लोमड़ी और बंदर की मज़ेदार कहानी

lomdi aur bandar kahani 1

लोमड़ी और बंदर की कहानी जो केले खाना चाहते थे

 एक जंगल में एक लोमड़ी और बंदर रहते थे दोनों मित्र थे उस जंगल से एक रास्ता गुजरता था जिस पर कई गांव वाले अपने पीठ पर सामान लादकर गुजरते हैं एक दिन बंदर ने देखा कि कुछ आदमी अपनी पीठ पर  केले के गुच्छे लादकर अपने गांव की तरफ जा रहे हैं वह तुरंत दौड़ा दौड़ा लोमड़ी के पास आया और उससे कहा कि सुनो लोमड़ी क्यों ना हम उन गांव वालों को डराएं और जब वह डर कर भाग जाए तो हम उनका सामान और केले उठा कर खा सकते हैं क्या तुम इस काम में मेरा साथ  दोगी?

  लोमड़ी ने कहा यह बात तो ठीक है लेकिन हम उन्हें   डराकर भगाएंगे किस तरह भगाएंगे? बंदर ने कहा यह तो बहुत आसान है हम दोनों रास्ते के आसपास छुप कर बैठ जाएंगे जैसे ही गांव वाले हमारे पास से गुजरेंगे मैं जोर से खु वा  खु वा  चिल्लाऊंगा और तुम जोर से हु वा हु वा  चिल्लाना हमारा इस तरह चिल्लाना सुनकर वह गांव वाले सोचेंगे कि कोई शेर या भालू आया है और वह दर कर अपना सारा सामान छोड़कर भाग जाएंगे

 लोमडी ने कहा चलो ठीक है लेकिन आधे केले में लूंगी और आधे तुम लेना, बोलो मंजूर है? बंदर ने कुछ देर सोचा और फिर मुस्कुराते हुए कहा ठीक है? लेकिन पहले चलो तो सही.

 लोमड़ी और बंदर दोनों रास्ते के दोनों ओर छुप कर बैठ गए जैसे ही गांव वाले उनके पास से गुजरे तो दोनों ने  खु वा हु वा  चिल्लाना शुरु कर दिया उनकी आवाज सुनकर गांव वाले डर गए और केले के गुच्छे वही छोड़कर भाग गए यह देखकर बंदर और लोमड़ी दोनों बहुत खुश हुए और दोनों उन केले के गुच्छे को खींचते हुए जंगल के भीतर ले आए

 तभी बंदर ने चालाकी की लोमड़ी से कहा कि अगर हम इतने सारे केले यहाँ रखेंगे तो कोई भी जानवर से चुरा लेगा या यह भी हो सकता है की वह गांव वाले वापस आ जाएं और इनहे  ले जाएँ तो क्यों ना हमे एसा करें इनको पेड़ के ऊपर छुपा दें और थोड़ा थोड़ा लेकर खाते रहे.

लोमड़ी  उसकी बातों में आ गई,  उसने बिना सोचे समझे उस पर भरोसा कर लिया.

 बंदर ने कहा तुम केले के गुच्छे उठा-उठाकर मुझे दो मैं उन्हें छुपा दूंगा लोमड़ी ने ऐसा ही किया जब सारे केले के गुच्छे पेड़ों पर पहुंच गए तो बंदर भी कूद कर पेड़ पर पहुंच गया और वहां बैठकर खाने लगा जब लोमड़ी ने आवाज दी मेरा हिस्सा भी नीचे फेंको तब बंदर ने केला खाया और छिलका नीचे फेंक दिया और हंसते हुए बोलने लगा यह लो तुम्हारा हिस्सा

लोमड़ी बेचारी ने झल्लाते हुए वहां से चली गई और वह कर भी क्या सकती थी क्योंकि उसने बिना सोचे समझे बंदर पर भरोसा कर लिया था और अपना सारा सामान उसे सौंप दिया था

 लोमड़ी और बंदर की इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कभी किसी पर भी बिना सोचे समझे भरोसा नहीं करना चाहिए.

Super 30 Success story in Hindi

Super 30 Anand Kumar
Super 30 Anand Kumar

सुपर 30 की कहानी !

