दुनिया की गफ़लत ईसा अलैहिस्सलाम और जुलकरनेन का किस्सा

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दुनिया की बुराई और उससे डरना

 (हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

हज़रते अबू उमामा बाहिली रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि साअलबा बिन हातिब ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की खिदमत में अर्ज़ किया : या रसूलल्लाह ! मेरे लिये दुआ करें अल्लाह तआला मुझे माल दे। आप ने फ़रमाया : ऐ साअलबा ! थोड़ा माल जिस का तू शुक्र अदा करता है उस माले कसीर से बेहतर है जिस का तू शुक्र अदा नहीं कर सकता, साअलबा ने अर्ज़ किया : या रसूलल्लाह ! मेरे लिये अल्लाह तआला से माल की दुआ कीजिये, आप ने फ़रमाया : ऐ साअलबा ! क्या तेरे पेशे नज़र मेरी ज़िन्दगी नहीं है, क्या तू इस बात पर राजी नहीं कि तेरी ज़िन्दगी नबी की ज़िन्दगी जैसी हो, ब खुदा ! अगर मैं चाहूं कि मेरे साथ सोने और चांदी के पहाड़ चलें तो चलेंगे।

 

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साअलबा ने अर्ज किया : उस ज़ात की क़सम जिस ने आप को नबिय्ये बर हक़ बना कर भेजा है ! अगर आप मेरे लिये अल्लाह से माल की दुआ करें तो मैं इस माल से हर हक़दार का हक पूरा करूंगा और मैं ज़रूर करूंगा, ज़रूर हुकूक अदा करूंगा, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने दुआ की : ऐ अल्लाह ! साअलबा को माल अता कर ! चुनान्चे, उस ने बकरियां ली और वो ऐसे बढ़ीं कि जैसे हशरातुल अर्ज (कीड़े मकोड़े) बढ़ते हैं और उन के लिये मदीने में रहना मुश्किल हो गया।

चुनान्चे, साअलबा मदीने से निकल कर मदीने के करीब एक वादी में आ गया और तीन नमाजें छोड़ कर सिर्फ दो नमाजें जोहर और अस्र जमाअत के साथ पढ़ने लगा, बकरियां और बढ़ीं और वो कुछ और दूर हो गया यहां तक कि वो सिर्फ नमाजे जुमआ में शरीक होता और बकरियां बराबर बढ़ती गई यहाँ तक कि इन की मसरूफ़िय्यत की वज्ह से उस की जुमआ की जमाअत भी छूट गई और वो जुमआ के दिन मदीने से आने वाले सवारों से मदीने के हालात पूछ लेता और हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने उस के मुतअल्लिक पूछा कि साअलबा बिन हातिब का क्या बना ? अर्ज की गई कि या रसूलल्लाह ! उस ने बकरियां लीं और वो इतनी बढ़ीं कि उन का मदीने में रहना दुश्वार हो गया और उस के तमाम हालात बतलाए गए । आप ने सुन कर फ़रमाया : ऐ साअलबा ! अफसोस !…… ऐ साअलबा ! अफ्सोस !…..अफ्सोस !….. ऐ साअलबा ! रावी कहते हैं कि तब कुरआने मजीद की यह आयत नाज़िल हुई :

“उन के माल से सदका लीजिये उन के ज़ाहिर और बातिन को पाक कीजिये उन के सदक़ात और उन के लिये दुआ कीजिये बेशक आप की दुआ उन के लिये तस्कीन है। हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने जुहैना और बनू सुलैम के दो आदमियों को सदक़ात की वुसूलयाबी पर मुकर्रर फ़रमाया और इन्हें सदक़ात के अहकामात और सदक़ात वुसूल करने की इजाजत लिख कर रवाना फ़रमाया कि जाओ और मुसलमानों से सदक़ात वुसूल कर के लाओ और फ़रमाया कि साअलबा बिन हातिब और फुलां आदमी के पास जाना जो बनी सुलैम से तअल्लुक रखता है और उन से भी सदक़ात वुसूल करना । चुनान्चे, येह दोनों हज़रात सा’लबा के पास आए और उसे हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का फ़रमान पढ़वा कर सदक़ात (बकरियों की ज़कात) का सवाल किया। सा’लबा ने कहा : यह तो टेक्स है, यह तो टेक्स है, यह तो टेक्स ही की एक शक्ल है, तुम जाओ, जब तुम फ़ारिग हो चुको तो मेरे पास फिर आना।

