जहन्नम का पूरा बयान हदीसों की रौशनी में

जहन्नम और मीज़ान के बारे में पूरी जानकारी

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

 अगर्चे जहन्नम और मीज़ान का ज़िक्र हम पहले भी कर चुके हैं, अब दोबारा इस का ज़िक्र इस लिये कर रहे हैं कि शायद गाफ़िल व बेकार दिल इस दोबारा ज़िक्र से कुछ मजीद इस्तिफ़ादा कर सकें, और बार बार ज़िक्र करने की ज़रूरत इस लिये भी पेश आई कि अल्लाह तआला के फ़रमान की इत्तिबाअ हो जाए क्यूंकि अल्लाह तआला ने भी कुरआने मजीद में मुतअद्दिद मकामात पर इस का ज़िक्र फ़रमाया है और जहन्नम और मीज़ान के अहवाल की हौलनाकियों को बहुत अज़ीम करार दिया है ताकि अक्लमन्दों के दिल इस के ज़िक्र से तम्बीह हासिल करें और जान लें कि दुनिया का कोई दुख दर्द, जहन्नम के मुकाबले में कोई हैसिय्यत नहीं रखता और आख़िरत ही उम्दा और हमेशा रहने वाली है।

अब हम जहन्नम के हालात का बयान करते हैं, अल्लाह तआला हमें अपने लुत्फो अता के तुफैल इस से अमान बख़्शे ।

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हदीस शरीफ़ में है कि जहन्नम सख्त तारीक है जिस में कोई रोशनी और शो’ला नहीं है, इस के सात दरवाज़े हैं हर दरवाजे पर सत्तर हज़ार पहाड़ हैं, हर पहाड़ पर सत्तर हज़ार आग की घाटियां हैं, हर घाटी में सत्तर हज़ार दराजें हैं, हर दराज़ में आग की सत्तर हज़ार वादियां हैं हर वादी में आग के सत्तर हज़ार मकानात हैं, हर मकान में सत्तर हज़ार आग के घर हैं, हर घर में सत्तर हज़ार सांप और सत्तर हज़ार बिच्छू हैं, हर बिच्छू की सत्तर हज़ार दुमें हैं हर दुम में सत्तर हज़ार मोहरे हैं, हर मोहरे में ज़हर के सत्तर हज़ार मटके हैं, जब क़ियामत का दिन होगा, इन पर से पर्दा उठा लिया जाएगा, तब जिन्नो इन्स के दाएं बाएं गुबार का खैमा तन जाएगा, आगे भी गुबार, पीछे भी गुबार और उन के ऊपर भी जहन्नम का धुवां और गुबार होगा, जब वोह इसे देखेंगे तो घुटनों के बल गिर कर पुकारेंगे कि ऐ रब्बे जुल जलाल ! हमें इस से बचा !

मुस्लिम शरीफ़ की रिवायत है, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : क़ियामत के दिन जहन्नम को सत्तर हज़ार लगामें डाल कर लाया जाएगा और हर लगाम को सत्तर हज़ार फ़िरिश्ते पकड़ कर खींच रहे होंगे।

हदीस शरीफ़ में है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने जहन्नम के फ़िरिश्तों की अज़मत को बयान करते हुवे, जिन के मुतअल्लिक इरशादे इलाही है : वोह सख्त और इन्तिहाई मज़बूत होंगे। फ़रमाया : हर फ़िरिश्ते के दो कन्धों का दरमियानी फ़ासिला एक साल का सफ़र होगा और उन में इतनी ताकत होगी कि अगर वोह उस हथोड़े से जो उन के हाथों में होगा किसी पहाड़ पर एक ज़र्ब लगाएं तो वोह रेज़ा रेज़ा हो जाए और वोह हर ज़र्ब से सत्तर हज़ार जहन्नमियों को जहन्नम की गहराइयों में गिराएंगे। फ़रमाने इलाही है:

उस पर उन्नीस फ़िरिश्ते मुकर्रर हैं। इस इरशाद से मुराद जहन्नमियों पर मुतअय्यन फ़िरिश्तों के सरदार हैं वरना जहन्नम के फ़िरिश्तों की तादाद अल्लाह तआला के सिवा कोई नहीं जानता।

फ़रमाने इलाही है कि “तेरे रब के लश्करों को उस के सिवा कोई नहीं जानता।”

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो से जहन्नम की वुस्अत के मुतअल्लिक़ सुवाल किया गया तो उन्हों ने फ़रमाया : ब खुदा ! मैं नहीं जानता कि जहन्नम कितना वसीअ व अरीज़ है लेकिन हम इतना जानते हैं जहन्नम पर मुतअय्यन फ़िरिश्तों में से हर एक इतना अज़ीम है कि इन के कान की लौ और कन्धे का दरमियानी फ़ासिला सत्तर साल के सफ़र के बराबर है और जहन्नम में पीप और खून की वादियां बहती हैं।

