Hindi Story of Nirma निरमा की सफलता की प्रेरक कहानी

Hindi Story of Nirma
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निरमा की सफलता की प्रेरक कहानी

अगर आप अस्सी या नब्बे के दशक में पैदा हुए हैं, तो आपने निरमा वाशिंग पाउडर का पहला सादा सा विज्ञापन दूरदर्शन पर ज़रूर देखा होगा, जिसमे एक छोटी लड़की सफ़ेद फ्रोक पहने दिखाई देती थी। यह सब सर्फ एक्सेल, हेंको, एरियल आदि दुसरे अंतरराष्ट्रिय ब्रांड आने के पहले की बात है ।

इस छोटे से विज्ञापन के पीछे एक व्यक्ति की सालों की कड़ी मेहनत थी। जिसका नाम करसन भाई पटेल था।

करसन भाई पटेल उत्तरी गुजरात के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखतें हैं। करसन भाई ने रसायन विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली! उनके सभी साथियों की नज़र में, किसी सरकारी विभाग में, लेब टेक्निशियन की नोकरी हांसिल कर लेना बहुत बढ़िया आइडिया था। कर सन भाई ने भी यही किया लेकिन उन्होंने अपनी महत्वकांक्षा को कभी छोटा या कम नहीं होने दिया।

पहले उन्होंने कॉटन मिल्स और फिर मायनिग डिपार्टमेंट में लेब टेक्नीशियन की नोकरी कर ली।

लेकिन करसन भाई ने बड़ा सपना देखा, जिसकी शुरुवात उन्होंने अपने घर के बरामदे में डिटर्जेंट पाउडर बनाने और पैक कर की । यह व्यवसाय वे अपनी सर्विस के बाद करते थे।

उन्होंने यह काम अकेले ही किया, वे खुद वाशिंग पाउडर बनाने,पेक करने और उसे सायकिल पर बेचने जाते थे!। अपने नए डिटर्जेंट पाउडर को वो बहुत कम दाम, तीन रूपये प्रति किलो में बेचते थे! जो की दुसरे डिटर्जेंट के तुलना में सिर्फ एक तिहाई था!।

Hindi Story of Nirma Karsanbhai
Karsanbhai Hindi Story of Nirma

इतना सस्ता डिटर्जेंट पाउडर एक इंस्टेंट सक्सेस बन गया। करसन भाई ने अपने ब्रांड का नाम “निरमा (NIRMA ) अपनी बेटी निरुपमा के नाम पर रखा!।

तीन साल तक सफलता पूर्वक डिटर्जेंट बेचने के बाद करसन भाई में सरकारी नोकरी छोड़ने का आत्मविश्वास आ गया। नोकरी छोड़ने के बाद करसन भाई ने अहमदाबाद में एक छोटी वर्कशॉप खोल ली! । निरमा ब्रांड, सारे गुजरात और महाराष्ट्र में बहुत जल्दी स्थापित हो गया, इसका कारण कम कीमत और उच्च क्वालिटी था ।

Hindi Story of Nirma
Hindi Story of Nirma – Nirma Products

सन 1995 में करसन भाई ने निरमा इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलोजी की स्थापना की, जो की आगे चलकर गुजरात का लीडिंग इंजीनियरिंग कॉलेज बन गया।

आज निरमा ग्रुप की सालाना आय १ बिलियन डॉलर है, और इसमें पंद्रह हज़ार लोग काम करतें हैं। सन 2010 में करसन भाई को पद्मश्री से नवाज़ा गया ।

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Hindi Motivational story of Napoleon अटूट भरोसा

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Hindi Motivational story of Napoleon अटूट भरोसा

Hindi Motivational story of Napoleon

अटूट भरोसा

एक बार, किसी मित्र देश के राजा, नेपोलियन से मिलने राजकीय यात्रा पर आये! उन्हें शाही सम्मान के साथ महल में ठहराया गया। भोजन के वक़्त उस राजा ने नेपोलियन से पुछा “आपके पास सेनाएं और संसाधन तो दुसरे राजाओं की तरह ही है, फिर क्या बात है की आप हर युद्ध में अपराजित रहतें हैं?”

