पहले से जानिए 29 को या 30 को दिखेगा चाँद और आसमान में कहाँ दिखाई देगा !

पहले से जानिए 29 को या 30 को दिखेगा चाँद

दोस्तों ईद पर हमेशा यह सस्पेंस बना रहता है की चाँद 29 को दिखेगा या 30 को, इसी से यह तय होता है की ईद कब मनाई जाएगी. क्यों की ईद चाँद देखकर मनाई जाती है, इसलिए अगर चाँद इस्लामिक केलेंडर की 29 तारीख यानि 4 जून को दिखा तो ईद 5 जून को मनाई जाएगी, लेकिन अगर चाँद 4 जून को नहीं दिखा तो फिर 30 रोज़े पूरे कर ईद 6 जून को मनाई जाएगी. 

 

आइये जानते हैं की 4 जून को चाँद दिखने की कितनी पोसिबिलिटी  सम्भावना है, और यह भी जानते हैं की आसमान में चाँद कहाँ दिखाई देगा.


 4 जून यानि 29 वें रोज़े को आसमान में चाँद की पोजीशन

आसमान में कहाँ दिखाई देगा चाँद !

4 जून की शाम 7 बजकर 15 मिनट पर आसमान में चाँद बुध ग्रह मतलब प्लेनेट मरकरी के पास दिखाई देगा, बुध ग्रह सूरज डूबने के बाद किसी छोटे सितारे की तरह दिखाई देता है, चाँद के कुछ ऊपर एक लाल रंग का तारा दिखाई देगा जो की तारा नहीं बल्कि मार्स यानि मंगल ग्रह है. चित्रों में देखें,

चाँद रात 8 बजे तक दिखाई देता रहेगा, तब तक काफी अँधेरा हो जाता है और इस वजह से बारीक़ चाँद के भी दिखाई देने की पोसिबिलिटी बढ़ जाती है. इस पेज को अपने दोस्तों को भी शेयर कर दीजिये ताकि वो आसानी से ईद का चाँद देख पायें.

 

Eid Ka chand Viral

 

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अगर चाँद 5 जून को दिखाई दिया तो 

दोस्तों अगर किसी वजह से चाँद 4 जून को नहीं बल्कि 5 जून को दिखाई दिया तब यह मंगल ग्रह के पास दिखाई देगा.

ईद मुबारक शायरी 

ईद मुबारक शायरी 

Eid Shayari Eid Status in Hindi

Eid Shayari and Eid Status in Hindi

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ईद शायरी, दोस्तों इस पेज पर हम आपके लिए कुछ बहुत खूबसूरत ईद शायरी, ईद स्टेटस और ईद मुबारक मेसेज पेश कर रहे हैं, इस वर्ष 2019 में एसा अनुमान है की ईद यानि की ईद उल फ़ित्र का त्यौहार 5 जून 2019 को मनाया जायेगा, यह ईद के चाँद के दिखाई देने पर निर्भर रहेगा, अगर 4 जून को चाँद दिख गया तो ईद 5 जून 2019 और अगर नहीं दिखा तो 6 जून 2019 को मनाई जाएगी.

यहाँ हम ईद चाँद शायरी और ईद मुबारक शायरी संगृहीत की है, इस पेज पर आपको eid shayari for lovers और  eid sad shayari भी मिल जाएगी

Eid Shayari Images: इस पेज के आखिर में हमने कुछ खुबसूरत Eid Shayari Images भी दी हैं जिनमे मशहूर शायरों की ईद शायरी है, आप सभी से गुज़ारिश है की इस ईद शायरी को अपने दोस्तों को शेयर करें, eid ki shayari उन्हें ज़रूर पसंद आएगी.

Eid shayari for lovers,

 

ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन

इक उदासी भी साथ लाती है

ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के

जाने किस किस की याद आती है (Eid Sad Shayari)

~फ़रहत एहसास

 

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ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद का

ईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का

 

ऐ हवा तू ही उसे ईद-मुबारक कहियो

और कहियो कि कोई याद किया करता है (Eid Sad Shayari)

 

किसी विसाल की आहट, किसी उम्मीद का दिन

फ़िज़ा में घुलते हुए नग़मा ऐ सईद का दिन

अब इस से बढ़ के मुबारक भी वक़्त क्या होगा

तुम्हारी याद का मौसम है और ईद का दिन (Eid Sad Shayari)

 

ईद अब के भी गई यूँही किसी ने न कहा

कि तिरे यार को हम तुझ से मिला देते हैं

 

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ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम

रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है

 

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुश्बू से

चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है

दिलों में प्यार जगाने को ईद आई है

हँसो कि हँसने हँसाने को ईद आई है

 

Eid ki shayari,

तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी

ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी (Eid Sad Shayari)

ZafarIqbal

 

मेरे यारों को ईद मुबारक हो

ग़म-गुसारो को ईद मुबारक हो

आशिक व माशूक़, रिंदों पर्सा

आज सबको को ईद मुबारक हो

 

Eid chand shayari

ज़माने भर की रौनक से हमें क्या वास्ता ग़ालिब,

हमारा चाँद दिख जाए हमारी ईद हो जाये !!

 

Eid chand shayari

माह-ए-नौ देखने तुम छत पे न जाना हरगिज़

शहर में ईद की तारीख़ बदल जाएगी

 

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आप इधर आए उधर दीन और ईमान गए

ईद का चाँद नज़र आया तो रमज़ान गए

शुजाख़ावर

 

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ईद है क़त्ल मिरा अहल-ए-तमाशा के लिए

सब गले मिलने लगे जब कि वो जल्लाद आया

Daagh

 

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वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में,

वो दिल में आ के अदा तेरे मुस्कुराने की !!

 

ईद मुबारक़

बंदगी यह कि जज़्बात-ओ-ख़यालात हों पाक

फ़र्ज़ इताअत का मोहब्बत से अदा होता है

 

मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी

अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं

 

Eid chand shayari

फिर बाम की जानिब उठे अबरू-ए-हिलाली,

और चाँद ने शर्मा के कहा ईद-मुबारक !!

 

ये अजीब माजरा है कि ब-रोज़-ए-ईद-ए-क़ुर्बां

वही ज़ब्ह भी करे है वही ले सवाब उल्टा

इंशा अल्लाह ख़ान

 

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कहीं है ईद की शादी, कहीं मातम है मक़्तल में

कोई क़ातिल से मिलता है, कोई बिस्मिल से मिलता है

Dagh

 

उठा दो दोस्तो इस दुश्मनी को महफ़िल से

शिकायतों के भुलाने को ईद आई है

असदुल्लाह

 

वादों ही पे हर रोज़ मेरी जान न टालो

है ईद का दिन अब तो गले हमको लगा लो

Mushafi

 

सभी मुराद हों पूरी हर एक सवाली की,

दुआ को हाथ उठाओ कि ईद का दिन है !!

– ईद मुबारक

 

तुझको मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी

ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी (Eid Sad Shayari)

ZafarIqbal

 

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम

रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है

 

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मैं कर दूं सारी खुशियां कुर्बान तेरी दीद के बाद

मायूस ना हो इंशा अल्लाह हम निकाह कर लेंगे इस ईद के बाद…..

 

तुम दरवाजे पे कभी दस्तक न देना

कुछ आहटों में उम्मीद होनी चाहिए!

क्यूँ हो ये रिवाज इतने पकवानों का

गरीब केे घर भी तो ईद होनी चाहिए! (Eid Sad Shayari)

 

या खुदा! अपनी रहमतों  से सबके दिलों को नेक कर दे… 

इस  ईद पर मेरे मुल्क के लोगों को फिर से एक कर दे…….

 

ऐ चाँद तू किस मजहब का है

ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा है.

 

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तुम दिख जाओ कभी,,

वो दिन भी मेरा ईद से कम नहीं होता

 

खुशी चारों तरफ फैले, कलुषता द्वेष खो जाए

अमन का चाँद धरती पर, नई उम्मीद बो जाए..

    ईद मुबारक..

 

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उसे मालूम है उसके आने से हो जायेगी ईद मेरी,

चाँद सा वो मेरे आँगन में उतर क्यों नहीं आता।

बस एक झलक उसकी भर देगी खुशियों से मुझे,

वो मोतियों सा मेरे होठों पे बिखर क्यों नहीं जाता

 

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उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना

ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे

 

– दिलावर अली आज़र

 

रात को नया चांद मुबारक ,

चांद को चांदनी मुबारक ,

फलक को सितारें मुबारक ,

सितारों को बुलन्दी मुबारक ,

और आप सबको हमारी तरफ से ,

ईद_मुबारक

 

“ईद लेकर आती है ढेर सारी खुशिया, ईद मिटा देती है इंसान में दुरियां;

ईद है खुदा का एक नायाम तबारोक, इसीलिए कहते हैँ ईद_मुबारक ।।”

 

उठा दो दोस्तों ! इस दुश्मनी को महफिल से

शिकायतों को भुलाने को ईद  आयी है

 

किया था अहेद कि खुशियाँ जहाँ में बाँटेंगे

इसी तल्ब के निभाने को ईद आयी है

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुशबू से

चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है

 

तमन्ना आपकी सब पूरी हो जाए,

हो आपका मुकद्दर इतना रोशन की,

आमीन कहने से पहले ही आपकी हर दुआ कबूल हो जाए..!