SUPER 30 Story in Hindi

दोस्तों, आज कल कई छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानि आई आई टी (Indian Institute of Technology) में प्रवेश लेकर स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रियां हांसिल करना चाहतें हैं, क्यों की IIT की डिग्री सफलता की गारंटी मानी जाती है, इसे प्राप्त कर लेने के बाद, कई बड़ी कंपनियों में लाखो रूपये सालाना पैकेज की नोकरी मिल जाती है। भारत में कुल 16 IIT संसथान हैं।

IIT में एडमिशन के लिए एक बहुत कठिन प्रवेश परीक्षा ली जाती है, केवल सर्वोत्तम छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता है। सीटें कम होने की वजह से कम्पीटीशन बहुत ज्यादा है! छात्रों को प्रवेश परीक्षा पास करने के लिए किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट से कोचिंग लेनी पड़ती है।

इस कारण भारत में कोचिंग इंस्टिट्यूट का एक बड़ा व्यवसाय अस्तित्व में आ गया है, कई कोचिंग संस्थान ऐसे हैं जो इस प्रवेश परीक्षा की तयारी करवातें हैं लेकिन इन फीस बहुत ज्यादा है।

तो आप सोचिये, अगर कोई गरीब लेकिन प्रतिभावान छात्र है, और वह IIT में अध्यन करना चाहता है तो, यह उसके लिए लगभग असंभव होगा, क्यों की बिना स्पेशल ट्रेनिंग के वह लाखों छात्रों को पीछे छोड़ IIT में जगह नहीं बना पायेगा।

Super 30 Free coaching for IIT

बिहार की राजधानी पटना में एक अनोखा इंस्टिट्यूट एसा हैं, जो 30 गरीब प्रतिभावान छात्रों को फ्री कोचिंग की सुविधा के साथ साथ, रहने और खाने का भी इंतज़ाम करता है। इस संस्थान का नाम सुपर 30 है ।

आइये हम आज इस सुपर 30 को बनाने और चलाने वाले श्री आनंद कुमार जी की प्रेरणादायक कहानी सुनते हैं।

आनंद कुमार जी की प्रेरणादायक कहानी
Motivational Hindi Story of Anand Kumar Super 30

आनंद कुमार जी का जन्म पटना बिहार में हुआ। उनके पिता भारतीय पोस्टल डिपार्टमेंट में एक क्लर्क थे। उनके पिता अपने बच्चों के लिए महँगी प्राइवेट स्कूल की शिक्षा का इन्तेजाम नहीं कर सकते थे इसलिए आनंद कुमार की प्रारंभिक शिक्षा एक हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में हुई जहाँ उन्हें गणित में गहन रूचि उत्पन्न हो गयी। अपने ग्रेजुएशन के दिनों में आनंद कुमार ने नम्बर थ्योरी पर शोध पत्र लिखा जो की मेथेमेटिकल स्पेक्ट्रम और मेथेमेटिकल गजट में छपा।

आनंद ने अपनी प्रतिभा के बल पर कैम्ब्रिज युनिवरसिटी में प्रवेश तो पा लिया लेकिन अपनी गरीबी और पिता की म्रत्यु के चलते वे कैम्ब्रिज युनिवरसिटी नहीं जा पाए। उन्होंने पटना और दिल्ली में इसके लिए स्पोंसर खोजे लेकिन उन्हें कोई भी मदद करने वाला नहीं मिला।

तब आनंद ने तय किया की वह दिन में गणित का अध्यन करेगा और शाम को अपनी माँ के साथ पापड़ बेचेगा। उनकी माँ ने पापड़ बनाने का व्यवसाय शुरू कर दिया और आनंद उसमे उनका हाथ बटाने लगे। साथ ही साथ उन्होंने बच्चों को पढाना भी शुरू कर दिया।

सन १९९२ में आनंद ने गणित पढाना शुरू किया! उन्होंने पांच सो रूपये प्रति माह पर एक कमरा किराये पर लिया और अपना रामानुज स्कूल ऑफ़ मेथेमेटिक्स शुरू किया।

सिर्फ तीन सालों में ही उनके छात्रों की संख्या 2 से बढ़कर 500 तक पहुँच गयी।

Begining of Super 30

सन 2000 में आनंद के जीवन में एक घटना घटी, उनके पास एक गरीब छात्र IIT की प्रवेश परीक्षा की कोचिंग के लिए आया, आनंद उसे पढ़ाने के लिए राज़ी हो गए, लेकिन जब उन्होंने उस छात्र से पुछा की तुम पटना में कहाँ रहोगे तो उसने बताया की वह एक बड़े घर की सीढियों के नीचे जैसे तैसे समय बिता लेगा।