यह सवाल सुनकर नेपोलियन ने मुस्कुरा कर कहा “सही वक़्त आने पर हम आपके सवाल का जवाब देंगे? ।

अगले दिन जब वह राजा सुबह समुन्द्र के किनारे टहल रहा था, तो उसने देखा की कुछ सेनिक अपनी टोपी में पानी भरकर उसे निचे गिराते हुए, उसे रस्सी की तरह बटने का प्रयास कर रहें हैं!!!

राजा ने तुरंत सेनिक से पूछ लिया “यह तुम लोग क्या कर रहे हो?”।

सेनिकों ने उत्तर दिया “जैसा की हमारे सिपहसालार ने हुक्म दिया है, हम वही कर रहें हैं!”

राजा ने यही सवाल सिपहसालार से और फिर सेनापति से पुछा की सेनिक यह मूर्खतापूर्ण कार्य क्यों कर रहें है? सब ने उसे यही जवाब दिया, आखिर में उसे पता चला की यह आदेश खुद सम्राट नेपोलियन ने दिया था!

रात के भोजन के वक़्त, जब उसने नेपोलियन से दिन की इस अजीब घटना के बारे में पुछा, तो नेपोलियन ने कहा “सेनिकों को यह मुर्खतापूर्ण कार्य करने का आदेश मेने इसलिए दिया था, ताकि आपको आपके कल के प्रश्न का उत्तर मिल जाये!!”

“मेरे सेनापति, सिपहसालार और सभी सेनिकों को मुझ पर अटूट भरोसा है, वह जानतें हैं की मे उन्हें जो भी आदेश दूंगा वह बिलकुल उचित होगा! वह मेरे आदेशों का पालन करतें हैं कोई बहस, प्रतिप्रश्न नहीं करते और ना ही वह अपने मन में कोई शंका रखते हैं! यही मेरी सबसे बड़ी ताक़त और जीत का कारण है।”

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Hindi Motivational story of Napoleon अटूट भरोसा

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Hindi Motivational story of Napoleon टीम स्पीरिट से कार्य करें!

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Hindi Motivational story of Napoleon टीम स्पीरिट से कार्य करें!

Hindi Motivational Story of Napoleon

टीम स्पीरिट से कार्य करें!

फ़्रांस का सम्राट नेपोलियन अकसर अपने राज्य में घूमता रहता था, ताकि उसे राज्य और प्रजा की वास्तविक स्तिथि की सही सही जानकारी रहे। एक दिन जब वह सादे कपड़ों में घूम रहा था, तो उसने देखा की कुछ मजदूर भारी भारी खम्बों को उठाने का प्रयास कर रहें है, लेकिन तरकीब से काम नहीं लेने के कारण, वे उन्हें बड़ी मुश्किल से उठा पा रहें हैं।

 उसने देखा कि, पास ही खड़ा उनका इंजीनियर, उन्हें बस निर्देश दे रहा है, लेकिन उन्हें भारी खम्बों को उठाने की कोई तरकीब नहीं सिखा रहा है!। यह देखकर नेपोलियन ने उससे पुछा “आप इन मजदूरों की कोई मदद क्यों नहीं करते?”

उस इंजीनियर ने कहा “तुम्हे मालूम है में कौन हूँ?”

नेपोलियन ने जवाब दिया “नहीं में तो यहाँ अजनबी हूँ! में आपको नहीं जानता”

उस इंजीनियर ने क्रोध भरे स्वर में कहा “में यहाँ का हेड इंजिनीयर हूँ” ।

 यह जवाब सुनकर नेपोलियन बिना कुछ कहे मजदूरों के पास जाकर उनकी मदद करने लगा,

 कुछ देर बाद जब नेपोलियन जाने लगा तो उस इंजीनियर ने उससे पुछा “आप कौन हैं”?

