कयामत के दिन नेक और बुरे का अंजाम

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क़यामत हश्र के दिन अल्लाह का इंसाफ – माफ़ कर देने का ईनाम

 (हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

 

असली गरीब मुफ्लिस कौन है?

हज़रते अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि जानते हो मुफ्लिस कौन है ? हम ने कहा : मुफ़्लिस वो है जिस के पास रुपया-पैसा और मालो मनाल न हो। आप ने फ़रमाया : नहीं, मेरी उम्मत में मुफ़्लिस वो है जो कियामत के दिन नमाज़, रोज़ा, ज़कात वगैरा का सवाब लिये हुवे आएगा मगर उस ने किसी को गाली, किसी की गीबत, किसी को ना हक़ क़त्ल, किसी पर जुल्म और किसी का माल खाया होगा, उस की तमाम नेकियां उन लोगों में तक्सीम कर दी जाएंगी, जब उस की नेकियां खत्म हो जाएंगी तो दूसरों के गुनाह उस पर डाल दिये जाएंगे और उसे जहन्नम में डाला जाएगा।

 

ऐ इन्सान ! ज़रा सोच ! उस दिन तेरी क्या हालत होगी ! तेरे पास कोई ऐसी नेकी नहीं है जिसे तू ने रिया और शैतान के वस्वसों से पाक हो कर किया होगा, अगर तू ने तवील मुद्दत में एक खालिस नेकी हासिल कर ली है तो वो भी कियामत में तेरे दुश्मन ले जाएंगे शायद तू ने अपने नफ़्स का मुहासबा करते हुवे देखा होगा कि अगर  तू सारी रात इबादत में और तमाम दिन रोज़ों में गुज़ारता है मगर तेरी ज़बान मुसलमानों की ग़ीबत से नहीं रुकती और तेरी नेकियां बरबाद हो जाती हैं, दीगर बुराइयां जैसे हराम की चीजें खाना, माले मश्कूक हज़्म कर जाना और मुकम्मल तौर पर इबादते इलाही न कर सकने की कोताही से तू कैसे छूट सकता है। जब कि उस दिन हर बे सींग वाली बकरी को सींग वाली बकरी से बदला दिलाया जाएगा।

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हज़रते अबू ज़र रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने दो बकरियों को आपस में सींग मारते हुवे देख कर फ़रमाया : अबू ज़र ! जानते हो ये ऐसा क्यूं कर रही हैं ? मैं ने कहा : नहीं। आप ने फ़रमाया : लेकिन अल्लाह तआला जानता है कि वो क्यूं एक दूसरे को सींग मार रही हैं और वो कियामत के दिन इन का फैसला फ़रमाएगा।

हज़रते अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहो अन्हो कुरआने करीम की आयत : “ज़मीन के तमाम जानवर और तमाम परन्दे  तुम्हारी तरह एक उम्मत है”। की तफ्सीर में फ़रमाते हैं : क़यामत के दिन तमाम मख्लूक जानवर, दरिन्दे, परन्दे वगैरा उठाए जाएंगे और हर किसी को इन्साफ़ दिया जाएगा यहां तक कि बे सींग वाली बकरी को सींग वाली से बदला दिलाया जाएगा और फिर कहा जाएगा : तुम मिट्टी हो जाओ ! उस वक्त यह सुन कर हर काफ़िर यह पुकार उठेगा कि “काश मैं भी मिट्टी होता”

ऐ नातवां इन्सान ! उस वक्त जब कि तेरा नाम ए आ’माल नेकियों से खाली होगा तू सख़्त दुख में मुब्तला हो कर कहेगा : मेरी नेकियां कहां हैं ? और तुझ से कहा जाएगा कि वो ह तेरे दुश्मनों के नामए आ’माल में मुन्तकिल हो गई हैं। उस वक्त तू अपने नामए आ’माल को बुराइयों से भरा हुवा पाएगा जिन से बचने के लिये तू ने दुन्या में इन्तिहाई कोशिश की थी और रन्जो गम उठाया था, तब तू कहेगा : ऐ अल्लाह ! मैं ने तो ये गुनाह नहीं किये थे, तो तुझे कहा जाएगा कि ये उन लोगों की बुराइयां तेरे हिस्से में आई हैं जिन की तू ने गीबत की, गालियां दी और उन से लैन दैन, हमसाएगी, गुफ्तगू, मुबाहसों और दीगर मुआमलात में तू ने बद सुलूकी की थी।

