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Azmaish Quotes, Azmaish status, dp images in Hindi

दोस्तों हम आपके लिए यहाँ पेश कर रहें हैं अल्लाह की तरफ से “आज़माईश” के बारे में कुछ इरशादात और अक़वाल  खूबसूरत तस्वीरों के साथ. इन इस्लामी इमेजेस स्टेटस को आप आसानी से डाउनलोड कर अपने दोस्तों को whatsapp, facebook और instagram पर शेयर कर सकते हैं. 

Hello friends we are presenting here the biggest collection of Azmaish status and quotes in hindi with beautiful images.

These Azmaish status images are very impressive and beautiful for sharing on all social media. You can share these Azmaish quotes and Azmaish status as Azmaish whatsapp post, Azmaish dp, Azmaish whatsapp status, Azmaish instagram status.

These Azmaish quotes are in Hindi and Urdu language but they are in devnagri fonts. Please share these excellent Islamic quotes and Islamic status image in hindi with your friends and spread the love and peace of Islam.

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Azmaish status in hindi images

हदीसे मुबारक

हुजुर अकरम स.अ.व. ने फ़रमाया जितनी आज़माईश सख्त होती है उसका बदला भी उतना ही बड़ा मिलता है और अल्लाह ता आला जब किसी कौम से मोहब्बत करता है तो उनको आज़माईश में डालता है फिर जो उस आज़माईश पर राज़ी रहा, अल्लाह भी उस से राज़ी हो जाता है और जो नाराज़ हुआ अल्लाह भी उस से नाराज़ हो जाता है.

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तकलीफों से ना घबराओ ये तो तुम्हे अल्लाह के करीब करने के लिए हैं.

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अल्लाह को बड़े प्यारे हैं वो लोग जो सख्त मुश्किल में अल्लाह पाक को मदद के लिए पुकारते हैं.

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इंसान की आज़माईश वहीँ रखी गयी हैं जहाँ उसका दिल हो, किसी के लिए औलाद, किसी के लिए मोहब्बत, किसी के लिए माल और किसी के लिए ओहदा.

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कुछ रिश्ते रिश्ते नहीं होते आज़माईश हौते हैं.

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जो आज़माईशें और मुसीबतें आपके लिए लिख दिए गएँ हैं वो आपको मिल कर ही रहेंगे….अगर आप अल्लाह के दीन से दूर हैं तो ये मुसीबतें आप को परेशान और बर्बाद करके रख देंगी, लेकिन अगर आप अल्लाह के दीन पर हैं तो आपको इन मुसीबतों से निकलने का रास्ता और सब्र मिलता रहेगा.

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Azmaish hadees e mubarak in hindi images

हदीसे मुबारक

हुजुर अकरम स.अ.व. ने फ़रमाया जितनी आज़माईश सख्त होती है उसका बदला भी उतना ही बड़ा मिलता है और अल्लाह ता आला जब किसी कौम से मोहब्बत करता है तो उनको आज़माईश में डालता है फिर जो उस आज़माईश पर राज़ी रहा, अल्लाह भी उस से राज़ी हो जाता है और जो नाराज़ हुआ अल्लाह भी उस से नाराज़ हो जाता है.

हज़रत अली से किसी ने पुछा की ये केसे पता चलेगा की जो परेशानी या मुसीबत हम पर आई है, वह अल्लाह की तरफ से आज़माईश है या हम पर अल्लाह की तरफ से सज़ा है?

आपने जवाब दिया – जो मुसीबत तुझे अल्लाह की तरफ ले जाये वह आज़माईश है और जो मुसीबत तुझे अल्लाह से दूर कर दे वो सजा है.

 

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Azmaish dp in hindi image photo

नेकी की राह में सबसे पहली और बड़ी आज़माईश तन्हाई है.

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आज़माईश जितनी सख्त होगी ईनाम भी उतना ही बड़ा मिलेगा.

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कुछ लोग अल्लाह के दर के लिए ही पैदा किये जाते हैं, अल्लाह उनको चुन लेता है, कभी रुलाकर, कभी आज़माकर, कभी तकलीफ देकर, वह अपने ख़ास बन्दों को दूसरों से अलग कर देता है, उसे दुःख की भट्टी से गुज़ारकर कुंदन बनाकर अल्लाह उसके दिल का मुक़ीम बन जाता है और जिस को रब मिल जाये उसको सब मिल जाये.

 

वो लेकर भी आज़माता है और देकर भी आज़माता है, उसके लेने देने में आज़माईश को मध्यनज़र रखना उसके लेने देने में उलझ ना जाना, रब से गाफिल ना हो जाना, सब ख्वाइशें… सब आज़माईशें रुजू का बहाना हैं… तुम आज़माईश की परस्तिश में ना आ जाना तुम खख्वाइशों को खुदा ना बना लेना. रब ने कहा है “तुम ईमान ले आये तो क्या आजमाए ना जाओगे.”

जितनी बड़ी आज़माईश उतनी बड़ी अता.  आज़माईश को मत कोसना इसमें रब को खोजना.

अल्लाह ही तो आस है अल्लाह ही तो उम्मीद है अल्लाह ही तो सच है, अल्लाह ही तो आसानी है.

मुझे सजदों पर यकीन हैं, मेरी दुआएं उस एक के सामने हौती हैं, जो नीयतों से वाकिफ है, वो पहले मुझे आज़मायेगा और फिर आखिर में नवाज़ेगा, और फिर कहेगा बता तेरा कौन है मेरे सिवा..

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जब अल्लाह किसी से नाराज़ हौता है तो उसे अपने से गाफिल करके किसी एसी चीज़ की तलब में लगा देता है जो उसकी किस्मत में नहीं हौती.

Azmaish whatsapp status hindi

Azmaish whatsapp status hindi

ज़िन्दगी के अक्सर मुकाम पर मेने जाना की मेरे साथ सिवाय अल्लाह के और कोई नहीं है और तभी मुझे ये अंदाज़ा हुआ की सिर्फ अल्लाह का होना किस कदर बेहतर है.

इंसान जिस को मुश्किल समझ रहा होता है अल्लाह की निगाह में वो आसानी होती है.

इन्सान जिसे सजा समझ रहा हौता है वो अता हौती है, बस वक़्त को कुछ वक़्त देना हौता है, फिर पता चलता है कोई देर देर थी ही नहीं, जो देर थी वो तो सरासर खैर थी.

Allah ki Aazmaish Azmaish whatsapp status hindi

देने वाला दरवाज़ा कभी बंद नहीं हौता, लेने वालें ही दस्तक देना भूल जाते हैं.

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हज़रत अली र.अ. ने फ़रमाया दुःख में कभी पछतावे के आंसू ना बहाओ,  क्यों की तुम वो खुशनसीब हो जिसे अल्लाह ने आज़माईश के काबिल समझा.

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और अगर अल्लाह तुम्हे किसी मुसीबत/ आज़माईश में डालना चाहे तो उसके सिवा कोई उसे दूर करने वाला नहीं और अगर वह तुम्हारे साथ किसी भलाई का इरादा फरमाए तो उसके फ़ज़ल को रोकने वाला कोई नहीं.

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mushkil and azmaish irshaad and aqwaal

मुश्किलें देने वालों से बड़ा मुश्किलों से निकालने वाला है ये बात समझ आ जाये तो मुश्किल ज्यादा देर मुश्किल नहीं रहती.

mushkil and azmaish irshaad and aqwaal

तकलीफ और परेशानी का मतलब यह नहीं की अल्लाह आपसे नाराज़ है जब अल्लाह किसी से मोहब्बत करता है तो उसे आज़माईश में डालता है ताकि उसकी आज़िज़ी सुन सके.

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Eid Shayari Eid Status in Hindi

Eid Shayari and Eid Status in Hindi

Eid shayari in Hindi

ईद शायरी, दोस्तों इस पेज पर हम आपके लिए कुछ बहुत खूबसूरत ईद शायरी, ईद स्टेटस और ईद मुबारक मेसेज पेश कर रहे हैं, इस वर्ष 2019 में एसा अनुमान है की ईद यानि की ईद उल फ़ित्र का त्यौहार 5 जून 2019 को मनाया जायेगा, यह ईद के चाँद के दिखाई देने पर निर्भर रहेगा, अगर 4 जून को चाँद दिख गया तो ईद 5 जून 2019 और अगर नहीं दिखा तो 6 जून 2019 को मनाई जाएगी.

यहाँ हम ईद चाँद शायरी और ईद मुबारक शायरी संगृहीत की है, इस पेज पर आपको eid shayari for lovers और  eid sad shayari भी मिल जाएगी

Eid Shayari Images: इस पेज के आखिर में हमने कुछ खुबसूरत Eid Shayari Images भी दी हैं जिनमे मशहूर शायरों की ईद शायरी है, आप सभी से गुज़ारिश है की इस ईद शायरी को अपने दोस्तों को शेयर करें, eid ki shayari उन्हें ज़रूर पसंद आएगी.

Eid shayari for lovers,

 

ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन

इक उदासी भी साथ लाती है

ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के

जाने किस किस की याद आती है (Eid Sad Shayari)

~फ़रहत एहसास

 

eid shayari for lovers

ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद का

ईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का

 

ऐ हवा तू ही उसे ईद-मुबारक कहियो

और कहियो कि कोई याद किया करता है (Eid Sad Shayari)

 

किसी विसाल की आहट, किसी उम्मीद का दिन

फ़िज़ा में घुलते हुए नग़मा ऐ सईद का दिन

अब इस से बढ़ के मुबारक भी वक़्त क्या होगा

तुम्हारी याद का मौसम है और ईद का दिन (Eid Sad Shayari)

 

ईद अब के भी गई यूँही किसी ने न कहा

कि तिरे यार को हम तुझ से मिला देते हैं

 

eid shayari for lovers

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम

रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है

 

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुश्बू से

चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है

दिलों में प्यार जगाने को ईद आई है

हँसो कि हँसने हँसाने को ईद आई है

 

Eid ki shayari,

तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी

ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी (Eid Sad Shayari)

ZafarIqbal

 

मेरे यारों को ईद मुबारक हो

ग़म-गुसारो को ईद मुबारक हो

आशिक व माशूक़, रिंदों पर्सा

आज सबको को ईद मुबारक हो

 

Eid chand shayari

ज़माने भर की रौनक से हमें क्या वास्ता ग़ालिब,

हमारा चाँद दिख जाए हमारी ईद हो जाये !!

 

Eid chand shayari

माह-ए-नौ देखने तुम छत पे न जाना हरगिज़

शहर में ईद की तारीख़ बदल जाएगी

 

eid shayari for lovers

आप इधर आए उधर दीन और ईमान गए

ईद का चाँद नज़र आया तो रमज़ान गए

शुजाख़ावर

 

Eid shayari in hindi,

 

ईद है क़त्ल मिरा अहल-ए-तमाशा के लिए

सब गले मिलने लगे जब कि वो जल्लाद आया

Daagh

 

eid shayari for lovers

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में,

वो दिल में आ के अदा तेरे मुस्कुराने की !!

