इंसानों और जानवरों पर रहम करने की फज़ीलत हदीसे पाक और किस्से

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फज़ीलते रहम – रहम करने पर सवाब 

रसूले अकरम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  का इरशाद है :

“जन्नत में रहम करने वाला ही दाखिल होगा, सहाब ए किराम ने कहा : हम सब रहम  करने वाले हैं, आप ने फ़रमाया : रहीम वो नहीं जो अपने आप पर रहम  करे बल्कि रहीम वो है जो अपने आप पर और दूसरों पर रहम  करे” ।

 

रहम की हकीकत

अपने आप पर रहम  करने का मतलब यह है कि खुलूसे दिल से इबादत कर के गुनाहों से किनारा कश हो कर और तौबा कर के अपने वुजूद को अल्लाह के अज़ाब से बचाए, दूसरों पर रहम  यह है कि किसी मुसलमान को तक्लीफ़ न दे।

फ़रमाने हुजूरे अनवर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  है :

“मुसलमान वह है जिस के हाथ और जबान से लोग महफूज रहें और वह जानवरों पर रहम  करे, उन से उन की ताकत के मुताबिक काम ले”। –

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  का फ़रमान है :

“एक शख्स सफ़र में जा रहा था कि उसे रास्ते में सख्त प्यास लगी, उसे करीब ही एक कूआं नज़र आया, जब कूएं से पानी पी कर चला तो देखा एक कुत्ता प्यास के मारे ज़बान बाहर निकाले पड़ा है, उसे ख़याल आया कि इसे भी मेरी तरह प्यास लगी होगी, वह वापस गया, मुंह में पानी भर कर कुत्ते के पास आया और उसे पिला दिया, अल्लाह तआला ने महज़ इसी रहम  की बदौलत उस के गुनाहों को मुआफ़ कर दिया”।

सहाबए किराम ने सुवाल किया : या रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम   जानवरों पर शफ़्क़त करने से भी हमें सवाब मिलता है? आप ने फ़रमाया : हर जानदार पर रहम का अज्र मिलता है”।

हज़रते अनस बिन मालिक रज़ीअल्लाहो अन्हो  से मरवी है : एक रात हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो  गश्त लगा रहे थे कि आप का गुज़र एक काफ़िले से हुवा, आप को अन्देशा हुवा कहीं कोई उन का सामान न चुरा ले, रास्ते में इन्हें हज़रते अब्दुर्रहमान बिन औफ़ रज़ीअल्लाहो अन्हो  मिले और उन्हों ने पूछा : अमीरुल मोमिनीन ! इस वक्त कहां तशरीफ़ ले जा रहे हैं ? आप ने फ़रमाया : एक काफ़िला करीब उतरा है, मुझे डर है कहीं कोई चोर उन का सामान न ले जाए, चलो उन की निगहबानी करें, येह दोनों हज़रात काफ़िले के करीब जा कर बैठ गए और सारी रात पहरा देते रहे यहां तक कि सुब्ह हो गई, हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो  ने आवाज़ दी ऐ काफ़िले वालो ! नमाज़ के लिये उठो ! जब क़ाफ़िले वाले जाग गए तो येह हज़रात वापस लौटे।

पस हमारे लिये ज़रूरी है कि हम सहाबए किराम के नक्शे कदम पर चलें, अल्लाह तआला ने उन की तारीफ़ में इरशाद फ़रमाया :

“वो मुसलमानों पर बल्कि तमाम मख्लूक पर रहम  करने वाले हैं यहां तक कि ज़िम्मी काफ़िर भी उन की निगाहे शफ़्क़त से महरूम न रहे”।

हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो  ने एक बुड्ढे ज़िम्मी को लोगों के दरवाज़ों पर भीक मांगते हुवे देखा तो फ़रमाया हम ने तेरे साथ इन्साफ़ नहीं किया, जवानी में तुझ से जिज्या लेते रहे और बुढ़ापे में तुझे दर बदर ठोकरें खाने को छोड़ दिया, आप ने उसी वक्त बैतुल माल से उस का वज़ीफ़ा मुकर्रर कर दिया”।

