ख़त्म हो जाने वाली दुनिया का धोका और फ़रेब

दुनिया के धोके और फ़रेब

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

 

दुनिया के तमाम हालात खुशी और गम के इर्द गिर्द गर्दिश करते रहते हैं, दुनिया अपने चाहने वालों की ख्वाहिशात के मुताबिक़ नहीं रहती बल्कि वो हकीमे मुतलक अल्लाह तआला की हिक्मत के मुताबिक़ रंग बदलती रहती है, फ़रमाने इलाही है :

वह हमेशा मुख्तलिफ़ रहेंगे मगर वो जिस पर तेरे रब ने रहम किया (वो इस से महफूज़ रहेंगे)। बा’ज़ मुफस्सिरीन का कहना है कि यहां ‘इख़्तिलाफ़’ से मुराद रिज्क का इख़्तिलाफ़ है या’नी बा’ज़ गनी हैं और बा’ज़ फ़क़ीर हैं लिहाज़ा हर शख्स के लिये ज़रूरी है जिसे दुनिया का माल मिल जाए और रब्बे जुल जलाल दुनिया को उस का ख़ादिम बना दे तो वो शुक्र अदा करता रहे और नेक कामों में उसे सर्फ करे क्यूंकि अच्छे आ’माल बुराइयों को ज़ेर कर लेते हैं और अपनी दुनिया पर गुरूर न करे और येह फ़रमाने इलाही इस बात को समझने के लिये काफ़ी है “तुम्हें दुनिया की ज़िन्दगी फ़रेब न दे और न तुम्हें कोई फ़रेब देने वाला अल्लाह से फरेब दे। और फ़रमाने इलाही है :

“लेकिन तुम ने अपने आप को फ़ितने में डाला और तुम मुन्तज़िर रहे और तुम ने शक किया और तुम्हें आरजूओं ने फ़रेब में डाला।”

दुनिया के फ़रेब से गुरेज़ के लिये येह आयात अक्लमन्द इन्सान को बहुत कुछ बसीरत सिखाती हैं। उन अक्लमन्दों की नींद और बेदारी कैसी अजीब है जो बे वुकूफों की शब बेदारी और कोशिशों पर रश्क करते हैं हालांकि खुद कुछ भी नहीं कर पाते। ।

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दानिशमन्द कौन ? समझदार कौन?

फ़रमाने नबवी है कि अक्लमन्द वोह है जिस ने अपने नफ्स का मुहासबा किया और मौत के बाद के लिये अमल किये और अहमक़ वोह है जिस ने नफ़्सानी ख्वाहिशात की पैरवी की और अल्लाह तआला से ढेरों दुनियावी तमन्नाएं रखीं ।

शाइर कहता है:

और जो शख़्स किसी पसन्दीदा चीज़ की वज्ह से दुनिया की तारीफ़ करता है मुझे ज़िन्दगी की कसम अन क़रीब वोह उसे बुरा भला कहेगा। .जब दुनिया चली जाती है तो इन्सान के दिल में हसरत छोड़ जाती है और जब आती है तो बे शुमार दुख ले कर आती है।

एक और शाइर कहता है :

ब खुदा ! अगर दुनिया अपनी तमाम तर मालो मता के बा वुजूद हमारे लिये परहेज़गारी का निशान होती और लगातार उस का रिज्क आता रहता। तब भी किसी मर्दे आज़ाद के लिये उस की तरफ़ रुजूअ मुनासिब न होता चे जाए कि येह माल ही ऐसा बनाया गया हो जो कल ख़त्म हो जाए।

इब्ने बस्साम कहता है:

दुनिया और इस के अय्याम पर हैफ़ है, बेशक येह दुखों के लिये पैदा की गई है। इस के दुख एक लम्हा भी ख़त्म नहीं होते चाहे इस में कोई बादशाह है या फ़क़ीर है। इस पर और इस के अजीब हालात पर तअज्जुब है, येह लोगों की जान लेवा मा’शूका है।

एक और शाइर कहता है:

मैं देखता हूं कि जमाना बखील तरीन लोगों को बे इन्तिहा माल देने पर आमादा रहता है। और साहिबे इज्जत व फजीलत से ज़माना दुनिया को रोक देता है, मैं ने इसे कहा : तुम अस्ल बात में गौर करो। ख़बीस हराम कमाई से माल इकठ्ठा करते हैं लिहाज़ा ख़बीस माल और ख़बीस लोगों में जम्अ होते हैं।

दूसरा शाइर कहता है :

ज़माने से पूछ तू ने किस्रा, कैसर, उन के महल्लात और उन में रहने वालों से क्या किया ? .क्या इन सब ने तुझ से जुदाई की इस्तिद्आ की थी कि तू ने किसी अक्लमन्द और किसी बे वुकूफ़ को नहीं छोड़ा।

कहते हैं कि एक बदवी किसी कबीले में आया, लोगों ने उसे खाना खिलाया और वोह खाना खा कर उन के खेमे के साए में लैट गया, फिर उन्हों ने खैमा उखेड़ लिया और बदवी को जब भूक लगी तो उस की आंख खुल गई और वोह कहता हुवा वहां से चल दिया

बा खबर हो जाओ येह दुनिया इमारत के साए की तरह है और ला महाला एक दिन इस का साया जाइल हो जाएगा। बिला शुबा दुनिया सुवार के लिये कैलूला करने की जगह है, उस ने अपनी हाजत पूरी की और फिर इसे छोड़ दिया।

किसी दाना ने अपने दोस्त से कहा : तुझे दावेदार  ने सब कुछ सुना दिया और बुलाने वाले ने सब कुछ वज़ेह  कर दिया, उस शख्स से बढ़ कर और कोई मुसीबत में मुब्तला नहीं जिस ने यक़ीने कामिल को गंवा दिया और गलत कारियों में मश्गूल हुवा।

हज़रते इब्ने मसऊद रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है कि खौफे इलाही के लिये इल्म और तकब्बुर व गुरूर के लिये जहालत काफ़ी है।

फ़रमाने नबवी है कि जिस ने दुनिया से महब्बत रखी और इस की जैबो जीनत से मसरूर हुवा, उस के दिल से आख़िरत का ख़ौफ़ निकल गया।

बा’ज़ उलमा का कौल है कि बन्दे से मालो दौलत के चले जाने पर रन्जो गम करने और मालो दौलत की फ़रावानी में खुशी पर मुहासबा किया जाएगा।

बा’ज़ सलफ़े सालिहीन जिन्हें अल्लाह तआला ने दुनिया दी थी, वोह हराम कर्दा बातों से तुम से ज़ियादा बचने वाले थे और जो काम करना तुम्हें मुनासिब नज़र नहीं आता वोह उन के नज़दीक मोहलिक तरीन समझे जाते थे।

हज़रते उमर अब्दुल अज़ीज़ रज़ीअल्लाहो अन्हो बसा अवकात मिसअर बिन किदाम रज़ीअल्लाहो अन्होके येह अश्आर पढ़ा करते थे:

1)……ऐ फ़रेब खुर्दा ! तेरा दिन नींद और गफलत में और तेरी रात सोने में पूरी होती है और मौत तेरे लिये लाज़िमी है। (2)……ज़ाइल शुदा माल तुझे फ़रेब में डालता है और उम्मीदें पा कर तू बहुत खुश होता है जैसे ख्वाब देखने वाला ख्वाब में लुत्फ़ अन्दोज़ होता है। (3)……अन करीब तू अपनी इस दुनियावी मश्गूलिय्यत को बुरा समझेगा, ऐसी ज़िन्दगी तो दुनिया में जानवरों की होती है।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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