 

ईद मुबारक़

बंदगी यह कि जज़्बात-ओ-ख़यालात हों पाक

फ़र्ज़ इताअत का मोहब्बत से अदा होता है

 

मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी

अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं

 

Eid chand shayari

फिर बाम की जानिब उठे अबरू-ए-हिलाली,

और चाँद ने शर्मा के कहा ईद-मुबारक !!

 

ये अजीब माजरा है कि ब-रोज़-ए-ईद-ए-क़ुर्बां

वही ज़ब्ह भी करे है वही ले सवाब उल्टा

इंशा अल्लाह ख़ान

 

eid mubarak shayari,

 

Eid chand shayari

कहीं है ईद की शादी, कहीं मातम है मक़्तल में

कोई क़ातिल से मिलता है, कोई बिस्मिल से मिलता है

Dagh

 

उठा दो दोस्तो इस दुश्मनी को महफ़िल से

शिकायतों के भुलाने को ईद आई है

असदुल्लाह

 

वादों ही पे हर रोज़ मेरी जान न टालो

है ईद का दिन अब तो गले हमको लगा लो

Mushafi

 

सभी मुराद हों पूरी हर एक सवाली की,

दुआ को हाथ उठाओ कि ईद का दिन है !!

– ईद मुबारक

 

तुझको मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी

ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी (Eid Sad Shayari)

ZafarIqbal

 

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम

रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है

 

Eid mubarak shayari hindi,

मैं कर दूं सारी खुशियां कुर्बान तेरी दीद के बाद

मायूस ना हो इंशा अल्लाह हम निकाह कर लेंगे इस ईद के बाद…..

 

तुम दरवाजे पे कभी दस्तक न देना

कुछ आहटों में उम्मीद होनी चाहिए!

क्यूँ हो ये रिवाज इतने पकवानों का

गरीब केे घर भी तो ईद होनी चाहिए! (Eid Sad Shayari)

 

या खुदा! अपनी रहमतों  से सबके दिलों को नेक कर दे… 

इस  ईद पर मेरे मुल्क के लोगों को फिर से एक कर दे…….

 

ऐ चाँद तू किस मजहब का है

ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा है.

 

eid shayari for lovers

तुम दिख जाओ कभी,,

वो दिन भी मेरा ईद से कम नहीं होता

 

खुशी चारों तरफ फैले, कलुषता द्वेष खो जाए

अमन का चाँद धरती पर, नई उम्मीद बो जाए..

    ईद मुबारक..

 

eid shayari for lovers

उसे मालूम है उसके आने से हो जायेगी ईद मेरी,

चाँद सा वो मेरे आँगन में उतर क्यों नहीं आता।

बस एक झलक उसकी भर देगी खुशियों से मुझे,

वो मोतियों सा मेरे होठों पे बिखर क्यों नहीं जाता

 

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उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना

ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे

 

– दिलावर अली आज़र

 

रात को नया चांद मुबारक ,

चांद को चांदनी मुबारक ,

फलक को सितारें मुबारक ,

सितारों को बुलन्दी मुबारक ,

और आप सबको हमारी तरफ से ,

ईद_मुबारक

 

“ईद लेकर आती है ढेर सारी खुशिया, ईद मिटा देती है इंसान में दुरियां;

ईद है खुदा का एक नायाम तबारोक, इसीलिए कहते हैँ ईद_मुबारक ।।”

 

उठा दो दोस्तों ! इस दुश्मनी को महफिल से

शिकायतों को भुलाने को ईद  आयी है

 

किया था अहेद कि खुशियाँ जहाँ में बाँटेंगे

इसी तल्ब के निभाने को ईद आयी है

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुशबू से

चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है

 

तमन्ना आपकी सब पूरी हो जाए,

हो आपका मुकद्दर इतना रोशन की,

आमीन कहने से पहले ही आपकी हर दुआ कबूल हो जाए..!

 

“तेरी दुनिया, तेरी उम्मीद तुझे मिल जाए

 चाँद इस बार तेरी ईद तुझे मिल जाए

 जिसकी यादों में चिराग़ों सा जला है शब-भर

 उस सहर-रुख़ की कोई दीद तुझे मिल जाए…”

– डॉ कुमार विश्वास

 

Eid chand shayari

लगता है,आज वो बेपर्दा निकल आए है बाज़ार में,

 चारों तरफ शोर है… ईद मुबारक, ईद मुबारक…

 

मेरी ख़ुशियों से वो रिश्ता है तुम्हारा अब तक

ईद हो जाए अगर ईद-मुबारक कह दो।

 

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Dua Shayari

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दुआ शायरी Dua Shayari

Here you can get the best collection of Hindi Shayari on Dua, You can use it as your hindi whatsapp status or can send this Dua Shayari to your facebook friends. These Hindi shayari on dua is excellent in expressing your emotions.

For other subject list of all Hindi Shayari is here Hindi Shayari .

दुआ यानी की प्रेयर, प्रार्थना …. हर व्यक्ति की जिंदगी में दुआ का बहुत महत्त्व पूर्ण स्थान होता है, आपने भी कभी दुआ के लिए हाथ उठायें होंगे…आइये जानते हैं की शायरों की नज़र में दुआ क्या है……दुआ पर हिंदी शायरी का सबसे अच्छा संग्रह यहाँ उपलब्ध है, आप इस दुआ शायरी Dua Shayari को अपने हिंदी वाहट्सएप्प स्टेटस के रूप में उपयोग कर सकतें है या आप इस बेहतरीन हिंदी शायरी को अपने दोस्तों को फेसबुक पर भी भेज सकतें हैं। दुआ लफ्ज़ पर हिंदी के यह शेर, भावनाओं को व्यक्त करने में आपकी मदद कर सकतें हैं

दुआ के बारे में अपने विचार …शायरी नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएं ….

सुनते हैं की मिल जाती है हर चीज़ दुआ से….

वो क्यों नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से….

मेरा मजहब तो ये दो हथेलियाँ बताती है

जुड़े तो पूजा और खुले तो दुआ कहलाती है !!    

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शबनम की जगह आग की बारिश हो मगर हम

‘मंसूर’ न माँगेंगे दुआ और तरह की

~ मंसूर उस्मानी

दिल मर चुका है अब न मसीहा बना करो

या हँस पड़ो या हाथ उठा कर दुआ करो

~ज़हीर काश्मीरी

ऐ दिल न अक़ीदा है दवा पर न दुआ पर

कम-बख़्त तुझे छोड़ दिया हम ने ख़ुदा पर

~सफ़ी औरंगाबादी

अब कहाँ ऐसी तबीअत वाले

चोट खा कर जो दुआ करते थे

बात फूलों की सुना करते थे

हम कभी शेर कहा करते थे

~साग़र सिद्दीक़ी

नाम होंटों पे तेरा आए तो राहत सी मिले

तू तसल्ली है, दिलासा है, दुआ है क्या है

~नक़्श लायलपुरी

जब भी मिलते हैं तो जीने की दुआ देते हैं

जाने किस बात की वो हम को सज़ा देते हैं

मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे

मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे

– Shakeel Badayuni

मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे

~शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं

मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है

~अमीर क़ज़लबाश

दुआ को हात उठाते हुए लरज़ता हूँ

कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए

~इफ़्तिख़ार आरिफ़

जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए

है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए

ये सलीक़ा कि मोहब्बत ने सिखाया है हमें

ज़ख़्म हँसते हुए खाते हैं दुआ करते हैं

हर शख़्स बन गया है ख़ुदा, तेरे शहर में

किस किस के दर पे माँगीं दुआ तेरे शहर में

~नज़ीर सिद्दीक़ी        ‏

कोई चारह नहीं दुआ के सिवा

कोई सुनता नहीं ख़ुदा के सिवा

~हफ़ीज़_जालंधरी 

दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत

ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है

~वसीम_बरेलवी

मैंने दिन रात ख़ुदा से ये दुआ माँगी थी,

कोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आए !!

या रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता,

जो हाथ जिगर पर है वो दस्त-ए-दुआ होता !!

मैं क्या करूँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी

तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है

~ FARAZ

जिस के मरज़ पे सेहत-ए-आलम निसार हो

किस तरह वो मरीज़ दुआ-ए-शिफ़ा करे

मैं शहर में किस शख़्स को जीने की दुआ दूँ

जीना भी तो सब के लिए अच्छा नहीं होता

~Farhat Ehsas

जाते हो ख़ुदा-हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है,

जब याद हम आ जाएँ मिलने की दुआ करना !! – जलील मानिकपुरी

तुझ सा बेदाद-गर कहाँ होगा

लब-ए-हर- ज़ख्म  ने दुआ दी है

आख़िर दुआ करें भी तो किस मुद्दआ’ के साथ

कैसे ज़मीं की बात कहें आसमाँ से हम

~अहमद_नदीम_क़ासमी

राहों पे नज़र रखना होठों पे दुआ रखना,

आ जाये कोई शायद दरवाजा खुला रखना !! /

न चारागर* की ज़रूरत न कुछ दवा की है

दुआ को हाथ उठाओ कि ग़म की रात कटे

मैं फकिरों से भी करती हूं तिजारत अक्सर

कुछ पैसों में लाखों की दुआ देते हैं…!!