फिर यह हज़रात बनू सुलैम के उस आदमी के पास आए जिस के मुतअल्लिक़ हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया था : जब उस ने सुना तो उस ने अपने आ’ला मर्तबा ऊंटों के पास जा कर उन में से सदके के लिये अलाहिदा कर दिये और उन्हें ले कर इन हज़रात की ख़िदमत में आया, इन हज़रात ने जब वो ऊंट देखे तो बोले : तुम्हारे लिये यह ऊंट देना ज़रूरी नहीं हैं और न ही हम तुम से उम्दा और आ’ला ऊंट लेने आए हैं, उस शख्स ने कहा : इन्हें ले लीजिये, मेरा दिल इन्हीं से खुश होता है और मैं यह आप ही को देने के लिये लाया हूं।

जब यह हज़रात सदक़ात की वुसूली से फ़ारिग हो चुके तो सा’लबा के पास आए और उस से फिर सदक़ात का सुवाल किया, सा’लबा ने कहा : मुझे खत दिखाओ और उस ने खत देख कर कहा : यह टेक्स ही की एक शक्ल है, तुम जाओ ताकि मैं इस बारे में कुछ गौर कर सकू, लिहाज़ा यह हज़रात वापस रवाना हो गए और हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुवे, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने इन से बात चीत करने से पहले महज़ इन्हें देखते ही फ़रमाया : ऐ सा’लबा अफसोस ! और बनू सुलैम के उस शख्स के लिये दुआ फ़रमाई, फिर इन हज़रात ने आप को सा’लबा और सुलैमी के मुकम्मल हालात सुनाए, अल्लाह तआला ने सा’लबा के बारे में यह आयात नाज़िल फ़रमाई :

“और बा’ज़ उन में से वो है कि जिस ने अल्लाह से अहद किया कि अगर अल्लाह हमें अपने फज्ल से अता फ़रमाएगा तो अलबत्ता हम सदक़ा देंगे और

सालिहीन में से होंगे पस जब उन को अल्लाह तआला ने अपने फज्ल से अता किया तो उन्हों ने बुख़्ल किया माल के साथ और फिर गए और मुंह फेरने वाले हैं पस निफ़ाक़ उन के दिलों में कियामत के दिन तक असर दे गया ब सबब इस के कि उन्हों ने अल्लाह से किये हुवे वादे के खिलाफ किया और ब सबब इस के कि वो झूट बोलते थे। हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की खिदमत में उस वक्त सा’लबा का एक रिश्तेदार बैठा हुवा था, उस ने सा’लबा के मुतअल्लिक नाज़िल होने वाली आयात को सुना तो उठ कर सा’लबा के पास गया और उसे कहा : तेरी वालिदा मारी जाए ! अल्लाह तआला ने तेरे बारे में फुलां फुलां आयात नाज़िल की हैं, सा’लबा ने येह सुना तो हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुवा और सदका कबूल करने की दरख्वास्त की। हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : मुझे अल्लाह तआला ने तेरा सदक़ा लेने से मन्अ कर दिया है।

सा’लबा यह सुनते ही अपने सर में खाक डालने लगा । हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : तेरे येह करतूत ! मैं ने तुझ से पहले कह दिया था मगर तू ने मेरी बात नहीं मानी थी।

जब हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने सदका लेने से बिल्कुल इन्कार कर दिया तो वो अपने ठिकाने पर लौट आए, जब हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम विसाल फ़रमा गए तो वो अपने सदक़ात ले कर अबू बक्र रज़ीअल्लाहो अन्हो की खिदमत में हाज़िर हुवा मगर इन्हों ने भी लेने से इन्कार कर दिया, फिर हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो के दौरे खिलाफ़त में हाज़िर हुवा मगर इन्हों ने भी इन्कार कर दिया, यहां तक कि हज़रते उस्मान रज़ीअल्लाहो अन्हो के खलीफ़ा बनने के बाद सा’लबा का इन्तिकाल हो गया।