 नेपोलियन ने कहा “इंजीनियर साहब, में नेपोलियन हूँ” यह जवाब सुनकर वह शर्मिंदा हो गया और नेपोलियन से अपने अहंकारी व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी।

Hindi Motivational story of Napoleon टीम स्पीरिट से कार्य करें!
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The Moral of This Hindi Motivational Story is

हमें टीम भावना के साथ काम करते हुए, अपने पड़ से छोटे कर्मचारियों और मजदूरों की मदद करना चाहिए, उन्हें काम करने की नयी और उन्नत तकनीके सिखाना चाहिए तभी कंपनी की तेज़ तरक्की संभव हो पायेगी!

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Hindi Motivational story of Napoleon एक अच्छे लीडर के गुण

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Hindi Motivational story of Napoleon एक अच्छे लीडर के गुण

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एक अच्छे लीडर के गुण!

भयानक युद्ध चल रहा था, नेपोलियन की सेनाएं सीमा पर लड़ रही थी! उन दिनों सन्देश पहुचने का सबसे तेज़ और एकमात्र जरिया घुड़सवार ही थे!। नेपोलियन अपने केम्प में अपने मंत्रियों से चर्चा कर रहा था, तभी एक सन्देश वाहक बड़ी तेज़ी से घोडा दौड़ाता हुआ आया, जैसे ही वह कैंप पर पहुंचा उसका घोडा थकान, भूक, और प्यास से मर गया क्यों की वह रास्ते में कहीं भी आराम के लिए नहीं रुका था।

नेपोलियन ने उसका लाया हुआ सन्देश पढ़ कर तुरंत उसका जवाब लिखकर दे दिया, क्यों की सन्देश को सेना तक जल्दी से जल्दी पहुचाना बहुत ज़रूरी था, इसलिए नेपोलियन ने घुड़सवार को तुरंत रवाना होने को कहा।

जब उस सन्देश वाहक सेनिक ने बताया की उसका घोडा मर गया है तो नेपोलियन ने तुरंत कहा की कोई बात नहीं तुम मेरा ख़ास घोडा ले जाओ।

यह सुनकर सेनिक हेरान हो गया, क्यों की वह घोडा बहुत ख़ास था, उसके कई किस्से प्रचलित थे, सेनिक ने सकुचाते हुए कहा “सम्राट! में छोटा सेनिक आपके घोड़े पर कैसे बैठ सकता हूँ?”

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यह सुनकर नेपोलियन ने कहा “एक छोटा आदमी भी दुनिया में ऊँची से ऊँची चीज़ प्राप्त कर सकता है! में भी कभी तुम्हारी ही तरह एक सामान्य सेनिक ही था!”

यह सुनने के बाद भी सेनिक का डर ख़त्म नहीं हुआ “सम्राट! मेरी हिम्मत नहीं हो पा रही है की में एक सम्राट के घोड़े पर बैठू! मुझे तो कोई सामान्य घोडा दे दीजिये!”

समझाते हुए नेपोलियन ने कहा “ देखो! सामान्य घोडा धीरे भागेगा और तुम देर से युद्ध स्थल पहुंचोगे, हो सकता है इसकी वजह से हम हार जाएँ, फिर न यह घोडा ख़ास रहेगा और न मेरी सम्राट की पदवी!, जीवन में हर किसी का एक विशेष महत्त्व होता है, एक ख़ास भूमिका निभाने के लिए हमें बनाया गया है जिसे हमें पूरा करना है! तुम इसी घोड़े को लेकर तुरंत रवाना हो जाओ ।

Hindi Motivational story of Napoleon एक अच्छे लीडर के गुण
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The Moral of this Hindi Motivational story of Napoleon is

एक अच्छा लीडर वह होता है जो अपने पीछे चलने वालो के आत्मविश्वाश को बढाए!

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Hindi Motivational story of Napoleon आपकी ज़िन्दगी का एल्प्स क्या है

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Hindi Motivational story of Napoleon आपकी ज़िन्दगी का एल्प्स क्या है

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आपकी ज़िन्दगी का एल्प्स क्या है?

