हुकुक उल एबाद क्या क्या है हदीसों की रौशनी में

हुकूकुल इबाद – बन्दों के हक

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

 

हर इन्सान पर यह लाज़िम है कि जब वोह दूसरे से मिले तो उसे सलाम कहे, जब वोह उसे दावत दे तो उस की दा’वत कबूल करे, जब उसे छींक आए तो उस का जवाब दे, जब वोह बीमार हो तो उस की इयादत को जाए, जब वोह मर जाए तो उस के जनाजे में हाज़िर हो, जब वोह कसम दिलाए तो उस की कसम को पूरा करे, जब वोह नसीहत का ख्वास्तगार हो तो उसे नसीहत करे, उस की अमे मौजूदगी में उस की पीठ की हिफ़ाज़त करे या’नी उस की गीबत न करे और उस के लिये वोही कुछ पसन्द करे जो अपने लिये पसन्द करता है और हर वोह चीज़ जिसे वोह अपने लिये ना पसन्द समझता है उस के लिये भी मकरूह समझे ।

येह तमाम अहकाम अहादीस में वारिद हुवे हैं चुनान्चे, हज़रते अनस रज़ीअल्लाहो अन्हो हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से रिवायत करते हैं : आप ने फ़रमाया : तुझ पर मुसलमानों के चार हक़ हैं : इन के नेक की इमदाद कर, बुरे के लिये तलबे मगफिरत कर, इन में से जाने वाले (मरने वाले) के लिये दुआ मांग और इन में से तौबा करने वाले के साथ महब्बत रख ।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो इस फ़रमाने इलाही : “वोह आपस में रहम करने वाले हैं।”  की तफ्सीर में फ़रमाते हैं कि उन के नेक बुरों के लिये, बुरे नेकों के लिये दुआ करते हैं, जब कोई बदकार उम्मते मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के नेक मर्द को देखता है तो कहता है : ऐ अल्लाह ! तू ने इसे जो भलाई मर्हमत फ़रमाई है इस में बरकत दे, इसे साबित कदम रख और हमें इस की बरकतों से नवाज़, और जब कोई नेक किसी बदकार को देखता है तो कहता है : ऐ अल्लाह इसे हिदायत दे इस की तौबा कबूल फ़रमा और इस की लगजिशों को मुआफ़ फ़रमा दे।

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मुसलमान पर मुसलमान का हक़

मुसलमान पर मुसलमान का येह भी हक़ है कि वोह जो कुछ अपने लिये पसन्द करता है, दूसरे भाई के लिये भी वोही पसन्द करे और जो चीज़ अपने लिये बुरी समझता है दूसरे मुसलमान के लिये भी उसे बुरा समझे।

हज़रते नो’मान बिन बशीर रज़ीअल्लाहो अन्हो कहते हैं कि मैं ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम को येह फ़रमाते हुवे सुना है कि एक दूसरे से महब्बत करने और बाहम मशक्कत करने में मुसलमानों की मिसाल एक जिस्म जैसी है, जब जिस्म का कोई उज्व तक्लीफ़ में होता है तो तमाम जिस्म उस के एहसास और बुख़ार में मुब्तला होता है।

हज़रते अबू मूसा रज़ीअल्लाहो अन्हो, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से रिवायत करते हैं : आप ने फ़रमाया कि मुसलमान, मुसलमान के लिये दीवार की तरह है जिस का एक हिस्सा दूसरे को तक्विय्यत देता है।

मुसलमान के हुकूक में येह भी है कि वोह अपनी ज़बान और किसी फे’ल से दूसरे मुसलमान को दुख न पहुंचाए।

फ़रमाने नबवी है कि मुसलमान वोह है जिस के हाथ और ज़बान से मुसलमान महफूज़ रहें।

एक तवील हदीस है जिस में हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने लोगों को अच्छी आदात अपनाने के मुतअल्लिक हुक्म फ़रमाया है,  अगर तुम येह नहीं कर सकते हो तो लोगों को अपने शर से महफूज रखो, येह तुम्हारे लिये सदक़ा है जो तुम ने अपनी ज़ात के लिये दिया है।

और फ़रमाया : अफ़्ज़ल मुसलमान वोह है जिस के हाथ और ज़बान से मुसलमान महफूज रहें ।

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : जानते हो मुसलमान कौन है ? सहाबए किराम ने अर्ज किया कि अल्लाह और उस का रसूल बेहतर जानते हैं, आप ने फ़रमाया : मुसलमान वोह है जिस के हाथ और ज़बान से दूसरे मुसलमान महफूज़ रहें । सहाबा ने अर्ज की : मोमिन कौन है ? आप ने फ़रमाया : जिस ने अपनी तरफ़ से मुसलमानों को उन के माल और जानों में बे खौफ़ कर दिया, पूछा गया : मुहाजिर कौन है ? आप ने फ़रमाया : जिस ने बुराइयों को छोड़ दिया और उन से किनारा कश रहा ।

 

एक शख्स ने अर्ज किया : या रसूलल्लाह ! इस्लाम क्या है? आप ने फ़रमाया : यह कि तू दिल से अल्लाह को तस्लीम कर ले और तेरे हाथ और ज़बान से दूसरे मुसलमान महफूज़ रहें।

हज़रते मुजाहिद रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है कि जहन्नमियों पर ख़ारिश मुसल्लत कर दी जाएगी जो तेज़ी से उन का गोश्त ख़त्म कर के उन की हड्डियां नुमायां कर देगी, तब निदा आएगी : ऐ फुलां ! क्या येह ख़ारिश तुझे तक्लीफ़ देती है ? वोह कहेगा : हां ! आवाज़ आएगी, येह मुसलमान को तकालीफ़ देने का तेरे लिये बदला है।

