अल्लाह से गुनाह की तौबा करने की फ़ज़ीलत

तौबा की फ़ज़ीलत

 (हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

तौबा की फ़ज़ीलत में बहुत सी आयात वारिद हैं, फ़रमाने इलाही है : और तौबा करो अल्लाह की तरफ़ ऐ मोमिनो ! ताकि तुम फ़लाह पाओ। और फ़रमाया :  और जो लोग अल्लाह के साथ कोई और मा’बूद नहीं पुकारते और नाहक किसी इन्सान को कत्ल नहीं करते जिस के क़त्ल को अल्लाह ने हराम कर दिया है और ज़िना नहीं करते और जो कोई येह काम करेगा सख़्त मुसीबत से मुलाकात करेगा कियामत के दिन उसे दुगना अज़ाब दिया जाएगा और रुस्वाई के साथ हमेशा उसी में रहेगा मगर जिस ने तौबा की और ईमान लाया और अच्छे अमल किये पस येह लोग अल्लाह तआला इन की बुराइयों को नेकियों में बदल देता है और अल्लाह बख्शने वाला मेहरबान है और जो कोई तौबा करे और अच्छे अमल करे पस बेशक वोह रुजू करता है

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अल्लाह की तरफ़ रुजूअ करना ।

तौबा के मुतअल्लिक़ बहुत सी अहादीस हैं । मुस्लिम की एक हदीस है कि बेशक अल्लाह तआला अपनी रहमत को रात में वसीअ करता है ताकि दिन में गुनाह करने वाले तौबा करें और वोह उन की तौबा क़बूल फ़रमाए और इसी तरह दिन को अपना दस्ते रहमत दराज़ फ़रमाता है ताकि रात के गुनाहगारों की तौबा कबूल फ़रमाए यहां तक कि मगरिब से सूरज तुलूअ होगा।) (रोज़े कियामत तक)

तिर्मिज़ी की हदीस है : मगरिब की तरफ़ एक दरवाज़ा है जिस की चौड़ाई चालीस या सत्तर साल के सफ़र के बराबर है, अल्लाह तआला ने उसे आस्मानो जमीन की पैदाइश के वक्त से तौबा के लिये खोला है और उसे बन्द नहीं करेगा जब तक की मगरिब से सूरज तुलूअ होगा। (रोज़े कियामत तक)

तिर्मिज़ी की हदीसे सहीह है : अल्लाह तआला ने मगरिब में तौबा के लिये एक दरवाज़ा बनाया है जिस का अर्ज सत्तर साल के सफ़र के बराबर है, अल्लाह उस वक्त तक इसे बन्द नहीं फ़रमाएगा जब तक कि इस से पहले सूरज मगरिब से तुलूअ न करे।

चुनान्चे, फ़रमाने इलाही है : जिस दिन तेरे रब की बा’ज़ निशानियां आएंगी किसी को उस का ईमान नफ्अ नहीं देगा। येह कहा गया है कि येह रिवायत और पहले वाली रिवायत के मरफूअ होने की तसरीह नहीं मिलती जैसा कि बैहक़ी ने इस की तसरीह की है, इस का जवाब येह है कि ऐसी बातें अपनी अक्ल और समझ से नहीं कही जातीं लिहाज़ा येह हदीस मरफूअ के हुक्म में होगी।

तबरानी ने जय्यद सनद से नक्ल किया है कि जन्नत के आठ दरवाजे हैं, सात दरवाजे बन्द हैं और एक दरवाजा तौबा के लिये खुला है यहां तक कि सूरज मगरिब से तलअ होगा।

इब्ने माजा ने जय्यद सनद से येह हदीस रिवायत की है कि अगर तुम इतने गुनाह करो कि तुम्हारे गुनाह आस्मानों तक पहुंच जाएं, फिर तुम तौबा करो तो अल्लाह तआला तुम्हारी तौबा क़बूल फ़रमा लेगा।

हाकिम की सहीह रिवायत है कि येह बात इन्सान की सआदत मन्दी की अलामत है कि उस की ज़िन्दगी तवील हो और अल्लाह तआला उसे तौबा की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए ।

