Love Shayari लव शायरी (मोहब्बत शायरी)

Love Shayari in Hindi

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लव शायरी (मोहब्बत शायरी)

यहाँ हम अपने प्रिय पाठकों के लिए लव शायरी या मोहब्बत शायरी का एक विशाल और सबसे अच्छा संग्रह प्रकाशित कर रहें हैं। आप इस मोहब्बत की शायरी (Love Shayari) को अपने फेसबुक वाल और व्हाट्सएप्प ग्रुप में शेयर कर सकतें हैं और अपने जज़्बात उन तक आसानी से पहुंचा सकतें हैं जिन से आप प्यार करतें हैं।

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love shayari2 लव शायरी (मोहब्बत शायरी)
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वो कितना मेहरबान था हम पर की हज़ारो ग़म दे गया हम कितने खुदगर्ज थे की कुछ न दे सके मोहब्बत के सिवा

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हर मर्ज का इलाज मिलता था उस बाजार में,,, मोहब्बत का नाम क्या लिया तमाम दवाखाने बन्द हो गये..!!

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जब मोहब्बत ही नहीं दरमियां, -हम रूठे क्या, – वो मनायें क्या,,

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मोहब्बत संभाली गई,न नफरतें पाली गईं… बङा अफसोस है उस जिंदगी का,जो तेरे पीछे खाली गई….

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तुम्हारी हर अदा मोहब्बत सी लगती है एक पल की जुदाई मुद्दत सी लगती है जिंदगी में हरपल तेरी जरुरत लगती है”

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बहक जाने देँ मुझे मेरे यार की मोहब्बत में
ये वो नशा है जो .मेरे सर से कभी उतरता नही

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तेरी मोहब्बत में एक अजब सा नशा है, तभी तो सारी दुनिया तुमपे फ़िदा है .

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यह दुनिया एक लम्हे में तुम्हे बर्बाद कर देगी, मोहब्बत मिल भी जाये तो उसे मशहूर मत करना

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वो इश्क़ हि क्या जिसमे हिसाब हो… मोहब्बत तो हमेशा बेहिसाब होती है.

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करने तबाह मोहब्बत के बहाने ले गया, एक परिंदा आकर मेरी उड़ाने ले गया कल गली से उनकी गुज़रे तो लगा, कोई आकर मोहब्बत के ज़माने ले…

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वो तब भी थी, अब भी है और हमेशा ही रहेगी ..! ये मोहब्बत है ….. कोई तालीम नहीं जो पूरी हो जाएं ..!!

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सुना है, नफरत की दुकान खोल रहे हो… थोड़ी मोहब्बत भी रख लेना दिखावे के लिये…!!!

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आज रास्ते मे कुछ प्यार भरे पन्ने टुकड़ो मे मिले…. शायद फिर किसी गरीब के मोहब्बत का तमाशा हो गया….|

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तजुर्बा कहता है, मोहब्बत से किनारा कर लूँ… और दिल कहता है की, ये तजुर्बा दोबारा कर लूँ…

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कुछ तो शराफत सीख ले ऐ मोहब्बत, शराब से… बोतल पे कम से कम लिखा तो है कि ” मै जानलेवा हूँ”.

*** Love Shayari

सिर्फ एक मोहब्बत की रौशनी ही बाकी है वर्ना जिस तरफ देखो दूर तक अँधेरा है.

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लरजते आसुओ की कहानी है मोहब्बत बरसती आँखों की जुबानी है मोहब्बत पास रहके भी दूर रहती है बहोत महकते फूलों की रातरानी है मोहब्बत.

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क्या फ़र्क है दोस्ती और मोहब्बत में, रहते तो दोनों दिल में ही. बरसों बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है, और मोहब्बत नज़र चुरा लेती है।

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ए ख़ुदा तू मेरी मोहब्बत को दूरियों में बिखेर दे न मैं उन्हें पाने की दुआ करूँ न वो खाव्हिशें रखें।

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ये उनकी मोहब्बत का नया दौर है

जहाँ था कल तक मैं…वहाँ आज कोई और है–

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बहते अश्कों की ज़ुबान नहीं होती; लफ़्ज़ों में मोहब्बत बयां नही होती; मिले जो प्यार तो कदर करना; किस्मत हर किसी पर मेहरबां नहीं होती।..