दुआ करो कि ये पौदा सदा हरा ही लगे

उदासियों में भी चेहरा खिला खिला ही लगे

~बशीर_बद्र

उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी

दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो

~मोहम्मद_अल्वी

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है

माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है

~MunawwarRana

अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की

मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई

~नुशूर_वाहिदी

अब और क्या तिरा बीमार बाप देगा तुझे

बस इक दुआ कि ख़ुदा तुझ को कामयाब करे

~कैफ़ी_आज़मी AzmiShabana

दुआ को हात उठाते हुए लरज़ता हूँ

कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए

~इफ़्तिख़ार_आरिफ़

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ख़ुदा के नाम पे जिस तरह लोग मर रहे हैं

दुआ करो कि अकेला ख़ुदा न रह जाए

~तसनीम_आबिदी

मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे

मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे

~शकील_बदायुनी

कोई चारह नहीं दुआ के सिवा

कोई सुनता नहीं ख़ुदा के सिवा

~हफ़ीज़_जालंधरी

दुआ-ए-तौबा भी हम ने पढ़ी तो मय पी कर

मज़ा ही हम को किसी शय का बे-शराब न था

~अमीर_मीनाई

कोई दुआ कभी तो हमारी क़ुबूल कर

वर्ना कहेंगे लोग दुआ से असर गया

~SheenKaafNizam

हुई थी हम से जो लग़्ज़िश तो थाम लेना था

हमारे हाथ तुम्हें उम्र भर दुआ देते

~KhalilurRahmanAzmi

जाते हो ख़ुदा-हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है

जब याद हम आ जाएँ, मिलने की दुआ करना

 – जलील मानिकपुरी

दुनिया मेरे पड़ोस में आबाद है मगर

मेरी दुआ-सलाम नहीं उस ज़लील से

~अहमद_जावेद

तेरे इख्तियार में क्या नहीं.मुझे इस तरह से नवाज़ दे,

यूँ दुआयें मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो !!-बशीर बद्र

बुलंद हाथों में ज़ंजीर डाल देते हैं

अजीब रस्म चली है दुआ न माँगे कोई

कभी दुआ तो कभी बद-दुआ से लड़ते हुए

तमाम उम्र गुज़ारी हवा से लड़ते हुए

~ज़फ़र_मुरादाबादी

ज़ख़्म और पेड़ ने इक साथ दुआ माँगी है

देखिए पहले यहाँ कौन हरा होता है

~AabidMalik

मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी

तेरा हाथ ज़िंदगी भर कभी जाम तक न पहुँचे ~ShakeelBadyuni

वो बड़ा रहीम ओ करीम है मुझे ये सिफ़त भी अता करे

तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मिरी दुआ में असर न हो

~बशीर_बद्र

जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुल्ह की दुआ

दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो

सताते ना हम तो मनाते ही कैसे

तुम्हें अपने नज़दीक लाते ही कैसे

इसी दिन का चाहत को अरमान था

क़ुबूल आज दिल की दुआ हो गई।

-साहीर

न लुटता दिन को तो कब रात को यूँ बे-ख़बर सोता

रहा खटका न चोरी का दुआ देता हूँ रहज़न को ~Ghalib

और क्या कहूँ?

छोटी-मोटी चोरी,रिश्वतखोरी

करती है अपना गुजारा यहाँ

आप की दुआ से बाकी ठीक ठाक है !

-गुलज़ार

हज़ार बार जो माँगा करो तो क्या हासिल

दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है ~Dagh

मुसीबत और लम्बी ज़िंदगानी

बुज़ुर्गों की दुआ ने मार डाला 

यह किस्से सभी को सुनाते नही है मगर दोसतो से छुपाते नही है,

तेरे दर्दे दिल की दवा हम करेंगे

न कुछ कर सके तो दुआ हम करेंगे

-आनंद बक्षी

कहाँ से चले, कहाँ के लिए

ये खबर नहीं थी मगर

कोई भी सिरा,जहाँ जा मिला

वही तुम मिलोगे

के हम तक तुम्हारी दुआ आ रही थी..

गुलज़ार

अब इस से बढ़ के और भी कुछ बे-कसी होगी

इलाही अब तो मिरा दिल दुआ भी भूल गया

सब कुछ ख़ुदा से माँग लिया तुझको माँग कर

उठते नहीं हैं हाथ मेरे इस दुआ के बाद

मां ने जिस चांद सी दुल्हन की दुआ दी थी मुझे

आज की रात वह फ़ुटपाथ से देखा मैंने

रात भर रोटी नज़र आया है वो चांद मुझे..!

नाकाम हैं असर से दुआएँ दुआ से हम

मजबूर हैं कि लड़ नहीं सकते ख़ुदा से हम      

बर्बाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा

टूटा हुआ इक़रार-ए-वफ़ा साथ लिए जा ~sahir

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा

तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो ~BashirBadr

हज़ार बार जो माँगा करो तो क्या हासिल

दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है ~Daagh

मैं ज़िंदगी की दुआ माँगने लगा हूँ बहुत

जो हो सके तो दुआओं को बे-असर कर दे ~IftikharArif

ये ज़िंदगी सज़ा के सिवा और कुछ नहीं

हर साँस बद-दुआ के सिवा और कुछ नहीं

जान तुम पर निसार करता हूँ

मैं नहीं जानता दुआ क्या है ~Mirza Ghalib

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dua yaani ki preyar, praarthana …. har vyakti ki jindagi mein dua ka bahut mahattv poorn sthaan hota hai, aapane bhi kabhi dua ke lie haath uthaayen honge…aaiye jaanate hain ki shaayaron ki nazar mein dua kya hai……dua par hindi shaayari ka sabase achchha sangrah yahaan upalabdh hai, aap is dua shaayari du shayari ko apane hindi vaahatsepp stetas ke roop mein upayog kar sakaten hai ya aap is behatarin hindi shaayari ko apane doston ko phesabuk par bhi bhej sakaten hain. duaalaphz par hindi ke yah sher, bhaavanaon ko vyakt karane mein aapaki madad kar sakaten hain

sunate hain ki mil jaati hai har chiz dua se….

vo kyon nahin milata jise maanga tha khuda se….

mera majahab to ye do hatheliyaan bataati hai

jude to pooja aur khule to dua kahalaati hai !!   

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shabanam ki jagah aag ki baarish ho magar ham

mansoor na maangenge dua aur tarah ki

~ mansoor usmaani

dil mar chuka hai ab na masiha bana karo

ya hans pado ya haath utha kar dua karo

~zahir kaashmiri

ai dil na aqida hai dava par na dua par

kam-bakht tujhe chhod diya ham ne khuda par

~safi aurangaabaadi

ab kahaan aisi tabiat vaale

chot kha kar jo dua karate the

baat phoolon ki suna karate the

ham kabhi sher kaha karate the

~saagar siddiqi

naam honton pe tera aae to raahat si mile

too tasalli hai, dilaasa hai, dua hai kya hai

~naqsh laayalapuri

jab bhi milate hain to jine ki dua dete hain

jaane kis baat ki vo ham ko saza dete hain

mere ham-nafas mere ham-nava mujhe dost ban ke daga na de

main hoon dard-e-ishq se jaan-ba-lab mujhe zindagi ki dua na de

– shakaiail badayuni    

maraz-e-ishq jise ho use kya yaad rahe

na dava yaad rahe aur na dua yaad rahe

~shekh ibraahim zauq

log jis haal mein marane ki dua karate hain

main ne us haal mein jine ki qasam khai hai

~amir qazalabaash

dua ko haat uthaate hue larazata hoon

kabhi dua nahin maangi thi maan ke hote hue

~iftikhaar aarif

jab lagen zakhm to qaatil ko dua di jae

hai yahi rasm to ye rasm utha di jae

ye saliqa ki mohabbat ne sikhaaya hai hamen

zakhm hansate hue khaate hain dua karate hain

har shakhs ban gaya hai khuda, tere shahar mein

kis kis ke dar pe maangin dua tere shahar mein

~nazir siddiqi        ‏

koi chaarah nahin dua ke siva

koi sunata nahin khuda ke siva

~hafiz_jaalandhari 

dua karo ki salaamat rahe meri himmat

ye ik charaag kai aandhiyon pe bhaari hai

~vasim_barelavi

mainne din raat khuda se ye dua maangi thi,

koi aahat na ho dar par mere jab too aae !!

ya rab gam-e-hijraan mein itana to kiya hota,

jo haath jigar par hai vo dast-e-dua hota !!

main kya karoon mere qaatil na chaahane par bhi

tere lie mere dil se dua nikalati hai

~ faraz

jis ke maraz pe sehat-e-aalam nisaar ho

kis tarah vo mariz dua-e-shifa kare

main shahar mein kis shakhs ko jine ki dua doon

jina bhi to sab ke lie achchha nahin hota

~farhat aihsas

jaate ho khuda-haafiz haan itani guzaarish hai,

jab yaad ham aa jaen milane ki dua karana !! – jalil maanikapuri

tujh sa bedaad-gar kahaan hoga

lab-e-har- zakhm  ne dua di hai

aakhir dua karen bhi to kis mudda ke saath

kaise zamin ki baat kahen aasamaan se ham

~ahamad_nadim_qaasami

raahon pe nazar rakhana hothon pe dua rakhana,

aa jaaye koi shaayad daravaaja khula rakhana !! /

na chaaraagar* ki zaroorat na kuchh dava ki hai

dua ko haath uthao ki gam ki raat kate

main phakiron se bhi karati hoon tijaarat aksar

kuchh paison mein laakhon ki dua dete hain…!!

dua karo ki ye pauda sada hara hi lage

udaasiyon mein bhi chehara khila khila hi lage

~bashir_badr

us se mile zamaana hua lekin aaj bhi

dil se dua nikalati hai khush ho jahaan bhi ho

~mohammad_alvi

jab bhi kashti meri sailaab mein aa jaati hai

maan dua karati hui khvaab mein aa jaati hai

~munawwarran

anjaam-e-vafa ye hai jis ne bhi mohabbat ki

marane ki dua maangi jine ki saza pai

~nushoor_vaahidi

ab aur kya tira bimaar baap dega tujhe

bas ik dua ki khuda tujh ko kaamayaab kare

~kaifi_aazami azmishaban

dua ko haat uthaate hue larazata hoon

kabhi dua nahin maangi thi maan ke hote hue

~iftikhaar_aarif

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khuda ke naam pe jis tarah log mar rahe hain

dua karo ki akela khuda na rah jae

~tasanim_aabidi

mere ham-nafas mere ham-nava mujhe dost ban ke daga na de

main hoon dard-e-ishq se jaan-ba-lab mujhe zindagi ki dua na de

~shakil_badaayuni

koi chaarah nahin dua ke siva

koi sunata nahin khuda ke siva

~hafiz_jaalandhari

dua-e-tauba bhi ham ne padhi to may pi kar

maza hi ham ko kisi shay ka be-sharaab na tha

~amir_minai

koi dua kabhi to hamaari qubool kar

varna kahenge log dua se asar gaya

~shaiainkaafnizam

hui thi ham se jo lagzish to thaam lena tha

hamaare haath tumhen umr bhar dua dete

~khalilurrahmanazmi

jaate ho khuda-haafiz haan itani guzaarish hai

jab yaad ham aa jaen, milane ki dua karana

 – jalil maanikapuri

duniya mere pados mein aabaad hai magar

meri dua-salaam nahin us zalil se

~ahamad_jaaved

tere ikhtiyaar mein kya nahin.mujhe is tarah se navaaz de,

yoon duaayen meri qubool hon, mere dil mein koi dua na ho !!-bashir badr

buland haathon mein zanjir daal dete hain

ajib rasm chali hai dua na maange koi

kabhi dua to kabhi bad-dua se ladate hue

tamaam umr guzaari hava se ladate hue

~zafar_muraadaabaadi

zakhm aur ped ne ik saath dua maangi hai

dekhie pahale yahaan kaun hara hota hai

~aabidmalik

main nazar se pi raha tha to ye dil ne bad-dua di

tera haath zindagi bhar kabhi jaam tak na pahunche ~shakaiailbadyuni

vo bada rahim o karim hai mujhe ye sifat bhi ata kare

tujhe bhoolane ki dua karoon to miri dua mein asar na ho

~bashir_badr

jo dost hain vo maangate hain sulh ki dua

dushman ye chaahate hain ki aapas mein jang ho 

sataate na ham to manaate hi kaise

tumhen apane nazadik laate hi kaise

isi din ka chaahat ko aramaan tha

qubool aaj dil ki dua ho gai.