तिर्मिज़ी, इब्ने माजा और हाकिम की रिवायत है कि हर इन्सान खताकार है और बेहतरीन खताकार तौबा करने वाले हैं।

एक खताकार और उसकी मुआफ़ी

बुख़ारी व मुस्लिम की हदीस है कि एक बन्दे ने गुनाह किया, फिर अल्लाह की बारगाह में अर्ज किया : ऐ अल्लाह ! मैं ने बहुत बड़ा गुनाह किया है, मेरा येह गुनाह मुआफ़ फ़रमा दे, रब ने फ़रमाया : मेरा बन्दा जानता है कि उस का खुदा है जो गुनाह पर मुआवज़ा करता है और गुनाहों को मुआफ़ करता है लिहाजा उस का गुनाह मुआफ कर दिया, फिर वोह इन्सान जितनी मुद्दत अल्लाह ने चाहा गुनाहों से रुका रहा, फिर उस ने दूसरा गुनाह कर लिया और कहा : ऐ अल्लाह ! मैं ने और गुनाह कर लिया, इसे मुआफ़ फ़रमा दे, तब रब्बे जलील ने फ़रमाया : मेरा बन्दा जानता है कि उस का खुदा गुनाहों को बख्श देता है और गुनाहों के सबब पकड़ लेता है लिहाज़ा अल्लाह ने उस का गुनाह मुआफ़ फ़रमा दिया फिर जितने दिन अल्लाह तआला ने चाहा वोह रुका रहा ता आंकि उस ने और गुनाह कर लिया और अर्ज़ किया कि या अल्लाह ! मैं ने फिर गुनाह किया है, मेरे इस गुनाह को मुआफ़ फ़रमा दे, रब ने फ़रमाया : मेरा बन्दा जानता है कि उस का खुदा गुनाहों को मुआफ़ फ़रमा देता है और इन पर मुआखज़ा भी करता है। इसी सबब उस के गुनाहों को मुआफ कर दिया जाता है और रब फ़रमाता है : मैं ने अपने बन्दे को बख़्श दिया, जो चाहे अमल करे ।

मुन्ज़िरी रहमतुल्लाह अलैहका कौल है : “जो चाहे अमल करे” का मतलब येह है कि अल्लाह अलीमो खबीर है, उसे इल्म है कि जब भी मेरा येह बन्दा गुनाह करेगा फ़ौरन ही गुनाह से तौबा कर लेगा और उस की दलील येह है कि वोह जूही गुनाह करता है तौबा कर लेता है और जब उस का येह तरीका हो कि गुनाह करते ही दिल की गहराइयों से तौबा कर ले तो ऐसी सूरत में उसे गुनाह नुक्सान नहीं देंगे, इस का येह मा’ना नहीं है कि वोह ज़बान से तौबा करे मगर दिल से गुनाहों से इज़हारे नफ़रत न करे और बार बार गुनाह करने लग जाए क्यूंकि येह झूटों की तौबा है।

मुहद्दिसीन की एक जमाअत ने येह सहीह रिवायत नक्ल की है कि मोमिन जब कोई गुनाह करता है तो उस के दिल पर सियाह नुक्ता पड़ जाता है, अगर वोह तौबा कर ले, गुनाह से रुक जाए और इस्तिगफ़ार करे तो वोह नुक्ता साफ़ हो जाता है और अगर वोह गुनाह करता रहता है तो उस का दिल सियाह नुक्तों में छुप जाता है,

इस का ज़िक्र अल्लाह तआला ने किताबे मुक़द्दस में फ़रमाया है, इरशाद होता है :

हरगिज़ नहीं येह बल्कि उन के दिलों पर उन के

आ’माल ने जंग चढ़ा दिया है। तिर्मिज़ी की रिवायत है कि अल्लाह तआला बन्दे की तौबा कबूल फ़रमाता है जब तक कि उस की रूह गले तक न पहुंच जाए।

 

रसूले  अकरम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की हजरते मुआज को नसीहतें