 

“तेरी दुनिया, तेरी उम्मीद तुझे मिल जाए

 चाँद इस बार तेरी ईद तुझे मिल जाए

 जिसकी यादों में चिराग़ों सा जला है शब-भर

 उस सहर-रुख़ की कोई दीद तुझे मिल जाए…”

– डॉ कुमार विश्वास

 

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लगता है,आज वो बेपर्दा निकल आए है बाज़ार में,

 चारों तरफ शोर है… ईद मुबारक, ईद मुबारक…

 

मेरी ख़ुशियों से वो रिश्ता है तुम्हारा अब तक

ईद हो जाए अगर ईद-मुबारक कह दो।

 

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वास्तव में सांता क्लॉज़ Santa Claus कौन थे?

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Santa Claus सांता क्लॉज़ की कहानी

कौन है Santa Claus सांता क्लॉज़? सांता क्लॉज़ के लेजेंड किवदंती के पीछे क्या कहानी है? क्रिसमस पर आने वाले  सांता क्लॉज़ को टीवी, विज्ञापनों, फिल्मों में दिखाया जाता हैं, सारी दुनिया में यह प्रसिद्ध है कि क्रिसमस की रात को सांता क्लॉज़ बच्चों के लिए सुंदर और आकर्षक गिफ्ट लाते हैं, यह सांता क्लॉज़ उत्तरी ध्रुव पर रहते हैं तथा एक स्लेज बर्फ गाड़ी पर बैठ कर आते हैं इस गाड़ी को रेनडियर खींचते हैं, सांता क्लॉज़ के पास एक लिस्ट होती है जिसमें अच्छे बच्चों के नाम और उन्हें क्या गिफ्ट देना है यह लिखा होता है, क्रिसमस की रात सैंटा क्लॉस घर के ऊपर बनी हुई चिमनी से प्रवेश करते हैं हैं और बच्चों के लिए गिफ्ट और खिलौने, चॉकलेट्स रख कर चले जाते हैं, साथ ही यह भी कहा जाता है कि जो बच्चे शैतान होते हैं उनके घर में सांता क्लॉज़ कोयले से भरी हुई थेली रख जाते हैं.

क्या सांता क्लॉज़ नाम के संत वास्तव में होते हैं, इस मिथक की शुरुआत कहां से हुई, सांता क्लॉज़ के पीछे इतिहास और कहानी क्या है?

सांता क्लॉज़ को वर्तमान पॉप कल्चर में खुश मिजाज, लंबी दाढ़ी वाले बूढ़े के रूप में दर्शाया जाता है, यह सांता क्लॉज़ हमेशा लाल रंग की टोपी और कपड़े पहनते हैं,  सांता क्लॉज़ के मिथक की कहानी तीसरी सदी से शुरू हुई है, सांता क्लॉज़ की कहानी  तुर्की में रहने वाले सैंट निकोलस की कहानी से शुरू होती है.

सैंट निकोलस और सांता क्लॉज़ की किवदंती

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सांता क्लॉज़ के इतिहास के बारे में पता करें तो यह किवदंती तीसरी सदी के सैंट निकोलस तक जाती है, ऐसा माना जाता है कि सैंट निकोलस का जन्म सन 280 में तुर्की के एक छोटे कस्बे Patara जोकि  वर्तमान समय के Myra के पास था वहां हुआ था, सैंट निकोलस को उनकी दानशीलता और दयालुता की वजह से सभी लोग बहुत पसंद करते हैं, सैंट निकोलस की दान शीलता और दयालुता के कई किस्से प्रचलित है, ऐसा माना जाता है कि सैंट निकोलस ने विरासत में मिली हुई अपनी सारी संपत्ति दान कर दी थी और उन्होंने पूरे देश में घूम घूम कर गरीबों और लाचारों की मदद की, उनकी एक सबसे प्रचलित कहानी के अनुसार सैंट निकोलस ने एक बार तीन लड़कियों को गुलामी में जाने से बचाया था तथा उनकी शादी के लिए बहुत सी रकम देकर उनके पिता की मदद की थी,

समय के साथ-साथ संत निकोलस ख्याति बढ़ती गई, उन्हें गरीब और बच्चों का मददगार समझा जाने लगा, उनकी मृत्यु के दिन  6 दिसंबर को उनकी जयंती मनाई जाने लगी और इस अवसर पर भोज का आयोजन किया जाने लगा, इस दिन के बारे में यह भी मान्यता शुरू हो गई कि यह एक शुभ दिन है और इस दिन बहुत सी खरीदारी शॉपिंग की जानी चाहिए और यही दिन शादी के लिए भी अच्छा होता है.

समय के साथ यूरोप के कई देशों में सेंट निकोलस के प्रति सम्मान की भावना बढ़ती गई खासतौर पर होलेंड के लोग उन्हें ज्यादा मानने लगे.

सेंट निकोलस के मानने वाले अमेरिका आये

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सन 1773 में हालेंड के कुछ परिवारों ने अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आकर बस गए उन्होंने सैंट निकोलस की जयंती अमेरिका में मनाना शुरू की, इस दिन प्रार्थना और भोज का आयोजन किया जाने लगा. सैंटा क्लॉस Santa Claus नाम की उत्पत्ति डच नाम Sinter Klaas, से हुई, Sinter Klaas नाम सेंट निकोलस का ही डच भाषा में छोटा नाम था.

सन 1804 में  न्यूयॉर्क हिस्टोरिकल सोसायटी के सदस्य John Pintard ने सैंट निकोलस के कुछ छोटी लकड़ी के पुतले बाटे, इन पुतलों में सैंटा क्लॉस की वही छवि देखने को मिलती है जो कि वर्तमान समय में है, इन पुतलों में सैंटा क्लॉस को गिफ्ट्स और खिलौनों के साथ एक फायरप्लेस के पास खड़ा हुआ दिखाया गया था.

सन  1809 में वॉशिंगटन में रहने वाले लेखक Irving ने अपने कहानी और किताबों में सैंट निकोलस को न्यूयॉर्क के संरक्षक संत  के रूप में वर्णन किया, सांता क्लॉज़ की ख्याति दिन-ब-दिन अमेरिका में बढ़ती गई, क्योंकि सांता क्लॉज़ की जयंती 6 दिसंबर को मनाई जाती थी जो की क्रिसमस के काफी नजदीक थी इसीलिए शॉपिंग मॉल्स और अख़बारों ने अधिक बिक्री के लिए सांता क्लॉज़ की छवि का उपयोग विज्ञापनों में किया,  क्योंकि सांता क्लॉज़ की जयंती के दिन लोग खरीदारी करना अच्छा समझते थे जिस प्रकार से भारत में धनतेरस के दिन लोग खरीदारी करना शुभ मानते हैं, इसीलिए शॉपिंग मॉल अखबारों और कंपनियों ने सांता क्लॉज़ की छवि का उपयोग विज्ञापनों में किया.

इसके बाद अलग-अलग लेखकों ने बच्चों की कहानियां और कविताओं में सांता क्लॉज़ के बारे में कई नई बातें जोड़ी और सेंट निकोलस आज के सैंटा क्लॉस बन गए, सांता क्लॉज़ के बर्फ की गाड़ी स्लेज पर आना, रेनडियर का गाड़ी को खींचना, सांता क्लॉज़ का चिमनी से दाखिल होना तथा बच्चों के लिए गिफ्ट रख कर जाना यह सब कहानियां सैंट निकोलस के साथ जोड़ दी गई.

सैंटा क्लॉस का फोन नंबर और पता क्या है?

क्रिसमस पर पूरी दुनिया में छोटे बच्चों को यह बताया जाता है कि क्रिसमस की रात सांता क्लॉज़  चिमनी के रास्ते घर में दाखिल होंगे और तुम्हारे लिए गिफ्ट रख कर जाएंगे बच्चे इस बात से खुश हो जाते हैं, अगले दिन वे सुबह सो कर उठते हैं तो उन्हें गिफ्ट मिलते हैं जो कि उनके माता-पिता द्वारा ही रखे जाते हैं, माता-पिता सिर्फ बच्चों को  सरप्राइज देने और खुश करने के लिए ही एसा करते हैं. कई शॉपिंग मॉल्स इस सीजन के दौरान किसी मॉडल को सांता क्लॉज़ के रूप में अपने स्टोर फ्रंट पर खड़ा रखते हैं जो बच्चों को गिफ्ट देता है,

क्रिसमस के दौरान कई बच्चे सांता क्लॉज़ को ख़त लिखते हैं, इन खतों का जवाब किसी संस्था के स्वयं सेवकों द्वारा दिया जाता है सांता क्लॉज़ का एड्रेस पता यह है

सांता क्लॉज,

सांता क्लॉज विलेज,

एफआईएन 96930 आर्कटिक सर्कल,

फिनलैंड

अमेरिका की एक कंपनी ने सांता क्लॉज़ से बात करने के लिए एक टेलीफोन नंबर भी उपलब्ध करवाया है, सैंटा क्लॉस का टेलीफोन नंबर (951) 262-3062 है. यह  FreeConferenceCall.com नाम की कंपनी द्वारा प्रायोजित किया गया है इस नंबर पर कोई भी कॉल करके सांता क्लॉज़ से बात कर सकता है.

