Chand Shayari चाँद शायरी

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Chand Shayari

चाँद हिंदी शायरी

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शायर और कवी हमेशा से चाँद पर शेर और कविता कहते आयें हैं, इश्क और महबूब की शायारी में चाँद की खास भूमिका रही है, आपके लिए चाँद पर हिंदी शायरी का एक अच्छा संग्रह हम यहाँ प्रकाशित कर रहें है, आप इस चाँद हिंदी शायरी को अपने हिंदी वाहट्सएप्प स्टेटस के रूप में उपयोग कर सकतें है या आप इस बेहतरीन हिंदी शायरी को अपने दोस्तों को फेसबुक पर भी भेज सकतें हैं। चाँद लफ्ज़ पर हिंदी के यह शेर, आपकी भावनाओं को व्यक्त करने में आपकी मदद कर सकतें हैं।

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Chand Shayari

ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए

मुझे बस तेरी की एक झलक चाहिए

***

आज भीगी हें पलके तुम्हारी याद में

आकाश भी सिमट गया अपने आप में

औंस की बूँद ऐसे गिरी ज़मीन पर

मानो चाँद भी रोया हो तेरी की याद मे

***

है चाँद सितारों में चमक तेरे प्यार की

हर फूल से आती है महक तेरे प्यार की

*** Chand Shayari

एक अदा आपकी दिल चुराने की

एक अदा आपकी दिल में बस जाने की

चेहरा आपका चाँद और जिद हमारी चाँदको पाने की

***

तस्वीर बना कर तेरी आस्मां पे टांग आया हूँ ,

और लोग पूछते हैं आज चाँद इतना बेदाग़ कैसे है

***

ना जाने किस रैन बसेरो की तलाश है इस चाँद को…..।।

रात भर बिना कम्बल भटकता रहता है इन सर्द रातो में….।।

***

हमने क़सम खायी है चाँद को चाँद रहने देंगे ..

चाँद में अब तुम को ना ढूँढा करेंगे ..

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**** Chand Shayari

ख्वाबो की बातें वो जाने जिनका नींद से रिश्ता हो,

मैं तो रात गुजारती हुँ चाँद को देखने में…

***

चाँद तारो में नज़र आये चेहरा आपका

जब से मेरे दिल पे हुआ है पहरा आपका

***

ये दिन हैं जब.. चाँद को देखे.. मुद्दत बीती जाती है,

वो दिन थे जब चाँद हमारी छत पे आया करता था.

*** Chand Shayari

रात में एक टूटता तारा देखा बिलकुल मेरे जैसा था…

चाँद को कोई फर्क नहीं पड़ा बिलकुल तेरे जैसा था !

***

एक खोया खोया चाँद हे जो हे खफा खफा…

एक टुटा टुटा ख्वाब हे जो हे तुझसे हे जुड़ा…

एक आधी आधी आस हे जो अधूरी रह गयी…

***

पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती,

दिल में क्या है वो बात नही समझती,

तन्हा तो चाँद भी सितारो के बीच में है,

पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती

*** Chand Shayari

वैसे तो कई दोस्त है हमारे जैसे आसमान में है कई तारे

पर आप दोस्ती के आसमान के वो चाँद है जिसके सामने फीके पड़ते हैं सारे सितारे.

***

वो थका हुआ मेरी बाहों में ज़रा सो गया था तो क्या हुआ,

अभी मैं ने देखा है चाँद भी किसी शाख़-ए-गुल पे झुका हुआ !

***

तुम सुबह का चाँद बन जाओ, मैं सांझ का सूरज हो जाऊँ!

मिलें हम-तुम यूँ भी कभी, तुम मैं हो जाओ…मैं तुम हो जाऊँ…

*** Chand Shayari

नजर में आपकी नज़ारे रहेंगे; पलकों पर चाँद सितारे रहेंगे;

बदल जाये तो बदले ये ज़माना; हम तो हमेशा आपके दीवाने रहेंगे

***

चाँद तो अपनी चाँदनी को ही निहारता है

उसे कहाँ खबर कोई चकोर प्यासा रह जाता है

***

इतने घने बादल के पीछे,

कितना तन्हा होगा चाँद!

***

तू चाँद और मैं सितारा होता, आसमान में एक आशियाना हमारा होता,

लोग तुम्हे दूर से देखते,नज़दीक़ से देखने का, हक़ बस हमारा होता..!!

*** Chand Shayari

जब कभी बादलों में घिरता है

चाँद लगता है आदमी की तरह

***

रात भर तेरी तारीफ़ करता रहा चाँद से

चाँद इतना जला …….. कि सूरज हो गया

चाँद के साथ कई दर्द पुराने निकले

कितने ग़म थे जो तेरे ग़म के बहाने निकले

*** Chand Shayari

कहकशां, चाँद, सितारें तेरे चूमेंगे कदम

तेरे रस्ते की मैं एक धूल हूँ, उड़ जाऊँगा

*** Chand Shayari

बेसबब मुस्कुरा रहा है चाँद

कोई साजिश छुपा रहा है चाँद

***

चलो चाँद का किरदार अपना लें हम दोस्तों…..

