जहन्नम के हालात और गुनाहगारों के लिए अलग अलग अज़ाब

जहन्नम के हालात और गुनाहगारों के लिए अज़ाब

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

 अबू दावूद, निसाई और तिर्मिज़ी की रिवायत है : जब अल्लाह तआला ने जन्नत और जहन्नम को पैदा फ़रमाया तो जिब्रील .को भेजा कि जन्नत और उस में जो कुछ मैं ने जन्नतियों के लिये तय्यार किया है उसे देख आओ, जिब्रील अलैहहिस्सलाम  ने आ कर जन्नत और उस में रहने वालों के लिये तय्यार शुदा नेमतों को देखा और बारगाहे इलाही में जा कर अर्ज़ किया : तेरे इज्जतो जलाल की कसम ! जो भी इस का तजकिरा सुनेगा इस में आने की कोशिश करेगा, अल्लाह तआला ने हुक्म दिया और जन्नत पर मसाइब तारी कर दिये गए, फिर अल्लाह तआला ने फ़रमाया : जाओ और देखो कि मैं ने जन्नत में आने वालों के लिये क्या इन्तिज़ाम किया है ! जिब्रील जन्नत की तरफ़ आए तो देखा कि वो मसाइब में छुपा दी गई है चुनान्चे, जिब्रील वापस आ गए और कहा : मुझे तेरी इज्जत की कसम ! मुझे डर है कि इस में कोई नहीं जाएगा।

फिर अल्लाह तआला ने फ़रमाया : जाओ जहन्नम और इस में पहुंचने वालों के लिये मैं ने जो कुछ तय्यार किया है उसे देखो ! जिब्रील ने जहन्नम को देखा उस की एक आग दूसरी आग को रौंद रही थी जिब्रील अलैहहिस्सलाम  वापस आ गए और बारगाहे इलाही में अर्ज़ की : तेरी इज्जत की कसम ! जो भी इस का तजकिरा सुनेगा इस में नहीं आएगा, अल्लाह तआला ने हुक्म दिया और जहन्नम को शहवात से ढांप दिया गया। रब तआला ने जिब्रील से फ़रमाया : अब जाओ और इसे देखो, जिब्रील आए जहन्नम को देखा और वापस जा कर बारगाहे इलाही में अर्ज़ की : तेरी इज्जत की कसम ! मुझे डर है कि कोई भी इस में गिरने से नहीं बचेगा।

जहन्नम कैसी है वहां क्या क्या है ?

बैहक़ी ने हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ीअल्लाहो अन्हो से रिवायत की है : इन्हों ने फ़रमाने इलाही :

बेशक जहन्नम महलों जैसी चिंगारियां फेंकती है। की तशरीह में फ़रमाया : “यह नहीं कहता कि वह दरख्तों जितनी बड़ी चिंगारियां फेंकती है बल्कि किलों और शहरों जितनी बड़ी बड़ी चिंगारियां फेंकती है।

अहमद, इब्ने माजा, सहीह इब्ने हब्बान और हाकिम की रिवायत है कि “वैल” जहन्नम की एक वादी है, काफ़िर उस में चालीस साल बराबर गिरता चला जाएगा मगर उस की गहराई तक नहीं पहुंच सकेगा।

तिर्मिज़ी की रिवायत है कि वैल जहन्नम की एक वादी है, काफ़िर सत्तर साल में भी उस की गहराई तक नहीं पहुंच सकेगा।(दोनों रिवायतों में गहराई तक पहुंचने की मुद्दत का फ़र्क है, दोनों का मक्सद यह है कि उस की गहराई बहुत ही ज़ियादा है जो बरसों में तै होगी।)।

जुब्बुल हुन का अजाब

इब्ने माजा और तिर्मिज़ी की हदीस है : आप सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि जुब्बुल हुज्न से अल्लाह की पनाह मांगो, सहाबए किराम ने पूछा : या रसूलल्लाह ! सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम जुब्बुल हुज्न क्या है ? आप ने फ़रमाया : जहन्नम की एक वादी है जिस से जहन्नम भी दिन में चार सो मरतबा पनाह मांगता है, पूछा गया : हुजूर ! इस में कौन जाएंगे ? आप ने फ़रमाया : वह रियाकार कारियों के लिये तय्यार की गई है जो अपने आ’माल की नुमाइश करते हैं और अल्लाह तआला के यहां सब से ज़ियादा ना पसन्द ऐसे कारी हैं जो ज़ालिम हाकिमों से मेल जोल रखते हैं।