सैंटा क्लॉस के दाढ़ी क्यों होती है?

आपने देखा होगा कि सांता क्लॉज़ की बड़ी सी सफेद दाढ़ी होती है, ऐसा इसलिए दर्शाया गया है क्योंकि प्राचीन काल में लगभग प्रत्येक संत की एक लंबी दाढ़ी होती थी एसा हो सकता है की संत निकोलस की पेंटिंग्स में उनकी दाढ़ी दर्शाई गई हो, इसी को आधार बनाकर सांता क्लॉज़ के वर्तमान रूप को बनाया गया है

सांता क्लॉज़ रेन डियर के द्वारा खींचे जाने वाली स्लेज में क्यों आते हैं?

ऐसा माना जाता है कि सांता क्लॉज़ का घर उत्तरी ध्रुव पर है, क्योंकि उत्तरी ध्रुव पर पूरी तरह बर्फ जमी होती है वहां केवल स्लेज गाड़ियां ही चलाई जा सकती हैं, इन गाड़ियों को या तो कुत्ते खींचते हैं या रेन डियर, उत्तरध्रुव के आस पास रहने वाले मूल निवासियों की गाड़ी स्लेज ही है जो उनके पालतू रेन डियर खींचते हैं, इसीलिए सांता क्लॉज़ के वहां को स्लेज दर्शाया जाता है.

सांता क्लॉज़  किसे और क्यों गिफ्ट क्यों देते हैं

सैंट निकोलस एक बहुत ही दयालु संत थे, उन्होंने कई गरीब लोगों की मदद की और अपने जीवन काल में उन्हें कई बच्चों को उपहार दिए थे  इसीलिए वर्तमान समय में सांता क्लॉज़ को एक गिफ्ट देने वाले संत की छवि के रूप में मनाया गया, किवदंती के अनुसार सांता क्लॉज़ अच्छे बच्चों को खिलौने और मिठाइयां देते हैं तथा शैतान बच्चों को गिफ्ट की जगह कोयले की थैली रख कर चले जाते हैं.

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बिग बैंग थ्योरी क्या है बिग बैंग से पहले क्या था?

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यूनिवर्स का प्रारंभ बिग बेंग से हुआ था !

दोस्तों आपने अक्सर बिग बैंग थ्योरी का जिक्र सुना होगा, वैज्ञानिक हमें बताते हैं कि हमारा ब्रह्मांड कैसे एक छोटे बिंदु से शुरू हुआ, बिग बैंग थ्योरी ब्रह्मांड की उत्पत्ति की व्याख्या करने के लिए उपयोग की जाने वाली एक थ्योरी हे.

सन 1927 में एस्ट्रोनामर  जॉर्ज लेमित्ररे  को एक बहुत बड़ा विचार आया, उन्होंने पहली बार कहा कि हमारा जो ब्राह्मण है वह एक छोटे से बिंदु से शुरू हुआ है, उन्होंने कहा कि एक छोटे से बिंदु से शुरू होकर ब्रह्मांड फैला और  फैलता ही गया और इतना बड़ा हो गया जितना कि आज हम उसे देखते हैं और आगे भी भविष्य में यह इसी तरह विस्तारित होता रहेगा.

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एडविन हबल ने बताया की सब एक दुसरे से दूर जा रहे हैं

 इस विचार के प्रस्तुत करने के 2 साल बाद एस्ट्रोनामर एडविन हबल ने नोटिस किया कि दूसरी गैलेक्सीयां हमसे दूर होती जा रही हैं, उन्होंने यह भी देखा कि जो Galaxy जितनी ज्यादा दूर है वह उतनी ही तेज गति से हमसे दूर हो रही है, इसका साफ-साफ मतलब यह था कि हमारा ब्रह्मांड अभी भी फैल रहा है, विस्तृत होता जा  है जैसा एस्ट्रोनामर जॉर्ज लेमित्ररे ने कहा था

 उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जब सभी गेलेसियाँ  एक दूसरे से दूर जा रही हैं तो इसका अर्थ है कि अतीत में यह बहुत पास-पास रही होंगी.

तब एडविन हबल ने बिग बैंग थ्योरी प्रस्तुत की, जिसके अनुसार ब्रह्मांड एक छोटे से बिंदु से शुरू हुआ यह बहुत ही अनंत रूप से घना और अनंत रूप से गर्म था, इस बिंदु के विस्तार से ही ब्रह्मांड अस्तित्व में आया, बिग बैंग विस्फोट के बाद ब्रह्मांड बहुत गर्म था और वहां सिर्फ छोटे-छोटे कण थे, धीरे-धीरे यह ठंडा होते गया,  इन छोटे छोटे छोटे कणों ने  मिलकर परमाणुओं  का निर्माण किया इन्हीं परमाणुओं  ने आपस में मिलकर आगे चलकर तारे और गेलेक्सियों का निर्माण किया.

वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रम्हांड 13.8 बिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में आया था.

अब प्रश्न यह उठता है कि बिग बैंग से पहले क्या था?

तो इस तरह से हम देखते हैं कि हमारा ब्रह्मांड एक बहुत ही छोटे अनंत घने और बहुत गर्म बिंदु से अस्तित्व में आया,  पर प्रश्न यह उठता है कि इस इससे पहले क्या था?  बिग बैंग होने से पहले ब्रह्मांड में क्या था?

 कई वैज्ञानिकों ने इस पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं प्रख्यात वैज्ञानिक स्टीफेन हाकिंग ने भी इस पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं जिसे जानकर आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे?

जैसा कि आप जानते हैं कि आइंस्टाइन की थ्योरी के अनुसार समय भी एक आयाम है और व्योम और समय मिलकर स्पेस टाइम डायमेंशन बनाते हैं, ब्रह्मांड जब अनंत रूप से घने बिंदु के रूप में था तब व्योम और समय, स्पेस और टाइम भी बहुत सघन रूप में मुड़े हुए थे.

समय भी बिग बेंग के अत्यंत घने बिंदु में समा जाता है!

time before big bang

 जैसा कि आप जानते हैं कि ब्लैक होल के इर्द-गिर्द  स्पेस और समय भी बैंड हो जाते हैं, ठीक इसी तरह उस समय भी उस अत्यंत घने बिंदु में व्योम  और समय स्पेस और टाइम भी एक मुड़े हुए रूप में थे.

 जैसे-जैसे हम समय में पीछे जाएंगे तो बिग बैंग के समय हमें बिग बैंग के उस संघनित बिंदु के अंत के अंदर समय भी हमें शून्य की ओर जाता हुआ दिखाई देगा परंतु कभी भी शून्य पर नहीं पहुंचेगा

 इसे आप अंको की सहायता से आसानी से समझ सकते हैं इन अंको की श्रुंखला को देखें …. 0.1 …….0.01…..0.001 आप देखेंगे कि हम शून्य की तरफ तो बढ़ रहे हैं  पर कभी भी 0 तक नहीं पहुंचेंगे !!!

ठीक इसी तरह बिग बंग के उस अनंत घने बिंदु में समय कभी भी अपने शुरुआती शून्य  नहीं पहुंचेगा बल्कि अनंत रूप से मुड़ता और घना होता जाएगा. समय भी बिग बेंग के अत्यंत घने बिंदु में समा जाता है! तो आप ही सोचिये की  आप प्रारंभ बिंदु पर  केसे पहुंचेंगे.

बिग बेंग के पहले सिर्फ एकमात्र भगवान / गॉड / अल्लाह का ही अस्तित्व था

लेकिन दोस्तों यह व्याख्या यह मानकर की गयी है की केवल एक ही युनिवेर्स है, और एक ही समय है ..साथ ही क्यों की अभी तक भगवान / गॉड / अल्लाह के अस्तित्व का वैज्ञानिकों के पास प्रूफ नहीं हे इसलिए वे यही मानते हैं की कोई गॉड नहीं है,

अगर आप धार्मिक हैं और मज़हब का आपको ज्ञान है तो आप जानते हैं की गॉड ने ही इस युनिवर्स को बनाया है, तो इस तरह बिग बेंग के पहले सिर्फ गॉड का ही अस्तित्व था .. चुकी समय भी गॉड ने ही बनाया हे इसलिए उसे अस्तित्व में रहने के लिए समय की कोई आवश्यकता नहीं है .

 


 

As salam Alaikum in Hindi सलाम का हिंदी मतलब क्या होता हे ?

