गरीबी की अच्छाईयां – फकर गरीबी की फ़ज़ीलत

  फकीरों की फ़ज़ीलत – अपनी इच्छा से गरीबी को अपनाना (self imposed poverty in Islam)

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

 

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का फरमान है कि इस उम्मत के सब से बेहतरीन लोग फुकरा हैं और सब से पहले जन्नत में दाखिल होने वाले कमजोर लोग हैं।

फ़रमाने नबवी है : मेरी दो बातें हैं, जो इन्हें पसन्द करता है वो मुझे पसन्द करता है जो इन्हें बुरा समझता है वो मुझे बुरा समझता है, फ़क़र (माल दौलत का ना होना) और जिहाद ।

यह दुनिया उस का घर है जिस का कोई घर न हो

मरवी है कि जिब्रील अलैहिस्सलाम आप की ख़िदमत में हाज़िर हुवे और कहा : अल्लाह तआला आप को सलाम फ़रमाता है और फ़रमाता है कि अगर आप चाहें तो मैं पहाड़ सोने का बना दूं ! जो आप के साथ साथ रहे । हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने चन्द लम्हे खामोश रहने के बा’द फ़रमाया कि जिब्रील ! यह दुनिया तो उस का घर है जिस का कोई घर न हो, यह उस की दौलत है जिस के पास कोई दौलत न हो और इसे वो ही जम्अ करता है जो बेवुकूफ़ हो । जिब्रील बोले : ऐ अल्लाह के नबी ! अल्लाह तआला आप को इसी हक़ व सदाक़त पर कायम रखे।

मरवी है कि हज़रते ईसा अलैहहिस्सलाम  असनाए सफ़र में एक ऐसे शख्स के पास से गुज़रे जो कम्बल लपेटे सो रहा था, आप ने उसे जगा कर फ़रमाया : ऐ सोने वाले उठ ! और अल्लाह को याद कर ! उस शख्स ने कहा : तुम मुझ से और क्या चाहते हो कि मैं ने दुनिया को दुनियादारों के लिये छोड़ दिया है। आप ने फ़रमाया : तो फिर ऐ मेरे दोस्त ! सो जा।।

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अल्लाह अपने महबूब बन्दे के दिल से दुनिया की महब्बत निकाल देता है ।

हज़रते मूसा अलैहहिस्सलाम  एक ऐसे शख्स के करीब से गुज़रे जो ईंट का तक्या बनाए, कम्बल में लिपटा हुवा ज़मीन पर सो रहा था और उस की दाढ़ी और तमाम चेहरा गुबार आलूद हो रहा था। मूसा अलैहहिस्सलाम  ने अर्ज की : ऐ रब तआला ! तेरा यह बन्दा दुनिया में बरबाद हो गया। अल्लाह तआला ने मूसा अलैहहिस्सलाम  की तरफ़ वहयी  की और फ़रमाया : तुम्हें पता नहीं ! जब मैं किसी बन्दे पर अपने करम के दरवाजे मुकम्मल तौर पर खोल देता हूं, उस से दुनिया की उल्फ़त ख़त्म कर देता हूं।

हज़रते अबू राफेअ रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का एक मेहमान आया मगर आप के पास उस की मेज़बानी के लिये कुछ न था, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने मुझे खैबर के एक यहूदी के पास भेजा और फ़रमाया : उसे कहो कि रजबुल मुरज्जब के चांद तक हमें कर्ज या उधार में आटा दे दे। मैं उस यहूदी के पास गया तो उस ने कहा : कोई चीज़ गिरवी रखो तब आटा मिलेगा । मैं ने आप को खबर दी तो आप ने इरशाद फ़रमाया : ब खुदा ! मैं ज़मीनो आस्मान का अमीन हूं, अगर वो कर्ज या उधार में आटा दे देता तो मैं ज़रूर वापस करता, लो मेरी ये जिरह ले जाओ और उस के पास गिरवी रख दो । जब मैं जिरह ले कर निकला तो आप की तसल्ली के लिये ये आयत नाज़िल हुई “और ऐ सुनने वाले उस की तरफ़ अपनी आंखें न लगा जो हम ने काफिरों के जोड़ों (ज़न व शोहर) को बरतने के लिये दी है जीती दुनिया की ताज़गी”।

फ़रमाने नबवी है कि फ़क़र मोमिन के लिये घोड़े के मुंह पर हसीन बालों से भी ज़ियादा खूब सूरत है ।

फ़रमाने नबवी है कि जिस का जिस्म तन्दुरुस्त, दिल मुतमइन है और उस के पास एक दिन की गिज़ा मौजूद है तो गोया उसे (काइनात की) सारी दौलत मिल गई है।)

हज़रते का’बुल अहबार रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि अल्लाह तआला ने मूसा अलैहहिस्सलाम  से फ़रमाया : जब तू फ़क़र  को आता देखे तो कहना खुश आमदीद ! ऐ नेकों के लिबास !