-saahir

na lutata din ko to kab raat ko yoon be-khabar sota

raha khataka na chori ka dua deta hoon rahazan ko ~ghalib

aur kya kahoon?

chhoti-moti chori,rishvatakhori

karati hai apana gujaara yahaan

aap ki dua se baaki thik thaak hai !

-gulazaar

hazaar baar jo maanga karo to kya haasil

dua vahi hai jo dil se kabhi nikalati hai ~dagh

musibat aur lambi zindagaani

buzurgon ki dua ne maar daala 

yah kisse sabhi ko sunaate nahi hai magar dosato se chhupaate nahi hai,

tere darde dil ki dava ham karenge

na kuchh kar sake to dua ham karenge

-aanand bakshi

kahaan se chale, kahaan ke lie

ye khabar nahin thi magar

koi bhi sira,jahaan ja mila

vahi tum miloge

ke ham tak tumhaari dua aa rahi thi..

gulazaar

ab is se badh ke aur bhi kuchh be-kasi hogi

ilaahi ab to mira dil dua bhi bhool gaya

sab kuchh khuda se maang liya tujhako maang kar

uthate nahin hain haath mere is dua ke baad

maan ne jis chaand si dulhan ki dua di thi mujhe

aaj ki raat vah futapaath se dekha mainne

raat bhar roti nazar aaya hai vo chaand mujhe..!

naakaam hain asar se duaen dua se ham

majaboor hain ki lad nahin sakate khuda se ham     

barbaad-e-mohabbat ki dua saath lie ja

toota hua iqaraar-e-vafa saath lie ja ~sahir

abhi raah mein kai mod hain koi aaega koi jaega

tumhen jis ne dil se bhula diya use bhoolane ki dua karo ~bashirbadr

hazaar baar jo maanga karo to kya haasil

dua vahi hai jo dil se kabhi nikalati hai ~daagh

main zindagi ki dua maangane laga hoon bahut

jo ho sake to duaon ko be-asar kar de ~iftikhararif

ye zindagi saza ke siva aur kuchh nahin

har saans bad-dua ke siva aur kuchh nahin

jaan tum par nisaar karata hoon

main nahin jaanata dua kya hai ~mirz ghalib

Imtihan Shayari in hindi इम्तिहान शायरी – आज़माइश शायरी

Imtihan shayari in hindi

इम्तिहान  शायरी – आज़माइश शायरी Imtihan Shayari in hindi

Imtihan shayari दोस्तों हम सबकी ज़िन्दगी में आज़माइश और इम्तिहान आते हें यह जीवन का हिस्सा हे इम्तिहान के दौर में हमें हिम्मत से काम लेना चाहिए, यहाँ इस पेज पर हम इम्तिहान पर कुछ शेर प्रस्तुत कर रहें हे, जब भी आप किसी सख्त मुश्किल और इम्तिहान से गुजरें तो इन अशआर को पढ़कर आप में एक नयी उर्जा और साहस पैदा होगा जो आपको इस इम्तिहान को पूरा करने की ताक़त देगा. उम्मीद है की इम्तिहान पर यह शायरी आपको पसंद आएगी.

आप हमारी यह Motivational शायरी भी पढ़िए 

सभी हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ हैं। Hindi Shayari


क़दम क़दम पे वही चश्म ओ लब वही गेसू
तमाम उम्र नज़र इम्तिहान में रहती है
– अहमद मुश्ताक़

नतीजा एक सा निकला दिमाग़ और दिल का
कि दोनों हार गए इम्तिहान में दुनिया के
– एजाज़ गुल

दिल ग़म से जल रहा है जले पर धुआँ न हो
मुमकिन है इसके बाद कोई इम्तिहान न हो

इम्तिहान और मेरी ज़ब्त का तुम क्या लोगे,
मैं ने धड़कन को भी सीने में छुपा रखा है !! -क़तील शिफ़ाई

कहते हैं आज़माइश-ए-इश्क़ है यही, कि जाते हुए,
ऐ निगाह-ए-यार, फिर पलट के इक बार देखना !!

आज़माइश की घड़ी से गुज़र आए तो ज़िया
जश्न ए ग़म जारी हुआ आँखों में आँसू आए
– ज़िया जालंधरी

मेरा कहना हर्फ़-ए-आख़िर भी नहीं
मेरी मानो आज़माइश तो करो
#फ़ारूक़नाज़की

आज़माइश वक़्त ने की
सब यक़ीं टूटे पड़े थे

जाँ देनी है मेरी आज़माइश
दिलदारी है इम्तिहान तुम्हारा
#क़लक़मेरठी

तिरे साथ चलने की आदत नहीं
हमारी न कर आज़माइश हवा
#ख़ालिदमहमूद

‘सबा’ है आज़माइश का तसलसुल
कि दरियाओं पे दरिया पार करना
#सबिहासबा

मुक़ाबिल आएँगे हर बार ताज़ा हौसला ले कर
तुझे हम आज़माइश में सितम-ईजाद रक्खेंगे

गुज़री है आज़माइश-ए-महर-ओ-वफ़ा में उम्र
फ़ुर्सत मुझे मिली न कभी इम्तिहान से
#दाग़

हुज़ूर-ए-शाह में अहल-ए-सुख़न की आज़माइश है
चमन में ख़ुश-नवायान-ए-चमन की आज़माइश है
Ghalib

दिए के और हवाओं के मरासिम खुल नहीं पाते
नहीं खुलता कि इनमें से ये किस की आज़माइश है

हर मुश्किल बदल जाती है आसानी की सूरत में,
अगर दिल आजमाइश के लिये तैयार हो जाये


इम्तिहान शायरी – आज़माइश शायरी

Imtihan Shayari in hindi hinglish font

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Love letter shayari in hindi ख़त पर शायरी

Love letter shayari in hindi

Love letter shayari in hindi ख़त पर शायरी

ख़त पर  शायरी

Love letter shayari in hindi :- Here we are presenting a Collection of Hindi Shayari on Khat (The letter)

ख़त पर हिंदी और उर्दू शायरी का संग्रह हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहें हैं, जब भी आप किसी को ख़त लिखें तो अपने ख़त की शुरुवात इन्ही शेरों से करें.

List of all hindi Shayayri

Love letter shayari in hindi
Love Letter Khat Shayari

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जैसे हो उम्र भर का असासा ग़रीब का

कुछ इस तरह से मैंने सँभाले तुम्हारे ख़त

~वसी_शाह

हमपे जो गुज़री बताया न बताएंगे कभी

कितने ख़त अब भी तेरे नाम लिखे रखे हैं

ख़त नहीं हूँ जिस पे तुम राहों की तफ़सील लिखो

उसके घर जाऊंगा मैं जिसका पता कोई नहीं

 

ख़त पढ़ के कहीं और बिगड़ बैठे न यारब ~

याद आई है अबरू दम-ए-तहरीर किसी की!

 

फिर एक बे-नाम ख़त आया है मेरे नाम,

फिर कागज़ में उसकी तस्वीर उभर आई है। ~पाकीज़ा

 

मैं मुहब्बत से महकता हुआ ख़त हूँ मुझको

ज़िंदगी अपनी किताबों में छुपा कर ले जाये

-बशीर बद्र

 

हो चुका ऐश का जलसा तो मुझे ख़त पहुँचा,

आपकी तरह से मेहमान बुलाए कोई!

~दाग़_देहलवी

 

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था

न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था!

~दाग़

 

क्या–क्या फ़रेब दिल को दिए इज़्तिराब में,

उनकी तरफ़ से आप लिखे ख़त जवाब में!

~दाग़ (Love letter shayari in hindi)

 

हो लिये क्यूँ  नामावर के  साथ-साथ ~

या-रब! अपने ख़त को हम पहुँचाएँ क्या!

~ग़ालिब

 

~नामावर तू ही बता तूने तो देखे होंगे

कैसे होते हैं वो ख़त जिनके जवाब आते हैं!

~क़मर_बदायुनी

 

क़ासिद के आते आते ख़त एक और लिख रखूं

मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में ~ग़ालिब

Love letter shayari in hindi
Love letter Khat

हाए कैसी कशमकश है  यास भी है आस भी ~

दम निकल जाने को है ख़त का जवाब आने को है!

 

ग़ैर को ख़त लिखा उस पे पता मेरा रखा

हंस के आईने से कहा ’आतिश’ ज़िंदा है अभी

 

दिल-ए-नादाँ न धड़क, ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क

कोई  ख़त  ले  के  पड़ौसी  के  घर आया होगा

 

हमारे ख़त के  तो पुर्जे किए  पढ़ा भी नहीं ~

सुना जो तुमने बा-दिल वो पयाम किसका था!

(Love letter shayari in hindi)

मिरा ख़त उसने पढ़ा, पढ़ के नामावर से कहा,

यही जवाब है-  इसका कोई जवाब नहीं!

 

कोई तोहफ़ा, न कोई ख़त, न किसी की तस्वीर,

और मेरे घर से तिरे ग़म के सिवा क्या निकला!

 

ख़त लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो

हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के

 

मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए

हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर कलम निकले

~मिर्ज़ा_ग़ालिब

 

हम तो  इक हर्फ़ के  नहीं ममनून,

कैसा  ख़त–ओ–पयाम  होता है!

~Meer

Love letter shayari in hindi
Love letter shayari Khat par Shayari

“दे के ख़त मुंह देखता है नामावर

कुछ तो पैगामे ज़बानी और है” ~ग़ालिब

 

वो एक ख़त जो उसने कभी लिखा ही नहीं,

मैं रोज़ बैठ कर उस का जवाब लिखता हूँ !!

 

ग़ुस्से में, बरहमी में,  ग़ज़ब में, इताब में…

ख़ुद आ गए हैं वो मेरे ख़त के जवाब में!

 

कितने ख़त आये गए शाख़ पे फूलों की तरह

आज दरिया में चराग़ों के सफ़र याद आये

 

ज़हन में जब भी तेरे ख़त की इबारत चमकी

एक ख़ुशबू सी निकलने लगी अलमारी से

Love letter shayari in hindi
Love letter shayari Khat par shayari

लिखा वही था की जो था नसीब का लिखा

बला से, ख़त का जवाब उसने कुछ दिया तो सही

 

किसी को भेज के ख़त हाय ये कैसा आज़ाब आया

कि हर एक पूछता है नामावर आया? जवाब आया?

~एहसान मरहरवी ( Love letter shayari in hindi)

 

हर-दम यही दुआ है ख़ुदा की जनाब में,

आ जाए यार ख़ुद मेरे ख़त के जवाब में !!

