मालो मनाल – माल और दौलत की बुराइयाँ

माल और औलाद तुम्हारे लिये आजमाइश हैं

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

 फ़रमाने इलाही है : ऐ ईमान वालो तुम्हें तुम्हारा माल व औलाद अल्लाह से ग़ाफ़िल न करे और जिस ने ऐसा किया वो नुक्सान पाने वाले हैं।

मजीद इरशाद है :

बिला शुबा तुम्हारे माल और औलाद तुम्हारे लिये आजमाइश हैं और अल्लाह के नजदीक बहुत बड़ा अज्र है। लिहाज़ा जिस किसी ने भी माल और औलाद को अल्लाह तआला की रहमत पर तरजीह दी उस ने अज़ीम नुक्सान किया।

फ़रमाने इलाही है : जो दुन्या की ज़िन्दगी और आराइश चाहता हो हम इस में उन का पूरा फल दे देंगे और इस में कमी न देगें येह हैं वोह जिन के लिये आखिरत में कुछ नहीं मगर आग और अकारत गया जो कुछ वहां करते थे और नाबूद (बरबाद) हुवे जो उन के अमल थे। ११.१५: १ ) फ़रमाने इलाही है : इन्सान सरकशी करता है इस लिये कि वो खुद को गनी और बे परवा समझता है।

मजीद फ़रमाया : तुम्हें कसरते माल की तलब ने हलाक कर दिया।

फ़रमाने नबवी है कि जैसे पानी सब्जियां उगाता है इसी तरह माल और इज्जत की महब्बत इन्सान के दिल में निफ़ाक़ पैदा करते हैं।

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फ़रमाने नबवी है कि दो खतरनाक भेड़िये बकरियों के इहाते में घुस कर इतना नुक्सान नहीं करते जितना किसी मुसलमान के दीन में माल, इज्जत और वजाहत की तमन्ना नुक्सान करती है।

फ़रमाने नबवी है कि ज़ियादा दौलत मन्द हलाक हो गए मगर जिन्हों ने बन्दगाने ख़ुदा पर बे अन्दाज़ा माल ख़र्च किया (वोह हलाकत से महफूज़ रहे) और ऐसे लोग कम हैं.

आप से पूछा गया आप की उम्मत में सब से बुरे लोग कौन हैं ? फ़रमाया : दौलत मन्द !

फ़रमाने नबवी है कि अन करीब तुम्हारे बा’द एक क़ौम आने वाली है जो दुनिया की खुश रंग ने’मतें खाएंगे, खुश क़दम घोड़ों पर सवार होंगे, बेहतरीन, हसीन व खूबरू औरतों से निकाह करेंगे, बेहतरीन रंगो वाले कपड़े पहनेंगे, उन के मा’मूली पेट कभी नहीं भरेंगे, उन के दिल कसीर दौलत पर भी कनाअत नहीं करेंगे, सुब्हो शाम दुनिया को मा’बूद समझ कर इस की इबादत करेंगे, इसे अपना रब समझेगें, इसी के कामों में मगन और इसी की पैरवी में गामज़न रहेंगे। जो शख्स उन लोगों के ज़माने को पाए, उसे मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की वसियत है कि वो उन्हें सलाम न करे, बीमारी में उन की इयादत न करे, उन के जनाज़ों में शामिल न हो और उन के सरदारों की इज्जत न करे और जिस शख्स ने ऐसा किया उस ने इस्लाम को मिटाने में उन से तआवुन किया।

फ़रमाने नबवी है कि दुनिया, दुनियादारो के लिये छोड़ दो, जिस ने अपनी ज़रूरत से ज़ियादा दुनिया ले ली, उस ने बे ख़बरी में अपने लिये हलाकत ले ली।।

राहे खुदा में खर्च होने वाला माल बाकी रहता है।

फ़रमाने नबवी है कि इन्सान “मेरा माल ! मेरा माल !” करता है मगर तुम्हारे माल वो है जो तू ने खा लिया वो ख़त्म हो गया और जो पहन लिया वो पुराना हो गया, जो राहे खुदा में खर्च किया वो ही बाकी रहा । एक शख्स ने अर्ज़ किया : या रसूलल्लाह ! मुझे क्या हो गया है कि मैं मौत को अच्छा नहीं समझता ? आप ने फ़रमाया : तेरे पास कुछ मालो दौलत है ? उस ने अर्ज़ किया : जी हां। आप ने फ़रमाया : माल को राहे खुदा में खर्च कर दो क्यूंकि मोमिन का दिल अपने माल के साथ रहता है अगर वो माल को रोके रखता है तो उस का दिल मरने पर तय्यार नहीं होता और अगर वो माल को आगे भेज देता है (राहे मौला में खर्च कर देता है) तो उसे भी वहां जाने की आरजू होती है।