महान नेपोलियन जब सन १७९९ में फ्रांस के तख़्त पर बेठा तो, उसने इटली में फ्रांस की सेनाओ को मज़बूत करने, और आस्ट्रिया की सेनाओ द्वारा कब्ज़ा किये इलाके, वापस जीतने का दृढ संकल्प किया। लेकिन उसके रास्ते में यूरोप का सबसे ऊँचा और ठंडा पर्वत एल्प्स खड़ा था, एल्प्स यूरोप की सबसे ऊँची और चोडी पर्वत श्रंखला है जो १२०० किलोमीटर चोडी है ।

अगर नेपोलियन १२०० किलोमीटर घूम कर जाता तो, तब तक दुश्मन की सेनाओ को उसके आने के भनक लग जाती, इसलिए उसने एल्प्स को पार कर अचानक हमला करने की योजना बनाई! हालाँकि यह काम पहले किसी ने नहीं किया था, फिर भी नेपोलियन इतना साहसी था की चालीस हज़ार सेनिकों को लेकर वह एल्प्स को पार करने निकल पड़ा!

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नेपोलियन की ऐल्प्स को पार करने की प्रेरक कहानी

एल्प्स को किस जगह से पार करना है यह कोई नहीं जानता था, नेपोलियन की सेनाओ ने पर्वत की तलहटी में अपने केम्प लगा दिए, नेपोलियन खुद पर्वत को पार करने के रस्ते की तलाश में निकल गया। पर्वत की तलहटी में बसे एक छोटे गाँव में उसने एक बूढी औरत से पर्वत को पार करने के रास्ते के बारे में पुछा।

उसका सवाल सुनकर वह औरत चोंक गयी और कहा “आज तक कोई इस ऊँचे और भयानक ठन्डे पहाड़ को पार नहीं कर पाया है, यह तो आत्महत्या है! तुम अपनी सेनाओ के साथ लोट जाओ यही बेहतर रहेगा!” ।

नेपोलियन ने यह सुनकर कहा “शुक्रिया, आपने मुझे इस पर्वत के बारे में जानकारी दी है, इसे सुनने के बाद हम लोग और अधिक सुरक्षा और सावधानी बरतेंगे”।

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नेपोलियन ने एसा ही किया, अपने दृढ निश्चय और साहस से उसने अपनी चालीस हज़ार की सेना के साथ एल्प्स को पार कर लिया! एल्प्स को पार करने पर उसने पाया की दुश्मन की सेनाएं शहर को लूट कर वहां से जा चुकी हैं, लेकिन नेपोलियन ने हार नहीं मानी, उसने दुश्मन की सेनाओ का पीछा किया और उन्हें पराजित कर दिया!

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Moral of this Hindi Motivational Story of Napoleon

क्या आपने भी किसी चीज़ को पाने का निश्चय किया है, जैसा की नेपोलियन ने, आस्ट्रिया की सेनाओ द्वारा कब्ज़ा किये इलाके, वापस जीतने का दृढ संकल्प किया था!

आपकी ज़िन्दगी का एल्प्स क्या है? आज ही दृढ निशचय कीजिये और साहस के साथ उस कठिन समस्या रूपी एल्प्स को पार कीजिये!

 

Hindi Story – लगातार आगे बढ़ते रहो!

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Hindi Story – लगातार आगे बढ़ते रहो!

Hindi Story – Keep moving in Storm in Hindi

हिंदी कहानी – लगातार आगे बढ़ते रहो!

एक बार एक लड़की, अपने पिता के साथ कार में कहीं जा रही थी, ड्राइविंग लड़की ही कर रही थी और उसके पिता उसकी बगल की सीट पर बैठे थे।

तभी रास्ते में एक जगह मोसम ख़राब हो गया, और तूफानी हवाएँ चलने लगीं! तब उस लड़की ने अपने पिता से पुछा “पापा, अब हमें क्या करना चाहिए?

