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Hindi Kahani – चतुर मेंढक जो बहरा नहीं था!

Hindi Kahani - Frog in the well

Hindi Kahani – चतुर मेंढक जो बहरा नहीं था!

Hindi Kahani – The Deaf frog that wasn’t deaf in Hindi

हिंदी कहानी – चतुर मेंढक जो बहरा नहीं था!

एक बार कुछ मेंढक एक गहरे सूखे कुएं में गिर गए! उनमे से हर एक ने उस कुएं से निकलने की कोशिश की! पर जब भी कोई मेंढक ऊपर चढ़ने लगता तो बाकी सब मेंढक नीचे से जोर जोर से चिल्लाने लगते

“अरे! यह तुम क्या कर रहे हो?, क्यों अपनी जान गवाना चाहते हो!, यह तो असंभव है!, तुम कभी बाहर नहीं निकल पाओगे! कुएं के दीवार बहुत ऊँची और फिसलन भरी है, अगर तुम थोडा ऊपर चढ़ भी गए तो निचे गिरकर मर जाओगे! “

यह सब निराशावादी और नकारात्मक बातें सुनकर ऊपर चढ़ने वाला मेंढक हिम्मत हार जाता और नीचे गिर जाता! फिर मेंढको ने ऊपर चढ़ना ही छोड़ दिया, और वे सब उसी कुएं में रहने लगे, जहाँ पानी और खाने की बहुत कम मात्रा थी!

कुछ समय गुज़र गया, मेंढकों की दूसरी पीढ़ी में एक मेंढक पैदा हुआ! जब इस मेंढक ने कुएं से बाहर निकलने के बारे में पुछा, तो अन्य मेंढकों ने, असफलता की ढेरों कहानियां उसे सुना दी, और कहा की यह असंभव काम है! परन्तु इस नए जवान मेंढक को कुएं के अँधेरे और बुरी हालत से नफरत थी, इसलिए उसने फैसला कर लिया की चाहे में ऊपर चढ़ते हुए मर ही क्यों न जाऊं पर, अब में इस नारकीय हालत में नहीं रह सकता! कभी कभी कोई बुढा मेंढक उसे कुएं के ऊपर की रंगीन दुनिया, खुली हवा और पानी के बड़े तालाब की बातें बता दिया करता था, जिससे नए मेंढक की कुएं से निकलने की इच्छा और तेज़ हो जाती!

आखिरकार उसने सब मेंढकों को अपना फैसला सुना दिया और ऊपर चढ़ने लगा। जैसे जैसे वह ऊपर चढ़ता गया, उसकी आलोचना बढती गयी!

“यह तो पागल है!” “बेफकुफ़ है बेचारा जो इस असंभव काम को करना चाहता है” “जब बड़े बड़े ताकतवर इस दीवार पर नहीं चढ़ पाए तो यह पिद्दी क्या चढ़ेगा!” “चलो इसके अंतिम संस्कार की तैयारी करो”

पर तैयारी तो उस जवान मेंढक ने कर रखी थी, उसने कई दिनों तक कुएं की दीवार का अध्यन किया था और ऊपर चढ़ने का अभ्यास भी किया था! इसी की बदोलत वह ऊपर चढ़ता गया……….और आखिरकार वह ऊपर पहुँचने में कामयाब हो ही गया!!!

ऊपर पहुंचकर उसने अपने कानो में लगी पत्तियां निकाल दी! यह उसने इसलिए किया था, ताकि उसे दुसरे मेंढकों की, नकारात्मक और निराशाजनक बातें न सुनाई दें और उसका मनोबल न टूटे!

अपने मन की, और दुसरे लोगों द्वारा कही गयी नकारात्मक और निराशाजनक बातों पर ध्यान न दें, उन्हें अपने मन से तुरंत हटा दें और अपने लक्ष्य के बारे में सोचे।

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