दाग अपने पास रखें और रौशनी बाँट दें…

***

दिन में चैन नहीं ना होश है रात में

खो गया है चाँद भी देखो बादल के आगोश में

*** Chand Shayari

ये दिल न जाने क्या कर बैठा, मुझसे बिना पूछे ही फैसला कर बैठा,

इस ज़मीन पर टूटा सितारा भी नहीं गिरता, और ये पागल चाँद से मोहब्बत कर बैठा..!!

***

जिन आँखों में काजल बन कर तैरी काली रात

उन आँखों में आंसू का इक कतरा होगा चाँद।

***

नजर में आपकी नज़ारे रहेंगे; पलकों पर चाँद सितारे रहेंगे;

बदल जाये तो बदले ये ज़माना; हम तो हमेशा आपके दीवाने रहेंगे

चाँद होता न आसमानों पे अगर,

हम किसे आप सा हसीं कहते

*** Chand Shayari

रातों में टूटी छतों से टपकता है चाँद…

बारिशों सी हरकतें भी करता है चाँद

***

चाँद आहें भरेगा फूल दिल थाम लेंगे !

हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे !!

***

बज़्म ऐ ख़याल में तेरे हुस्न की शमा जल गई …

दर्द का चाँद बुझ गया, हिज्र की रात ढल गई

***

ओ, मेरी बाहोँ मे शर्माते लजाते ऐसे तुम आए,

कि जैसे बाद्लों मे चाँद धीरे धिरे आ जाए ।

***

तुम आ गये हो तो फिर चाँदनी सी बातें हों ,

ज़मीं पे चाँद कहाँ रोज़ रोज़ उतरता है .

*** Chand Shayari

चाँद मत मांग मेरे चाँद जमीं पर रहकर,

खुद को पहचान मेरी जान खुदी में रहकर.

***

हर रास्ता एक सफ़र चाहता है, हर मुसाफिर एक हमसफ़र चाहता है,

जैसे चाहती है चांदनी चाँद को, कोई है जो तुमको इस कदर चाहता है,

ज़ख़्म दिल के गहरे है, आज वो मिले मुझको दर्द जिसको रास है ,

ऐसा लगता है जैसे, चाँद फिर उदास है,

*** Chand Shayari

बुझ गये ग़म की हवा से, प्यार के जलते चराग,

बेवफ़ाई चाँद ने की, पड़ गया इसमें भी दाग

***

आंसुओं से धुली ख़ुशी की तरह // रिश्ते होते हैं शायरी की तरह ..

जब कभी बादलों में घिरता है // चाँद लगता है आदमी की तरह

***

चाँद भी झांकता हैं पर्दों से…. मेरी तन्हाई का चर्चा … अब आसमानों में हैं ..

***

आप कुछ यूँ मेरे आइना-ए-दिल में आए // जिस तरह चाँद उतर आया हो पैमाने में

***

चाँद खिड़की से झाकेगा आदतन, चांदनी फिरसे दिल जलाएगी.

रात तनहा सहर तक जाएगी.

*** Chand Shayari

सारी रात गुजारी हमने इसी इन्तजार में की

अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में

***

ना चाँद निकला ,ना तुमने दस्तक दी

कितनी बोझिल है आज की ये शाम

***

 

तनख्वाह वाले रोज की रौनक/ ताम्बई सिक्के जैसा चाँद

दिन-भर के भूखे-प्यासे को / रोटी जैसा दिखता चाँद

*** Chand Shayari

हासिले ज़िन्दगी है एक वो रात, चाँद बाँहों में जब पिघल जाए,

उनकी महफ़िल से हम उठे तो ज़रूर, उठ के महफ़िल से आ नहीं पाए| ~कैफ़ी आज़मी

*** Chand Shayari

सितारों जैसी ये आँखें ये चाँद सा चेहरा //

तुम्हारा सिलसिला कुछ आसमाँ से मिलता है….

***

जो जागते है रातभर, तुम उनका सवेरा क्या जानो..

तुम चाँद हो पूनम का, क्या होता है अँधेरा क्या जानो….!!

***

हमारे हाथों में इक शक्ल चाँद जैसी थी /

तुम्हे ये कैसे बतायें वो रात कैसी थी

*** Chand Shayari

वो दूर दूर सही हमेँ है उसकी जुस्तज़ू,

चाँद का अपना ग़ुरूर और हमारी अपनी ज़िद..

