अल्लाह की राह में जिहाद करने की फ़ज़ीलत

जिहाद करने की फज़िलतें

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है :

बेशक मोमिन वोही लोग हैं जो अल्लाह और उस के रसूल पर ईमान लाए और अपने  मालों और जानों के साथ अल्लाह की राह में जिहाद किया येही लोग सच्चे हैं।

हज़रते नो’मान बिन बशीर रज़ीअल्लाहो अन्हो का कहना है : मैं मिम्बरे रसूल के करीब था कि एक आदमी को येह कहते हुवे सुना कि मुझे इस्लाम के बाद और किसी अमल की तमन्ना नहीं मगर येह कि मैं हाजियों को पानी पिलाऊं, दूसरे ने कहा : मुझे इस्लाम के बा’द बैतुल्लाह की ख़िदमत के सिवा किसी और अमल की तमन्ना नहीं है, एक और बोला कि तुम्हारे इन कामों से जिहाद अफ़ज़ल है । हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने उन्हें झिड़क दिया और कहा कि मिम्बरे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के करीब आवाजें बुलन्द न करो, वोह जुमुआ का दिन था। जब मैं ने जुमुआ की नमाज़ अदा कर ली तो मैं हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुवा और इस बात के मुतअल्लिक़ पूछा : जिस में वोह इख्तिलाफ़ कर रहे थे, तब अल्लाह तआला ने अपना येह फ़रमान नाज़िल फ़रमाया

क्या हाजियों का पानी पिलाना और मस्जिदे हराम की खिदमत करना उस शख्स के आ‘माल की तरह है जो अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान लाता है और उस की राहे खुदा में जिहाद करता है येह लोग अल्लाह के नज़दीक बराबर नहीं हो सकते और अल्लाह तआला ज़ालिमों की क़ौम को हिदायत नहीं फ़रमाता।

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हज़रते अब्दुल्लाह बिन सलाम रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि हम चन्द साथी इकठे बैठे थे। हम ने कहा अगर हम जानते कि कौन सा अमल अफ़ज़ल है और अल्लाह तआला को ज़ियादा महबूब है तो हम वोही अमल करते, इस पर येह आयाते मुबारका नाज़िल हुईं। “अल्लाह की पाकी बयान करती है जो चीज भी आस्मानों और ज़मीनों में है और वोह गालिब हिक्मत वाला है ऐ ईमान वालो वोह बात क्यूं कहते हो जो नहीं करते अल्लाह के नज़दीक येह बात बहुत ना पसन्दीदा है कि तुम वोह कुछ कहो जो नहीं करते तहकीक अल्लाह तआला उन लोगों को महबूब रखता है जो उस की राह में सफ़ बांध कर लड़ते हैं जैसे वोह सीसा पिलाई हुई दीवार हों। और हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने हमें येह आयात सुनाई ।

जिहाद जैसा कोई अमल नहीं

एक रिवायत में है कि एक शख्स ने अर्ज की : या रसूलल्लाह ! मुझे ऐसा अमल बतलाइये जो जिहाद के बराबर हो, आप ने फ़रमाया : मैं ऐसा कोई अमल नहीं पाता, फिर फ़रमाया : क्या तुम इस बात की ताब रखते हो कि जब मुजाहिद जिहाद के लिये रवाना हों तो तुम मस्जिद में दाखिल हो जाओ और हमेशा इबादत में रहो, कभी वक़्फ़ा न करो, हमेशा रोजे से रहो, कभी इफ्तार न करो, उस ने अर्ज़ की : या रसूलल्लाह ! कौन है जो इस की ताकत रखता है।

हज़रते अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के एक सहाबी का ऐसी घाटी से गुज़र हुवा जिस में मीठे पानी का चश्मा था, उन्हों ने कहा  मैं लोगों से गोशा नशीनी इख्तियार कर के इस घाटी में इबादत करूंगा और यहीं कियाम करूंगा लेकिन हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की इजाज़त के बिगैर ऐसा हरगिज़ नहीं करूंगा चुनान्चे, उन्हों ने हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की

ख़िदमत में आ कर येह बात अर्ज़ की तो आप ने फ़रमाया : ऐसा न करो क्यूंकि तुम्हारा राहे खुदा में जिहाद के लिये खड़ा होना, घर में सत्तर साल की नमाज़ से अफ़ज़ल है, क्या तुम इस बात को पसन्द नहीं करते कि अल्लाह तुम्हें बख़्श दे और तुम्हें जन्नत में दाखिल करे, राहे खुदा में जिहाद करो जो शख्स ऊंटनी का दूध दोहने के वक्फे के बराबर भी जिहाद करता है उस के लिये जन्नत वाजिब हो जाती है।

जब हुजूर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने अपने सहाबी को इबादत के लिये उज्लत नशीनी की इजाजत नहीं दी हालांकि उन का शौके इबादत मुसल्लम था और नेकियों में उन की मुवाफ़क़त शको शुबा से बाला थी, बल्कि उन्हें जिहाद की तरगीब दी, तो हम जब कि हमारी नेकियां कम हैं और गुनाह ज़ियादा, हम हराम और मुश्तबा गिजाएं खाते हैं और हमारे अज़ाइम और निय्यतें फ़ासिद हैं, हमारे लिये जिहाद का तर्क करना किस तरह मुनासिब हो सकता है।

रसूले अकरम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का इरशाद है कि राहे खुदा में जिहाद करने वाले की मिसाल रोज़ादार, खुशूअ व खुजूअ से इबादत करने वाले, कियाम करने वाले, रुकूअ करने वाले और सुजूद करने वाले जैसी है और अल्लाह तआला जानता है कि कौन उस की राह में जिहाद करने वाला है।

फ़रमाने नबवी है कि जो अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर और मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के रसूल होने पर राजी हुवा उस के लिये जन्नत वाजिब हो गई । हज़रते अबू सईद खुदरी रज़ीअल्लाहो अन्हो को येह बात पसन्द आई, अर्ज की : या रसूलल्लाह ! एक बार येह बात मुझ से फिर इरशाद फ़रमा दीजिये चुनान्चे, आप ने उसे मुकर्रर फ़रमाया फिर फ़रमाया : एक और अमल है जिस के सबब अल्लाह तआला बन्दे के सो दरजात बुलन्द करता है और हर दो दरजात का दरमियानी फ़ासिला ज़मीनो आस्मान के फ़ासिले के बराबर होगा, अबू सईद रज़ीअल्लाहो अन्हो ने अर्ज़ की : या रसूलल्लाह ! वोह कौन सा अमल है? आप ने फ़रमाया : राहे खुदा में जिहाद करना।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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