यतीमों पर जुल्म ना करने का हुक्म

यतीमों पर जुल्म, यतीमों का माल खाने से मुमानअत

(हुज्जतुल इस्लाम इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ. की किताब मुकाशफतुल क़ुलूब से हिंदी अनुवाद)

फ़रमाने इलाही है :

बेशक जो लोग नाहक यतीमों का माल खाते हैं सिवाए इस के नहीं कि वोह अपने पेटों में आग खाते हैं और अलबत्ता वोह जहन्नम में जाएंगे।

हज़रते कतादा रज़ीअल्लाहो अन्हो का कौल है कि येह आयत बनी गतफ़ान के एक शख्स के हक़ में नाज़िल हुई, वोह अपने छोटे यतीम भतीजे का सरपरस्त बना और उस का तमाम माल खा गया।

नाहक और जुल्म से येह मुराद है कि वोह ऐसा करते हुवे हकीकत में यतीमों पर जुल्म करते हैं। इस वईद में वोह लोग दाखिल नहीं हैं जो कुतुबे फ़िक़ह में मुन्दरजा शराइत के मुताबिक़ इन के माल में तसर्रुफ़ करते हैं और खाते हैं।

फ़रमाने इलाही है: और जो ग़नी हो उसे चाहिये कि वोह बच्चे (यतीमों के माल से कुछ न ले) और जो फ़कीर  हो उसे चाहिये कि इन्साफ़ के साथ खाए। यानी वोह अपनी लाज़िमी ज़रूरत के मुताबिक़ ले ले या बतौरे कर्ज या अपने काम की उजरत के बराबर खाए या वोह इज़तिराब की हालत में हो लिहाज़ा अगर बाद में वोह फ़राख दस्त हो जाए तो यतीम का खाया हुवा माल वापस करे वगरना येह उस के लिये हलाल है।

 

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और अल्लाह तआला ने यतीमों के हुकूक पर ताकीद फ़रमा कर और उन से ज़ियादा शफ्कत व उल्फ़त रखने का जिक्र फ़रमा कर लोगों को तवज्जोह दिलाई है और इस इब्तिदाई आयत से पहले वाली आयत में इरशाद फ़रमाया है कि और बेशक डरें वह लोग इस बात से कि अगर वह अपने पीछे ना तवां औलाद छोड़ जाएँ वोह उन पर खौफ़ खाएं और चाहिये कि अल्लाह से डरें और चाहिये कि मोहकम बात कहें। इस आयते करीमा में उन लोगों के अक्वाल के बर अक्स जो इसे एक तिहाई से ज़ियादा वसिय्यत करने और इस जैसी और बातों पर महमूल करते हैं, आयिन्दा आने वाली आयत से रब्त देते हुवे येह मुराद है कि जिस शख्स की सर परस्ती में यतीम हो वोह इस से बेहतर सुलूक करे, यहां तक कि उसे ऐसे बुलाए जैसे वोह अपनी औलाद को बुलाता है, या’नी उसे “ऐ बेटे” कह कर बुलाए और उस से ऐसी भलाई, एहसान और नेक सुलूक करे और उस के माल को इस तरीके से खर्च करे जैसा कि वोह अपने मरने के बाद अपनी औलाद और अपने माल से सुलूक की आरजू रखता है क्यूंकि क़ियामत के दिन का मालिक रब्बे जुल जलाल आ’माल के मुताबिक जज़ा देता है या’नी जैसा करोगे वैसा भरोगे जैसे तुम दूसरों के साथ सुलूक करोगे वोही सुलूक तुम्हारे साथ किया जाएगा।

बसा अवक़ात इन्सान बे खौफ़ हो कर दूसरे के माल और औलाद  में तसर्रुफ़ करता है कि उसे अचानक मौत आ लेती है और अल्लाह तआला उसे उस के माल, औलाद  खानदान और तमाम तअल्लुकात की वैसी ही जज़ा देता है जैसा सुलूक उस ने दूसरे के साथ किया होता है, अगर अच्छा सुलूक किया होता है तो अच्छी जज़ा, और अगर बुरा सुलूक किया होता है तो बुरी जज़ा मिलती है।

लिहाज़ा हर अक्लमन्द को चाहिये कि अगर उस के दिल में दीन का खौफ़ न हो, तब भी उसे अपनी औलाद और माल की ख़ातिर खौफ़ करना चाहिये और यतीमों के माल को जो उस की सरपरस्ती में हैं, ऐसे खर्च करे जैसे वोह अपनी औलाद  के माल में उन के यतीम होने की उन के सरपरस्त से खर्च करने की उम्मीद रखता है।

अल्लाह तआला ने हज़रते दावूद अलैहहिस्सलाम  की तरफ़ वहय की, कि ऐ दावूद ! यतीम के लिये मेहरबान बाप की तरह और मुफ्लिस बेवा के लिये मेहरबान शोहर की तरह हो जा और जान ले कि जैसा बोएगा वैसा ही काटेगा या’नी तू जैसा करेगा वैसा ही तुझ से किया जाएगा क्यूंकि आख़िर एक दिन मरना है, तेरी औलाद को यतीम और बीवी को बेवा होना है।