इस घटना ने आनंद को झकजोर दिया! उन्होंने फेसला किया की वे अब से 30 प्रतिभावान छात्रों को न केवल मुफ्त कोचिंग देंगे बल्कि उनके रहने और खाने का भी इंतज़ाम करेंगे।

super 30
super 30 Anand Kumar

तब से लेकर आज तक आनंद हर वर्ष एक प्रतियोगिता परीक्षा लेकर 30 गरीब प्रतिभावान छात्रों को IIT प्रवेश परीक्षा की तयारी करवातें हैं।

सुपर 30 (Super 30) का परीक्षा परीणाम भी आश्चर्य जनक हैं, 30 में से लगभग 28 छात्र हर वर्ष चयनित हो जातें हैं ।

जहाँ हर शहर में लालची लोगों द्वारा शिक्षा का व्यवसायीकरण कर दिया गया हैं ऐसे में आनंद कुमार जी की कहानी रेगिस्तान में एक छायादार वृक्ष की तरह लगती है।

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Hindi Story of Nirma निरमा की सफलता की प्रेरक कहानी

Hindi Story of Nirma
Hindi Story of Nirma

Hindi Story of Nirma

निरमा की सफलता की प्रेरक कहानी

अगर आप अस्सी या नब्बे के दशक में पैदा हुए हैं, तो आपने निरमा वाशिंग पाउडर का पहला सादा सा विज्ञापन दूरदर्शन पर ज़रूर देखा होगा, जिसमे एक छोटी लड़की सफ़ेद फ्रोक पहने दिखाई देती थी। यह सब सर्फ एक्सेल, हेंको, एरियल आदि दुसरे अंतरराष्ट्रिय ब्रांड आने के पहले की बात है ।

इस छोटे से विज्ञापन के पीछे एक व्यक्ति की सालों की कड़ी मेहनत थी। जिसका नाम करसन भाई पटेल था।

करसन भाई पटेल उत्तरी गुजरात के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखतें हैं। करसन भाई ने रसायन विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली! उनके सभी साथियों की नज़र में, किसी सरकारी विभाग में, लेब टेक्निशियन की नोकरी हांसिल कर लेना बहुत बढ़िया आइडिया था। कर सन भाई ने भी यही किया लेकिन उन्होंने अपनी महत्वकांक्षा को कभी छोटा या कम नहीं होने दिया।

पहले उन्होंने कॉटन मिल्स और फिर मायनिग डिपार्टमेंट में लेब टेक्नीशियन की नोकरी कर ली।

लेकिन करसन भाई ने बड़ा सपना देखा, जिसकी शुरुवात उन्होंने अपने घर के बरामदे में डिटर्जेंट पाउडर बनाने और पैक कर की । यह व्यवसाय वे अपनी सर्विस के बाद करते थे।

उन्होंने यह काम अकेले ही किया, वे खुद वाशिंग पाउडर बनाने,पेक करने और उसे सायकिल पर बेचने जाते थे!। अपने नए डिटर्जेंट पाउडर को वो बहुत कम दाम, तीन रूपये प्रति किलो में बेचते थे! जो की दुसरे डिटर्जेंट के तुलना में सिर्फ एक तिहाई था!।

Hindi Story of Nirma Karsanbhai
Karsanbhai Hindi Story of Nirma

इतना सस्ता डिटर्जेंट पाउडर एक इंस्टेंट सक्सेस बन गया। करसन भाई ने अपने ब्रांड का नाम “निरमा (NIRMA ) अपनी बेटी निरुपमा के नाम पर रखा!।

तीन साल तक सफलता पूर्वक डिटर्जेंट बेचने के बाद करसन भाई में सरकारी नोकरी छोड़ने का आत्मविश्वास आ गया। नोकरी छोड़ने के बाद करसन भाई ने अहमदाबाद में एक छोटी वर्कशॉप खोल ली! । निरमा ब्रांड, सारे गुजरात और महाराष्ट्र में बहुत जल्दी स्थापित हो गया, इसका कारण कम कीमत और उच्च क्वालिटी था ।

Hindi Story of Nirma
Hindi Story of Nirma – Nirma Products

सन 1995 में करसन भाई ने निरमा इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलोजी की स्थापना की, जो की आगे चलकर गुजरात का लीडिंग इंजीनियरिंग कॉलेज बन गया।

आज निरमा ग्रुप की सालाना आय १ बिलियन डॉलर है, और इसमें पंद्रह हज़ार लोग काम करतें हैं। सन 2010 में करसन भाई को पद्मश्री से नवाज़ा गया ।

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Hindi Story: Love Passbook in Hindi प्यार की पासबुक

Hindi Story - Marriage in Hindi
Hindi Story: Love Passbook in Hindi प्यार की पासबुक