Salam meaning in hindi

 अस्सलाम अलय्कुम  का हिंदी मतलब

 अस्सलाम या अस्सलाम अलय्कुम अरबी भाषा का एक अभिवादन है इसका मतलब आप पर सलामती हो “Peace be upon you” होता है यह मुस्लिमों का अभिवादन है जब भी मुसलमान आपस में मिलते हैं तो एक दूसरे को सलाम करते हैं यह इस्लामिक अभिवादन है अस्सलाम अलय्कुम का जवाब वालेकुम सलाम होता है इसका अर्थ “और आप पर भी सलामती हो” होता है

अस्सलाम अलैकुम के कई विभिन्न रूप हमें देखने को मिलते हैं मलेशिया, इंडोनेशिया, हिंदी, उर्दू आदि भाषाओं में सलाम के कई रुप हैं.

इस्लाम में अस सलाम का महत्व

इस्लाम में सलाम का बड़ा महत्व है जब भी मुसलमान कहीं आते हैं तो सलाम करते हैं और जाने पर भी सलाम किया जाता है एक हदीस जिसके रावी हज़रत अबू हुरैरा हैं कहते हैं कि मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया कि “जब तुम किसी महफिल में जाओ तो सलाम करो और जब तुम वहां से वापस आओ तो सलाम करो”

सलाम (अस्सलाम अलैकुम ) का पूरा रूप क्या है.  

Salam meaning in Hindi

 सलाम या अस्सलाम वालेकुम का पूरा फॉर्म “अस्सलाम अलैकुम वरहमतुल्लाही व बराकातहू और मगफीरातु” है इसका अर्थ होता है कि “आप पर सलामती हो, और अल्लाह की रहमत हो, और बरकतें हो और अल्लाह आपकी मगफिरत फरमाए” यानी कि अल्लाह आपको माफ कर दे

 एक और हदीस के मुताबिक मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से किसी ने पूछा कि किसे सलाम शुरू में करना चाहिए तो उन्होंने जवाब में कहा कि “जो व्यक्ति सवारी कर रहा है उसे पहले सलाम करना चाहिए जो कि पैदल चल रहा है और जो पैदल चल रहा है उसे पहले सलाम करना चाहिए उसे जो कि रास्ते पर खड़ा हुआ है छोटे से और लोगों के छोटे समूह अगर किसी बड़े समूह में जाएं तो उन्हें पहले सलाम करना चाहिए” (सहीह अल मुस्लिम 6234,  मुस्लिम 2160)

 यह भी कहा गया है कि जब भी कोई घर में दाखिल हो तो उसे सलाम करना चाहिए कुरान की आयत पर आधारित है “जब भी तुम घरों में दाखिल हो तो सलाम करो” (सूरह अन नूर 24:61)

अस्सलाम वालेकुम का शॉर्ट रूट छोटा रूप A.S. हो गया है इंटरनेट यूजर्स और WhatsApp चैट मैसेज के दौरान केवल A.S. लिखकर ही सलाम किया जाता है ऐसी प्रथा बन गई है. इंटरनेट पर ईमेल या चैटिंग के दौरान भी पूरा सलाम ही किया जाना चाहिए ताकि अच्छी भावना बने और व्यक्ति को अल्लाह की रहमत मिले “अस्सलाम अलैकुम वरहमतुल्लाही व बराकातहू और मगफीरातु” ही पूरा सलाम हे.

 

नहजुल बलाग़ा – हज़रत अली के व्याख्यान, पत्र , उद्धरण, सुविचार की किताब

Nahj al-balagha (book)

कोट्स ऑफ़ हज़रत अली

नहजुल बलाग़ा (Nahj al-balagha) – हज़रत अली के सुविचारों  की किताब

दोस्तों अगर आप हजरत अली के सुविचारों को पसंद करते हैं तो हम आपको आज ऐसी किताब के बारे में जानकारी देंगे जिस में आप हजरत अली के काफी अच्छे कोट्स हजरत अली के काफी सुविचार और उनके किस्से पढ़ सकते हैं, हजरत अली इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के दामाद हैं, हजरत अली को शिया और सुन्नी दोनों मुसलमान वर्गों में काफी सम्मान और आदर के साथ याद किया जाता है

 हजरत अली के विचारों और कथनों को पढ़ने के लिए आपको नहजुल बलाग़ा ( The Peak of eloquence ) नाम की किताब प्राप्त करनी होगी, इस किताब में हजरत अली के व्याख्यान, पत्र तफ़्सीर, उद्धरण, सुविचार, मौजूद है. यह सारी चीजें शरीफ राज़ी  जो कि एक शिया स्कॉलर हैं उन्होंने संग्रहित किए हैं शरीफ राजी 10वीं शताब्दी के विद्वान हैं, नहजुल बलाग़ा को शिया साहित्य का एक मास्टरपीस माना जाता है.

नहजुल बलाग़ा  Nahj al-balagha (book)

 नहजुल बलाग़ा में कई तरह के विषयों और मुद्दों को संग्रहित किया गया है इसमें मेटाफिजिक्स की समस्याएं, एकेश्वरवाद, फिकह, तफसीर, हदीस, पैगंबर की भविष्यवाणियां, इमामत, मूल्यों का वर्णन, सामाजिक दर्शन, इतिहास, राजनीति, प्रशासन नागरिक शास्त्र, विज्ञान और शायरी और साहित्य भी संग्रहित है. यह किताब नहजुल बलाका शुरुआती इस्लाम के दौर का चित्रण करती है इस्लाम की शिक्षाओं कुरान और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं को प्रकाशित करती है. नहजुल बलाग़ा में हज़रत अली के 241 व्याख्यान 79 पत्र और 490 किस्से हैं, इसमें हजरत अली के कई विचार विभिन्न विषयों पर संग्रहित किए गए हैं इन विषयों में विश्व की रचना से लेकर आदम अलैहिस्सलाम की उत्पत्ति, और ब्रह्मांड के अंत और इमाम मेहंदी के आने तक की बातें सम्मिलित हैं. हजरत अली के कथनों पर आधारित किताब नहजुल बलाग को शिया प्रमाणिक मानते हैं, जबकि सुन्नी मुसलमानों के नजदीक यह प्रमाणित नहीं है कई सुन्नी इमामों ने इस किताब नहजुल बलाग़ा पर अपनी टिप्पणियां प्रकाशित की है और इसकी प्रमाणिकता पर प्रश्न उठाए हैं क्योंकि इसमें कई बातें बाद में शामिल कर ली गई हैं.

नहजुल बलाग़ा किताब का जो कि हजरत अली के कथनों से सुसज्जित है और उसमें हजरत अली के कई पत्र भी शामिल हैं का अनुवाद कई भाषाओं में किया जा चुका है इंग्लिश, फ्रेंच, जर्मन, रोमानियन, रशियन, स्पेनिश, उर्दू भाषा में इसका अनुवाद प्रकाशित हो चुका है.

 तो अगर आप हजरत अली के पत्र पढ़ना चाहते हैं जो उन्होंने विभिन्न लोगों को लिखे हैं और अगर आप हजरत अली के कथन सुविचार पढ़ना चाहते हैं तो उन्हें इस किताब नहजुल बलागा को प्राप्त कर सकते हैं.

सर्च टैग्स 

नहजुल बलाग़ा, Nahj al-balagha, हज़रत अली, Hazrat Ali, Imam Ali

ताजुश्शरिया उर्फ अज़हरी मियां की जानकारी Biography of Tajushariya in Hindi

Tajjushariya ताजुश्शरिया

जानिए कौन हैं ताजुश्शरिया उर्फ अज़हरी मियां ??

ताजुश्शरिया - Tajushariya
ताजुश्शरिया – Tajushariya

☆हुजूर ताजुश्शरिया अल्लामा मुफ्तीअख्तररज़ाखाँ, आला हजरत ईमाम अहले सुन्नत अहमद रजां फाज़िले बरेलवी के परपोते हैं।

☆आप हुज्जतुल इस्लाम हज़रत हामिद रजां खां के सगेपोते और हुजुर मुफ्ती आजम हिंद अल्लामा मुस्तफा रजा खां के सगेनवासे हैं।

☆आप ने इस्लामी दुनिया की सबसे प्राचीन और बड़ी विश्वविद्यालय जामिया अल़अज़हर काहिरा (मिश्र) से तालीम हासिल की। अपने बेहतरीन तालीमी रिकॉर्ड और यूनिवर्सिटी टॉप करने पर मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल अब्दुल नासिर के हाथों ” फकरे_अज़हर ʼʼ अवार्ड दिया गया इसीलिए आपके नाम के आगे अज़हरी लिखा जाता है।

☆आप ने अरबी, उर्दू, अग्रेंजी, फारसी में इस्लामिक_फिक्ह (islamic jurisprudence) तर बहुत सारी किताबें लिखी और बहुत सारी किताबों  का तर्जुमा भी किया।

☆आप ने इश्के मुस्तफा से लबरेज़ नातिया दिवान सफीनाएबख्शिस लिखी जिसमें उर्दू अरबी भाषाओं में नातिया कलाम व मन्कबतें हैं।

☆शरीयते इस्लामिया की हिफाज़त की अज़ीम खिदमत की वजह आपको ‘शरीयत के ताजʼ का लकब “ताजुश्शरियाʼʼ दिया गया।