“तबरानी” की रिवायत है कि जहन्नम में एक ऐसी वादी है कि जहन्नम उस वादी से दिन में चार सो मरतबा पनाह मांगता है और यह हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की उम्मत के रियाकारों के लिये तय्यार की गई है।

इब्ने अबिदुन्या रहमतुल्लाह अलैह की रिवायत है कि जहन्नम में सत्तर हज़ार वादियां हैं, हर वादी में सत्तर हज़ार घाटियां हैं, हर घाटी में सत्तर हज़ार सूराख हैं, हर सूराख में एक सांप है जो दोज़खियों के चेहरों को डसता रहता है।

 

बुखारी ने अपनी तारीख में येह मुन्किरुस्सनद हदीस नक्ल की है कि जहन्नम में सत्तर हज़ार वादियां हैं, हर वादी में सत्तर हज़ार घाटियां हैं, हर घाटी में सत्तर हज़ार घर हैं, हर घर में सत्तर हज़ार मकान हैं, हर मकान में सत्तर हज़ार कूएं हैं, हर कूएं में सत्तर हज़ार अज़दहे है, हर अज़दहे की बाछों में सत्तर हज़ार बिच्छू हैं, काफ़िर और मुनाफ़िक इन तमाम का अज़ाब पाए बिगैर नहीं रहेगा।

तिर्मिज़ी में मुन्कतउस्सनद रिवायत है कि जहन्नम के किनारे से अज़ीम चट्टान लुढ़काई जाती है और सत्तर साल गुज़रने के बा वुजूद भी वोह जहन्नम की गहराई तक पहुंच नहीं पाती।

हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो फ़रमाया करते : जहन्नम को अक्सर याद किया करो क्यूंकि उस की गर्मी सख्त, उस की गहराई बेहद है और उस में लोहे के हथोड़े हैं।

बज्जाज़, अबू या’ला, सहीह इब्ने हब्बान और बैहक़ी की रिवायत है कि अगर जहन्नम में पथ्थर फेंका जाए और उसे नीचे जाते हुवे सत्तर साल गुज़र जाएं, तब भी वोह उस की गहराई तक नहीं पहुंच सकेगा।

जहन्नम दोज़ख की गहराई

“मुस्लिम” में हज़रते अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि हम हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के साथ थे कि हम ने एक धमाका सुना, हुजूर ने फ़रमाया : जानते हो यह क्या था ? हम ने अर्ज़ किया : अल्लाह और उस का रसूल सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ज़ियादा जानते हैं, आप ने फ़रमाया : यह पथ्थर था जिसे अल्लाह तआला ने सत्तर साल पहले जहन्नम में डाला था अभी वह इस की गहराई तक पहुंच सका है।

तबरानी में हज़रते अबू सईद खुदरी रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने एक हौलनाक आवाज़ सुनी, जिब्रील अलैहहिस्सलाम  हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  के पास आए तो आप ने पूछा : जिब्रील येह कैसी आवाज़ थी ? जिब्रील ने अर्ज किया : येह चट्टान थी जिसे सत्तर साल पहले जहन्नम के किनारे से गिराया गया था और वोह अभी जहन्नम की गहराई तक पहुंची है, अल्लाह तआला ने चाहा कि आप को भी इस की आवाज़ सुना दी जाए, इस के बा’द किसी ने विसाल तक आप को हंसते हुवे नहीं देखा।

अहमद और तिर्मिज़ी की रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने सर की तरफ़ इशारा कर के फ़रमाया : अगर इस जितना सीसा आस्मान से जमीन की तरफ़ फेंका जाए तो ज़मीनो आस्मान की पांच सो साला सफ़र की दूरी के बा वुजूद रात से पहले पहले यह ज़मीन पर आ जाए और अगर इसे जहन्नम के किनारे से जहन्नम में फेंका जाए तो चालीस साल गुज़रने से पहले उस की गहराई तक न पहुंच सके।

अहमद, अबू या’ला और हाकिम की रिवायत है कि अगर जहन्नम का हथोड़ा जो लोहे से तय्यार किया हुवा है, ज़मीन पर रख दिया जाए और जिन्नो इन्सान मिल कर उसे उठाना चाहें तो उसे उठा नहीं सकेंगे।