दीनदार शिकार न कर सका और दुनियादार  को खूब शिकार हुवा

हज़रते अता खुरासानी रहमतुल्लाह अलैह से मन्कूल है : अल्लाह तआला के एक नबी का साहिले दरया से गुज़र हुवा, वहां उन्हों ने देखा कि एक शख्स मछलियों का शिकार कर रहा है। … उस ने अल्लाह तआला का नाम ले कर दरया में जाल डाला मगर कोई मछली न फंसी। फिर उन्ही नबी का गुज़र एक दूसरे शख्स के पास से हुवा जो मछलियों का शिकार कर रहा था, उस ने शैतान का नाम ले कर अपना जाल फेंका, जब जाल खींचा तो वोह मछलियों से भरा निकला । अल्लाह के नबी ने बारगाहे रब्बुल इज्जत में अर्ज की : ऐ आलिमुल गैब ! इस में क्या राज़ है ? अल्लाह तआला ने फ़िरिश्तों को हुक्म दिया कि मेरे नबी को उन दो शख्सों का मक़ामे आखिरत दिखलाओ, जब उन्हों ने पहले शख्स का अल्लाह तआला के हुजूर इज्जत व वकार और दूसरे शख्स की बे हुरमती देखी तो बे साख़्ता कह उठे : इलाहुल आलमीन ! मैं तेरी तक्सीम पर राज़ी हूं।

फ़रमाने नबवी है : मैं ने जन्नत को देखा उस में अक्सर फुकरा थे, मैं ने जहन्नम को देखा उस में अक्सर मालदार औरतें थीं।

एक रिवायत में है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने दरयाफ्त किया : मालदार कहां हैं ? तो मुझे बतलाया गया उन्हें मालदारी ने गिरफ़्तार कर रखा है।

एक दूसरी हदीस में है : मैं ने जहन्नम में अक्सर औरतों को देख कर कहा : ऐसा क्यूं है ? तो मुझे बतलाया गया ये इन की सोने और खुश्बूओं से महब्बत की वज्ह से है।

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम फ़रमाते हैं : “फ़क्र” दुनिया में मोमिन के लिये तोहफ़ा है।

एक रिवायत में है : अम्बियाए किराम में सब से आख़िर हज़रते सुलैमान अलैहहिस्सलाम  जन्नत में दाखिल होंगे क्यूंकि वो दुनियावी दौलत और इस की शाही रखते थे और सहाबा में हज़रते अब्दुर्रहमान बिन औफ़ रज़ीअल्लाहो अन्हो अपने मालदारी की वज्ह से सब से आखिर में जन्नत में जाएंगे।

दूसरी हदीस में है कि मैं ने उन्हें (हज़रते अब्दुर्रहमान बिन औफ़ को) घुटनों के बल जन्नत में दाखिल होते देखा ।

हज़रते ईसा अलैहहिस्सलाम  का कौल है कि मालदार बहुत दुश्वारी के साथ जन्नत में दाखिल होगा।

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के अहले बैत रज़ीअल्लाहो अन्हुम से मरवी है : आप ने फ़रमाया : जब अल्लाह तआला किसी इन्सान से महब्बत करता है तो उसे आजमाइश में डाल देता है और जब किसी से बहुत ज़ियादा महब्बत करता है तो उस के लिये ज़खीरा कर देता है। पूछा गया : हुजूर जखीरा कैसे होता है ? आप ने फ़रमाया : उस इन्सान के माल और औलाद में से कुछ बाक़ी नहीं रहता ।

हदीस शरीफ़ में है कि जब तू “फ़क़र” को अपनी तरफ़ मुतवज्जेह पाए तो उसे “खुश आमदीद” कह और “ऐ नेकों की अलामत” कह कर उस का खैर मक्दम कर और जब तुम मालो दौलत को अपनी तरफ़ आता देखो तो कहो, दुनिया में मुझे ये किसी गुनाह की जल्दी सज़ा मिल रही है ।

हज़रते मूसा अलैहहिस्सलाम  ने अल्लाह तआला से अर्ज किया : इलाही ! मख्लूक में तेरे दोस्त कौन से हैं ताकि मैं उन से महब्बत करूं, अल्लाह तआला ने फ़रमाया : फ़क़ीर और फुकरा ।

हज़रते ईसा अलैहहिस्सलाम  का फरमान है : मैं फ़कर  को दोस्त रखता हूं और मालदारी से नफ़रत करता हूं और आप को “ऐ मिस्कीन” कह कर बुलाया जाना सब नामों से अच्छा लगता।