*** Love Shayari

संभलना संभलकर बहकना है लाजिम

मोहब्बत में दिल का मचलना है लाजिम

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“मेरी मोहब्बत कि ना सही मेरे सलीके की तो दाद दे…

रोज़ तेरा ज़िक्र करता हूँ…बगैर तेरा नाम लिए…..”

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एक रस्म मोहब्बत में भी बनानी होगी , छोड़ के जाए कोई भी शौक से मगर वज़ह एक दूसरे को बतानी होगी….

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काश वो आकर कहे, एक दिन मोहब्बत से……!!

ये बेसब्री कैसी ? तेरी हूँ, तसल्ली रख…!!

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हमसे बदल गये वो निगाहें तो क्या हुआ

जिंदा हैं कितने लोग मोहब्बत किये बगैर!

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क्यू करते हो, मुझसे इतनी खामोश मोहब्बत, लोग समझते हैं, इस बदनसीब का कोई नही..

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लिख कर तुम्हारा नाम पन्नों पर, हम बडे इतमिनान से उसे फिर मोहब्बत पढ़ते हैं !

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मुझसे मोहब्बत पर मशवरा मांगते हे लोग…

तेरा इश्क़ कुछ इस तरहा तजुर्बा दे गया मुझे..

*** Love Shayari

चुपचाप गुज़ार देगें तेरे बिना भी ये ज़िन्दगी.. लोगो को सीखा देगें मोहब्बत ऐसे भी होती है..!

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तेरी मोहब्बत से लेकर तेरे अलविदा कहने तक..

मेंने सिर्फ तुझे चाहा है, तुझसे कुछ नहीं चाहा..!

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आ छोडकर इस जंहा को कही दूर चले, मोहब्बत से हमारी वंहा कोई ना जले,

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हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे; वो भी पल पल हमें आजमाते रहे; जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया; हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।

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है परेशानियाँ यूँ तो बहुत सी ज़िंदगी में.. तेरी मोहब्बत सा मगर, कोई तंग नहीं करता…!!

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अब तो शायद ही मुझसे मोहब्बत करे कोई,

मेरी आँखों में तुम साफ नज़र आती हो…

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वादे वफ़ा के और चाहत जिस्म की.

अगर ये मोहब्बत है तो फिर हवस किसे कहते है.

***

चलो अपनी चाहतें नीलाम करते हैं ,

मोहब्बत का सौदा सरे आम करते है ,

तुम अपना साथ हमारे नाम कर दो ,

हम अपनी ज़िन्दगी तुम्हारे नाम करते हैं |

*** Love Shayari

जमाने को रास नही आते, किस्से अब मोहब्बत के..

दर्द-ए-बेवफ़ाई सुनता है अब,बड़े शौक से जमाना..

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मोहब्बत की कसौटी पर साथ चले थे हम दोनो… तुमने जब रास्ते बदल लिये…. हमने सब रास्ते ही छोड़ दिये….

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इस मोहब्बत की किताब के दो ही सबक याद हुए कुछ तुम जैसे आबाद हुऐ कुछ हम जैसे बर्बाद हुए.

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तुमने ही सफ़र कराया था मोहब्बत कीकश्ती का, अब नजरे क्यों चुराते हो मुझे डूबता देख कर..||

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अधूरी मोहब्बत मिली तो नींदें भी रूठ गयी…! गुमनाम ज़िन्दगी थी तो कितने सकून से सोया करते थे…!!

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तुम मोहब्बत के सौदे भी अजीब करते हो ,बस मुस्कुरा देते हो और अपना बना लेते हो

*** Love Shayari

“दिल में एक उम्मीद बरकरार रखी है….ऐ दोस्तों…., कही पढ़ लिया था कि सच्ची मोहब्बत लौटकर आती है…!

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हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें , खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें!!!

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बहुत खूब सूरत है आखै तुम्हारी इन्हें बना दो किस्मत हमारी हमें नहीं चाहिये ज़माने की खुशियाँ अगर मिल जाये मोहब्बत तुम्हारी

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सदा आज़ाद रहते थें हमें मालूम ही क्या था मोहब्बत क्या बला है मेरे टूटे हुए दिल से कोई तो आज ये पूछे के तेरा हाल क्या है

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दिल टूटा है तो अपनी ही गलती से, उसने कब कहा था कि तू मोहब्बत कर…

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अजब फ़ल्सफ़ा है “वक्त” क मोहब्बत के दौर मे ईन्तजार-ए-मोहब्बत मे “वक्त” कटता नही… दीदार-ए-मोहब्बत मे “वक्त” थमता नही…!!