हाकिम की रिवायत है कि अगर पहाड़ पर हथोड़े की एक ज़र्ब लगाई जाए तो वोह रेज़ा रेज़ा हो कर रैत बन जाए।

इब्ने अबिन्या की रिवायत है कि अगर जहन्नम का एक पथ्थर दुन्या के पहाड़ों पर रख दिया जाए तो वोह उस की गर्मी से पिघल जाएं।

हाकिम की एक रिवायत है कि ज़मीनें सात हैं और हर ज़मीन का दूसरी जमीन के दरमियान पांच सो साल के सफ़र के बराबर फ़ासिला है, सब से ऊपर वाली जमीन मछली की पुश्त पर है जिस ने अपनी दोनों आंखें आस्मान से मिलाई हुई हैं, मछली चट्टान पर है और चट्टान फ़िरिश्ते के हाथ में है, दूसरी ज़मीन हवा का कैदखाना है, जब अल्लाह तआला ने कौमे आद की हलाकत का इरादा फ़रमाया तो वहां के ख़ाज़िन को फ़रमाया कि उन पर हवा भेज जो उन को हलाक कर दे, खाज़िन ने अर्ज़ किया : या अल्लाह ! मैं उन पर बैल के नथनों के बराबर हवा भेजूंगा, रब्बे जुल जलाल ने फ़रमाया : तब तो दुन्या की तमाम मख्लूक हलाक हो जाएगी और येह सब के लिये काफ़ी होगी, उन पर अंगूठी के सुराख के बराबर हवा भेजो और येही वोह हवा है जिस के मुतअल्लिक इरशादे इलाही है :

उस ने किसी चीज़ को नहीं छोड़ा जिस पर वोह आई मगर उसे बोसीदा हड्डी की तरह कर दिया। तीसरी जमीन में जहन्नम के पथ्थर हैं, चौथी में जहन्नम का गन्धक है, सहाबए किराम ने अर्ज किया : या रसूलल्लाह ! जहन्नम के लिये भी गन्धक है ? आप ने फ़रमाया : ब खुदा ! उस में गन्धक की कई वादियां हैं, अगर उन में बुलन्दो बाला मुस्तहकम पहाड़ डाले जाएं तो नर्म हो कर रेज़ा रेज़ा हो जाएं, पांचवीं में जहन्नम के सांप हैं जिन के मुंह गारों की तरह हैं जब वोह काफ़िर को एक मरतबा डसेंगे तो उस की हड्डियों पर गोश्त बाक़ी नहीं रहेगा।

छटी में जहन्नम के बिच्छू हैं जिन में सब से छोटा बिच्छू भी पहाड़ी खच्चर के बराबर है वोह जब काफ़िर को डसेगा तो काफ़िर जहन्नम की शिद्दत और गर्मी को भूल जाएगा।

सातवीं में इब्लीस लोहे से जकड़ा हुवा है, उस का एक हाथ आगे और एक पीछे है, जब अल्लाह तआला चाहता है कि उसे किसी बन्दे के लिये छोड़ दे तो उसे छोड़ देता है।

जहन्नम में बड़े बड़े सांप बिच्छु और अजदहे हैं

अहमद, तबरानी, सहीह इब्ने हब्बान और हाकिम की रिवायत है कि जहन्नम में बख़्ती ऊंटों की गर्दनों जैसे सांप हैं, जब उन में से कोई एक डसता है तो उस की गर्मी सत्तर साल के रास्ते की दूरी से महसूस की जाती है और जहन्नम में पहाड़ी खच्चरों जैसे बिच्छू हैं, जब वोह डसते हैं तो उन की गर्मी चालीस साल की दूरी से महसूस की जाती है ।

तिर्मिज़ी, सहीह इब्ने हब्बान और हाकिम की रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाने इलाही के बारे में फ़रमाया है कि वोह जैतून के तेल की तल्छट की तरह होगा, जब वोह उन के चेहरों के करीब आएगा तो उन के चेहरे की खाल बालों समेत उधड़ कर उस में गिर जाएगी ।

“तिर्मिज़ी” की रिवायत है कि गर्म पानी उन के सरों पर डाला जाएगा तो वोह शदीद गर्म पानी उन के सरों से गुज़र कर उन के पेट में असर अन्दाज़ होगा और जो कुछ उन के लिये पेटों में होगा उसे बाहर निकाल देगा यहां तक कि इसी शिद्दत से उन के पैरों से बह निकलेगा और उन के वुजूद की चरबी ख़त्म कर देगा, फिर दोबारा उसे वैसे ही डाला जाएगा और बार बार इन्सानों को भी हैअते ऊला पर किया जाता रहेगा।