जब अरब के सरदारों और मालदारों ने हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से कहा : आप अपनी मजलिस में एक दिन हमारे लिये और एक दिन उन फुकरा के लिये मुतअय्यन कीजिये, पस वो हमारे दिन में न आएं और हम उन के दिन में नहीं आएंगे। फुकरा से इन की मुराद हज़रते बिलाल, हज़रते सलमान, हज़रते सुहैब, हज़रते अबू ज़र, हज़रते खब्बाब बिन अल अरत, हज़रते अम्मार बिन यासिर, हज़रते अबू हुरैरा और अस्हाबे सुफ्फा के फुकरा रिज्वानुल्लाहो अलैहिम थे । हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने इस बात को मान लिया क्यूंकि उन फुकरा के लिबास से इन दौलत मन्दों को बदबू आती थी, उन फुकरा के लिबास ऊन के थे और पसीना आने की सूरत में उन के कपड़ों से जो बू आती थी वो अकरअ बिन हाबिस अत्तमीमी, उयैना बिन हिस्न अल फ़ज़ारी, अब्बास बिन मिरदास अस्सामी और दीगर मालदारों को बहुत बैचैन कर दिया करती थी चुनान्चे, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की इस बात पर रजामन्दी के बाइस कुरआने मजीद की ये आयात नाज़िल हुई :

और अपनी जान उन से मानूस रखो जो सुब्हो शाम अपने रब को पुकारते हैं, उस की रिज़ा चाहते और तुम्हारी आंखें उन्हें छोड़ कर और पर न पड़ें, क्या तुम दुनिया की जिन्दगी का सिंगार (जीनत) चाहोगे और उस का कहा न मानो जिस का दिल हम ने अपनी याद से गाफ़िल कर दिया और वोह अपनी ख्वाहिश के पीछे चला और उस का काम हद से गुज़र गया और फ़रमा दो कि हक़ तुम्हारे रब की तरफ़ से है तो जो चाहे ईमान लाए और जो चाहे कुफ्र करे

एक रोज़ हज़रते इब्ने उम्मे मक्तूम रज़ीअल्लाहो अन्हो ने हुजूर की खिदमत में हाज़िरी की इजाज़त तलब की, उस वक़्त आप के पास एक कुरैशी सरदार बैठा हुवा था, आप को इब्ने उम्मे मक्तूम की आमद पसन्दीदा मालूम नहीं हुई, तब अल्लाह तआला ने यह आयात नाज़िल फ़रमाई :  “उस ने तेवरी चढ़ाई और मुंह मोड़ लिया जब उस के पास नाबीना आया और किस चीज़ ने तुम्हें ये मा’लूम कराया कि शायद वो पाक हो जाता या नसीहत सुनता पस उसे नसीहत फ़ाइदा देती जो शख़्स बे परवाई करता है तुम उस की खातिर इसे रोकते हो। यहां नाबीना से मुराद हज़रते इब्ने उम्मे मक्तूम रज़ीअल्लाहो अन्हो और बे परवा शख्स से मुराद वो कुरैशी सरदार है जो हुजूर की खिदमत में आया हुवा था।

दुनिया के ना मुराद बन्दे का कियामत में एजाज

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से मरवी है : क़ियामत के दिन एक बन्दे को लाया जाएगा, अल्लाह तआला उस से इस तरह मा’ज़िरत करेगा जैसे दुनिया में एक शख्स दूसरे से मा’ज़िरत करता है और अल्लाह तआला फ़रमाएगा : मुझे मेरी इज्जत और जलाल की क़सम ! मैं ने तुझ से दुनिया को तेरी बे कद्री की वज्ह से नहीं फेरा था बल्कि उस इज्जत और करामत के सबब जो मैं ने तेरे लिये तय्यार की थी तुझे दुनिया से महरूम रखा, ऐ मेरे बन्दे ! लोगों की उन जमाअतों में जाओ, जिस किसी ने भी मेरी रज़ामन्दी की खातिर तुझे खिलाया, पिलाया या लिबास पहनाया, उस का हाथ पकड़ लो ! वह तुम्हारा है। लोग उस दिन पसीने में गर्क होंगे और वह सफ़ों को चीरता हुवा उन को तलाश कर के जन्नत में ले जाएगा।

फुकरा के पास दौलत है

फ़रमाने नबवी  है कि फुकरा को पहचानो और उन से भलाई करो, उन के पास दौलत है। पूछा गया कि हुजूर कौन सी दौलत है ? आप ने फ़रमाया : जब क़ियामत का दिन होगा, अल्लाह तआला उन से फ़रमाएगा जिस ने तुम्हें खिलाया पिलाया हो या कपड़ा पहनाया हो उस का हाथ पकड़ कर उसे जन्नत में ले जाओ ।