Hindi Story: Love Passbook in Hindi

हिंदी कहानी : प्यार की पासबुक

जेकलिन की शादी आज विलियम से हो रही थी, वह बहुत खुश थी। बिदाई के समय जेकलिन की माँ ने उसे एक नए बैंक अकाउंट की पासबुक दी, जिसमे 1000 डॉलर्स जमा थे।

उसकी माँ ने कहा “जेकलिन! यह पासबुक लो, इसमे तुम अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी का रिकॉर्ड रख सकती हो!, जब कभी भी तुम्हारी ज़िन्दगी में ख़ुशी और यादगार लम्हें आयें, तो इस बैंक खाते में कुछ रकम जमा करवा देना! और जमा रकम के आगे, उस अच्छे पल के बारे में लिखना।

जितनी अच्छी घटना हो, उतनी ज्यादा रकम इसमें डालना! इसमें पहली रकम मेने तुम्हारे लिए जमा कर दी है, आगे तुम विलियम के साथ इसमें रकम जाम कराते रहना! कुछ सालों बाद जब तुम इसे पढ़कर देखोगी तो तुम्हे आश्चर्य होगा!”।

Hindi Story - Love Passbook
Hindi Story: Love Passbook in Hindi प्यार की पासबुक

जेकलिन ने यह बात विलियम को भी बता दी। दोनों को माँ का यह आईडिया अच्छा लगा और वे सोचने लगे की अगला डिपोजिट हम कब करेंगे।

कुछ समय बाद उनकी पास बुक में कुछ इस तरह लिखा था

7 फरवरी : 100 $, शादी के बाद विलियम का पहला बर्थडे!

1 मार्च : 300 $, जेकलिन की सेलेरी बढ़ने की ख़ुशी में!

20 मार्च : 200 $ बाली द्वीप पर छुट्टियाँ बितायीं !

15 अप्रेल : 2000 $ जेकलिन के प्रेग्नेंट होने की ख़ुशी में!

1 जून : विलियम के प्रोमोशन की ख़ुशी में!

…… और इसी तरह …….

कुछ सालों तक सब कुछ ठीक चला, पर फिर दोनों में छोटी छोटी बातों पर झगडा होने लगा! वे आपस में कम बात करने लगे और काम में लगे रहते। हालत यहाँ तक बिगड़ गए की दोनों को अपनी शादी पर अफ़सोस होने लगा! ।

एक दिन जेकलिन ने अपनी माँ से कहा “माँ अब हम दोनों साथ नहीं रह सकते, हम तलाक लेने पर राज़ी हो गएँ हैं, मुझे समझ नहीं आता की मेने ऐसे आदमी से शादी क्यों की!”।

माँ ने कुछ निराश होते हुए समझाया “ठीक है अगर तुम दोनों ने फैसला कर ही लिया है तो तुम एसा ही करो, लेकिन तुम्हे याद है उस पासबुक के बारे में जो मेने तुम्हे दी थी?”

जेकलिन ने कहा “हाँ, उसमे काफी रकम जमा है!”

माँ ने कहा “ठीक है तो तुम वह सारी रकम निकल लो और खर्च कर दो, इस असफल शादी का कोई रिकॉर्ड तुम अपने पास मत रखो!”

जेकलिन ने सोचा यह ठीक है इसलिए वह बैंक गयी। जब वह खाता बंद करवाने के लिए बैंक की कतार में खड़ी थी, तब उसने पासबुक को पढ़ा। पुरानी अच्छी बातों की यादें उसके मन में ताज़ा होती गयीं। विलियम और अपने बच्चे के साथ बिताये हुए खुशियों के वह सारे अनमोल पल उसकी आँखों के सामने घूमने लगे, उसकी ऑंखें नम हो गयीं। वह घर लोट गयी।

घर पहुंचकर उसने वह पास बुक विलियम को दिखाईं और कहा की हमें यह बचत के सारे पैसे डायवोर्स के पहले खर्च कर देने चाहिए! ।

अगले दिन शाम को विलियम ने पासबुक जेकलिन को वापस दे दी।

जेकलिन ने उसमे 5000 $ का एक नया डिपोजिट देखा! जिसके आगे विलियम ने लिखा था “आज मेने जाना की में तुमसे कितना प्यार करता हूँ, तुम कितनी खुशिया मेरी ज़िन्दगी में लायी हो!”

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Hindi Funny story क्या महिलाएं चतुर होतीं हैं?

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Hindi Funny story

एक मज़ेदार कहानी – क्या महिलाएं चतुर होतीं हैं?

