बिदअत का बयान बिदअत के बारे में हदीसे मुबारक

इत्तिबाए खवाहिशात व बिदअत

नबिय्ये करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का फ़रमान है कि अपने आप को नए उमूर से बचाओ क्यूंकि हर नया काम बिदअत है और हर बिदअत गुमराही मूजिबे नार है।।

फरमाने नबवी है कि जिस ने हमारे इस दीन में कोई ऐसी बात निकाली जो दीन में से नहीं है तो वोह बात मर्दूद है।

एक और इरशाद में है कि तुम पर मेरे तरीके और मेरे बाद आने वाले खुलफ़ाए राशिदीन के तरीके की पैरवी लाज़िम है।

इन अहादीस से येह बात मालूम हुई कि हर वोह बात जो किताब व सुन्नत और इजमाए अइम्मा के मुखालिफ़ हो, वोह काबिले तरदीद बिदअत है (या’नी बिदअते सय्यिआ)।

 

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हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का इरशाद है कि जिस ने उम्दा तरीका जारी किया उसे इस का अज्र मिलेगा और कियामत तक जो भी इस पर अमल करेगा, तरीका जारी करने वाले को इस का सवाब मिलेगा और जिस ने बुरा तरीका जारी किया, उस को इस का और क़ियामत तक इस पर अमल करने वालों का गुनाह होगा। हज़रते क़तादा रज़ीअल्लाहो अन्हो ने इस फ़रमाने इलाही :

और तहक़ीक़ येह मेरा सीधा रास्ता है पस इस की इत्तिबाअ करो। के बारे में कहा : जान लो रास्ता सिर्फ एक रास्ता है जिस की जड़ हिदायत और जिस पर फिरना जन्नत की तरफ़ है और शैतान ने मुतफ़र्रिक रास्ते बनाए हैं जिन का अस्ल गुमराही और जिन पर फिरना जहन्नम की तरफ़ है।

हज़रते इब्ने मसऊद रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने अपने दस्ते मुबारक से एक लकीर खींची और फ़रमाया : येह अल्लाह की सीधी राह है, फिर आप ने उस लकीर के दाएं बाएं और बहुत सी लकीरें खींची और फ़रमाया : येह रास्ते हैं, इन में कोई रास्ता नहीं है मगर हर रास्ते पर शैतान है जो अपनी तरफ़ बुलाता रहता है, फिर आप ने मजकूरए बाला आयत तिलावत फ़रमाई।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो का क़ौल है कि येह गुमराही के रास्ते हैं।

हज़रते इब्ने अतिय्या रज़ीअल्लाहो अन्हो का क़ौल है येही रास्ते जिन की हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने निशान देही फ़रमाई है, इन में यहूदिय्यत, नसरानिय्यत, मजूसिय्यत और तमाम पैरुवाने मज़ाहिबे बातिला, बिदअती, नफ़्सानी ख्वाहिशात की पैरवी करने वाले गुमराह, अपनी अलग राहें मुतअय्यन करने वाले वगैरा सब शामिल हैं चाहे वोह झगड़ों और फ़ितना व फ़साद में दिलचस्पी लेने वाले हों या गुफ्तगू में बाल की खाल उतारने वाले हों, येह तमाम लगज़िश के मैदान और बद ए’तिकादी के मनाज़िर हैं।

फ़रमाने नबवी है कि जिस ने मेरी सुन्नत से ए’राज़ किया वोह मुझ से नहीं है।

नीज़ फ़रमाने नबवी है कि ऐसी कोई उम्मत नहीं है जो अपने नबी के दीन में बिदआत को फ़रोग देती है और इस बिदअत के बराबर उस की सुन्नत जाएअ हो जाती है।

फ़रमाने नबवी है कि वोह ख्वाहिशे नफ़्स कि जिस की पैरवी की जाए उस से बढ़ कर आस्मान के नीचे अल्लाह के नज़दीक ऐसा (झूटा) मा’बूद नहीं जिस की इबादत की जाती हो।

फ़रमाने नबवी है कि सब से उम्दा बात अल्लाह की किताब है और सब से उम्दा हदायत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की हिदायत है और सब से बद तरीन उमूर बिदआत हैं और हर बिदअत जलालत है, मैं तुम पर तुम्हारी पुश्तों, शर्मगाहों और गुमराह कुन ख्वाहिशात की शहवात से डरता हूं, तुम हर बिदअत से बचो क्यूंकि हर बिदअत गुमराही है।

फ़रमाने नबवी है कि अल्लाह तआला हर बिदअती से तौबा को पोशीदा कर देता है।) यहां तक कि वोह बिदअत को तर्क न कर दे।