यतीमों के माल खाने और उन पर जुल्म करने के मुतअल्लिक बहुत सी अहादीस में शदीद वईदें आई हैं जैसा कि मजकूरए बाला आयत में लोगों को इस तबाह कुन, बेहूदा और ज़लील हरकत से बाज़ रखने के लिये सख्त तम्बीह की गई है।

मुस्लिम वगैरा में मरवी है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : ऐ अबू ज़र ! मैं तुझे कमज़ोर समझता हूं और मैं तेरे लिये वोही कुछ पसन्द करता हूं जो अपने लिये पसन्द करता हूं, कभी दो पर हुक्मरान न बन और माले यतीम को अच्छा न समझ ।

बुखारी व मुस्लिम वगैरा में है : हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया है कि सात मोहलिक बातों से बचो, सहाबए किराम ने अर्ज की : या रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम वोह कौन सी हैं ? आप ने फ़रमाया : अल्लाह के साथ शरीक बनाना, जादू, नाहक किसी को क़त्ल करना, सूद खाना और यतीम का माल खाना वगैरा ।

हाकिम ने सनदे सहीह के साथ रिवायत की है, हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया : चार शख्स ऐसे हैं कि येह अल्लाह का अद्ल होगा कि उन्हें जन्नत में न दाखिल करे और न ही उन्हें जन्नत की ने’मतों से लुत्फ़ अन्दोज़ होने दे, शराबी, सूद खोर, नाहक यतीमों का माल खाने वाला और वालिदैन का ना फ़रमान ।

सहीह इब्ने हब्बान में रिवायत है कि इन बातों में जो आप सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने हज़रते अम्र बिन हज़्म रज़ीअल्लाहो अन्हो के तवस्सुत से यमन वालों को जो अहकाम भेजे थे, उन में येह भी था कि

कियामत के दिन अल्लाह तआला की बारगाह में सब से बड़ा गुनाह अल्लाह का शरीक ठहराना, नाहक़ किसी मोमिन को क़त्ल करना, जंग के दिन मैदान से जिहाद फ़ी सबीलिल्लाह से फ़रार, वालिदैन की ना फ़रमानी, पाकबाज़ औरतों पर इत्तिहाम लगाना, जादू सीखना, सूद खाना और यतीम का माल खाना है।

 यतीमों का माल नाहक खाना और इसका बदला

अबू याओला रहमतुल्लाह अलैह की रिवायत है कि क़ियामत के दिन कब्रों से एक ऐसी कौम उठाई जाएगी जिन के मुंह से आग भड़क रही होगी, अर्ज की गई : या रसूलल्लाह ! वोह कौन हैं ? आप ने फ़रमाया : क्या तुम ने फ़रमाने इलाही नहीं देखा : बेशक जो लोग जुल्म के तौर पर यतीमों का माल खाते हैं सिवाए इस के नहीं कि वोह अपने  पेट में आग खाते हैं। मुस्लिम की रिवायत से मे’राज शरीफ़ की हदीस में है :

पस में अचानक ऐसे आदमियों के पास आया जिन पर कुछ लोग मुकर्रर थे जो उन की दाढ़ियां नोच रहे थे और कुछ लोग जहन्नम के पथ्थर ला कर उन के मुंह में डाल रहे थे जो उन के पीछे से निकल रहे थे, मैं ने कहा : ऐ जिब्रील ! येह कौन हैं ? जिब्रील ने कहा : जो लोग नाहक यतीमों का माल खाते हैं वोह अपने पेट में आग खा रहे हैं, पस इस के सिवा और कुछ नहीं  (येह वोही लोग हैं)

शबे में राज नबिय्ये अकरम रज़ीअल्लाहो अन्हो का माले नाहक खाने वालों पर गुजर

कुरतुबी की तफ़्सीर में हज़रते अबू सईद खुदरी रज़ीअल्लाहो अन्हो से मरवी है, इन्हों ने नबिय्ये अकरम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम से रिवायत की है, आप ने फ़रमाया :

मे’राज की रात मैं ने ऐसी कौम को देखा जिन के होंट ऊंट के होंटों जैसे थे और उन पर कुछ लोग मुकर्रर हैं जो उन के होंट पकड़ कर उन के मुंह में जहन्नम के पथ्थर डाल रहे हैं जो उन के नीचे से निकल रहे हैं, तब मैं ने पूछा : जिब्रील ! येह कौन हैं ? जिब्रील बोले : येह वोह हैं जो नाहक यतीमों का माल खाया करते थे।)

-इमाम मोहम्मद गज़ाली र.अ., किताब मुकाशफतुल क़ुलूब

 

 

 

 

 

 

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