“चलते रहो!” पिता ने कहा

तूफान बढता ही गया, कुछ कार चालक, साइड में कार रोक कर, तूफान के कम होने का इंतज़ार करने लगे!

“अब में क्या करूं?” लड़की ने अपने पिता से फिर पुछा।

“कार चलाती रहो!” उसके पिता ने जवाब दिया।

आगे जाकर उसने देखा की बड़े बड़े ट्रक भी रास्ते में रुक गएँ हैं, उनके ड्रायवर भी तूफान के ख़त्म होने का इंतज़ार कर रहें हैं। यह देखकर लड़की ने घबराकर कहा

“मुझे अब रूक जाना चाहिए, आगे बहुत कम दिखाई दे रहा है, यह भयानक है और हर कोई अपनी कार और ट्रक साइड में रोक रहा है”

“हार मत मानो, धीरे धीरे, सावधानी से कार चलाती रहो!”

आगे भयंकर तूफान था! लेकिन उस लड़की ने आगे बढ़ना जारी रखा! थोड़ी देर बाद हवाएं कम पड़ने लगी और साफ़ साफ़ दिखाई देने लगा! अंततः कुछ मील आगे जाकर वे लोग सूखी ज़मीन पर पहुँच गए जहाँ आसमान में सूरज चमक रहा था।

तब पिता ने कहा “अब तुम कार रोक सकती हो, और बाहर निकल सकती हो!”

लड़की ने कहा “पर अब क्यों?”

पिता ने कहा “ अब बाहर निकल कर पीछे देखो, देखो जो लोग हिम्मत हार गए वे अभी तक तूफ़ान में घिरे हुयें हैं! तुमने हार नहीं मानी, इसीलिए तुम्हारा तूफान ख़त्म हो गया!”

The Moral of Hindi Story is

Just because everyone else, even the strongest, gives up. You don’t have to….if you keep going, soon your storm will be over and the sun will shine upon your face again.

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Hindi Story – Inspiring Incident from life of Henry Ford in Hindi

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Inspiring Incident from life of Henry Ford in Hindi

Hindi Story – Inspiring Incident from life of Henry Ford in Hindi

हिंदी कहानी – हेनरी फोर्ड के जीवन की एक शिक्षाप्रद घटना

महँगी पोशाकों से कुछ नहीं होता!

महान उद्योगपति हेनरी फोर्ड के बारे में एक किस्सा अकसर सुनाया जाता है। फोर्ड एक अरबपति थे, फिर भी वे अपने ऑफिस और फैक्ट्री में बिलकुल साधारण कपड़ों में आ जाते थे! यह देखकर उनके सभी कर्मचारी बहुत अचरज करते और आपस में बातें करते की बॉस के पास इतना पैसा है फिर भी वे इतने सिंपल कपड़ों में ऑफिस आ जाते हैं!

एक दिन उनकी सेक्रेटरी ने हिम्मत कर उनसे कह दिया “सर आपके पास इतना पैसा है की आप सारी दुनिया से, एक से बढ़कर एक कपड़ें मंगवा सकतें है, फिर भी आप इतने सादा कपड़ों में ऑफिस आ जातें हैं?

हेनरी फोर्ड मुस्कुरा दिए और कहा “यहाँ सब जानतें हैं की में हेनरी फोर्ड हूँ! में महंगे कपडे पहनकर, सब को यह दिखाने की चिंता क्यों करूँ की में हेनरी फोर्ड हूँ।

कुछ दिनों बाद हेनरी फोर्ड वर्ल्ड टूर पर गए! वे बहुत सी जगहों पर गए लेकिन उन्होंने साधारण कपडे ही पहन रखे थे। (Hindi Story of Henry ford)

उनकी सेक्रेटरी ने उनसे कहा “ सर आपको यहाँ कोई नहीं जानता है, इसीलिए आपको महंगे और अच्छे कपडे पहनना चाहिए!”