फ़रमाने नबवी है कि इन्सान के तीन दोस्त हैं : एक उस की मौत तक साथ रहता है, दूसरा कब्र तक और तीसरा कियामत तक साथ रहेगा, मौत तक का साथी उस का माल है, कब्र तक का साथ देने वाला उस का ख़ानदान है और क़ियामत तक साथ देने वाले उस के आ’माल हैं।

हज़रते ईसा अलैहहिस्सलाम  के हवारियों ने आप से पूछा : क्या वज्ह है कि आप पानी पर चलते हैं और हम नहीं चल सकते ? आप ने फ़रमाया : तुम मालो दौलत को कैसा समझते हो? वो बोले : अच्छा समझते हैं। आप ने फ़रमाया : मगर मेरे नज़दीक मिट्टी का ढेला और रूपिया बराबर है।

गुनहगार दौलत मन्द पुल सिरात से नहीं गुजर सकेगा।

हज़रते सलमान फ़ारिसी रज़ीअल्लाहो अन्हो ने हज़रते अबुदरदा रज़ीअल्लाहो अन्हो को लिखा कि ऐ भाई ! खुद को इतनी दुनिया जम्अ करने से बचाओ जिस का तुम “शुक्र” अदा न कर सको क्यूंकि मैं ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम को फ़रमाते हुवे सुना है कि अल्लाह तआला का इताअत गुज़ार दौलत मन्द अपना माल लिये कियामत में आएगा, वो पुल सिरात से गुज़रने लगेगा तो उस का माल कहेगा : गुज़र जा क्यूंकि तू ने मेरा हक़ अदा किया था और जब गुनहगार दौलत मन्द आएगा और पुल सिरात से गुज़रने लगेगा तो उस का माल कहेगा : तेरे लिये हलाकत हो तू ने मेरे बारे में अल्लाह तआला के मुकर्रर कर्दा हुकूक पूरे नहीं किये थे, पस उसे हलाकत में डाल दिया जाएगा।।

फ़रमाने नबवी है कि जब इन्सान मरता है तो फ़िरिश्ते कहते हैं : इस ने क्या भेजा था (राहे खुदा में क्या कुछ ख़र्च किया था?) और इन्सान कहते हैं : इस ने क्या कुछ छोड़ा है ?

फ़रमाने नबवी है कि जाएदाद न बनाओ, तुम दुन्या से महब्बत करने लगोगे ।

मरवी है कि किसी शख्स ने हज़रते अबुदरदा रज़ीअल्लाहो अन्हो को सख्त सुस्त कहा, आप को ना गवार गुज़रा और आप ने अल्लाह तआला से बद दुआ की : ऐ अल्लाह ! जिस ने मुझे बुरा कहा है, उस के जिस्म को तन्दुरुस्त रख, उस को तवील ज़िन्दगी और कसीर मालो मनाल अता कर दे गोया उन्हों ने तन्दुरुस्ती और तवील ज़िन्दगी के साथ मालो दौलत की फ़रावानी को भी बुरा और उसे राहे रास्त से हटाने वाला समझा ।

हज़रते अली रज़ीअल्लाहो अन्हो ने एक दिरहम हाथ पर रख कर फ़रमाया : तू जब तक मुझ से जुदा नहीं होगा, मुझे कोई फाइदा नहीं देगा।

मरवी है कि हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने उम्मुल मोमिनीन हज़रते जैनब बिन्ते जहश रज़ीअल्लाहो अन्हा की खिदमत में कुछ रकम भेजी, आप ने पूछा : यह क्या है ? लोगों ने कहा : हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने आप की खिदमत में रकम भेजी है। आप बोली : अल्लाह तआला उमर पर रहमत फ़रमाए, फिर एक पर्दा ले कर उस के चन्द टुकड़े किये और उस की थैलियां बना कर उन में रकम डाल कर तमाम की तमाम रिश्तेदारों और यतीमों में तक़सीम कर दी और हाथ उठा कर अल्लाह तआला से दुआ मांगी कि ऐ इलाहुल आलमीन ! कब्ल इस के कि मेरे पास आयिन्दा साल हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो की ऐसी ही रकम आए, मुझे दुनिया से उठा ले ! चुनान्चे, वो हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के विसाल के बाद सब से पहली जौजए मोहतरमा थीं जिन्हों ने सब से पहले इन्तिकाल फ़रमाया।