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उसका वादा भी अजीब था.. कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे, मैंने भी ये नहीं पुछा की, मोहब्बत के साथ,या यादोंके साथ..!!

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मेरी हालत देखकर मोहब्बत भी शर्मिदा है, ये शख्स जो सब कुछ गवां चूका, आज भी जिंदा है।”

*** Love Shayari

“न जख्म भरे,….न शराब सहारा हुई… ~न वो वापस लौटी न मोहब्बत दोबारा हुई !”

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मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल, दिल से मिलता है मगर मुश्किल यह है की दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है.

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कभी वो कहती थी तेरी मोहब्बत की खातिर जान भी दे दुंगी…… आज कहती है मेरा साथ छोड़ दो मेरी जिंदगी का सवाल है……

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हो चुका अब किसी का वो कभी मेरी जिन्दगी था वो ।। भूलता कौन है मोहब्बत पहली मेरी तो सारी खुशी था वो ।।

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मोहबत इज्जत से शुरू होती है मोहब्बत इज्जत पर ही खत्म होती है ।

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चलो मान लेता हुँ के मुझे मोहब्बत करनी नहीं आती ।

लेकिन आप तो ये बताओ आप को दिल तोडना किसने सीखाया,,,,,,,,,

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मोहब्बत के दिनों की यहीं खराबी है,

ये रूठ जाये तो फिर लौटकर नहीं आते…

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समेट कर ले जाओ आप अपने झूठे वादों के अधूरे किस्से,

अगली मोहब्बत में आपको फिर इनकी जरुरत पड़ेगी !!

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तुम अगर भुल भी जाओ तो ये हक है तुमको

मैंरी बात और है मैंने तो मोहब्बत की है

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बरबाद करने के और भी रास्ते थे “फ़राज़”,

ना जाने उन्हें मोहब्बत का ख़याल क्यों आया,,

*** Love Shayari

ना कोई शोहरत ना दौलत चाहता है ।।। || || || ||

ये दिल केवल मोहब्बत चाहता है.!!

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मत पूछो कितनी मोहब्बत है उस्से,

बारीश की बूंद भी अगर छु ले उसे तो दिल में ‘आग ’ लग जाती है…

***

दीवान-ए-ग़ज़ल जिसकी मोहब्बत में लिखा था,

वो शक्स किसी और की किस्मत में लिखा था,

***

ज़रा तलाश तो कर मेरे प्यार को अपने दिल में,

थोडा जो दर्द हो तो समझ लेनाके मोहब्बत अभी ज़िंदा है.

***

ये मेहताब चेहरा,ये मखमूर आँखें ! कहीं होश मेरा न खो जाए,

न देखूं तो न चैन मिले, देखूं तो मोहब्बत हो जाए!

*** Love Shayari

छोङ दो तन्हाई में मुझको यारों, मेरे साथ रहकर क्या पाओगे ?

अगर हो गयी आपको भी मोहब्बत कभी, मेरी तरह तुम भी पछताओगे !

***

जिंदगी मे कभी ईतना मत मुस्कुराना की नजर लग जाये

जमाने की हर आँख मेरी तरह मोहब्बत की नही होती-:)

***

मोहब्बत का अजीब दस्तूर देखा,

जो उसकी जीत हो तो हम हार जाये।

***

जब कभी सिमटोगे इन बाहों में आ कर तो,

मोहब्बत की दास्ता हम नहीं हमारी धडकने सुनाएगी….

***

मिलने को तो दुनिया मे कई चेहरे मिले ,

पर तुम सी मोहब्बत हम खुद से भी न कर पाये..

***

कुछ  खास नही बस इतनी सी है  मोहब्बत मेरी
हर रात का आखरी  खयाल और हर सुबह की पहली सोच हो तुम

***

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नहीं समझा हमने,

वरना खेल तो बोहत खेले है हमने पर कभी हारे नहीं

***

चाहत की कोई हद नहीँ होती.. सारी उम्र भी बीत जाए..

मोहब्बत कभी कम नहीँ होती.!!