☆आप की प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जॉर्डन की राजधानी ओमान के रॉयल स्टडीज़ सेंटर से हर साल जारी होने वाली दुनिया के 500 प्रभावशाली मुसलमानों की लिस्ट में आप टाॅप25 शख्सियत में शामिल रहे। जबकि भारत की तरफ से प्रभावशाली शख्सियत में  आप पहलेनंबर पर हैं ।

☆दुनिया भर में आपके 20_करोड़ से ज्यादा मुरीद हैं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मिस्र, मॉरिशस, दक्षिण अफ्रीका अमेरिका, कनाडा, यूरोपीय और अरब देशों में फैले हुए हैं।।

☆आप ने 6_हज और अन-गिनत बार उमरा अदा किए इसीलिए आपको ‘मेहमान ए काबाʼ के नाम से भी याद किया जाता है।

☆आप सिलसिले कादरिया के अज़ीम बुजुर्ग सूफी_परंपरा के प्रचारक थे।

 

☆आपको मुफ्ती-ए-आज़म फिल-हिंद, काजी उल कुज़्ज़ा फिल-हिंद ,जाँ-नशीन ए मुफ़्ती आज़म और नबीरे आला हजऱत की उपाधि से नवाजा गया ।

☆आपको 36 से ज्यादा उलूम (Educational subjects) पर महारत हासिल थी।

☆आपको उर्दू अरबी फारसी अंग्रेजी के अलावा 11 मज़ीद भाषाओं का ईल्म था।

☆आपको आपके नाना हुजूर मुफ्ती ए आजम मुस्तफा रज़ा खान,

वालिदे मोहतरम मुफ्ती मोहम्मद इब्राहिम राजा खान के अलावा

हज़रत मौलाना बुराहान उल हक जबलपुर,

हजरत मौलाना मोहम्मद आले मुस्तफा बरकाती

सय्यद हसन हैदर बरकाती माहरैरा शरीफ

से भी सिलसिला कादरिया में  खिलाफत व इजाज़त हासिल थी ।

☆आपने मरकजी दारुल इफ्ता, मरकजी दारुल कज़ा,

शरई काउंसिल ऑफ इंडिया,

जामियातुर रजा इस्लामिक यूनिवर्सिटी की स्थापना की।

☆आप आल इंडिया जमात ए रज़ा-ऐ-मुस्तफा बरेली शरीफ,

आल इंडिया सुन्नी जामियातुल उलमा और इमाम अहमद रज़ा ट्रस्ट के सरपरस्त रहे।

☆आप के विसाल पर दुनियाभर से ताज़ियत भरे पैगाम आए।

जिनमें तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान, अमीर दावत-ए-इस्लामी मौलाना इलियास अत्तार कादरी, प्रोफेसर अमीन मियाँ बरकाती, मशहूर नातखाँ ओवैस रजा कादरी, पीर साकिब शामी, हज़रत साकिब रज़ा मुस्तफाई शेख अबू बकर (केरल), अमीरे सुन्नी दावते इस्लामी मौलाना शाकिर अली नूरी (मुम्बई), मुफ्ती निजामुद्दीन मिस्बाही (अल जामियातुल अशरफिया) ने खूसूसी ताज़ियत फरमाई।

☆आपके नमाज-ए-जनाजा में देशभर के सभी राज्यों से समेत दुनिया भर के 127_मुल्कों से मुरीदीन और अकीदतमन्दों ने शिरकत की जिनकी तादाद  करीब 1.25 करोड़ से ज्यादा रही।

☆ आपका की वफ़ात दुनिया ए सुन्नियत के लिए अज़ीम खासारा है जिसकी भरपाई नामुमकिन है।

 

“अल्लाह अज़्ज़ावजल की इन पर रहमत हो और इनके सदके हमारी मग्फिरत होʼʼ।

आमीन।।

तालिबे दुआ:- मोहम्मद खालिद रजा खान

लेखक मोहम्मद खालिद रजा खान

 

पैगम्बर ज़करिया अलेह. की मोहर खुदाई में बरामद हुई !

पैगम्बर ज़करिया अलेह. की मोहर !

अगर आप दीन में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते और इस्लामिक किताबें नहीं पढ़ते हैं तो आपने अल्लाह के पैगम्बर ज़करिया अलेह. का नाम शायद कम ही सुना हो, जिनका ज़िक्र बाइबल में भी है, लेकिन अगर आप दिलचस्पी रखते हैं, तो आपके लिए एक चौकाने वाली खबर है! ज़करिया अलेह. की मोहर (Seal) जेरुसलम में खुदाई के दौरान बरामद हुई है! हालाँकि मोहर आधी टूटी हुई है पर यह सभी यहूदियों, इसाइयों और मुसलमानों के लिए उनके होने का एक पुख्ता सबूत है। (Source : Biblical Archeology Review)

पैगम्बर ज़करिया
पैगम्बर ज़करिया

पैगम्बर ज़करिया अलेह. कौन थे?

तीनो इब्राहिमी मज़हबों यहूदी,इसाइयत और इस्लाम के अनुसार पैगम्बर ज़करिया अलेह. अल्लाह के पैगम्बरों में से एक थे। उनके वालिद का नाम “अमोज़” था और वो यहूदी बादशाह “हेज़ेकियाह” के मुख्य सलाहकार थे।  हेज़ेकियाह 727 ईसा पूर्व इसराइल का बादशाह था। ज़करिया अलेह. के नाम से “बुक आफ इसैयाह” नामक किताब हिब्रू बाइबल और ओल्ड टेस्टामेंट बाइबिल का मुख्य हिस्सा है। यह किताब ज़करिया अलेह.के कथनों पर आधारित है।

जब असीरियन लोगों ने जेरूसलम की पाक ज़मीन पर हमला किया तो हज़रत ज़करिया अलेह. ने बादशाह को उस विशाल सेना से लड़ने की हिम्मत दिलाई । हज़रात ज़करिया अलेह. ने अपने दौर में हज़रात ईसा अलेह. और हज़रात मोहम्मद स.अ.व.स. के आने की पेशेन्गोइया की थी।

पैगम्बर की 2700 साल पुरानी मोहर

पैगम्बर ज़करिया अलेह. की मोहर
पैगम्बर ज़करिया अलेह. की मोहर

 

पुरातत्त्ववेत्ता इलियट मज़ार ने इस मोहर को खोजा है और “बिबलिकल आर्कियोलोजिकल रीव्यू” में अपनी खोज को प्रकाशित किया है। पुरातत्त्ववेत्ता इलियट मज़ार हिब्रू युनिवेर्सिटी आफ जेरूसलम से जुडी शख्शियत हैं.

“हमें पुरातात्विक खुदाई अभियान के दौरान एक मोहर मिली है जो की हज़रत पैगम्बर ज़करिया अलेह. की हो सकती है! यह मोहर हमें बादशाह हेज़ेकियाह की मोहर से महज़ तीन मीटर किदूरी पर मिली है, क्यों की बाइबिल में हेज़ेकियाह और हज़रत ज़करिया का ज़िक्र साथ साथ आया है इसलिए इनका पास पास मिलना कोई चोकने वाली बात नहीं होने चाहिए!” इलियट मजार ने कहा

मिट्टी की यह कीमती मोहर, जेरुसलम के दक्षिणी दिवार के एक प्राचीन किले की ज़मीन से बरामद हुई है* ०.4 इंच की इस मोहर पर “पैगम्बर ज़करिया” अंकित है पर बुरी खबर यह है की यह आधी टूटी हुई पाई गयी है।

2700 साल पुरानी मोहर पर हिब्रू भाषा में “YashaYah” लिखा है और उसके आगे “NVY” लिखा है; “NVY” हिब्रू में पैगम्बर लफ्ज़ के पहले तीन अक्षर हैं।

आप शक कर सकते हैं की हो सकता है यह उस ज़माने के किसी और ज़कारिया नाम के शख्स की मोहर हो?, ज़करिया उस ज़माने में एक प्रचलित नाम था ?….पर दो चीज़ें इसे एतबार लायक बनाती हैं …पहली यह की यह बादशाह की मोहर के पास बरामद हुई है …और दूसरी यह की उस ज़माने में बहुत ऊँचे दर्जे / पद के लोग ही अपनी मोहर बनवाते और इस्तेमाल करते थे।

यह हज़रात ज़करिया के होने का पहला पुख्ता सबूत है ..इसके पहले उनका ज़िक्र किताबों में ही मिलता है… पुरातत्त्वविदों ने यह पाया है की इस मोहर के दूसरी तरफ कपडे और उँगलियों के निशान मौजूद हैं! एसा लगता है की कपडे के किसी पैकेट पर यह मोहर लगायी गयी थी …हो सकता है खुद हज़रात ज़करिया अलेह. ने इसे लगाया हो!…

बादशाह हेज़ेकियाह की मोहर
बादशाह हेज़ेकियाह की मोहर
जेरुसलम इसराइल
जेरुसलम इसराइल