हेनरी फोर्ड फिर मुस्कुरा दिए और उन्होंने कहा “ में पहनावे की चिंता क्यों करूं, और वो भी उन लोगो के लिए जो मुझे जानते ही नहीं हैं की में एक अरबपति व्यक्ति हेनरी फोर्ड हूँ” ।

Moral of This Hindi Story is

एसी ज़िन्दगी गुज़ारिए जिससे लोग आपके काम की वजह से आपकी इज्ज़त करें, आपकी महँगी पोशाकों की वजह से नहीं, अकसर देखा जाता है की थोडा सा पैसा आ जाने पर लोग महंगे ब्रांडेड कपड़ों पहनने लगते हैं ताकि लोग उनकी महंगी पोशाकों पर लगे कंपनियों के लोगोस की वजह से उनकी इज्ज़त करें, ऐसे लोग अकसर अन्दर से खोखले होते हैं और अपने जीवन में कुछ भी रचनात्मक नहीं कर पाते।

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Whatsapp story in Hindi whatsapp की सफलता की कहानी

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Whatsapp story in Hindi whatsapp की सफलता की कहानी

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whatsapp की सफलता की कहानी हिंदी में

आप हर रोज़ अपना स्मार्टफोन यूज़ करतें हैं, और हर स्मार्टफोन whatsapp के बिना अधुरा है, क्या आपने कभी सोचा है की, आपका व्हाट्सएप केसे बना? व्हाट्स एप को किसने बनाया? whatsapp की कहानी क्या है? आज हम आपको व्हाट्स एप बनाने वाले शख्स की प्रेरक कहानी सुनातें हैं जिसे सुनकर आप भी अपने लक्ष्य को हांसिल करने में जुट जायेंगे!

व्हाट्सएप को बनाया है 39 वर्षीय जेन कौम ने!। whatsapp के अविष्कारक जेन कौम के जीवन की कहानी आज की पीढ़ी के लिए बहुत ही उत्प्रेरक और प्रेरणादायक है।

जेन कौम का जन्म February 24, 1976 को युक्रेन के कीव शहर में हुआ, उनका बचपन कीव के पास एक गाँव फास्तिव में बीता! वे अपने माता पिता की इकलोती संतान थे। उनकी माँ एक हॉउस वाइफ और पिता एक मजदूर थे। युक्रेन के उस गांव में हालात बहुत ख़राब थे, बच्चों के स्कूल में बाथरूम तक नहीं थे, बच्चों को युक्रेन की -20 डिग्री ठण्ड में भी बाहर बने बाथरूम में जाना पड़ता था, ऐसे माहोल में technology का तो नामो निशान ही नहीं था! (Whatsapp story in Hindi)

पूरे युक्रेन में उस वक्त राजनैतिक हालात ठीक नहीं थे, जेन कौम के माता पिता यहूदी थे और उन दिनों यहूदी अल्पसंखयको के खिलाफ नफरत बढती जा रही थी, इसीलिए १६ वर्ष की उम्र में जेन अपनी माँ और दादी के साथ अमेरिका के माउनटेनव्यू केलिफोर्निया आ गए। यहाँ अमेरिकी सरकार की मदद से उन्हें एक दो बेडरूम वाला फ्लैट रहने को मिल गया।

अमेरिका आकर उनकी माँ बेबीसिटर का, और जेन कौम खुद एक ग्रोसरी स्टोर में क्लीनर का काम करने लगे। 18 वर्ष की उम्र में उन्हें प्रोग्रामिंग में खूब दिलचस्पी हो गयी, उन्होंने सेन जोस यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया। जेन कौम एक साधारण स्टूडेंट थे, 19 वर्ष की आयु तक उनके पास कंप्यूटर नहीं था, उन्होंने एक पुरानी किताबों की दुकान से कंप्यूटर नेटवर्किंग का मेनुअल ख़रीदा और उसे सीखकर वापस बेच दिया। (Whatsapp story in Hindi)