***

जिनको हमने चाहा मोहब्बत की हदें तोड़ कर आज उसने देखा नहीं निगाह मोड़ कर ये जान कर बहुत दुःख हुआ मुझे कि वो खुद भी तन्हा हो गये मुझे छोड़ कर

***

खुशबू क्यों ना आये मेरी बातों से यारों,

मैंने बरसों से एक ही फूल से जो मोहब्बत की है

***

फिर न सिमटेगी मोहब्बत जो बिखर जायेगी,

ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी,

***

मुस्कुराने से शुरू और रुलाने पे खतम…।

ये वो जुल्म हैं जिसे लोग मोहब्बत कहते हैं…।।

*** Love Shayari

वो ना ही मिलते तो अच्छा होता

बेकार ही में मोहब्बत से नफ़रत हो गई

***


Hinglish

mohabbat shayari in English font

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har marj ka ilaj milata tha us bajar mein,,, mohabbat ka nam kya liya tamam dawakhane band ho gaye..!!**

*jab mohabbat he nahin daramiyan, -ham roothe kya, – wo manayen kya,,***

na mohabbat sambhale gae,na nafaraten pale gaen… bana afasos hai us jindage ka,jo tere pechhe khale gae….***

tumhare har ada mohabbat se lagate hai ek pal ke judae muddat se lagate hai jindage mein harapal tere jarurat lagate hai”***

bahak jane den mujhe mere yar ke mohabbat menye wo nasha hai jo .mere sar se kabhe utarata nahe***

tere mohabbat mein ek ajab sa nasha hai, tabhe to sare duniya tumape fida hai .***

yah duniya ek lamhe mein tumhe barbad kar dege, mohabbat mil bhe jaye to use mashahoor mat karana***

wo ishq hi kya jisame hisab ho… mohabbat to hamesha behisab hote hai.***

karane tabah mohabbat ke bahane le gaya, ek parinda akar mere udane le gaya kal gale se unake guzare to laga, koe akar mohabbat ke zamane le…***

wo tab bhe the, ab bhe hai aur hamesha he rahege ..! ye mohabbat hai ….. koe talem nahin jo poore ho jaen ..!!***

suna hai, nafarat ke dukan khol rahe ho… thode mohabbat bhe rakh lena dikhawe ke liye…!!!***

aj raste me kuchh pyar bhare panne tukado me mile…. shayad fir kise gareb ke mohabbat ka tamasha ho gaya….|***

tajurba kahata hai, mohabbat se kinara kar loon… aur dil kahata hai ke, ye tajurba dobara kar loon…***

kuchh to sharafat sekh le ai mohabbat, sharab se… botal pe kam se kam likha to hai ki ” mai janalewa hoon”.***

  ek mohabbat ke raushane he bake hai warna jis taraf dekho door tak andhera hai.**

*larajate asuo ke kahane hai mohabbat barasate ankhon ke jubane hai mohabbat pas rahake bhe door rahate hai bahot mahakate foolon ke ratarane hai mohabbat.***

kya fark hai doste aur mohabbat mein, rahate to donon dil mein he. barason bad milane par doste sene se laga lete hai, aur mohabbat nazar chura lete hai.***

e khuda too mere mohabbat ko dooriyon mein bikher de na main unhen pane ke dua karoon na wo khawhishen rakhen.***

ye unake mohabbat ka naya daur haijahan tha kal tak main…wahan aj koe aur hai–

***

bahate ashkon ke zuban nahin hote; lafzon mein mohabbat bayan nahe hote; mile jo pyar to kadar karana; kismat har kise par meharaban nahin hote…**

 

sambhalana sambhalakar bahakana hai lajimamohabbat mein dil ka machalana hai lajim***“

mere mohabbat ki na sahe mere saleke ke to dad de…roz tera zikr karata hoon…bagair tera nam lie…..”***

ek rasm mohabbat mein bhe banane hoge , chhod ke jae koe bhe shauk se magar wazah ek doosare ko batane hoge….***

kash wo akar kahe, ek din mohabbat se……!!ye besabre kaise ? tere hoon, tasalle rakh…!!***

hamase badal gaye wo nigahen to kya huajinda hain kitane log mohabbat kiye bagair!***

kyoo karate ho, mujhase itane khamosh mohabbat, log samajhate hain, is badanaseb ka koe nahe..***

likh kar tumhara nam pannon par, ham bade itaminan se use fir mohabbat padhate hain !***

mujhase mohabbat par mashawara mangate he log…tera ishq kuchh is taraha tajurba de gaya mujhe..***

lowai shayarichupachap guzar degen tere bina bhe ye zindage.. logo ko sekha degen mohabbat aise bhe hote hai..!***