हज़रते हसन रहमतुल्लाह अलैह का कौल है : जिस ने दौलत को इज्जत दी अल्लाह ने उसे जलील किया। कहते हैं : जब रूपिया पैसा बनता है तो सब से पहले शैतान इन्हें उठा कर माथे से लगा कर चूमता है और कहता है जिस शख्स ने तुम से महब्बत की वो यक़ीनन मेरा बन्दा है।

हज़रते समीत बिन इजलान रहमतुल्लाह अलैह का कौल है : रूपिया पैसा मुनाफ़िकों की ऐसी मुहारें है जो उन्हें जहन्नम में ले जाते हैं।

हज़रते यहया बिन मुआज़ रहमतुल्लाह अलैह का कौल है कि रूपिया पैसा बिच्छू हैं, अगर तुम्हें इस की काट का मन्तर न आता हो तो इसे हाथ न लगाओ, अगर इस ने तुझे डंक मार दिया तो इस का ज़हर तुझे हलाक कर देगा, पूछा गया : इस का मन्तर क्या है ? आप ने फ़रमाया : हलाल से कमाना और सहीह काम में खर्च कर देना।

हज़रते अला बिन ज़ियाद कहते हैं : मेरे सामने दुनिया तमाम ज़ीनतों से मुज़य्यन हो कर आई तो मैं ने कहा : मैं तेरे शर से अल्लाह की पनाह चाहता हूं, दुनिया  ने कहा : अगर तुम मेरे शर से बचना चाहते हो तो रूपये पैसे दौलत से दुश्मनी रखो क्यूंकि दौलत को हासिल करना, दुनिया को हासिल करना है जो इन से अलग थलग रहे वो दुनिया से बच जाता है।

इसी लिये कहा गया है :

मैं ने ये राज़ पा लिया है और तुम भी समझ लो कि दौलत को छोड़ कर ही तकवा हासिल होता है। जब तू दुनिया पा कर उसे छोड़ दे तो वाकेई तू ने एक मुसलमान का सा तक्वा हासिल किया है।

एक शाइर कहता है : तुझे किसी की पैवन्द लगी कमीस या मोटी पिन्डली तक उठी हुई चादर (तहबन्द) धोके में न डाले। या उस की पेशानी पर निशाने इबादत धोके में न डाले तुम तो यह देखो कहीं वोह मालो दौलत से महब्बत तो नहीं करता।

हजरते उमर बिन अब्दुल अजीज रज़ीअल्लाहो अन्हो का मौत का वक़्त मरवी है कि हज़रते उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रज़ीअल्लाहो अन्हो की मौत के वक्त मस्लमा बिन अब्दुल मलिक ने आ कर कहा : अमीरुल मोमिनीन ! आप ने ऐसा काम किया है जो पहले हुक्मरानों ने नहीं किया। आप अपनी औलाद को तंगदस्त छोड़ कर जा रहे हैं ? हज़रते उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ के तेरह बच्चे थे, आप ने यह सुन कर फ़रमाया : मुझे उठा कर बिठाओ। जब आप बैठ गए तो फ़रमाया : तुम ने यह कहा है कि मैं ने इन के लिये मालो दौलत नहीं छोड़ी है ? मैं ने कभी इन का हक़ नहीं रोका और न कभी इन्हें दूसरों का हक़ दिया है, अगर यह इताअत गुज़ार रहेंगे तो अल्लाह तआला इन की ज़रूरतें पूरी करेगा, वोही नेकों का सरपरस्त है और अगर यह बदकार निकले तो मुझे इन की कोई परवाह नहीं है।

रिवायत है कि हज़रते मुहम्मद बिन का’ब अल कुरजी रहमतुल्लाह अलैह को कहीं से बहुत सी दौलत मिल गई, उन से कहा गया कि अपनी औलाद के लिये कुछ जम्अ कर दीजिये ! आप ने फ़रमाया कि मैं इसे अपने लिये अल्लाह के यहाँ जम्अ करूंगा और अपने रब को अपनी औलाद के लिये छोड़ जाऊंगा।।

मरवी है कि एक शख्स ने अबू अब्दे रब्बेह से कहा : ऐ बिरादर ! अपनी औलाद के लिये बुराई नहीं बल्कि भलाई छोड़ कर जाइये तो उन्हों ने अपने माल से एक लाख दिरहम निकाले ।

हज़रते यहूया बिन मुआज़ रहमतुल्लाह अलैह का कौल है कि दो मुसीबतें ऐसी हैं कि इन जैसी मुसीबतें अगले पिछले लोगों ने नहीं सुनी हैं, वह है मौत के वक़्त बन्दे का माल पर अफ्सोस, पूछा गया वह कैसे ? आप ने फ़रमाया : उस से तमाम दौलत छिन जाती है और दूसरे यह कि उसे तमाम दौलत का हिसाब अल्लाह को देना पड़ता है।

 

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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