इसके बाद वे जेन अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी में sicurity tester के रूप में काम करने लगे।

सन १९९७ में उन्हें याहू में इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर की नोकरी मिल गयी जहाँ उनकी मुलाकात ब्रायन ऐक्टन से हुई। दोनों ने 9 सालों तक याहू के लिए कार्य किया। अब उनके पास करीब चार लाख डॉलर्स की सेविंग्स हो गयी थी।

सन २००९ में दोनों ने याहू से इस्तीफा दे दिया और एक वर्ष के अवकाश पर साउथ अमेरिका घूमने चले गए। वापस आकर उन्होंने फेसबुक में जॉब के लिए आवेदन दिया पर उन्हें फेसबुक ने मना कर दिया। (Whatsapp story in Hindi)

जेन कौम ने एक iphone ख़रीदा, उन्होंने पाया की सात महीने पहले लांच हुए एप्पल के एप स्टोर से एप्प्स की एक नयी इंडस्ट्री की शुरुवात होने वाली है! वे अपने दोस्त अलेक्स फिशमेन के पास गए और दोनों ने घंटो एक नए एप्प बनाने पर चर्चा की, जेन कौम के दिमाग में अचानक एक नाम आया whatsapp क्यों की या “whats up” की तरह था, हेल्लो की तरह यह वाक्य अमेरिका में बहुत प्रचलित है, जब भी दो लोग मिलतें हैं तो वे कहतें हैं “whats up” जैसे की भारत में अकसर कहा जाता है “और क्या चल रहा है”?।

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Whatsapp story in Hindi whatsapp की सफलता की कहानी

एक हफ्ते बाद जेन कौम ने Feb. 24, 2009 को एक नयी कंपनी का गठन किया और उसका नाम रखा WhatsApp Inc. प्रारंभ में जेन कौम और ब्रायन ऐक्टन ने दुसरे याहू के पुराने कर्मचारियों से मिलकर ढाई लाख डॉलर्स का फण्ड कंपनी के लिए जमा किया। कंपनी के शुरवाती दिन संघर्ष के थे, उन्होंने एक छोटा ऑफिस किराये पर लिया, हीटर्स की व्यवस्था नहीं थी इसीलिए कर्मचारियों को कम्बल पहन कर काम करना पड़ता था। (Whatsapp story in Hindi)

सन 2010 तक कम्पनी केवल 5000 डॉलर्स प्रतिमाह कमा रही थी, लेकिन सन 2011 में जब whatsapp, एप्पल एप्प स्टोर में टॉप 20 में आ गया तब से कम्पनी की इनकम लगातार बढती गयी। सन 2014 तक whatsapp का प्रभाव इतना बढ़ गया की फेसबुक के मार्क जुकेर्बेर्ग ने जेन कौम को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा, और बाद में फेसबुक ने whatsapp को खरीद लिया।

आज जेन कौम की संपत्ति करीब 6.8 बिलियन डॉलर्स है,और whatsapp के यूज़र्स की संख्या 800 मिलियन हो चुकी है।

नवम्बर 2014 में जेन कौम ने 1 मिलियन डॉलर्स The FreeBSD Foundation को और 556 मिलियन डॉलर्स Silicon Valley Community Foundation (SVCF) को डोनेशन में दे दिए।

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हिंदी कहानी – अलीबाबा डॉट कॉम के फाउंडर जैक मा की प्रेरणादायक कहानी

क्या आपने अलीबाबा डॉट कॉम के फाउंडर जैक मा की कहानी सुनी है? जेक मा एक चीनी उद्योगपति हैं, जो अलीबाबा ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमेन हैं। जैक मा विश्व के सबसे सफल उद्यमियों में से एक हैं, उनकी कुल नेट वर्थ अर्थात कुल चल अचल संपत्ति २०.४ बिलियन डॉलर्स आंकी गयी है। उनकी शौपिंग वेब साईट अलीबाबा डॉट कॉम पर प्रति दिन १०० मिलियन ग्राहक आतें हैं।

