Izhaar Hindi Shayari इज़हार हिंदी शायरी

Izhaar Hindi Shayari इज़हार हिंदी शायरी

Izhaar Hindi Shayari इज़हार हिंदी शायरी
Izhaar Hindi Shayari

Izhaar Hindi Shayari  इज़हार हिंदी शायरी

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एक वक़्त था की इज़हार -ऐ-मोहब्बत के हमें शब्द नहीं मिलते थे मेहरबानी तेरी बेवफ़ाई की हमको शायर बना दिया..

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अच्छा करते हैं वो लोग जो मोहब्बत का इज़हार  नहीं करते, ख़ामोशी से मर जाते हैं मगर किसी को बदनाम नहीं करते…

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इज़हार  कर देना वरना,एक ख़ामोशी उम्रभर का इंतजार बन जाती है

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भीगते बारिश के इस मौसम में कुछ ऐसे उनका दीदार हुआ, एक पल में उनसे महोब्बत हुई ज़िन्दगी भर उसका इज़हार हुआ

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कर दिया “हमनें” भीं “इज़हार-ए-मोहब्बत” फोन पर______लाख” रूपये की बात थी, “एक” रूपये में हो गयी।

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बडी शिद्धत के साथ प्यार का इज़हार करने चले थे | पर उसने मुझ से पहले एैसा करके , ज़ुबां पर ताला लगा दिया

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मुहब्बत का कभी इज़हार करना ही नहीं आया, मेरी कश्ती को दरिया पार करना ही नहीं आया.

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एक इज़हार-ए-मोहब्बत ही बस, होता नहीं हमसे, हमसा माहिर जहाँ में वरना और कौन है…

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ज़ख़्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें; हम खुद निशाना बन गए वार क्या करें; मर गए हम मगर खुली रही ये आँखें; अब इससे ज्यादा उनका इंतज़ार क्या करें।

*** Izhaar Hindi Shayari

मेरी शायरी मेरे तजुरबो का इज़हार है, और कुछ भी नहीं…!! . . सोचता हूँ की कोई तो संभल जाएगा, मुझे पढने के बाद…!!

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तेरी आँखो का इज़हार मै पढ़ सकता हूँ पगली किसी को अलविदा युँ मुस्कुराकर नहीं कहते;

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इज़हार-ए-इश्क करें तो कॆसे॥ वो नज़रें मिलाता नहीं पर लफ्ज़ मेरा साथ देते नहीं। अब तुम ही बताओ हम उनसे इज़हार-ए-इश्क करें तो कॆसे॥

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जिस्म से होने वाली मुहब्बत का इज़हार आसान होता है, रुह से हुई मुहब्बत को समझाने में ज़िन्दगी गुज़र जाती है।

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इज़हार-ए-इश्क करो उस से, जो हक़दार हो इसका, बड़ी नायाब शय है ये इसे ज़ाया नहीं करते…!

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हमने हमारे इश्क़ का, इज़हार यूँ किया… फूलों से तेरा नाम, पत्थरों पे लिख दिया…!!!

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देख मज़ाक ना उड़ा गरीब का इज़हार-ए-मोहब्बत के नाम पर सच बोल…! झूठ कहा था न के “तुमसे प्यार करती हूँ”

*** Izhaar Hindi Shayari

कब उनकी पलकों से इज़हार होगा ? दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा; गुज़र रही है हर रात उनकी याद में, कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा !

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मैं लफ़्ज़ों से कुछ भी इज़हार नही करता, इसका मतलब ये नई के मैं तुझे प्यार नही करता, चाहता हूँ मैं तुझे आज भी पर तेरी सोच मे अपना वक़्त बेकार नही करता,…

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दिल की आवाज़ को इज़हार कहते है, झुकी निगाह को इकरार कहते है, सिर्फ पाने का नाम इश्क नहीं, कुछ खोने को भी प्यार कहते है..

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हज़ारों दफा कर दिया है इज़हार ए इश्क इन आँखों नें.. तुम वाकई नहीं समझे या बस यूँ ही अनजान बने बैठे हो

*** Izhaar Hindi Shayari

मोहब्बत का मेरी इज़हार करे, कह दो तुम अपनी नजर से, ख़त लिखना था खुद मिलो, जब भी गुजरो तुम इधर से

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ये बात और है कि इज़हार ना कर सकेँ, नहीँ है तुम से मोहब्बत.. भला ये कौन कहता !!!!

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उन्हे इज़हार करना नही आया उन्हे हमे प्यार करना नही आया हम बस देखते ही रह गये और वक़्त को थमना नही आया वो चलते चलते इतने दूर चले गये हमे रोकना भी नही आया !!!