 

उनके ख़त की आरज़ू है उनकी आमद का ख़याल

किस क़दर फैला हुआ है कारोबार ए इंतज़ार

 

वो अनपढ़ था फिर भी उसने पढ़े लिखे लोगों से कहा

एक तस्वीर कई ख़त भी हैं साहब आप की रद्दी में

बशीर बद्र

 

मैंने गीतों में बहुत प्यार किया है तुमको

जो कोई गीत सुनाये तो मुझे ख़त लिखना

 

आज सीवन को उधेड़ो तो ज़रा देखेंगे….

आज संदूक से वो ख़त तो निकालो यारो!

 

वो ख़त पागल हवा के आंचलों पर,

किसे तुमने लिखा था याद होगा।।

 

एक मुद्दत से न क़ासिद है, न ख़त है न पयाम,

अपने वादे को कर तू याद, मुझे याद न कर!

 

जवाब-ए-ख़त का न क़ासिद से माजरा पूछो,

है साफ़ चेहरे से ज़ाहिर कि शर्मसार आया!

 

उसने अपने ख़त में मुझको कितने दर्द से लिखा है,

अब तो गाँव आया करना अब तो सड़केँ पक्की है!

 

मेरे ख़त यूँ सरेआम जलाया ना करो,

राख से भी आती हैँ ख़ुशबू मेरी मोहब्बत की!

 

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में,

एक पुराना ख़त खोला अनजाने में!

( Love letter shayari in hindi)

 

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते

ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँ नहीं देते!

 

कैसे मानें कि उन्हें भूल गया तु ऐ ‘कैफ़’

उन के ख़त आज हमें तेरे सिरहाने से मिले

 

अंधेरा है कैसे तिरा ख़त पढूँ

लिफ़ाफ़े में कुछ रौशनी भेज दे

 

वो एक ख़त जो तूने कभी लिखा ही नहीं,

में रोज बैठ कर उसका जवाब लिखता हूँ।।

 

वो ख़त तेरे, अभी भी सलामत हैं मेरे पास

खोजती हूँ उनमें, अब भी वही एहसास

 

क्या लिखूँ दिल की हकीकत आरज़ू बेहोश है,

ख़त पर हैं आँसू गिरे और कलम खामोश है!

 

किस ख़त में लिख कर भेजूं अपने इंतज़ार को तुम्हें;

बेजुबां हैं इश्क़ मेरा और ढूंढता है ख़ामोशी से तुझे।

 

जिधर देखो उधर मिल जाएंगे अख़बार नफरत के…!!

बहुत दिनों से मोहब्बत का न देखा एक ख़त यारों…!!

 

इक ख़त लिखा था बादलों को

भीगा भीगा जवाब आया अभी

( Love letter shayari in hindi)

 

वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना…

उस को ख़त लिखना तो मेरा भी हवाला देना.. ~ अज़हर इनायती

 

रात खोले थे कुछ पुराने ख़त

फिर मुहब्बत दराज़ में रख दी ।।

 

वो भी शायद रो पड़े वीरान काग़ज़ देख कर

मेने उस को आख़री ख़त में लिखा कुछ नहीं था

 

मुद्दत के बाद ख़त आया जो इज़हार-ए-मोह्हबत का,,

बैरन अँखियों ने बिन पढ़े भिगो हर लफ़्ज मिटा दिये।।

 

ख़त हो, किताब हो, या दिल का ज़ख़्म हो,

जो भी है मेरे पास, निशानी उसी की है ••!

 

वो रोई तो जरूर होगी खाली कागज़ देखकर..

ज़िन्दगी कैसी बीत रही है पूछा था उसने ख़त में…

 

मेरे सनम की दिल्लगी न पूछो यारो, गैर का ख़त.

लिफाफे में रख कर उसपर मेरा ही पता लिख दिया. है

 

प्यार छिपा है ख़त में इतना. जितने सागर में मोती.

चूम ही लेता हाथ तुम्हारा. पास जो मेरे तुम होती. -इंदीवर.

 

बेवफाई उसकी मिटा के आया हूँ; ख़त उसके पानी में बहा के आया हूँ;

कोई पढ़ न ले उस बेवफा की यादों को;  पानी में भी आग लगा के आया हूँ

 

तेरे ख़त में इश्क की गवाही आज भी है,

हर्फ़ धुंधले हो गए पर स्याही आज भी है।।

 

तेरे ख़त की इबारत की मैं स्याही बन गया होता

तो चाहत की डगर का मैं भी राही बन गया होता

 

कुछ ख़्वाबों के ख़त इनमें

कुछ चाँदके आईने सूरज की शुजाएँ हैं

नज़मों के लिफाफ़ोंमें कुछ मेरे तजुर्बे हैं

कुछ मेरी दुआएँ हैं

गुलज़ार

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Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

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बहाने पर शायरी

दोस्तों बहाने पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “बहाने” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “बहाने” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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बहाना कोई तो ए जिन्दगी दे

कि जीने के लिए मजबूर हो जाऊं।

 

तेरी मानूस निगाहों का ये मोहतात पयाम

दिल के ख़ूं का एक और बहाना ही न हो

~साहिर

 

चुरा के मुट्ठी में दिल को छुपाए बैठे हैं,

बहाना ये है कि मेहंदी लगाए बैठे हैं !! -क़ैसर देहलवी

 

अहल-ए-हिम्मत ने हर दौर मैं कोह काटे हैं तकदीर के,

हर तरफ रास्ते बंद हैं, ये बहाना बदल दीजिये !! -मंजर भोपाली

 

हँसी तो बस बहाना है तुम्हे गुमराह करने का

वगरना तुम मेरी आँखों के सब आज़ार पढ़ लोगे

जीना है तुझे पीने के लिए, ए दोस्त किसी उनवान से पी,

जीने का बहाना एक सही, पीने के बहाने और भी हैं !!

 

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

उसने आब-ओ-हवा का बहाना बना दिया,

बीमार-ए-यार का दिल कुछ और दुःखा दिया।

 

हम को पहले भी न मिलने की शिकायत कब थी

अब जो है तर्क-ए-मरासिम का बहाना हम से

 

हम बने थे तबाह होने को,

आपका इश्क़ तो बहाना था !!

 

चुपके-चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है !!

 

ये बहाना तेरे दीदार की ख़्वाहिश का है,

हम जो आते हैं इधर रोज़ टहलने के लिए !!

 

रास्ते के जिस दिये को समझते थे हम हक़ीर,

वो दिया घर तक पहुँचने का बहाना बन गया।

~Faraz

 

भूल तो जाऊँ उसे मगर,

फिर ज़िन्दगी का कोई बहाना ना रहेगा।

 

हर रात वही बहाना है मेरे दिल का,

मैं सोता हूँ तो तेरा ख़्वाब आ जाता है।

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढ़े,

पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यूँ है !!

 

तन्हाई की ये कौन सी मंज़िल है रफ़ीक़ो

ता हद्द-ए-नज़र एक बयाबान सा क्यूँ है

 

बहाना कोई ना बनाओ तुम मुझसे खफा होने का,

तुम्हें चाहने के अलावा कोई गुनाह नहीं है मेरा..

 

कभी तफसीली गुफ्तगू करने का बहाना कर लो

मुझको बुला लो या मेरे पास आना जाना कर लो

 

उस शख़्श से रिश्ता कोई पुराना लगता है

मिलना यकायक यूँ तो इक बहाना लगता है

 

मुद्दत से तमन्ना हुई अफसाना न मिला

हम खोजते रहे मगर ठिकाना न मिला

लो आज फिर चली गई जिंदगी नजरो के सामने से

और उसे कोई रुकने का बहाना न मिला

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

या कोई दर्द या ख़ुशियों का ख़ज़ाना ढूँढो

दिल के बहलाने को कोई तो बहाना ढूँढो

 

काश तुम भी हो जाओ तुम्हारी यादों की तरह..

ना वक़्त देखो, ना बहाना, बस चले आओ

 

करुं ना याद मग़र,, क़िस तरह भुलाऊँ उसे

ग़ज़ल बहाना करुं औऱ गुनगुनाऊँ उसे!!

 

ख्याल, ख्वाब,ख्वाहिशे है तुझसे सब

हर वक्त तुझे याद करने का बहाना सब

 

मेरी ज़िंदगी तो गुज़री तेरे हिज़्र के सहारे,

मेरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना

 

हर शाम कोई बहाना ढूँढती हूँ…

जिंदगी तेरा ठिकाना ढूँढती हूँ…!

 

मैं और कोई बहाना तलाश कर लूँगा तू

अपने सर न ले इल्ज़ाम दिल दुखाने का ~शाज़_तमकनत

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

हम बने ही थे तबाह होने के लिए……

तेरा मिलना तो एक बहाना था…!!

अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो;

मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो;

मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना;

मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।

 

मुझको ढूंढ लेती है रोज किसी बहानें से,

दर्द भी वाकिफ हो गया है मेरे हर ठिकानें से…

 

मेरी जिंदगी में खुशियाँ तेरे बहानें से है,

आधी तुझे सताने में आधी तुझे मनाने में ।

 

ये प्यार,मोहब्बत,इश्क की बातें, हैं ये सारी बेक़ार की बातें,

किस्से हैं, अफ़सानें है, ज़ह्मत औ तबाही के बहानें हैं।

 

Bahane par Shayari in Hindi बहाने पर शायरी

कभी चिरागों कें बहानें मिल जाया करती थी हसरतों को मंजिलें

आज रौंशनी हैं गजब मगर साया ही नजर नही आता कोई

 

हर-वक्त ज़िंदा मुझमें तू है किसी बहानें ये समझानें को आ

कुछ और करीब आनें को आ मेरे सीनें में अब समानें को आ

 

नाकाम हसरत-ओ-फ़साना तमाम लिखे जा रहा हूँ,

चलो इसी बहानें, दोस्तों का दिल तो बहला रहा हूँ।

 

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Bahane par Shayari in Hindi

बहाने पर शायरी

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Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

Ada Shayari in Hindi  अदा पर शायरी
Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

Ada Shayari in Hindi

अदा पर शायरी

दोस्तों अदा पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “अदा” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “अदा” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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अपनी ही तेग़-ए-अदा से आप घायल हो गया,

चाँद ने पानी में देखा और पागल हो गया !!

 

जिनकी अदा अदा में हैं रानाइयाँ ‘शकील’,

अशआर बन के वो मिरे दीवाँ में आ गए !!

 

वो अदा-ए-दिलबरी हो कि नवा-ए-आशिक़ाना

जो दिलों को फ़तह कर ले वही फ़ातेह-ए-ज़माना

 

होश में ला के मेरे होश उड़ाने वाले

ये तेरा नाज़ है, शोख़ी है, अदा है, क्या है

~नक़्श लायलपुरी

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

मेरी समझ में ये क़ातिल न आज तक आया,

कि क़त्ल करती है तलवार या अदा तेरी !! -जलील मानिकपुरी

 

मैं सर ब कफ सर ए मकतल कुछ इस अदा से गया

कि मेरा दुश्मने ने जां आन बान भूल गया।

 

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में,

वो दिल में आ के अदा तेरे मुस्कुराने की !!