हज़रते इब्ने मसऊद रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : शैतान जज़ीरतुल अरब में बुत परस्ती से ना उम्मीद हो गया है लेकिन वो अन करीब तुम्हारे बुरे अफ्आल से राजी हो जाएगा और ये ही बद आ’मालियां तबाह करने वाली हैं, जहां तक हो सके ज़ियादतियों से बचो क्यूंकि क़यामत के दिन एक ऐसा इन्सान भी आएगा जिस की नेकियां पहाड़ों की तरह होंगी और वो यह समझेगा कि मैं अन करीब नजात पा जाऊंगा मगर बराबर इन्सान आते जाएंगे और कहेंगे : ऐ अल्लाह ! इस ने हम पर जुल्म किया था। रब फ़रमाएगा : “इस की नेकियां मिटा दो !” यहां तक कि उस की कोई नेकी बाकी नहीं बचेगी, यह ऐसा ही है जैसे कुछ लोग सफ़र में एक सहरा में उतरे, उन के पास लकड़ियां नहीं थीं, वह इर्द गिर्द फैल गए और उन्हों ने लकड़ियां इकट्ठी की मगर आग जलाने से पहले ही वहां से चल दिये, यही हाल गुनाहों का है।)

जब यह आयते करीमा नाज़िल हुई : ……तर्जमए कन्जुल ईमान : “बेशक तुम्हें इन्तिकाल फ़रमाना है और उन को भी मरना है, फिर तुम कियामत के दिन अपने रब के पास झगड़ोगे” ।

तो हज़रते जुबैर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने अर्ज की : या रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम हम दुनिया में एक दूसरे के साथ जो ज़ियादतियां करते हैं वो लौटाई जाएंगी? आप ने फ़रमाया : हां ! ताकि हर मज़लूम को उस का हक़ दिलाया जाए । हज़रते जुबैर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने कहा : “ब खुदा यह बात बहुत अजीम है।” ऐसा अजीम दिन जिस में किसी कदम को नहीं बख्शा जाएगा और न ही किसी थप्पड़ से दर गुज़र किया जाएगा ता आंकि हर मज़लूम को ज़ालिम से उस का हक़ दिलाया जाएगा।

हज़रते अनस रज़ीअल्लाहो अन्होसे मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : अल्लाह तआला कयामत के दिन लोगों को बरह्ना, गुबार आलूद, खाली हाथ उठाएगा, फिर अल्लाह तआला फ़रमाएगा (और येह आवाज़ करीब व दूर यक्सां सुनी जाएगी) कि मैं बादशाह हूं, हर शख्स को उस के आ’माल के मुताबिक़ बदला देने वाला हूं, कोई जन्नती जन्नत में और कोई दोज़खी दोज़ख़ में बिगैर बदले दिये न जाएगा । हम ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से अर्ज़ किया : हुजूर बदला कैसे दिया जाएगा लोग तो बरह्ना और खाली हाथ होंगे ! आप ने फ़रमाया : नेकियों और गुनाहों के साथ बदले दिये और लिये जाएंगे  लिहाज़ा अल्लाह से डरो ! लोगों के माल छीन कर, उन की इज्जतें पामाल कर के, उन के दिल दुखा के और उन से बुरा सुलूक कर के उन पर जुल्म न करो क्यूंकि जो गुनाह बन्दे और खुदा तआला के दरमियान हैं वह बहुत जल्द मुआफ़ कर दिये जाएंगे।