जहाक का कौल है कि हमीम वोह गर्म पानी है जो ज़मीनो आस्मान की पैदाइश के वक़्त से जहन्नमियों को पिलाने के वक्त तक बराबर गर्म हो रहा है और फिर उन्हें पिलाने के साथ उन के सरों पर भी डाला जाएगा।

एक कौल येह है कि वोह जहन्नम के गढ़ों में जम्अ होने वाले जहन्नमियों के आंसू होंगे जो उन्हें पिलाए जाएंगे। और भी मुख़्तलिफ़ अक्वाल हैं।

कुरआने पाक में इसी पानी का जिक्र है, इरशादे इलाही है : “और वोह गर्म पानी पियेंगे जो उन की अन्तडियां

काट देगा। अहमद, तिर्मिज़ी और हाकिम की रिवायत है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने इस फ़रमाने इलाही :

और उसे पीप का पानी पिलाया जाएगा जिसे वोह घूंट घूंट  पियेगा और उसे गले से उतार नहीं सकेगा। के बारे में फ़रमाया कि दोज़खी उसे अपने मुंह के करीब लाएगा तो उस की बदबू की वज्ह से उसे सख्त ना पसन्द करेगा मगर जब प्यास के मारे मुंह के और ज़ियादा करीब लाएगा तो उस का मुंह भुन जाएगा और उस के सर की खाल बालों समेत उस में गिर जाएगी और जब वोह उसे घूंट घूंट पियेगा तो वोह उस की अन्तड़ियां काट कर बाहर निकाल देगा चुनान्चे,

फ़रमाने इलाही है :

और जब वोह फरयाद करेंगे तो उन की फ़रयाद रसी की जाएगी ऐसे पानी के साथ जो गले हुवे तांबे जैसा होगा जो उन के दहनों को भून डालेगा वोह बहुत बुरा पीना है। जहन्नम का बदबू दार पानी

अहमद और हाकिम की रिवायत है कि अगर “जहन्नम” के बदबू दार पानी का डोल दुन्या में गिरा दिया जाए तो तमाम मख्लूक उस की बदबू से परेशान हो जाए, उस पानी का नाम गस्साक़ है जिस का फ़रमाने इलाही में भी जिक्र है चुनान्चे, इरशाद होता है : “पस चखो गर्म पानी और गस्साक़ को”

और जहन्नमियों के मशरूब के मुतअल्लिक़ इरशाद फ़रमाया : “मगर गर्म पानी और गस्साक़ होगा।”

गुस्साक़ के मा’ना में कुछ इख़्तिलाफ़ है ।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है कि इस से मुराद वोह मवाद है जो जहन्नमियों के चमड़ों से बहेगा और बा’ज़ मुफस्सिरीन का कहना है कि इस से मुराद उन की पीप है। हज़रते का’ब रज़ीअल्लाहो अन्हो का क़ौल है कि वोह जहन्नम का एक कूआं है जिस में हर ज़हरीली चीज़ जैसे सांप बिच्छू वगैरा का ज़हर बह कर आएगा और वहां जम्अ होता रहेगा फिर काफ़िर को वहां लाया जाएगा और उसे इस में गौता दिया जाएगा, जब वोह निकलेगा तो उस का चमड़ा और गोश्त गिर चुका होगा और उस के पैरों और टांगों के पीछे चिमटा हुवा घिसटता हुवा आएगा जैसे आदमी अपने किसी कपड़े को घसीटता हुवा लाता है।

तिर्मिज़ी की रिवायत है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने येह आयत पढ़ी : और अगर पानी के लिये फ़रयाद करें तो उन की फरयाद रसी होगी उस पानी से कि चर्ख दिये (पिघले) हुवे धात की तरह है कि उन के मुंह भून (जला) देगा क्या ही बुरा पीना ।

अल्लाह से कमा हक्कुहू डरो और तुम हरगिज न मरो मगर येह कि मुसलमान हो कर मरो। और फ़रमाया कि जक्कुम का अगर एक क़तरा ज़मीन पर डाल दिया जाए तो मख्लूक पर जिन्दगी गुज़ारना दूभर हो जाए, उस शख्स का क्या हाल होगा जिस की गिज़ा ही ज़क्कुम होगी।