 

फ़िज़ा रंगीन, अदा रंगीन, ये इठलाना, ये शरमाना

ये अंगड़ाई, ये तनहाई, ये तरसा कर चले जाना

बना देगा नहीं किसको, जवां जादू ये दीवाना .. ~नीरज

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

मैं ज़ख़्म-ए-आरज़ू हूँ, सरापा हूँ आफ़ताब

मेरी अदाअदा में शुआयें हज़ार हैं

 

नाज़..अदा..तेवर..शर्म..सरीखे तुमने

क़ैद में जाने कितने ही ग़ुलाम रक्खे हैं

 

अदा-ए-मत्लब-ए-दिल हमसे सीख जाए कोई

उन्हें सुना ही दिया हाल दास्तां की तरह

~दाग़

 

कई अहले नजर इसको भी डिस्को की अदा समझे

बेचारा कपकपाया जब कोई फनकार सर्दी में

 

बंदगी यह कि जज़्बात-ओ-ख़यालात हों पाक

फ़र्ज़ इताअत का मोहब्बत से अदा होता है

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

इक अदा मस्ताना सर से पाँव तक छाई हुई,

उफ़ तिरी काफ़िर जवानी जोश पर आई हुई !! – दाग़ देहलवी

 

मैं यूँ चढ़ रहा हूँ निगाहों में उसकी,

कि गोया कोई हक़ अदा हो रहा है !!

 

मेहंदी लगाए बैठे हैं कुछ इस अदा से वो,

मुट्ठी में उन की दे दे कोई दिल निकाल के !! -रियाज़ ख़ैराबादी

 

अब के अदा-ए-ख़ास से कर इम्तिहान-ए-दिल,

जो बर्क़ तूर पर न गिरी हो गिरा के देख !!

 

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में,

वो दिल में आ के अदा तेरे मुस्कुराने की !!

 

तहरीर से वर्ना मेरी क्या हो नहीं सकता,

इक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता !!

 

बड़ी चीज़ है तुझे क्या पता तेरी इक अदा तेरी इक सदा,

जो तड़प रहे थे बहल गए जो गिरे थे गिरके सम्भल गए !!

 

तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई लेके हँस दो

आ जाएगा पलट कर गुज़रा हुआ ज़माना -शकीलबदायुनी

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

 

अदा-ए-ख़ास से ग़ालिब हुआ है नुक्ता-सारा,

सला-ए-आम है यारान-ए-नुक्ता-दाँ के लिए।

 

मैं इक फकीर के होंठों की मुस्कुराहट हूँ

किसी से भी मेरी कीमत अदा नहीं होती – मुनव्वर राना

 

मैं ज़ख़्म-ए-आरज़ू हूँ, सरापा हूँ आफ़ताब,

मेरी अदाअदा में शुआयें हज़ार हैं

 

सीख ली जिसने अदा गम में मुस्कुराने की,

उसे क्या मिटायेंगी गर्दिशे जमाने की !!

 

बेजुबाँ जानवर भी हक़ अदा कर देते हैं नमक का,

एक नजाने इंसान ही क्यों इतना खुदगर्ज़ निकला।

 

तन्हा वो आएँ जाएँ ये है शान के ख़िलाफ़,

आना हया के साथ है, जाना अदा के साथ !!

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

तर्क-ए-वफ़ा के बाद ये उस की अदा ‘क़तील’,

मुझको सताए कोई तो उस का बुरा लगे !!

 

कुछ इस अदा से आज वह पहलूनशीं रहे

जब तक हमारे पास रहे, हम नहीं रहे !!

 

किसी की जान गयी

उनकी इक अदा ठहरी!!!

 

रूठना भी है हसीनों की अदा में शामिल

आप का काम मनाना है मनाते रहिये.!!

 

अब जी रहा हूँ ग़र्दिशे-दौराँ के सांथ-सांथ

ये नाग़वार फर्ज़ अदा कर रहा हूँ मैं.!!

 

Ada Shayari in Hindi अदा पर शायरी

 

मेरी आँखों में आँसू की तरह,एक बार आ जाओ

तक़ल्लुफ़ से बनावट से अदा से चोट लगती है.!!

वो बड़ा रहीमो-क़रीम है,मुझे ये सिफ़अत भी अदा करे

तुझे भूलने की दुआ करूँ,तो दुआ में मेरी असर न हो..

 

हुस्न दुनिया की हर इक शय में बहुत है लेकिन।।

कोई ऐसा नहीं जो तेरी अदा तक पहुँचे..!!

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Ada Shayari in Hindi

अदा पर शायरी

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Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

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Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

Ummeed Shayari in Hindi

उम्मीद पर शायरी

दोस्तों, इन्सान की ज़िन्दगी में उम्मीद की बहुत अहमियत होती है, आप अपने जीवन की किसी भी अवस्था में हों बिना दिल में उम्मीद के खुश नहीं रह सकते और न ही अपने लक्ष्य हांसिल कर सकतें है, आज हम आपके लिए पेश करने जा रहे हैं “उम्मीद” पर कुछ बेहतरीन शेर ओ शायरी, इन अशआर को पढ़कर अपने मन को तरोताजा कीजिये, अगर आपके मन में भी कुछ उम्मीद पर शायरी हो तो उसे कमेंट् बॉक्स में लिखना न भूलें.

“होंसले” पर शायरी आप यहाँ पढ़ सकते हैं.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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दीवानगी हो अक़्ल हो उम्मीद हो कि आस

अपना वही है वक़्त पे जो काम आ गया !! -जिगर

 

उम्मीद ऐसी न थी महफिल के अर्बाब-ए-बसीरत से

गुनाह-ए-शम्मा को भी जुर्म-ए-परवाना बना देंगे

~क़लीम आजिज़

 

मैं वो ग़म-दोस्त हूँ जब कोई ताज़ा ग़म हुआ पैदा,

न निकला एक भी मेरे सिवा उम्मीद-वारों में !! -हैदर अली आतिश

 

एक रात आप ने उम्मीद पे क्या रक्खा है

आज तक हम ने चराग़ों को जला रक्खा है

 

नज़र में शोखि़याँ लब पर मुहब्बत का तराना है

मेरी उम्मीद की जद में अभी सारा जमाना है

 

तेरे जहान में ऐसा नहीं कि प्यार न हो,

जहाँ उम्मीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता !!

~NidaFazli

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

ख़्वाब-ओ-उम्मीद का हक़, आह का फ़रियाद का हक़,

तुझ पे वार आए हैं ये तेरे दिवाने क्या क्या !!

 

इतना भी ना-उम्मीद दिल-ए-कम-नज़र न हो

मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो

 

सरमाया-ए-उम्मीद है क्या पास हमारे

इक आह है सीने में सो न-उम्मीद असर से

 

कहने को लफ्ज दो हैं उम्मीद और हसरत,

लेकिन निहाँ इसी में दुनिया की दास्ताँ है

 

दरवेश इस उम्मीद में था,के कोई आँखें पढ़ लेगा,

भूल बैठा के अब ये ज़बान समझाता कौन है

 

दिल-ए-वीराँ में अरमानो की बस्ती तो बसाता हूँ,

मुझे उम्मीद है हर आरज़ू ग़म साथ लाएगी !! -जलील मानिकपुरी

 

मुतमइन हैं वो मुझे दे के उम्मीदों के चिराग़,

तिफ़्ल-ए-मक़तब हूँ, खिलौनों से बहल जाउँगा

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

 उम्मीद तो बाँध जाती तस्कीन तो हो जाती

वादा ना वफ़ा करते वादा तो किया होता

 

कुछ कह दो झूट ही कि तवक़्क़ो बंधी रहे

तोड़ो न आसरा दिल-ए-उम्मीद-वार का

 

नहीं है ना-उम्मीद इक़बाल अपनी किश्त-ए-वीरां से

ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बहुत ज़रखेज़ है साक़ी

 

उनकी आँखों से रखे क्या कोई उम्मीद-ए-करम

प्यास मिट जाये तो गर्दिश में वो जाम आते हैं

 

अब्र-ए-आवारा से मुझको है वफ़ा की उम्मीद

बर्क-ए-बेताब से शिकवा है के पाइंदा नहीं

 

अब के उम्मीद के शोले से भी आँखें न जलीं,

जाने किस मोड़ पे ले आई मोहब्बत हमको

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

 उम्मीद ऐसी तो ना थी महफ़िल के अर्बाब-ए-बसीरत से

गुनाह-ए-शम्मा को भी जुर्म-ए-परवाना बना देंगे

 

उम्मीद से कम चश्म-ए-खरीदार में आए

हम लोग ज़रा देर से बाजार में आए

 

खाक़-ए-उम्मीद में उंगलियाँ फिराते कोई चिंगारी ढूंढता हूँ

फिर कोई “ख्वाब” जलाना है कि रात रोशनी मांगती है

 

उठता हूँ उसकी बज़्म से जब होके ना उम्मीद

फिर फिर के देखता हूँ कोई अब पुकार ले।

 

उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थी

ग़म भी वो शायद बराए-मेहरबानी दे गया

 

तेरी उम्मीद तिरा इन्तज़ार कब से है,

ना शब् को दिन से शिकायत ना दिन को शब् से है।

~फैज़

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

उन की उल्फ़त का यकीं हो उन के आने की उम्मीद

हों ये दोनों सूरतें तब है बहार-ए-इंतज़ार

 

कभी बादल,कभी बारिश,कभी उम्मीद के झरने

तेरे अहसास ने छू कर मुझे क्या-क्या बना डाला

 

दश्त-ए-इम्कां में कभी शक़्ल-ए-चमन बन ही गयी,

इस उम्मीद-ए-ख़ाम पर हूँ आशियाँ-बर-दोश मैं !!

 

तुम भुला दो मुझे ये तुम्हारी अपनी हिम्मत है,

पर मुझसे तुम ये उम्मीद जिन्दगी भर मत रखना

 

उम्मीद वक्त का सबसे बड़ा सहारा है,

गर हौसला है तो हर मौज में किनारा है !!

 

दिल गवारा नहीं करता शिकस्ते-उम्मीद,

हर तगाफुल पै नवाजिश का गुमाँ होता है !!