जो शख्स गुनाह और लोगों से ज़ियादतियां कर के ताइब हो चुका हो उसे चाहिये कि वो नेकियों में दिल लगाए और इन को यौमे कियामत के लिये ज़खीरा बनाए, मजीद बर आं मुकम्मल इख्लास से ऐसी नेकियां करे जो अल्लाह तआला के सिवा कोई न जानता हो, मुमकिन है इसी के तुफैल अल्लाह तआला उसे अपना मुकर्रब बना ले और उन महबूब मोमिनों की जमाअत में इसे शामिल फ़रमा ले जिसे वो बा वुजूद ज़ियादतियों के अपने लुत्फ़ो करम से बख़्श देगा।

माफ़ कर देने का इनाम

हज़रते अनस रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है : हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के साथ बैठे हुवे थे, अचानक हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने तबस्सुम फ़रमाया इस तरह कि आप के दन्दाने मुबारक नज़र आने लगे। हज़रते उमर रज़ीअल्लाहो अन्हो ने अर्ज़ किया : मेरे मां-बाप आप पर कुरबान हों ! हुजूर किस बात पर तबस्सुम फरमा रहे हैं ? आप ने फ़रमाया : मेरी उम्मत के दो आदमी अल्लाह की बारगाह में हाज़िर होंगे, उन में से एक कहेगा : “इलाहुल आलमीन ! मुझे इस भाई से इन्साफ़ दिलाइये।” रब तआला दूसरे आदमी से फ़रमाएगा कि इसे इस का हक़ दो ! वो अर्ज करेगा : “या इलाही ! मेरी नेकियों में कुछ बाकी नहीं रहा है।” अल्लाह तआला इन्साफ़ चाहने वाले से फ़रमाएगा : अब क्या कहते हो ? वोह कहेगा : “ऐ अल्लाह ! इस के इवज़ मेरे गुनाहों का भार इस पर कर दीजिये!” हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की चश्माए अतहर अश्कबार हो गई फिर फ़रमाया : बे शक यह बहुत शदीद दिन होगा, लोग अपने गुनाह दूसरों पर डालने के ख्वाहिशमन्द होंगे। अल्लाह तआला पहले शख्स से फ़रमाएगा कि नज़र उठा कर जन्नत को देखो ! वो जन्नत को देख कर कहेगा : मैं ने सोने चांदी के ऊंचे ऊंचे महल्लात देखे हैं जिन में मोती जड़े हुवे हैं, ये कौन से नबी, सिद्दीक़ या शहीद के लिये हैं ? रब्बे जुल जलाल फ़रमाएगा : जो इस की कीमत अदा करेगा उसे दूंगा। वो कहेगा : ऐ अल्लाह ! इन की कीमत किस के पास है ? अल्लाह तआला फ़रमाएगा : “तेरे पास इन की कीमत है और वो यह है कि तू अपने इस भाई को मुआफ़ कर दे” चुनान्चे, वो उसे मुआफ़ कर देगा और रब तआला फ़रमाएगा : अपने भाई का हाथ पकड़ कर इसे जन्नत में दाखिल कर दे। इस के बाद हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : अल्लाह से डरो ! और एक दूसरे से नेकी करो ! अल्लाह तआला कियामत के दिन मोमिनों में बाहम सुल्ह कराएगा।

इस इरशाद में यह ताकीद पाई जाती है कि इन्सान अपने अख़्लाक़ बेहतर बनाए, लोगों से नेकी करे । अब ऐ इन्सान ज़रा गौर कर ! अगर तेरा नामए आ’माल उस दिन मज़ालिम से पाक हो या अल्लाह तआला तुझे अपने लुत्फो करम से बख़्श दे और तुझे सआदते अबदी का यकीन हो जाए तो अल्लाह तआला की अदालत से वापस लौटते हुवे तुझे कितनी “खुशी और मसर्रत” होगी, तेरे जिस्म पर रज़ाए इलाही का लिबास होगा, तेरे लिये अबदी सआदत होगी और हमेशा रहने वाली ने’मतें हासिल होंगी, उस वक्त तेरा दिल खुशी व शादमानी से उड़ रहा होगा, तेरा चेहरा सफ़ेद व नूरानी होगा और चौदहवीं रात के चांद की तरह ताबां, तू सर उठाए हुवे फ़न के साथ लोगों में जाएगा, तेरी पीठ गुनाहों से ख़ाली होगी, जन्नत की हवाओं और रज़ाए इलाही की ठन्डक से तेरी पेशानी चमक रही होगी, सारी मख्लूक की निगाहें तुझ पर जमी होंगी, वो तेरे हुस्नो जमाल पर रश्क करेंगे, मलाइका तेरे आगे पीछे चल रहे होंगे और लोगों से कहेंगे : यह फुलां बिन फुलां है, अल्लाह तआला इस से राजी हुवा और इसे राजी कर दिया, इसे सआदते अबदी मयस्सर आ गई है और इसे कभी भी शकावत से हम किनार नहीं होना पड़ेगा। क्या तू ये मक़ाम उस मक़ाम से बुलन्द नहीं समझता जिसे तू रिया, तसन्नोअ, मुनाफ़क़त और जैबो जीनत से लोगों के दिलों में बनाता है। अगर तू इस बात को अच्छा समझता है और यक़ीनन वो ही मकामे आख़िरत अच्छा है, तो इख्लास और अल्लाह तआला के हुजूर निय्यते सादिक़ के साथ हाज़िरी दे, फिर तू यह बुलन्द मर्तबा हासिल कर लेगा।