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hai chand sitaron mein chamak tere pyar ke har fool se ate hai mahak tere pyar ke ***

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na jane kis rain basero ke talash hai is chand ko……. rat bhar bina kambal bhatakata rahata hai in sard rato mein…… ***

hamane qasam khaye hai chand ko chand rahane denge .. chand mein ab tum ko na dhoondha karenge .. ****

chand shayari khvabo ke baten vo jane jinaka nend se rishta ho, main to rat gujarate hun chand ko dekhane mein… ***

chand taro mein nazar aye chehara apaka jab se mere dil pe hua hai pahara apaka ***

ye din hain jab.. chand ko dekhe.. muddat bete jate hai, vo din the jab chand hamare chhat pe aya karata tha. ***

chand shayari rat mein ek tootata tara dekha bilakul mere jaisa tha… chand ko koe fark nahin pada bilakul tere jaisa tha ! ***

ek khoya khoya chand he jo he khafa khafa… ek tuta tuta khvab he jo he tujhase he juda… ek adhe adhe as he jo adhoore rah gaye… ***

patthar ke duniya jazbat nahe samajhate, dil mein kya hai vo bat nahe samajhate, tanha to chand bhe sitaro ke bech mein hai, par chand ka dard vo rat nahe samajhate ***

chand shayari vaise to kae dost hai hamare jaise asaman mein hai kae tare par ap doste ke asaman ke vo chand hai jisake samane feke padate hain sare sitare. ***

vo thaka hua mere bahon mein zara so gaya tha to kya hua, abhe main ne dekha hai chand bhe kise shakh-e-gul pe jhuka hua ! ***

tum subah ka chand ban jao, main sanjh ka sooraj ho jaoon! milen ham-tum yoon bhe kabhe, tum main ho jao…main tum ho jaoon… ***

chand shayari najar mein apake nazare rahenge; palakon par chand sitare rahenge; badal jaye to badale ye zamana; ham to hamesha apake devane rahenge ***

chand to apane chandane ko he niharata hai use kahan khabar koe chakor pyasa rah jata hai ***

itane ghane badal ke pechhe, kitana tanha hoga chand! ***

too chand aur main sitara hota, asaman mein ek ashiyana hamara hota, log tumhe door se dekhate,nazadeq se dekhane ka, haq bas hamara hota..!! ***

chand shayari jab kabhe badalon mein ghirata hai chand lagata hai adame ke tarah ***

rat bhar tere taref karata raha chand se chand itana jala …….. ki sooraj ho gaya chand ke sath kae dard purane nikale kitane gam the jo tere gam ke bahane nikale ***

chand shayari kahakashan, chand, sitaren tere choomenge kadam tere raste ke main ek dhool hoon, ud jaoonga ***

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chalo chand ka kiradar apana len ham doston….. dag apane pas rakhen aur raushane bant den… ***

din mein chain nahin na hosh hai rat mein kho gaya hai chand bhe dekho badal ke agosh mein ***

chand shayari ye dil na jane kya kar baitha, mujhase bina poochhe he faisala kar baitha, is zamen par toota sitara bhe nahin girata, aur ye pagal chand se mohabbat kar baitha..!! ***

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najar mein apake nazare rahenge; palakon par chand sitare rahenge; badal jaye to badale ye zamana; ham to hamesha apake devane rahenge chand hota na asamanon pe agar, ham kise ap sa hasen kahate ***

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chand ahen bharega fool dil tham lenge ! husn ke bat chale to sab tera nam lenge !! ***

bazm ai khayal mein tere husn ke shama jal gae … dard ka chand bujh gaya, hijr ke rat dhal gae ***

o, mere bahon me sharmate lajate aise tum ae, ki jaise badlon me chand dhere dhire a jae . ***

tum a gaye ho to fir chandane se baten hon , zamen pe chand kahan roz roz utarata hai . ***

chand shayari chand mat mang mere chand jamen par rahakar, khud ko pahachan mere jan khude mein rahakar. ***

har rasta ek safar chahata hai, har musafir ek hamasafar chahata hai, jaise chahate hai chandane chand ko, koe hai jo tumako is kadar chahata hai, zakhm dil ke gahare hai, aj vo mile mujhako dard jisako ras hai , aisa lagata hai jaise, chand fir udas hai, ***

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ap kuchh yoon mere aina-e-dil mein ae // jis tarah chand utar aya ho paimane mein ***

chand khidake se jhakega adatan, chandane firase dil jalaege. rat tanaha sahar tak jaege. ***

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na chand nikala ,na tumane dastak de kitane bojhil hai aj ke ye sham *** tanakhvah vale roj ke raunak/ tambe sikke jaisa chand din-bhar ke bhookhe-pyase ko / rote jaisa dikhata chand ***

chand shayari hasile zindage hai ek vo rat, chand banhon mein jab pighal jae, unake mahafil se ham uthe to zaroor, uth ke mahafil se a nahin pae| ~kaife azame *** chand shayari sitaron jaise ye ankhen ye chand sa chehara // tumhara silasila kuchh asaman se milata hai…. ***

jo jagate hai ratabhar, tum unaka savera kya jano.. tum chand ho poonam ka, kya hota hai andhera kya jano….!! ***

hamare hathon mein ik shakl chand jaise the / tumhe ye kaise batayen vo rat kaise the ***

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