फ़रमाने नबवी है कि जब मैं (शबे मे’राज) जन्नत में गया तो मैं ने अपने आगे हरकत की आवाज़ सुनी, मैं ने देखा तो वो बिलाल थे, मैं ने जन्नत की बुलन्दियों पर देखा, वहां मुझे अपनी उम्मत के फुकरा और उन की औलाद  नज़र आई, मैं ने नीचे देखा तो मालदार नज़र आए और औरतें कम थीं, मैं ने सबब पूछा तो बतलाया गया कि औरतों को सोने और रेशम ने जन्नत से महरूम कर दिया है और मालदारों को उन के तवील हिसाबात ने ऊपर नहीं जाने दिया।

 

मैं ने अपने सहाबा को तलाश किया तो मुझे अब्दुर्रहमान बिन औफ़ नज़र न आए, कुछ देर बाद वो रोते हुवे आए, मैं ने पूछा : तुम मुझ से क्यूं पीछे रह गए ? तो अब्दुर्रहमान ने कहा : मैं बहुत दुख झेल कर आप की खिदमत में पहुंचा हूं, मैं तो समझ रहा था कि शायद मैं आप को नहीं देख पाऊंगा।

हज़रते अब्दुर्रहमान बिन औफ़ साबिक़ीने अव्वलीन मुसलमानों में से थे, हुजूर के जांनिसार और उन दस हज़रात में से थे जिन्हें हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने जन्नत की बिशारत दी है और उन मालदारों में से थे जिन के लिये हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : मगर जिस ने माल को ऐसे ऐसे खर्च किया इन्हें भी मालदारी ने इतनी मुसीबत में मुब्तला कर दिया ! – हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम एक ऐसे शख्स के पास से गुज़रे जिस के पास माल व मनाले दुनिया से कुछ नहीं था, आप ने फ़रमाया : अगर इस का नूर तमाम दुनिया वालों में तक्सीम किया जाए तो पूरा हो जाएगा।।

जन्नत के बादशाह

नबिय्ये करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम फ़रमाते हैं : क्या मैं जन्नती बादशाहों के मुतअल्लिक तुम्हें बताऊं ? अर्ज की गई : फ़रमाइये । आप ने फ़रमाया : हर वो शख्स जिसे कमजोर व नातवां समझा गया, गुबार आलूद परेशान बालों वाला, वो फटी पुरानी चादरों वाला, जिसे कोई ख़ातिर में नहीं लाता है, अगर वो अल्लाह की कसम खा ले तो अल्लाह तआला उस की क़सम को ज़रूर पूरा करता है ।

हज़रते फ़ातिमा रज़ीअल्लाहो अन्हा  की गरीबी

हज़रते इमरान बिन हुसैन रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम मुझ से हुस्ने जन रखते थे, एक मरतबा हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लमने फ़रमाया : ऐ इमरान ! तुम्हारा मेरे नज़दीक एक ख़ास मक़ाम है, क्या तुम मेरी बेटी फ़ातिमा रज़ीअल्लाहो अन्हा  की इयादत को चलोगे ? मैं ने कहा : “मेरे मां-बाप आप पर कुरबान ! ज़रूर चलूंगा” चुनान्चे, हम रवाना हो गए और हज़रते फ़ातिमा रज़ीअल्लाहो अन्हा के दरवाजे पर पहुंचे, आप ने दरवाज़ा खट-खटाया और सलाम के बाद अन्दर आने की इजाज़त तलब फ़रमाई । हज़रते फ़ातिमा रज़ीअल्लाहो अन्हा ने फ़रमाया : तशरीफ़ लाइये ! आप ने  फ़रमाया : मेरे साथ एक और शख्स भी है, पूछा गया : हुजूर दूसरा कौन है ? आप ने फ़रमाया : इमरान ! हज़रते फ़ातिमा रज़ीअल्लाहो अन्हा  बोली : रब्बे जुल जलाल की कसम ! जिस ने आप को हक के साथ मबऊस फ़रमाया मैं सिर्फ एक चादर से तमाम जिस्म छुपाए हुवे हूं। आप ने दस्ते अक्दस के इशारे से फ़रमाया : तुम ऐसे ऐसे पर्दा कर लो, उन्हों ने अर्ज़ किया : इस तरह मेरा जिस्म तो ढक जाता है मगर सर नहीं छुपता, आप ने उन की तरफ़ एक पुरानी चादर फेंकी और फ़रमाया : तुम इस से सर ढांप लो, इस के बाद आप घर में दाखिल हुवे और सलाम के बाद पूछा : बेटी कैसी हो ? हज़रते फ़ातिमा रज़ीअल्लाहो अन्हा  ने अर्ज किया : हुजूर मुझे दोहरी तक्लीफ़ है, एक बीमारी की तक्लीफ़ और दूसरे भूक की तक्लीफ़ ! मेरे पास ऐसी कोई चीज़ नहीं है जिसे खा कर भूक मिटा सकू, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम यह सुन कर अश्कबार हो गए और फ़रमाया : बेटी घबराओ नहीं, रब की कसम ! मेरा रब के यहां तुम से ज़ियादा मर्तबा है मगर मैं ने तीन दिन से कुछ नहीं खाया है, अगर मैं अल्लाह तआला से मांगूं तो मुझे ज़रूर खिलाए मगर मैं ने दुनिया पर आख़िरत को तरजीह दी है। फिर आप ने हज़रते फ़ातिमा रज़ीअल्लाहो अन्हा  के कन्धे पर हाथ रख कर फ़रमाया : “खुश हो जाओ तुम जन्नती औरतों की सरदार हो !” उन्हों ने पूछा : हज़रते आसिया और मरयम कहां होंगी? आप ने फ़रमाया : आसिया अपने जमाने की औरतों की और तुम अपने ज़माने की औरतों की सरदार हो, तुम जन्नत के ऐसे महल्लात में रहोगी जिस में कोई ऐब, कोई दुख और कोई तक्लीफ़ नहीं होगी। फिर फ़रमाया : अपने चचाज़ाद के साथ खुश रहो, मैं ने तुम्हारी शादी दुनिया और आख़िरत के सरदार के साथ की है।