हज़रत ज़कारिया की शहादत

हज़रात ज़करिया की शहादत का ज़िक्र बाइबल और कुरान में नहीं मिलता, लेकिन यहूदियों की किताब “तालमुद” के अनुसार बादशाह “मनासेह” के हुक्म से यहूदियों ने हज़रत ज़कारिया को आरी से दो टुकड़े कर शहीद कर दिया था” बादशाह हेज़ेकियाह तो हज़रत ज़कारिया की सलाह सुनता था पर उसके मरने के बाद यहूदियों ने अपनी नाफर्मानियाँ और गुनाह के काम शुरू कर दिए … हज़रत ज़कारिया के उन्हें बार बार समझाने पर उनका गुस्सा बढता गया और उन्होंने बादशाह को भड़काकर उन्हें शहीद करवा दिया।

इस्लामिक रिवायतों की किताबों में हमें हज़रत ज़कारिया के किस्से में कुछ अंतर देखने को मिलता है ..इन रिवायतों के अनुसार हज़रत ज़कारिया, मरियम अले. के हमवक़्त थे और वो मरियम अले. के सरपरस्त थे..वो सुतारी काम करते थे …यहूदियों ने उन पर झूठे इल्जाम लगाकर, आरी से काट कर शहीद कर दिया जब वे एक बड़े पेड़ के तने के अन्दर थे.. पवित्र क़ुरान में भी हज़रात ज़करिया अले. और मरियम अले. का ज़िक्र साथ साथ आया है. पुरातत्त्वविदों  (ماہر آثار قدیمہ) को इस बात को ध्यान में लाना चाहिए की हज़रत ज़करिया का वक़्त इसा अलेह. के सात सो साल पूर्व का ना होकर उनके ठीक पहले का है।

Source : Biblical Archeology Review

 

 

 

  

Arabic Hindi Dictionary अरबी हिंदी डिक्शनरी

Arabic Hindi Dictionary अरबी हिंदी डिक्शनरी

Arabic Hindi Dictionary :- दोस्तों अगर आप सउदी अरब (Kingdom of Saudi Arabia) या फिर मिडल ईस्ट के किसी देश जा रहें हों तो आपको अरबी भाषा की थोड़ी-बहुत जानकारी बहुत ज़रूरी है, जिससे की आप किसी मुश्किल में न फंसे. ज्यादातर हिंदी भाषी भारतियों को काम चलाऊ अंग्रेजी बोलना तो आता है लेकिन सऊदी अरब में इंग्लिश का प्रयोग ना के बराबर किया जाता है, वहां आपको इंग्लिश में बात करने वाला शायद ही कोई शख्स नज़र आये.

चाहे आप हज या उमरा के लिए जा रहे हों या फिर वहां जॉब करने के लिए, आपको अपने रोज़ के कई कामों को करने के लिए, चीजें खरीदने के लिए, ट्रेवल करने के लिए, अच्छी जॉब खोजने के लिए, अरबी भाषा का थोडा ज्ञान आवश्यक है, अगर आप के पास अरबी लेंग्वेज का थोडा नॉलेज है तो यह आपको मिडिल इस्ट में जॉब दिलवाने में बहुत सहायक हो सकता है, जॉब मिलने के बाद भी यह ज्ञान आपको अपनी जॉब करने में काफी सहायक हो सकता है.

इस पोस्ट में हम आपके लिए अरबी भाषा के कुछ महत्वपूर्ण और बार बार रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में उपयोग होने वाले शब्द की एक आसन अरबी -हिंदी शब्दकोष प्रकाशित कर रहें है जो की सिर्फ दो पेज का है !. आप इसके जेपीजी पिक्चर फार्मेट को आसानी से प्रिंट करके आपकी जेब में भी रख सकतें हैं. निचे दिए गयी दो तस्वीरों पर माउस से राइट क्लिक करें और “सेव इमेज एस” का आप्शन चुनें.

हम उम्मीद करतें हैं की यह छोटी सी Arabic Hindi Dictionary उपयोगी साबित होगी.

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अरबी हिंदी शब्दकोष पेज 1

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Arabic Hindi Dictionary अरबी हिंदी डिक्शनरी

 

अरबी हिंदी शब्दकोष पेज 2

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अरबी हिंदी शब्दकोष ( Arabic Hindi Dictionary)

Main Arabian Lenguage words in Hindi

1अना =     मै

2 अंता =     तुम

3 कैफ =     कैसे

4 हाल =     हाल

5 मीता =    कब

6 लैस =     क्यों

7 ईस =      क्या

8 नाम =     कयां

9 ईस्म =    नाम

10 गूरफा =  कमरा

11 मोया =   पानी

12 कम =    कितना

13 सोया =    थोड़ा

14 सोया सोया =   धीरे धीरे

15 नग्गिस =    कम

16 सरीर =    चारपाई

17 मर्तबा =    गद्दा

18 बतानिया =    कंब्बल

19 मुखद्दा =    तकिया

20 तलाजा =    फ़्रिज

21 तल्ज = बर्फ

22 बर्द = ठन्ड

23 हार = गरम

24 सबी = करना

25 ला = नहीं

26 माफ़ी = नहीं

27 अइवा = हाँ

28 सुरा = जल्दी

29 बाब = दरवाज़ा

30 इफ्ता = खोलना

31 फुक्कू = खोलो

32 सक्कर = बंद करना

33 गफ्फल = बंद है

34 सुगुल = काम

35 सय्याराह = गाड़ी

36 सगल = इस्टार्ट

37 कफर = टायर

38 जैत् = तेल

39 बैंजीन = पेट्रोल

40 अब्बी = भरना

41अलहिंन् = अभी

42 बाद = बाद

43 गुद्दाम = आगे

44 बरा = पीछे

45 सूफ = देखना

46 गजाज = शीशा

47 बकाला = परचून की दुकान

48 जवादि = दही

49 हलीव = दूध

50 असीर = जूस

51 रूज़ = चाबल

52 लबन = मठठा

53 लेवोन = निम्बू

54 सक्कर = चीनी

55 खबुस = रोटी

56 फूल = दाल

57 समक = मछ्ली

58 दजाज = मुर्गी

59 बैद = अंडे

60 बेद = दुर

61 गरीब = नजदीक

62 मताम् = होटल

63 खफसा = पुलाब

64 महल = दुकान

65 ख़ूदार = सब्जियां

66 मौज = केला

67 बुरतकाल = संतरा

68 जरजीर = पालक

69 तमात = टमाटार

70 पतात = आलू

71 शाहे अखदर = हरा धनिया

72 कबीर = बड़ा

73 सगीर = छोटा

74 ब सत = बीच

75 ज्यादा = ज्यादा

76 कासा = गिलास

77 कुर्शी = कुर्सी

78 जिल्द = कवर

79 सार = बाल

80 आइन = आँख

81 यद् = हात

82 रेगिल = पैर

83 बतन = पेट

84 इस्नान = दांत

85 कोइस = अच्छा

86 माफ़ी = नहीं

87 ला = नहीं

88 ईजी = आना

89 रूह = जाना

90 मिता = कब

91 तरिक = रोड

92 सीधा = सीधा

93 यमीन = राईट

94 इस्सार = लेफ्ट

95 बग्गफ = रुकना

96 एमसी = चलना

97 कम = कितना ?