तिर्मिज़ी शरीफ़ की हदीस है कि जहन्नम की दीवारों की चौड़ाई चालीस साल के सफ़र के बराबर है।

मुस्लिम शरीफ़ की रिवायत है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया तुम्हारी येह आग जहन्नम की आग के सत्तरवें हिस्से की गर्मी के बराबर गर्म है, सहाबए किराम ने अर्ज़ की :

या रसूलल्लाह ! सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम येह भी काफ़ी गर्म है। हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : जहन्नम की आग इस की गर्मी से उन्हत्तर हिस्से ज़ियादा गर्म है।

फरमाने नबवी है कि अगर जहन्नमियों में से कोई जहन्नमी अपनी हथेली दुनिया में निकाल दे तो उस की गर्मी से दुनिया जल जाए और जहन्नम के फ़िरिश्तों में से कोई फ़िरिश्ता दुनिया में ज़ाहिर हो और लोग उसे देख लें तो उस के जिस्म पर गज़बे इलाही के बे इन्तिहा आसार देख कर दुन्या के सब लोग हलाक हो जाएं ।

मुस्लिम वगैरा की हदीस है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम सहाबा के साथ बैठे हुवे थे कि आप ने धमाका सुना, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम  ने फ़रमाया : जानते हो यह क्या है ? हम ने अर्ज किया : अल्लाह और उस का रसूल बेहतर जानते हैं। आप ने फ़रमाया : येह उस पथ्थर के जहन्नम की गहराई में गिरने की आवाज़ है जो आज से सत्तर साल पहले जहन्नम में गिराया गया था और वोह अब उस की गहराई तक पहंचा है।

हज़रते उमर बिन ख़त्ताब रज़ीअल्लाहो अन्हो फ़रमाया करते थे कि जहन्नम को बहुत याद किया करो क्यूंकि इस की गर्मी शदीद, इस की गहराई बहुत बईद और इस के हथोड़े लोहे के हैं।

हज़रते इब्ने अब्बास रज़ीअल्लाहो अन्हो फ़रमाया करते थे कि जहन्नम अपने रहने वालों को इस तरह उचक लेगी जैसे परन्दे दानों को उचक लेते हैं, और आप से इस फ़रमाने इलाही : रज़ीअल्लाहो अन्हो और जब वोह उन्हें दूर से देखेगी तो वोह उस से

गुस्से से भरी हुई आवाज़ सुनेंगे। के मा’ना दरयाफ़्त किये गए कि क्या जहन्नम की भी आंखें हैं ? तो आप ने फ़रमाया : हां ! तुम ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम का फ़रमान नहीं सुना कि जो अमदन किसी झूटी बात को मेरी तरफ़ मन्सूब करता है वोह अपना ठिकाना जहन्नम की दो आंखों के दरमियान समझे । हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से अर्ज किया गया कि क्या जहन्नम की भी आंखें हैं ? तो आप ने फ़रमाया : क्या तुम ने येह फ़रमाने इलाही नहीं सुना?

इस रिवायत की वोह हदीस भी ताईद करती है जिस में है कि जहन्नम से गर्दन निकलेगी, जिस की दो आंखें देखने के लिये और बोलने के लिये ज़बान होगी, वोह कहेगी कि आज मैं हर उस शख्स पर मुकर्रर की गई हूं जो अल्लाह तआला के साथ शरीक ठहराता था और वोह उन्हें उस परन्दे से भी ज़ियादा तेज़ी से देख लेगी जो तिल पसन्द करता है और जमीन पर उसे ढूंढ लेता है।

मीज़ान जिस में लोगों के आ‘माल तोले जाएंगे

मीज़ान जिस में लोगों के आ’माल तोले जाएंगे, उस के मुतअल्लिक नबिय्ये करीम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि उस का नेकियों का पल्ला नूर का और बुराइयों वाला पल्ला जुल्मत का है।

तिर्मिज़ी की रिवायत है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि जन्नत अर्शे इलाही के दाई और जहन्नम बाई जानिब रखी जाएगी, नेकियों का पलड़ा दाई और बुराइयों का पलड़ा उस के बाई तरफ़ होगा लिहाज़ा नेकियों का पलड़ा जन्नत की मुक़ाबिल सम्त में और बुराइयों का पलड़ा जहन्नम के मुकाबिल होगा।

हज़रते इब्ने अब्बास  फ़रमाते थे कि नेकियां और बुराइयां ऐसे तराजू में तोली जाएंगी, जिस के दो पलड़े और ज़बान होगी। आप फ़रमाया करते थे : जब अल्लाह तआला बन्दों के आ’माल तोलने का इरादा फ़रमाएगा तो उन्हें जिस्मों में तब्दील फ़रमा देगा और फिर कियामत के दिन उन्हें तोला जाएगा।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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