रूपये जमा  करने वाले पर चार मुसीबतों का नुजूल

हज़रते अली रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : जब लोग फुकरा से दुश्मनी रखें, दुनियावी शौकत व हश्मत का इज़हार करें और रूपिया जम्अ करने पर हरीस हो जाएं तो अल्लाह तआला उन पर चार मुसीबतें नाज़िल फ़रमाता है : कहत साली, ज़ालिम बादशाह, खाइन हाकिम और दुश्मनों की हैबत ।

हज़रते अबुदरदा रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि एक दिरहम वाले से दो दिरहम वाले का हिसाब ज़ियादा होगा।

हजरते सईद बिन आमिर की गिर्या व जारी का बाइस

हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने हज़रते सईद बिन आमिर रज़ीअल्लाहो अन्हो के पास एक हज़ार दीनार भेजे, हज़रते सईद अपने घर में इन्तिहाई गमज़दा हालत में दाखिल हुवे, इन की बीवी ने पूछा : कोई खास बात हो गई है ? बोले : बहुत अहम बात हो गई है, फिर फ़रमाया : “मुझे कोई पुराना दूपट्टा दे दो,” फिर उसे फाड़ कर उस के टुकड़े किये और दीनारों की पोटलियां बना कर तक्सीम कर दी। और नमाज़ के लिये खड़े हुवे और सुबह तक रो रो कर इबादत करते रहे फिर फ़रमाया : मैं ने हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से सुना है : मेरी उम्मत के फुकरा मालदारों से पांच सो साल पहले जन्नत में दाखिल होंगे यहां तक कि अगर कोई मालदार आदमी इन की जमाअत में शामिल होगा तो उसे हाथ पकड़ कर बाहर निकाल दिया जाएगा।

हज़रते अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि तीन आदमी बिला हिसाब जन्नत में दाखिल होंगे : वो शख्स जिस ने कपड़े धोने का इरादा किया मगर उस के दूसरे पुराने कपड़े नहीं थे जिन्हें पहन कर वो कपड़े धो ले। जो शख्स चूलहे पर दो-दो हांडियां नहीं चढ़ाता और जिस को पीने की दा’वत दे कर उस से ये न पूछा : तुम क्या पियोगे ?

हजरते सुफ्यान सौरी को फकरा से बे पायां महब्बत थी।

हज़रते सुफ़्यान सौरी रज़ीअल्लाहो अन्हो की महफ़िल में एक फ़क़ीर आया तो आप ने उसे फ़रमाया : आगे आ जाओ ! अगर तुम मालदार होते तो मैं तुम्हें आगे बढ़ने की इजाज़त न देता, इन की फुकरा से बे पायां महब्बत देख कर इन के मालदार दोस्त ये तमन्ना करते कि काश हम भी फ़कीर होते।

हज़रते मवमल रहमतुल्लाह अलैह का बयान है कि मैं ने हज़रते सुफयान  सौरी रज़ीअल्लाहो अन्हो की मजलिस में फ़क़ीर से ज़ियादा बा इज्जत और मालदार से ज़ियादा ज़लील किसी को नहीं देखा। ……