एक इबरत अंगेज वाकिआ – ईसा अलैहहिस्सलाम और लालची आदमी का किस्सा

जरीर ने लैस से रिवायत की है कि एक शख्स हज़रते ईसा अलैहहिस्सलाम  की सोहबत में आया और कहने लगा : मैं आप की सोहबत में हमेशा आप के साथ रहूंगा, लिहाज़ा हज़रते ईसा अलैहहिस्सलाम  और वोह आदमी इकट्ठे रवाना हो गए। जब एक दरया के किनारे पहुंचे तो खाना खाने के लिये बैठ गए, उन के पास तीन रोटियां थीं, जब दो रोटियां खा चुके और एक रोटी बाक़ी रह गई तो हज़रते ईसा . दरया पर पानी पीने तशरीफ़ ले गए। जब आप पानी पी कर वापस तशरीफ़ लाए तो रोटी मौजूद नहीं थी, आप ने पूछा : रोटी किस ने ली है? वोह आदमी बोला कि मुझे मालूम नहीं।

रावी कहते हैं कि हज़रते ईसा . उसे ले कर आगे चल पड़े और आप ने हिरनी को देखा जो दो बच्चे साथ लिये जा रही थी। आप ने उस के एक बच्चे को बुलाया, जब वोह आया तो आप ने उसे ज़ब्ह किया और गोश्त भून कर खुद भी खाया और उस शख्स को भी खिलाया, फिर बच्चे से फ़रमाया : अल्लाह के हुक्म से खड़ा हो जा। चुनान्चे, हिरनी का बच्चा खड़ा हो गया और जंगल की तरफ़ चल दिया, तब आप ने उस आदमी से कहा : मैं तुझ से उस ज़ात के नाम पर सुवाल करता हूं जिस ने तुझे येह मो’जिज़ा दिखलाया, रोटी किस ने ली थी ? वोह आदमी बोला : मुझे मालूम नहीं है।

फिर आप एक झील पर पहुंचे और उस शख्स का हाथ पकड़ा और दोनों सहे आब पर चल पड़े, जब पानी उबूर कर लिया तो आप ने उस शख्स से पूछा : तुझे उस ज़ात की क़सम ! जिस ने तुझे येह मो’जिज़ा दिखाया बता वोह रोटी किस ने ली थी ? उस आदमी ने फिर जवाब दिया कि मुझे मालूम नहीं है।

फिर आप रवाना हो गए और एक जंगल में पहुंचे, जब दोनों बैठ गए तो हज़रते ईसा अलैहहिस्सलाम  ने मिट्टी और रैत की ढेरी बना कर फ़रमाया कि अल्लाह के हुक्म से सोना हो जा, चुनान्चे, वोह सोना बन गई और आप ने उस की एक जैसी तीन ढेरियां बनाई और फ़रमाया : तिहाई मेरी, तिहाई तेरी और तिहाई उस शख्स की है जिस ने वोह रोटी ली थी, तब वोह आदमी बोला : वोह रोटी मैं ने ली थी, आप ने उस से फ़रमाया : येह सोना तमाम का तमाम तेरा है और उसे वहीं छोड़ कर आगे रवाना हो गए।

उस शख्स के पास दो आदमी आ गए, उन्हों ने जब जंगल में एक आदमी को इतने मालो मताअ के साथ देखा तो उन की निय्यत बदल गई और उन्हों ने इरादा किया कि उसे क़त्ल कर के माल समेट लें। उस आदमी ने जब उन की निय्यत भांप ली तो खुद ही बोल उठा कि येह माल हम तीनों ही आपस में बराबर बराबर तक्सीम कर लेते हैं, फिर उन्हों ने अपने में से एक शख्स को शहर की तरफ रवाना किया ताकि वोह खाना खरीद लाए । जिस शख्स को उन्हों ने शहर की तरफ़ खाना लाने के लिये भेजा था, उस के दिल में खयाल आया कि मैं इस माल में उन को हिस्सेदार क्यूं बनने दूं ? मैं खाने में ज़हर मिलाए देता हूं ताकि वोह दोनों ही हलाक हो जाएं और माल अकेला मैं ही ले लूं, चुनान्चे, उस ने ऐसा ही किया।

रावी कहते हैं कि इधर जो दो आदमी जंगल में बैठे हुवे थे, उन्हों ने इरादा कर लिया कि हम उसे एक तिहाई क्यूं दें ? जूही वोह आए हम उसे क़त्ल करें और दौलत हम दोनों आपस में तक्सीम कर लें, चुनान्चे, जब वोह आदमी खाना ले कर आया तो उन्हों ने उसे क़त्ल कर दिया और बाद में वोह खाना खाया जिसे खाते ही वोह दोनों भी मर गए और सोने की ढेरियां इसी तरह पड़ी रहीं और जंगल में तीन लाशें रह गई।

