Dard Shayari दर्द शायरी

Dard Shayari
Dard Shayari

Dard Shayari

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दर्द शायरी

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दर्द का साज़ दे रहा हूँ तुम्हे,
दिल का हर राज़ दे रहा हूँ ‍‌तुम्हे
ये गज़ल-गीत सब बहाने हैं,
मैं तो आवाज़ दे रहा हूँ ‍‌तुम्हे!

***

शिद्दते दर्द में ना आई कोई भी कमी,
दर्द फिर दर्द रहा ,उल्टा लिखा सीधा लिखा “

***

दर्द अब इतना की संभलता नही है, तेरा दिल मेरे दिल से मिलता नही है
अब और किस तरह पुकारूँ मैं तुम्हे, तेरा दिल तो मेरे दिल की सुनता भी नही है

***

मत कर कोशिशे मेरे अजीज मेरे दर्द को समझने की …
तू इश्क कर , फिर चोट खा , फिर लिख दवा मेरे दर्द की

*** Dard Shayari

“बात करनी थी, बात कौन करे
दर्द से दो-दो हाथ कौन करे
हम सितारे तुम्हें बुलाते हैं
चाँद न हो तो रात कौन करे

***

कोई हमदर्द ना,
कोई भी दर्द ना था,

अचानक एक हमदर्द मिला
फिर उसी से हर दर्द मिला

***

लोग कहते है हम मुस्कराते बहुत है…
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते

***

किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते है ,
पराया दर्द अपनाये उसे इंसान कहते है।

***

आज उसने एक बात कहकर मुझे रूला दिया… जब दर्द बरदाश नही कर सकते तो मोहब्बत क्यों की..!!

*** Dard Shayari

ये कलम भी कमबख्त बहुत दिलजली हैं। ?

जब जब भी मुझे दर्द हुआ ये खूब चली हैं

***

“ना तस्वीर है उसकी जो दिदार किया जाऐ,
ना पास है वो जो उससे प्यार किया जाऐ,
ये कैसा दर्द दिया उस बेदर्द ने,
ना उससे कुछ कहा जाऐ..ना उसके बिन रहा जाऐ..”

***

आरज़ू यह नहीं कि ग़म का तूफ़ान टल जाये;

फ़िक्र तो यह है कि कहीं आपका दिल न बदल जाये;

कभी मुझको अगर भुलाना चाहो तो;

दर्द इतना देना कि मेरा दम निकल जाय.

***

कौन से लफ्ज़ में मैं दर्द की सदा लिखूं
किस तरह मैं अपने ही दिल को बेवफा लिखूं

***

वही रंज़िश, वही हसरत, वही चाहत

ना ही दर्द –ए– दिल में कमी हुई …

अज़ीब सी है मेरी ज़िन्दगी ए*शीन

ना गुज़र ही सकी ना खत्म हुई ..!!

***

ना किया कर अपने दर्द-ए-दिल को शायरी में बयां..
लोग और टूट जाते हैं…हर लफ़्ज को अपनी दांस्तान समझकर..।।

*** Dard Shayari

किस्मत के तराज़ू में तोलो,तो फ़कीर हैं
हम.. और दर्द-ए-दिल में, हम सा कोई नहीं..

***

एक तरफ प्यार हमे करते हो, एक तरफ रूलाते क्यूँ हो?
.
मेरे दर्द-ए-दिल के अफसाने पर मुस्कुराते क्यूँ हो?

***

हम पर सौ जुल्म-ओ-सितम किजिये …….
बस एक बार मिलकर दर्द-ए-दिल की दवा किजिये ……

***

देख लिया हमने हर बार हर दफ़ा कर के …. बस दर्द-ए-दिल ही पाया है वफ़ा कर के !!

***

ज़मीन है हम यह आसमान तुम्हारा है
दिन है सभी का पर यह शाम तुम्हारा है
पत्थरों की मूरत में दब गयी है ज़िंदगी मेरी

***

किन लफ़्ज़ों में बंया करूँ दर्द-ए-दिल को मैं,
सुनने वाले तो बहुत हैं, समझने वाला कोई नही…

***

दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर दिल में जगाया आपने
पहले तो मैं, शायर था, आशिक़ बनाया आपने….!!!