tere mohabbat se lekar tere aloveida kahane tak..menne sirf tujhe chaha hai, tujhase kuchh nahin chaha..!***

a chhodakar is janha ko kahe door chale, mohabbat se hamare wanha koe na jale,***

ham ummedon ke duniyan basate rahe; wo bhe pal pal hamen ajamate rahe; jab mohabbat mein marane ka wakt aya; ham mar gae aur wo muskurate rahe.***

hai pareshaniyan yoon to bahut se zindage mein.. tere mohabbat sa magar, koe tang nahin karata…!!***

ab to shayad he mujhase mohabbat kare koe,mere ankhon mein tum saf nazar ate ho…***

wade wafa ke aur chahat jism ke.agar ye mohabbat hai to fir hawas kise kahate hai.***

chalo apane chahaten nelam karate hain ,mohabbat ka sauda sare am karate hai ,tum apana sath hamare nam kar do ,ham apane zindage tumhare nam karate hain |

***jamane ko ras nahe ate, kisse ab mohabbat ke..dard-e-bewafae sunata hai ab,bade shauk se jamana..***

mohabbat ke kasaute par sath chale the ham dono… tumane jab raste badal liye…. hamane sab raste he chhod diye….***

is mohabbat ke kitab ke do he sabak yad hue kuchh tum jaise abad huai kuchh ham jaise barbad hue.***

tumane he safar karaya tha mohabbat kekashte ka, ab najare kyon churate ho mujhe doobata dekh kar..||***

adhoore mohabbat mile to nenden bhe rooth gaye…! gumanam zindage the to kitane sakoon se soya karate the…!!***

tum mohabbat ke saude bhe ajeb karate ho ,bas muskura dete ho aur apana bana lete ho***

dil mein ek ummed barakarar rakhe hai….ai doston…., kahe padh liya tha ki sachche mohabbat lautakar ate hai…!***

haq se do to tere nafarat bhe kubool hai hamen , khairat mein to ham tumhare mohabbat bhe na len!!!**

*bahut khoob soorat hai akhai tumhare inhen bana do kismat hamare hamen nahin chahiye zamane ke khushiyan agar mil jaye mohabbat tumhare***

sada azad rahate then hamen maloom he kya tha mohabbat kya bala hai mere toote hue dil se koe to aj ye poochhe ke tera hal kya hai***

dil toota hai to apane he galate se, usane kab kaha tha ki too mohabbat kar…***

ajab falsafa hai “wakt” ka mohabbat ke daur me entajar-e-mohabbat me “wakt” katata nahe… dedar-e-mohabbat me “wakt” thamata nahe…!!***

usaka wada bhe ajeb tha.. ki jindage bhar sath nibhayenge, mainne bhe ye nahin puchha ke, mohabbat ke sath,ya yadonke sath..!!***

mere halat dekhakar mohabbat bhe sharmida hai, ye shakhs jo sab kuchh gawan chooka, aj bhe jinda hai.”***

 

“na jakhm bhare,….na sharab sahara hue… ~na wo wapas laute na mohabbat dobara hue !”***

mohabbat rang de jate hai jab dil, dil se milata hai magar mushkil yah hai ke dil bade mushkil se milata hai.***

kabhe wo kahate the tere mohabbat ke khatir jan bhe de dunge…… aj kahate hai mera sath chhod do mere jindage ka sawal hai……***

ho chuka ab kise ka wo kabhe mere jindage tha wo .. bhoolata kaun hai mohabbat pahale mere to sare khushe tha wo ..***

mohabat ijjat se shuroo hote hai mohabbat ijjat par he khatm hote hai .***

chalo man leta hun ke mujhe mohabbat karane nahin ate .lekin ap to ye batao ap ko dil todana kisane sekhaya,,,,,,,,,***

mohabbat ke dinon ke yahen kharabe hai,ye rooth jaye to fir lautakar nahin ate…***

samet kar le jao ap apane jhoothe wadon ke adhoore kisse,agale mohabbat mein apako fir inake jarurat padege !!***

tum agar bhul bhe jao to ye hak hai tumakomainre bat aur hai mainne to mohabbat ke hai***

barabad karane ke aur bhe raste the “faraz”,na jane unhen mohabbat ka khayal kyon aya,,***

na koe shoharat na daulat chahata hai … || || || ||ye dil kewal mohabbat chahata hai.!!***mat poochho kitane mohabbat hai usse,baresh ke boond bhe agar chhu le use to dil mein ‘ag ’ lag jate hai…***