हज़रते ईसा अलैहहिस्सलाम  का फिर वहां से गुज़र हुवा और उन की येह हालत देख कर अपने साथियों से फ़रमाया : देखो येह दुनिया  है, इस से बचते रहना।

हिकायत – जुलकरनैन एक अजीब किस्सा

जुलकरनैन ऐसे लोगों के पास पहुंचे जिन के पास दुनिया वी मालो मताअ बिल्कुल नहीं था, उन्हों ने अपनी कब्रें तय्यार कर रखी थीं, जब सुब्ह होती तो वोह कब्रों की तरफ़ आते, उन की याद ताज़ा करते, उन्हें साफ़ करते और उन के करीब नमाजें पढ़ते और जानवरों की तरह कुछ घास पात खा लेते और उन्हों ने गुजर बसर सिर्फ ज़मीन से उगने वाली सब्जियों वगैरा पर महदूद कर रखी थी। जुलकरनैन ने उन के सरदार को एक आदमी भेज कर बुलाया लेकिन सरदार ने कहा : जुलकरनैन को जवाब देना कि मुझे तुम से कोई काम नहीं है, अगर तुम्हें कोई काम है तो मेरे पास आ जाओ। जुलकरनैन ने येह जवाब सुन कर कहा कि वाकेई उस ने सच कहा है : चुनान्चे, जुलकरनैन उस के पास आया और उस ने कहा : मैं ने तुम्हारी तरफ़ आदमी भेज कर तुम्हें बुलाया मगर तुम ने इन्कार कर दिया लिहाज़ा मैं खुद आया हूं। सरदार ने कहा : अगर मुझे तुम से कोई काम होता तो ज़रूर आता । जुलकरनैन ने कहा : मैं ने तुम्हें ऐसी हालत में देखा है कि किसी और कौम को इस हालत में नहीं देखा, सरदार ने कहा : आप किस हालत की बात कर रहे हैं ? जुलकरनैन ने कहा : येही कि तुम्हारे पास दुनिया वी मालो मताअ और मालो मनाल कुछ भी नहीं है.

जिस से तुम बहरा अन्दोज़ हो सको । सरदार ने कहा : हम सोना चांदी का जम्अ करना बहुत बुरा समझते हैं क्यूंकि जिस शख्स को येह चीजें मिलती हैं वोह इन में मगन हो जाता है और उस चीज़ को जो इन से कहीं बेहतर है, भूल जाता है। जुलकरनैन ने कहा : तुम ने कब्र क्यूं तय्यार कर रखी हैं ? हर सुब्ह इन की जियारत करते हो, इन्हें साफ़ करते हो और इन के करीब खड़े हो कर नमाज़ पढ़ते हो । सरदार ने कहा : येह इस लिये कि जब हम कब्रों को देखेंगे और दुनिया  की आरजू करेंगे तो येह क़बें हमें दुनिया  से बे नियाज़ कर देंगी और हमें हिर्स व हवा से रोक देंगी। जुलकरनैन ने पूछा : मैं ने देखा है कि ज़मीन के सब्जे के इलावा तुम्हारी कोई गिज़ा नहीं है, तुम जानवर क्यूं नहीं रखते ताकि तुम इन का दूध दोहो, इन पर सुवारी करो और इन से बहरा अन्दोज़ हो सको, सरदार ने कहा : हम इस चीज़ को अच्छा नहीं समझते कि हम अपने पेटों को इन की कब्रे बनाएं और हम ज़मीन के सब्जे से काफ़ी गिजा हासिल कर लेते हैं और येह इन्सान की गुज़र अवकात के लिये काफ़ी है, जब खाना हल्क से उतर जाता है (चाहे वोह कैसा ही हो) फिर इस का कोई मज़ा बाक़ी नहीं रहता।

