Allah ta aala ka khouf – Bande ka Allah se Darna

अल्लाह ताआला का खौफ और खशियत (Taqwa and Fear of Allah in Hindi)

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

Color Codes –  कुरआन मजीद, हदीसे पाक, कौल (Quotes). 

 

दुरुद शरीफ पढने से मगफिरत

आकाए नामदार सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया की

“अल्लाह ताआला ने एक फ़रिश्ता पैदा किया जिसके दोनों बाजुओं का दरमियानी फासला पूरब और पश्चिम को घेरे हुए है, सर उसका अर्श के नीचे है और दोनों पाँव तहतुस्सरा में हैं, रुए ज़मीन पर आबाद मखलूक के बराबर उसके पैर हैं. मेरी उम्मत में से जब कोई मर्द या औरत मुझ पर दरूद भेजता है तो उस फ़रिश्ते को अल्लाह ताआला का हुक्म होता है की वह अर्श के निचे नूर के समुन्दर में गोता जन हो  (डुबकी लगाये) तो वह गोता लगाता है जब बाहर निकल कर अपने पर झाड़ता है तो उसके परों से कतरे टपकते हैं अल्लाह ताआला हर कतरे से एक फ़रिश्ता पैदा करता है जो क़यामत तक उस के लिए दुआ ए मगफिरत करता है.”

 

दुरुद शरीफ पढने से ईमान की सलामती

एक दाना का कौल है की “जिस्म की सलामती कम खाने में है और रूह की बक़ा कम गुनाहों में है और ईमान की सलामती हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम पर दुरुद और सलाम पढने में है.

 

ए ईमान वालों अल्लाह से डरो

अल्लाह ताआला का इरशाद है

“ए ईमान वालों अल्लाह से डरो!”

यानि दिल में खौफे खुदा पैदा करो और उस की इताअत और फरमा बरदारी करो.

“और इन्सान देखे की आइन्दा के लिए आगे क्या भेजा है”

मतलब यह है की क़यामत के दिन के लिए क्या अमल किया इस का मह्फूम यह है की सदका करो और नेक काम करो ताकि क़यामत के दिन उनका बदला पाओ और अपने रब से डरते रहो, अल्लाह ताआला तुम्हारी हर अच्छी और बुरी बात को जनता है .

 

क़यामत के दिन फ़रिश्ते ज़मीन, आसमान, दिन व् रात गवाही देंगे की आदम के बेटे/बेटी ने यह काम भलाई का किया या बुराई का, फरमाबरदारी की या ना फ़रमानी, यहाँ तक की इन्सान के अपने आज़ा (अंग) भी उसके खिलाफ गवाही देंगे, इमानदार और मुत्तक्की परहेज़गार इन्सान के हक में ज़मीन गवाही देगी चुनाचे ज़मीन यह कहेगी इस इन्सान ने मेरी पीठ पर नमाज़ पढ़ी, रोज़ा रखा, हज किया, जिहाद किया यह सुनकर ज़ाहिद व मुत्तकी इन्सान खुश होगा और काफ़िर और नाफरमान के खिलाफ ज़मीन गवाही देते हुए यह कहेगी की इसने मेरी पीठ पर शिर्क किया, ज़िना किया, शराब पी और हराम खाया,अब इसके लिए हलाक़त और बर्बादी है.

 

किसी बन्दे के दिल में अल्लाह ताआला के खौफ का पता किन बातों से चलता है?

ईमान वाला वह है जो जिस्म के तमाम आज़ा के साथ अल्लाह ताआला से डर रखता हो जैसा की फकीह अबू लैस ने फ़रमाया

“सात बातों में अल्लाह ताआला के खौफ का पता चल जाता है.

1 उस की ज़बान गलत बयानी, गीबत, चुगली, तोहमत और फुजूल बातें बोलने से बची हो और अल्लाह ताआला का ज़िक्र करने, तिलावत ए कुरान ए पाक करने, और दीनी इल्म सिखने में लगी हो.

2 उस के दिल से दुश्मनी, बुह्तान, और हसद निकल जाये, क्यों की हसद नेकियों को चाट जाता है जैसा की हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का फरमान है

“हसद नेकियों को खा जाता है जेसे आग लकड़ी को खा जाती है”

जानना चाहिए की हसद दिल की सब से बुरी बिमारियों में से एक बीमारी है और दिल की बिमारियों का इलाज सिर्फ इल्म और अमल से ही हो सकता है.

3 उस की नज़र हराम खाने पीने से और हराम लिबास से महफूज़ रहे और दुनिया की तरफ लालच की नज़र से ना देखे बल्कि सिर्फ इबरत के लिए उस की तरफ देखे और हराम पर तो कभी उसकी निगाह भी ना पड़े जैसा की हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया है

“जिस ने अपनी आँख हराम से भरी अल्लाह ताआला क़यामत के दिन उसको आग से भर देगा.”

4 उसके पेट में हराम खाना ना जाए, यह गुनाह ए कबीर है.

हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया

“बनी आदम के पेट में जब हराम का लुकमा (निवाला) पड़ा तो ज़मीन और आसमान का हर फ़रिश्ता उस पर लानत करेगा जब तक की वह लुकमा उस के पेट में रहेगा और अगर उसी हालत में मरेगा तो उस का ठिकाना जहन्नम होगा.”

5 हराम के तरफ हाथ ना बढ़ाये बल्कि उसका हाथ अल्लाह की फरमाबरदारी में बढ़े. हज़रात कअब इब्ने अह्बार रज़िअल्लहो अन्हो से रिवायत है की अल्लाह ताआला ने सब्ज़ मोती का महल पैदा फ़रमाया उस में सत्तर हज़ार घर हैं और हर घर में सत्तर हज़ार कमरे हैं उस में वही दाखिल होगा जिस के सामने हराम पेश किया जाये और वह सिर्फ अल्लाह के डर की वजह से उसे छोड़ दे.

6 उसका कदम अल्लाह ताआला की नाफ़रमानी में ना चले बल्कि सिर्फ उसकी इताअत व खूशनूदगी में रहे, आलिमों और नेकों की तरफ हरक़त करे.

7 इबादत और मुजाहिदा, इन्सान को चाहिए की केवल अल्लाह ताआला के लिए इबादत करे, दिखावा रियाकारी और मुनाफकत से बचता रहे, अगर एसा किया तो यह उन लोगो में शामिल हो गया जिन के बारे में अल्लाह ताआला ने फ़रमाया है

“और तेरे रब के नज़दीक आखिरत डरने वालों के लिए है”

दूसरी आयत में यूँ इरशाद है

“बेशक मुत्तकी अमन वाले मकाम में होंगे.”

 

मतलब अल्लाह ताआला यह फरमा रहा है लो यही लोग मुत्तकी और परहेजगार क़यामत के दिन दोज़ख से छुटकारा पाएंगे और ईमानदार आदमी को चाहिए की वह बीम और रज़ा, डर और उम्मीद के दरमियाँ रहे वही अल्लाह ताआला की रहमत का उमीदवार होगा और उस से मायूस और ना उम्मीद नहीं रहेगा. अल्लाह ताआला ने फ़रमाया

“अल्लाह ताआला की रहमत से ना उम्मीद ना हो.”

तो बस अल्लाह ताआला की इबादत करे, बुराई के कामों से मुह मोड़ ले और अल्लाह ताआला की तरफ पूरी तरह मुतवज्जह हो.

*** हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ.-किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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