फ़रमाने नबवी है : मैं ने एक ऐसे शख्स को जन्नत में चलते फिरते देखा है जिस ने मुसलमानों के रास्ते से एक ऐसे दरख्त को काट दिया था जो उन्हें तक्लीफ़ दिया करता था।

हज़रते अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहो अन्हो ने अर्ज किया : या रसूलल्लाह ! मुझे ऐसा अमल बतलाइये जिस से मैं नफ्अ हासिल करूं, आप ने फ़रमाया : मुसलमानों के रास्ते से तक्लीफ़ देने वाली चीज़ों को दूर किया करो।

फ़रमाने नबवी है कि जो शख्स मुसलमानों के रास्ते से ऐसी किसी चीज़ को दूर कर देता है जो उन्हें तकलीफ़ देती है तो अल्लाह तआला इस के बदले में उस के लिये नेकी लिख देता है और जिस के लिये अल्लाह तआला नेकी लिख देता है उस के लिये जन्नत को वाजिब कर देता है ।

फ़रमाने नबवी है : किसी मुसलमान के लिये जाइज़ नहीं है कि वोह अपने मुसलमान भाई की तरफ़ ऐसा इशारा करे जिसे वोह ना पसन्द करता है।

फ़रमाने नबवी है : किसी मुसलमान के लिये येह जाइज़ नहीं है कि वोह किसी मुसलमान को ख़ौफ़ज़दा करे ।

नीज़ इरशाद फ़रमाया कि अल्लाह तआला मोमिन की तकलीफ़ को ना पसन्द फ़रमाता है ।

हज़रते रबीअ बिन खैसम रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है कि लोगों की दो किस्में हैं, अगर तेरा मुखातब मोमिन है तो उसे ईज़ा न दे और अगर जाहिल है तो उस की जहालत में न पड़ो और बन्दे पर मुसलमान का येह भी हक़ है कि वोह हर मुसलमान से तवाज़ोअ से पेश आए और तकब्बुर से पेश न आए क्यूंकि अल्लाह तआला हर इतराने वाले मुतकब्बिर को ना पसन्द फ़रमाता है।

लोगो से नरमी से पेश आना हुकुकुल एबाद की हदीसे मुबारक

फ़रमाने नबवी है : अल्लाह तआला ने मुझे वहय फ़रमाई है कि तुम तवाज़ोअ करो और एक दूसरे पर फ़ख्न व तकब्बुर न करो, अगर कोई दूसरा तुम से तकब्बुर से पेश आए तो बरदाश्त करो।चुनान्चे, अल्लाह तआला ने अपने नबी सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से इरशाद फ़रमाया है :

दर गुज़र को अपनाइये नेकी का हुक्म कीजिये और जाहिलों से मुंह फेर लीजिये। हज़रते इब्ने अबी औफ़ा रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम हर मुसलमान से तवाज़ोअ से पेश आते और बेवा और मिस्कीन के साथ चल कर इन की हाजत रवाई करने में आर महसूस न फ़रमाते और न तकब्बुर से काम लेते ।

हुकूकुल इबाद में येह बात भी दाखिल है कि लोगों की बातें एक दूसरे को न बतलाई जाएं और किसी की बात सुन कर किसी दूसरे को न सुनाई जाए।

फ़रमाने नबवी है कि चुगुल खोर जन्नत में नहीं जाएगा।

खलील बिन अहमद रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है : जो तेरे सामने दूसरे लोगों की चुगलियां खाता है वोह तेरी चुगलियां दूसरे लोगों के सामने खाता होगा और जो तुझे दूसरे लोगों की बातें बताता है वोह तेरी बातें दूसरे लोगों को बताता होगा।

एक हक़ येह भी है कि गुस्से की हालत में अपने किसी जानने वाले से तीन दिन से ज़ियादा तर्के तअल्लुक न करे।

हज़रते अबू अय्यूब अन्सारी रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : किसी मुसलमान के लिये येह जाइज़ नहीं है कि वोह अपने भाई से तीन दिन से ज़ियादा कतए तअल्लुक करे, दोनों एक दूसरे के सामने आएं, येह इधर मुंह फेर कर गुज़र जाए और वोह उधर मुंह फेरे चला जाए, उन में से बेहतर वोह है जो सलाम करने में पहल करे ।

फ़रमाने नबवी है : जिस ने किसी मुसलमान भाई को उस की लगज़िश के सबब छोड़ दिया अल्लाह तआला उसे कियामत में छोड़ देगा।

इकरमा से मरवी है : अल्लाह तआला ने यूसुफ़ अलैहहिस्सलाम  से फ़रमाया : भाइयों से तेरे अफ़वो दर गुज़र की वज्ह से मैं ने दो आलम में तेरा ज़िक्र बुलन्द कर दिया है।

हज़रते आइशा रज़ीअल्लाहो अन्हा से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने अपनी ज़ात की खातिर कभी किसी से इन्तिकाम नहीं लिया, हां जब हुदूदुल्लाह की बात होती थी तो आप अल्लाह की रज़ाजूई की ख़ातिर बदला लिया करते थे।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है : कोई शख्स किसी गलती से दर गुज़र नहीं करता मगर उस के बदले में अल्लाह तआला उस की इज्जत बुलन्द करता है। (या’नी जो शख्स किसी गलती से दर गुज़र करता है, अल्लाह तआला उस की इज्जत बुलन्द करता है)

फ़रमाने नबवी है कि सदके से माल कम नहीं होता, अफवो  दर गुज़र से अल्लाह तआला इन्सान की इज्जत बढ़ाता है और जो शख्स अल्लाह की खुशनूदी के लिये तवाज़ोअ करता है अल्लाह तआला उसे बुलन्द मर्तबा अता फ़रमाता है।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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