*** Dard Shayari

दर्द-ए दिल भी न किसी से कह सके
और आह भी न हम दबी रख सके

***

दर्द-ए दिल भी न किसी से कह सके
और आह भी न हम दबी रख सके

***

हमनें जब किया दर्द-ए-दिल बयां, तो शेर बन गया;
लोगों ने सुना तो वाह वाह किया, दर्द और बढ़ गया;
मोहब्बत की पाक रूह मेरे साँसों में है;
ख़त लिखा जब गम कम करने के लिए तो गम और बढ़ गया।

***

तेरे हिसाब से अब और दिखा न जाएगा…. ज़ख्म अब नासूर बन गए हैं ज़िन्दगी …. मुझसे अब दर्द-ए-दिल और लिखा न जाएगा !

***

नफरत की बिसात पर मोहब्बत की हसरतों नाकाम होती रही,
दर्द ए दिल में कसक जिंदगी किसी मासूम की लम्हा दर लम्हा गुलजार होती गई।।।।

*** Dard Shayari

दर्द ए दिल को सीने में , छुपाना आ गया,
मचलती हसरतों को अब , दबाना आ गया..
ना रखता हूँ उम्मीद ए वफा , एहले जहाँ में,
हसीन चेहरों से नकाब , हमें उठाना आ गया..

***

लिखु क्या आज वक्त का तकाजा हेैं,
दर्द-ए-दिल अभी ताजा हैं,
.
.
गिर पड़े हें आँसू मेरे कागज पे लिखते वक्त,
लगता हें कलम में स्याही कम दिल में दर्द ज्यादा हैं!!!

***

वो लिखती रही
कागज पे अपना दर्द ए दिल
किसी को उसे पढ़कर
उससे इश्क हो गया

*** Dard Shayari

दर्द-ए-दिल का इलाज़ कोई हक़ीम कर न पाया …..कुछ ऐसे ज़ख़्म मिले ज़िन्दगी से जिन्हे वक़्त भी भर न पाया !!

***

बज़्म -ए- वफा मैं हमारी गरीबी ना पूछ,
एक दर्द -ए- दिल है, वो भी किसी अज़ीज़ का दिया हुआ.

***

यह ग़ज़लों की दुनिया भी अजीब है;

यहाँ आँसुओं का भी जाम बनाया जाता है;

कह भी देते हैं अगर दर्द-ए-दिल की दास्तान;

फिर भी वाह-वाह ही पुकारा जाता है।

***

गर लफ्ज़ों में कर सकते बयान इंतेहा-ए-दर्द-ए-दिल,

लाख तेरा दिल पत्थर का सही, कब का मोम कर देते…..

***

मुझे दर्द-ए-ईश्क का मजा मालुम है….
दर्द -ए-दिल की इंतहा मालुम है….
मुस्कुराने की दुआ न दो…पल भर मुस्कुराने
की सजा मालुम है..

*** Dard Shayari

दर्द-ए-दिल जुदाई सहना आहसान नही होता,
कीमती चीज़ का हर कोई काबिल नही होता
यह तो रब की मेहेरबानी है,
वरना दोस्त हर किसी के नसीब मैं नही होता

***

हल्का हल्का सा दर्द ए दिल
हल्की हल्की ये ठंडी हवाएँ
तुम्हारा यादों में आने का
अंदाज ही अलग है…!

***

नासमझ तो वो ना थे इतना..
के प्यार को हमारे समझ ना सके..

पेश किया दर्द-ए-दिल हमने नगमों मे..
उसे भी वो सिर्फ “शेर” समझ बैठे…

***

दर्द ए दिल की आह तुम न समझोगे कभी
हर दर्द का मातम सरेआम नहीं होता.

***

हम तो उसको ही समझते हैं दर्द-ए-दिल… …

वो जो बेवफाई भी दे तो आँचल भर लो ……

जाके दम तोड़े भी तो उसकी बाहों मे…. ..

उसे उम्मीद की लहरों का साहिल कर लो….

***

दर्द-ए-दिल को ताब आ जाए…..जिसमे तुम हो काश कहीं से वो ख़्वाब आ जाए !!