98 साह = घंटे

99 दगीगाह = मिनट

100 शाह = सही

101 जोवाल = मोबाईल

102 सरिहा = सिम कार्ड

103 रकम = नंबर

104 इसारा = स्ट्रिट लाइट

105 जायज = तैयार

106 इतला = निकलना

107 इस्तनना = खड़े रहो

108 इन्दल = करीब

109 लहदा = थोड़ा रुको

110 मसरूफ़ = व्यस्थ

111 फादी = खाली

112 रज्जा = बापस

113 बेत = घर

114 जवाला = कचड़ा

115 बलदिया = कचड़ा

116 तल्ला = फेकना

117 गैर = बदलना

118 सज्जल = लिखना

119 गरुरा = बोत्तल

120 कासा = गिलास

121 जिब = देओ

122 आती = देना

123 रातिब = सैलरी

124 फुलूस = रूपीए

125  हलाला = पैसे

126 सर्राफ = ए टी एम

127 महत्ता = पेट्रोल पम्प

128 सर्फ़ = चेंज

129 गस्सील = धोना

130 नदीफ् = साफ

131 अब्बल = पहली

132 मर्राह = बार

133 गबल = पहले

134 दुआर = गोल

135 फ़क़त = केवल

136 तल्ज = बर्फ

137 हवेन = कहाँ

138 समता = बैग

139 मतर = बारिस

140 मतार = एअर पोर्ट

141 तमर = ख़जूर

142 शजर = पेड़

143 तुराब = धूल

144 कमर = चाँद

145 नज़्म = तारे

146 शमा = आसमान

147 अर्थ = जमीन

148 समस् = सूरज या धुप

149 योम = दिन

150 बिल्लेल = रात

151 जुम्मा = जुम्मा

152 योमलसप्त = थाबर

153 योमलअहद = इतवार

154 योमलईतनेन = पीर

155 योमलतलाता = मंगल

156 योमलअरबा = बुद्ध

157 योमलखमिस् = जुमेरात

158 इजाज = छुट्टी

159 लम्बा = लाईट

160 नूर = रौशनी

161 मुकेफ = AC

162 तलाजा = फिरिज

163 हम्माम = लैट्रिन

164 सिल्लम = सीड़ी

165 मुफ्ता = चाबी

166 हदीद = लोहा

167 गजाज = शीशा

168 हदिका = पार्क

169 मलयान = भरा हुआ

170 बाबा = पापा

171 मामा = माँ

172 अखु = भाई

173 उखती = बहन

174 बलद = बेटा

175 बिन्त = बेटी

176 अम्मी = चाचा

177 अमती =चाची

178 सदीक = दोस्त्

179 मलाबस = कपड़े

180 मगस्ला = लॉन्ड्री

181 मसगल = ब्युटीपालर

182 सदलिया = मैडीकल स्टोर

183 नादी = जिम

184 कवी = परेस करना

185 नूम = शोना या नींद

186 गूम = उठना

187 बर्राह = बाहर

188 दाखिल = अंदर

189 जुआ = अंदर

190 गाज = गैस

191 सुक = मार्किट

192 रुखसा = लाइसेंस

193 एस्तमारा = गाड़ी के कागज

194 तामिन = इन्सोरैंस

195 दल्ला = ड्राईविंग स्कूल

196 फतुरा = बिल

197 सल्ली = नमाज़

198 ख़ौफ़ = डर

199 इजारा = किराया

200 इमारा = बिल्ड़िंग

Arabic Numbers in Hindi

अरबी भाषा के नबर हिंदी में

1        वाहिद
2        इतनेन्
3        तलाता
4        अरबा
5        खमसा
6        सित्ता
7        सवा
8        तमानिया
9        तिस्सा
10      असरा
11      अद्दास
12      इतनास
13      तलात्तास
14      अरबातास
15      खमस्तास
16      सित्तास
17      सबात्तस
18      तमन्तास
19      तीसत्तास
20      अशरीन

21       बाहिद अशरीन
22       इतनेन् अशरीन
23       तलाता अशरीन
24       अरबा अशरीन
25       खमसा अशरीन

30       तलातींन
31       बाहिद तलातींन
32       इतनेन् तलातींन

40       अरबाइन्
50       खमसिंन
60       सित्तिन
70       सबाइन्
80        तमाइन
90        तिस्सीन
100      मियां

1000   अल्फ
2000    अल्फेन्


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Arabi hindi dictionary

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Arabic Hindi Dictionary

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Irrfan Khan open letter इरफ़ान खान के नाम खुला ख़त !!!

open letter to irrfan khan
open letter to irrfan khan
open letter to irrfan khan इरफ़ान खान के नाम खुला ख़त

अभिनेता इरफ़ान खान के नाम खुला ख़त !!!

Open Letter to Actor Irrfan Khan.

इरफ़ान खान साहब! अस सलाम अलयकुम,

यह खुला ख़त आपको इसलिए लिखना पड़ रहा है क्यों की आपने क़ुरबानी पर एक बयान देकर, कम इल्म, सीधे साधे और नई पीढ़ी के नोजवानों के दिलों में इस्लाम के बारे में शक-शुबहात पैदा कर दियें है जीससे उनके ईमान के कमज़ोर होने का खतरा पैदा हो गया है और क़ुरबानी के बारे में गलत जानकारी समाज में फ़ैल गयी है।

में बहुत मुख्तसरन बात करूंगा, क्यों की जानता हूँ की आपके पास और आज कल हर किसी के पास बहुत कम वक्त होता है।

अल्लाह का दीन

इरफ़ान भाई, दीन वह होता है जो अल्लाह अपने किसी रसूल के ज़रिये, इंसानों की हिदायत के लिए आसमान से नाज़िल (अवतरित) करता है, पैगम्बर भी उस दीन में अपनी तरफ से कुछ बढ़ा घटा नहीं सकते।

रस्मो रिवाज, परम्पराएँ, मत, संप्रदाय, त्यौहार, रिचुअल्स

रस्मो रिवाज, परम्पराएँ, मत, संप्रदाय, त्यौहार, रिचुअल्स इन्सान बनातें हैं, इनमे सही गलत बातें शामिल होती हैं और समाज और काल के हिसाब से ये बदलते रहतें हैं, इनका INTROSPECTION आत्म निरिक्षण किया जा सकता है।

अल्लाह का दीन रस्मो रिवाज, परम्पराएँ, मत, संप्रदाय, त्यौहार, रिचुअल्स हरगिज़ नहीं है !

ईद उल अज़हा पर की जाने वाली जानवरों की कुर्बानी का हुक्म अल्लाह ने दिया है और रसूलल्लाह मोहमम्द स.अ.व. ने खुद क़ुरबानी कर, इसका सुन्नत तरीका तमाम मुसलमानों को सिखाया है। यह कोई बाद में मुसलमानों के द्वारा शुरू की हुई परंपरा नहीं है। आपको किस बेवकूफ़ ने यह कह दिया की यह इंसानों द्वारा बनाई हुई परम्परा है!

(Irrfan Khan open letter)

अक्ल, तर्कवाद और दीन

इक़बाल का शेर याद दिला दूं

“निकल जा अक्ल से आगे की यह नूर……

चिरागे राह है……….. मंजिल नहीं है”

इरफ़ान भाई, अगर अक्ल से ही इंसानों को हिदायत (सही रास्ता) हांसिल होना होता तो सभी अक्लमंद हिदायत पा जाते, आप नज़र उठा कर देखिये, कितने अक्लमंद दानिश्वर लोग खुद किस तरह अपना और समाज का नुकसान कर रहें हैं। अक्ल के काम करने का एक अलग दायरा है, अक्ल, तर्कवाद अल्लाह के दीन पर सवाल नहीं उठा सकते। कल को आप की अक्ल कहेगी की में तीन बार हाथ-मुह धो कर वज़ू क्यों करूं में तो ऐसे ही पाक हूँ और नमाज़ पढ़ सकता हूँ, नमाज़ में काबे की तरफ रुख करके ही सजदा क्यों करूं? अल्लाह तो हर जगह है! ………..और इस तरह अक्ल सारे दीन को रद्द कर देगी और इन्सान अपनी अपनी अक्ल के मुताबिक भटकते रहेंगे।

क़ुरबानी की हिक़मत  

यूँ तो अल्लाह के हर हुक्म के पालन करने में इंसानों के लिए कई फायदे हैं, अल्लाह के हुक्म की हिकमत को समझना इन्सान की सीमित अक्ल के लिए संभव नहीं है, लेकिन चलिए फिर भी ईद उल अज़हा के मोके पर क़ुरबानी किये जाने से इंसानी समाज को कितना अज़ीम और चमत्कारिक फायदा होता है इसके बारे में सोच लें।

आपने रबी, खरीफ की फसल के बारे में सुना होगा! इन फसलों से हर साल अरबों रुपया बड़े शहरों से और देश के बाहर निर्यात के ज़रिये गावों के गरीब किसानो तक पहुचता है। यह गावों की तरफ मनी फ्लो और रोज़गार का बहुत बड़ा जरिया है।

वाल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में, जिसमे दुनिया की 12.7 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है, सन 2014 में 8 लाख जानवरों की क़ुरबानी की गयी, एक जानवर की औसत कीमत 895 डालर्स थी, इस हिसाब से लगभग 46 अरब 45 करोड़ भारतीय रूपये की कीमत के जानवरों की क़ुरबानी की गयी!

(लिंक http://blogs.wsj.com/briefly/2015/09/23/indoeid0923/)

यह 46.45 अरब रुपया किसके पास पहुंचा? ये रूपये शहरों से सीधे गावों के गरीब पशु पालकों के हाथ में गए, ये जानवर पालने वाले किसी भी देश के समाज में सबसे गरीब और निचले आर्थिक स्तर पर खड़े होतें है।

Irrfan Khan open letter इरफ़ान खान
Irrfan Khan open letter इरफ़ान खान के नाम खुला ख़त !!!

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में पूरी दुनिया के मुसलमानों की 31 प्रतिशत आबादी रहती है, यहाँ पर भी बकरे पालने और बेचने का काम सबसे गरीब आदमी करता है, कई गावों में यह काम बूढे और महिलाओं की आय का साधन है, जो और कोई दूसरा काम नहीं कर सकते। अब इंडोनेशिया के रकम को तीन से गुणा कर लीजिये! करीब डेढ़ ख़रब रुपया (13935 करोड़) क़ुरबानी के हुक्म से, अल्लाह गरीब पशुपालकों तक पंहुचा रहा है और उनको रोज़गार दे रहा है। कभी किसी बूढी औरत या किसान के चेहरे की ख़ुशी और आँखों की चमक जाकर बाज़ार में देखिएगा, जब वह अपना बकरा बेचकर घर की तरफ लोटता है, क्यों की उसकी साल भर की मेहनत सफल हुई है।

Irrfan Khan open letter इरफ़ान खान के नाम खुला ख़त !!!
Goat Farmers of India

भारत सरकार के सेन्ट्रल इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च ओन गोट्स के अनुसार (लिंक http://www.cirg.res.in/) (Irrfan Khan open letter)

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विश्व में सर्वाधिक संख्या में बकरियां हमारे देश में पाई जाती हैं, जिनका आजीविका एवं खाद्य सुरक्षा में काफी अहम् योगदान है. बकरियों से 6 लाख गावों के लगभग 7 करोड़ किसानों को प्रतिपूरक आय प्राप्त होती है. बकरियों के द्वारा देश में 4.7 से 5.96 लाख टन मांस का उत्पादन विगत दस वर्षो में प्राप्त हुआ.