दूसरी रिवायत के अल्फ़ाज़ येह हैं : उस का क्या हाल होगा जिस का जक्कुम के सिवा कोई खाना नहीं होगा।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो से सहीह रिवायत के साथ मरवी है : उन्हों ने फ़रमाने इलाही :

और खाना गले में फंस जाने वाला। की तफ्सीर में फ़रमाया कि उस में कांटे होंगे जो हल्क पकड़ लेंगे, न ऊपर आएंगे और न नीचे पेट में उतरेंगे।

बुखारी और मुस्लिम की रिवायत है कि काफ़िर के कन्धों का दरमियानी फ़ासिला तेज़ रफ़्तार सवार के तीन दिन की मसाफ़त के बराबर होगा।

अहमद की रिवायत है कि काफिर की दाढ उहद पहाड के बराबर होगी और उस की रान बैज़ा पहाड़ की मिस्ल होगी और जहन्नम में उस की बैठक कुदैद और मक्कए मुअज्जमा के दरमियानी फ़ासिले के बराबर होगी या’नी तीन दिन के सफ़र के बराबर, उस के चमड़े की मोटाई बयालीस यमनी हाथ होगी या बयालीस अजमी हाथ, इब्ने हब्बान ने पहले कौल को तरजीह दी है।

मुस्लिम की रिवायत है कि काफ़िर की दाढ या दांत उहूद पहाड़ जैसा होगा और उस के चमड़े की मोटाई तीन दिन के सफर के बराबर होगी।

तिर्मिज़ी की रिवायत है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि क़ियामत के दिन काफ़िर की दाढ़ उहुद के बराबर होगी, उस की रान बैज़ा के बराबर और जहन्नम में उस की बैठक तीन दिन के सफ़र के बराबर होगी जैसे रबज़ा और मदीने का दरमियानी फ़ासिला है।

अहमद की रिवायत है : क़ियामत के दिन काफ़िर की दाढ़ उहुद पहाड़ जैसी होगी, उस के चमड़े की मोटाई सत्तर हाथ होगी, उस का बाजू बैज़ा पहाड़ जैसा, और उस की रान वरिकान(1) जैसी और जहन्नम में उस की बैठक मेरे और रबजा के दरमियानी फ़ासिले के बराबर होगी।(2) ___एक रिवायत में है कि जहन्नम में उस की बैठक तीन दिन के सफ़र के बराबर होगी जैसे रबज़ा है ।(3) अहमद, तिर्मिज़ी और तबरानी की रिवायत है : जिसे हाफ़िज़ मुन्ज़री ने अच्छी सनद वाली हदीस कहा है और तिर्मिज़ी ने उसे फुजैल बिन यज़ीद से नक्ल किया है कि काफ़िर जहन्नम में एक या दो फ़सख के बराबर लम्बी ज़बान जहन्नम में खींचता फिरेगा और लोग उसे रौंदते होंगे, एक फ़सख तीन मील के करीब होता है।

फ़ज़्ल बिन यज़ीद ने अबिल अजलान से रिवायत की है कि काफ़िर कियामत में दो फ़सख लम्बी ज़बान खींच रहा होगा और लोग उसे रौंद रहे होंगे।

बैहक़ी वगैरा की रिवायत है कि जहन्नमियों के जिस्म जहन्नम में बहुत बड़े कर दिये जाएंगे यहां तक कि उस के कान की लौ से उस के कन्धे तक सात सो साल के सफ़र का फ़ासिला होगा, उस की खाल की मोटाई सत्तर हाथ और उस की दाढ़ जबले उहुद के बराबर होगी।

अहमद और हाकिम ने ब सनदे सहीह मुजाहिद से रिवायत किया है कि हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो ने फ़रमाया : जानते हो जहन्नमियों के जिस्म कितने अज़ीम होंगे ? मैं ने कहा : नहीं ! तब उन्हों ने कहा : हां ! ब खुदा ! तुम नहीं जानते कि उन के कान की लौ और उन के कन्धे के दरमियान सत्तर साल के सफ़र का फ़ासिला होगा, उस की वादियों में खून और पीप रवां होगी, मैं ने कहा : नहरें होंगी तो उन्हों ने फ़रमाया : नहीं बल्कि वादियां होंगी।) ……एक अजीम सियाह पहाड़ का नाम है ।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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