 

रही ना ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी,

तो किस उम्मीद पे कहिये की आरज़ू क्या है।

~ग़ालिब

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

 उम्मीद-वार-ए-वादा-ए-दीदार मर चले,

आते ही आते यारों क़यामत को क्या हुआ।

~मीर

 

अबके गुज़रो उस गली से तो जरा ठहर जाना,

उस पीपल के साये में मेरी उम्मीद अब भी बैठी है।

 

दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है,

लंबी है गम की शाम मगर शाम ही तो है।

~फैज़

 

दिल सा दिल से दिल के पास रहे तू,

बस यही उम्मीद है के खास रहे तू।

 

यूँ ही तो कोई किसी से जुदा नहीं होता,

वफ़ा की उम्मीद ना हो तो कोई बेवफ़ा नहीं होता।

 

उम्मीद में बैठे हैं मंज़िल की राह में,

तू पुकारे तो हौंसलों को इलहाम मिले।

 

रही ना ताक़त-ए-गुफ्तार और अगर हो भी,

तो किस उम्मीद पे कहिए के आरज़ू क्या है !! –

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है

किसी का भी हो सर क़दमों में अच्छा नहीं लगता

 

चंद किरनें ले आया हूँ तेरे लिए,

है उम्मीद के तेरा दिन रोशन रहेगा।

 

उम्मीद का दामन बड़ा पैना है,

सुर्ख़ रंग हो गए हाथ मेरे।

 

उम्मीद का लिबास तार तार ही सही पर सी लेना चाहिए,

कौन जाने कब किस्मत माँग ले इसको सर छुपाने के लिए

 

जा लगेगी कश्ती-ए-दिल साहिल-ए-उम्मीद पर,

दीदा-ए-तर से अगर दरिया रवाँ हो जाएगा !! -मिर्ज़ा अंजुम

 

वो उम्मीद ना कर मुझसे जिसके मैं काबिल नहीं,

खुशियाँ मेरे नसीब में नहीं और यूँ बस दिल रखने के लिए मुस्कुरान भी वाज़िब नहीं

 

अभी उसके लौट आने की उम्मीद बाकी है,

किस तरह से मैं अपनी आँखें मूँद लूँ।

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

कहते हैं कि उम्मीद पे जीता है ज़माना

वो क्या करे जिसे कोई उम्मीद ही नहीं ..

 

बरखा की स्याह रात में उम्मीद की तरह

निर्भीक जुगनुओं का चमकना भी देखिये.!!

 

अपने सीने से लगाए हुए उम्मीद की लाश

मुद्दतों जीसत को नाशाद किया है मैंने!

 

अभी कुछ वक्त बाकी है अभी उम्मीद कायम है

कहीं से लौट आओ तुम मुह्ब्बत सासं लेती है

 

मुदतों से यही आलम है न तवकको न उम्मीद

दिल पुकारे ही चला जाता है जाना जाने!

 

उम्मीद की किरण के सिवा कुछ नहीं यहाँ

इस घर में रौशनी का बस यही इंतज़ाम है.!!

 

तपती रेत पे दौड़ रहा है दरिया की उम्मीद लिए

सदियों से इन्सान का अपने आपको छलना जारी है

 

न मंज़िल है न मंज़िल की है कोई दूर तक उम्मीद

ये किस रस्ते पे मुझको मेरा रहबर लेके आया है

 

Ummeed Shayari in Hindi उम्मीद पर शायरी

और दोस्ती जो चाहो,चले ता-उम्र

तो दोस्तों से कोई भी,उम्मीद ना रखें.!!

 

यहाँ रोटी नही “उम्मीद” सबको जिंदा रखती है

जो सड़कों पर भी सोते हैं ,सिरहाने ख्वाब रखते हैं

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Ummeed Shayari in Hindi

उम्मीद पर शायरी

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Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

Mahtaab Shayari in Hindi  माहताब पर शायरी
Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

Mahtaab Shayari in Hindi

माहताब पर शायरी

दोस्तों माहताब पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “माहताब” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “माहताब” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

 

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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ग़ालिब छुटी शराब पर अब भी कभी कभी

पीता हूँ रोज़-ए-अब्र-ओ-शब-ए-माहताब में

~ग़ालिब

 

आ गया था उनके होठों पर तबस्सुम ख्वाब में,

वर्ना इतनी दिलकशी कब थी शबे-माहताब में !!

 

बामे-मीना से माहताब उतरे,

दस्ते-साक़ी में आफ़्ताब आए

हर रगे-ख़ूँ में फिर चिराग़ाँ हो,

सामने फिर वो बेनक़ाब आए !! -फ़ैज़

 

झुका-झुका-सा है माहताब आरज़ूओं का

धुआँ-धुआँ हैं मुरादों की कहकशाँ यारों.!!

 

सफ़र ए माहताब हुआ तमाम अब तो

अश्क़ ए इन्तज़ार की रवानी बंद करो

 

भरे शहर में एक ही चेहरा था जिसे आज भी गलियां ढूँढती हैं

किसी सुबह उस की धूप हुई

किसी शाम वो ही माहताब हुआ ~मोहसिन_नक़वी

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

शब्-ए मिराज़ में उदास, माहताब क्यूँ है!

शमा बुझी-बुझी सी है ,जिगर में इन्कलाब क्यूँ है ..

 

चिराग-ऐ-बज़म ये फासला कीजिए….

बहकती गज़ल कोई कहिए….माहताब ये मेहरबां रौशन है..

 

फिर वही माँगे हुए लम्हे, फिर वही जाम-ए-शराब

फिर वही तारीक रातों में ख़याल-ए-माहताब ….

 

मेरी निगाहों ने ये कैसा ख्वाब देखा है

ज़मीं पे चलता हुआ माहताब देखा है

 

तेरा ख़याल दिलनशीं माहताब सा,

कहने को ज़िन्दगी ये आफ़ताब थी।

 

छा रही उफ़क़ पे सुर्खी की लकीरें..

हो रहे हैं रुख्सत,माहताब और सितारे

 

उसे पता था, कि तन्हा न रह सकूँगी मै

वो गुफ़्तगू के लिए, माहताब छोड़ गया

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

हम ख्वाहिश ए दीदार ए माहताब रखते हैं…..

आप हैं के रूख पे नकाब रखते हैं

 

इश्क़ के आग़ोश में बस इक दिले खाना खराब

हुस्न के पहलू में रुकता आफ़ताब-ओ-माहताब

 

तू माहताब सही अपने आसमान का

मैं भी सितारा हूं किसीके अरमान का

 

तू आफ़ताब सही तेरी राह का ए हमदम..

में छोटा सही मगर चिराग हु किसी की उम्मीदों का

 

अब क्या मिसाल दूँ, मैं तुम्हारे शबाब की ।

इन्सान बन गई है किरण माहताब की ।।

 

तुझे आफताब लिखूंगा,तुझे माहताब लिखूंगा

जो लिख सकूँगा,वो तेरी हर बात लिखूंगा

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

गुल हो, माहताब हो, आईना हो, खुर्शीद हो

अपना महबूब वही है जो अदा रखता हो

 

ज़मीन तेरी कशिश खींचती रही हमको

गए ज़रूर थे कुछ दूर माहताब के साथ ~शहरयार

 

आसमां को निहारते रातें बीत जाती हैं

भुखे को नजर आती रोटी माहताब मे

 

फिर वही माँगे हुए लम्हे, फिर वही जाम-ए-शराब

फिर वही तारीक रातों में ख़याल-ए-माहताब.. – अली सरदार जाफरी

 

मैं आफताब हूँ … अपनी ही आग से निखरता हूँ …….

तू माहताब है .. तुझे मेरी ज़रूरत है

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

वो आज भी मेरे तसव्वुर के माहताब हैं।

नादाँ बादल हूँ, उनपे छा नहीं पाता।।

 

साक़ी नज़र न आये तो गर्दन झुका के देख,

शीशे में माहताब है सच बोलता हूँ मैं।

 

मतला-ए-हस्ती की साज़िश देखते हम भी ‘शकील’।।

हम को जब नींद आ गई फिर माहताब आया तो क्या।। ~शकील बदायूँनी

 

उनका चेहरा कभी आफ़ताब लगा तो कभी माहताब

हम सितारा-ए-मायूस बने सफ़र करते रहे

 

खुशबू के ज़ज़िरों से तारों कि हद तक……

लब-ए लविश माहताब रहेने दो…

 

हिला-ए-ईद का मुँह चूमो इस के आने से

ज़मीं पे देखे कई माहताब ईद के दिन

 

बहार-ए-रंग-ओ-शबाब ही क्या सितारा ओ माहताब भी

तमाम हस्ती झुकी हुई है, जिधर वो नज़रें झुका रहे हैं

 

चाँदनी में न यूँ नकाब हटा, न खफ़ा माहताब हो जाए !

तेरी नज़रों का सुरूर ऐसे बढ़े, एक दिन बेहिसाब हो जाए !

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

शाम के नोक से हौले हौले रिस रही है रात..

माहताब के दीदार से आफ़ताब ठिठक गया..

 

गुल हुई जाती है अफ़सुर्दा सुलगती हुई शाम

धुल के निकलेगी अभी चश्म-ए-माहताब से रात

 

तेरी होंठों की पंखुडिया गुलाब लगती है

तेरी मोहक आँखे शराब लगती है

जिक्र करूँ क्या तेरी रूह की मुस्कान का

तेरी हर अदा माहताब लगती है

 

किस बला के हसीन नज़र आते हो मानिन्द-ए-माहताब नज़र आते हो,

है तूफ़ान शायद आने वाला तुम जो ख़ामोश नज़र आते हो।

 

हंसती हो तो बिखरती है शफ़्फ़ाक चांदनी

तुम चौदहवीं का खिलता हुआ माहताब हो

 

आज फिर माहताब को दिलकशी से मुस्कुराते देखा..

पड़ी जब किरणें आफताब की उनके रुखसार पर

 

शिददत से पलटना ज़िन्दगी के पन्ने इस किताब में अज़ाब और माहताब बहुत हैं।

यु ही नही कोई कहता इसे जिंदगी,इस के किस्से लाजवाब बहुत हैं

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

“चुन्नी में लिपटा छत पर माहताब आने को हैं!

हसरतों की गली में कोई ख्वाब आने को हैं!!”

 

करवटों के दाग़ लिए फ़ना ज़िस्म पर रूबरू हुए तो क्या,

कांधों का काफ़िया चल पड़ा है अब याद ओ माहताब में…

 

जहाँ ही जाने दिन कब होता है,रात कैसे होती है….

जब नज़रें उठीं उनकी आफताब जल उठे,जब पलकें झुकी माहताब चमक जाए

 

मौसम भी है, उम्र भी, शराब भी है; पहलू में वो रश्के-माहताब भी है;

दुनिया में अब और चाहिए क्या मुझको; साक़ी भी है, साज़ भी है, शराब भी है।

 

“उसके चेहरे में मिलता था माहताब मुझे,

मैंने देखा ही नहीं इसलिए आसमां कभी!!”

 

Mahtaab Shayari in Hindi माहताब पर शायरी

हर एक पुरा ख़्वाब नहीं होता

हर रात पुरा माहताब नहीं होता..