एक दानिशमन्द का कौल है कि इन्सान जितना तंगदस्ती से डरता है, अगर उतना जहन्नम से डरता तो दोनों से नजात पा लेता और जितनी इसे दौलत से महब्बत है अगर जन्नत से इसे इतनी महब्बत होती तो दोनों को पा लेता जितना ज़ाहिर में लोगों से डरता है अगर उतना बातिन में अल्लाह तआला से डरता तो दोनों जहानों में सईद शुमार होता।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है कि जो मालदार की इज्जत और फ़कीर की तौहीन करता है, वो मलऊन है।

हज़रते लुक्मान ने अपने बेटे को नसीहत करते हुवे कहा कि फटे पुराने कपड़ों की वज्ह से किसी को हक़ीर न समझो क्यूंकि इस का और तुम्हारा रब एक है।

हज़रते यहूया बिन मुआज़ रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं कि फुकरा से तुम्हारी महब्बत रसूलों की सिफ़ात में से एक सिफ़त है, इन की मजालिस में आना नेकों की और इन की दोस्ती से दूर भागना मुनाफ़िकों की अलामत है।

बा’ज़ कुतुबे साबिक़ा में मरकूम था कि अल्लाह तआला ने अपने बा’ज़ अम्बिया अलैहिममुस्सलाम पर वह्यी  की, कि मेरी दुश्मनी से डरो, अगर मैं ने तुझे दुश्मन बना लिया तो तू मेरी आंख से गिर जाएगा और मैं तुझ पर मालो दौलत की बारिश करूंगा (या’नी मालो दौलत की फ़रावानी अल्लाह तआला के यहां बे क़द्री की मूजिब है।)

हज़रते आइशा रज़ीअल्लाहो अन्हा  के पास हज़रते मुआविय्या, इब्ने आमिर रज़ीअल्लाहो अन्हुमा  और कुछ दूसरे लोगों ने एक लाख दिरहम भेजे, आप ने सब को एक ही दिन में तक्सीम कर दिया हालांकि आप की ओढ़नी पर पैवन्द लगे हुवे थे, आप की लौंडी ने कहा कि आप रोजे से हैं अगर आप मुझे एक दिरहम दे देतीं तो मैं गोश्त ले आती और आप इफ़्तार करतीं, आप ने यह सुन कर फ़रमाया : तुम मुझे पहले बता देतीं तो मैं एक दिरहम तुम्हें दे देती।।

हजरते आइशा को हुजर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की वसियत

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने हज़रते आइशा रज़ीअल्लाहो अन्हा को वसियत फ़रमाई : अगर तुम मुझ से मुलाकात की ख्वाहिश मन्द हो तो फुकरा जैसी ज़िन्दगी बसर करना, दौलत मन्दों की महफ़िलों से अलाहिदा रहना और ओढ़नी को पैवन्द लगाए बिगैर न उतारना ।

एक शख्स हज़रते इब्राहीम बिन अदहम रहमतुल्लाह अलैह की खिदमत में दस हजार दिरहम। लाया और बड़ी आजिज़ी से इन्हें कबूल करने की दरख्वास्त की। आप ने इन्कार कर दिया और फ़रमाया : क्या तुम दस हज़ार दिरहम के बदले फुकरा के दफ्तर से मेरा नाम काटना चाहते हो बखुदा ! मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा।

फ़रमाने नबवी है : उस शख्स के लिये खुश खबरी है जो इस्लाम पर चला और उस ने मा’मूली गुज़रान पर कनाअत कर ली।

फ़रमाने नबवी है : ऐ फुकरा तुम दिल की गहराइयों से अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहो, तुम्हें फ़क़र का सवाब मिलेगा वगरना नहीं । पहला कनाअत वाला और दूसरा राज़ी ब रज़ाए इलाही है. इस का मतलब यह भी हो सकता है कि हरीस को फ़क़र  का सवाब नहीं मिलेगा मगर बा’ज़ अहादीस से यह ज़ाहिर होता है कि उसे फ़कर का सवाब मिलेगा। अन करीब हम इस की मुकम्मल बहस करेंगे।

शायद अदमे रज़ा से ये मुराद है कि वो अल्लाह तआला के इस से माल रोक लेने को बुरा समझता है और बहुत से तालिबे दुनिया ऐसे हैं जो दिल में कभी भी अल्लाह तआला का मुन्किर होना पसन्द नहीं करते लिहाज़ा इन की तलब में कोई बुराई नहीं है लेकिन पहली बात आ’माल को तबाह कर देती है जिस में अल्लाह तआला के दौलत न देने को बुरा समझा जाता है।

हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि हर चीज़ की एक कुंजी चाबी होती है और जन्नत की चाबी फुकरा और मसाकीन की महब्बत है। अपने सब्र की वज्ह से वो क़यामत के दिन अल्लाह तआला के करीब होंगे।

हज़रते अली रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि अल्लाह तआला को वो बन्दा सब से ज़ियादा महबूब है जो फ़कीर हो, अल्लाह की रज़ा पर राजी हो और उस के अताकर्दा रिज्क पर कनाअत करे

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने दुआ मांगी : ऐ अल्लाह ! मोहम्मद (स.अ.व.) के घराने की खुराक अन्दाज़े के मुताबिक़ हो और फ़रमाया : क़ियामत के दिन कोई फ़कीर और मालदार ऐसा नहीं होगा जो यह तमन्ना न करे कि मुझे दुनिया में खूराक के मुताबिक़ ही रिज्क दिया जाता ।

अल्लाह तआला ने हज़रते इस्माईल अलैहहिस्सलाम  की तरफ़ वही की, कि मुझे शिकस्ता दिलों के यहां तलाश करना, आप ने पूछा : वो कौन लोग हैं ? रब तआला ने फ़रमाया : वो सच्चे फुकरा हैं।

फ़रमाने नबवी है कि राज़ी ब रज़ा फ़क़ीर से ज़ियादा कोई फजीलत वाला नहीं है।

फ़रमाने नबवी है कि अल्लाह तआला कियामत के दिन इरशाद फ़रमाएगा कि मखलूक में मेरे दोस्त कहां हैं ? फ़रिश्ते पूछेगे या अल्लाह ! वो कौन हैं ? रब तआला फ़रमाएगा : वो मुसलमान फुकरा हैं जो मेरी अता पर कानेअ (कनाअत करने वाले)  थे और मेरी रज़ा पर राजी थे, उन्हें जन्नत में दाखिल करो ! चुनान्चे, लोग अभी अपने हिसाब में सरगर्दा होंगे कि वो लोग जन्नत में खा पी रहे होंगे ।

ये तो कनाअत गुज़ी और अल्लाह की रिज़ा पर राज़ी होने वालों का तजकिरा है,  अन करीब ज़ाहिदों का जिक्र भी उन के फ़ज़ाइल में आएगा।

कनाअत और रजाए इलाही

“कनाअत” और “रज़ा” के मुतअल्लिक़ बहुत सी अहादीस वारिद हुई हैं, यह बात खूब जेह्न नशीन कर लें कि कनाअत का उल्टा  “हिर्स व तम्”(लालच) है।

हज़रते उमर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का फ़रमान है कि लालच, तंगदस्ती है  और कनाअत मालदारी है जो लोगों से तम्अ नहीं रखता और कनाअत कर लेता है वो लोगों से बे परवा कर दिया जाता है।

हज़रते इब्ने मसऊद रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि हर रोज़ एक फ़रिश्ता अर्श से मुनादी करता है, ऐ इन्सान ! गुमराह करने वाले ज़ियादा माल से किफ़ायत करने वाला थोड़ा माल बेहतर है।

हज़रते अबुदरदा रज़ीअल्लाहो अन्हो का क़ौल है कि हर इन्सान की अक्ल में कमजोरी होती है, जब उस के पास मालो दौलत ज़ियादा आने लगता है तो वो बहुत खुश होता है मगर रात दिन की गर्दिश जो उस की उम्र कम कर रही है, उसे गमज़दा नहीं करती। अफ़सोस ! ऐ इन्सान ! तुझे माल की ज़ियादती कोई फ़ाइदा नहीं देगी जब कि तेरी उम्र बराबर कम होती जा रही है।

मालदारी क्या है ?

एक दाना से गना (मालदारी) के मुतअल्लिक़ पूछा गया तो उस ने जवाब दिया कि कलील उम्मीदें और मामूली रिज्क पर राजी रहना।

रिवायत है कि हज़रते इब्राहीम बिन अदहम रहमतुल्लाह अलैह खुरासान के उमरा में से थे, एक मरतबा वो महल से बाहर निकले तो उन्हें महल के करीब एक आदमी नज़र आया जिस के हाथ में एक रोटी थी जिसे खा कर वो सो गया, उन्हों ने अपने एक गुलाम से कहा : जब ये शख्स बेदार हो तो इसे मेरे पास लाना, चुनान्चे, उस के बेदार होने के बाद उसे लाया गया तो उन्हों ने पूछा : ऐ जवान ! तू भूका था और एक रोटी से सैर हो गया? उस शख्स ने कहा : हां ! फिर पूछा : तुम्हें नींद खूब आई ? वो बोला : हां ! आप ने दिल में सोचा मैं आयिन्दा दुनिया के हुसूल में सरगर्दा नहीं फिरूंगा, नफ़्से इन्सानी तो एक रोटी पर भी कनाअत कर लेता है।