एक बार एक महिला गोल्फ खेल रही थी, उसने एक ज़ोर का शॉट मारा और बॉल पास ही स्थित जंगल की घनी झाड़ियों में चली गयी।

वह बॉल को खोजने जंगल में गयी, तो उसने एक सुनहरी मेढ़क देखा जो एक जाल में फंसा हुआ था! मेढ़क ने उसे देखकर कहा “अगर तुम मुझे आज़ाद कर दो तो, में तुम्हारी तीन इच्छाओं को पूरा कर दूंगा!”

यह सुनकर उस महिला ने मेढ़क को ख़ुशी ख़ुशी ज़ल्दी से आज़ाद कर दिया!

आज़ाद होने के बाद मेढ़क ने कहा “धन्यवाद! लेकिन में, आप को बताना भूल गया की तीन इच्छाएं पूरी करने में एक नियम भी है, वह ये है की, आप जो भी मांगेंगी, आपके पति को उसका दस गुना मिलेगा !” ।

महिला ने कहा “ठीक है कोई बात नहीं!”

पहली इच्छा उस महिला ने यह मांगी, कि वह दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला बन जाये। यह सुनकर मेढ़क ने उसे चेताया “क्या आप जानती हैं की, इससे आप के पति दुनिया के सबसे हेंडसम आदमी बन जायेंगे? और लाखों महिलाएं उन्हें चाहने लगेगीं!” ।

महिला ने कहा “ठीक है, क्यों की में ही सबसे सुन्दर महिला होउंगी इसीलिए वे सिर्फ मुझे ही देखेंगे!” ।

मेढ़क ने अपना हाथ हिलाया और वह महिला दुनिया की सबसे सुन्दर महिला बन गयी!

दूसरी इच्छा में उसने कहा की वह दुनिया की सबसे अमीर महिला बनना चाहती है! ।

यह सुनकर मेढ़क ने कहा “इससे तो आपके पति दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन जायेंगे और आपसे भी दस गुना अमीर होंगे!” ।

महिला ने कहा “ यह भी ठीक है! क्यों की मेरा सबकुछ उनका है और उनका सब कुछ मेरा है”

मेढ़क ने फिर हाथ हिलाया और वह महिला दुनिया की सबसे अमीर महिला बन गयी!

मेढ़क ने फिर उसकी तीसरी इच्छा पूछी।

महिला ने जवाब दिया “ मुझे एक हल्का हार्ट अटैक आ जाये!”

मोरल आफ द स्टोरी (Moral of this Hindi Funny story)

महिलाएं चतुर होतीं हैं उनसे पंगा ना लें!

महिला पाठक ध्यान दें!!!

आप सब के लिए यह कहानी यहीं समाप्त हो जाती है, यहीं रूक जाईये, और अच्छा महसूस करते रहिये जैसा की आप अभी कर रहीं हैं! केवल यहीं तक की कहानी कॉपी पेस्ट कर अपने फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट कर दें!

Hindi Funny story क्या महिलाएं चतुर होतीं हैं?
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पुरुष पाठक ध्यान दें!!!

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आगे यह हुआ की, मेढ़क ने उस महिला की तीसरी इच्छा भी पूरी कर दी!

उस महिला को हल्का हार्ट अटेक आया और उसके पति को उससे दस गुना हल्का हार्ट अटेक आया और उसे इसका पता भी नहीं चला!!!

मोरल ऑफ द स्टोरी (Moral of this Hindi Funny story)

महिलाएं मूर्ख होतीं हैं लेकिन अपने आप को चतुर समझतीं हैं इसलिए ज़्यादातर व्यापारी उन्हें ठग लेतें हैं।

 

अगर आप एक महिला हैं और अभी तक यह पढ़ रहीं हैं, तो इसका यही अर्थ है की, महिलाएं कभी अच्छी सलाह भी नहीं सुनती हैं!

Hindi Funny story क्या महिलाएं चतुर होतीं हैं?
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 Real moral of this Hindi Funny story is

( यह सिर्फ एक अंग्रेजी विनोदपूर्ण कहानी( Humorous story) का अनुवाद है, वैज्ञानिक रूप से मूर्ख या चतुर होना महिला या पुरुष होने पर निर्भर नहीं करता हैं!)