dewan-e-gazal jisake mohabbat mein likha tha,wo shaks kise aur ke kismat mein likha tha,***

zara talash to kar mere pyar ko apane dil mein,thoda jo dard ho to samajh lenake mohabbat abhe zinda hai.***

ye mehatab chehara,ye makhamoor ankhen ! kahen hosh mera na kho jae,na dekhoon to na chain mile, dekhoon to mohabbat ho jae!***

chhon do tanhae mein mujhako yaron, mere sath rahakar kya paoge ?agar ho gaye apako bhe mohabbat kabhe, mere tarah tum bhe pachhataoge !***

jindage me kabhe etana mat muskurana ke najar lag jayejamane ke har ankh mere tarah mohabbat ke nahe hote-:)***

mohabbat ka ajeb dastoor dekha,jo usake jet ho to ham har jaye.***jab kabhe simatoge in bahon mein a kar to,mohabbat ke dasta ham nahin hamare dhadakane sunaege….***

milane ko to duniya me kae chehare mile ,par tum se mohabbat ham khud se bhe na kar paye..***

kuchh khas nahe bas itane se hai mohabbat merehar rat ka akhare khayal aur har subah ke pahale soch ho tum***

tere mohabbat ko kabhe khel nahin samajha hamane,warana khel to bohat khele hai hamane par kabhe hare nahin**

*chahat ke koe had nahen hote.. sare umr bhe bet jae..mohabbat kabhe kam nahen hote.!!***

jinako hamane chaha mohabbat ke haden tod kar aj usane dekha nahin nigah mod kar ye jan kar bahut duhkh hua mujhe ki wo khud bhe tanha ho gaye mujhe chhod kar***

khushaboo kyon na aye mere baton se yaron,mainne barason se ek he fool se jo mohabbat ke hai**

*fir na simatege mohabbat jo bikhar jayege,zindage zulf nahin jo fir sanwar jayege,**

*muskurane se shuroo aur rulane pe khatam….ye wo julm hain jise log mohabbat kahate hain…..***

wo na he milate to achchha hota

bekar he mein mohabbat se nafarat ho gae

 

 

8 thoughts on “Love Shayari लव शायरी (मोहब्बत शायरी)”

  1. छोङ दो तन्हाई में मुझको यारों, मेरे साथ रहकर क्या पाओगे ?

    अगर हो गयी आपको भी मोहब्बत कभी, मेरी तरह तुम भी पछताओगे !

    ***

    जिंदगी मे कभी ईतना मत मुस्कुराना की नजर लग जाये

    जमाने की हर आँख मेरी तरह मोहब्बत की नही होती-:)

    ***

    मोहब्बत का अजीब दस्तूर देखा,

    जो उसकी जीत हो तो हम हार जाये।

    ***

    जब कभी सिमटोगे इन बाहों में आ कर तो,

    मोहब्बत की दास्ता हम नहीं हमारी धडकने सुनाएगी….

    ***

    मिलने को तो दुनिया मे कई चेहरे मिले ,

    पर तुम सी मोहब्बत हम खुद से भी न कर पाये..

    ***

    कुछ  खास नही बस इतनी सी है  मोहब्बत मेरी
    हर रात का आखरी  खयाल और हर सुबह की पहली सोच हो तुम

    ***

    तेरी मोहब्बत को कभी खेल नहीं समझा हमने,

    वरना खेल तो बोहत खेले है हमने पर कभी हारे नहीं

    ***

    चाहत की कोई हद नहीँ होती.. सारी उम्र भी बीत जाए..

    मोहब्बत कभी कम नहीँ होती.!!

    ***

    जिनको हमने चाहा मोहब्बत की हदें तोड़ कर आज उसने देखा नहीं निगाह मोड़ कर ये जान कर बहुत दुःख हुआ मुझे कि वो खुद भी तन्हा हो गये मुझे छोड़ कर

    ***

    खुशबू क्यों ना आये मेरी बातों से यारों,

    मैंने बरसों से एक ही फूल से जो मोहब्बत की है

    ***

    फिर न सिमटेगी मोहब्बत जो बिखर जायेगी,

    ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी,

    ***

    मुस्कुराने से शुरू और रुलाने पे खतम…।

    ये वो जुल्म हैं जिसे लोग मोहब्बत कहते हैं…।।

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