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इज़हार-ए-याद करुँ या पूछूँ हाल-ए-दिल उनका,ऐ दिल कुछ तो बहाना बता उनसे बात करने का

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वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते! खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते! मर गए पर खुली रखी आँखें! इससे ज्यादा किसी का इंतजार क्या करते!

*** Izhaar Hindi Shayari

इज़हार क्यों किया था,इकरार क्यों किया था, जब जाना बहुत दूर,फिर प्यार क्यों किया था, ना थी कोई रंजिश,और ना थी कोई शिकायत, जब हार गया दिल तुझपे,ये वार क्यों किया था..

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आज इज़हार-ए-इश्क होना है, आज इकरार-ए-इश्क होना है,. आज इश्क का दिन है,दोस्तों, आज गुलज़ार-ए-इश्क होना है,. आज वार दिया,सब इश्क में, आज निसार-ए-इश्क होना है,. आज जरूरत नही,मैखाने की, आज ख़ुमार-ए-इश्क होना है,

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तुझसे मैं इज़हार -ए-मोहब्बत इसलिए भी नहीं करता.. सुना है बरसने के बाद बादल की अहमियत नहीं रहती !!!!

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झुकी हुई नज़रों से इज़हार कर गया कोई, हमें खुद से बे-खबर कर गया कोई, युँ तो होंठों से कहा कुछ भी नहीं.. आँखों से लफ्ज़ बयां कर गया कोई..

*** Izhaar Hindi Shayari

मेरी फितरत में नहीं अपने ग़म का इज़हार करना,,,अगर उसके वजूद का हिस्सा हूँ मैं तो खुद महसूस करे वो तकलीफ मेरी…!!!

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इज़हार, एतबार और इनकार, फासले अल्फ़ाज़ों के हैं, जब भी चाहो गुफ़तगू कर लो, मामलें तो हम मिज़ाज़ों के हैं। कोई सोंचता नहीं इम्तिहान लेने के खातिर, टूटते कितने दिल हम ख्यालों के हैं।

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इज़हार-ए-मुहब्बत के बाद भी मुहब्बत आधी-अधूरी रह जाए….. इससे तो बेहतर होगा कि मुहब्बत इक तरफ़ा ही निभाई जाए.

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इश्क़ इज़हार तक नहीं पहुंचा
शाह दरबार तक नहीं पहुंचा

चारागर भी निजात पा लेते
जहर बीमार तक नहीं पहुंचा

मेरी किस्मत की मेरे दुश्मन भी
मेरे मयार तक नहीं पहुंचा

उससे बातें तो खूब की लेकिन
सिलसिला प्यार तक नहीं पहुंचा

*** Izhaar Hindi Shayari

टकरा ही गई मेरी नज़र उनकी नज़र से धोना ही पङा हाथ मुझे कल्ब-ओ-जिगर से इज़हार-ए-मोहब्बत न किया बस इसी डर से ऐसा न हो गिर जाऊँ कहीं उनकी नज़र से ऐ !…

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नज़रें मेरी थक न जायें कहीं तेरा इंतज़ार करते-करते;
यह जान मेरी यूँ ही निकल ना जाये तुम से इश्क़ का इज़हार करते-करते।

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बड़ी मुश्किल में हूँ कैसे इज़हार करूँ;
वो तो खुशबु है उसे कैसे गिरफ्तार करूँ;
उसकी मोहब्बत पर मेरा हक़ नहीं लेकिन;
दिल करता है आखिरी सांस तक उसका इंतज़ार करूँ।

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तमन्ना है मेरे दिल की सनम एक बार हो जाये। जाते जाते दुनिया से तेरा दीदार हो जाये। मुहब्बत मैं भी करती हूँ मुहब्बत तुम भी करते हो। ज़माने से है क्या डरना चलो इज़हार हो जाये

*** Izhaar Hindi Shayari

“मिला वो भी नही करते, मिला हम भी नही करते.” “दगा वो भी नही करते, दगा हम भी नही करते.” “उन्हे रुसवाई का दुख, हमे तन्हाई का डर” “गिला वो भी नही करते, शिकवा हम भी नही करते.” “किसी मोड़ पर मुलाकात हो जाती है अक्सर” “रुका वो भी नही करते, ठहरा हम भी नही करते.” “जब भी देखते हैं उन्हे, सोचते है कुछ कहें उनसे.” “सुना वो भी नही करते, कहा हम भी नही करते.” “लेकिन ये भी सच है, की मोहब्बत उन्हे भी हे हमसे” “इकरार वो भी नही करते, इज़हार हम भी नही करते.”