बकरियों के उत्पादों से देश को कुल 38590 करोड़ का योगदान प्राप्त होता है, जिसमे मांस द्वारा 22625 दूध द्वारा 9564 खाल द्वारा 1491 एवं खाद द्वारा 1535 करोड़ क्रमश: प्राप्त होते हैं.

Irrfan Khan open letter इरफ़ान खान के नाम खुला ख़त !!!
Goat farmers of India

हर साल करोड़ों बकरों की क़ुरबानी की जाती है, लेकिन फिर अगले साल इतने ही बकरे तैयार हो जातें हैं, रबी-खरीफ की तरह यह भी एक फसल है, क़ुरबानी करने का नियम अगर इन्सानों का बनाया हुआ होता तो इतनी तादात में क़ुरबानी करने की वजह से यह स्पिशिज़ (प्रजाती) ख़त्म हो जाती, लेकिन एसा नहीं है, क्यों की यह नियम अल्लाह द्वारा बनाया गया है इसलिए इसमें कोई flaw गलती नहीं है।

अल्लाह का हुक्म पूरा करना ही क़ुरबानी है.

एक बकरे की कम से कम कीमत दस से बारह हज़ार होती है, क़ुरबानी करने के लिए अपने घर खर्च में से इतनी रकम निकलना और फिर क़ुरबानी के गोश्त को गरीबों और रिश्तेदारों को तकसीम करना भी कम मुश्किल नहीं है, इससे इन्सान के दिल का बुख्ल (कंजूसी) कम होता है और सखावत (दान) की प्रवत्ति बढती है।

जिस भी किसी मुस्लमान के पास 52.5 तोला चाँदी या इसके बराबर पैसा है उस पर क़ुरबानी करना वाजिब है, अब देखिये 52.5 तोला चाँदी की कीमत आजकल पच्चीस हज़ार के आस पास चल रही है, जिस भी मुस्लमान के पास पच्चीस हज़ार या इतनी कीमत का सोना चांदी है तो उसे क़ुरबानी करना वाजिब है। अब पच्चीस हज़ार में से बारह हज़ार खर्च कर गरीबों और रिश्तेदारों को खाना खिलाना क़ुरबानी नहीं है?

(Irrfan Khan open letter)

इरफान भाई खुद मूसा अलेहहिस्सलाम जो की अल्लाह से कलाम करते थे, हज़रात खिज्र अलेहहिस्सलाम के कामों की हिकमत नहीं समझ पाए थे।

आपको पैगम्बर मूसा अलेहहिस्सलाम और खिज्र अलेहहिस्सलाम का किस्सा याद होगा, बहुत शोर्ट में अर्ज़ कर दूं ।

मूसा अलेह. ने एक बार महसूस किया की इस ज़माने में मुझ से ज्यादा इल्म वाल कोई नहीं है तब अल्लाह ने उन को खिज्र अलेह. से मिलने के लिए कहा। खिज्र अलेह. ने कहा ठीक है अगर आप मेरे साथ रहकर इल्म सीखना चाहतें है तो चलिए लेकिन जिस चीज़ का आपको इल्म नहीं है उसके बारे में आप सब्र न रख सकेंगे और सवाल पूछने लगेगें। मूसा ने कहा की अगर अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे सब्र करने वाला पाएंगे।

खिज्र अलेह. ने कहा की ठीक है लेकिन मुझ से मेरे किसी काम के बारे में कोई सवाल मत पूछियेगा।

मूसा राज़ी हो गए और दोनों साथ चल दिए। दोनों एक गरीब मल्लाह की कश्ती में सवार हुए और किनारे पर उतरने पर खिज्र ने किश्ती को थोडा तोड़कर एबदार बना दिया, इस पर मूसा ने सवाल किया और कहा की आपने एक गरीब की कश्ती को तोड़कर बुरा काम किया।

खिज्र अलेह. ने कहा की मेने आपको पहले ही कहा था की आप सब्र ना रख सकेंगे, इस पर मूसा अलेह. ने माफ़ी मांगी और दोनों फिर आगे चल दिए।।

रस्ते में एक गाँव आया, जब दोनों ने वहां के रहने वालों से थोडा खाना और एक रात रुकने की जगह मांगी तो सभी गावं वालों ने उन्हे मना कर दिया।…. इसी गावं में हज़रत खिज्र को एक पुराने घर की दिवार गिरती हुई दिखाई दी तो उन्होंने उसे मरम्मत कर के सही कर दिया और घर वालों से बदले में कुछ भी नहीं लिया।….. इस पर मूसा अलेह. ने फिर सवाल उठाया की आप चाहते तो कुछ मेहनताना ले सकते थे जिससे खाने का कुछ इंतज़ाम हो जाता। हज़रात खिज्र ने कहा की आपने फिर मेरे अमल पर सवाल उठाया, मूसा ने तुरंत माफ़ी मांगी और कहा की अगर अब में कोई सवाल करूं तो आप मुझे जाने के लिए कह सकतें हैं।

कुछ आगे सफ़र करने के बाद हज़रात खिज्र को एक लड़का खेलता हुआ दिखाई दिया जिसका उन्होंने क़त्ल कर दिया। यह देखकर मूसा केसे चुप रहते। …उन्होंने कहा की आपने बहुत ही बुरा काम किया है की एक निर्दोष बच्चे को क़त्ल कर दिया।

हज़रात खिज्र ने कहा की आपका और मेरा साथ यहीं तक था।….

सुनिए जो मेने गरीब नाविक की कश्ती को एबदार बना दिया था उसमे ये हिकमत थी की उस इलाके का ज़ालिम बादशाह अच्छी नई कश्तियाँ नाविकों से छीन लिया करता था, इसलिए मेने उस कश्ती को एबदार बना दिया और इस तरह उस गरीब नाविक की मदद की।

जो गिरती हुई दिवार मेने सही की थी, उस घर में दो यतीम बच्चे रहतें हैं और उस दिवार में उनके पिता ने उनके लिए खज़ाना छुपा कर रखा था, अगर वह दिवार गिर जाती तो उस खजाने पर गावं वाले कब्ज़ा कर लेते!

और आखिर में जिस लड़के को मेने क़त्ल किया उसके माँ बाप बहुत नेक हैं लेकिन वाल लड़का बड़ा होकर गुनाहगार बन जाता इसीलिए अल्लाह ने मुझे उसे ख़त्म करने का हुक्म दिया और अल्लाह उन्हें उस के बदले एक नेक बेटा अता कर देगा।

यह तीनो काम मेने अपनी इच्छा से नहीं बल्कि अल्लाह के हुक्म से किये हैं!

जब एक पैगम्बर दुसरे पैगम्बर के अमल की हिकमत को नहीं समझ सकता तो एक आम इन्सान जिसने दीन का इल्म भी हांसिल नहीं किया है, अल्लाह के हुक्म की हिकमत को  कैसे समझ सकता है! और अल्लाह के हुक्म को ग़लत कैसे ठहरा सकता है।

(Irrfan Khan open letter)

तो इन तीन तथ्यों पर गौर कीजिये

  1. अल्लाह का दीन, इंसानों के द्वारा बनाया गया रस्मो रिवाज, परम्परा, मत, संप्रदाय, रिचुअल नहीं है।
  2. क़ुरबानी से इंसानी समाज को कई फायदें हैं, एक चमत्कारिक फायदा तो यह है की इससे खरबों रुपया गावों के गरीब-बूढ़े पशुपालकों और महिलाओं तक पहुँच रहा है।
  3. अल्लाह के दीन पर अक्ल सवाल नहीं उठा सकती, अगर एसी हिमाकत और नादानी की गयी तो वुजू, नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज सभी को, अक्ल रद्द कर देगी और इन्सान अपनी-अपनी अक्ल के मुताबिक भटकते रहेंगे।

 

ऊपर इक़बाल का जिक्र किया है तो ग़ालिब का भी तज़किरा कर दूँ …

इमां मुझे रोके है … जो खीचे है मुझे कुफ्र ….

इरफ़ान भाई, इमां और कुफ्र दोनों का, अपनी ज़िन्दगी का थोडा सा वक्त देकर, जितना हो सके इल्म हांसिल कर लीजिये.

इसीलिए आपसे गुज़ारिश है की आप इन तथ्यों पर गौर करते हुए, क़ुरबानी पर गहराई से चिंतन करें, और सही फैसला कर एक नया बयान मिडिया और शोशल मिडिया पर जारी करें जिससे लोगों के दिलों की बदगुमानी (भ्रांती) दूर हो सके।

ताज मोहम्मद शेख

taj_ms2003@yahoo.co.in

(यह लेखक के अपने निजी विचार हैं)

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Irrfan Khan open letter इरफ़ान खान के नाम खुला ख़त !!!
Rajasthani Goat Farmer

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