 

न इतना ज़ुल्म कर ऐ चाँदनी बहर-ए-ख़ुदा छुप जा

तुझे देखे से याद आता है मुझ को माहताब अपना ~नज़ीर अकबराबादी

 

हर एक रात को माहताब देखने के लिए

मैं जागता हूँ तेरे ख़्वाब देखने के लिए।

 

न आफताब सा बनना न माहताब मुझे

मैं एक लम्हा हूँ जुगनू सा चमक जाता हूँ

 

“मैंने माहताब की किरणों से बचाया था जिसे,

धूप ओढ़े हुए फिरता है वो बाज़ारों में!!”

 

“इन जागती आँखों में है ख्वाब क्या क्या,

बारिश, भीगे बदन, माहताब क्या क्या!!”

 

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Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

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Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

Aaftab Suraj Shayari

आफ़ताब-सूरज पर शायरी

दोस्तों आफ़ताब-सूरज पर शेर ओ शायरी का एक अच्छा संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “आफ़ताब-सूरज” के बारे में ज़ज्बात और ख़यालात जान सकेंगे. अगर आपके पास भी “आफ़ताब-सूरज” पर शायरी का कोई अच्छा शेर है तो उसे कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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न जाने कितने चिरागों को मिल गई शोहरत

इक आफताब के बे वक्त डूब जाने से।

 

माथे की तपिश जवाँ, बुलंद शोला-ए-आह,

आतिश-ए-आफ़ताब को हमने टकटकी से देखा है।

 

तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चिराग़

लोग क्या सादा हैं सूरज को दिखाते हैं चिराग़

~Faraz

 

इन अँधेरों से ही सूरज कभी निकलेगा “नज़ीर”

रात के साए ज़रा और निखर जाने दे

~नज़ीर बनारसी

 

मैं भटकती हूँ क्यूँ अंधेरे में

वो अगर आफताब जैसा है

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

तीरगी चाँद को ईनाम-ए-वफ़ा देती है,

रात-भर डूबते सूरज को सदा देती है !! -शमीम हनफ़ी

 

अब आ भी जा कि सुबह से पहले ही बुझ न जाऊं

ऐ मेरे आफताब बहोत तेज है हवा

 

तारीकियों में और चमकती है दिल की धूप,

सूरज तमाम रात यहां डूबता नहीं !! -बशीर बद्र

 

पसीने बाटंता फिरता है हर तरफ सूरज

कहीं जो हाथ लगा तो निचोड़ दूगां उसे।

 

चाँद सूरज मिरी चौखट पे कई सदियों से

रोज़ लिक्खे हुए चेहरे पे सवाल आते हैं

~rahatindori

 

हमें चराग समझ कर बुझा न पाओगे

हम अपने घर में कई आफ़ताब रखते हैं

~rahatindori

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए

तेरी सहर हो मेरा आफ़ताब हो जाए

~दुष्यंत कुमार

 

मैं ज़ख़्म-ए-आरज़ू हूँ, सरापा हूँ आफ़ताब

मेरी अदा-अदा में शुआयें हज़ार हैं

~shair

 

गिरती हुइ दीवार का हमदर्द हूँ लेकिन

चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता

~मुज़फ्फर वारसी

 

अपनी ताबीर के चक्कर में मेरा जागता हुआ ख्वाब

रोज सूरज की तरह धर से निकल पड़ता है।

 

फनकार है तो हाथ पे सूरज सजा के ला

बुछता हुआ दिया न मुकाबिल हवा के ला।

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

आये कुछ अब्र कुछ शराब आये,

उसके बाद आये तो अज़ाब आये,

बाम-इ-मिन्हा से महताब उतरे,

दस्त-ए-साक़ी में आफ़ताब आये।

काश होता मेरे हाथों में सूरज का निजाम

तेरे रस्ते में कभी धूप न आने देता।

 

मैं सूरज हूँ कोई मंज़र निराला छोड़ जाऊँगा,

उफ़क़ पर जाते जाते भी उजाला छोड़ जाऊंगा

 

घबराएँ हवादिस से क्या हम जीने के सहारे निकलेंगे

डूबेगा अगर ये सूरज भी तो चाँद सितारे निकलेंगे !!

 

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

मंद रौशनी है धुंधला सा आफ़ताब है,

ए सुबह। तू भी आज गम-ज़दा है क्या।

 

हर ज़र्रा आफ़ताब है, हर शय है बा-कमाल

निस्बत नही कमाल को शरहे कमाल से !! –

 

तेरे चेहरे के नूर से आफ़ताब भी चमकता है,

ए ज़िन्दगी। तू नहीं तो कुछ भी नहीं।

 

किसी दिन,तय है सूरज का ठिकाना ढ़ूँढ़ ही लेंगे,

उजालों की हमारे पास एक पुख्ता निशानी है

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

चलता रहा तू साथ मेरे,

कभी आफ़ताब बनके,

कभी महताब बन के।

 

आपकी नज़रों में आफताब की है जितनी अज़्मत

हम चिरागों का भी उतना ही अदब करते हैं

 

चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज,

हो जायेंगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं !!

 

तेरे जलवों में घिर गया आखिर,ज़र्रे को आफताब होना था

कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी,कुछ मुझे भी खराब होना था

 

चौदवी का चाँद हो, या आफताब हो,

जो भी हो तुम, खुदा की क़सम, लाजवाब हो!!

 

चमन में शब को जो शोख़ बेनक़ाब आया,

यक़ीन हो गया शबनम को आफ़ताब आया !!

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

तू है सूरज तुझे मालूम कहां रात का दुख

तू किसी रोज उतर घर में मेरे शाम के बाद!

 

कल भी सूरज निकलेगा

कल भी पंछी गायेंगे

सब तुझको दिखाई देंगे

पर हम ना नज़र आएंगे

आँचलमें संजो लेना हमको

सपनोंमें बुला लेना हमको

~नरेंद्र_शर्मा

 

उजाले के पुजारी मुज़्महिल क्यूँ हैं अँधेरे से,

के ये तारे निगलते हैं तो सूरज भी उगलते हैं.!!

 

वो डूबते हुए सूरज को देखता है फराज़

काश मैं भी किसी शाम का मंजर होता

 

कभी चाँद चमका ग़लत वक़्त पर

कभी घर में सूरज उगा देर से

-निदा फ़ाजली

 

रात के राही थक मत जाना

सुबह की मंजिल दूर नहीं

ढलता दिन मजबूर सही

ढलता सूरज मजबूर नहीं

-साहीर लुधियानवी

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

रौशनी की भी हिफाज़त है इबादत की तरह

बुझते सूरज से चरागों की जलाया जाए

 

सूरज कही भी जाये

तुम पर ना धूप आये

तुम को पुकारते हैं

इन गेसूओं के साये

आ जाओ मैं बना दू

पलकों का शामियाना

-कमाल अमरोही

 

थका-थका सूरज जब नदी से होकर निकलेगा..

हरी-हरी काई पे पांव पड़ा तो फिसेलगा..

-गुलज़ार

 

गज़ल का हुस्न हो तुम नज़्म का शबाब हो तुम

सदा ये साज़ हो तुम नगमा ये रबाब हो तुम

जो दिल में सुबह जगाये वो आफ़ताब हो तुम..

-साहीर लुधियानवी

 

नज़दीकियों में दूरका मंज़र तलाश कर

जो हाथमें नहीं है वो पत्थर तलाश कर

सूरज के इर्द-गिर्द भटकने से फ़ाएदा

दरिया हुआ है गुम तो समुंदर तलाश कर

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

 सूरज एक नटखट बालक सा

दिन भर शोर मचाए

इधर उधर चिड़ियों को बिखेरे

किरणों को छितराये

कलम,दरांती,बुरुश,हथोड़ा

जगह जगह फैलाये(1/1)

-निदा फ़ाज़ली

 

किरन-किरन अलसाता सूरज

पलक-पलक खुलती नींदें

धीमे-धीमे बिखर रहा है

ज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन ।

-निदा फ़ाजली

 

रात जब गहरी नींद में थी कल

एक ताज़ा सफ़ेद कैनवस पर,

आतिशी सुर्ख रंगों से,

मैंने रौशन किया था इक सूरज

-गुलज़ार

 

काले घर में सूरज रख के,

तुमने शायद सोचा था,मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे,

मैंने एक चिराग़ जला कर,

अपना रस्ता खोल लिया..!

-गुलज़ार

 

रात के पेड़ पे कल ही तो उसे देखा था..

चाँद बस गिरने ही वाला था फ़लक से पक कर

सूरज आया था,ज़रा उसकी तलाशी लेना

-गुलज़ार

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

कुछ ख़्वाबों के ख़त इनमें

कुछ चाँदके आईने सूरज की शुआएँ हैं

नज़मों के लिफाफ़ोंमें कुछ मेरे तजुर्बे हैं

कुछ मेरी दुआएँ हैं

गुलज़ार

 

कोई सूरज से ये पूछे के क्या महसूस होता है

बुलंदी से नशेबों में उतरने से ज़रा पहले

~शाद

 

तरस रहे हैं एक सहर को जाने कितनी सदियों से

वैसे तो हर रोज़ यहाँ सूरज का निकलना जारी है

~राजेश रेड्डी

 

मैं वो शजर भी कहाँ जो उलझ के सूरज से

मुसाफिरों के लिए साएबाँ बनाता है

~शाद

 

सारा दिन बैठा,मै हाथ में लेकर खाली कासा

रात जो गुजरी,चाँद की कौड़ी डाल गई उसमें

सूदखोर सूरज कल मुझसे ये भी ले जायेगा।

-गुलज़ार

 

आप को शब के अँधेरे से मोहब्बत है, रहे

चुन लिया सुबह के सूरज का उजाला मैंने.!!

 

ज़रा सी देर के लिये,जो आ गया मैं अब्र में

इधर ये शोर मच गया,के आफ़ताब ढल गया.!!

न जाने कितने चरागों को मिल गई शोहरत

एक आफ़ताब के बे-वक़्त डूब जाने से..!!

~इक़बाल अशहर

 

Aaftab Suraj Shayari आफ़ताब-सूरज पर शायरी

हम वो राही हैं लिये फिरते हैं सर पर सूरज।।

हम कभी पेड़ों से साया नहीं माँगा करते..!!

 

चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज।।

हो जाएँगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं..!!

 

अपना सूरज तो तुझे ख़ुद हि उगाना होगा।।

धूप और छाँव के इलहाक़ में क्या ढूँढता है

~मेराज

 

हम वो राही हैं लिये फिरते हैं सर पर सूरज।।

हम कभी पेड़ों से साया नहीं माँगा करते..!!

 

आप को शब के अँधेरे से मोहब्बत है, रहे।।

चुन लिया सुबह के सूरज का उजाला मैंने..!!

 

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Aaftab Suraj Shayari

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