फ़रमाने नबवी है कि अल्लाह तआला किसी साहिबे बिदअत का रोज़ा, हज, उमरह, जिहाद, हीला और इन्साफ़ कुछ भी क़बूल नहीं करता वोह इस्लाम से ऐसे निकल जाता है जैसे आटे से बाल निकलता है, मैं तुम्हें सफ़ेद और वाजेह दीन पर छोड़ रहा हूं, इस का दिन और रात बराबर हैं, इस से वोही फिरेगा जो हलाक होगा, हर जिन्दगी के लिये एक हिम्मत है और हर हिम्मत के लिये एक कमज़ोरी है, जिस की हिम्मत मेरी सुन्नत की तरफ़ है वोह हिदायत पा गया और जिस की हिम्मत दूसरी तरफ़ रागिब हुई वोह हलाक हुवा, मैं अपनी उम्मत पर तीन चीजों से डरता हूं, आलिम की लगज़िश, काबिले तक्लीद ख्वाहिशात और ज़ालिम हाकिम,

मेरी उम्मत के लिये येह तीन चीजें बहुत खतरनाक होंगी।

आलाते लह्वो लइब की मजम्मत ।

बुख़ारी शरीफ़ में मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : जिस शख्स ने अपने साथी से कहा कि आओ जूआ खेलें, उसे चाहिये कि सदका करे ।

मुस्लिम, अबू दावूद और इब्ने माजा की रिवायत है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : जो नर्द या नर्द शीर से खेला, गोया उस ने ख्रिन्जीर के गोश्त और लहू में हाथ को डूबोया।

अहमद वगैरा की रिवायत है हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया ऐसे शख्स की मिसाल जो नर्द खेलता है फिर नमाज के लिये खड़ा होता है, ऐसी है जैसे कोई शख्स पीप और खिन्ज़ीर के खून से वुजू करता है और फिर नमाज़ के लिये खड़ा होता है या’नी उस की नमाज़ कबूल नहीं होती जैसा कि दूसरी रिवायत में इस की तस्रीह मौजूद है।

बैहकी ने यहया बिन कसीर रज़ीअल्लाहो अन्हो से रिवायत की है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का ऐसे लोगों के पास से गुज़र हुवा जो नर्द खेल रहे थे आप ने फ़रमाया : दिल गाफ़िल है, हाथ करने वाले हैं और ज़बानें फुजूल बकने वाली हैं।

दैलमी ने रिवायत नक्ल की है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : जब तुम ऐसे लोगों से गुज़रो जो इन फ़ाल के तीरों, शतरन्ज, नर्द और इन से मुशाबेह हर उस चीज़ में जो हराम कर दिया गया है, लगे हों तो उन्हें सलाम न करो, अगर वोह तुम्हें सलाम करें तो उन के सलाम का जवाब न दो ।

फ़रमाने नबवी है कि तीन चीजें जूआ हैं, शर्तिया बाज़ियां छोटे छोटे तीरों को फेंक कर जूआ खेलना और सीटियां बजा बजा कर कबूतर उड़ाना ।

हज़रते अली रज़ीअल्लाहो अन्हो का ऐसे लोगों के पास से गुज़र हुवा जो शतरन्ज खेल रहे थे, आप ने फ़रमाया : क्या येह वोह सूरतें हैं जिन के वासिते तुम ए’तिकाफ़ करने वाले हो ? तुम में से किसी एक के हाथों में अंगारे उठा लेना यहां तक कि वोह बुझ जाएं, इन्हें छूने से बेहतर है, फिर फ़रमाया : ब खुदा ! तुम इस के इलावा किसी और काम के लिये पैदा किये गए हो।

मजीद इरशादे नबवी है कि शतरन्ज खेलने वाले बहुत झूटे होते हैं, इन में से एक कहता है मैं ने कत्ल कर दिया और मारा हालांकि उस ने किसी को कत्ल किया होता है और न मारा होता है।

हज़रते अबू मूसा अश्अरी ने फ़रमाया कि शतरन्ज हमेशा खताकार ही खेलता है। और येह बात जेह्न नशीन कर लीजिये कि आलाते नगमा व तरब या तो हराम हैं जैसे सारंगी, तम्बूरा, रबाब, तबला, बांसरी और हर वोह साज़ जो इनफ़िरादी तौर पर गाने वाले की आवाज़ से हम आहंग हो या फिर मकरूह हैं और वोह ऐसे साज़ हैं जो गना में तरबिय्या कैफ़िय्यत को नुमायां करते हैं मगर इनफ़िरादी तौर पर इन से नगमात का काम न लिया जा सके जैसे नरकुल, चंग वगैरा, इन का गना के साथ सुनना मकरूह है, बिगैर नगमात के नहीं और जो साज़ जाइज़ हैं वोह ऐसे हैं जो नगमा व तरब के लिये नहीं बल्कि इत्तिलाअ के लिये बजाए जाते हैं, जैसे बिगिल, तब्ले जंग या मज्मअ इकठ्ठा करने का तब्ल या निकाह के एलान के लिये दफ़ बजाना वगैरा।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

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