तबरानी और बैहक़ी ने हज़रते मुआज़ रज़ीअल्लाहो अन्हो से रिवायत की है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने मेरा हाथ पकड़ा और कुछ दूर चलने के बा’द फ़रमाया : ऐ मुआज़ ! मैं तुझे

अल्लाह से डरने, सच्ची बात करने, वा’दा पूरा करने, अमानत की अदाएगी, खियानत से परहेज़, यतीम पर रहम, हमसाए की हिफ़ाज़त, गुस्सा ज़ब्त करने, नर्मी गुफ्तार, बहुत सलाम करने, हाकिम की इताअत, कुरआन में गौरो फ़िक्र, आखिरत को महबूब रखने, हिसाब से डरने, थोड़ी उम्मीदों और बेहतरीन अमल की वसिय्यत करता हूं और मुसलमान को गाली देने, झूटे की तस्दीक करने, सच्चे को झुटलाने, हाकिमे आदिल की ना फ़रमानी करने और जमीन में फ़ितना व फ़साद फैलाने से तुझे रोकता हूं, ऐ मुआज ! अल्लाह तआला का हर दरख्त और पथ्थर के पास जिक्र कर और हर पोशीदा गुनाह की छुप कर तौबा कर और हर जाहिरी गुनाह की ज़ाहिर में तौबा कर ।

 

तौबा करने वाले का गुनाह हर जगह से मिटा दिया जाता है

अस्बहानी की रिवायत है कि जब बन्दा अपने गुनाहों से तौबा कर लेता है तो अल्लाह तआला उस के मुहाफ़िज़ फ़रिश्तों को, उस के आ जाए बदन को और जमीन के उस टुकड़े को जिस पर उस ने गुनाह किया है उस बन्दे का गुनाह भुला देता है यहां तक कि वो कियामत में अल्लाह की बारगाह में पेश होगा और उस के गुनाहों की कोई गवाही देने वाला नहीं होगा।

अस्बहानी की एक रिवायत है कि गुनाहों पर शर्मसार अल्लाह तआला की रहमत का मुन्तज़िर होता है और मुतकब्बिर अल्लाह तआला की नाराज़ी का मुन्तज़िर होता है, ऐ अल्लाह के बन्दो ! जान लो कि हर अमल करने वाला अपने अमल को पाएगा और दुन्या से नहीं निकलेगा यहां तक कि वोह अपने अच्छे और बुरे आ’माल को देख लेगा और आ’माल का दारो मदार उन के खातिमे पर है, और रात, दिन तुम्हारी सवारियां हैं इन पर सवार हो कर आखिरत की तरफ़ अच्छा सफ़र करो, तौबा में ताखीर से बचो क्यूंकि मौत अचानक आती है, तुम में से कोई अल्लाह तआला के हिल्म की वज्ह से सुस्त न हो जाए क्यूंकि आग तुम से तुम्हारे जूते से भी करीब है, फिर हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने येह आयत पढ़ी : पस जो कोई ज़र्रा बराबर नेकी करेगा उसे देखेगा और जो कोई ज़र्रा बराबर बुराई करेगा उसे देखेगा ।

तबरानी येह हदीस नक्ल करते हैं कि गुनाहों से तौबा करने वाला उस शख्स की तरह है जिस का कोई गुनाह न हो।

बैहकी ने येह हदीस एक दूसरे तरीके से नक्ल की है, उस में येह लफ़्ज़ ज़ियादा हैं : गुनाहों से इस्तिगफार करने वाला जो बराबर गुनाह भी किये जा रहा है, ऐसा है जैसे वोह रब तआला से मज़ाक कर रहा हो ।

सहीह इब्ने हब्बान और हाकिम की रिवायत है कि गुनाहों पर शर्मिन्दगी तौबा है या’नी शर्मिन्दगी तौबा का अहम रुक्न है जैसे हज में वुकूफे अरफ़ात है।

तौबा के लिये ज़रूरी है कि वोह सिर्फ गुनाहों के ख़राब होने और अल्लाह तआला के अज़ाब से डरते हुवे की जाए, अपनी बेइज्जती के डर से या रूपये पैसे के जाएअ होने की वज्ह से न हो।