***

हर घड़ी इक नया हादसा हो गया
दर्द-ए-दिल यूँ बढ़ा, ख़ुद दवा हो गया

***

अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आंसू..!!

अभी तो छेड़ी ही कहा हे दर्द-ए-दिल की दास्तान हमने..

***

महफ़िल में कर रहा था वो ग़ैरों से दिल्लगी ।
अंदाज़े गिला यार का कितना था दिलनशीं ।।

***

जाने क्यों लोग मोहब्बत किया करते हैं
दिल के बदले दर्द-ए-दिल लिया करते हैं

***

मुझे दर्द-ए-दिल का पता न था
मुझे आप किसलिए मिल गए
मैं अकेले यूँ ही मजे में था
मुझे आप किसलिए मिल गए

*** Dard Shayari

उम्र भर ये मेरे दिल को तडपायेगा …!!!
:
:
दर्द-ए-दिल अब मेरे साथ ही जायेगा …!!!

***

ज़हर की चुटकी ही मिल जाए बराए दर्द-ए-दिल!
कुछ न कुछ तो चाहिए बाबा दवा-ए-दर्द-ए-दिल!!

रात को आराम से हूँ मैं न दिन को चैन से!
हाए ऐ वहशते दिल, हाए हाए दर्द-ए-दिल!!

***

मोहब्बत करने वालों का यही हश्र होता है,
दर्द-ए-दिल होता है, दर्द-ए-जिगर होता है,
बंद होंठ कुछ ना कुछ गुनगुनाते ही रहते हैं,
खामोश निगाहों का भी गहरा असर होता है।

***

रूठ कर हमसे सदा के लिए जाने वाले ।
बेवज़ह बेसबब ही दिल को दुखाने वाले ।।
मेरी मजबूरियों को गर कभी समझा होता ।
मेरे सीने से लिपट जाता रुलाने वाले ।।

*** Dard Shayari

चलते हैं अंगारों पर ओढ़े चादर इश्क़ की
थाम लेते हैं पलको पर अश्क-ए-तूफान को
सुलगते हैं दर्द -ए-दिल में लिए याद महबूब की
आंसूओं में ना बहाते रिसते हुए “जख्म” को


Hinglish

dard shayari

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dard shayariye kalam bhee kamabakht bahut dilajalee hain. ?jab jab bhee mujhe dard hua ye khoob chalee hain***

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aarazoo yah nahin ki gam ka toofaan tal jaaye;fikr to yah hai ki kaheen aapaka dil na badal jaaye;kabhee mujhako agar bhulaana chaaho to;dard itana dena ki mera dam nikal jaay.***

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ham par sau julm-o-sitam kijiye …….bas ek baar milakar dard-e-dil kee dava kijiye ……***

dekh liya hamane har baar har dafa kar ke …. bas dard-e-dil hee paaya hai vafa kar ke !!***

zameen hai ham yah aasamaan tumhaara haidin hai sabhee ka par yah shaam tumhaara haipattharon kee moorat mein dab gayee hai zindagee meree***

kin lafzon mein banya karoon dard-e-dil ko main,sunane vaale to bahut hain, samajhane vaala koee nahee…***

dard-e-dil, dard-e-jigar dil mein jagaaya aapanepahale to main, shaayar tha, aashiq banaaya aapane….!!!***

dard shayaridard-e dil bhee na kisee se kah sakeaur aah bhee na ham dabee rakh sake***

 

dard-e dil bhee na kisee se kah sakeaur aah bhee na ham dabee rakh sake***

hamanen jab kiya dard-e-dil bayaan, to sher ban gaya;logon ne suna to vaah vaah kiya, dard aur badh gaya;mohabbat kee paak rooh mere saanson mein hai;khat likha jab gam kam karane ke lie to gam aur badh gaya.***

tere hisaab se ab aur dikha na jaega…. zakhm ab naasoor ban gae hain zindagee …. mujhase ab dard-e-dil aur likha na jaega !***

napharat kee bisaat par mohabbat kee hasaraton naakaam hotee rahee,dard e dil mein kasak jindagee kisee maasoom kee lamha dar lamha gulajaar hotee gaee….***

dard shayaridard e dil ko seene mein , chhupaana aa gaya,machalatee hasaraton ko ab , dabaana aa gaya..na rakhata hoon ummeed e vapha , ehale jahaan mein,haseen cheharon se nakaab , hamen uthaana aa gaya..**

