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सेकड़ों सालों तक लोगो ने टॉलेमी की पुस्तकों का उपयोग किया – Net In Hindi.com

सेकड़ों सालों तक लोगो ने टॉलेमी की पुस्तकों का उपयोग किया

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महान ग्रीक खगोल शास्त्री टॉलेमी (Ptolemy) Great Astronomer Ptolemy of Alexandria

क्या आप जानते हैं कि महान खगोलशास्त्री टॉलेमी (Ptolemy) कि लिखी  किताबों का और उनके सिद्धांतों का उपयोग लोगों ने 1400 साल तक किया, उनकी  खगोल शास्त्र, ज्योतिष विज्ञान और भूगोल की किताबों का उपयोग आम जनता ने सैकड़ों साल तक किया. टॉलेमी (Ptolemy) ने ही  पृथ्वी के गोल होने के सिद्धांत को आज से 2000 साल पहले व्यवस्थित रूप दिया.

टॉलेमी (Ptolemy) का पूरा नाम claudius ptolemaeus था, जो कि एक ग्रीक खगोल शास्त्री गणितज्ञ  और भूगोल शास्त्र के विद्वान थे, टॉलेमी (Ptolemy) मिस्र के अलेक्जेंड्रिया में रहते थे तथा उन्होंने सारा जीवन यहीं काम किया उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी मौजूद है. वे मूलत ग्रीक थे तथा रोमन साम्राज्य के नागरिक थे.

Ptolemy in hindi

उस समय में ब्रह्मांड का पृथ्वी केंद्रीय सिद्धांत प्रचलित था, यह सिद्धांत ग्रीक वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किया था अपने लेखन में टॉलेमी (Ptolemy) ने इसी सिद्धांत को आगे बढ़ाया, कुछ ग्रीक वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के गोल होने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, टॉलेमी (Ptolemy) ने इसी प्रस्ताव को अपनाते हुए ब्रह्मांड का सिद्धांत प्रस्तुत किया जिसके अनुसार  गोलाकार पृथ्वी केंद्र में थी तथा तथा एक गोलाकार आकाश उसके चारों और था.

टॉलेमी (Ptolemy) ने हिप्पारकस Hipparchus के आकाश के ग्रहों की गति और कक्षाओं के सिद्धांत  की व्याख्या की और उसे और अधिक विस्तृत किया इस सिद्धांत में 80 ग्रहों और पिंडो की गति के आधार पर सूर्य, चंद्रमा, ग्रह, आदि की गति का वर्णन किया गया है,  आगे चलकर इस सिद्धांत को टॉलेमी का सिद्धांत कहा जाने लगा, इसका उपयोग ग्रहों की स्थिति की भविष्यवाणी करने में किया जाता था.

टॉलेमी (Ptolemy) का खगोल शास्त्र में योगदान Ptolemy contribution in Astronomy

Ptolemy in hindi

टॉलेमी (Ptolemy) की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक The Almagest है जोकि एस्ट्रोनॉमी और गणित के सिद्धांतों की पुस्तक है,  इसके अंदर उस समय ब्रह्मांड की संरचना की व्याख्या की गई है, खगोल शास्त्र के उस समय तक प्राप्त ज्ञान को इस पुस्तक में समाहित किया गया है, टॉलेमी (Ptolemy)  के समय यह माना जाता था की पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में स्थित है. ब्रह्मांड का यह मॉडल लगभग 1400 साल तक माना जाता रहा.

इस सिद्धांत में पृथ्वी को एक चपटी सतह की बजाय एक गोले का रूप दिया गया था तथा यह माना गया था कि पृथ्वी अपनी जगह रहती है.

टॉलेमी (Ptolemy) का भूगोल में योगदान How Ptolemy started the Geography

टॉलेमी (Ptolemy) का एक और महान योगदान भूगोल के क्षेत्र में है, उन्होंने एक महान पुस्तक लिखी जिसका नाम जुगराफिका Geographica था इस पुस्तक में उन्होंने विस्तार से उस समय के भूगोल का वर्णन किया है,  2000 साल पहले पृथ्वी के बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी थी जिस तरह टॉलेमी (Ptolemy) कि एस्ट्रोनॉमी की किताब The Almagest कई हजार साल तक खगोलशास्त्र की प्रमुख पुस्तक रही, उसी तरह हजारों साल तक टॉलेमी (Ptolemy) की भूगोल की किताब Geographica भूगोल शास्त्र और दिशा निर्धारण की एक प्रमुख पुस्तक बनी रही.  हजारों सालों तक लोग इसके द्वारा ही यह निश्चित करते रहे कि पृथ्वी पर अलग-अलग देश और शहर कहां स्थित है, इस पुस्तक में अक्षांश और देशांतर रेखाओं का भी वर्णन किया गया था, समुद्र यात्रियों के लिए यह पुस्तक बहुत महत्वपूर्ण थी, इस पुस्तक से वह सही रास्ते का ठीक ठीक निर्धारण कर सकते थे हजारों साल तक लोग टॉलेमी (Ptolemy) की इसी पुस्तक का उपयोग करते रहे.

टॉलेमी (Ptolemy) का  ज्योतिष शास्त्र में योगदान Ptolemy and Astrology

टॉलेमी (Ptolemy) ने अपने समय में एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोलॉजी दोनों के सबसे बड़े विद्वान थे उस जमाने में ग्रहों और नक्षत्रों की चाल और स्थिति को बहुत महत्वपूर्ण समझा जाता था लोग अज्ञानतावश  समझते थे कि ग्रहों की स्थिति का उनकी जिंदगी पर सीधा प्रभाव पड़ता है इसीलिए प्राचीन काल में लोग अपनी जिंदगी के हर पहलू में ज्योतिष शास्त्र ग्रहों की स्थिति आदि देखकर ही निर्णय लेते थे

(यह देख कर दुःख होता है की वर्तमान समय में भारत में यह अन्धविश्वास ज्योतिष शास्त्र के रूप में आज भी मोजूद है बल्कि हर समाचार पत्र और टीवी चेनल प्रमुखता से ज्योतिष शास्त्र के कार्यक्रम दिखाकर जनता को भ्रमित करते हैं)

टॉलेमी (Ptolemy) की ज्योतिष शास्त्र की पुस्तकें  Ptolemy books of astronomy

टॉलेमी (Ptolemy) ने  खगोल विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र की चार किताबें जिनका नाम Tetrabiblos  है लिखी थी सेकड़ों सालों तक टॉलेमी (Ptolemy) की ये 4 पुस्तकें खगोल विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र की प्रमुख नियम पुस्तक बनी रही.

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