हाकिम ने सनदे सहीह से येह हदीस नक्ल की है लेकिन इस में एक रावी साक़ित है कि अल्लाह तआला किसी बन्दे के गुनाहों पर पशेमानी और शर्मिन्दगी देखता है तो उसे बखिशश तलब करने से पहले बख्श देता है।

मुस्लिम वगैरा की हदीस है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लमने फ़रमाया : उस ज़ात की कसम जिस के कब्जए कुदरत में मेरी जान है ! अगर तुम गुनाह न करो और बखशिश तलब न करो तो अल्लाह तआला तुम्हें नाबूद कर दे और तुम्हारे बदले में ऐसी कौम को लाए जो गुनाह करें और अल्लाह तआला से बख्रिशश तलब करें फिर अल्लाह तआला उन्हें मुआफ़ फ़रमा दे ।

मुस्लिम की हदीस है : कोई ऐसा नहीं है जिसे अल्लाह तआला से ज़ियादा अपनी तारीफ़ पसन्द हो, इसी लिये अल्लाह तआला ने अपनी तारीफ़ फ़रमाई है और कोई भी अल्लाह तआला से ज़ियादा गैरत वाला नहीं है, इसी लिये अल्लाह तआला ने बद कारियों को हराम कर दिया है और कोई एक ऐसा नहीं है जो अल्लाह तआला से ज़ियादा उज्र पसन्द करने वाला हो इसी के लिये अल्लाह तआला ने किताबें नाज़िल की और रसूलों को भेजा।

एक जानिया की तौबा

मुस्लिम की रिवायत है कि एक औरत जुहैना जो ज़िना से हामिला हुई थी हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की ख़िदमत में आई और अर्ज की : या रसूलल्लाह ! सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम मैं काबिले हद हूं, मुझ पर हद जारी फ़रमाइये, हुजूर  ने उस के सर परस्त को बुला कर फ़रमाया कि इस से हुस्ने सुलूक करना और जब इस का बच्चा पैदा हो जाए तो इसे मेरे पास ले आना, चुनान्चे, उस शख्स ने ऐसा ही किया और हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने हुक्म फ़रमाया कि इस औरत के कपड़े अच्छी तरह बांध दिये जाएं, फिर आप ने उसे संगसार करने का हुक्म दिया और बाद में आप ने उस की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई । हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने अर्ज की : या रसूलल्लाह ! आप ने इस ज़ानिया की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई ? आप ने फ़रमाया : इस ने ऐसी तौबा की है कि अगर वोह मदीने के सत्तर आदमियों पर बांट दी जाए तो सब को पूरी हो जाए, क्या तुम ने इस से कोई अफ्जल शख्स देखा कि वोह खुद को अल्लाह की हुदूद के इजरा के लिये ले आई है।

तिर्मिज़ी ने ब सनदे हसन, सहीह इब्ने हब्बान और ब सनदे सहीह हाकिम ने हज़रते इब्ने उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो से रिवायत की है, इन्हों ने कहा : मैं हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की गुफ्तगू सुनता था, आप एक या दो मरतबा (और इन्हों ने सात मरतबा तक गिना) से ज़ियादा किसी बात को नहीं दोहराया करते थे मगर येह बात मैं ने आप से इस से भी ज़ियादा बार सुनी है, आप फ़रमाते थे कि बनी इस्राईल में एक किफ्ल नामी शख्स था, वोह गुनाहों से परहेज़ नहीं करता था, एक मरतबा वोह एक औरत के पास गया और उसे साठ दीनार दे कर गुनाह पर रज़ामन्द कर लिया, चुनान्चे, जब वोह बुराई के इन्तिहाई करीब हुवा तो वोह औरत कांपने और रोने लगी, उस ने औरत से कहा : क्या तुम मुझे अच्छा नहीं समझती हो ? वोह बोली नहीं बल्कि बात येह है कि मैं ने ऐसी बुराई कभी नहीं की है और आज मैं किसी ज़रूरत से मजबूर हो कर येह कर रही हूं। उस ने येह बात सुन कर कहा : वाकेई तुम ने इस हालत में भी ऐसी बुराई नहीं की है? येह दीनार ले जाओ, मैं ने तुम्हें बख़्श दिये हैं और खुदा की कसम ! मैं आयिन्दा कभी भी गुनाह नहीं करूंगा। फिर वोह उसी रात मर गया, सुब्ह उस के दरवाजे पर लिखा हुवा था कि अल्लाह तआला ने किफ़्ल को बख़्श दिया है।