*likhu kya aaj vakt ka takaaja heain,dard-e-dil abhee taaja hain,..gir pade hen aansoo mere kaagaj pe likhate vakt,lagata hen kalam mein syaahee kam dil mein dard jyaada hain!!!***

vo likhatee raheekaagaj pe apana dard e dilakisee ko use padhakarusase ishk ho gaya***

dard shayaridard-e-dil ka ilaaz koee haqeem kar na paaya …..kuchh aise zakhm mile zindagee se jinhe vaqt bhee bhar na paaya !!***

bazm -e- vapha main hamaaree gareebee na poochh,ek dard -e- dil hai, vo bhee kisee azeez ka diya hua.***

yah gazalon kee duniya bhee ajeeb hai;yahaan aansuon ka bhee jaam banaaya jaata hai;kah bhee dete hain agar dard-e-dil kee daastaan;phir bhee vaah-vaah hee pukaara jaata hai.***

gar laphzon mein kar sakate bayaan inteha-e-dard-e-dil,laakh tera dil patthar ka sahee, kab ka mom kar dete…..***

mujhe dard-e-eeshk ka maja maalum hai….dard -e-dil kee intaha maalum hai….muskuraane kee dua na do…pal bhar muskuraanekee saja maalum hai..***

dard shayaridard-e-dil judaee sahana aahasaan nahee hota,keematee cheez ka har koee kaabil nahee hotaayah to rab kee meherabaanee hai,varana dost har kisee ke naseeb main nahee hota***

halka halka sa dard e dilahalkee halkee ye thandee havaentumhaara yaadon mein aane kaandaaj hee alag hai…!***

naasamajh to vo na the itana..ke pyaar ko hamaare samajh na sake..pesh kiya dard-e-dil hamane nagamon me..use bhee vo sirph “sher” samajh baithe…***

dard e dil kee aah tum na samajhoge kabheehar dard ka maatam sareaam nahin hota.***

ham to usako hee samajhate hain dard-e-dil… …vo jo bevaphaee bhee de to aanchal bhar lo ……jaake dam tode bhee to usakee baahon me…. ..use ummeed kee laharon ka saahil kar lo….***

dard-e-dil ko taab aa jae…..jisame tum ho kaash kaheen se vo khvaab aa jae !!***

har ghadee ik naya haadasa ho gayaadard-e-dil yoon badha, khud dava ho gaya***

abhee se kyon chhalak aaye tumhaaree aankh mein aansoo..!!abhee to chhedee hee kaha he dard-e-dil kee daastaan hamane.

mahafil mein kar raha tha vo gairon se dillagee .andaaze gila yaar ka kitana tha dilanasheen ..***

jaane kyon log mohabbat kiya karate haindil ke badale dard-e-dil liya karate hain***

mujhe dard-e-dil ka pata na thaamujhe aap kisalie mil gaemain akele yoon hee maje mein thaamujhe aap kisalie mil gae***

dard shayariumr bhar ye mere dil ko tadapaayega …!!!::dard-e-dil ab mere saath hee jaayega …!!!***

zahar kee chutakee hee mil jae barae dard-e-dil!kuchh na kuchh to chaahie baaba dava-e-dard-e-dil!!raat ko aaraam se hoon main na din ko chain se!hae ai vahashate dil, hae hae dard-e-dil!!***

mohabbat karane vaalon ka yahee hashr hota hai,dard-e-dil hota hai, dard-e-jigar hota hai,band honth kuchh na kuchh gunagunaate hee rahate hain,khaamosh nigaahon ka bhee gahara asar hota hai.***

rooth kar hamase sada ke lie jaane vaale .bevazah besabab hee dil ko dukhaane vaale ..meree majabooriyon ko gar kabhee samajha hota .mere seene se lipat jaata rulaane vaale ..***

dard shayarichalate hain angaaron par odhe chaadar ishq keethaam lete hain palako par ashk-e-toophaan kosulagate hain dard -e-dil mein lie yaad mahaboob keeaansooon mein na bahaate risate hue “jakhm” ko

 

 

 

3 thoughts on “Dard Shayari दर्द शायरी”

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