फिर उस काइद (सरदार) ने जुलकरनैन के पीछे हाथ बढ़ा कर के एक खोपड़ी उठाई और कहा : जुलकरनैन ! जानते हो येह कौन है ? जुलकरनैन ने कहा : नहीं ! येह कौन है ? काइद ने कहा : येह दुनिया  के बादशाहों में से एक बादशाह था, अल्लाह तआला ने इसे दुनिया  वालों पर शाही अता फ़रमाई थी लेकिन इस ने जुल्मो सितम किया और सरकश बन गया। जब अल्लाह तआला ने इस की येह हालत देखी तो इसे मौत दे दी और येह एक गिरे पड़े पथ्थर की मानिन्द बे वक्अत हो गया, अल्लाह तआला ने इस के आ’माल शुमार कर लिये हैं ताकि इसे आख़िरत में सजा दे।

फिर उस ने एक और खोपड़ी उठाई जो बोसीदा थी और कहा : जुलकरनैन ! जानते हो येह कौन है ? जुलकरनैन ने कहा : नहीं, बताओ कौन है ? काइद ने कहा : येह एक बादशाह है जिसे पहले बादशाह के बाद हुकूमत मिली, येह अपने पीशर व बादशाह का मख्लूक पर जुल्मो सितम और ज़ियादतियां देख चुका था लिहाज़ा इस ने तवाज़ोअ की, अल्लाह का खौफ़ किया और मुल्क में अद्लो इन्साफ़ करने का हुक्म दिया, फिर येह भी मर कर ऐसा हो गया, जैसा तुम देख रहे हो और अल्लाह तआला ने इस का शुमार फ़रमा लिया है, यहां तक कि इसे आख़िरत में इन का बदला देगा। फिर वोह जुलकरनैन की खोपड़ी की तरफ़ मुतवज्जेह हुवा और कहने लगा : येह भी इन्ही की तरह है, जुलकरनैन ! ख़याल रखना कि तुम कैसे आ’माल कर रहे हो ? जुलकरनैन ने उस की बातें सुन कर कहा : क्या तुम मेरी दोस्ती में रहना चाहते हो ? मैं तुम्हें अपना भाई और वज़ीर या जो कुछ अल्लाह तआला ने मुझे मालो मनाल दिया है, उस में अपना शरीक बना लूंगा। सरदार ने कहा : मैं और आप सुल्ह नहीं कर सकते और न ही हम इकठे रह सकते हैं, जुलकरनैन ने कहा : वोह क्यूं ? सरदार ने कहा : इस लिये कि लोग तुम्हारे दुश्मन और मेरे दोस्त हैं, जुलकरनैन ने पूछा : वोह कैसे ? सरदार ने कहा : वोह तुम से तुम्हारा मुल्क, माल और दुनिया  की वज्ह से दुश्मनी रखते हैं और चूंकि मैं ने इन चीज़ों को छोड़ दिया है लिहाज़ा कोई एक भी मेरा दुश्मन नहीं है और इसी लिये मुझे किसी चीज़ की हाजत नहीं है और न मेरे पास किसी चीज़ की कमी है। रावी कहता है कि जुलकरनैन येह बातें सुन कर इन्तिहाई मुतअस्सिर हुवा और हैरान वापस लौट आया।

किसी शाइर ने क्या ही अच्छा कहा है :

ऐ वोह शख्स ! जो दुनिया  और इस की जीनत से नफ्अ अन्दोज़ होता है और दुनिया वी लज्जतों से उस की आंखें नहीं सोतीं। खुद को ना मुमकिन चीज़ों के हुसूल में मश्गूल कर दिया है, जब तू अल्लाह की बारगाह में हाज़िर होगा तो क्या जवाब देगा ?

दूसरे शाइर का कौल है :

मैं ने दुनिया  के जाहिलों को बहुत मरतबा अता करने और अहले फ़ज़ल से किनारा कशी करने पर मलामत की तो उस ने मुझ से कहा कि मेरी मजबूरी सुनिये।

जाहिल मेरे बेटे हैं लिहाज़ा मैं उन्हें सर बुलन्दी देती हूं और मुत्तकी अहले फ़ज़्ल मेरी सोकन आखिरत के फ़रज़न्द हैं (लिहाज़ा मैं इन से गुरैज़ करती हूं)।

हज़रते महमूद बाहिली का कौल है :

बेशक दुनिया  आए या जाए इन्सान के लिये हर हाल में फ़ितना व आज़माइश है। जब दुनिया  आती है तो दाइमी शुक्र साथ लाती है (तो शुक्र अदा कर) और जब जाए तो सब्र और साबित कदमी का मुजाहरा कर ।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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