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Hindi Funny story क्या महिलाएं चतुर होतीं हैं?
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Hindi Motivational story of Napoleon अटूट भरोसा

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Hindi Motivational story of Napoleon अटूट भरोसा

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अटूट भरोसा

एक बार, किसी मित्र देश के राजा, नेपोलियन से मिलने राजकीय यात्रा पर आये! उन्हें शाही सम्मान के साथ महल में ठहराया गया। भोजन के वक़्त उस राजा ने नेपोलियन से पुछा “आपके पास सेनाएं और संसाधन तो दुसरे राजाओं की तरह ही है, फिर क्या बात है की आप हर युद्ध में अपराजित रहतें हैं?”

यह सवाल सुनकर नेपोलियन ने मुस्कुरा कर कहा “सही वक़्त आने पर हम आपके सवाल का जवाब देंगे? ।

अगले दिन जब वह राजा सुबह समुन्द्र के किनारे टहल रहा था, तो उसने देखा की कुछ सेनिक अपनी टोपी में पानी भरकर उसे निचे गिराते हुए, उसे रस्सी की तरह बटने का प्रयास कर रहें हैं!!!

राजा ने तुरंत सेनिक से पूछ लिया “यह तुम लोग क्या कर रहे हो?”।

सेनिकों ने उत्तर दिया “जैसा की हमारे सिपहसालार ने हुक्म दिया है, हम वही कर रहें हैं!”

राजा ने यही सवाल सिपहसालार से और फिर सेनापति से पुछा की सेनिक यह मूर्खतापूर्ण कार्य क्यों कर रहें है? सब ने उसे यही जवाब दिया, आखिर में उसे पता चला की यह आदेश खुद सम्राट नेपोलियन ने दिया था!

रात के भोजन के वक़्त, जब उसने नेपोलियन से दिन की इस अजीब घटना के बारे में पुछा, तो नेपोलियन ने कहा “सेनिकों को यह मुर्खतापूर्ण कार्य करने का आदेश मेने इसलिए दिया था, ताकि आपको आपके कल के प्रश्न का उत्तर मिल जाये!!”

“मेरे सेनापति, सिपहसालार और सभी सेनिकों को मुझ पर अटूट भरोसा है, वह जानतें हैं की मे उन्हें जो भी आदेश दूंगा वह बिलकुल उचित होगा! वह मेरे आदेशों का पालन करतें हैं कोई बहस, प्रतिप्रश्न नहीं करते और ना ही वह अपने मन में कोई शंका रखते हैं! यही मेरी सबसे बड़ी ताक़त और जीत का कारण है।”

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Hindi Motivational story of Napoleon टीम स्पीरिट से कार्य करें!

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टीम स्पीरिट से कार्य करें!

फ़्रांस का सम्राट नेपोलियन अकसर अपने राज्य में घूमता रहता था, ताकि उसे राज्य और प्रजा की वास्तविक स्तिथि की सही सही जानकारी रहे। एक दिन जब वह सादे कपड़ों में घूम रहा था, तो उसने देखा की कुछ मजदूर भारी भारी खम्बों को उठाने का प्रयास कर रहें है, लेकिन तरकीब से काम नहीं लेने के कारण, वे उन्हें बड़ी मुश्किल से उठा पा रहें हैं।

 उसने देखा कि, पास ही खड़ा उनका इंजीनियर, उन्हें बस निर्देश दे रहा है, लेकिन उन्हें भारी खम्बों को उठाने की कोई तरकीब नहीं सिखा रहा है!। यह देखकर नेपोलियन ने उससे पुछा “आप इन मजदूरों की कोई मदद क्यों नहीं करते?”

उस इंजीनियर ने कहा “तुम्हे मालूम है में कौन हूँ?”

नेपोलियन ने जवाब दिया “नहीं में तो यहाँ अजनबी हूँ! में आपको नहीं जानता”

उस इंजीनियर ने क्रोध भरे स्वर में कहा “में यहाँ का हेड इंजिनीयर हूँ” ।

 यह जवाब सुनकर नेपोलियन बिना कुछ कहे मजदूरों के पास जाकर उनकी मदद करने लगा,

 कुछ देर बाद जब नेपोलियन जाने लगा तो उस इंजीनियर ने उससे पुछा “आप कौन हैं”?

 नेपोलियन ने कहा “इंजीनियर साहब, में नेपोलियन हूँ” यह जवाब सुनकर वह शर्मिंदा हो गया और नेपोलियन से अपने अहंकारी व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी।

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The Moral of This Hindi Motivational Story is

हमें टीम भावना के साथ काम करते हुए, अपने पड़ से छोटे कर्मचारियों और मजदूरों की मदद करना चाहिए, उन्हें काम करने की नयी और उन्नत तकनीके सिखाना चाहिए तभी कंपनी की तेज़ तरक्की संभव हो पायेगी!