एक शख्स ने आमिर बिन अब्दुल कैस रहमतुल्लाह अलैह को इस हालत में देखा कि वो नमक के साथ साग खा रहे थे। उस शख्स ने कहा : ऐ बन्दए खुदा ! क्या तू इतनी सी चीज़ पर राज़ी है ? आप ने फ़रमाया : मैं तुम्हें बतलाऊं, जो इतनी सी दुनिया पर राजी हो जाता है उसे किस चीज़ की खुश खबरी मिलती है ? फिर फ़रमाया : “जो दुनिया पर राजी हो जाता है उसे आखिरत नहीं मिलती और जो दुनिया से तर्के तअल्लुक कर लेता है उसे आख़िरत मिलती है।”

हज़रते मुहम्मद बिन वासेअ रहमतुल्लाह अलैह खुश्क रोटी पानी में भिगो कर नमक से खा लेते और फ़रमाते : जो दुनिया में इतनी मिक्दार पर राजी हो जाता है वो किसी का मोहताज नहीं रहता।

हज़रते हसन रहमतुल्लाह अलैह का कौल है कि अल्लाह तआला ने ऐसे लोगों पर ला’नत की है जो उस के तक्सीम कर्दा रिज्क पर राजी नहीं हुवे, फिर आप ने यह आयत पढ़ी :

“और आस्मानों में तुम्हारा रिज्क है और जिस चीज़ का तुम से वादा किया जाता है आस्मानों और ज़मीन के रब की क़सम वो हक़ है।“

हज़रते अबू ज़र रज़ीअल्लाहो अन्हो एक मरतबा लोगों में बैठे हुवे थे कि आप की बीवी ने आ कर कहा : तुम इन के साथ बैठे हुवे हो और घर में आटे की चुटकी और पानी का घूंट तक नहीं है ! आप ने फ़रमाया : तुम्हें पता नहीं हमारे सामने दुश्वार गुज़ार घाटियां हैं इन से वो नजात पाएगा जिस का बोझ हल्का होगा। जब आप की बीवी ने ये सुना तो चुप चाप घर में वापस चली गई।

हज़रते जुन्नून रहमतुल्लाह अलैह का कौल है कि बे सब्र भूका कुफ्र के बहुत करीब होता है।

एक दाना से पूछा गया कि तेरी दौलत क्या है ? उस ने जवाब दिया : ज़ाहिरी सफ़ाई, दिल में नेकी और लोगों से ना उम्मीदी।

रिवायत है कि अल्लाह तआला ने बा’ज़ साबिक़ा आस्मानी किताबों में फ़रमाया है : ऐ इन्सान ! अगर तुझे सारी दुनिया की दौलत मिल जाती तब भी तुझे दो वक्त की रोटी ही मयस्सर आती, अब जब कि मैं ने तुझे गिजा दे दी है और इस का हिसाब और के जिम्मे लगा दिया है तो ये मैं ने तुझ पर एहसान किया है।

कनाअत के मुतअल्लिक एक शाइर ने कहा है : अल्लाह से मांग, लोगों से न मांग, इन से ना उम्मीद हो कर कनाअत को अपना क्यूंकि लोगों से ना उम्मीद होने ही में इज्जत है। ..हर अज़ीज़ और यगाने से बे परवा हो जा, क्यूंकि लोगों से बे नियाज़ी ही मालदारी है.

एक और शाइर कहता है :.ऐ मालो दौलत को जम्अ करने वाले ! ज़माना हर किसी का मुक़द्दर देखता है, तू इस के किस किस दरवाजे को बन्द करेगा ? ..इस फ़िक्र में कि किस किस तरह उम्मीदें पूरी होंगी, क्या इस के साथ कोई दुश्वारी है या आसानी पस तू इस को छोड़ देगा। ..ऐ माल के जम्अ करने वाले ! तू ने दौलत इकठ्ठी कर ली, मुझे ये बतला तू ने इसे खर्च करने के लिये अपने दिन भी इकट्ठे कर लिये हैं ? (क्या तुझे ज़िन्दगी पर भरोसा है) .दौलत तेरे पास वारिसों का खजाना है, राहे खुदा में खर्च करने वाले माल के सिवा तेरा कोई माल नहीं है। .जब जवान इस बात पर ए’तिमाद करता है कि जिस जात ने तक्सीमे अरज़ाक़ किया है उसे भी रिज्क देगा। …तब उस की इज्जत महफूज़ हो जाती है, कभी उस पर मेल नहीं आता, और न ही उस का चेहरा कभी पुराना होता है। .जो शख्स कनाअत को पा लेता है उस पर कभी दुख का साया नहीं पड़ता।

 

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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