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ग़म का इज़हार भी करने नहीं देती दुनिया
और मरता हूँ तो मरने नहीं देती दुनिया

सब ही मय-ख़ाना-ए-हस्ती से पिया करत हैं
मुझ को इक जाम भी भरने नहीं देती दुनिया

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Hinglish

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zakhm itane gahare hain izahaar kya karen; ham khud nishaana ban gae vaar kya karen; mar gae ham magar khulee rahee ye aankhen; ab isase jyaada unaka intazaar kya karen.***

izhaar hindi shayarimeree shaayaree mere tajurabo ka izahaar hai, aur kuchh bhee nahin…!! . . sochata hoon kee koee to sambhal jaega, mujhe padhane ke baad…!!***

teree aankho ka izahaar mai padh sakata hoon pagalee kisee ko alavida yun muskuraakar nahin kahate;***

izahaar-e-ishk karen to kaise. vo nazaren milaata nahin par laphz mera saath dete nahin. ab tum hee batao ham unase izahaar-e-ishk karen to kaise.***

jism se hone vaalee muhabbat ka izahaar aasaan hota hai, ruh se huee muhabbat ko samajhaane mein zindagee guzar jaatee hai.**

*izahaar-e-ishk karo us se, jo haqadaar ho isaka, badee naayaab shay hai ye ise zaaya nahin karate…!**

*hamane hamaare ishq ka, izahaar yoon kiya… phoolon se tera naam, pattharon pe likh diya…!!!***

dekh mazaak na uda gareeb ka izahaar-e-mohabbat ke naam par sach bol…! jhooth kaha tha na ke “tumase pyaar karatee hoon”***

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ye baat aur hai ki izahaar na kar saken, naheen hai tum se mohabbat.. bhala ye kaun kahata !!!!***unhe izahaar karana nahee aaya unhe hame pyaar karana nahee aaya ham bas dekhate hee rah gaye aur vaqt ko thamana nahee aaya vo chalate chalate itane door chale gaye hame rokana bhee nahee aaya !!!**

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tujhase main izahaar -e-mohabbat isalie bhee nahin karata.. suna hai barasane ke baad baadal kee ahamiyat nahin rahatee !!!!***

jhukee huee nazaron se izahaar kar gaya koee, hamen khud se be-khabar kar gaya koee, yun to honthon se kaha kuchh bhee nahin.. aankhon se laphz bayaan kar gaya koee..*

** izhaar hindi shayarimeree phitarat mein nahin apane gam ka izahaar karana,,,agar usake vajood ka hissa hoon main to khud mahasoos kare vo takaleeph meree…!!!**

*izahaar, etabaar aur inakaar, phaasale alfaazon ke hain, jab bhee chaaho gufatagoo kar lo, maamalen to ham mizaazon ke hain. koee sonchata nahin imtihaan lene ke khaatir, tootate kitane dil ham khyaalon ke hain. ***

izahaar-e-muhabbat ke baad bhee muhabbat aadhee-adhooree rah jae….. isase to behatar hoga ki muhabbat ik tarafa hee nibhaee jae.**

*ishq izahaar tak nahin pahunchaashaah darabaar tak nahin pahunchaachaaraagar bhee nijaat pa letejahar beemaar tak nahin pahunchaameree kismat kee mere dushman bheemere mayaar tak nahin pahunchausase baaten to khoob kee lekinasilasila pyaar tak nahin pahuncha***

takara hee gaee meree nazar unakee nazar se dhona hee pana haath mujhe kalb-o-jigar se izahaar-e-mohabbat na kiya bas isee dar se aisa na ho gir jaoon kaheen unakee nazar se ai !…***

nazaren meree thak na jaayen kaheen tera intazaar karate-karate;yah jaan meree yoon hee nikal na jaaye tum se ishq ka izahaar karate-karate.**

*badee mushkil mein hoon kaise izahaar karoon;vo to khushabu hai use kaise giraphtaar karoon;usakee mohabbat par mera haq nahin lekin;dil karata hai aakhiree saans tak usaka intazaar karoon.**

*tamanna hai mere dil kee sanam ek baar ho jaaye. jaate jaate duniya se tera deedaar ho jaaye. muhabbat main bhee karatee hoon muhabbat tum bhee karate ho. zamaane se hai kya darana chalo izahaar ho jaaye*

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gam ka izahaar bhee karane nahin detee duniyaaur marata hoon to marane nahin detee duniyaasab hee may-khaana-e-hastee se piya karat haimmujh ko ik jaam bhee bharane nahin detee duniya***

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