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Hindi Motivational story of Napoleon छोटी जीत का छोटा जशन!

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हिंदी प्रेरक कहानी – छोटी जीत का छोटा जशन

एक बार फ्रांस में किसी संस्था ने सर्वश्रेठ लेख प्रतियोगिता आयोजित की! कई विद्वानों ने अपने लेख संस्था को भेजे, उनमे नेपोलियन का भी एक लेख था! नेपोलियन को ही उनके लेख के लिए प्रथम पुरुस्कार मिला।

बहुत समय बाद जब नेपोलियन फ़्रांस का सम्राट बन गये तब उनके एक मंत्री को कहीं से यह बात पता चली! वो उस संस्था के कार्यालय जाकर, नेपोलियन द्वारा लिखे उस लेख की मूल प्रति ले आये! ।

एक दिन सुबह मंत्री ने नेपोलियन को वह लेख दिखाकर पुछा “सम्राट! क्या आप इस लेख के लेखक को जानते हैं?”

नेपोलियन कुछ देर उस लेख को देखते रहे, फिर उसे पास ही जल रहे अलाव में डाल दिया, वह पुराना कागज़ तुरंत जल गया

यह देखकर मंत्री थोडा हेरान हो गए और डर गये, क्यों की उन्होंने तो उम्मीद की थी की सम्राट उसे कुछ इनाम देंगे! उसने डरते हुए पूछा “सम्राट आपने वह लेख क्यों जला दिया?

नेपोलियन ने जवाब दिया “वह लेख मेरे एक समय की छोटी उपलब्धि था! अब उसका कुछ भी महत्त्व नहीं रह गया है!”

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Hindi Motivational story of Napoleon छोटी जीत का छोटा जशन!

Moral of this Hindi Motivational Story is

दोस्तों हमें अपनी हर छोटी उपलब्धि पर खुश होना चाहिए, उससे सीखकर बड़े लक्ष्यों को हांसिल करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। बहुत से लोगों को देखा जाता है की वे किसी छोटी सी उपलब्धी के हांसिल होने पर गर्व करने लगतें हैं, और सभी लोगो को उसके बारे में अभिमान से दिखातें फिरतें हैं, पर वे लोग यह नहीं जानते की यह वह अपना और दूसरों का समय नष्ट कर रहे हैं! छोटी जीत का छोटा जश्न मनाकर हमें फिर अपनी शक्तियां अपने बड़े लक्ष्यों की तरफ लगाना चाहिए!

Hindi Motivational story of Napoleon एक अच्छे लीडर के गुण

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Hindi Motivational story of Napoleon एक अच्छे लीडर के गुण

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एक अच्छे लीडर के गुण!

भयानक युद्ध चल रहा था, नेपोलियन की सेनाएं सीमा पर लड़ रही थी! उन दिनों सन्देश पहुचने का सबसे तेज़ और एकमात्र जरिया घुड़सवार ही थे!। नेपोलियन अपने केम्प में अपने मंत्रियों से चर्चा कर रहा था, तभी एक सन्देश वाहक बड़ी तेज़ी से घोडा दौड़ाता हुआ आया, जैसे ही वह कैंप पर पहुंचा उसका घोडा थकान, भूक, और प्यास से मर गया क्यों की वह रास्ते में कहीं भी आराम के लिए नहीं रुका था।

नेपोलियन ने उसका लाया हुआ सन्देश पढ़ कर तुरंत उसका जवाब लिखकर दे दिया, क्यों की सन्देश को सेना तक जल्दी से जल्दी पहुचाना बहुत ज़रूरी था, इसलिए नेपोलियन ने घुड़सवार को तुरंत रवाना होने को कहा।

जब उस सन्देश वाहक सेनिक ने बताया की उसका घोडा मर गया है तो नेपोलियन ने तुरंत कहा की कोई बात नहीं तुम मेरा ख़ास घोडा ले जाओ।

यह सुनकर सेनिक हेरान हो गया, क्यों की वह घोडा बहुत ख़ास था, उसके कई किस्से प्रचलित थे, सेनिक ने सकुचाते हुए कहा “सम्राट! में छोटा सेनिक आपके घोड़े पर कैसे बैठ सकता हूँ?”

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यह सुनकर नेपोलियन ने कहा “एक छोटा आदमी भी दुनिया में ऊँची से ऊँची चीज़ प्राप्त कर सकता है! में भी कभी तुम्हारी ही तरह एक सामान्य सेनिक ही था!”

