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भाँप की शक्ति और स्टीम इंजिन – Net In Hindi.com

भाँप की शक्ति और स्टीम इंजिन

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अद्भुत शक्ति छिपी हुयी थी भाँप में

भाँप की शक्ति incredible energy was hidden in Steam

आपने किसी बर्तन में पानी को उबलते हुए जरूर देखा होगा, यह पानी को 100 डिग्री सेल्सियस पर उबला जाता है तो वह गैस में बदल जाता है इस गैस को ही भांप कहते हैं,  भांप अत्यधिक गर्म होती है, इसमें बहुत शक्ति होती है, पर एसा क्यों हैं भांप में इतनी शक्ति क्यों होती है? दरअसल जब हम पानी को गर्म करते हैं तो वह 100 डिग्री सेल्सिउस तक गर्म हो जाता हे, तथा उबलने लगता हे, इस बिंदु को पानी का बोइलिंग पॉइंट कहते हैं, अगर हम अब पानी को और गर्म करें तो यह उर्जा  पानी का तापमान नहीं बढाएगी बल्कि यह उसे गेस या भांप में बदल देगी, तथा दी जाने वाली सारी उर्जा इस भांप के परमाणुओं में जाएगी.

भांप के परमाणुओं में अत्यधिक उर्जा होने की वजह से यह चारो दिशाओं में फेलने लगते हैं, इसलिए गर्म भांप अपने चारो और अत्यधिक दबाव उत्पन्न करती हैं, भांप की शक्ति का यही कारण है.

मनुष्य ने प्राचीन समय से ही भांप की शक्ति को पहचान लिया था, परन्तु उसके उपयोग के यंत्र और तकनीक का अविष्कार बाद में हुआ. जेम्स वाट ने जब नए भांप के इंजन का अविष्कार किया तो भाँप  की शक्ति ने पूरी दुनिया को हमेशा बदल कर रख दिया. भाँप ने ही उद्योगिक क्रांति को जन्म दिया.

भाँप की शक्ति और इंजनो का इतिहास

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Aeolipile

The history of Steam Energy and Steam Engines hindi

भांप की शक्ति के चलने वाली किसी मशीन का पहला वर्णन हमें पहली सदी के रोमन मिश्र में मिलता है, अलेक्सज़ेन्द्रिया के हेरॉन ने पहला भांप से चलने वाला यंत्र बनाया जिसका नाम ऐइओलिपिल Aeolipile था. इसके बाद भाँप से चंलने वाले कई यंत्र बनाये गए, जेसे की सोलहवी सदी आटोमन मिश्र में तकी-अल-दीन नाम के इस्लामिक एस्ट्रोनामर का भाँप यंत्र,  सत्रहवीं सदी में इंग्लैंड के थॉमस सावेरी का भाँप का पंप, 1712 में थॉमस न्युकोमेन्न का बनाया गया एटमोस्फियरिक इंजन पहला इंजन था जो की व्यवसायिक रूप से सफल हुआ. इसके अन्दर पिस्टन और सिलेंडर थे इसका उपयोग कोयला खदानों से पानी बहार निकलने में किया जाता था.

जेम्स वाट

अठारवी सदी में इंग्लैंड के प्रोफेसर जेम्स वाट ने  थॉमस न्युकोमेन्न के एटमोस्फियरिक इंजन में कई सुधर किये. अपने जीवन पर्यन्त जेम्स इस इंजिन को बेहतर से बेहतर बनाते रहे, उन्होंने इसे पूरी तरह बदल कर उपयोगी बना दिया. जेम्स ने देखा की इस इंजन में लगभग ८० प्रतिशत भाँप की उर्जा नष्ट हो जाती हे और कार्य में नहीं बदलती! इसको उन्होंने कई सुधार कर दूर किया जैसे के ठन्डे पानी का एक अलग सिलेंडर जोड़ना इत्यादि. जेम्स वाट ने ही स्टीम इंजन का पहला पेटेंट रजिस्टर करवाया.

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भाँप की शक्ति का वैज्ञानिक सिद्धांत क्या है?

What is the scientific principle and theory behind steam energy and steam engine

भाँप में इतनी शक्ति क्यों होती है? जब पानी की गर्म किया जाता हे तो यह 100 डिग्री सेल्सियस तक उबलता हे इसके बाद दी जाने वाली उर्जा पानी के परमाणुओं के बीच चली जाती हे और इनके बीच के दूरी बढ़ा देती हे इस वजह से पानी अपने गैस रूप यानि की भाँप में बदल जाता हे. भाँप और दूसरी सब गर्म गैसों के परमाणु चारो और फेलना चाहते हैं क्यों की इनके अन्दर उर्जा भरी होती है …यह गर्म गैस अपने चारो और अत्यधिक दबाव उत्पन्न करती है ..इस उष्मीय उर्जा को भाँप के इंजन के द्वारा यांत्रिक उर्जा में बदल दिया जाता है, भाँप के इंजन के अन्दर यही वैज्ञानिक सिद्धांत काम करता है.

भाँप की शक्ति का वर्तमान में उपयोग और महत्त्व

The use and importance of Steam Energy in modern times hindi

वर्तमान समय में भांप की शक्ति से चलने वाले इंजिनों का उपयोग उद्योगों में नहीं होता, इनकी जगह अब डीजल और विद्युत् इंजिनों ने ले ली है. भाँप की शक्ति का उपयोग पॉवर प्लांट्स – विद्युत् संयंत्रों म में अवश्य होता है, इन संयंत्रो में कोयले को जलाकर या फिर परमाणु उर्जा का उपयोग करके पानी को गर्म कर भांप में बदला जाता हे, इस भाँप का उपयोग टरबाईन को चलाने और विद्युत उर्जा उत्पन्न करने में किया जाता हे. विश्व में कुल 80 प्रतिशत बिजली भाँप की शक्ति से ही बनायीं जा रही है, अतः हम कह सकते हैं के मानव सभ्यता आज भी भाँप की शक्ति और भाँप के इन्जन पर पूरी तरह से निर्भर है.  

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भाँप से चलने वाले इंजन ने उद्योगिक क्रांति को जन्म दिया

Steam Engine Impact on industrial Revolution

अठारवी सदी में उद्योगों में हाथों से सारा कार्य किया जाता था, कही कही जल की शक्ति और पवन चक्कियों का भी इस्तेमाल होता था, जेम्स वाट के नए भाँप के इंजन के अविष्कार ने सब कुछ बदल कर रख दिया और एक उद्योगिक क्रांति की शुरुआत की. उद्योगिक क्रांति की शुरुवात 1820 – 1840 के बीच इंगलैंड में हुयी, हाथों के बजाय मशीनों और भाँप के इंजन से चालित मशीनों के द्वारा होने लगा, नए नए टूल्स का उपयोग होने लगा और एक फेक्टरी सिस्टम की कार्यनीति का उदय हुआ,

सबसे पहले टेक्सटाइल इंडस्ट्री कपड़ा उद्योग ने इस क्रांति को अपनाया, कपडा उद्योग ने ही मशीनों और उत्पादन की नई विधियों और भांप के शक्ति से चलने वाले इंजन का उपयोग किया.

उद्योगिक क्रांति ने मनुष्य के समाज को पूरी तरह से बदल कर रख दिया, उद्योगिक क्रांति का मुख्य कारण भाँप की शक्ति से चलने वाला इंजन ही था.

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