमन वाले मकाम में होंगे.”

 

मतलब अल्लाह ताआला यह फरमा रहा है लो यही लोग मुत्तकी और परहेजगार क़यामत के दिन दोज़ख से छुटकारा पाएंगे और ईमानदार आदमी को चाहिए की वह बीम और रज़ा, डर और उम्मीद के दरमियाँ रहे वही अल्लाह ताआला की रहमत का उमीदवार होगा और उस से मायूस और ना उम्मीद नहीं रहेगा. अल्लाह ताआला ने फ़रमाया

“अल्लाह ताआला की रहमत से ना उम्मीद ना हो.”

तो बस अल्लाह ताआला की इबादत करे, बुराई के कामों से मुह मोड़ ले और अल्लाह ताआला की तरफ पूरी तरह मुतवज्जह हो.

*** हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ.-किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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