यह सुनने के बाद भी सेनिक का डर ख़त्म नहीं हुआ “सम्राट! मेरी हिम्मत नहीं हो पा रही है की में एक सम्राट के घोड़े पर बैठू! मुझे तो कोई सामान्य घोडा दे दीजिये!”

समझाते हुए नेपोलियन ने कहा “ देखो! सामान्य घोडा धीरे भागेगा और तुम देर से युद्ध स्थल पहुंचोगे, हो सकता है इसकी वजह से हम हार जाएँ, फिर न यह घोडा ख़ास रहेगा और न मेरी सम्राट की पदवी!, जीवन में हर किसी का एक विशेष महत्त्व होता है, एक ख़ास भूमिका निभाने के लिए हमें बनाया गया है जिसे हमें पूरा करना है! तुम इसी घोड़े को लेकर तुरंत रवाना हो जाओ ।

Hindi Motivational story of Napoleon एक अच्छे लीडर के गुण
Hindi Motivational story of Napoleon

The Moral of this Hindi Motivational story of Napoleon is

एक अच्छा लीडर वह होता है जो अपने पीछे चलने वालो के आत्मविश्वाश को बढाए!

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Hindi Motivational story of Napoleon एहसान को याद रखिये!

Hindi Motivational story of Napoleon
Hindi Motivational story of Napoleon एहसान को याद रखिये!

Hindi Motivational story of Napoleon

 एहसान को याद रखिये!

फ़्रांस का महान सम्राट नेपोलियन (Napoleon), जिसे हमेशा अपनी बहादुरी, ईमानदारी और दृढनिश्चय के लिए याद किया जाता है, सामान्य लोगो, अपने सेनिकों के साथ भी बड़ी सहजता और सरलता से पेश आता था। नेपोलियन में कई उच्च मानवीय गुण थे जिससे वह जानता में लोकप्रिय नायक की तरह बन गया।

यह कहानी उसकी मानवीयता, दया और अपने पर किये एहसान को याद रखना और उसकी कीमत चुकाने के बारे में है।

नेपोलियन ने बचपन में बहुत गरीबी देखि थी, कई बार उसके पास खाने के लिए पैसे नहीं होते थे, उसके स्कूल के बहार ही एक औरत फल और खाने की चीजें बेचा करती थी ।

कभी कभी एसा भी होता की नेपोलियन की जेब में एक सिक्का भी नहीं होता था, ऐसे में वो उस औरत से खाने की चीजें मजबूरी में उधार ले लिया करता और पैसे आने पर उसे ईमानदारी से लोटा देता। वह औरत भी नेपोलियन पर विश्वास कर उसे ख़ुशी खुसी उधार दे देती।

जीवन में आगे चलकर, अपनी योग्यता, मेहनत, धुन और महत्वकांक्षा के ज़रिये नेपोलियन फ़्रांस की सेना में एक सामान्य सेनिक से एक अफसर, फिर सेनापति और अंत में फ़्रांस का सम्राट बन गया! सम्राट बनने के बाद जब वह अपने पुश्तेनी गांव पहुंचा तो उसने लोगों से उस औरत का पता पुछा और उसके घर पर उससे मिलने गया।

Hindi Motivational story of Napoleon
Hindi Motivational story of Napoleon एहसान को याद रखिये!

नेपोलियन ने उस औरत से पुछा “मेम, क्या आप मुझे पहचानती हैं?”

उस वक़्त नेपोलियन ने फोजी जनरल की वर्दी पहन रखी थी, जिसे देखकर वह औरत थोड़ी सहम गयी फिर उसने विस्मय से कहा “नहीं, माफ़ कीजियेगा में आपको नहीं जानती!?

नेपोलियन ने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा “आप मुझे भूल गयीं हों, पर वह छोटा लड़का आपको अभी तक नहीं भूला है जिसे आप खुशी ख़ुशी उधार दे दिया करतीं थी” ।

यह कहकर नेपोलियन ने उस बूढी औरत को सिक्कों से भरी एक थेली उपहार में दी।

The Moral of This Hindi Motivational story of Napoleon is

दोस्तों, हमेशा उन लोगों को याद रखिये जो आप पर एहसान करतें है, जो आपकी मदद करतें हैं, हमेशा उनका एहसान चुकाने की कोशिश कीजिये! फ़्रांस में सम्राट तो कई हुए होंगे पर क्या किसी को उनका नाम तक याद है? लेकिंग नेपोलियन को इन्ही इंसानियत के गुणों के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा!

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