नामए आ‘ माल का बुराइयों से भरा होना और इस का अन्जाम

अगर ऐसा न हुवा और तेरे नामए आ’माल से तमाम बुराइयां निकलीं जिन्हें तू मा’मूली समझता था हालांकि अल्लाह तआला के नज़दीक वो बहुत बड़ी गलतियां थीं, इसी वज्ह से तुझ पर अल्लाह तआला का इताब हो और वो फ़रमाए : ऐ बदतरीन इन्सान ! तुझ पर मेरी ला’नत हो, मैं तेरी इबादत कबूल नहीं करता, तो यह आवाज़ सुनते ही तेरा चेहरा सियाह हो जाएगा, फिर अल्लाह तआला की नाराजी के सबब अल्लाह के फ़रिश्ते तुझ पर नाराज़ हो जाएंगे और कहेंगे : तुझ पर हमारी और तमाम मख्लूक की तरफ़ से ला’नत हो, उस वक्त अज़ाब के फ़रिश्ते अपनी भरपूर बद मिज़ाजी, बद खुल्की और वहशत नाक शक्लों के साथ रब तआला की नाराज़ी की वज्ह से इन्तिहाई गुस्से में तेरी तरफ़ बढ़ें और तेरी पेशानी के बालों को पकड़ कर तुझे तमाम लोगों के सामने मुंह के बल घसीटें, लोग तेरे चेहरे की सियाही देखें, तेरी रुस्वाई देखें! और तू हलाकत को पुकारे और फ़रिश्ते तुझे कहें तू आज एक हलाकत को नहीं बहुत सी हलाकतों को बुला और फ़रिश्ते पुकार कर कहें, येह फुलां बिन फुलां है, अल्लाह तआला ने आज इस की रुस्वाइयों का पर्दा चाक कर दिया है, इस के बुरे आ’माल की वज्ह से इस पर ला’नत की है और दाइमी बद बख़्ती इस को नसीब हुई है। और यह अन्जाम बसा अवकात ऐसे गुनाहों का होता है जिसे तू ने लोगों से छुप कर किया हो, उन से शर्मिन्दगी या इज़हारे तक्वा के तौर पर तू ने ऐसा किया हो मगर इस से बढ़ कर तेरी बे वुकूफ़ी और क्या होगी कि तू ने चन्द आदमियों के डर से सिर्फ दुन्यावी रुस्वाई से बचते हुवे छुप कर गुनाह किया मगर उस “अज़ीम रुस्वाई” से जो सारी दुन्या के सामने होगी और उस में अल्लाह तआला की नाराज़ी, अज़ाबे अलीम और अज़ाब के फ़रिश्तों का तुझे जहन्नम की तरफ़ घसीटना और दूसरे अज़ाब शामिल होंगे, तू ने बचने की कोई तदबीर न की। कियामत में तेरी यही कैफ़िय्यात होंगी मगर अफ्सोस कि तुझे पेश आने वाले खतरात का ज़र्रा भर एहसास नहीं है।

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

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