चीन के सबसे धनि व्यक्ति बनने से पहले उन्हें कई असफलता और रिजेक्शन का सामना करना पड़ा।

जैक मा कालेज की इंट्रेंस एक्साम पास करने में तीन बार असफल हो गए, फिर उन्होंने ३० अलग अलग जॉब्स के लिए अप्लाय किया और उन्हें सभी जगहों से रिजेक्ट कर दिया गया।

उन्ही के शब्दों में “मेने पुलिस डिपार्टमेंट में जॉब के लिए अप्लाय किया पर उन्होंने कहा की में इसके लिए सही नहीं हूँ, में एक बार KFC कंपनी में भी नोकरी हांसिल करने की कोशिश की थी, मेरे शहर से २४ लड़के गए थे, २३ को कम्पनी ने नोकरी दे दी सिवाय एक के और वो में था”

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जब जैक मा ने सन १९९८ अली बाबा डॉट कॉम बनायीं तो उनके सामने कई मुश्किलें आयीं। तीन सालों तक उन्हें कोई मुनाफा नहीं हुआ! वेब साईट की सबसे बड़ी मुश्किल यह थी की ऑनलाइन पेमेंट का कोई तरीका उनके पास नहीं था, और कोई भी बैंक उनके साथ काम नहीं करना चाहता था।

जैक मा ने ने फैसला किया की वो खुद अपना पेमेंट सिस्टम विकसित करेंगे, उन्होंने इसका नाम रखा “अली पे”। इस प्रोग्राम से अंतरराष्ट्रिय ग्राहकों के बीच मुद्रा का आदान प्रदान आसन हो गया।

उस समय जब उन्होंने अली पे का आईडिया लोगो को बताया तो बहुत सारे लोगों ने कहा की यह सबसे मूर्खतापूर्ण आयडिया है जो तुम सोच सकते हो!, जैक ने कहा की उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर लोग उस सुविधा का उपयोग करतें हैं और उनका काम आसन हो जाता है।

आज 800 मिलियन लोग अली पे का इस्तेमाल करतें हैं।

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Hindi Kahani – Five Unsuccessful People in Hindi

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हिंदी कहानी – पांच नाकाम लोग!

  • दुनिया के नंबर एक बास्केट बाल खिलाड़ी, माइकल जॉर्डन को उनकी स्कूल की टीम से निकाल दिया गया था!
  • महान संगीतकार बीथोवेन को, उनके म्यूजिक टीचर ने कह दिया था की, तुमसे अच्छे संगीत की रचना की उम्मीद करना, एकदम बेकार है!
  • चार्ल्स बाबेज ने सन १९३७ में ही कंप्यूटर का अविष्कार कर लिया था, पर वे इस नयी मशीन के उत्पादन के लिए, फण्ड जुटाने में नाकाम रहे! उनकी मोंत के काफी बाद, सन १९४३ में कंप्यूटर बनना शुरू हुए, सोचिये अगर चार्ल्स कामयाब हो जाते तो, आज दुनिया कितनी विकसित हो गयी होती!
  • KFC बनाने वाले कर्नल सेन्डर्स ने जब अपनी स्पेशल चिकन रेसेपी बेचनी चाही, तो सेकड़ों रेस्टोरेंट्स ने उसे खरीदने से इंकार कर दिया था!
  • वाल्ट डिज़्नी को सेकड़ों बैंक्स ने पैसा देने से मना कर दिया, जब वे डिज़्नीलेंड बनाने के लिए लोन जुटाने की कोशिश कर रहे थे!

तो दोस्तों देखा आपने, इन पाँचों नाकाम लोगों ने असफलता का सामना किस प्रकार किया, लोगो ने उनकी विशेष योग्यता को ही मानने से इंकार कर दिया था, पर उन्होंने इसी को अपनी प्रेरणा बनाया और लगातार कोशिश करते रहे! और अंत में कामयाब हुए।

Moral of This Hindi Kahani is

Accept faliure as your inspiration till success.

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