हज़रते इब्ने मसऊद रज़ीअल्लाहो अन्हो से सहीह हदीस मरवी है, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : दो बस्तियां थीं, एक नेकों की और दूसरी बुरों की, एक मरतबा बुरों की बस्ती से एक आदमी नेकों की बस्ती की तरफ़ जाने के इरादे से निकला मगर उसे रास्ते में मशिय्यते इलाही के मुताबिक़ मौत आ गई चुनान्चे, उस शख्स के बारे में शैतान और फ़रिश्तए रहमत का झगड़ा हो गया, शैतान बोला इस ने कभी भी मेरी ना फ़रमानी नहीं की लिहाज़ा येह मेरा है, फ़रिश्तए रहमत ने कहा कि येह तो तौबा के इरादे से जा रहा था। अल्लाह तआला ने फैसला फ़रमाया कि तुम देखो, यह कौन सी बस्ती से ज़ियादा करीब है ? उन्हों ने उसे बालिश्त नेकों की बस्ती से करीब पाया लिहाज़ा अल्लाह तआला ने उसे बख्श दिया।

मुअम्मर की रिवायत है कि मैं ने कहने वाले से सुना है, अल्लाह तआला ने नेकों की बस्ती को उस के करीब कर दिया।

कातिल, इरादए तौबा की बदौलत नजात पा गया

बुख़ारी व मुस्लिम की हदीस है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : तुम से पहले लोगों में से एक शख्स था जिस ने निनानवे कत्ल किये थे, उस ने दुन्या के सब से बड़े आलिम के मुतअल्लिक़ पूछगछ की तो लोगों ने उसे एक राहिब का पता दिया चुनान्चे, वोह राहिब के पास आया और उसे कहा : मैं ने निनानवे कत्ल किये हैं, क्या मेरी तौबा क़बूल हो सकती है ? राहिब बोला : नहीं और उस आदमी ने राहिब को भी क़त्ल कर के सो क़त्ल पूरे कर लिये, फिर उस ने दोबारा दुन्या के सब से बड़े आलिम की तलाश शुरू की तो उसे एक आलिम का पता बताया गया, वोह आलिम के पास गया और कहा कि उस ने सो कत्ल किये हैं, क्या उस के लिये तौबा मुमकिन है ? आलिम ने कहा : हां ! तेरे और तेरी तौबा के दरमियान कौन हाइल हो सकता है ! फुलां फुलां जगह जाओ वहां अल्लाह तआला के नेक, इबादत गुज़ार लोग रहते हैं, तुम भी वहीं जा कर उन के साथ इबादत करो और फिर अपने वतन वापस न आना क्यूंकि येह बहुत बुरी जगह है।

चुनान्चे, वोह चल पड़ा, जब वोह आधे रास्ते में पहुंचा तो उसे मौत आ गई, लिहाजा उस के मुतअल्लिक़ रहमत और अज़ाब के फ़रिश्तों का आपस में झगड़ा हो गया, रहमत के फ़िरिश्तों ने कहा : येह ताइब हो कर अपना दिल रहमते खुदावन्दी से लगाए आ रहा था, अज़ाब के फ़रिश्तों ने कहा : इस ने कभी कोई नेकी नहीं की, तब उन के पास आदमी की शक्ल में एक फ़रिश्ता आया जिसे उन्हों ने अपना हकम तस्लीम कर लिया, उस फ़रिश्ते ने कहा : तुम ज़मीन नाप लो, वोह जिस बस्ती के करीब था वोह उन्ही में शुमार होगा चुनान्चे, उन्हों ने ज़मीन नापी और वोह नेकों की बस्ती के करीब निकला, लिहाजा उसे रहमत के फ़रिश्ते ले गए।।)