हज़रते अली रज़ीअल्लाहो अन्हो  से मरवी है : मैंने एक सुब्ह हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो  को देखा एक वादी में ऊंट पर सुवार चले जा रहे हैं, मैं ने पूछा : अमीरुल मोमिनीन कहां जा रहे हैं ? आप ने फ़रमाया : सदके के ऊंटों में से एक ऊंट गुम हो गया है। उसे तलाश कर रहा हूं, मैं ने कहा आप ने बाद में आने वाले खुलफ़ा को मुश्किल में डाल दिया है, हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो  ने जवाब में कहा : ऐ अबुल हसन ! रज़ीअल्लाहो अन्हो  मुझे मलामत न करो, रब्बे जुल जलाल की कसम ! जिस ने मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम   को नबिय्ये बरहक़ बना कर भेजा, अगर दरयाए फुरात के किनारे एक साल का भेड़ का बच्चा भी मर जाए तो कियामत के दिन उस के बारे में मुआखज़ा होगा क्यूंकि उस अमीर की कोई इज्जत नहीं जिस ने मुसलमानों को हलाक कर दिया और न ही उस बदबख़्त का कोई मक़ाम है जिस ने मुसलमानों को ख़ौफ़ज़दा किया।

रहम के बारे में इरशादाते नबविय्या सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम   

फ़रमाने मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम   है :

“मेरी उम्मत के लोग जन्नत में नमाज़ रोज़ों की कसरत से नहीं बल्कि दिलों की सलामती, सखावत और मुसलमानों पर रहम करने की बदौलत दाखिल होंगे”

हुजूरे अनवर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  का इरशाद है :

“रहम  करने वालों पर अल्लाह तआला रहम  करता है तुम ज़मीन वालों पर रहम करो आसमान वाला तुम पर रहम  फ़रमाएगा”।

फ़रमाने नबिय्ये करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम   है :

जो किसी पर रहम  नहीं करता, उस पर रहम  नहीं किया जाता जो किसी को नहीं बख़्शता उसे नहीं बख्शा जाता”।

हज़रते मालिक बिन अनस रज़ीअल्लाहो अन्हो  से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम   ने फ़रमाया :

 “तुम पर मुसलमानों के चार हुकूक हैं अपने मोहसिन की इमदाद करो, गुनाहगार के लिये मगफिरत तलब करो, मरीज़ की इयादत करो, और तौबा करने वाले को दोस्त रखो”।

रिवायत है कि हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम   ने अल्लाह तआला से सुवाल किया : ऐ अल्लाह ! तू ने मुझे किस वज्ह से सफ़ी बनाया है ? रब तआला ने फ़रमाया : मख्लूक पर तेरे रहम  करने की वज्ह से।

हज़रते अबू दरदा रज़ीअल्लाहो अन्हो  बच्चों से चिड़या खरीद कर उन्हें छोड़ देते और फ़रमाते जाओ आज़ादी की ज़िन्दगी बसर करो।

फरमाने नबवी स.अ.व. है कि

“रहमत, शफ्कत और महब्बत में तमाम मुसलमान एक जिस्म की तरह हैं, जब जिस्म का कोई हिस्सा तक्लीफ़ में मुब्तला हो जाता है तो सारा जिस्म उस दर्द और तक्लीफ़ में मुब्तला हो जाता है”।

हिकायत – बनी इस्राईल का रहमदिल इंसान

बनी इस्राईल पर सख्त कहूत का ज़माना था, एक आबिद का रैत के टीले से गुज़र हुवा तो उस के दिल में ख़याल आया काश येह रैत का टीला आटे का टीला होता और मैं इस से बनी इस्राईल के पेट भरवाता, अल्लाह तआला ने बनी इस्राईल के नबी की तरफ़ वह्यी  भेजी, मेरे उस बन्दे से कह दो कि तुझे इस टीले के बराबर बनी इस्राईल को आटा खिलाने से जितना सवाब मिलता हम ने तुम्हारी इस नियत की बदौलत ही उतना सवाब दे दिया है, इसीलिये फ़रमाने नबवी है, “मोमिन की नियत उस के अमल से बेहतर है”।

हिकायत – ईसा अलैहिस्सलाम  और शैतान का किस्सा

हज़रते ईसा अलैहिस्सलाम  एक मरतबा कहीं जा रहे थे, आप ने शैतान को देखा, एक हाथ में शहद और दूसरे में राख लिये चला जा रहा था, आप ने पूछा : ऐ दुश्मने ख़ुदा ! येह शहद और राख तेरे किस काम आती है? शैतान ने कहा : शहद गीबत करने वालों के होटों पर लगाता हूं ताकि वो और आगे बढ़ें, राख यतीमों के चेहरों पर मलता हूं ताकि लोग इन से नफरत करें।

हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  ने फ़रमाया :

“जब यतीम को दुख दिया जाता है तो उस के रोने से अल्लाह तआला का अर्श कांप जाता है, और रब्बे जुल जलाल फ़रमाता है : ऐ फरिश्तो  ! इस यतीम को जिस का बाप मनो मिट्टी तले दफ्न हो चुका है, किस ने रुलाया है ?”

हुजूरे अनवर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  का इरशाद है कि  “जिस ने यतीम के लिबास व खाने की जिम्मेदारी ले ली, अल्लाह तआला ने उस के लिये जन्नत को वाजिब कर दिया”।

‘रौजतुल उलमा’ में है कि हज़रते इब्राहीम अलैहिस्सलाम  खाने से पहले मील दो मील का चक्कर लगा कर मेहमानों को तलाश किया करते थे। एक मरतबा हज़रते अली रज़ीअल्लाहो अन्हो  रो पड़े, पूछा गया : आप क्यूं रोए ? आप ने फ़रमाया : एक हफ्ता हो गया, मेरे यहाँ कोई मेहमान नहीं आया, शायद अल्लाह तआला मुझ से खुश नहीं है।

फ़रमाने नबवी है :

“जो किसी भूके को फ़ी सबीलिल्लाह खाना खिलाता है उस के लिये जन्नत वाजिब हो जाती है और जिस ने किसी भूके से खाना रोक लिया अल्लाह तआला कियामत के दिन उस शख्स से अपना करम रोक लेगा और अज़ाब देगा”।

सखावत, सदका करने, गरीबों को देने, खाना खिलाने के बारे में हदीसे पाक  

सखी, अल्लाह के करीब और जहन्नम से दूर होता है।

फ़रमाने नब स.अ.व. है : “सखी अल्लाह तआला, जन्नत और लोगों के करीब होता है और जहन्नम से दूर होता है, बखील अल्लाह तआला, जन्नत और लोगों से दूर होता है और जहन्नम से करीब होता है”।

फ़रमाने नबवी है कि “जाहिल सखी, अल्लाह तआला को आबिद बख़ील से ज़ियादा पसन्द है”।

फ़रमाने नबवी है कि “क़ियामत के दिन चार शख्स बिला हिसाब जन्नत में दाखिल होंगे, आलिमे बा अमल, हाजी जिस ने हज के बाद मौत तक गुनाहों का इर्तिकाब न किया, शहीद जो अल्लाह के कलिमे को बुलन्द करने के लिये मैदाने जंग में मारा गया, सखी जिस ने माले हलाल कमाया और अल्लाह की रज़ा के लिए खर्च कर दिया, यह लोग एक दूसरे से इस बात पर झगड़ेंगे कि जन्नत में पहले कौन दाखिल होता है”।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो  से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम   ने फ़रमाया : “अल्लाह ने अपने बा‘ज़ बन्दों को मालो दौलत से माला माल कर दिया ताकि वोह लोगों को फाइदा पहुंचाते रहें जो शख्स फ़ाइदा पहुंचाने में पसो पेश करता है, अल्लाह तआला उस की दौलत किसी और को दे देता है”।

फरमाने नबवी है : “सखावत बहिश्त का एक दरख्त है जिस की शाखें जमीन पर झुकी हुई हैं जिस ने उस की किसी शाख को थाम लिया वो उसे जन्नत में ले जाएगी”।

हज़रते जाबिर रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : “हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम   से पूछा गया कि कौन सा अमल अफ़ज़ल है ? आप ने फ़रमाया : सब्र और सखावत”।

हज़रते मिक्दाम बिन शुरीह रहमतुल्लाह अलैह  अपने वालिद और अपने जद से रिवायत करते हैं, इन के दादा ने हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  की खिदमत में अर्ज की, कि मुझे ऐसा अमल बतलाइये जो मुझे जन्नत का मकीन बना दे। आप ने फ़रमाया : “मगफिरत के अस्बाब में से खाना खिलाना, सलाम करना और खुश अख़्लाक़ी है”।

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