एक रिवायत में है कि वोह एक बालिश्त नेकों की बस्ती से करीब था लिहाजा उसे भी नेकों में से कर दिया गया।

दूसरी रिवायत है कि अल्लाह तआला ने बुरों की बस्ती की जमीन की तरफ़ वहय फ़रमाई, उस से कहा : दूर हो जा और नेकों की बस्ती की ज़मीन से कहा : तू करीब हो जा और फ़रमाया : इन बस्तियों का फ़ासिला नापो तो फ़रिश्तों ने उसे एक बालिश्त नेकों की बस्ती से करीब पाया और उसे बख़्श दिया गया ।

हजरते कतादा रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है कि हसन रज़ीअल्लाहो अन्हो ने हमें येह बतलाया था कि जब इज़राईल आया तो उस शख्स ने अपना सीना नेकों की तरफ़ कर दिया।

तबरानी ने सनदे जय्यद के साथ येह रिवायत नक्ल की है कि एक आदमी ने बहुत ज़ियादा गुनाह किये और वोह एक शख्स के पास आया और कहा : मैं ने निनानवे बे गुनाहों को कत्ल किया है, क्या तुम मेरे लिये तौबा का कोई रास्ता पाते हो ? उस आदमी ने कहा : नहीं, चुनान्चे, इस लिये उसे भी कत्ल कर दिया और दूसरे आदमी से कहा मैं ने सो बे गुनाहों को कत्ल किया है, क्या मेरे लिये तौबा का कोई तरीका है ? उस ने कहा : अगर मैं येह कहूं कि अल्लाह तआला तौबा करने वालों की तौबा क़बूल नहीं करता तो येह सरासर झूट है, देखो फुलां मक़ाम पर एक इबादत गुज़ार जमाअत रहती है, तुम भी वहां जाओ और उन के साथ रह कर इबादत करो, चुनान्चे, वोह उन की तरफ चल पड़ा और रास्ते ही में मर गया। इस पर अज़ाब और रहमत के फ़िरिश्तों ने झगड़ा किया अल्लाह तआला ने उन के पास फ़रिश्ता भेजा जिस ने कहा कि तुम इन दोनों जगहों की जमीन नाप लो, जिस जमीन से येह करीब होगा उसी का होगा, जब ज़मीन नापी गई तो उसे च्यूंटी के बराबर इबादत गुज़ार बन्दों की बस्ती से करीब पाया गया लिहाज़ा उसे बख्श दिया गया।

तबरानी की एक और रिवायत में है कि फिर वोह दूसरे राहिब के पास आया और कहा : मैं ने सो क़त्ल किये हैं, क्या तू मेरे लिये तौबा का रास्ता पाता है ? राहिब ने कहा : तुम अपने आप पर बहुत जुल्म कर चुके हो मैं कुछ नहीं जानता लेकिन करीब ही दो बस्तियां हैं, एक को नस्रा और दूसरी को कुफ्रा कहा जाता है, नस्रा वाले हमेशा अल्लाह की इबादत करते रहते हैं, उस में कोई गुनहगार नहीं रह सकता और कुफ्रा वाले हमेशा गुनाहों में मगन रहते हैं, वहां उन के सिवा और कोई नहीं रहता, तुम नस्रा में जाओ, अगर तुम वहां साबित क़दमी से नेक अमल करते रहे तो तुम्हारी तौबा की कबूलिय्यत में कोई शक नहीं होगा। चुनान्चे, वोह नस्रा का इरादा कर के रवाना हो गया। जब वोह दोनों बस्तियों के दरमियान पहुंचा तो उसे मौत ने आ लिया, फ़िरिश्तों ने अल्लाह तआला से उस शख्स के बारे में सवाल किया तो रब्बे जलील ने फ़रमाया कि देखो येह कौन सी बस्ती से करीब है, जिस बस्ती से करीब हुवा, इसे उन्ही लोगों में से लिख दो, पस फ़िरिश्तों ने उसे च्यूटी के बराबर नस्रा से करीब पाया लिहाजा उसे नस्रा वालों में से लिख दिया गया ।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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